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लड़के-लड़कियों के साथ पढ़ने से तालिबान खफा, पैसे की कमी बता बंद की यूनिवर्सिटी

                                                  पाकिस्तान ने तालिबान को रूढ़िवादी बताया
सत्ताधारी तालिबान ने अफगानिस्तान में विश्वविद्यालयों को बंद करने की घोषणा की है। इसके पीछे तालिबान ने लड़के और लड़कियों के एक साथ पढ़ने वाली सह-शिक्षा व्यवस्था और आर्थिक तंगी को प्रमुख कारण बताया है। तालिबान ने महिलाओं को बिना किसी नजदीकी रिश्तेदार को साथ लिए लंबी दूरी की यात्रा करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन फैसलों को लेकर पाकिस्तान ने तालिबान को रूढ़ीवादी और अपने मुल्क के लिए खतरा बता दिया है।

अफगानिस्तान के उच्च शिक्षा मंत्री अब्दुल बाकी हक्कानी ने रविवार (26 दिसंबर) को कहा कि विश्वविद्यालयों के बंद होने का कारण सह-शिक्षा और आर्थिक संकट है। उन्होंने कहा कि लड़कियों के लिए अलग कक्षाएँ बनानी होंगी और उनके लिए शिक्षकों को नियुक्त करना होगा। इसमें समय और पैसा दोनों की जरूरत है।

इसी साल 15 अगस्त को तालिबान ने अफगानिस्तान पर दोबारा कब्जा कर लिया था। मुल्क में सत्ता में आते ही तालिबान ने सह-शिक्षा पर प्रतिबंध लगा दिया था और कहा था कि लड़कियों को यूनिवर्सिटी में लड़कों के साथ क्लास में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 

इसके साथ ही तालिबान ने अफगानिस्तान की महिलाओं पर प्रतिबंधों को और कठोर करते हुए उन्हें अकेले बाहर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया। अपने आदेश में तालिबान ने कहा कि महिलाएँ अपने घर से अकेले बाहर भी नहीं निकल सकती। अगर उन्हें बाहर जाना है तो वे अपने किसी पुरुष रिश्तेदार के साथ बाहर जा सकेंगी। वहीं, गाड़ी मालिकों को सिर्फ हिजाब पहनने वाली महिलाओं को गाड़ी में बैठाने का आदेश दिया है। इसके अलावा, महिला पत्रकारों को भी हिजाब पहनना अनिवार्य कर दिया गया है।

महिलाओं के लिए इस तरह के आदेश जारी करने पर पाकिस्तान बिफर गया है। पाकिस्तान ने अब तालिबान को रूढ़िवादी सोच वाला और अपने लिए खतरा बताया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा, “हम अफगानिस्तान की आवाम की पूरी मदद करना चाहते हैं, लेकिन वो कह रहे हैं कि औरतें वहाँ अकेले सफर नहीं कर सकतीं, स्कूल नहीं जा सकतीं, कॉलेज नहीं जा सकतीं। तालिबान की इस तरह की पुरानी सोच पाकिस्तान के लिए खतरा है।”

चौधरी ने तालिबान पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि पाकिस्तान अतिवादी विचारों के खिलाफ है। भारत के बँटवारे के लिए जिम्मेदार मोहम्मद अली जिन्ना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिन्ना ने पाकिस्तान को इस्लामिक मुल्क बनाया, मजहबी मुल्क नहीं।

इतना ही नहीं, पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच सीमा विवाद उभर कर भी सामने आया है। पाकिस्तान द्वारा सीमा पर लगाए जा रहे कँटीले तारों की बाड़ को तालिबान लड़कों ने रोक दिया और तार को उठा कर लेते गए। इस दौरान तालिबान लड़ाकों ने पाकिस्तान के दो सैनिकों को गोली भी मार दी।

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तालिबान को सत्ता में लाने के लिए हर तरह की मदद करने वाला पाकिस्तान अब तालिबान को रूढ़िवादी बताते हुए उसे पाकिस्तान के लिए खतरा बता रहा है। वर्तमान हालातों को देखकर ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।