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कोई निकाला गया, कोई निकल गया, कांग्रेस अब 40 सीट बचाएगी दंगाइयों और मोदी की हत्या की धमकी देने वाले किसानों के भरोसे

 सुभाष चन्द्र

इतिहास साक्षी है, सनातन विरोधियों का कोई नामलेवा नहीं। मुग़ल आक्रांताओं का नाम सिर्फ उन ज़ालिमों के नाम पर अपनी रोजी-रोटी कमाने वालों की वजह से सिर्फ भारत में जिन्दा है, लेकिन गंभीरता से देखा जाए तो वह भी अपने पतन की ओर अग्रसर हो चुके हैं। जितना बुरा हाल भाजपा विरोधियों का अब हो रहा है, जिसे देख लगता है, एक/दो लोकसभा चुनावों के बाद लगभग शून्य होने को है। जहां तक कांग्रेस की बात है, इसका पतन तो उसी दिन से शुरू हो चुका था, जिस दिन अध्यक्ष सीताराम केसरी को बाहर पटक कर सोनिया गाँधी को अध्यक्ष बना दिया था।  

भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने असम में अपनी पार्टी के किसी भी विधायक से नहीं मिले थे। असम में उत्तरी करीमगंज से कांग्रेस विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ ने आरोप लगाया है कि असम में एक सप्ताह तक राहुल गाँधी उन पार्टियों से मिलते रहे, जिनका कोई जनाधार नहीं है। उधर, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राहुल गाँधी को तोहफा दिया है।

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पुरकायस्थ ने कहा, “यहाँ हमारे 24 विधायक हैं। वह (राहुल गाँधी) यहाँ 15 पार्टियों से मिले, जो कि INDI गठबंधन में शामिल हैं। इनकी अपनी कोई पहचान नहीं है और लोगों ने इनका नाम तक नहीं सुना है। अब ये पार्टियाँ 2-3 सीट माँग रही हैं। जब इनसे गठबंधन हुआ तब भूपेन बोरा (असम कांग्रेस के अध्यक्ष) ने हमसे कोई सलाह नहीं ली।”

पुरकायस्थ ने राहुल गाँधी को लेकर निराशा व्यक्त की और कहा, “राहुल गाँधी को यहाँ के 24 विधायकों के साथ कम-से-कम आधे घंटे तक बातचीत करनी चाहिए थी। वह यहाँ आठ दिनों तक थे। इस बीच उनकी विधायकों से कोई बातचीत नहीं हुई। आखिरी दिन भी उनकी बस में एक मीटिंग हुई और मुझे नहीं मालूम उसमें क्या बात हुई।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के कई विधायक मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के संपर्क में हैं।

लेकिन अब कांग्रेस में बड़ी तेजी से पतझड़ चल रहा है, जिसे देख लगता है कांग्रेस में केवल परिवारभक्त ही रहेंगे। प्रमोद कृष्णनम चले गए प्रधानमंत्री के पीछे क्योंकि उन्हें राम से कोई बैर नहीं था और इसलिए कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया अलबत्ता संसद में कांग्रेस ने कहा भगवान राम कण कण में हैं लेकिन यह बात सोनिया गांधी ने नहीं कही और फिर भी कृष्णम को निकाल दिया। उधर मराठा मिलिंद देवड़ा निकल गए और जाकर मिल गए एकनाथ शिंदे से और बाबा सिद्दीकी निकल कर जा मिले अजित पवार से।

महाराष्ट्र के एक दिग्गज अशोक चह्वाण 40 साल कांग्रेस की सेवा करने के बाद निकल कर भाजपा में मिल गया। उद्धव ठाकरे कह रहे हैं कि अशोक को लेकर भाजपा ने सैनिकों का अपमान किया है जबकि यही चह्वाण कल उद्धव का मंत्री था। तहसीन पूनावाला कह रहा है- उद्धव जी, संजय राउत की जुबान पर लगाम लगाइए जिसकी वजह से महाविकास अघाड़ी सरकार ख़त्म हुई थी। अभी खबरे निकल कर आ रही हैं कि कमलनाथ भी “हाथ” छोड़ कर अपने हाथ में “कमल” पकड़ेंगे विवेक तनखा के साथ।

कुछ दिन पहले एक तरफ तो ममता बनर्जी ने कांग्रेस को पूछ लिया था कि 40 सीट भी बचा सकते हो क्या और दूसरी तरफ खड़गे राज्यसभा में बोल गए NDA 400 पार और आज जिस तरह 5 बार रायबरेली से लोकसभा सांसद रह कर सोनिया गांधी भाग खड़ी हुई और राजस्थान से राज्यसभा के लिए नामांकन भर दिया, उसे देख कर साफ़ लगता है कांग्रेस मान चुकी है कि इस बार “40 पार” भी नहीं हो सकती।

अब कहा यह भी जा रहा है कि रायबरेली से दादी की नाक वाली “लड़की हूं लड़ सकती हूं” प्रियंका वाड्रा को खड़ा किया जाएगा। प्रमोद कृष्णम की माने तो प्रियंका पार्टी में अपमानित है और सोनिया का खुद रायबरेली से भागना प्रियंका को सीट देकर कहीं प्रियंका को “बलि की बकरी” बनाने की साजिश तो नहीं है क्योंकि जब माँ ही नहीं जीत सकती तो बेटी की क्या औकात जीतने की।

कांग्रेस का अब बस भरोसा है तो केवल मुस्लिम वोटरों पर है जिनके दम पर हल्द्वानी को आग लगाईं गई और ऐसा देश के अन्य हिस्सों में भी किया जाएगा। दूसरा भरोसा है आतंकी धमकी देने वाले कथित किसानों पर जो खुलकर कह रहे हैं कि अबकी मोदी पंजाब आया तो जिंदा वापस नहीं जाएगा। कांग्रेस और केजरीवाल को ऐसे ही लोगों का सहारा है। ये धमकी देने वाले पंजाब के हैं जहां भगवंत मान बैठा है। पहले चन्नी मोदी के लिए महामृत्युंजय जाप कराने की बात करता था और अब केजरीवाल का मान तो गरुण पाठ ही कराने के चक्कर में है मोदी के लिए।

कांग्रेस को रोज ऐसे सदमें मिल रहे हैं जो बर्दाश्त नहीं हो रहे। पहले श्री राममंदिर से परेशानी हुई और फिर उम्मीद से थे कि क़तर वाले 8 पूर्व सैनिक फंसे रहेंगे लेकिन वो सभी छूट गए। कल तक सारे कांग्रेसी और उसके दलाल पत्रकार मोदी को कोस रहे थे लेकिन आज सजा माफ़ी पर ख़ुशी तो जता रहे हैं लेकिन मोदी सरकार को श्रेय नहीं दे रहे।

और आज इस्लामिक देश UAE में मोदी ने हिन्दू मंदिर का उद्घाटन कर दिया। अभी 19 को कल्कि धाम का भी उद्घाटन करना है।

बिहार हाथ से निकल गया और कल तक हिन्दुओं को गाली बकने वाला स्वामी प्रसाद मौर्य का अब सपा से मोह भंग हो रहा है क्योंकि उसे लगता है भेदभाव हो रहा है। महासचिव पद छोड़ा है अभी, कल पार्टी छोड़ेगा और घुसेगा बसपा में क्योंकि ऐसे लोगों के ठिकाने बड़े limited होते हैं।लेकिन सनातन पर कटाक्ष करने के कारण मायावती भी शायद घास न डाले।  

कुल मिला कर भगदड़ मची हुई है और यह तमाशा देख कर कांग्रेस देश भर में कुछ भी गड़बड़ कर सकती है जिसके लिए विशेषज्ञ राहुल “कालनेमि” बैठा है। 

दिल्ली : जिन्हें ‘रैट माइनर्स’ बता कर मिले अरविंद केजरीवाल और लूटी वाहवाही, सभी निकले फर्जी: 41 मजदूरों की जान बचाने वालों ने कहा – हमें खुद सोशल मीडिया से पता चला

              अरविंद केजरीवाल असली वाले रैट माइनर्स से मिले ही नहीं, खुली पोल (फोटो साभार: जागरण)
अपने आपको सुर्ख़ियों में बनाये रखने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और सत्ताधारी पार्टी ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) किसी हद तक जा सकते हैं और झूठ बोलने में न इन्हे कोई शर्म और न ही इनकी पार्टी को। इस माह(दिसम्बर) की शुरुआत में इस बात का दावा किया था कि अरविंद केजरीवाल ने सिल्क्यारा सुरंग हादसे में फँसे 41 मजदूरों को निकालने वाले रैट माइनर्स से मुलाकात की है। अब इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि सुरंग हादसे में फँस लोगों के लिए जिन 12 रैट माइनर्स ने मेहनत की थी, उन्होंने कहा है कि अरविंद केजरीवाल ने उनमें से एक से भी मुलाकात नहीं की है। उनका दावा फर्जी है। रैट माइनर वकील हसन ने तो अरविंद केजरीवाल के सभी दावों चाहें वो राजनीतिक हो या सरकारी काम के, सभी पर संदेह की उंगली उठा दी और कहा कि अब उन्हें अरविंद केजरीवाल के किसी काम पर भरोसा नहीं है।

आजतक से बातचीत में वकील हसन ने कहा, “हम में से किसी भी व्यक्ति से अरविंद केजरीवाल ने मुलाकात नहीं की है।” खजूरी खास इलाके में रहने वाले वकील हसन ने अरविंद केजरीवाल से बेहतर हमारे स्थानीय सांसद मनोज तिवारी जी ने दूसरे ही दिन हम सबसे मुलाकात की थी और हमारा हौसला बढ़ाया था।

वकील हसन ने कहा कि सबसे पहले मैंने सोशल मीडिया पर अरविंद केजरीवाल के रैट माइनर्स से मिलने की खबर देखी, हमें लगा कि ये कोई फेक न्यूज होगी। फिर ये खबर हर तरफ फैलने लगी, जो कि पूरी तरह से गलत थी। हमसे न तो दिल्ली जलबोर्ड और न ही अरविंद केजरीवाल के किसी भी व्यक्ति ने मुलाकात की। मैं इस बात से आहत हूंँ।

वकील हसन से जब ये कहा गया कि उन्होंने उत्तराखण्ड सरकार की ओर से घोषित किए गए 50 हजार की राशि को क्यों ठुकराया? उन्होंने कहा कि अंदर फँसे लोगों को 1-1 लाख दिए गए, हमें 50 हजार ही क्यों? इस मामले में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हमसे कहा कि वो जल्द ही कोई अच्छा समाधान निकालेंगे।

"हम में से कोई भी व्यक्ति उनसे (अरविंद केजरीवाल) नहीं मिला.."-वकील हसन, रैट माइनर

रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली के रैट माइनर्स से CM केजरीवाल ने की थी मुलाकात, लेकिन रैट माइनर्स का दावा है कि वे असली रैट माइनर्स नहीं हैं जिनसे उन्होंने मुलाकात की.#ReporterDiary (@AnmolBali9) pic.twitter.com/YOV5WCPfoe

— AajTak (@aajtak) December 25, 2023

1 दिसंबर, 2023 को दिल्ली की मंत्री आतिशी ने कहा था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उत्तराखण्ड के सिल्क्यारा टनल मामले में 41 मजदूरों की जान बचाने वाले रैट माइनर्स से मुलाकात की है। उन्होंने बताया था कि इस दौरान सीएम केजरीवाल ने रैट-होल माइनर्स की टीम को सम्मानित भी किया। उन्होंने दिल्ली और देश के लोगों की तरफ से पूरी टीम को धन्यवाद कहा। रैट-होल माइनर्स की टीम ने इस मौके पर सुरंग हादसे में फंसे मजदूरों को किस तरह निकाला गया, इसका पूरा वाकया सुनाया। हालाँकि अब इस दावे को ओरिजिनल रैट माइनर्स ने खारिज कर दिया है।