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मुश्किल में ममता: पश्चिम बंगाल में ना रेप रुक रहे और ना ही डॉक्टरों पर हमले, इससे जनता में भी आक्रोश


पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अड़ियल रवैये और लापरवाही के चलते उनकी मुश्किल बढ़ती ही जा रही हैं। संदेशखाली और कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटनाओं से सरकार ने कोई सबक नहीं लिया। ना ही महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाए। इसी का दुष्परिणाम है कि एक ओर कोलकाता रेप कांड देशभर में छाया हुआ है, इसके बावजूद पश्चिम बंगाल से आए दिन महिलाओं के उत्पीड़न, यौन शोषण और दुष्कर्म की घटनाएं सामने आ रही हैं। आरजी कर मेडिकल कॉलेज के मामले में सरकार की जिद के चलते जूनियर डाक्टर कई दिन तक के लिए हड़ताल पर जाने को मजबूर हुए है। मरीजों को हो रही परेशानी को देखते हुए डॉक्टर इस शर्त के साथ काम पर वापस आए थे कि सरकार उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करेगी। लेकिन ममता सरकार की लापरवाह कार्यशैली जारी रही और उत्तर 24 परगना के सागोर दत्ता एमसीएच में कुछ लोगों ने डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों पर हमले की घटना को अंजाम दे दिया। इसके बाद पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पतालों के हजारों जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल पर जाने की चेतावनी दे डाली है। इस बीच सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में आरजी कर मेडिकल कालेज मामले में सुनवाई हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सोते समय हमला हुआ, तो उसने चश्मा कैसे पहना हुआ था?
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए डॉक्टर रेप-मर्डर केस की सुनवाई की। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ”हमने रिपोर्ट देखी है और इसमें कुछ अहम सुराग मिले हैं। इस मामले में सीबीआई जांच जारी रहेगी। पहले बलात्कार और हत्या के मामले में और दूसरे वित्तीय अनियमितताओं के मामले में। उन्होंने कहा कि चोट के निशानों से पता चलता है कि पीड़िता ने वारदात के वक्त चश्मा पहना हुआ था। यदि उस पर सोते समय हमला हुआ, तो फिर उसने चश्मा कैसे पहना हुआ था?

ममता सरकार को फटकार मिली, 15 अक्तूबर तक काम पूरा करने के निर्देश
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ”सीबीआई ने 30 सितंबर को चौथी स्टेट्स रिपोर्ट पेश की है। इसमें जांच में उठाए गए कदमों और सुरागों का ब्यौरा दिया गया है। सीबीआई रेप-मर्डर केस के साथ वित्तीय अनियमितताओं की जांच भी कर रही है। इन दोनों के बीच क्या संबंध है, ये सीबीआई द्वारा जांच का विषय है। इस केस से जुड़े कई लोग अपने पदों पर बने हुए हैं. ऐसे लोगों को या तो निलंबित किया जाना चाहिए या छुट्टी पर जाने का निर्देश दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि सीसीटीवी लगाने, शौचालय और अलग रेस्ट रूम बनाने आदि का काम वह बहुत धीरे-धीरे कर रही है। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को 15 अक्तूबर तक काम पूरा करने निर्देश दिए हैं। इससे पहले कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज कुमार वर्मा ने भी रविवार को आरजी कर एमसीएच का दौरा किया। यह दौरे को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से जोड़कर देखा जा रहा है।

उत्तर 24 परगना के सागोर दत्ता एमसीएच में फिर डॉक्टर पर हमले से रोष
दूसरी ओर आरजी कर एमसीएच में महिला रेजिडेंट डॉक्टर के साथ ड्यूटी के दौरान हुए बलात्कार और हत्या के विरोध में 42 दिनों के आंदोलन के बाद जूनियर डॉक्टरों ने 21 सितंबर को आंशिक रूप से अपनी हड़ताल वापस ले ली थी। राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारियों को ड्यूटी के दौरान डॉक्टरों को सुरक्षा देने का आश्वासन दिया था। लेकिन उत्तर 24 परगना के सागोर दत्ता एमसीएच में भर्ती एक महिला की मौत के बाद उसके परिजनों ने डॉक्टरों और अन्य अस्पताल कर्मचारियों पर हमला बोल दिया। हमले के बाद अस्पताल के मेडिकल स्टाफ हड़ताल पर चले गए।

आरजी कर एमसीएच में बलात्कार और हत्या के बाद कुछ नहीं बदला
बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट के प्रतिनिधियों ने कहा कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो पूरे पश्चिम बंगाल के जूनियर डॉक्टर फिर से हड़ताल पर चले जाएंगे। एक प्रतिनिधि ने कहा, “हम सरकार को कुछ समय देना चाहते हैं। अगर स्थिति में बदलाव नहीं हुआ तो हम सोमवार शाम से फिर से पूर्ण कामबंदी शुरू कर देंगे।” जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि 9 अगस्त को आरजी कर एमसीएच में डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के बाद ज्यादा कुछ नहीं बदला है। जूनियर डॉक्टरों ने राज्य के मुख्य सचिव मनोज पंत को एक ईमेल भेजा, जिसमें उन्होंने अपनी उन मांगों को दोहराया है, जिन्हें राज्य सरकार ने अभी तक पूरा नहीं किया है। दो पन्नों के पत्र में, पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फोरम के प्रतिनिधियों ने 18 सितंबर को राज्य सचिवालय में अपनी बैठक का हवाला दिया है।

बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर के खिलाफ लगे ‘वापस जाओ’ के नारे
एक अन्य घटनाक्रम में, पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार को सागोर दत्ता एमसीएच में आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों के ‘वापस जाओ’ के नारे का सामना करना पड़ा। दरअसल, संदेशखाली और आरजी कर मेडिकल कालेज मामले में कांग्रेस नेताओं के रवैये डॉक्टरों में रोष है। भाजपा जहां एक ओर डॉक्टरों का खुलकर समर्थन कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस हीलाहवाली का रवैया अख्तियार किए हुए है। इसलिए जूनियर डाक्टरों ने पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार को वापस जाओ नारे के साथ वापस ही भेज दिया। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों में से एक ने हाथ जोड़कर राज्य कांग्रेस अध्यक्ष से कहा कि वे वहाँ से चले जाएँ।

तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर ने बयान पर फिर बवाल
ऐसे समय में जब डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं, तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर ने बहरामपुर में मुर्शिदाबाद एमसीएच के प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों का घेराव करने के लिए 10,000 लोगों को ले जाने की धमकी देकर विवाद खड़ा कर दिया है। कबीर ने कहा, “वे वातानुकूलित कमरों में आंदोलन और विरोध करते हैं जबकि आम जनता सड़कों पर कष्ट झेलती है। मुझे पता चला है कि इस महीने की शुरुआत में काम बंद करने वाले जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ मेरी पिछली टिप्पणियों के लिए मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।” कुछ दिन पहले विधायक ने कहा था कि अगर डॉक्टर हड़ताल पर रहे तो उन्हें बड़े पैमाने पर विरोध का सामना करना पड़ेगा।

ममता सरकार के खिलाफ 2 अक्टूबर को सामूहिक रैली निकालने का भी ऐलान
इस बीच कोलकाता में जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट ने आरजी कर और सागर दत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल घटना के लिए न्याय की मांग को लेकर आरजी कर अस्पताल से श्यामबाजार तक मशाल रैली भी निकाली। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी मांगों के अनुसार मुख्य सचिव की ओर से दिए गए निर्देशों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। डाक्टरों का ये भी कहना है कि राज्य सरकार वादे के बावजूद उन्हें सुरक्षा देने में विफल रही है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर अनिकेत महतो ने कहा, ‘अस्पतालों में हमारी सुरक्षा और संरक्षा के बारे में मुख्य सचिव से मिले हुए 10 दिन हो चुके हैं, लेकिन हमारी मांगों के अनुसार मुख्य सचिव की ओर से दिए गए निर्देशों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। हमें सागर दत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भी ऐसी ही एक और घटना देखने को मिली। अगर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में हमें कुछ सकारात्मक मिलता है, तो हम इस पर पुनर्विचार करेंगे, अन्यथा हम पूरी तरह से बंद की अपील करेंगे। सरकार के खिलाफ हम 2 अक्टूबर को एक सामूहिक रैली भी निकालेंगे।

सीएम और मुख्य सचिव के साथ हमारी सभी बैठकें बेकार गईं
आरजी कर कॉलेज की डॉक्टर श्रेया शॉ के मुताबिक विरोध प्रदर्शन की शुरुआत से ही हमारी मांगें एक जैसी हैं। पांच मांगें हैं जो अब तक पूरी नहीं हुई हैं। हमने यह सोचकर अपनी ड्यूटी जॉइन की कि हमारे मरीजों को हमारी जरूरत है, लेकिन इस दौरान सागर दत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भी ऐसी ही एक और घटना घट गई। सीएम और सरकार के साथ हमारी सभी बैठकें बेकार गईं। हम बस इतना कहना चाहते हैं कि सुरक्षा नहीं तो ड्यूटी नहीं। हमारी नजर सुप्रीम कोर्ट की हर सुनवाई पर है और हमें दबाव बनाए रखना है। हमें भरोसा है कि सीजेआई ऐसा फैसला सुनाएंगे जिससे हमें न्याय मिलेगा। हम जल्द से जल्द न्याय चाहते हैं।

कोलकाता रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट में कब-कब सुनवाई में क्या कहा

  • देश की सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में खुद संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। इस मामले में 13 अगस्त को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मामले की जांच कोलकाता पुलिस से सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया, जिसने 14 अगस्त को अपनी जांच शुरू की।
  • इस मामले में सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट में 20 अगस्त को भी सुनवाई हुई थी। 22 अगस्त को अदालत ने अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार महिला डॉक्टर की अप्राकृतिक मौत को दर्ज करने में देरी को लेकर कोलकाता पुलिस को फटकार लगाई थी।
  • 9 सितंबर को, शीर्ष अदालत ने कोलकाता के आर जी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार जूनियर डॉक्टर के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने वाले एक महत्वपूर्ण दस्तावेज चालान के उसके समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड से गायब होने पर चिंता व्यक्त की थी और पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट मांगी थी।
  • सुप्रीम अदालत ने 17 सितंबर को कहा था कि वह बलात्कार-हत्या मामले में सीबीआई की तरफ से दायर स्थिति रिपोर्ट में दिए गए निष्कर्षों से परेशान है, लेकिन उसने विवरण का खुलासा करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कोई भी खुलासा चल रही जांच को खतरे में डाल सकता है।
कोलकाता रेप कांड में अभी जांच चल ही रही है कि वेस्ट बंगाल से एक के बाद एक कई और हैवानियत के मामले सामने आ रहे हैं।
1.हुगली
पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में एक 15 वर्षीय लड़की का रेप कर आरोपियों ने उसे सड़क किनारे फेंक दिया। वेस्ट बंगाल की इस घटना ने प्रदेश में लड़कियों की सुरक्षा पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लड़की सड़क पर बेहोशी की हालत में मिली। लड़की के सारे कपड़े फटे हुए थे। मीडिया रिपोर्ट बताती है कि जब लड़की ट्यूशन पढ़कर वापस घर लौट रही थी, तब उसे रास्ते में अगवा कर लिया गया। कथित रूप से आरोपी उसे अगवा कर एक कार में ले गए और रेप करने के बाद हरिपाल इलाके में बेहोशी की हालात में फेंक गए।
2. बीरभूम
यहां के लांबाबाजार स्वास्थ्य केंद्र में एक नर्स के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। आरोप है कि शेख अब्बासुद्दीन नामक व्यक्ति ने रात की ड्यूटी के दौरान उसके नर्स के प्राइवेट अंगों को जबरदस्ती टच किया।
3. नादिया
नादिया के कृष्णगंज के भजनघाट में एक किशोरी के साथ हवस के दरिंदे ने दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। इस केस में पीड़िता का कहना है कि जब वह सामान लेकर घर लौट रही थी तब पड़ोसी ने उसे बगीचे में खींचकर उससे रेप किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी।
4. मध्यमग्राम
मध्यमग्राम में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई। यहां टीएमसी पंचायत सदस्य पर दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग के साथ बलात्कार करने का आरोप लगा है। इस से इलाके में तनाव का माहौल है।
5. हावड़ा सदर
एक ओर कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर से रेप के पर बवाल थमा नहीं है, दूसरी ओर हावड़ा सदर अस्पताल के सीटी स्कैनर रूम में शनिवार रात एक लड़की के साथ यौन शोषण का मामला सामने आ गया है।

‘हिन्दू मंदिरों में लूटी जाती है बहन-बेटियों की इज्जत, होती है हत्या’: केजरीवाल के विधायक ने फिर उगला ज़हर, भड़काते हुए कहा – वहाँ जाना बंद करो

अरविंद केजरीवाल के विधायक राजेंद्र पाल गौतम ने हिन्दू मंदिरों पर उगला ज़हर
मुफ्त रेवड़ियों के लालच में 'हनुमान भक्त' अरविन्द केजरीवाल पार्टी की पार्टी को वोट देने वाले हिन्दुओं शर्म करो , देखों  इसका विधायक किस तरह मंदिरों जाने वालों के खिलाफ जहर उगल रहा है, और पार्टी खामोश है। अभी 5 राज्यों में हुए चुनावों में देखा कि पांचों राज्यों ने मुफ्त की रेवड़ियों को ठोकर मार दी। NOTA से भी कम वोट मिले, यानि लोगों ने घास तक नहीं डाली। इसका मतलब साफ है कि जलसे और जुलुस में जो भीड़ देखी, सब पैसे देकर लाए हुए थे। पार्टी समर्थक नहीं। दूसरे, NOTA से भी कम वोट मिलने का यह भी अर्थ निकाला जा सकता है कि स्वयं पार्टी उम्मीदवार और उसके परिवार ने भी वोट नहीं दिया। 

‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ के विधायक और दिल्ली सरकार में मंत्री रहे राजेन्द्र पाल गौतम ने हिन्दू धर्म और हिन्दू मंदिरों के विरुद्ध एक बार फिर जहर उगला है। राजेन्द्र पाल का कहना है कि मंदिरों में जाने पर लोगों की हत्या होती है और बहन बेटियों की इज्जत लूटी जाती है। उनका यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है।

दिल्ली सीमापुरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक राजेन्द्र पाल गौतम इस वीडियो में कहते हुए दिखते हैं, “आप ऐसी चीजों में भरोसा मत करो जो आपको नुकसान पहुँचाती हो। आप एक बात बताइए, अगर कहीं मंदिर में जाने से हमारे लोगों की हत्या होती हो, अगर मूर्ति छू लेने से हमारे युवाओं की हत्या हो गई हो, तो आप ऐसी जगह क्यों जाते हो जहाँ आपका अपमान हो।”

आगे राजेन्द्र पाल गौतम इस वीडियो में आगे कहते हैं, “जहाँ आपकी बहन-बेटी की इज्जत लूटी जाए, जहाँ आपका क़त्ल कर दिया जाए, जहाँ अपमान हो वहाँ जाना बंद कर दो।” अब राजेंद्र गौतम के लगभग 30 सेकंड इस वीडियो पर प्रश्न उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, यह वीडियो हरियाणा के सोनीपत जिले का है जहाँ वह लहराड़ा गाँव में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने इस प्रश्न उठाया है कि आखिर खुद को कट्टर हनुमान भक्त बताने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल राजेन्द्र पाल गौतम को अपनी पार्टी से निष्कासित क्यों नहीं कर रहे हैं जो कि लगातार हिन्दुओं के खिलाफ जहर उगलते आए हैं।

हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है कि राजेन्द्र पाल गौतम ने हिन्दू धर्म पर विवादित बयान दिया हो या हिन्दू धर्म का अपमान किया हो। इससे पहले वह कई मौकों पर ऐसा ही कर चुके हैं। अक्टूबर 2022 में एक हिन्दू विरोधी कार्यक्रम में शामिल होने के कारण उन्हें दिल्ली सरकार के मंत्री पद से भी हाथ धोना पड़ा था।

अक्टूबर 2022 में AAP नेता ने झंडेवालान में आयोजित जिस कार्यक्रम में शामिल हुए थे उसमें 10,000 हिंदुओं का धर्मांतणरण हुआ था। शपथ में कहते सुना गया था – “मैं इस बात को नहीं मानता और न ही मानूँगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे। मैं इसे केवल पागलपन और झूठा प्रचार मानता हूँ। मैं श्राद्ध नहीं करूँगा और न ही पिंडदान करूँगा।”

भगवा वस्त्र पहने हुए व्यक्ति ने इस शपथ को दिलाते हुए कहा था, “मैं ब्राह्मणों द्वारा किसी भी समारोह को करने की अनुमति नहीं दूँगा। मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूँ, जो मानवता के लिए हानिकारक और उनके विकास में बाधक है, क्योंकि यह असमानता पर आधारित है। मैं बौद्ध धर्म को अपना धर्म स्वीकार करता हूँ।”

कार्यक्रम के दौरान, AAP के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम इन विवादास्पद लाइनों को दोहराते हुए और उस व्यक्ति के साथ मंच साझा करते हुए दिखाई दिए थे। उनके इस वीडियो के कारण केजरीवाल को गुजरात में काफी विरोध झेलना पड़ा था। राजेन्द्र पाल गौतम ने इसके पश्चात इस्तीफ़ा दिया था।

नवम्बर 2022 में राजेन्द्र पाल गौतम ने भारत में हिन्दुओं को अल्पसंख्यक बनाने को लेकर भी बयान दिया था। प्रोपेगंडा पोर्टल ‘द वायर’ की एंकर आरफा खान शेरवानी के साथ के इंटरव्यू में राजेन्द्र पाल ने कहा था, “इस देश के 110 करोड़ लोग अनुसूचित जाति/जनजाति समाज से हैं, वो सभी 5-6 वर्षों में बौद्ध धर्म अपना लेंगे। उसके बाद देखते हैं कि कौन बहुसंख्यक होता है।”

जनवरी 2023 में एक कार्यक्रम में राजेन्द्र पाल ने श्रीरामचरितमानस पर भी विवादित बयान दिया था। इसका वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में वह कहते हुए दिखते हैं, “क्या रामचरितमानस में नहीं लिखा है ‘ढोल गँवार शूद्र पशु नारी ये सब ताड़न के अधिकारी।’ वो व्याख्या कर रहे हैं कि ताड़न का मतलब देखना है, जबकि क्लीयर है कि ताड़न का मतलब पीटना। यदि इसका मतलब देखना ही है तो क्या नारी को घूरना चाहिए? क्या पीटना चाहिए? आपके धर्मशास्त्र हमें इंसान का दर्जा देने को तैयार नहीं है।”

राजेन्द्र पाल गौतम लगातार ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेते रहे हैं जहाँ हिन्दू धर्म, मंदिरों और ग्रन्थों के विरुद्ध अपमानजनक बातें की जाती हैं। अब मंदिरों में बलात्कार और हत्या वाले वीडियो को लेकर भी प्रश्न उठ रहे हैं लेकिन आम आदमी पार्टी के मुखिया केजरीवाल या पार्टी की तरफ से कोई स्पष्टीकरण नहीं सामने आया है। राजेन्द्र पाल गौतम ने भी अब तक इस बयान पर माफ़ी नहीं माँगी है।