Showing posts with label #Controversial Statement. Show all posts
Showing posts with label #Controversial Statement. Show all posts

राम मंदिर में बुलडोजर क्यों नहीं चला? अब डिंपल यादव ने उगला जहर; मुलायम परिवार की आँखों में खटक रहा राम मंदिर, ससुर ने कारसेवकों का कराया नरसंहार-पति ने चंदाचोरी पर फैलाई नफरत


अपने मुस्लिम वोटबैंक को खुश करने अयोध्या में राममन्दिर का समाजवादी पार्टी शुरू से विरोध करती रही है। इतना ही नहीं मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में रहने वाले हिन्दू 11 बजे के बाद होली तक नहीं खेल सकते थे। 84 कोसी परिक्रमा पर पाबन्दी आदि आदि इतना सबकुछ होने के बाद भी समझ में नहीं आता हिन्दू क्यों समाजवादी पार्टी को वोट देता है? समाजवादी पार्टी में जितने भी हिन्दू हैं क्या वह कालनेमि हिन्दू हैं? यदि नहीं तो खुलकर डिम्पल ने जो राममन्दिर के विरुद्ध जहर उगला है उसका विरोध करो। अगर दुर्भाग्यवश उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बन गयी PDA यानि Phir Darayega Ali हरकत में आ जाएगा।   

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव इन दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा सुधार और नीट (NEET) पेपर लीक के मुद्दे को लेकर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरी हुई हैं। जंतर-मंतर पहुँचकर डिंपल यादव ने वांगचुक का समर्थन तो किया, लेकिन इस दौरान मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी मामले को लेकर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर तीखा हमला बोला। डिंपल यादव ने राम मंदिर और बुलडोजर कार्रवाई को लेकर एक ऐसा विवादित बयान दे दिया है, जिसने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक की सियासत में भूचाल ला दिया है।

राम मंदिर पर डिंपल का ‘बुलडोजर’ राग और पुराना इतिहास

डिंपल यादव ने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि देश में इस समय ‘बुलडोजर सरकार’ चल रही है, जो छात्रों के भविष्य पर बुलडोजर चला रही है। उन्होंने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी मामले का जिक्र करते हुए सवाल उठाया। डिंपल ने कहा, “जब राम मंदिर में इतनी बड़ी चोरी हो गई तो वहाँ पर बुलडोजर थक गया है। तो आखिर बुलडोजर क्यों थम गया, सवाल इस बात का है।”

इस बयान के बाद अब डिंपल यादव खुद चौतरफा घिर गई हैं। आलोचक और राजनीतिक विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि क्या एक कर्मचारी पर लगे कथित चोरी के आरोप के आधार पर पवित्र राम मंदिर की तुलना किसी अवैध निर्माण से करना जरा भी उचित है? इतिहास गवाह है कि मुलायम सिंह यादव के समय में अयोध्या में कारसेवकों पर गोलियाँ चलवाई गई थीं, जिसे लोग नरसंहार तक कहते हैं।

इसके बाद अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चंदे को लेकर बयानबाजी की थी। अब डिंपल यादव के इस बयान के बाद लोग पूछ रहे हैं कि क्या डिंपल भी राम मंदिर पर बुलडोजर चलवाकर वहाँ पुराना बाबरी ढांचा वापस देखना चाहती हैं? पूरा यादव परिवार ही राम विद्रोही बनकर सामने आ रहा है।

अखिलेश का पुराना बयान और पूरा परिवार घेरे में

अखिलेश यादव ने भी पहले राम मंदिर के संदर्भ में एक बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि हमें सांचा नहीं, बल्कि ‘ढांचा बदलना’ होगा। उनके इस पुराने बयान को डिंपल यादव के ताजा बयान से जोड़कर देखा जा रहा है। देश जानता है कि पूरा मुलायम परिवार शुरू से ही राम विरोधी रहा है और डिंपल का यह बयान उसी सोच को आगे बढ़ाता है। अब जंतर-मंतर के बहाने इनके अंदर की कड़वाहट भी बाहर आ रही है। मुद्दा पेपर लीक मामले का है, लेकिन निशाना राम मंदिर पर आकर रूक जाता है।

अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर का निर्माण होने के बाद से ही यह मंदिर मुलायम परिवार की आँखों में और ज्यादा खटकने लगा है। राम मंदिर में सुरक्षा और व्यवस्था से जुड़े एक कर्मचारी पर चोरी का आरोप क्या लगा, डिंपल यादव ने सीधे पूरे मंदिर परिसर पर बुलडोजर चलाने की माँग जैसी भाषा का इस्तेमाल कर दिया। जनता के बीच अब यह सवाल तेजी से गूँज रहा है कि क्या एक कथित चोरी के बहाने पूरे राम मंदिर को निशाना बनाना और वहाँ बुलडोजर की बात करना तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा नहीं है?

सपा सांसदों का जमावड़ा

इस पूरे सियासी घमासान की शुरुआत सोनम वांगचुक के धरने से जुड़ी हुई है। सोनम वांगचुक शिक्षा में बड़े सुधार, नीट पेपर लीक मामले में सख्त एक्शन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर कड़े धरने पर बैठे हैं। वे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले यह बड़ा आंदोलन चला रहे हैं। इतने दिनों से लगातार अनशन पर रहने के कारण वांगचुक की तबीयत काफी बिगड़ चुकी है और शनिवार (18 जुलाई) सुबह ही अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य के बीच समाजवादी पार्टी के सांसदों का एक बड़ा दल लगातार जंतर-मंतर पहुँच रहा है। इससे पहले सपा सांसद प्रिया सरोज भी वांगचुक के अनशन स्थल पर पहुँची थीं और उन्होंने संसद से लेकर सड़क तक उनके मुद्दों को उठाने का वादा किया था। खुद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोनम वांगचुक से अपना अनशन समाप्त करने की अपील की थी। लेकिन अब इस आंदोलन के मंच का इस्तेमाल राजनीतिक बयानों के लिए होने लगा है।

पुरखे बताते थे महिलाओं की चड्डी का रंग, ग्रामीण-गरीब महिला आकर्षक नहीं होती; आज ‘सपोले’ बता रहे सपा सबसे बड़ी महिला हितैषी: अखिलेश यादव गैंग से दोगले भी लजाए


लोकसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने शुक्रवार (16 अप्रैल 2026) को कहा कि समाजवादी पार्टी महिलाओं का सबसे अधिक सम्मान करने वाली पार्टी है। उन्होंने दावा किया कि सपा महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और हक की सबसे बड़ी हितैषी रही है। लेकिन जैसे ही यह दावा सदन में गूँजा, सत्ता पक्ष की बेंचों से हंसी की लहर उठी। ये बयान उन्होंने उस समय दिया, जब संसद में नारी शक्ति वंदन (संसोधन) अधिनियम 2026 पर चर्चा चल रही थी। महिला आरक्षण से जुड़ा ये बिल लोकसभा में गिर गया, क्योंकि सपा, डीएमके, कॉन्ग्रेस जैसी पार्टियों ने इसका खुला विरोध किया।

 बहरहाल, धर्मेंद्र यादव ने जब सपा को सबसे बड़ी महिला हितैषी पार्टी बताया, उसके तुरंत बाद सोशल मीडिया पर पुरानी खबरें, न्यायालय के फैसले और उन दिनों की रिपोर्ट्स वायरल हो गईं। लोग पूछने लगे कि क्या सचमुच सपा महिलाओं की हितैषी है? या फिर यह सिर्फ एक राजनैतिक चेहरा है, जिसके पीछे 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव की सरकार में उत्तर प्रदेश की महिलाओं की जो दर्दनाक हालत थी, वह आज भी काले धब्बे की तरह सपा के चेहरे पर चिपकी हुई है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) और ह्यूमन राइट्स कमीशन की रिपोर्ट्स इस सवाल का जवाब साफ-साफ देती हैं। 2012-2017 के दौरान उत्तर प्रदेश में महिला अपराधों का आँकड़ा चौंकाने वाला रहा। साल 2012 में राज्य में बलात्कार के 1963 मामले दर्ज हुए थे। 2013 में यह संख्या अचानक बढ़कर 3050 हो गई, यानी महज एक साल में 55 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी। कुल महिला अपराध (क्राइम अगेंस्ट वुमेन) 2013 में 32,546 रहे।

साल 2014 में यह संख्या 38,467 तक पहुँच गई। इसके बाद तो 2016 और 2017 में यूपी पूरे देश में महिला अपराधों में सबसे ऊपर रहा। साल 2017 में अकेले यूपी में 56,011 मामले दर्ज हुए, जो पूरे देश के कुल महिला अपराधों का बड़ा हिस्सा था। एनसीआरबी के मुताबिक, उस दौरान यूपी न सिर्फ कुल संख्या में टॉप पर था, बल्कि बलात्कार, अपहरण, दहेज हत्या और छेड़छाड़ जैसे मामलों में भी अग्रणी रहा।

इटावा की घटना है जंगलराज की गवाह

ये आँकड़े सिर्फ कागज पर नहीं थे। ये असल जिंदगियों के टूटने की कहानियाँ थीं। अखिलेश यादव के गृह जिले इटावा में यादवों का आतंक ऐसा था कि बच्चियाँ और महिलाएँ अकेले घर से बाहर निकलने से काँपती थीं। गाँवों में दबंगों का राज था। पुलिस निष्क्रिय थी। न्याय की उम्मीद खत्म हो चुकी थी।

इसी दरमियान 11 मई 2014 को इटावा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के गौरापुरा गाँव में 15 साल की नाबालिग लड़की के साथ हुई घटना ने पूरे प्रदेश को शर्मसार कर दिया। मुख्य आरोपित सनी यादव (शादीशुदा) ने पीड़िता के घर घुसकर उसके साथ दुष्कर्म किया। लड़की ने रोते-रोते अपनी माँ को बताया। पीड़िता की माँ ने तुरंत थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने सनी यादव को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन यहीं से दबाव शुरू हुआ।

आरोपित के परिवार ने पीड़िता की माँ पर केस वापस लेने का भारी दबाव बनाया। धमकियाँ दी गईं कि अगर जुबान खोली तो बेटी जैसा हाल किया जाएगा। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। हालाँकि इसके बाद जब वो शौच के लिए खेत में गईं, तो उन्हें खेत में ही घेर लिया गया। आरोपित के पिता बसंतलाल यादव और उसके साथियों ने उसे निर्वस्त्र कर दिया। धारदार हथियारों से लहूलुहान कर दिया। महिला को गंभीर हालत में अस्पताल पहुँचाया गया।

उस समय अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे और इटावा उनका पैतृक जिला। फिर भी दबंगों का साहस ऐसा था कि किसी की परवाह नहीं की। पीड़िता की माँ की चीखें आज भी यूपी की महिलाओं के मन में गूंजती हैं, क्या वो राज्य की सरकार थी या सपा का जंगलराज था?

मुलायम सिंह यादव के बयानों को भूले तो नहीं?

इसी तरह की घटनाएँ सपा शासन में आम थीं। लेकिन सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बयानों ने महिलाओं के घावों पर नमक छिड़क दिया। अप्रैल 2014 में बदायूँ में दो बहनों के साथ गैंगरेप और हत्या के बाद मुलायम ने मुरादाबाद में कहा, “लड़कियाँ पहले दोस्ती करती हैं। फिर लड़के-लड़की में मतभेद हो जाता है। वे इसे रेप का नाम दे देती हैं। लड़कों से गलती हो जाती है। क्या रेप केस में फाँसी दी जाएगी? लड़के हैं, नादानी में रेप हो जाता है।”

यह बयान पूरे देश में आग की तरह फैला। महिलाएँ सड़कों पर उतर आईं। लेकिन मुलायम ने पीछे हटने की बजाय और विवादित बयान दिए। अगस्त 2015 में उन्होंने कहा, “एक महिला से चार लोग रेप नहीं कर सकते। रेप तो एक ही आदमी करता है, लेकिन एफआईआर में चार लोगों के नाम लिख दिए जाते हैं, जो गलत है। यूपी में तो केवल दो फीसदी रेप होते हैं।” यही नहीं, जुलाई 2014 में उन्होंने कहा, “21 करोड़ की आबादी की तुलना में यूपी में कम रेप होते हैं।” और फिर नवंबर 2014 में बाराबंकी में उन्होंने कहा, “गाँव की गरीब महिलाएँ ज्यादा आकर्षक नहीं होतीं।” उनके कहने का मतलब था कि गाँव की महिलाओं से कौन रेप करेगा?

आजम खान ने बताया था जयाप्रदा की चड्ढी का रंग

मुलायम के साथी सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान भी महिलाओं के अपमान में आगे रहे हैं। जयाप्रदा (तत्कालीन सपा सहयोगी) के बारे में उन्होंने कहा, “उनकी (जयाप्रदा की) चड्डी का रंग खाकी है।” यह टिप्पणी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में दी गई, लेकिन महिलाओं की गरिमा को तार-तार कर गई।

यही नहीं, इससे पहले साल 2010 में महिला आरक्षण बिल पर मुलायम ने कहा था कि यह बिल नौजवानों को संसद में सीटी बजाने के लिए उकसाएगा। उन्होंने दावा किया कि बिल से सिर्फ बड़े घर की और शहर की लड़कियाँ फायदा उठाएँगी, गाँव की गरीब महिलाएँ तो आकर्षक नहीं होतीं। सपा ने 2010 में बिल का तीखा विरोध किया और सदन में हंगामा किया।

अखिलेश यादव ने भी बाद में ‘कोटा के भीतर कोटा’ की माँग करते हुए बिल का विरोध किया। उन्होंने कहा कि ओबीसी, दलित और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग आरक्षण नहीं तो बिल अधूरा है। सपा की यह रणनीति महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी को सुनिश्चित नहीं होने देने में अहम रही।

गायत्री प्रसाद प्रजापति केस में कोर्ट ने लगाई थी फटकार, उम्रकैद की सजा

सपा सरकार में मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ भी गंभीर मामले सामने आए। गायत्री प्रसाद प्रजापति सपा सरकार में खनन मंत्री थे। 2017 में चित्रकूट की एक महिला ने शिकायत की कि प्रजापति ने अपने सरकारी आवास पर उसे और उसकी नाबालिग बेटी के साथ गैंगरेप किया। वीडियो बनाया और धमकाया। पुलिस ने कुछ नहीं किया।

पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। 2021 में लखनऊ की स्पेशल कोर्ट ने प्रजापति समेत दो अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि आरोपित ने सरकारी पद का दुरुपयोग कर नाबालिग की गरिमा लूटी। पीड़िता की बेटी की आँखों में आज भी वह रात घूमती होगी, जब उसके घर का माहौल ही उसे सबसे बड़ा खतरा बन गया। वह सोचती होगी कि क्या मंत्री का पद इतना ताकतवर था कि न्याय भी चुप रह गया?

पूर्व विधायक विजय मिश्रा पर 93 केस, रेप केस में सजा

सपा के पूर्व विधायक विजय मिश्रा पर 93 आपराधिक मामले दर्ज हैं। 2023 में भदोही की स्पेशल कोर्ट ने उन्हें 2014 के बलात्कार मामले में 15 साल की सजा सुनाई। पीड़िता एक गायिका थीं। मिश्रा ने उन्हें कार्यक्रम के बहाने बुलाया और बार-बार बलात्कार किया। कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया। आज वे आगरा सेंट्रल जेल में बंद हैं। इन मामलों ने सपा की ‘महिला हितैषी’ छवि को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

अपने अतीत को सुधारे समाजवादी पार्टी

आज जब सपा के सांसद लोकसभा में महिलाओं का सम्मान करने का दावा करते हैं, तो पुरानी घटनाएँ और न्यायालय के फैसले उनकी पोल खोल देते हैं। सपा का इतिहास महिला आरक्षण का विरोध, विवादित बयानों और अपराधियों को संरक्षण देने का रहा है। 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित न हो पाने में सपा की भूमिका अहम रही। मुलायम और अखिलेश दोनों ने ‘कोटा के भीतर कोटा’ को बहाना बनाया, लेकिन असल में इनकी मंशा महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को सीमित रखने की रही।

ये घटनाएँ सिर्फ आँकड़े नहीं, बल्कि उन माँ-बेटियों की चीखें हैं, जिन्हें सपा शासन ने कभी सुरक्षा नहीं दी। आज भी जब कोई सपा नेता महिलाओं का सम्मान करने का दावा करता है, तो इटावा की पीड़िता माँ-बेटी, चित्रकूट की नाबालिग और भदोही की गायिका की याद आ जाती है। सपा को अगर वाकई महिलाओं का सम्मान करना है, तो पहले अपने इतिहास का सामना करे।

LoP राहुल गाँधी का संसद में ‘चीनी प्रोपेगेंडा’ फैलाने का propaganda फेल, पूर्व सेना प्रमुख के नाम पर फैलाया ‘झूठ’: चीन की बीन पर नाचती रही है कांग्रेस

                                           राहुल गाँधी और राजनाथ सिंह (साभार-x@ani)
कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने एक बार फिर देश को गुमराह करने की कोशिश की है। सदन में चीन का प्रोपेगेंडा परोसते हुए उन्होंने कहा कि चीनी सेना भारतीय सीमा में घुस रही है। चीनी टैंक भारतीय क्षेत्र में घुस आते हैं। इस दौरान उन्होंने पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज नरवणे के अप्रकाशित किताब का हवाला दिया।

इस पर रक्षा मंत्री ने राहुल गाँधी को चुनौती दी और कहा कि इस निराधार आरोप का कोई सबूत नहीं है और खुद पूर्व आर्मी चीफ नरवणे ने अपनी किताब में लिखा है कि चीनी टैंक भारतीय पोजिशन से कुछ सौ मीटर की दूरी पर थे। भारत ने एक इंच जमीन भी नहीं दी। रक्षा मंत्री के अलावा गृहमंत्री अमित शाह समेत पूरे सत्ता पक्ष ने मिलकर कड़ी आपत्ति जताई और सदन के माध्यम से देश में गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया।

राहुल गाँधी को स्पीकर ओम बिरला ने गैर सूचीबद्ध मुद्दे को उठाने पर सख्त चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी सदन के नियमों के तहत बोलने की इजाजत दी थी, लेकिन उन्होंने तथ्यों और संसदीय नियमों का उल्लंघन किया।

चीन को लेकर राहुल गाँधी ने सदन को किया गुमराह

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने एलएसी पर चीनी अतिक्रमण की बात कही और केन्द्र से सवाल पूछे। उनका कहना है कि एलएसी की स्थिति काफी गंभीर है और चीनी सेना घुस गई है। इन आरोपों का आधार पूर्व आर्मी चीफ नरवणे का अप्रकाशित किताब बताया गया।

इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गाँधी के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि माननीय सांसद ये साफ करें कि किस आधार पर ये आरोप लगा रहे हैं। इसका कोई ठोस आधार होना चाहिए। इस दौरान स्पीकर ने भी कहा कि सार्वजनिक डोमन में जो उपलब्ध न हो या जिसका प्रमाण न हो, उसके संदर्भ का जिक्र नहीं किया जा सकता। पूर्व आर्मी चीफ नरवणे के अप्रकाशित किताब को लेकर वामपंथी प्रोपेगेंडा फैलाने वाले कारवां ने भी झूठी खबर फैलाई है।

राहुल गाँधी का ‘चीन प्रेम’ और विवादित बयान

ये पहली बार नहीं है जब डोकलाम और चीन को लेकर राहुल गाँधी ने देश को नीचा दिखाने की कोशिश की हो। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गाँधी ने दावा किया था कि चीन ने 2,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है। साथ ही कहा था कि चीनी सैनिक ‘अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सैनिकों की पिटाई’ कर रहे हैं। उस वक्त भी उनके पास कोई सबूत नहीं था और आज भी कोई प्रमाण नहीं है।

राहुल गाँधी पहले भी चीन की खुलकर तारीफ कर चुके हैं। मार्च 2023 में कैम्ब्रिज बिजनेस स्कूल में अपने विवादित भाषण में राहुल गाँधी ने चीन को ‘महाशक्ति बनने की आकांक्षा रखने वाला’ और ‘प्राकृतिक शक्ति’ बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि चीन में ‘सामाजिक समरसता’ है।

राहुल गाँधी ने चीन की विवादित और आक्रामक बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का भी समर्थन किया था। 2022 में ‘The Print’ की कॉलमनिस्ट श्रुति कपिला से बातचीत में उन्होंने कहा था कि चीन अपने आसपास के देशों की तरक्की चाहता है।

हालाँकि, 2023 में लद्दाख दौरे के दौरान राहुल गाँधी ने यह भी कहा था कि “चीन ने लद्दाख में भारत की चारागाह भूमि पर कब्जा कर लिया है।” लेकिन 2022 में ब्रिटेन में उन्होंने बयान दिया था कि “लद्दाख, चीन के लिए वही है, जो रूस के लिए यूक्रेन है।”

राहुल गाँधी ने 2020 में विदेशी ताकतों से भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की अपील भी की थी।

इतना ही नहीं, राजीव गाँधी फाउंडेशन (RGF) और चीन के बीच वित्तीय लेन-देन की जानकारी 2020 में सामने आई थी। 2006 के बाद चीनी सरकार ने RGF को 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की फंडिंग दी थी।

नरवणे ने अपने इंटरव्यू में बताया गलवान में क्या हुआ

राहुल गाँधी जिस पूर्व आर्मी चीफ नरवणे के अप्रकाशित किताब का जिक्र कर रहे हैं, उन्होंने अपने इंटरव्यू में ऐसी कोई बात नहीं कही हैं। उन्होंने साफ कहा है कि भारत ने एक इंच जमीन भी नहीं खोई थी।

भारत-चीन बॉर्डर पर दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच ऐसे इलाके हैं, जिस पर दोनों देश अपना दावा करते हैं। ऐसी जगहों पर कोई चिन्ह, पिलर नहीं है। भौगोलिक दृष्टि से ये इलाका काफी अलग है इसलिए नरवणे ने इंटरव्यू में कहा कि गलवान में पहली बार चीन को ऐसा लगा कि सीमा पर सड़क बनाने का विरोध हो सकता है। 3000 किमी तक सीमा तय नहीं होने का फायदा चीन ने उठाने की कोशिश की, लेकिन भारत ने एक इंच जमीन भी नहीं दिया।

पूर्व आर्मी चीफ ने कहा कि एक दर्जन से ज्यादा इलाका है। इन इलाकों में पेट्रोलिंग के दौरान दोनों देश की सेनाओं का आमना-सामना होता है। कई एग्रीमेंट प्रोटोकॉल भी हैं। इसका पालन चीनी सेना की तरफ से उस वक्त नहीं किया गया इसलिए दिक्कत आई।

चीनी सेना आक्रामक तरीके से सारे प्रोटोकॉल तोड़ रहे थे इसलिए हमारे जवानों ने विरोध किया। भिड़ंत में पी 14 में केजुएल्टी हुई दोनों तरफ से। 20 हमारे जवान शहीद हुए हैं। धीरे-धीरे पता चला। चीन में 2-4 महीनों बाद 4 के मरने की घोषणा की।

चीन में भी केजुएल्टी हुई। अपने पड़ोसी देश को पहली बार ऐसा लगा कि मनमर्जी नहीं चलेगी। चीन अक्सर पड़ोसी देशों के साथ अपनी मर्जी चलाता है लेकिन उसे भारत के रुख से झटका लगा।

उन्होंने कहा कि गलवान में सड़क बना रहे थे और सोच रहे थे कि विरोध में कोई कार्रवाई नहीं होगा, तो हमने उसे रोका वही वजह था। कई बार कोशिश की, लेकिन उसका विरोध किया गया। उन्होंने इससे भी इनकार किया कि मीडियो को आर्मी की तरफ से इस बात को भी दबाने के लिए कहा गया था कि वे लोग 100 बार भारत में घुसे और हम 200 बार घुसे, क्योंकि इससे चीन नाराज हो सकता था।

राहुल गाँधी को सदन में बोलने का मौका राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के तहत मिला था। राष्ट्रपति ने जो बातें कही थि उन पर उन्हें अपनी बात रखनी थी, लेकिन वे उन मुद्दों की बात की, जिसका अभिभाषण में जिक्र भी नहीं किया गया था। इस दौरान उन्होंने जिस किताब को कोट किया, उसका प्रकाशन भी नहीं हुआ है। उसकी विश्वनीयता के बारे में नहीं बताया जा सकता।

अगर पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की बात सामने आती, उनका किताब छपा होता, तो उसकी विश्वसनीयता को समझा जा सकता था। इसके बावजूद वह अपनी बात कहने पर अड़े रहे और कहते रहे कि ‘सरकार उनकी बातों से डरी हुई है’। अगर चीन के जमीन कब्जे की बात है तो 1959 से 1962 के बीच जो जमीन चीन ने कब्जा ली, उस पर क्यों नहीं राहुल गाँधी कुछ कहते हैं।

सदन की मर्यादा का सबको पालन करना जरूरी है। अगर स्पीकर ने उन्हें रोका, तो क्यों चीन और डोकलाम पर चर्चा पर अड़े रहे राहुल गाँधी। आखिर नियमों का कोई मतलब है या नहीं। सदन में कॉन्ग्रेस के सीनियर नेता वेणुगोपाल जोश में दिखे और ताली बजाते नजर आए। अगर नियमों का उल्लंघन ही राहुल गाँधी की विशेषता है तो कॉन्ग्रेस का भला नहीं हो सकता।

बंगाल : क्यों महिला सुरक्षा पर ‘गंभीर’ नहीं है ममता सरकार? महिलाओं पर सबसे ज्यादा फेंके गए तेजाब, ‘घुसपैठियों’ ने किए सबसे ज्यादा अपराध: NCRB की रिपोर्ट में खुलासा


महिलाओं की सुरक्षा और अधिकार के क्षेत्र में महिला मुख्यमंत्री का राज्य आदर्श होना चाहिए। लेकिन ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पश्चिम बंगाल में ऐसा नहीं है। लगातार हो रहे यौन अपराध की घटनाएँ और हाल ही में प्रकाशित नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी की रिपोर्ट दर्शाती है कि राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा को कमतर आँकती है।

दुर्गापुर में हुए एमबीबीएस की दूसरी वर्ष की छात्रा के साथ गैंगरेप के मामले में अब तक अपू बाउरी, फिरदौस शेख और शेख रिजाउद्दीन समेत 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।
पीड़िता के पिता ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में उनकी बेटी सुरक्षित नहीं है। उनका विश्वास टूट गया है और हम यहाँ नहीं रहना चाहते। उनका कहना है कि उनकी बेटी अपनी आगे की शिक्षा ओडिशा में पूरा करेगी। उन्होंने कहा है कि बंगाल में ‘औरंगजेब का शासन’ है।

जिम्मेदारी से बचने के लिए पीड़िता को दोषी ठहराना? पश्चिम बंगाल की महिला मुख्यमंत्री की असंवेदनशीलता को दर्शाता है। हालाँकि मुख्यमंत्री बनर्जी ने हमले पर दुख व्यक्त किया और अपराधियों के खिलाफ ‘कड़ी कार्रवाई’ का वादा भी किया, लेकिन अंत में उन्होंने पीड़िता को ही अपने साथ हुई क्रूरता के लिए दोषी ठहरा दिया। उन्होंने कहा, “पीड़िता को रात के 12.30 बजे परिसर से बाहर कैसे जाने दिया गया? निजी संस्थान को इसकी अनुमति नहीं देनी चाहिए… लड़कियों को रात में बाहर (कॉलेज) जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्हें अपनी सुरक्षा भी करनी होगी।”

हालाँकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री का यौन उत्पीड़न के मामलों को कम करके आँकने वाली टिप्पणियाँ करने का शर्मनाक रिकॉर्ड रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, बनर्जी और उनकी तृणमूल कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ सदस्यों को बलात्कार की घटनाओं पर अपनी असंवेदनशील प्रतिक्रियाओं के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा है।

साल 2012 का पार्क स्ट्रीट सामूहिक बलात्कार सबसे चर्चित रहा। 6 फरवरी, 2012 को कोलकाता के पार्क स्ट्रीट से घर लौट रही एक एंग्लो-इंडियन महिला सुज़ेट जॉर्डन के साथ चलती कार में 5 लोगों ने बलात्कार किया था। खबर सामने आने के तुरंत बाद, टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने आरोपितों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। उन्होंने इस घटना को ‘शजानो घोटोना’ (मनगढ़ंत घटना) करार दिया था, जो कथित तौर पर ‘सरकार को बदनाम करने के लिए रची गई’ थी।

टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार सहित उनकी पार्टी के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से पीड़िता के चरित्र पर सवाल उठाया और इस घटना को ‘एक महिला और उसके मुवक्किल के बीच गलतफहमी’ बताया। 2015 में कोलकाता की एक अदालत ने इस मामले के तीन आरोपितों को दोषी ठहराया, जिससे यह साबित हुआ कि हमला वास्तव में हुआ था।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में राज्य में बलात्कार के बढ़ते मामलों पर एक बहस के दौरान, 2013 में मुख्यमंत्री ने यह आरोप लगाया था कि यह राज्य की जनसंख्या में वृद्धि के कारण है। उन्होंने बलात्कार के बढ़ते मामलों के लिए आधुनिकीकरण, शॉपिंग मॉल और मल्टीप्लेक्स की बढ़ती संख्या को भी जिम्मेदार ठहराया था।

2024 के संदेशखली दंगों के दौरान भी, ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के गुंडों द्वारा महिलाओं के उत्पीड़न और यौन शोषण को ‘मामूली घटना’ बताकर कमतर आँकने की कोशिश की थी। ममता बनर्जी ने कहा, “इसके बाद, कुछ मीडिया संस्थानों ने इस घटना का फ़ायदा उठाया। एक मामूली घटना को लेकर शोर मचाया।”

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों को ‘मामूली घटना’ बताया। एनसीआरबी के आँकड़े राज्य की स्थिति को उजागर करते हैं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने हाल ही में वर्ष 2023 के लिए अपनी ‘भारत में अपराध’ रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में बताया गया है कि पश्चिम बंगाल में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और विशेष एवं स्थानीय कानूनों (एसएलएल) के तहत महिलाओं के खिलाफ अपराधों के 34,691 मामले दर्ज किए गए। यह देश में किसी भी राज्य में हुए महिलाओं के प्रति अपराध की सबसे ज्यादा मामलों में एक है। हालाँकि यह 2022 के 34,738 मामलों से थोड़ा कम है।

कुल मिलाकर ममता बनर्जी की टीएमसी सरकार कुछ खास तरह की हिंसा में देश में सबसे आगे है। राज्य में 2023 में विदेशियों द्वारा किए गए अपराधों की सबसे अधिक दर्ज की गई। विदेशी अधिनियम, 1946 और विदेशियों के पंजीकरण अधिनियम, 1939 के तहत ये मामले दर्ज किए गए।

वर्ष 2023 में, पश्चिम बंगाल में विदेशियों ने 1,021 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इन दोनों अधिनियमों के तहत 989 मामले दर्ज किए गए, जबकि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट 1985 के तहत 7 मामले, आर्म्स एक्ट 1959 के तहत दो मामले दर्ज किए गए। विदेशियों से जुड़े कुछ मामले धोखाधड़ी, मानव तस्करी जैसे अपराधों के तहत दर्ज किए गए।

2023 में, भारत में एसिड हमलों के 207 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से अकेले पश्चिम बंगाल में 57 मामले सामने आए। एनसीआरबी के आँकड़ों से पता चला है कि एसिड हमलों के 57 मामलों में पश्चिम बंगाल में 60 पीड़ित थे, जबकि देश भर में 207 मामलों में 220 पीड़ित थे।

एनसीआरबी के आँकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2023 में देश भर में हुए सभी एसिड हमलों में से 27.5% अकेले पश्चिम बंगाल में दर्ज किए गए। 2022 में, देश भर में हुए 202 मामलों में से, पश्चिम बंगाल में 48 एसिड हमले दर्ज किए गए, जिनमें 52 पीड़िता थी। इसमें बंगाल 2018 से देश में सबसे आगे है। एनसीआरबी के आँकड़ों के अनुसार, देश भर में एसिड हमलों के सभी मामलों में 267 गिरफ्तारियाँ हुईं और गिरफ्तार लोगों में 246 पुरुष और 21 महिलाएँ थीं।

पश्चिम बंगाल में 2023 में बलात्कार/सामूहिक बलात्कार के साथ हत्या के 7 मामले, दहेज हत्या के 350 मामले और महिलाओं को आत्महत्या के लिए उकसाने की 419 घटनाएँ दर्ज की गईं।

पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा किए गए क्रूरता से जुड़े आईपीसी की धारा 498 ए के तहत दर्ज मामलों में पश्चिम बंगाल दूसरे स्थान पर है। यहाँ 19698 मामले दर्ज किए गए और 20462 पीड़ित हैं। देश भर में पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता से संबंधित कुल 128814 मामले दर्ज किए गए। इनमें उत्तर प्रदेश 19889 मामलों के साथ सबसे आगे रहा।

कुल मिलाकर, ‘पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता’ के मामलों में सबसे ज़्यादा 29.8% (1.33 लाख मामले) मामले दर्ज किए गए, जिनमें 1.35 लाख पीड़ित शामिल थे। इस श्रेणी में वर्ष 2022 में ऐसे अपराधों का हिस्सा 31.4% था।

इस बीच, पश्चिम बंगाल में वर्ष 2023 में धारा 364ए के तहत फिरौती के लिए अपहरण के 17 मामले और 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को शादी के लिए मजबूर करने (आईपीसी की धारा 366) के तहत अपहरण के 515 मामले दर्ज किए गए। नाबालिगों के मामले में पश्चिम बंगाल में यह संख्या 390 थी। जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार में सबसे ज़्यादा नाबालिगों के साथ अपराध दर्ज की गईं।

महिलाओं के अपहरण और अपराध की (आईपीसी की धारा 363ए, 365, 367, 368, 369) के तहत, देश भर में 7964 मामले दर्ज किए गए। इनमें पश्चिम बंगाल में सबसे ज़्यादा 2054 घटनाएँ दर्ज की गईं। इस बीच, पश्चिम बंगाल में महिलाओं के अपहरण कुल संख्या 6544 रही, जो देश में सबसे ज़्यादा है।

एनसीआरबी रिपोर्ट के राज्यों के आँकड़ों से पता चलता है कि पश्चिम बंगाल में बलात्कार की 1110 घटनाएँ दर्ज की गईं। इनमें 1112 पीड़िताएँ थीं। इनमें से 917 मामलों में अपराधी पीड़िता के परिचित थे, 27 मामलों में अपराधी परिवार के सदस्य, 11 दोस्त/ऑनलाइन दोस्त/लाइव पार्टनर थे, और 193 मामलों में अपराधी पीड़िताओं के लिए अजनबी या अज्ञात थे।

‘बलात्कार के प्रयास’ अपराध श्रेणी में, पश्चिम बंगाल दूसरे स्थान पर था, जहाँ 825 मामले दर्ज किए गए, जिनमें सभी पीड़िताएँ 18 वर्ष से अधिक आयु की थीं। इस श्रेणी में राजस्थान सबसे आगे रहा, जहाँ 845 मामले दर्ज किए गए।

‘महिलाओं की गरिमा भंग करने के इरादे से उन पर हमला’ श्रेणी में, पश्चिम बंगाल में 2023 में 2487 पीड़िताओं से जुड़े 2479 मामले दर्ज किए गए। वहीं, ‘महिलाओं की गरिमा का अपमान’ श्रेणी में पश्चिम बंगाल के आंकड़े 412 थे। महिलाओं के खिलाफ आईपीसी के तहत कुल अपराध 31928 थे, जो देश में सबसे अधिक हैं।

पश्चिम बंगाल में वर्ष 2023 में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत 2721 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 1798 मामले बच्चों के साथ बलात्कार (POCSO अधिनियम की धारा 4 और 6/आईपीसी की धारा 376) से संबंधित थे, 644 घटनाएँ बच्चों के यौन उत्पीड़न (POCSO अधिनियम की धारा 8 और 10/आईपीसी की धारा 354) से संबंधित थीं और 244 घटनाएँ यौन उत्पीड़न (POCSO अधिनियम की धारा 12/आईपीसी की धारा 509) के थे।

पश्चिम बंगाल में पोर्नोग्राफी के लिए बच्चों का इस्तेमाल/बाल पोर्नोग्राफी सामग्री रखने (POCSO अधिनियम की धारा 14 और 14) के 29 मामले दर्ज किए गए।

महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के मामलों में 125 घटनाएँ ऐसी मिलीं जो झूठी पाई गई। 1165 मामले ऐसे थे जिनमें मामले कानून या दीवानी विवाद के रूप में समाप्त हुए। पश्चिम बंगाल पुलिस ने 2023 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 34344 मामलों का निपटारा किया, जिनमें लंबित मामलों की दर 23.2% रही।

एनसीआरबी की रिपोर्ट में दिए गए तथ्य और आँकड़े बताते हैं कि घरेलू हिंसा और अपहरण की घटनाएँ अभी भी प्रमुख हैं, जो 2023 में दर्ज घटनाओं में 75% से अधिक हैं। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि वास्तविक संख्या न केवल पश्चिम बंगाल में, बल्कि दूसरे राज्यों में भी कहीं अधिक हो सकती है। आँकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में सजायाफ्ता दर केवल 3.7% है, जो राष्ट्रीय दर 21.3% से काफी कम है। 3,68,000 से अधिक लंबित मामलों की संख्या स्थिति को और भी बदतर बना देती है, हालाँकि पश्चिम बंगाल में आरोप-पत्र दाखिल करने की दर अच्छी है।

एनसीआरबी की भारत में अपराध 2023 रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की दर प्रति लाख महिला जनसंख्या पर 71.3 है, जो राष्ट्रीय औसत 65.3 मामलों के काफी अधिक है।

इन आँकड़ों के बावजूद, पश्चिम बंगाल सरकार ने अपनी पीठ थपथपाने और कोलकाता को महिलाओं के लिए ‘सबसे सुरक्षित शहर’ बता रही है। हालाँकि, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष अर्चना मजूमदार ने तृणमूल कॉन्ग्रेस पर एनसीआरबी के आँकड़ों को ‘गलत तरीके से पेश करने’ का आरोप लगाया और कहा कि पश्चिम बंगाल में महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित लगभग 4 लाख मामले लंबित हैं, जो भारत में सबसे ज़्यादा हैं, और जिनमें न तो कोई कार्रवाई हुई है और न ही कोई दोषी साबित हुआ है।

उन्होंने कहा, “यह एनसीआरबी के आँकड़ों की आधी-अधूरी व्याख्या और गलत व्याख्या है… 2023 में, राज्य सरकार ने महिलाओं के खिलाफ अपराध पर अपनी रिपोर्ट पेश की। इसमें पश्चिम बंगाल में चार लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं, जिनमें किसी को भी दोषी नहीं ठहराया गया है या कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यह देश में सबसे ज़्यादा है… पुलिस प्रशासन इन पर काम नहीं कर रहा है। प्रशासन और पुलिस के असहयोग के कारण न्यायपालिका भी विफल हो रही है। वे समय पर आरोप-पत्र दाखिल नहीं कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में यह सब चल रहा है, और वे तथ्य छिपा रहे हैं… यह तो बस एक छोटी सी बात है… ये कुछ मामले हैं।”

आरजी कर मामले के जख्म अभी भरे भी नहीं हैं उससे पहले दुर्गापुर में मेडिकल कॉलेज की छात्रा से गैंगरेप की खबर आ गई। बीरभूम में भी ऐसी ही घटनाएँ सामने आईं और स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता की दिखी, फिर भी टीएमसी खुद की पीठ थपथपा रही है। जाहिर है, टीएमसी पर राजनीतिक हमले के लिए महिला सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है। इसलिए ममता सरकार जवाबदेही से बचने की कोशिश में इसे ‘मामूली मुद्दा’ बता देती है।

ट्रंप के करीबी नवारो का विवादित बयान, कहा: रूसी तेल से ब्राह्मणों को फायदा, INDI गठबंधन आया बचाव में

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कारोबारी सलाहकार पीटर नवारो ने एक और विवादित बयान देते हुए कहा है कि रूसी तेल से भारत के ब्राह्मणों को फायदा मिल रहा है। व्हाइट हाउस में ट्रंप के सलाहकार ने इसके पहले यूक्रेन युद्ध को ‘मोदी का युद्ध’ करार दिया था। फिर उन्होंने कहा था कि रूस से आयातित तेल से भारत के कुछ कारोबारियों को फायदा हो रहा है। अब नवारो ने एक और विवादास्पद बयान देते हुए कहा है कि रूसी तेल से भारत के ब्राह्मणों को लाभ मिल रहा है। नवारो ने कहा है कि ‘मैं चाहता हूं कि भारतीय लोग समझें कि क्या हो रहा है। ब्राह्मण समुदाय, आम भारतीयों की कीमत पर, रूसी तेल से मुनाफा कमा रहा है।’

नवारो के इस बयान को लेकर भारत में राजनीतिक हलचल मच गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि INDI गठबंधन से जुड़े कुछ नेता इस बयान के बचाव में सामने आए हैं। इसमें टीएमसी की नेता सागरिका घोष, ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले साकेत गोखले, और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम शामिल हैं। इस पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जहां लोग INDI गठबंधन के नेताओं को फटकार लगा रहे हैं।

‘मैं मंत्री नहीं होता तो उसको (PM मोदी) टुकड़ों में फाड़ देता’: तमिलनाडु मंत्री ने भरी सभा में प्रधानमंत्री को दी धमकी, Video वायरल

टीएम अनबरसन (बाएँ) और पीएम मोदी (दाएँ)
तमिलनाडु की DMK सरकार में मंत्री टी एम अनबरसन का एक वीडियो वायरल हो रहा है जहाँ वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धमकाने वाला एक विवादित बयान दे रहे हैं। यह बयान एक भरी सभा में मंच दिया गया। DMK के मंत्री ने पीएम मोदी के टुकड़े करने की धमकी दी है।

प्रधानमंत्री को टुकड़ों में फाड़ने वाला अब तक जेल से बाहर क्यों घूम रहा है? अगर यही किसी अन्य जनमानस कही होती, तो सरकार से लेकर पुलिस तक अब तक उसको गिरफ्तार कर चुकी होती। लेकिन जब सफेदपोशी गुंडा बोले सब खामोश क्यों? क्या कानून जनमानस और सफेदपोशी गुंडों के लिए अलग-अलग है? अगर इसी का नाम कानून है, बंद कर दो सब अदालतें। मोदी से लाख दुश्मनायी हो सकती है, लेकिन वह आदमी देश का प्रधानमंत्री है। किसी भी सफेदपोशी गुंडों को प्रधानमंत्री के विरुद्ध ऐसी धमकी देने का अधिकार कब से हो गया? ऐसे गुंडों को वोट देने वाले मतदाताओं को डूब मरना चाहिए। जब ऐसे गुंडे सदन में होंगे, कानून एक मजाक से ज्यादा कुछ नहीं। समस्त विपक्ष खामोश क्यों? सनातन को गालियां देने के साथ-साथ प्रधानमंत्री को टुकड़ों में फाड़ने की धमकी देना क्या विपक्ष का मुख्या उद्देश्य है? चुनाव आयोग और रात को आतंकवादियों के लिए खुलने वाली सुप्रीम कोर्ट कब ऐसी धमकियों का संज्ञान लेगी?  

वायरल हो रहे वीडियो में टीएम अनबरसन कहते हुए दिखते हैं, “मैंने अभी शांति रखी हुई है और मृदु बात कर रहा हूँ क्योंकि मैं एक मंत्री हूँ। मैं मंत्री ना होता तो उसको टुकड़ों में फाड़ देता।” इस बयान के दौरान और भी लोग बैठे हुए हैं और ताली बजाते हैं।

टीएम अनबरसन तमिलनाडु की एमके स्टालिन की अगुवाई वाली DMK-कांग्रेस गठबंधन सरकार में ग्रामीण उद्योग, कुटीर उद्योग, लघु उद्योग और झुग्गी उन्मूलन बोर्ड के मंत्री हैं। अनबरसन का बयान पिछले सप्ताह का बताया जा रहा है। इससे एक सप्ताह पहले ही तिरूप्पुर में पीएम मोदी ने रोडशो किया था।

अनबरसन ने इसी बयान में कहा, “हमारे कई प्रधानमंत्री हुए, कोई ऐसे नहीं बोलता था। मोदी हमें मिटाने की बात करता है, लेकिन मैं एक बात याद दिला दूँ कि DMK कोई सामान्य संगठन नहीं है। यह कई बलिदानों और बहुत खून बहने के बाद बना है।”

इसके बाद उसने कहा, “जिन लोगों ने DMK को खत्म करने की बात की, उनका ही विनाश हो गया। यह संगठन बना रहेगा, ये बात दिमाग में रखना। मैंने उससे (पीएम मोदी) अलग तरीके से निपटता। अभी मैं चुप हूँ और मृदु तरीके से बोल रहा हूँ क्योंकि मैं एक मंत्री हूँ। अगर मैं मंत्री ना होता, तो उसके साथ दूसरा ही तरीका अपनाता।”

भाजपा ने DMK पर किया हमला

अनबरसन के बयान के बाद भाजपा ने DMK की कड़ी आलोचना की। भाजपा ने INDI गठबंधन को निशाना बनाया है। DMK, INDI गठबंधन का हिस्सा है। अनबरसन के बयान को भाजपा नेताओं ने ट्विटर पर इस वीडियो को प्रसारित करते हुए खूब हमले किए हैं।
भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा कि INDI गठबंधन का एजेंडा इससे ज्यादा स्पष्ट नहीं हो सकता। उनका लक्ष्य सनातन धर्म और इसको मानने वालों का विनाश करना है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सत्य कुमार यादव ने कहा, “INDI गठबंधन का एक बार और छिछला स्तर। INDI गठबंधन लोकसभा परिणाम जानता है इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी को गालियाँ दे रहे हैं।”
तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई ने ट्विटर पर लिखा, “तमिलनाडु में सत्ता विरोधी लहर बढ़ने से आई हताशा के कारण DMK के मंत्री हमारे माननीय प्रधानमंत्री मोदी को धमकियाँ तक दे रहे हैं। अपनी विभाजन वाली राजनीति, भ्रष्ट आचरण, अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों के साथ कनेक्शन, गुंडागर्दी और कुशासन जैसे कारणों से राजनीतिक क्षेत्र से समाप्त हो जाएगी।”
टीएम अनबरसन का यह बयान अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और लोग DMK के रवैये की आलोचना कर रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले DMK मंत्री और CM स्टालिन के बेटे उदयानिधि सनातन को मिटाने की बात कर चुके हैं।

जूनागढ़ में जहर उगलने के लिए मुफ्ती अजहरी को मिले थे 40,000 रूपए

जबसे देश में CAA विरोध में शाहीन बाग बन रहे थे, तभी से एक बात चर्चा में रही है कि आयोजकों के बैंक खातों की जाँच की जाए। जब 'सर तन से जुदा' गैंग आया तब भी यही बात सुर्ख़ियों में थी। खैर 'देर आए दुरुस्त आए', चलो सलमान अज़हरी ने कबूला कि भड़काऊ भाषण देने के लिए रूपए मिले थे। सरकार को चाहिए कि इन बिकाऊ उपद्रवियों को मिलने वाली समस्त सरकारी सुविधाओं को तुरंत वापस लेकर ब्लैकलिस्टेड कर देना चाहिए।  
गुजरात के जूनागढ़ में भड़काऊ भाषण देने वाले मुफ़्ती सलमान अजहरी से राज्य के अलग-अलग हिस्सों की पुलिस अब भी पूछताछ कर रही है। उसे जूनागढ़ वाले मामले में अदालत से राहत मिल गई थी, लेकिन इसके बाद मोडासा और कच्छ के समख्याली में उसके विरुद्ध दर्ज मामलों में पूछताछ हो रही है। अजहरी के खिलाफ जूनागढ़, कच्छ और मोडासा में भड़काऊ भाषण देने के मामले दर्ज हैं।

मुफ़्ती अजहरी से जूनागढ़ पुलिस की पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जूनागढ़ क्राइम ब्रांच की जाँच में सामने आया है कि मुफ्ती सलमान अजहरी को यह जहरीले भाषण देने के लिए 40,000 रूपए दिए गए थे। यह पैसे उसे इन कार्यक्रमों के आयोजकों ने दिए थे।

इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि मुफ़्ती सलमान अजहरी ने जिस कार्यक्रम में यह जहरीला भाषण दिया था, वह नशा छुड़ाने के नाम पर आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम नरसिंह विद्यामंदिर स्कूल के मैदान में आयोजित किया गया था। पुलिस ऐसे ही और भी कार्यक्रमों की जाँच कर रही है।

मुफ़्ती सलमान अजहरी जहरीले भाषणों के लिए काफी कुख्यात है। अजहरी की सोशल मीडिया पर 4.69 लाख की अच्छी-खासी फैन फॉलोइंग है। वह कट्टरपंथी विचार फैलाता रहा है। उसके यूट्यूब वीडियो से भी उसे बड़ी कमाई होती है। यह बात अलग है कि जब पुलिस ने उससे सोशल मीडिया से होने वाली कमाई के बारे में पूछा तो उसने इसकी जानकारी होने से मना कर दिया।

अजहरी ने दावा किया कि उसके सोशल मीडिया अकाउंट दूसरे लोग सम्भालते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस जाँच में मुफ़्ती अजहरी ने और भी कई बातें उगली हैं। यह भी सामने आया है कि जूनागढ़ में जून 2023 में हुए माजेवाड़ी दंगे में जब पुलिस ने दंगाइयों पर कार्रवाई की तो उनका हौसला टूट गया था। इन दंगाइयों का हौसला बुलंद करने के लिए अजहरी को यहाँ बुलाया गया था।

जब मुफ़्ती सलमान अजहरी का यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था तो आयोजकों को कुछ लोगों ने इस विषय में चेताया भी था। लोगों ने आयोजकों से कहा था कि मुफ़्ती सलमान अजहरी हमेशा भड़काऊ भाषण देता है। ऐसे में अगर वह यही दोहराता है तो समस्याएँ खड़ी हो सकती हैं। हालाँकि, मुफ़्ती के भड़काऊ भाषणों के दीवानों ने इस पर ध्यान नहीं दिया और उसे बुलाया जिसके बाद उसने यहाँ जहर उगला।

‘यूरोप की संस्कृति के अनुकूल नहीं है इस्लाम’: जॉर्जिया मेलोनी, इटली की प्रधानमंत्री

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का पुराना बयान वायरल (चित्र साभार: Le Monde)
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसमें वो कह रही हैं कि इस्लाम यूरोपियन मूल्यों और संस्कृति के अनुकूल नहीं है। वो कह रही हैं कि इटली में इस्लाम को सऊदी अरब की फंडिंग के जरिए फैलाया जा रहा है और सऊदी अरब में शरिया कानून लागू है।

यही बयान मीडिया द्वारा भी रिपोर्ट किया गया, रिपोर्ट करने वालों में अधिकांश मीडिया संस्थान भारतीय हैं।

मीडिया चैनल ने यह दावा किया कि जॉर्जिया मेलोनी का यह बयान उनकी ‘द ब्रदर्स ऑफ़ इटली’ पार्टी द्वारा इटली में हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद आया है। इस कार्यक्रम में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और कारोबारी एलन मस्क भी शामिल हुए थे।

भारतीय मीडिया में WION, हिंदुस्तान टाइम्स, मिंट, NDTV और टाइम्स नाउ जैसे संस्थानों ने इसी दावे के साथ रिपोर्ट छापी। NDTV ने एक्स (पहले ट्विटर) पर किए गए एक ट्वीट के आधार पर मेलोनी के बयान को रिपोर्ट में लिखा और दावा किया कि यह बयान उन्होंने हाल ही में अपनी पार्टी के आयोजन में दिया था।

हालाँकि, अंतरराष्ट्रीय मीडिया के किसी संस्थान में यह बयान बीते 24 घंटों में नहीं मिला। खोजबीन पर पता चला कि यह वीडियो सबसे पहले एक्स पर रेडियो जेनेवा नाम के एक हैंडल द्वारा डाला गया हो सकता है। हालाँकि, इसने भी यह दावा नहीं किया कि यह बयान अभी का है और उसने बयान की तारीख भी नहीं बताई।

हालाँकि, इस बयान से सम्बंधित शब्दों को सर्च करने पर जॉर्जिया का एक पाँच साल पुराना वीडियो मिला। इसका असली वीडियो जुलाई 2018 में यूट्यूब पर डाला गया था। इसे यूट्यूब पर एक न्यूज चैनल Alanews पर डाला गया था।

असली वीडियो में मेलोनी कहते हुए दिखती हैं, “साल्विनी कहते हैं कि इस्लाम संविधान के प्रतिकूल है। उनसे इस पर सफाई देने को कहिए। लेकिन मुझे लगता है इस्लाम हमारे मूल्यों और संस्कृति के अनुकूल नहीं है और इस्लामिक केन्द्रों में क्या होता है, इसका गवाह है। मैं इसका सामान्यीकरण नहीं कर रही, लेकिन हाँ प्रतिकूलता तो है।”

मेलोनी इस वीडियो में एक अन्य कंजर्वेटिव नेता मैटियो साल्विनी के बयान के बारे में बात कर रहीं थी। साल्विनी ने यह बयान कोलोन शहर में हुई यौन हिंसा और बर्लिन में हुए आतंकी हमलों के विषय में दिया था।


‘हिन्दू मंदिरों में लूटी जाती है बहन-बेटियों की इज्जत, होती है हत्या’: केजरीवाल के विधायक ने फिर उगला ज़हर, भड़काते हुए कहा – वहाँ जाना बंद करो

अरविंद केजरीवाल के विधायक राजेंद्र पाल गौतम ने हिन्दू मंदिरों पर उगला ज़हर
मुफ्त रेवड़ियों के लालच में 'हनुमान भक्त' अरविन्द केजरीवाल पार्टी की पार्टी को वोट देने वाले हिन्दुओं शर्म करो , देखों  इसका विधायक किस तरह मंदिरों जाने वालों के खिलाफ जहर उगल रहा है, और पार्टी खामोश है। अभी 5 राज्यों में हुए चुनावों में देखा कि पांचों राज्यों ने मुफ्त की रेवड़ियों को ठोकर मार दी। NOTA से भी कम वोट मिले, यानि लोगों ने घास तक नहीं डाली। इसका मतलब साफ है कि जलसे और जुलुस में जो भीड़ देखी, सब पैसे देकर लाए हुए थे। पार्टी समर्थक नहीं। दूसरे, NOTA से भी कम वोट मिलने का यह भी अर्थ निकाला जा सकता है कि स्वयं पार्टी उम्मीदवार और उसके परिवार ने भी वोट नहीं दिया। 

‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ के विधायक और दिल्ली सरकार में मंत्री रहे राजेन्द्र पाल गौतम ने हिन्दू धर्म और हिन्दू मंदिरों के विरुद्ध एक बार फिर जहर उगला है। राजेन्द्र पाल का कहना है कि मंदिरों में जाने पर लोगों की हत्या होती है और बहन बेटियों की इज्जत लूटी जाती है। उनका यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है।

दिल्ली सीमापुरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक राजेन्द्र पाल गौतम इस वीडियो में कहते हुए दिखते हैं, “आप ऐसी चीजों में भरोसा मत करो जो आपको नुकसान पहुँचाती हो। आप एक बात बताइए, अगर कहीं मंदिर में जाने से हमारे लोगों की हत्या होती हो, अगर मूर्ति छू लेने से हमारे युवाओं की हत्या हो गई हो, तो आप ऐसी जगह क्यों जाते हो जहाँ आपका अपमान हो।”

आगे राजेन्द्र पाल गौतम इस वीडियो में आगे कहते हैं, “जहाँ आपकी बहन-बेटी की इज्जत लूटी जाए, जहाँ आपका क़त्ल कर दिया जाए, जहाँ अपमान हो वहाँ जाना बंद कर दो।” अब राजेंद्र गौतम के लगभग 30 सेकंड इस वीडियो पर प्रश्न उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, यह वीडियो हरियाणा के सोनीपत जिले का है जहाँ वह लहराड़ा गाँव में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने इस प्रश्न उठाया है कि आखिर खुद को कट्टर हनुमान भक्त बताने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल राजेन्द्र पाल गौतम को अपनी पार्टी से निष्कासित क्यों नहीं कर रहे हैं जो कि लगातार हिन्दुओं के खिलाफ जहर उगलते आए हैं।

हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है कि राजेन्द्र पाल गौतम ने हिन्दू धर्म पर विवादित बयान दिया हो या हिन्दू धर्म का अपमान किया हो। इससे पहले वह कई मौकों पर ऐसा ही कर चुके हैं। अक्टूबर 2022 में एक हिन्दू विरोधी कार्यक्रम में शामिल होने के कारण उन्हें दिल्ली सरकार के मंत्री पद से भी हाथ धोना पड़ा था।

अक्टूबर 2022 में AAP नेता ने झंडेवालान में आयोजित जिस कार्यक्रम में शामिल हुए थे उसमें 10,000 हिंदुओं का धर्मांतणरण हुआ था। शपथ में कहते सुना गया था – “मैं इस बात को नहीं मानता और न ही मानूँगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे। मैं इसे केवल पागलपन और झूठा प्रचार मानता हूँ। मैं श्राद्ध नहीं करूँगा और न ही पिंडदान करूँगा।”

भगवा वस्त्र पहने हुए व्यक्ति ने इस शपथ को दिलाते हुए कहा था, “मैं ब्राह्मणों द्वारा किसी भी समारोह को करने की अनुमति नहीं दूँगा। मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूँ, जो मानवता के लिए हानिकारक और उनके विकास में बाधक है, क्योंकि यह असमानता पर आधारित है। मैं बौद्ध धर्म को अपना धर्म स्वीकार करता हूँ।”

कार्यक्रम के दौरान, AAP के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम इन विवादास्पद लाइनों को दोहराते हुए और उस व्यक्ति के साथ मंच साझा करते हुए दिखाई दिए थे। उनके इस वीडियो के कारण केजरीवाल को गुजरात में काफी विरोध झेलना पड़ा था। राजेन्द्र पाल गौतम ने इसके पश्चात इस्तीफ़ा दिया था।

नवम्बर 2022 में राजेन्द्र पाल गौतम ने भारत में हिन्दुओं को अल्पसंख्यक बनाने को लेकर भी बयान दिया था। प्रोपेगंडा पोर्टल ‘द वायर’ की एंकर आरफा खान शेरवानी के साथ के इंटरव्यू में राजेन्द्र पाल ने कहा था, “इस देश के 110 करोड़ लोग अनुसूचित जाति/जनजाति समाज से हैं, वो सभी 5-6 वर्षों में बौद्ध धर्म अपना लेंगे। उसके बाद देखते हैं कि कौन बहुसंख्यक होता है।”

जनवरी 2023 में एक कार्यक्रम में राजेन्द्र पाल ने श्रीरामचरितमानस पर भी विवादित बयान दिया था। इसका वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में वह कहते हुए दिखते हैं, “क्या रामचरितमानस में नहीं लिखा है ‘ढोल गँवार शूद्र पशु नारी ये सब ताड़न के अधिकारी।’ वो व्याख्या कर रहे हैं कि ताड़न का मतलब देखना है, जबकि क्लीयर है कि ताड़न का मतलब पीटना। यदि इसका मतलब देखना ही है तो क्या नारी को घूरना चाहिए? क्या पीटना चाहिए? आपके धर्मशास्त्र हमें इंसान का दर्जा देने को तैयार नहीं है।”

राजेन्द्र पाल गौतम लगातार ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेते रहे हैं जहाँ हिन्दू धर्म, मंदिरों और ग्रन्थों के विरुद्ध अपमानजनक बातें की जाती हैं। अब मंदिरों में बलात्कार और हत्या वाले वीडियो को लेकर भी प्रश्न उठ रहे हैं लेकिन आम आदमी पार्टी के मुखिया केजरीवाल या पार्टी की तरफ से कोई स्पष्टीकरण नहीं सामने आया है। राजेन्द्र पाल गौतम ने भी अब तक इस बयान पर माफ़ी नहीं माँगी है।