Showing posts with label #Pahalgam attack. Show all posts
Showing posts with label #Pahalgam attack. Show all posts

क्या कांग्रेस का दिल भारत नहीं पाकिस्तान के लिए धड़कता है? पहलगाम मामले में कांग्रेस ने दी पाक को क्लीन चिट, चल रह ट्रेंड #Boycott Congress

जब तक भारत में कांग्रेस रहेगी पाकिस्तान सुधरने वाला नहीं, क्योकि उसको मालूम है कि कांग्रेस के रहते हिन्दुस्तान में गुलामों की कोई कमी नहीं होने देगी। इतिहास साक्षी है कि जब भी देश में इस्लामिक आतंकी हमला हुआ, बेगुनाहों के खून से धरती लाल को वालों को बचाने वाली कांग्रेस ने ही "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" का नाम देकर देश को ही गुमराह नहीं बल्कि हिन्दुओं को भी बदनाम किया था। पाकिस्तान जाकर मोदी को हराने के लिए उनके पैरों में ऐसे माथा टेकते हैं मानों कांग्रेस के नकाब में पाकिस्तान भारत में चुनाव लड़ रहा हो। अगर 26/11 हमले में कसाब को जिन्दा नहीं पकड़ा गया होता "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" का जहर सच साबित हो गया होता। जिस भारत में कांग्रेस समर्थित यूपीए सरकार के राज में आतंकवादियों को दामाद की तरह पाल खूब बिरयानी और कोरमा खिलाकर मेजबानी की जाती थी, लेकिन आज बदलते भारत में उन्ही आतंकवादियों को बिरयानी और कोरमा की बजाए गोली/गोला दिया जा रहा है।          

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के बयान को लेकर देशभर में काफी गुस्सा है। लोग सवाल कर रहे हैं कि ये भारत के साथ हैं या पाकिस्तान के! दरअसल में कांग्रेस के सीनियर लीडर और यूपीए काल में देश के गृहमंत्री रहे पी. चिदंबरम ने पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान को क्लीन चिट देते हुए साफ कहा है कि आपके पास क्या सबूत है कि वे पाकिस्तानी थे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी पूर्व मंत्री ने कहा कि ‘एनआईए ने इतने दिनों में क्या किया है, क्या उन्होंने आतंकियों की पहचान कर ली है, उन्हें पता चल गया है कि वो कहां से आए थे। वो यहां के भी आतंकी तो हो सकते हैं। आप ऐसा सोचकर कैसे चल सकते हैं कि आतंकी पाकिस्तान से ही आए थे। इस बात का हमारे पास अभी कोई सबूत नहीं है।’ कांग्रेसी नेता के यह कहते ही कि आतंकी पाकिस्तान से आए थे, इसका कोई प्रूफ नहीं है। सोशल मीडिया पर लोग कांग्रेस को लताड़ लगाने लगे और पूछने लगे कि आखिर पाकिस्तान के साथ ये रिश्ता क्या कहलाता है? लोग सोशल मीडिया पर चिदंबरम को जमकर फटकार लगा रहे हैं। सोशल मीडिया पर #Boycott Congress ट्रेंड हो रहा है।  

बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी हमारी सेनाएं पाकिस्तानी आतंकवाद का सामना करती हैं, कांग्रेस भारत के विपक्ष से ज्यादा इस्लामाबाद के बचाव पक्ष के वकील दिखती है। वह हमेशा दुश्मन की रक्षा की कोशिश करते हैं।

 चिदंबरम का बयान पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, “कांग्रेस देशद्रोही संगठन बन गया है। जिस कांग्रेस ने आजादी के आंदोलन में भाग लिया। जिस कांग्रेस पार्टी का आजादी के आंदोलन में इतना बड़ा योगदान है। उस पार्टी का अस्तित्व क्या है? कभी चीन के साथ राहुल गांधी MoU साइन करते हैं… उन लोगों ने देश को बेचने का फैसला कर रखा था लेकिन बीच में पीएम मोदी ने आकर मजबूत नेतृत्व दिया जो उनसे पच नहीं रहा है।”

भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, “जब-जब पाकिस्तान और आतंक की बात आती है तो पाकिस्तान भी पाकिस्तान की उतनी पैरवी नहीं करता जितनी राहुल अधिकृत कांग्रेस पाकिस्तान की करती है। हर तर्क, हर बचाव का तरीका तैयार रहता है। कहीं न कहीं पाकिस्तान को बचाने के लिए कांग्रेस खड़ी रहती है, ऐसी कौनसी मजबूरी है कि कांग्रेस को पाकिस्तान का साथ देना जरूरी है?…आज जब पहलगाम आतंकी हमले पर सदन में चर्चा होगी तो उससे पहले पूर्व गृह मंत्री का इस तरह का बयान आना कांग्रेस की मानसिकता को दिखाता है कि वे भारत के साथ नहीं हैं…”

बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी एक्स पर तंज कसते हुए लिखा, ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है? कांग्रेस कहती है: पहलगाम हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार मत ठहराइए! कांग्रेस पाकिस्तानी आतंक का बचाव पाकिस्तान से भी बेहतर करती है!’

कांग्रेस नेताओं का रवैया दिखाता है कि प्रधानमंत्री मोदी से नफरत करते-करते वह भारत से भी नफरत करने लगे हैं। यह दिखाता है कि कांग्रेस पार्टी देश को लेकर किस प्रकार की सोच रखती है। इसके पहले खुद राहुल गांधी कह चुके कि इस देश में आग लगेगी, दंगे होंगे, प्रधानमंत्री पर हमला होगा।

राहुल गांधी के करीबी सांसद ने की अलग देश की मांग
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के कारण इंडी गठबंधन तो टूट ही रहा है, अब पार्टी नेता देश तोड़ने की भी बात करने लगे हैं। राहुल गांधी के करीबी कांग्रेसी सांसद डीके सुरेश ने दक्षिण भारत को अलग देश बनाने की मांग कर दी है। कांग्रेसी सांसद डीके सुरेश ने ये मांग ऐसे समय में की है जब राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा कर रहे हैं। कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के भाई डीके सुरेश ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया है कि दक्षिण भारत के साथ भेदभाव किया जाता है और ऐसा ही चलता रहा तो देश को बांटना पड़ेगा। बेंगलुरु ग्रामीण सीट से सांसद डीके सुरेश ने बजट को लेकर कहा कि दक्षिण भारत का पैसा उत्तर भारत को आवंटित किया जाता है। इससे दक्षिण को वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अगर यह जारी रहा तो हमें दक्षिण भारत को एक अलग राष्ट्र बनाने के लिए आवाज उठानी होगी।

पूर्वोत्तर को देश का हिस्सा नहीं मानते राहुल गांधी
संविधान की प्रस्तावना में ‘राष्ट्र की एकता तथा अखंडता सुनिश्चित’ करने का उल्लेख किया गया है। लेकिन कांग्रेस और उसके नेता संविधान को नहीं मानते हैं। क्योंकि आजादी के बाद से कांग्रेस ने सिर्फ ‘सत्ता’ को प्राथमिकता दी है देश की एकता और अखंडता को नहीं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने 10 फरवरी, 2022 को ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा कि गुजरात से लेकर पश्चिम बंगाल तक भारत है। इसको लेकर पूर्वोत्तर के लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। असम बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष अंगूरलता डेका ने सोमवार (14 फरवरी, 2022) को देश को विभाजत करने के आरोप में राहुल गांधी के खिलाफ दिसपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई।

 

पूर्वोत्तर का जिक्र नहीं करने पर कड़ी आपत्ति
असम, त्रिपुरा और मणिपुर के मुख्यमंत्रियों ने राहुल गांधी के ट्वीट में पूर्वोत्तर का जिक्र नहीं करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उनका कहना है कि राहुल पूर्वोत्तर को भारत का हिस्सा नहीं मानते और चीन के प्रवक्ता के रूप में काम कर रहे हैं। राहुल ने यह बयान देकर अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दुष्प्रचार को स्वीकार कर लिया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राहुल पर हमला बोलते हुए कहा, ‘हम एक गौरवशाली राष्ट्र हैं। भारत को आपके टुकड़े टुकड़े दर्शन के लिए बंधक नहीं बनाया जा सकता है। क्या राष्ट्र, राष्ट्रीयता और राष्ट्रवाद के साथ आपकी समस्या है? बंगाल से परे, हम पूर्वोत्तर मौजूद हैं।’ गौरतलब है कि हाल ही में संसद में दिए अपने भाषण में राहुल गांधी ने भारत को एक ‘राष्‍ट्र’ मानने से इनकार कर दिया था और इसे राज्यों के संघ के रूप में वर्णित किया था। आज कांग्रेस भाषावाद, क्षेत्रवाद, प्रांतवाद, जातिवाद और संप्रदायवाद के आधार पर देश को विभाजित करने में लगी है।

                 कांग्रेस और चीन का अपवित्र रिश्ता

गलवान घाटी संघर्ष हो या फिर डोकलाम विवाद हो, जब भी भारत और चीन के बीच संघर्ष देखने को मिलता है कांग्रेस पार्टी को चीन का साथ देते या सुरक्षा मामलों पर भारत विरोधी बयान जारी कर चीन को खुश करते देखा जा सकता है। इसका प्रमाण 7 जुलाई, 2017 को मिला,जब राहुल ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा। अगले दिन 8 जुलाई को चोरी से चीनी राजदूत से मुलाकात की। दरअसल कांग्रेस पार्टी देश के अंदर चीन के एजेंडे को चला रही है। चीन और कांग्रेस का रिश्ता जगजाहिर है। सोनिया और राहुल ने 2008 में चीन के साथ MoU किया था।

राहुल गांधी के बयान को पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में बनाया था हथियार
पाकिस्तान ने 27 अगस्त, 2019 को कश्मीर मसले पर संयुक्त राष्ट्र (UN) में दिए अपने प्रस्ताव में राहुल गांधी के बयान का जिक्र किया। पाकिस्तान ने कश्मीर मामले में संयुक्त राष्ट्र को चिट्ठी लिखकर भारत की शिकायत की। इस चिठ्ठी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों का हवाला दिया। इस चिट्ठी में भारत पर कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन और हिंसा को बढ़ाने का आरोप लगाया। इमरान खान सरकार में मंत्री डॉ शिरीन मजारी ने यूएन को लिखी अपनी आठ पेज की चिट्ठी में पेज छह और आठ पर राहुल गांधी का जिक्र किया।

ट्रंप का स्टॉपओवर न्योता ठुकराना एक बड़ा कदम; ट्रंप से कॉल में पीएम मोदी ने दिखाई भारत की ताकत: अमेरिका का ‘चौधरी’ बनने का मंसूबा हुआ नाकाम?

एक समय था जब भारत अमेरिका के आगे गिड़गिड़ाता था, लेकिन कालचक्र ऐसा घूम रहा है जिसे कोई देख नहीं रहा, खासकर भारत का विपक्ष। किसी आतंकी घटना होने पर अमेरिका के आगे शिकायत करने जाता था। आज ऐसा नहीं हो रहा, भारत किसी के आगे नहीं रो रहा है खुद ही आतंकियों को उसी की भाषा में जवाब दे रहा है। और इस काम के लिए जरुरत है "इच्छा शक्ति" की। ये वही बेशर्म विपक्ष है जो नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले अमेरिका को प्रेम पत्र लिख मोदी को वीसा नहीं देने के लिए लिखता था। आज उसी मोदी ने अमेरिका को भारत की ताकत दिखा दी।    
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बुधवार (18 जून 2025) की सुबह एक प्रेस बयान में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई।

जी-7 समिट से ट्रंप के जल्दी लौटने की वजह से दोनों नेताओं की तय मुलाकात नहीं हो पाई थी। इसके बाद ट्रंप के अनुरोध पर दोनों के बीच 35 मिनट से ज्यादा की औपचारिक फोन बातचीत हुई।

ये फोन कॉल कई मायनों में बेहद अहम थी – न सिर्फ बातचीत के मुद्दों की वजह से, बल्कि इसके समय और उसमें दिए गए संदेशों की वजह से भी। आइए, जानते हैं कि ये बातचीत क्यों इतनी खास थी…

1- पहलगाम हमले के बाद पहली सीधी बात

विक्रम मिस्री ने साफ-साफ बताया कि 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम हमले के बाद ये पहली बार था जब पीएम मोदी और ट्रंप ने सीधे बात की। इस बातचीत में ट्रंप ने हमले में मारे गए लोगों के लिए संवेदना जताई और भारत के आतंकवाद के खिलाफ रुख का समर्थन किया।

ये बात इसलिए अहम है क्योंकि ट्रंप की बड़बोली और आत्ममुग्ध मीडिया टिप्पणियों से ऐसा लग रहा था जैसे भारत और अमेरिका के बीच कई बार बात हो चुकी हो। ट्रंप ने बार-बार दावा किया कि उन्होंने व्यापार का दबाव डालकर भारत को पाकिस्तान से बात करने और युद्धविराम के लिए ‘राजी’ किया।

मिस्री के बयान ने साफ कर दिया कि ट्रंप का ये ‘शांति स्थापित करने’ वाला दावा पूरी तरह झूठा और भ्रामक था। ये बयान ट्रंप की गलत बयानबाजी को खुलेआम बेनकाब करता है।

2- ‘गोली का जवाब गोला’ का दोहराया संकल्प

फोन बातचीत में पीएम मोदी ने ट्रंप को दो टूक याद दिलाया कि भारत ने पूरी दुनिया को बता दिया है कि पहलगाम हमले का जवाब वो जबरदस्त तरीके से देगा। मोदी ने कहा कि 6-7 मई 2025 की रात को भारत की ऑपरेशन सिंदूर कार्रवाई एक संयमित, गैर-उकसावे वाली और सटीक सैन्य कार्रवाई थी, जो पीओके और पाकिस्तान में आतंकी ढाँचों पर केंद्रित थी।

पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप को साफ बता दिया है कि भारत ने पहले भी पाकिस्तान की किसी भी उकसावे की कार्रवाई का जवाब दिया है और आगे भी देगा और वो भी बड़े पैमाने पर – ‘गोली का जवाब गोला’।

पीएम मोदी का ये बयान नये भारत की ताकत और आत्मविश्वास को दिखाता है। ये वो भारत है जो किसी विदेशी ताकत के इशारे पर नहीं चलता, बल्कि अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए दुश्मन को करारा जवाब देता है। ये बयान शांत लेकिन दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।

3- जेडी वेंस की चेतावनी और भारत का और बड़ा जवाब

पीएम मोदी ने ट्रंप को ये भी बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले चरण के बाद 9 मई की रात को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उन्हें फोन करके पाकिस्तान की ओर से एक ‘बड़े हमले’ की चेतावनी दी थी। भारत ने वेंस को बहुत साफ शब्दों में बता दिया कि पाकिस्तान की किसी भी उकसावे की कार्रवाई का जवाब भारत और जोरदार और बड़ा देगा। और भारत ने ऐसा ही किया।
पीएम मोदी ने ट्रंप को बताया कि पाकिस्तान की उकसावे की कार्रवाई के जवाब में भारत ने सटीक सैन्य हमले किए, जिन्होंने पाकिस्तान की हवाई सुरक्षा को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया और उनके हवाई अड्डों को बेकार कर दिया। भारत ने पूर्ण हवाई वर्चस्व हासिल कर लिया। इसके बाद पूरी तरह टूट चुका पाकिस्तान भारत से युद्धविराम की गुहार लगाने को मजबूर हो गया। ये भारत की सैन्य ताकत और रणनीतिक चतुराई का सबूत है।

4- व्यापार सौदे या मध्यस्थता की कोई बात नहीं

पीएम मोदी ने ट्रंप को साफ-साफ याद दिलाया कि न तो पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व के साथ और न ही अमेरिकी नेतृत्व के साथ किसी भी बातचीत में व्यापार का जिक्र तक हुआ। उन्होंने ये भी साफ किया कि भारत ने कभी भी अमेरिका के साथ ‘मध्यस्थता’ की बात नहीं की, क्योंकि भारत पाकिस्तान के साथ अपने द्विपक्षीय मुद्दों में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को कभी स्वीकार नहीं करेगा। भारत में इस मुद्दे पर पूरी राजनीतिक सहमति है।
मोदी ने ट्रंप को बताया कि सैन्य कार्रवाई को रोकने की सारी बातचीत भारत और पाकिस्तान के स्थापित सैन्य चैनलों के जरिए हुई, जिसमें कोई तीसरा देश शामिल नहीं था और न ही कोई व्यापार सौदा इसका हिस्सा था। मोदी ने ये भी दोहराया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है और भारत अब किसी भी आतंकी हमले को युद्ध की कार्रवाई मानेगा। ये बयान भारत की स्पष्ट और अटल नीति को दर्शाता है।

5- ट्रंप का स्टॉपओवर न्योता ठुकराना एक बड़ा कदम

एक साहसिक और रणनीतिक कदम उठाते हुए, पीएम मोदी ने ट्रंप के अमेरिका में स्टॉपओवर मीटिंग के न्योते को विनम्रता से ठुकरा दिया। ट्रंप ने मोदी को कनाडा से भारत लौटते वक्त अमेरिका में रुककर मुलाकात करने का न्योता दिया था, लेकिन मोदी ने कहा कि उनके पास पहले से तय कार्यक्रम और जिम्मेदारियां हैं, इसलिए स्टॉपओवर संभव नहीं है। ये विनम्र इनकार एक ताकतवर संदेश देता है।
बिना कुछ कहे मोदी ने अमेरिका को बता दिया कि भारत अब कोई ‘छोटा देश’ नहीं है, जिसके नेता बड़े देशों के बुलावे पर दौड़ पड़ें। ये इनकार भारत की प्राथमिकताओं और आज की दुनिया में उसकी ताकत और आत्मसम्मान को दिखाता है। ये कदम भारत की बढ़ती वैश्विक हैसियत का प्रतीक है।

6- क्या ट्रंप ने मोदी को ‘फँसाने’ की कोशिश की?

ट्रंप के स्टॉपओवर न्योते का समय बहुत अहम है। अभी पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर अमेरिका में हैं। वो 15 जून से 5 दिन के दौरे पर हैं और ट्रंप से मुलाकात की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में ट्रंप का मोदी को स्टॉपओवर के लिए बुलाना शायद इस कोशिश का हिस्सा था कि वो मोदी और मुनीर को एक साथ एक कमरे में या एक मेज पर लाकर अपनी ‘शांति स्थापक’ वाली छवि को और चमकाएँ।
ट्रंप पहले भी दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच ‘परमाणु युद्ध’ रोका। उनकी बयानबाजी और आत्मप्रचार को देखते हुए, ये सोचना गलत नहीं कि वो मोदी और मुनीर की तस्वीरों का इस्तेमाल करके अपने ‘शांति स्थापक’ दावे को और बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते।
लेकिन मोदी ने स्टॉपओवर ठुकराकर ट्रंप की इस पीआर चाल को पूरी तरह नाकाम कर दिया। साथ ही मुनीर को भी बता दिया कि भारत उनकी तरह के नेताओं के साथ बेकार की नौटंकी में वक्त नहीं गँवाएगा। ये कदम ट्रंप और मुनीर दोनों को भारत की चतुराई और दृढ़ता का आइना दिखाता है।

7- भारत और पाकिस्तान बराबर नहीं: दुनिया को साफ संदेश

पीएम मोदी की इस फोन बातचीत ने चुपके से एक बहुत बड़ा संदेश दिया है। ट्रंप को भारत और पाकिस्तान के नेताओं को एक साथ बुलाने का मौका न देकर, मोदी ने साफ कर दिया है कि भारत और पाकिस्तान को एक जैसा नहीं माना जा सकता।
अवलोकन करें:-
मोदी ने अमेरिका जाने से मना किया लेकिन ट्रम्प ने भारत आना स्वीकारा ; पाकिस्तान के गिड़गिड़ाने प
दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, एक मजबूत और आधुनिक सेना और एक स्थिर लोकतांत्रिक सरकार वाला भारत को एक टूटे-फूरे, आतंक से ग्रस्त, अस्थिर और गरीबी में डूबे पाकिस्तान के साथ नहीं जोड़ा जा सकता। ये संदेश न सिर्फ अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया के लिए है। मोदी ने बिना शब्दों के बता दिया कि भारत अब वैश्विक मंच पर अपनी शर्तों पर खड़ा है।
भारत यहाँ टिकने के लिए आया है। ये एक बहुध्रुवीय दुनिया है, और भारत उन ध्रुवों में से एक है जो अपने नियम बनाएगा और अपनी राह चुनेगा। भारत को नजरअंदाज करना या गलत समझना दुनिया की सबसे बड़ी भूल होगी।
ये संदेश पीएम मोदी ने जी-7 समिट से लौटते वक्त एक फोन कॉल में दे दिया। इस बातचीत ने न सिर्फ भारत की ताकत और संयम दिखाया, बल्कि ये भी साफ कर दिया कि भारत अब अपनी शर्तों पर दुनिया से बात करेगा।

हमास के ‘मदरसा’ में प्रोपेगेंडा की ट्रेनिंग ले रहा पाकिस्तान, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से हुई तबाही के बाद भी फैलाया गया आतंकी मुल्क की ‘जीत’ का झूठ: NCRI की स्टडी से खुलासा

               जैक्सन हिंकल (बाएं), पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (दाएं) फोटो साभार - (ऑपइंडिया इंग्लिश)
अमेरिका में रहने वाला हमास समर्थक और यहूदी विरोधी एक्टिविस्ट जैक्सन हिंकल, हाल ही में भारत के खिलाफ चलाए जा रहे पाकिस्तान प्रायोजित दुष्प्रचार अभियान में अग्रणी भूमिका निभाता पाया गया। यह अभियान विशेष रूप से पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद तेज़ हुआ।

‘द न्यूयॉर्क पोस्ट’ में सोमवार, (19 मई 2025) को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, हिंकल पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों को भारत के खिलाफ झूठी और भ्रामक खबरें फैलाने में सक्रिय रूप से मदद कर रहा है।

इस रिपोर्ट में नेटवर्क कॉन्टैगियन रिसर्च इंस्टीट्यूट (NCRI) द्वारा किए गए एक अध्ययन का हवाला दिया गया है, जिसमें हिंकल की भारत-विरोधी गतिविधियों और पाकिस्तानी एजेंसियों से उसकी संभावित साँठगाँठ को उजागर किया गया है। 

इसमें नेटवर्क कॉन्टैगियन रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनसीआरआई) द्वारा किए गए एक अध्ययन का हवाला दिया गया।

                                             द न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

न्यूयॉर्क पोस्ट ने रिपोर्ट किया, “हिंकल ने भारत में पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित के साथ उनके कार्यक्रम लेजिटिमेट टारगेट पर साक्षात्कार के एक सप्ताह बाद भारत पर कश्मीर में पाकिस्तान के खिलाफ़ झूठा अभियान चलाने का आरोप लगाया। एनसीआरआई अध्ययन में दावा किया गया है कि यह पाकिस्तान की प्राथमिक खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस द्वारा फैलाया गया दुष्प्रचार था।”

रिपोर्ट के अनुसार, जैक्सन हिंकल द्वारा फैलाए गए झूठ को सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी बॉट्स द्वारा बढ़ावा दिया गया। एनसीआरआई द्वारा किए गए अध्ययन में इस बात पर प्रकाश डाला गया।

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में बताया गया है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद, भारत के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने के लिए अप्रमाणिक नेटवर्क सक्रिय हो गए। इन नेटवर्क्स ने जनरेटिव एआई और बॉट्स का इस्तेमाल करते हुए ऐसे भड़काऊ मीम्स तैयार किए और प्रसारित किए, जिनमें भारतीय प्रतीकों, राजनीतिक नेताओं और भड़काने वाले नारों के ज़रिए झूठी कहानी को बढ़ावा दिया गया।

नेटवर्क कॉन्टैगियन रिसर्च इंस्टीट्यूट (NCRI) के अनुसार, ये ‘अप्रमाणिक’ बॉट्स जैक्सन हिंकल के भारत-विरोधी संदेशों को लाखों सोशल मीडिया यूज़र्स तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

                जैक्सन हिंकल के झूठ को पाकिस्तानी बॉट्स द्वारा बढ़ावा दिया गया, छवि न्यूयॉर्क पोस्ट से ली गई

ऑपइंडिया, द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आया है कि जैक्सन हिंकल की सोशल मीडिया गतिविधियों, खासकर एक्सपर, ऑपरेशन सिंदूर के बाद अचानक तेज़ी आई। उसने अपने पोस्ट्स में ‘भारत पर पाकिस्तान की जीत’ का झूठा दावा किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन फर्जी कहानियों को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों का मजबूत समर्थन मिला, जो वास्तविकता में भारतीय सेना द्वारा अपने सैन्य ठिकानों और आतंकी शिविरों पर किए गए हमलों को रोकने में असफल रही थीं।

जैक्सन हिंकल के कुछ ट्वीट –

  1. “भारत ने बहुत बड़ी गलती की”
  2. “भारत, पाकिस्तान की सैन्य क्षमताओं से इतना हैरान था कि उसने कल रात ट्रम्प से युद्ध विराम की भीख माँगी। ऐसा युद्ध शुरू न करें जिसे आप जीत न सकें…।”
  3. “ब्रिक्स के साथ डॉलरीकरण को आगे बढ़ाने के बजाय, भारत ने पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरू कर दिया। पश्चिमी वित्तीय पूंजी के अच्छे गुलाम।”
  4. “शायद भारत के पास बेहतर हवाई सुरक्षा होती अगर उनके सभी इंजीनियर अमेरिका में न होते…।”
  5. “पाकिस्तान भारत को अपमानित कर रहा है…मोदी को ऐसा कभी नहीं करना चाहिए था।”
  6. “भारत ने पाकिस्तान को कम आंका…।”
  7. “ट्रम्प ने भारत को शांति के लिए सहमत होने के लिए मजबूर नहीं किया। चीनी हवाई सुरक्षा ने भारत को अधीनता में आने के लिए मजबूर किया।”
  8. “पाकिस्तान जीता, भारत हारा।”
  9. “पाकिस्तान ने भारत को शर्मिंदा किया।”
                                जैक्सन हिंकल द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट
यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि जैक्सन हिंकल के एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल को भारतीय अधिकारियों द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था। हालाँकि, भारत में उसकी पहुँच पर लगाया गया यह अस्थायी प्रतिबंध सोमवार, (19 मई 2025) को हटा लिया गया।

जैक्सन हिंकल के झूठ का पर्दाफाश

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत अपनी सैन्य शक्ति का जोरदार प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को गहरी क्षति पहुँचाई। इस अभियान में भारतीय सशस्त्र बलों ने 9 पाकिस्तानी आतंकी शिविरों, कई वायु रक्षा प्रणालियों, 10 सैन्य ठिकानों, और 2 रेडियो स्टेशनों को निशाना बनाया।
यह सैन्य अभियान 7 मई 2025 को शुरू हुआ और पाकिस्तान को इतना बड़ा नुकसान हुआ कि उसे संयुक्त राज्य अमेरिका से मदद की गुहार लगानी पड़ी। भारत की सैन्य कार्रवाई ने पाकिस्तान की सेना को इस कदर हिला दिया कि उसे तुरंत युद्धविराम  की अपील करनी पड़ी।
ऑपइंडिया की रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया कि कैसे भारत ने इस हमले से पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से झुका दिया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति और सेना की क्षमताओं खासकर दुश्मन क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों ने पाकिस्तानी सेना और उसके जनरलों में गहरी दहशत पैदा कर दी।
भारत पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रागार को नष्ट करने के बेहद करीब पहुँच गया था वही रणनीतिक सौदेबाजी की चिप जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान लंबे समय से, खासकर 2014 से पहले की भारतीय सरकारों पर दबाव बनाने और छद्म आतंकवादी हमलों के बाद भारत की सैन्य प्रतिक्रिया को रोकने के लिए करता रहा है।
जब पाकिस्तान ने महसूस किया कि वह युद्ध में हार की कगार पर है और उसके महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने तबाह होने वाले हैं, तो उसे मजबूरन अमेरिका के माध्यम से भारत से ‘युद्धविराम समझौते’ के लिए संपर्क करना पड़ा।
पाकिस्तानी सेना द्वारा लिया गया यह समय पर फैसला उन्हें न केवल घरेलू स्तर पर शर्मिंदगी से बचाने में मददगार रहा, बल्कि अपनी असफलताओं के लिए जवाबदेही से भी बचा।
इस तरह, उन्हें 1971 की तरह सार्वजनिक आत्मसमर्पण और जनता के आक्रोश का सामना करने की नौबत नहीं आई। यह पूरी स्थिति इस सदियों पुरानी सच्चाई की पुष्टि करती है कि शांति केवल ताकत के आधार पर ही संभव है।
जब तक भारत आर्थिक, सैन्य और कूटनीतिक रूप से  मजबूत बना रहेगा, तब तक वह क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपनी क्षमता को कायम रखेगा हर बार पाकिस्तान को उसकी सीमा दिखाकर, जो अब भी आतंक और अस्थिरता फैलाने के लिए कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों  पर निर्भर है।

जैक्सन हिंकल का अकाउंट भारत में हो चुका बैन

जैक्सन हिंकल अमेरिका में रहने वाले एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं, जिनके एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर 3 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हैं। झूठी खबरें और षड्यंत्र के सिद्धांत फैलाने के लिए बदनाम हिंकल को इंस्टाग्राम, यूट्यूब और ट्विच जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स से प्रतिबंधित किया जा चुका है।
हिंकल ने यमन में हौथियों द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में भाषण दिया था और बेरूत में हिज़्बुल्लाह के आतंकवादी नेता हसन नसरल्लाह के अंतिम संस्कार में भी भाग लिया। उन्होंने हिज़्बुल्लाह के नियंत्रण वाले चैनलों अल-मनार टीवी और चैनल3 को इंटरव्यू दिए, और हमास के आतंकवादी बासम नैम का भी साक्षात्कार लिया।
एंटी डिफेमेशन लीग (ADL) ने हिंकल पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इज़राइल-हमास युद्ध की शुरुआत से ही लगातार यहूदी विरोधी और इज़राइल विरोधी बयानबाज़ी फैलाई है।

आत्महत्या करने पर तुली कांग्रेस को सेना के शौर्य पर नहीं विश्वास: बार-बार माँग रहे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का सबूत, अब कर्नाटक MLA ने पूछा- कौन मरा, कहाँ मरा, कितने मरे?

     कांग्रेस नेता उदित राज, MLA कोथुर मंजूनाथ और राशिद अल्वी (साभार- हिंदुस्तान टाइम्स इंडिया टुडे, रिपब्लिक)
पाकिस्तान और मुस्लिम कट्टरपंथियों पर होती कार्यवाही से कांग्रेस को राष्ट्रीय समस्या दूर होने की चिंता नहीं बल्कि चिंता है मुसलमानों का वोट। एयर और सर्जिकल स्ट्राइक का भी कांग्रेस और विपक्ष ने बहुत मजाक बनाया जिसका पाकिस्तान ने खूब फायदा उठा भारत को बदनाम करता रहा। पाकिस्तान और चीन की बोली बोलने वाली कांग्रेस और INDI गठबंधन क्या एक भी वोट की हक़दार है? Operation Sindoor के तहत आतंकवादियों पर हुई कार्यवाही से समूचा विश्व दांतों में ऊँगली दबाने को मजबूर है जबकि कांग्रेस सबूत मांग क्या कहना चाहती है? ये वही कांग्रेस है जिसने हमारे सेना प्रमुख को "गली का गुंडा" कहा था।    

भारतीय सेना के मिशन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के पूरा होने के बाद अब कर्नाटक के कांग्रेस MLA कोथुर मंजूनाथ ने सेना पर ही सवाल खड़ेकर दिए हैं। उनका कहना है कि ये मिशन सिर्फ एक दिखावा था। पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों को न्याय नहीं मिला।

कांग्रेस के कर्नाटक विधायक कोथुर मंजूनाथ ने बयान में कहा, “ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक दिखावा था। कुछ हुआ ही नहीं। बस दिखावे के लिए तीन चार विमान ऊपर भेजे और वापस बुला लिए।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंजूनाथ ने पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों के बारे में सवाल पूछते हुए आगे कहा, “क्या पहलगाम में मारे गए 26-28 लोगों को इंसाफ मिलेगा? क्या उन महिलाओं का दुख कम होगा? क्या यही तरीका है उनके सम्मान करने का?”

सेना पर सवाल क्यों?

जम्मू कश्मीर के पहलगाम के बैसारन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की जान चली गई थी। आतंकियों ने सभी लोगों से धर्म पूछ कर उनके गैर-मुस्लिम होने के पुष्टि करने के बाद बेरहमी से उनको मार दिया था। मरने वालों में देश के अलग-अलग राज्यों से कश्मीर गए ज्यादातर हिंदू पर्यटक थे।

भारत सरकार ने 7 मई 2025 को जवाबी एक्शन में ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था। इसके तहत तड़के ही भारतीय सेना ने एयर स्ट्राइक से पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में बसे 9 आतंकी ठिकानों पर मिसाइल से बर्बाद कर दिया था। इसमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के लगभग 100 आतंकियों के मारे जाने की बात सेना ने कही थी।

सेना के इस बयान पर मंजूनाथ ने सवाल किया है। उन्होंने कहा, “इस बात की क्या पुष्टि है कि 100 आतंकवादी मारे गए? हमारी सीमा में जो घुसे, उन आतंकवादियों की पहचान क्या है?”

उन्होंने इंटेलिजेंस सिस्टम प्रणाली की सफलता पर भी तंज कसा। मंजूनाथ ने पूछा, “सीमा पर सुरक्षा क्यों नहीं थी और आतंकी कैसे भाग गए? हमें आतंकवाद की जड़ समेत तने और शाखों को भी पहचान कर खत्म करना चाहिए।”

कार्रवाई में भी परेशानी

कोथुर मंजूनाथ यही नहीं रुके। इसके बाद उन्होंने मीडिया पर भी सवाल खड़े कर दिए। वह बोले, “सारी टीवी चैनल अलग-अलग कहानी बता रहे हैं। कोई यह नहीं बता रहा है कि असल में कौन मारा गया, कहाँ मारा गया और कितने मारे गए।”

मंजूनाथ के इस बयान को सुनकर कांग्रेस की पुरानी आदत फिर फिर याद आ रही है। असल में कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है। उन्हें सरकार की आलोचना के लिए जब कुछ नहीं मिल रहा तो सेना पर ही सवाल उठा दिया। दिलचस्प बात तो ये है कि इस तरह की हरकतें सिर्फ कांग्रेस के विधायक या छुटभय्ये नेता ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्तर वाले नेता तक कर चुके हैं।

बात पलटने में माहिर विपक्ष

इससे पहले जब भारत सरकार पहलगाम आतंकी हमले के बाद एक्शन में समय ले रही थी तो यही विपक्ष था जिसने जमकर मोदी सरकार और भाजपा पर आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेला था और यहाँ तक कहा था कि सरकार कुछ नहीं करेगी। अब जब एक्शन हो चुका है और इस कार्रवाई से पूरे देश को संतुष्टि मिली है तो विपक्ष के नेता यह कह रहे हैं कि युद्ध नहीं होना चाहिए था।

इनकी दोगली बातों में मंजूनाथ का एक और बयान शामिल है। उन्होंने कहा, “कर्नाटक के लोग पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश हर जगह के नागरिकों के युद्ध के खिलाफ हैं।” साथ ही ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई पर ये कह दिया कि जिन महिलाओं के सामने उनके पतियों को मारा गया यह कार्रवाई उनका दुख नहीं मिटा सकती और यह समाधान नहीं है।

शायद मंजूनाथ ने कर्नाटक के ही शिवमोगा के रहने वाले मंजूनाथ समेत कानपुर के शुभम द्विवेदी, पुणे के संतोष जगदाले और कौस्तुभ गणबोटे के घरवालों की वो खुशी और संतुष्टि का भाव चेहरे पर नहीं देखा जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद उनके मन में था और उन्होंने इस एक्शन पर सरकार को धन्यवाद कहा था।

एक तरफ नहीं रह पा रहा विपक्ष

अगर मंजूनाथ की बात पर गौर किया जाए तो असल में एक सवाल उन्हीं से पूछा जाना बनता है कि अगर ऑपरेशन सिंदूर जैसा एक्शन आतंकी हमलों का समाधान नहीं है तो कॉन्ग्रेस के अनुसार समाधान क्या होना चाहिए।

आतंकी जब तब भारत में निर्दोष लोगों की जान ले लेते हैं। भारत के दिल में घुसकर 26/11 के मुंबई हमले कर देते हैं। सीमा की रक्षा करने वाले देश के 40 जवानों को मौत की घाट उतार देते हैं। साथ ही बेखौफ होकर यह सोचते हैं कि भारत कभी कोई एक्शन नहीं ले सकता।

ऐसे में ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई कांग्रेस को क्यों परेशान कर रही है और वह भी तब जबकि इसमें सिर्फ आतंकियों को ही निशाना बनाया गया और दुश्मन देश पाकिस्तान की सैन्य रक्षा प्रणाली को कमजोर करने की कोशिश की गई। आम लोगों को जरा-सा भी हताहत नहीं किया गया।

सब एक ही थाली के चट्टे-बट्टे

मंजूनाथ कोई इकलौते कांग्रेसी नहीं हैं जो ऑपरेशन सिंदूर या सरकार पर सवाल उठा रहे होंं। विपक्ष के राजनेताओं में भारतीय सेना को लेकर कोई न कोई परेशानी होती ही रही है।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता पृथ्वीराज चौहान ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए ऑपरेशन सिंदूर को भावनात्मक लाभ लेने की का बयान दिया था। उन्होंने यह कहा था कि ऑपरेशन मिशन का नाम सिंदूर रखकर सरकार भावनात्मक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।

इसके अलावा कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी पूछा था कि ऑपरेशन सिंदूर में क्या सभी आतंकवादी मारे गए हैं? और क्या मोदी सभी आतंकियों को खत्म कर पाएँगे। इसी तरह कांग्रेस की वरिष्ठ नेता उदित राज को भी इस मिशन के नाम पर ही परेशानी हो गई थी। उन्होंने यह बयान दे डाला था इस मिशन का नाम कुछ और होना चाहिए था क्योंकि यह एक धर्म विशेष को बताता है।

बात यही नहीं रुकती। सहारनपुर के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर सवाल उठाने में देर नहीं की थी और इस मिशन का पूरा हिसाब माँग लिया था। इमरान मसूद ने तो उरी में मारे गए जवानों के लिए जवाबी कार्रवाई में की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर भी सवाल खड़े कर दिए थे और यह कह दिया था कि पाकिस्तान सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर भारत का मजाक उड़ाता है।

यह कोई पहली बार नहीं है कि जब कांग्रेसियों ने इस तरह की बयानबाजी की हो। पार्टी के बड़े नेता सामने से तो सरकार के काम की तारीफ कर रहे हैं, लेकिन उनके नीचे बैठे विधायक और राज्य स्तरीय नेता लगातार इस तरह के बयान देकर सेना का मनोबल तोड़ने और लोगों के बीच कायम शांति व्यवस्था भंग करने की कोशिश करते रहते हैं।

न्यूक्लियर ब्लैकमेल नहीं सहेगा भारत, पाकिस्तान से केवल PoK पर होगी बात: मोदी ने राष्ट्र को किया संबोधित, कहा- खून और पानी साथ नहीं बहेंगे, ‘ऑपरेशन’ सिंदूर ने खींची नई लकीर


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद राष्ट्र के नाम संबोधन में पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने साफ कहा कि भारत का एक्शन अभी सिर्फ स्थगित हुआ है, खत्म नहीं। पाकिस्तान अगर आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा, तो भारत उसकी हर हरकत का हिसाब लेगा।

मोदी ने अपने सम्बोधन में विपक्ष और उसके टुकड़ों पर पल रहे मीडिया को भी समझा दिया कि भारत का एक्शन अभी सिर्फ स्थगित हुआ है, खत्म नहीं, जिसे देखो जनता को cease fire के नाम से गुमराह कर रहा है। Cease fire राष्ट्र प्रमुखों के एक टेबल पर बैठने पर होता है, DGMO के साथ नहीं। दूसरे, मोदी का यह सम्बोधन भारत राष्ट्र को नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से भारत विरोधी विदेशियों को भी था। जो भारत को अस्थिर कर विकास में बाधक बनने पाकिस्तान को उकसाते रहते हैं।   

मोदी ने दोहराया कि टेरर और टॉक एक साथ नहीं चल सकते। अगर पाकिस्तान से कोई बात होगी, तो वो सिर्फ आतंकवाद और पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) पर होगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि व्यापार और आतंक, पानी और खून भी एक साथ नहीं बह सकते।

22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिला दिया था। आतंकियों ने मासूम पर्यटकों को धर्म पूछकर बेरहमी से मार डाला। इस बर्बरता का जवाब देने के लिए भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ शुरू किया। 6 मई की रात और 7 मई की सुबह भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। इस कार्रवाई में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। पीएम ने कहा कि ये आतंकी दशकों से पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे थे और भारत के खिलाफ साजिश रच रहे थे।

मोदी ने पाकिस्तान की बौखलाहट का भी जिक्र किया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने भारत के सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला करने की कोशिश की, लेकिन भारत ने इन हमलों को आसमान में ही नाकाम कर दिया। पीएम ने कहा कि इससे पाकिस्तान का असली चेहरा दुनिया के सामने बेनकाब हो गया। उन्होंने भारत की सेनाओं, खुफिया एजेंसियों और वैज्ञानिकों की तारीफ की, जिन्होंने इस ऑपरेशन को कामयाब बनाया।

जवाबी कार्रवाई सिर्फ स्थगित, उसका रवैया नहीं बदला तो…

पीएम मोदी ने कहा, “दुनिया ने देखा कि कैसे पाकिस्तान के ड्रोन्स और पाकिस्तान की मिसाइलें, भारत के सामने तिनके की तरह बिखर गईं। भारत के सशक्त एयर डिफेंस सिस्टम ने, उन्हें आसमान में ही नष्ट कर दिया। पाकिस्तान की तैयारी सीमा पर वार की थी, लेकिन भारत ने पाकिस्तान के सीने पर वार कर दिया। भारत के ड्रोन्स, भारत की मिसाइलों ने सटीकता के साथ हमला किया। पाकिस्तानी वायुसेना के उन एयरबेस को नुकसान पहुँचाया, जिस पर पाकिस्तान को बहुत घमंड था। भारत ने पहले तीन दिनों में ही पाकिस्तान को इतना तबाह कर दिया, जिसका उसे अंदाजा भी नहीं था। इसलिए भारत की आक्रामक कार्रवाई के बाद पाकिस्तान बचने के रास्ते खोजने लगा।

उन्होंने आगे कहा, “पाकिस्तान दुनिया भर में तनाव कम करने की गुहार लगा रहा था। और बुरी तरह पिटने के बाद इसी मजबूरी में 10 मई की दोपहर को पाकिस्तानी सेना ने हमारे DGMO को संपर्क किया। तब तक हम आतंकवाद के इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर तबाह कर चुके थे, आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया गया था, पाकिस्तान के सीने में बसाए गए आतंक के अड्डों को हमने खंडहर बना दिया था।”

पीएम मोदी ने कहा, “भारत से पिटने के बाद पाकिस्तान की तरफ से गुहार लगाई गई। पाकिस्तान की तरफ से जब ये कहा गया, कि उसकी ओर से आगे कोई आतंकी गतिविधि और सैन्य दुस्साहस नहीं दिखाया जाएगा। तो भारत ने भी उस पर विचार किया। और मैं फिर दोहरा रहा हूँ, हमने पाकिस्तान के आतंकी और सैन्य ठिकानों पर अपनी जवाबी कार्रवाई को अभी सिर्फ स्थगित किया है। आने वाले दिनों में हम पाकिस्तान के हर कदम को इस कसौटी पर मापेंगे, कि वो क्या रवैया अपनाता है।”

पीएम मोदी ने कहा, “पाकिस्तानी फौज, पाकिस्तान की सरकार, जिस तरह आतंकवाद को खाद-पानी दे रहे है, वो एक दिन पाकिस्तान को ही समाप्त कर देगा। पाकिस्तान को अगर बचना है तो उसे अपने टैरर इंफ्रास्ट्रक्चर का सफाया करना ही होगा। इसके अलावा शांति का कोई रास्ता नहीं है।”

उन्होंने कहा कि भारत का मत एकदम स्पष्ट है—

  1. टैरर और टॉक, एक साथ नहीं हो सकते
  2. टैरर और ट्रेड, एक साथ नहीं चल सकते।
  3. और पानी और खून भी एक साथ नहीं बह सकता।
मैं आज विश्व समुदाय को भी कहूँगा, हमारी घोषित नीति रही है..
  1. अगर पाकिस्तान से बात होगी, तो टेरेरिज्म पर ही होगी।
  2. अगर पाकिस्तान से बात होगी, तो पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर, PoK उस पर ही होगी।

भारत ने तय कर दिया है तीन पैमाना

पीएम मोदी ने कहा कि भारत की तीनों सेनाएँ, हमारी एयरफोर्स, हमारी आर्मी, और हमारी नेवी, हमारी बॉर्डर सेक्योरिटी फोर्स- BSF, भारत के अर्धसैनिक बल, लगातार अलर्ट पर हैं। सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के बाद, अब ऑपरेशन सिंदूर आतंक के खिलाफ भारत की नीति है। ऑपरेशन सिंदूर ने आतंक के खिलाफ लड़ाई में एक नई लकीर खींच दी है, एक नया पैमाना, न्यू नॉर्मल तय कर दिया है।
  1. भारत पर आतंकी हमला हुआ तो मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा। हम अपने तरीके से, अपनी शर्तों पर जवाब देकर रहेंगे। हर उस जगह जाकर कठोर कार्रवाई करेंगे, जहाँ से आतंक की जड़ें निकलती हैं।
  2. कोई भी न्यूक्लियर ब्लैकमेल भारत नहीं सहेगा। न्यूक्लियर ब्लैकमेल की आड़ में पनप रहे आतंकी ठिकानों पर भारत सटीक और निर्णायक प्रहार करेगा।
  3. हम आतंक की सरपरस्त सरकार और आतंक के आकाओं को अलग-अलग नहीं देखेंगे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने पाकिस्तान का वो घिनौना सच फिर देखा है, जब मारे गए आतंकियों को विदाई देने, पाकिस्तानी सेना के बड़े-बड़े अफसर उमड़ पड़े। स्टेट स्पॉन्सरड टेरेरिज्म का ये बहुत बड़ा सबूत है। हम भारत और अपने नागरिकों को किसी भी खतरे से बचाने के लिए लगातार निर्णायक कदम उठाते रहेंगे।

ऑपरेशन सिंदूर न्याय की प्रतिज्ञा

पीएम ने ऑपरेशन सिंदूर को देश की हर बेटी, बहन और माँ को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि न्याय की प्रतिज्ञा है। भारत अब किसी भी न्यूक्लियर ब्लैकमेल को नहीं सहेगा। मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन शांति के लिए शक्ति जरूरी है। उन्होंने भगवान बुद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि शांति का रास्ता शक्ति से होकर जाता है।
पीएम मोदी ने कहा, “आज बुद्ध पूर्णिया है। भगवान बुद्ध ने हमें शांति का मार्ग दिखाया है। शांति का मार्ग शक्ति से होकर जाता है। मानवता शांति और समृद्धि की तरफ बढ़े। हर भारतीय शांति के साथ जी सके। विकसित भारत के सपने को पूरा कर सके, इसके लिए भारत का शक्तिशाली होना बहुत जरूरी है। और आवश्यकता पड़ने पर इस शक्ति का इस्तेमाल भी जरूरी है। पिछले कुछ दिनों में भारत ने यही किया है।”
पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए पीएम ने कहा कि भारत की सेना पूरी तरह अलर्ट है। अगर पाकिस्तान ने फिर से कोई गलती की, तो भारत उसका मुँहतोड़ जवाब देगा। मोदी ने देशवासियों की एकजुटता की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि जब पूरा देश एक साथ खड़ा होता है, तो फौलादी फैसले लिए जाते हैं। ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कितना सख्त है।
पीएम ने साफ किया कि भारत का लक्ष्य आतंकवाद को जड़ से खत्म करना है। पाकिस्तान के वादों को अब भारत कसौटी पर कसेगा। अगर पाकिस्तान आतंकवाद को नहीं रोकता, तो भारत का अगला कदम और सख्त होगा।

पहलगाम में हिंदुओं के नरसंहार पर पूरा देश दुखी, लेकिन देश और सेना विरोधी बात कर रही थी यूपी की मुस्लिम टीचर जेबा अफरोज


उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में सरकारी शिक्षिका जेबा अफरोज को पहलगाम आतंकी हमले पर आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट करने के लिए निलंबित कर दिया गया है। जेबा, चोपन के मालोघाट प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका थी। उसने फेसबुक पर सैन्य अधिकारियों के खिलाफ गलत बातें लिखीं, जिससे लोगों में गुस्सा भड़क गया।

 रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोगों ने जेबा अफरोज की शिकायक की, इसके बाद (बेसिक शिक्षा अधिकारी) BSA मुकुल आनंद पांडे ने उसे निलंबित कर दिया है। मामले की जाँच खंड शिक्षा अधिकारी (BEO)को सौंपी गई है। जिन्हें 15 दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने के आदेश हैं।

जेबा अफरोज ने फेसबुक अकाउंट पर पहलगाम हमले के संबंध में आपत्तिजनक पोस्ट को शेयर किया था। इस पोस्ट में सैन्य अधिकारियों को लेकर गलत बातें लिखी गई थीं।

                           जेबा अफऱोज द्वारा किया गया विवादित पोस्ट (साभार : facebook/zeba afroz)

जेबा अफरोज पर आगरा में मारे गए मुस्लिम युवक के संबंध में विवादित टिप्पणी करने का भी आरोप है।

BSA ने अधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि शिक्षिका का आचरण सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू आचार संहिता का उल्लंघन है।

‘हिन्दू डॉक्टर ने मरीज को मुस्लिम जानकर इलाज से किया इनकार’: पहलगाम अटैक के बाद ‘विक्टिम मुस्लिम’ नैरेटिव गढ़ने को The Quint ने परोसी फर्जी कहानी

                            द क्विंट' ने हिन्दू डॉक्टर चंपाकली सरकार को किया बदनाम (साभार: ऑपइंडिया इंग्लिश)
सोशल मीडिया पर रविवार (26 अप्रैल ,2025) को ‘मुस्लिम पीड़ित’ की झूठी कहानी फैलाई गई, जिसमें दावा किया गया कि कोलकाता की एक स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ चंपाकली सरकार ने एक मुस्लिम मरीज का इलाज करने से इनकार कर दिया। आरोप था कि कस्तूरी दास मेमोरियल सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर चंपाकली ने कंगकोना खातून नामक महिला को उसके मजहब के चलते चिकित्सा सेवा देने से मना कर दिया।

रिपोर्ट में डॉ सरकार को विलेन दिखाने के लिए एक अपुष्ट कॉल रिकॉर्डिंग भी पेश की गई। यह उल्लेख करना ज़रूरी है कि उस ऑडियो क्लिप की अब तक कोई फॉरेंसिक जाँच नहीं हुई है और उसकी असलियत की पुष्टि नहीं हो सकी है।

हालाँकि, यह दावा पूरी तरह झूठा और भ्रामक निकला। यह घटना पहलगाम आतंकी हमले के बाद सामने आई उन कई फर्जी खबरों में से एक है, जो सोशल मीडिया और कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा फैलाई जा रही हैं। इसके पीछे की मंशा इस्लामी आतंकवादियों द्वारा किए गए हिंदुओं के नरसंहार जैसे गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाना और हिंदुओं को गलत तरीके से खलनायक के रूप में प्रस्तुत करना प्रतीत होता है।

‘द क्विंट’ और कुछ अन्य मीडिया संस्थानों द्वारा इन फर्जी कहानियों को पुनः प्रकाशित कर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, जिससे सांप्रदायिक तनाव और गलतफहमियों को बढ़ावा मिला।

वामपंथी प्रोपेगेंडा आउटलेट ‘द क्विंट’ ने डॉ चंपाकली सरकार के हवाले से यह बयान दिया, “आपके मजहब के लोग मेरे धर्म के लोगों को मार रहे हैं, आप लोग हत्यारे हैं।”

                                                     ‘द क्विंट’ की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

इसमें आगे आरोप लगाया गया है, “डॉक्टर ने कहा – आपके पति को हिंदुओं द्वारा मार दिया जाना चाहिए ताकि आप उस दर्द को महसूस कर सकें जो हिंदुओं ने झेला है। आपको अपने इलाज के लिए केवल मदरसों और मस्जिदों में जाना चाहिए, जहाँ मुस्लिमों को आतंकवादी बनना सिखाया जाता है।”

डिजिटल मीडिया पोर्टल ‘द क्विंट’ के हवाले से, ये बात सामने आई है जिसमें डॉ सरकार को एक कथित कॉल रिकॉर्डिंग के आधार पर खलनायक के रूप में दिखाया गया है। आरोप है कि यह रिकॉर्डिंग असत्यापित है और इसे बिना पुष्टि के रिपोर्ट में प्रमुखता दी गई। रिपोर्ट में कंगकोना खातून, उनके पति और भाभी महफूजा (जो पेशे से वकील हैं) के बयानों को गलत रूप में प्रस्तुत किया गया है। 

वहीं, डॉ सरकार के पक्ष को बहुत ही सीमित जगह दी गई, जबकि पूरी रिपोर्ट उन्हीं के इर्द-गिर्द केंद्रित थी। रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकार अलीज़ा नूर ने इस ख़बर को लिखा, जिन पर पहले भी ‘मुस्लिम पीड़ित’ की कहानी को स्थापित करने के लिए एक फर्जी खबर फैलाने के आरोप लग चुके हैं।

                                                   ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्टस के अनुसार, डॉक्टर को मरीज के मजहब का पता नहीं था और उसके सरनेम ‘खातून’ की जानकारी मिलने के बाद डॉक्टर नाराज हो गई।

शिकायत के अनुसार, डॉक्टर पिछले 7 महीनों से महिला का इलाज कर रही थी, डॉक्टर मरीज का पहला नाम कोंकणा से जानती थी। आरोप लगाया गया है कि उसका सरनेम ‘खातून’ देखकर डॉक्टर ने कथित तौर पर कहा की वो मुस्लिम महिला का इलाज नहीं करेंगी। बकौल रिपोर्ट, डॉक्टर ने हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले का हवाला दिया और मजहबी कट्टरता के आरोप लगाए।

इस फर्जी खबर को मुस्लिम मिरर, डेक्कन क्रॉनिकल, मकतूब मीडिया और सियासत जैसी इस्लामी प्रचार साइटों द्वारा प्रोपेगंडा के तहत फैलाने का काम किया गया।

दावे बनाम सच्चाई, क्या था असल मामला?

कंगकोना खातून पिछले 7 महीने से अपनी नियमित जाँच के लिए डॉ सरकार के पास जा रही थीं। इतने लंबे समय तक इलाज के दौरान डॉक्टर को मरीज की मजहबी पहचान का पता न चलना असंभव सा लगता है। यदि डॉक्टर पूर्वाग्रही होतीं, तो शुरुआत से ही इलाज करने से इनकार कर देतीं। खातून का कहना है कि डॉक्टर को उसके उपनाम के बारे में हाल ही में जानकारी मिली और तभी से उनके व्यवहार में बदलाव आया।

दिलचस्प बात यह है कि यह खुलासा पहलगाम आतंकी हमले के दो दिन बाद हुआ। उसके मुताबिक, गुरुवार (24 अप्रैल, 2025) को डॉक्टर ने उसका इलाज करने से मना कर दिया, जिसके बाद 25 अप्रैल को उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। हालाँकि, जब जाँच शुरू हुई और तथ्य सामने आए, तो उसके आरोपों की बुनियाद कमजोर पड़ गई।

                                  डॉक्टर को महिला के पूरे नाम से ही जा रहा था पेमेंट, देख सकते हैं सरनेम

कोलकाता के प्रसिद्ध एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉ प्रमोद रंजन रॉय ने गुरुवार (24 अप्रैल 2025) को सोशल मीडिया पर एक स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें दिखाया गया था कि कंगकोना खातून ने डॉ चंपाकली सरकार को परामर्श शुल्क का भुगतान किया था। यह स्क्रीनशॉट उसी दिन का था जिस दिन खातून ने आरोप लगाया था कि उनका उचित इलाज नहीं किया गया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।

यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब किसी तरह का इलाज किया ही नहीं गया, तो मरीज ने डॉक्टर को जाँच के लिए परामर्श शुल्क क्यों अदा किया?

इस मुद्दे पर अब और भी स्पष्टता आ गई है। मंगलवार, (29 अप्रैल, 2025) को ‘पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम’ (WBDF) द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि उन्होंने डॉ चंपाकली सरकार द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की समीक्षा की है, और उस समीक्षा के आधार पर उनके बयान को सही और विश्वसनीय माना है।

                                                         WBDF द्वारा प्रेस विज्ञप्ति

WBDF ने अपने बयान में कहा, “संबंधित डॉक्टर से सीधे संपर्क करने और तथ्यों की पुष्टि करने के बाद, हमने पाया कि बताए गए तथ्य प्रसारित किए जा रहे आरोपों के विपरीत हैं। वास्तव में, जिस मरीज़ की बात हो रही है, उसे मरीज़ के अनुरोध पर डॉक्टर ने उसके घर पर देखा था। सबूत के तौर पर, हमने परामर्श शुल्क की ऑनलाइन भुगतान रसीद की पुष्टि की है, जिस पर उचित समय और दिनांक अंकित है, जो बताता है कि परामर्श वास्तव में हुआ था।” WBDF के बयान ने कंगकोना खातून के झूठ की हवा निकाल दी।

यह बताया गया है कि खातून ने डॉ चंपक और सरकार के बीच एक निजी बातचीत सुनी थी, जो उनके खातून से संबंधित नहीं थी।

इसमें यह भी बताया गया है कि पहले भी डॉक्टरों को झूठे आरोपों के तहत इसी तरह निशाना बनाया गया है। ऑपइंडिया ने इस मामले को लेकर ‘पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम’ (WBDF) के सदस्य डॉ. कौशिक चाकी से संपर्क किया, जिन्होंने प्रेस विज्ञप्ति की प्रामाणिकता की पुष्टि की।

डॉ चंपाकली सरकार का क्या कहना है

डॉ प्रमोद रंजन रॉय द्वारा शेयर किए गए वीडियो में पीड़िता डॉ चंपाकली सरकार ने अपना बयान दिया है।
उन्होंने अपने बयान में लिखा, “मैं डॉ CK सरकार हूँ। मैं पिछले 30 सालों से बेहाला, साउथ 24 परगना में प्रैक्टिशनर हूँ। मैं मेडिकल नैतिकता में विश्वास रखती हूँ। मेरे लिए सभी मरीज एक समान हैं। मैं अपने सभी मरीजों को समान प्राथमिकता देती हूँ। मेरी नजर में जाति, धर्म और नस्ल का कोई महत्व नहीं है। मैं मरीजों का सही और नैतिक तरीके से इलाज करने की पूरी कोशिश करती हूँ। कुछ लोगों को मुझसे दिक्कत थी। आप लोग अफवाहों पर ध्यान न दें। मेरे करियर को बर्बाद करने की कोशिश की गई है। मुझे सोशल मीडिया और न्यूज रिपोर्ट से जानकारी मिली है। संकट के समय में इस तरह की अफवाहें फैलाई जाती हैं। मुझे उम्मीद है कि आप लोग इस पर विश्वास नहीं करेंगे।”
साथ ही, डॉक्टर ने निजी कारणों से अपने 3 दशक लंबे करियर को बर्बाद करने की कोशिश करने के लिए खातून के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात भी कही है।
डॉ चंपाकली सरकार ने ‘द टेलीग्राफ’ को बताया, “मेरे 80 प्रतिशत मरीज़ मुस्लिम हैं। क्या मैं कुछ ऐसा कहूँगी जिससे मुझे सबसे ज़्यादा दुःख पहुँचे? मैंने परनाश्री पुलिस स्टेशन में शिकायत भी दर्ज कराई है कि मुझे बदनाम किया जा रहा है।”
डॉक्टर ने यह भी कहा की यह असत्यापित ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग फ़र्जी है। उन्होंने ‘द क्विंट’ से कहा, “नहीं, यह सब फ़र्ज़ी है, यह मेरी कॉल रिकॉर्डिंग नहीं है।”
यह हिंदू समुदाय को बदनाम करने का पहला प्रयास नहीं है। हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद, ऐसी साजिशों की कोशिश हुई हैं जिनका इस्तेमाल आकर आतंकी हमलों के पीछे मजहबी घृणा वाली वास्तविकता से ध्यान बँटाया जा सके, कश्मीरियों और मुस्लिमों को हिन्दुओं द्वारा निशाना बनाए जाने की झूठी कहानी गढ़ी जा सके।
इस रणनीति के तहत ‘मुस्लिम पीड़ित’ कार्ड का इस्तेमाल किया गया, ताकि बहस का केंद्र आतंकवाद से हटकर सांप्रदायिक पीड़ाओं की ओर मोड़ा जा सके। इसी सिलसिले में, एक और फ़र्ज़ी खबर सोशल मीडिया पर फैलाई गई, जिसमें दावा किया गया कि बेंगलुरु में एक मुस्लिम कॉर्पोरेट कर्मचारी की मौत उसके हिंदू सहकर्मियों द्वारा ‘गायत्री मंत्र’ ज़बरदस्ती जपवाने और पहलगाम हमले पर प्रतिक्रिया न देने के कारण हुई।
इस फर्जी खबर का पर्दाफाश ऑपइंडिया ने किया। यह कहानी मूल रूप से एक लिंक्डइन यूजर इशान सक्सेना की मनगढ़ंत पोस्ट पर आधारित थी, जिसे तथाकथित पत्रकार अलीजा नूर ने बिना किसी तथ्य की जाँच के रिपोर्ट किया। इस खबर को वामपंथी मीडिया प्लेटफॉर्म ‘द क्विंट‘ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया, लेकिन जब सच्चाई सामने आई, तो बिना किसी माफ़ीनामे के चुपचाप हटा दिया गया। यह दिखाता है कि किस तरह तथ्यों की पुष्टि किए बिना ‘नैरेटिव’ गढ़ने की कोशिश की जाती है, और जब वो फिट नहीं बैठती, तो उसे दबा दिया जाता है।
नूर, जिन्होंने पहले कोलकाता के डॉक्टर की कहानी लिखी थी, अब ताज़ा खुलासे के बाद अपने एक्स (Twitter) और इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट कर चुकी हैं। इसी प्रोपेगेंडा तंत्र ने जामिया मिलिया इस्लामिया की एक कश्मीरी छात्रा के साथ छेड़छाड़ की घटना को भी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया था। लेकिन जब बाद में मामला  सामने आया कि आरोपित मेवात का मोहम्मद आबिद है, तो यह पूरा नैरेटिव अचानक शांत हो गया।