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भारत-ब्राजील दोस्ती के नए युग का आगाज: 20 बिलियन डॉलर व्यापार लक्ष्य और ग्लोबल साउथ की गूंज


भारत और ब्राजील ने अपने द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ते हुए आगामी पांच वर्षों में व्यापार को 20 बिलियन डॉलर के पार ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। 21 फरवरी को नई दिल्ली में ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा के साथ एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच का व्यापार केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि आपसी विश्वास का प्रतिबिंब है। राष्ट्रपति लूला की इस यात्रा ने न केवल AI Impact Summit की शोभा बढ़ाई, बल्कि रक्षा, ऊर्जा और तकनीक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रणनीतिक तालमेल को एक नई ऊर्जा भी प्रदान की है।

प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों का सहयोग अब केवल द्विपक्षीय लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे ग्लोबल साउथ के भविष्य को दिशा देने वाला है। ऊर्जा सुरक्षा से लेकर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक, भारत और ब्राजील एक ऐसी ‘win-win’ पार्टनरशिप की ओर बढ़ रहे हैं, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को अधिक लचीला बनाएगी।

भविष्य की तकनीकों पर विशेष जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि भारत और ब्राजील मिलकर ब्राजील में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक ‘Centre of Excellence’ स्थापित करने पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सुपर कंप्यूटर और सेमीकंडक्टर्स जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने समावेशी विकास का मंत्र देते हुए कहा, “Technology must be inclusive and it must become a bridge for shared progress.” यह बयान दर्शाता है कि दोनों देश तकनीक का उपयोग समाज के हर वर्ग को जोड़ने के लिए करना चाहते हैं।

रक्षा और क्रिटिकल मिनरल के क्षेत्र में हुए समझौते भी इस यात्रा के मुख्य आकर्षण रहे। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि ये कदम एक-दूसरे के प्रति भरोसे और रणनीतिक तालमेल का बेहतरीन उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि क्रिटिकल मिनरल और रेयर अर्थ में जो समझौता हुआ है, वो रिजिल्यन्ट सप्लाई चेन के निर्माण में एक बड़ा कदम है।

जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा की वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों नेताओं ने ठोस रणनीति साझा की। इथेनॉल ब्लेंडिंग और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। प्रधानमंत्री ने ग्लोबल बायो-फ्यूल अलायंस में ब्राजील की सक्रिय भूमिका की सराहना की। इसके साथ ही, कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के जरिए फूड सिक्योरिटी को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वास्थ्य क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि भारत से ब्राजील को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की आपूर्ति बढ़ाई जाएगी। साथ ही, ब्राजील में आयुर्वेद के विस्तार की योजना है। उन्होंने कहा कि ब्राजील में आयुर्वेद और पारंपरिक मेडिसिन का भी विस्तार किया जाएगा, ताकि होलिस्टिक हेल्थकेयर को बढ़ावा मिले। यह पहल पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाएगी। 

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और ब्राजील ने एक सुर में वैश्विक संस्थानों में सुधार की वकालत की। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ किया कि जब दो बड़े लोकतंत्र साथ आते हैं, तो दुनिया पर उसका व्यापक असर पड़ता है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारत और ब्राजील एकमत हैं कि आतंकवाद और उसके समर्थक पूरी मानवता के शत्रु हैं। दोनों देशों ने संवाद और कूटनीति को ही हर समस्या का समाधान माना है।

अंत में राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि मुझे पूरा विश्वास है कि आपकी यह यात्रा हमारी रणनीतिक साझेदारी को और गहराई देगी और आने वाले वर्षों में सहयोग के नए आयाम स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि आपकी यात्रा न केवल व्यापारिक रिश्तों को मजबूती देने वाली साबित हुई है, बल्कि इसने वैश्विक पटल पर विकासशील देशों की स्थिति को और अधिक सशक्त बना दिया है।

एप्सटीन फाइल्स से ‘विदेशी साजिश’ तक: ऐसे गढ़ा गया प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ फेक नैरेटिव

देश में लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम के माध्यम से मनमाफिक फेक नैरेटिव गढ़ने की आदत काफी पुरानी है। लेकिन हाल के वर्षों में यह एक संगठित, योजनाबद्ध और अंतरराष्ट्रीय साजिश के साथ सामने आई है। ‘एप्सटीन फाइल्स’ के नाम पर पीएम मोदी और मोदी सरकार को जानबूझकर घसीटने की कोशिश उसी रणनीति की ताजा कड़ी है। सोशल मीडिया से लेकर कुछ चुनिंदा डिजिटल प्लेटफॉर्म तक यह झूठ इस तरह फैलाया गया है, मानो कोई अकाट्य सच सामने आ गया हो। जबकि तथ्य यह है कि जिन दस्तावेजों और सूचियों का हवाला दिया गया, उनमें पीएम मोदी का नाम था ही नहीं। सवाल यह नहीं कि झूठ पकड़ा गया, सवाल यह है कि यह झूठ गढ़ा किसने, क्यों गढ़ा और किस मकसद से गढ़ा गया। यह दिलचस्प और ध्यान देने योग्य अकाट्य तथ्य है कि जब-जब भारत वैश्विक मंच पर मजबूत होता नजर आता है, वह चाहे जी-20 की अध्यक्षता हो, रणनीतिक साझेदारियां हों, आत्मनिर्भर भारत की नीति हो या फिर तेजी से बढ़ती इकोनॉमी हो, तब-तब इकोसिस्टम के जरिए ऐसे नैरेटिव तेज हो जाते हैं।

मोदी का नाम महज संयोग नहीं, खतरनाक षड्यंत्र

पहले जरा यह जान लेते हैं कि यह ‘एप्सटीन फाइल्स’ आखिर हैं क्या। जेफरी एप्सटीन एक अमेरिकी अपराधी था, जिस पर यौन शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोप लगे। उसकी जांच से जुड़े कई दस्तावेज, संपर्क और अदालती कागजात समय-समय पर सार्वजनिक होते रहे हैं। लेकिन इन फाइल्स का इस्तेमाल एक राजनीतिक हथियार की तरह करने की साजिशें रची जा रही हैं। यह महज संयोग नहीं हो सकता कि इस खतरनाक षड्यंत्र में भारत के लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने नरेन्द्र मोदी का नाम घसीटा जा रहा है। इस खेल के पीछे वही लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम दिखाई देता है, जो वर्षों से ‘अर्बन नक्सल’, ‘इंटेलेक्चुअल डिसेंट’ और ‘एक्टिविस्ट जर्नलिज्म’ के नाम पर भारत की संस्थाओं, सेना, लोकतंत्र और अब सीधे प्रधानमंत्री को निशाना बनाता रहा है।

 लेफ्ट लिबरल गैंग सोशल मीडिया की साजिशों में लिप्त

दरअसल चुनावी हार, जनसमर्थन की कमी और वैचारिक दिवालियापन ने इस गैंग को सड़क की राजनीति से सोशल मीडिया की साजिशों तक सीमित कर दिया है। जब देश के भीतर मुद्दे नहीं मिलते, तब विदेशों में बैठकर ‘विदेशी रिपोर्ट’, ‘लीक दस्तावेज’ और ‘अज्ञात सूत्रों’ के सहारे भारत की छवि धूमिल करने की कोशिश होती है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि मोदी सरकार को बदनाम करने से इन्हें मिलेगा क्या? जवाब साफ है: राजनीतिक पुनर्जीवन की उम्मीद। जिस नेतृत्व को बार-बार जनता ने नकार दिया हो, उसके लिए नैरेटिव वॉर आखिरी हथियार बचा है। हालांकि इसमें भी उसे बुरी तरह मात मिली है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की साख को चोट पहुंचाना, निवेशकों में भ्रम फैलाना और देश के भीतर अविश्वास का माहौल बनाना यही इस पूरी मुहिम का लक्ष्य है।
अमेरिका से लौटे पत्रकार, एप्सटीन के नाम पर शुरू हुआ विवाद
पिछले कुछ समय में भारतीय सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से फैलाया गया कि प्रधानमंत्री का नाम कुख्यात जेफरी एप्सटीन से जुड़ी फाइल्स में है। बाद में जब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों में ऐसा कोई उल्लेख सामने नहीं आया, तो सवाल उठा कि यह दावा किसने और क्यों फैलाया। इसी बिंदु की गहन पड़ताल की गई। इस सोशल मीडिया थ्रेड ने पूरे घटनाक्रम को और सुनियोजित साजिश की पोल खोलकर रख दी। थ्रेड में तथ्यों के माध्यम से यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि अक्टूबर 2025 में अमेरिका से लौटे कुछ भारतीय पत्रकारों ने मिलकर कैसे साजिश को अंजाम दिया। सुनियोजित प्लानिंग के तहत इन पत्रकारों ने लगभग एक ही समय पर, समान भाषा और समान लक्ष्यों के साथ केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ वीडियो और पोस्ट जारी किए। लोगों के बीच मिलकर भ्रम फैलाया गया।

‘कुछ देशों द्वारा आतंकवाद का खुला समर्थन…’: PM मोदी ने SCO समिट से पहलगाम हमले पर पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी, शहबाज की मौजूदगी में बोले- दोहरा रवैया स्वीकार नहीं

                  नरेंद्र मोदी ने चीन में SCO शिखर सम्मेलन को किया संबोधित (फोटो साभार: NDTV)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के तियानजिन में शंगाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। संबोधन में पीएम ने कहा कि आतंकवाद दुनिया के लिए खतरा है। इस दौरान पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र भी किया और हमले को आतंकवाद का ‘सबसे बुरा रूप’ बताया। यह बातें पीएम मोदी ने पाकिस्तान की पीएम शहबाज शरीफ की मौजूदगी में कहीं।

पीएम मोदी ने कहा, “पहलगाम में आतंकी हमला न केवल भारत पर हमला था बल्कि मानवता में विश्वास करने वाले सभी देशों के लिए एक चुनौती थी। यह एक बड़ा सवाल उठाता है- क्या कोई देश जो आतंकवाद का खुलेआम समर्थन करता है, हमें स्वीकार करना चाहिए?”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “हमें स्पष्ट कहना होगा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई दोहरा रवैया नहीं चलेगा।” इस दौरान पीएम ने आतंकवाद के लिए फंडिंग को सबसे बड़ी चिंता बताते हुए SCO समूह से जुड़े सभी देशों से आतंकवाद पर जीरो टोलरेंस नीति अपनाने का भी आग्रह किया।

आतंकवाद पर सभी देशों को आगाह करते हुए पीएम ने कहा, “आतंकवाद और उग्रवाद मानवता के लिए एक साझा चुनौती है। जब तक ये खतरे हैं, कोई भी देश या समाज सुरक्षित महसूस नहीं कर सकता।” पीएम ने जोर देकर कहा कि सुरक्षा हर देश का अधिकार है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत ने अल-कायदा जैसे आतंकवादी संगठनों के खिलाफ लड़ाई में आगे बढ़कर काम किया है और हम आतंकवाद के लिए किसी भी तरह के फंडिंग का विरोध करते हैं।”

पहलगाम आतंकी हमले पर आगे बोलते हुए पीएम ने कहा, “पहलगाम में आतंकवाद का बहुत ही बुरा रूप देखा। मैं उन सभी मित्र देशों का धन्यवाद करता हूँ जो हमारे साथ खड़े रहे।” पीएम ने आगे कहा, “हमने अपने बच्चों को खोया है और कई बच्चे अनाथ हो गए हैं। भारत पिछले चार दशकों से आतंकवाद की समस्या का सामना कर रहा है।”

न्यूक्लियर ब्लैकमेल नहीं सहेगा भारत, पाकिस्तान से केवल PoK पर होगी बात: मोदी ने राष्ट्र को किया संबोधित, कहा- खून और पानी साथ नहीं बहेंगे, ‘ऑपरेशन’ सिंदूर ने खींची नई लकीर


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद राष्ट्र के नाम संबोधन में पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने साफ कहा कि भारत का एक्शन अभी सिर्फ स्थगित हुआ है, खत्म नहीं। पाकिस्तान अगर आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा, तो भारत उसकी हर हरकत का हिसाब लेगा।

मोदी ने अपने सम्बोधन में विपक्ष और उसके टुकड़ों पर पल रहे मीडिया को भी समझा दिया कि भारत का एक्शन अभी सिर्फ स्थगित हुआ है, खत्म नहीं, जिसे देखो जनता को cease fire के नाम से गुमराह कर रहा है। Cease fire राष्ट्र प्रमुखों के एक टेबल पर बैठने पर होता है, DGMO के साथ नहीं। दूसरे, मोदी का यह सम्बोधन भारत राष्ट्र को नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से भारत विरोधी विदेशियों को भी था। जो भारत को अस्थिर कर विकास में बाधक बनने पाकिस्तान को उकसाते रहते हैं।   

मोदी ने दोहराया कि टेरर और टॉक एक साथ नहीं चल सकते। अगर पाकिस्तान से कोई बात होगी, तो वो सिर्फ आतंकवाद और पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) पर होगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि व्यापार और आतंक, पानी और खून भी एक साथ नहीं बह सकते।

22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिला दिया था। आतंकियों ने मासूम पर्यटकों को धर्म पूछकर बेरहमी से मार डाला। इस बर्बरता का जवाब देने के लिए भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ शुरू किया। 6 मई की रात और 7 मई की सुबह भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। इस कार्रवाई में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। पीएम ने कहा कि ये आतंकी दशकों से पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे थे और भारत के खिलाफ साजिश रच रहे थे।

मोदी ने पाकिस्तान की बौखलाहट का भी जिक्र किया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने भारत के सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला करने की कोशिश की, लेकिन भारत ने इन हमलों को आसमान में ही नाकाम कर दिया। पीएम ने कहा कि इससे पाकिस्तान का असली चेहरा दुनिया के सामने बेनकाब हो गया। उन्होंने भारत की सेनाओं, खुफिया एजेंसियों और वैज्ञानिकों की तारीफ की, जिन्होंने इस ऑपरेशन को कामयाब बनाया।

जवाबी कार्रवाई सिर्फ स्थगित, उसका रवैया नहीं बदला तो…

पीएम मोदी ने कहा, “दुनिया ने देखा कि कैसे पाकिस्तान के ड्रोन्स और पाकिस्तान की मिसाइलें, भारत के सामने तिनके की तरह बिखर गईं। भारत के सशक्त एयर डिफेंस सिस्टम ने, उन्हें आसमान में ही नष्ट कर दिया। पाकिस्तान की तैयारी सीमा पर वार की थी, लेकिन भारत ने पाकिस्तान के सीने पर वार कर दिया। भारत के ड्रोन्स, भारत की मिसाइलों ने सटीकता के साथ हमला किया। पाकिस्तानी वायुसेना के उन एयरबेस को नुकसान पहुँचाया, जिस पर पाकिस्तान को बहुत घमंड था। भारत ने पहले तीन दिनों में ही पाकिस्तान को इतना तबाह कर दिया, जिसका उसे अंदाजा भी नहीं था। इसलिए भारत की आक्रामक कार्रवाई के बाद पाकिस्तान बचने के रास्ते खोजने लगा।

उन्होंने आगे कहा, “पाकिस्तान दुनिया भर में तनाव कम करने की गुहार लगा रहा था। और बुरी तरह पिटने के बाद इसी मजबूरी में 10 मई की दोपहर को पाकिस्तानी सेना ने हमारे DGMO को संपर्क किया। तब तक हम आतंकवाद के इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर तबाह कर चुके थे, आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया गया था, पाकिस्तान के सीने में बसाए गए आतंक के अड्डों को हमने खंडहर बना दिया था।”

पीएम मोदी ने कहा, “भारत से पिटने के बाद पाकिस्तान की तरफ से गुहार लगाई गई। पाकिस्तान की तरफ से जब ये कहा गया, कि उसकी ओर से आगे कोई आतंकी गतिविधि और सैन्य दुस्साहस नहीं दिखाया जाएगा। तो भारत ने भी उस पर विचार किया। और मैं फिर दोहरा रहा हूँ, हमने पाकिस्तान के आतंकी और सैन्य ठिकानों पर अपनी जवाबी कार्रवाई को अभी सिर्फ स्थगित किया है। आने वाले दिनों में हम पाकिस्तान के हर कदम को इस कसौटी पर मापेंगे, कि वो क्या रवैया अपनाता है।”

पीएम मोदी ने कहा, “पाकिस्तानी फौज, पाकिस्तान की सरकार, जिस तरह आतंकवाद को खाद-पानी दे रहे है, वो एक दिन पाकिस्तान को ही समाप्त कर देगा। पाकिस्तान को अगर बचना है तो उसे अपने टैरर इंफ्रास्ट्रक्चर का सफाया करना ही होगा। इसके अलावा शांति का कोई रास्ता नहीं है।”

उन्होंने कहा कि भारत का मत एकदम स्पष्ट है—

  1. टैरर और टॉक, एक साथ नहीं हो सकते
  2. टैरर और ट्रेड, एक साथ नहीं चल सकते।
  3. और पानी और खून भी एक साथ नहीं बह सकता।
मैं आज विश्व समुदाय को भी कहूँगा, हमारी घोषित नीति रही है..
  1. अगर पाकिस्तान से बात होगी, तो टेरेरिज्म पर ही होगी।
  2. अगर पाकिस्तान से बात होगी, तो पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर, PoK उस पर ही होगी।

भारत ने तय कर दिया है तीन पैमाना

पीएम मोदी ने कहा कि भारत की तीनों सेनाएँ, हमारी एयरफोर्स, हमारी आर्मी, और हमारी नेवी, हमारी बॉर्डर सेक्योरिटी फोर्स- BSF, भारत के अर्धसैनिक बल, लगातार अलर्ट पर हैं। सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के बाद, अब ऑपरेशन सिंदूर आतंक के खिलाफ भारत की नीति है। ऑपरेशन सिंदूर ने आतंक के खिलाफ लड़ाई में एक नई लकीर खींच दी है, एक नया पैमाना, न्यू नॉर्मल तय कर दिया है।
  1. भारत पर आतंकी हमला हुआ तो मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा। हम अपने तरीके से, अपनी शर्तों पर जवाब देकर रहेंगे। हर उस जगह जाकर कठोर कार्रवाई करेंगे, जहाँ से आतंक की जड़ें निकलती हैं।
  2. कोई भी न्यूक्लियर ब्लैकमेल भारत नहीं सहेगा। न्यूक्लियर ब्लैकमेल की आड़ में पनप रहे आतंकी ठिकानों पर भारत सटीक और निर्णायक प्रहार करेगा।
  3. हम आतंक की सरपरस्त सरकार और आतंक के आकाओं को अलग-अलग नहीं देखेंगे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने पाकिस्तान का वो घिनौना सच फिर देखा है, जब मारे गए आतंकियों को विदाई देने, पाकिस्तानी सेना के बड़े-बड़े अफसर उमड़ पड़े। स्टेट स्पॉन्सरड टेरेरिज्म का ये बहुत बड़ा सबूत है। हम भारत और अपने नागरिकों को किसी भी खतरे से बचाने के लिए लगातार निर्णायक कदम उठाते रहेंगे।

ऑपरेशन सिंदूर न्याय की प्रतिज्ञा

पीएम ने ऑपरेशन सिंदूर को देश की हर बेटी, बहन और माँ को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि न्याय की प्रतिज्ञा है। भारत अब किसी भी न्यूक्लियर ब्लैकमेल को नहीं सहेगा। मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन शांति के लिए शक्ति जरूरी है। उन्होंने भगवान बुद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि शांति का रास्ता शक्ति से होकर जाता है।
पीएम मोदी ने कहा, “आज बुद्ध पूर्णिया है। भगवान बुद्ध ने हमें शांति का मार्ग दिखाया है। शांति का मार्ग शक्ति से होकर जाता है। मानवता शांति और समृद्धि की तरफ बढ़े। हर भारतीय शांति के साथ जी सके। विकसित भारत के सपने को पूरा कर सके, इसके लिए भारत का शक्तिशाली होना बहुत जरूरी है। और आवश्यकता पड़ने पर इस शक्ति का इस्तेमाल भी जरूरी है। पिछले कुछ दिनों में भारत ने यही किया है।”
पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए पीएम ने कहा कि भारत की सेना पूरी तरह अलर्ट है। अगर पाकिस्तान ने फिर से कोई गलती की, तो भारत उसका मुँहतोड़ जवाब देगा। मोदी ने देशवासियों की एकजुटता की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि जब पूरा देश एक साथ खड़ा होता है, तो फौलादी फैसले लिए जाते हैं। ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कितना सख्त है।
पीएम ने साफ किया कि भारत का लक्ष्य आतंकवाद को जड़ से खत्म करना है। पाकिस्तान के वादों को अब भारत कसौटी पर कसेगा। अगर पाकिस्तान आतंकवाद को नहीं रोकता, तो भारत का अगला कदम और सख्त होगा।