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जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा बांग्लादेश; प्रभु श्रीराम की फोटो पर जूते मारने वालो को गिरफ्तार करो; सभी 64 ज़िलों में बनेगा राम मन्दिर

                   राम चित्र अपमान पर ढाका में हिंदुओं का विरोध प्रदर्शन। (फोटो साभार - दिनाजपुर टीवी)
आज भारत के अधिकांश राज्यों में भगवा लहराने का देश पर इतना असर नहीं पड़ा जितना बंगाल में लहराने से पड़ना शुरू हुआ है। बंगाल चुनाव सिर्फ चुनाव नहीं था सनातन का शंखनाद था। बंगाल मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी यदि मुस्तैदी से सनातन विरोधियों पर कार्यवाही करते रहेंगे, बंगाल को घुसपैठ मुक्त करने से इसकी गूंज भारत ही नहीं विश्व में होगी। भारत में आज़ादी की चिंगारी बंगाल से निकली थी। ब्रिटिश सरकार महात्मा गाँधी या कांग्रेस से डरकर नहीं बल्कि बंगाली नेताजी सुभाष चंद्र बोस से डरकर गयी थी। हाथ कंगन को आरसी क्या पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या। बंगाल चुनाव के बाद से सनातन विरोधियों की पार्टियां धराशाही हो रही है। दफ्तर में छंटनी का कानून है last come first go शायद यही कानून सनातन विरोधी पार्टियों पर भी अपने आप लागु हो चूका है। 

टीवी पर होनी वाली परिचर्चाओं में मुस्लिम कट्टरपंथी और इनकी समर्थक पार्टियां जब घिर रही होती है तो मुद्दे से भटकाते संविधान की दुहाई देते नज़र आते हैं। अयोध्या राममन्दिर में 200 करोड़ रूपए के घोटाले को जिस तरह उछाला जा रहा है इसके पीछे हिन्दुओं को राममन्दिर से दूर करने का बहुत गहरा षड़यंत्र है। प्रभु श्रीराम द्वारा सच्चाई सामने आने पर हिन्दुओं को बाँटने वाले चाहे वह मीडिया हो या राम विरोधी पार्टियां सब चारों खाने चित होंगे। अगर बंगाल में शुभेंदु अधिकारी शंखनाद कर रहे है तो उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पीछे नहीं रहने वाले।  

बांग्लादेश की राजधानी ढाका शुक्रवार (19 जून) को जय श्री राम के नारों से गूँज उठी। भगवान राम के अपमान के विरुद्ध सैकड़ों की संख्या में सड़क पर उतरकर हिंदुओं ने प्रदर्शन किया। मसाल जुलूस निकालते हुए इस्लामी कट्टरपंथियों पर कार्रवाई के लिए बांग्लादेश की सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। साथ ही कहा है कि देश के सभी 64 जिलों में एक-एक राम मंदिर का निर्माण किया जाएगा।

प्रदर्शनकारी ढाका के शाहबाग चौराहे पर इकट्ठा हुए थे। वहाँ उन्होंने बांग्लादेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और न्याय की माँग की। हिंदुओं ने सरकार को दोषियों को पकड़ने के लिए 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर तय समय में कार्रवाई नहीं हुई, तो वे रविवार (21 जून) को धार्मिक मामलों के मंत्रालय को ज्ञापन सौंपेंगे।

64 जिलों में आंदोलन की चेतावनी

मशाल जुलूस में शामिल हिंदुओं ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपित गिरफ्तार नहीं हुए, तो आंदोलन पूरे देश में फैलेगा। बांग्लादेश के सभी 64 जिलों में उग्र प्रदर्शन किए जाएँगे। शनिवार (20 जून) को ‘बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद’ ने भी देशव्यापी विरोध का ऐलान किया है। हिंदुओं का कहना है कि वे हर जिले में भगवान राम का मंदिर बनाकर रहेंगे।

जगह-जगह हुआ विरोध प्रदर्शन

शुक्रवार (19 जून) सुबह भी ढाका में अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए। हिंदू महाजोत के दो गुटों ने नेशनल प्रेस क्लब और ढाका रिपोर्टर्स यूनिटी में कार्यक्रम किए। प्रेस क्लब के सामने एक बड़ा मानव बंधन बनाया गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री से मिलने और रैलियाँ निकालने की भी योजना बनाई है। उनकी माँग है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।
अवलोकन करें:-
बांग्लादेश : भगवान राम के पोस्टर पर मारे जूते-चप्पल, जुमे की नमाज के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने
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बांग्लादेश : भगवान राम के पोस्टर पर मारे जूते-चप्पल, जुमे की नमाज के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने
भारत में घुसपैठियों को अपना दामाद बनाकर पालने वाले नेताओं और उनकी पार्टियों में लेशमात्र भी शर्म है सभी को एकजुट ह... 

पूरा मामला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रंगपुर डिवीजन के गाइबांधा जिले में भगवान राम का मंदिर और 81 फीट ऊँची प्रतिमा बनाई जा रही थी। कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों ने इस निर्माण को रुकवा दिया। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान भगवान राम की तस्वीर वाले बैनर पर चप्पलें मारी गईं। इसका Video वायरल हुआ। इस घटना से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुँची है।

बांग्लादेश : भगवान राम के पोस्टर पर मारे जूते-चप्पल, जुमे की नमाज के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने दिखाई हिंदू घृणा: Video वायरल


भारत में घुसपैठियों को अपना दामाद बनाकर पालने वाले नेताओं और उनकी पार्टियों में लेशमात्र भी शर्म है सभी को एकजुट होकर बांग्लादेश में भगवान श्रीराम के पोस्टरों पर जूते-चप्पल मारे जाने का विरोध ही नहीं जहाँ-जहाँ अपनी कुर्सी की खातिर इन्हे छुपाकर रखे हो भारत और राज्य सरकारों को जानकारी देकर देश से बाहर धक्का दो। अन्यथा जनता इन पार्टियों को चुनावों में बंगाल से भी बुरी तरह हराकर सत्ता से बाहर करे।     

बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन में भगवान राम की निर्माणाधीन प्रतिमा को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों का बवाल लगातार जारी है। अब सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियोज सामने आएँ हैं, जिसमें भगवान राम के पोस्टर पर जिहादी जूते-चप्पल मारते दिख रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, गाईबांधा में जुमे की नमाज के बाद कुछ इस्लामी समूहों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और राम प्रतिमा निर्माण का विरोध जताया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रदर्शन के दौरान भगवान राम की तस्वीर वाले बैनरों के साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और उन पर जूते-चप्पल मारे गए।

बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन में भगवान राम की निर्माणाधीन प्रतिमा को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों की ओर से विरोध और उसे तोड़ने की धमकियाँ दिए जाने के कुछ दिनों बाद हिंदू मंदिर समिति को प्रतिमा का निर्माण कार्य रोकना पड़ा है।

एक बयान में मंदिर समिति के एक सदस्य ने मीडिया को बताया, “हम आपके हित में, राष्ट्र और समाज के हित में भगवान राम की मूर्ति का निर्माण कार्य रोक रहे हैं। सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए हम यह कार्य रोक रहे हैं। भविष्य में, यदि हमें आवश्यकता महसूस हुई, तो हम आपको बुलाएँगे, सभी हितधारकों के सुझाव लेंगे और कार्य पुनः आरंभ करेंगे।”

भगवान राम का अपमान, आजादी के नारे और तिरंगे से बदसलूकी: कॉकरोचों को ये तक नहीं पता कि वे क्यों आए हैं

                                                             साभार : ऑपइंडिया
कल(6 जून) को कॉकरोच जनता पार्टी ने दिखा दिया कि रात के अँधेरे में वह कहाँ जा रहा है, तो तेज सूरज की तपिश में उससे कोई उम्मीद की भी नहीं जा सकती थी। नेपाल जैसा उपद्रव करने के लिए करोड़ों रूपए खर्च कर इसके आका भी सिर पकड़ कर बैठ गए होंगे। कई उपद्रवियों को तो शिक्षा मंत्री तक नाम नहीं पता जिसका इस्तीफा मांग रहे थे। सोशल मीडिया पर कई वीडियो देखने को मिले जहाँ मोदी और योगी तक का पद नहीं बता पाए।
कई लोगों तो यह तक नहीं मालूम कि 'यहाँ आये किस लिए हैं?' यानि अगर किसी वजह से उपद्रव हो गया होता तो अरविन्द केजरीवाल और INDI गठबंधन की बल्ले-बल्ले हो गयी होती। लेकिन विधाता को तो कुछ और ही मंजूर था। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके तो तेज गर्मी की पहले ही भाग खड़ा हुआ था या विरोधियों की तैयारी से ये तो वही जानता है। लेकिन कोई उपद्रव नहीं होने पर इनके आकाओं के अरमानों पर पानी जरूर फिर गया।    

    

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शनिवार (6 जून 2026) को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी इस कथित पार्टी के सदस्यों यानी ‘कॉकरोचों’ को प्रदर्शन के लिए बुलाया था। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने समर्थकों से बड़ी संख्या में पहुँचकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी, लेकिन उनका साथ देने वाले कॉकरोचों की संख्या उनकी उम्मीदों को तोड़ने वाली रही।

अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर युवाओं और छात्रों से बड़ी से बड़ी संख्या में जुटने का आह्वान किया था लेकिन आह्वान का असर केवल कुछ कॉकरोचों पर ही पड़ा। सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोअर्स वाली इस CJP के प्रदर्शन में बमुश्किल कुछ सौ लोग ही पहुँचे। बात सिर्फ इतनी ही नहीं है इसमें शामिल होने वाले कॉकरोचों को देखकर भी साफ समझा जा सकता था कि इनकी मंशा केवल हिंसा फैलाना, सुर्खियाँ बटोरना, सरकार और भारतीय संस्कृति को बदनाम करना था।

कोई कॉकरोच यहाँ हिंदू देवी-देवता का अपमान कर रहा तो कोई अपनी पर्सनल डायरी को संविधान बता रहा। किसी को तिरंगे के सम्मान से कोई लेना-देना नहीं तो कोई डफली बजाते हुए आजादी-आजादी चिल्ला रहा और इनका कहना था कि ये छात्रों के भविष्य के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे, ये कॉकरोच जिनके पास ना तो ज्ञान है और ना ही तमीज।

यह आरोप कोई हमारा मनगढ़ंत नहीं है बल्कि ऑपइंडिया को इसके प्रमाण भी मिले हैं। पहली बात तो ये सामने आई कि प्रोटेस्ट के नाम पर शोर मचाने वाले ये कॉकरोच असल में ना तो कोई छात्र हैं और ना ही पढ़ाई या किसी तरह की परीक्षा से इनका कोई लेना-देना है और इसका प्रमाण इन्होंने खुद ही दे दिया ‘आजादी-आजादी’ के नारे लगाकर।

वायरल वीडियो अब तक आपने भी देख लिए होंगे और अगर नहीं देखें तो ऑपइंडिया के इन वीडियोज को देंखे, जिसमें ये अबर्न नक्सली डफली बजाते हुए ‘आजादी-आजादी’ चिल्ला रहे।

वीडियो में दिख रहे ये लोग चिल्ला रहे, “हम क्या चाहते आजादी, BJP से आजादी, हमारा नारा आजादी, मोदी सुनले आजादी, BJP सुनले आजादी, तुम जेल में डालो आजादी, हम लेके रहेंगे आजादी, मैं भी बोलूँ आजादी, तू भी बोले आजादी, देश बोले आजादी, मोदी तुझसे आजादी, BJP तुझसे आजादी।” अब आप सोचिए कि इसका पेपर लीक से क्या लेना देना है भला?

यह पहली बार नहीं जब ये वामपंथी गुट किसी भी अन्य मुद्दे को ढाल बनाकर सामने आया हो और बाद में असली रंग दिखाया हो। किसान आंदोलन के समय भी किसानों के साथ उनकी लड़ाई में शामिल होने को ढोंग कर के इन वामपंथियों ने एक शांत से धरने को हिंसक बना दिया था।

इसके अलावा साल 2019-20 का समय याद करें तो दिल्ली समेत जगह-जगह CAA-NRC के विरोध में सड़क पर आकर बैठे प्रदर्शनकारियों ने अपने प्रोटेस्ट का रंग बदल दिया था। उन्हीं प्रदर्शनों का नतीजा था कि दिल्ली को हिंदू विरोधी दंगे झेलने पड़े। 40-50 लोगों की निर्ममता से मौत हुई।

मकसद भी नहीं बता पा रहे अभिजीत के कॉकरोच, तिरंगे के अपमान का वीडियो आया सामने

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने अपने समर्थकों से अपील की थी कि वो अपने साथ तिरंगा झंडा, किताबें और फूल लेकर आएँ। उनके कॉकरोचों यानी समर्थकों ने ये बात मानी भी लेकिन शायज आशुतोष उन्हें ये बताना भूल गए कि तिरंगे को हर भारतीय, हर देशभक्त सम्मान की दृष्टि से देखता है।

ऑपइंडिया ने इसकी पुष्टि कर रही ऐसी ही एक घटना को कैप्चर भी किया है, जिसमें प्रदर्शन करने पहुँचे कॉकरोच तिरंगे का अपमान कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि कोई ऐसा व्यक्ति, जिसको अपने देश से प्रेम हो वो ऐसी घटिया हरकत कर सकता है। साफ समझ आ रहा कि ये हरकते भारत को बदनाम करने की वामपंथियों की केवल एक साजिश है।

दूसरी तरफ ऑपइंडिया के रिपोर्टर्स को ग्राउंड पर ऐसा कोई कॉकरोच नहीं मिला, जो यह बता सके कि उनका जुटान यहाँ हुआ किसलिए है। किसी के पास कोई मुद्दा नहीं जो वो बता सकें कि इसलिए वो प्रदर्शन करने आए हैं। कोई पेपर लीक पेपर लीक चिल्ला रहे तो वो उनके साथ मिल जा रहे।

कोई आजादी-आजाजी चिल्ला रहा तो उधर भी उपस्थिति दर्ज कर रहे। इस बैनर से उस बैनर, यहाँ से वहाँ, वहीं जो असल में कॉकरोच करते हैं।

हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ उगला जहर उगलने पहुँच रहे कॉकरोचों के दादा-परदादा

जंतर-मंतर पर पहुँचे एक बुजुर्ग ने ऑपइंडिया के रिपोर्टर से कहा कि ‘पांडव-वांडव’ तो कभी थे ही नहीं, ये सब बेकार बाते हैं। उन्होंने आगे कहा, “राम-वाम सब छोड़ दे, तु वहाँ मत जा, राम मोदी को नहीं मारता, सारे देश को लूट कर खा गया, वो मोदी को नहीं मारता, राम मंदिर के नाम पर कितने रुपए डकार गया, अडानी-अंबानी को नहीं मारता है।”

जब ऑपइंडिया के रिपोर्टर ने पूछा कि इसमें भगवान राम बीच में कहाँ से आ गए तो वो कहते हैं, “तेरे मेरे को डराने के लिए हैं राम तो, उसको नहीं मानते।” जिनको ना तो भारत के इतिहास, संस्कृति और धर्मग्रंथो से कोई लेना-देना नहीं, ना तो इन्हें हिंदू देवी-देवताओं का सम्मान करना आता है, ये लोग पहुँचे हैं कॉकरोचों को समर्थन करने।

कोई डायरी को बता रहा संविधान तो किसी का जवाब- अब्बा-डब्बा-जब्बा

प्रशांत राणा नाम के एक कॉकरोच से ऑपइंडिया के रिपोर्टर ने बात की तो उसने हाथ में ली हुई डायरी को भारत का संविधान बताया। जब रिपोर्टर ने दिखाने को कहा तो प्रशांत ने थोड़ा भाव खाया, लेकिन फिर डायरी खोली और कहा, ‘ये मेरे कुछ आर्टिकल्स हैं।’ जी हाँ यानी कॉकरोचों का अपना एक संविधान भी लिखा जा रहा है। उसने कहा कि ये मेरे लिए संविधान है।

रिपोर्टर ने जब उससे कहा कि भाई दिखाओ तो इस संविधान में क्या है तो कॉकरोच ने कहा- “इतनी पर्सनल चीज नहीं दिखा सकते।” इसके बाद वो लगातार अपने मन का बेतुकी बातें करता रहा जो संभवतः उसके अपने पर्सनल संविधान में लिखी होंगी।

ऑपइंडिया को प्रशांत की तरह ही एक और कॉकरोच मिला। उसने कहा कि वो सिस्टम का विरोध करने वालों का समर्थन कर रहा है। उसने कहा कि एजुकेशन सिस्टम पूरी तरह करप्ट हो चुका है। जब रिपोर्टर ने पूछा कि तो इसका हल क्या है और CJP के पास इसका क्या समाधान है तो उसने ना में सिर हिला दिया कि उसके पास इसका कोई जवाब नहीं है।

मास्क पहने एक कॉकरोच ने बताया कि नीट पेपर लीक हुआ है, इसलिए वो यहाँ आया है, लेकिन और कौन से पेपर कब लीक हुए हैं, इसके बारे में उसे कोई जानकारी नहीं थी। वह लगातार कहता रहा, “नीट का पेपर लीक हुआ है, होते रहते हैं, अब जैसे नीट का पेपर लीक हुआ है, नीट का पेपर लीक हुआ था, नीट का पेपर लीक हो जाएगा फिर।”

अंत में कॉकरोच ने रिपोर्टर से ही पूछ लिया कि वो बताए कौन-कौन से पेपर लीक हुए हैं। रिपोर्टर के हर सवाल में फँसते हुए कॉकरोच में अंत में चेहरा दिखाकर और बेईज्जती कराना सही नहीं समझा और चुप हो गया। जिन्हें किसी विषय की कोई जानकारी नहीं है, यहाँ तक की अपने भविष्य का भी कुछ नहीं पता ये औरों के भविष्य की क्या चिंता करेंगे।

अयोध्या के बाद गोवा में भी गूँजेगा ‘जय श्रीराम’ : प्रधानमंत्री मोदी करेंगे भगवान की सबसे ऊँची मूर्ति का अनावरण

             मोदी द्वारा गोवा में भगवान राम की 77 फीट ऊँची प्रतिमा का अनावरण (साभार: ईटीवी, न्यूज 18)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (28 नवंबर 2025) को गोवा के दक्षिणी जिले में स्थित श्री संस्थान गोकर्ण जीवोत्तम मठ में भगवान राम की 77 फीट ऊँची कांस्य प्रतिमा का अनावरण करेंगे। यह जानकारी मठ की ओर से दी गई है। पीएम मोदी दोपहर 3:45 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुँचेंगे, जहाँ उनके लिए परिसर में ही एक विशेष हेलिपैड तैयार किया गया है।
28 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी गोवा के गोकर्ण पर्तगाली जीवोत्तम मठ में 77 फुट ऊंची भगवान राम की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। दरअसल गोकर्ण पर्तगाली मठ के 550 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री मोदी कांस्य से बनी 77 फुट ऊंची भगवान राम की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। ये प्रतिमा गुजरात की नर्मदा नदी के किनारे बने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की तरह होगी। 
गोकर्ण पर्तगाली मठ में बनी ये प्रतिमा बेहद खास है, क्योंकि इसका स्वरूप अयोध्या की मूर्ति से काफी मिलता है। इसमें भगवान राम के हाथ में धनुष और बाण हैं और चेहरे पर सौम्यता और दिव्यता का भाव है।

नोएडा के फेमस मूर्तिकार राम सुतार के देखरेख में बनी है प्रतिमा

गोवा में लगने वाले भगवान श्रीराम की प्रतिमा को नोएडा के प्रसिद्ध मूर्तिकार राम सुतार के मार्गदर्शन में बनाया जा रहा है। इससे पहले राम सुतार ने गुजरात में बनी भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा को डिजाइन किया था। अब उन्होंने गोवा की राम मूर्ति को डिजाइन किया है। राम भगवान की मूर्ति के अलावा, एक रामायण थीम पार्क और राम संग्रहालय का निर्माण भी किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह प्रतिमा दुनिया में भगवान राम की सबसे ऊँची प्रतिमा होगी। भगवान राम की इस प्रतिमा को मशहूर मूर्तिकार राम सुतार ने तैयार किया है, जिन्होंने गुजरात में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ भी डिजाइन किया था।

मठ की केंद्रीय समिति के अध्यक्ष श्रीनिवास देम्पो ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी प्रतिमा अनावरण से पहले मठ परिसर में स्थित मंदिर में दर्शन करेंगे और इसके बाद एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करेंगे। इस अवसर पर गोवा के राज्यपाल अशोक गजपति राजू, मुख्यमंत्री डॉ प्रमोद सावंत, केंद्रीय मंत्री श्रीपद नाइक और राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य उपस्थित रहेंगे।

550 वर्ष होने के उपलक्ष्य में विविध कार्यक्रम

 मठ की परंपरा के 550 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 27 नवंबर से 7 दिसंबर तक विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। देम्पो ने बताया कि मठ परिसर का निर्माण 370 वर्ष पहले दक्षिण गोवा के कनकोना स्थित पर्तगल गाँव में किया गया था। कार्यक्रमों के दौरान प्रतिदिन 7,000 से 10,000 श्रद्धालुओं के आने की संभावना व्यक्त की गई है।

गोवा के सार्वजनिक निर्माण मंत्री दिगंबर कामत ने कहा कि सदियों से आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित इस मठ को पूरी तरह से पुनर्निर्मित कर आधुनिक स्वरूप दिया गया है।

अयोध्या में ‘धर्म ध्वज’ फहराने के बाद नया अध्याय

भगवान राम की यह भव्य प्रतिमा ऐसे समय में अनावरण हो रही है जब कुछ ही दिनों पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर ‘धर्म ध्वज’ फहराया था। इस ऐतिहासिक अवसर पर RSS प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सहित हजारों साधु-संत और श्रद्धालु उपस्थित थे। सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि सदियों पुराने घाव अब भर रहे हैं और देश एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक चेतना का साक्षी बन रहा है।

मध्य प्रदेश : मस्जिद की खुदाई में निकली भगवान राम और माँ सीता की मूर्ति, हिंदू पूजा करने पहुँचे: सागर का मामला, पुरात्व विभाग जाँच में जुटा

     मध्य प्रदेश में मस्जिद की खुदाई में मिली राम-सीता की मूर्तियाँ (साभार : livehindustan & Dainikbhaskar)
आज मुस्लिम कट्टरपंथियों और इनको समर्थन देने वाले नेताओं और उनकी पार्टियों ने "सेकुलरिज्म और गंगा-जमुनी तहजीब" जैसे पाखंडी और गुमराह करने वालों नारों से देश को पागल बना बारूद के ढेर पर बैठा दिया है। इनमें कोई माई का लाल बताए कि किस मुस्लिम मुल्क में सेकुलरिज्म है? भारत में जब तक हिन्दू बहुसंख्यक है ये पाखंडी "सेकुलरिज्म" है, खुदा न खास्ता अगर भारत गजवा-ए-हिन्द बन गया इन्ही नेताओं और उनकी पार्टियों द्वारा "सेकुलरिज्म" बोलने पर मुस्लिम कट्टरपंथियों की प्रताड़ना झेलनी पड़ेगी और सिर पर हाथ रखकर रोयेंगे। देशहित में सरकार को इन पाखंडी और जनता को भ्रमित करने वाले नारों पर प्रतिबन्ध लगाना चाहिए। 

दूसरे, मथुरा, काशी और अन्य स्थानों पर खुदाई का विरोध क्यों किया जाता है अयोध्या के बाद अब उसका जीवित उदाहरण मध्य प्रदेश है। जहां मस्जिद की चार दीवारी बनाए जाने के लिए हो रही खुदाई में पुरुषोत्तम श्रीराम और सीता माता की मूर्ति निकली। मध्य प्रदेश को चाहिए कि मस्जिद के पूरे परिसर की खुदाई करवाए।             

मध्य प्रदेश के सागर जिले के पापेड़ गाँव में मस्जिद की चारदीवारी के लिए चल रही खुदाई के दौरान जमीन के नीचे से भगवान राम की कुछ मूर्तियाँ मिली हैं। मूर्तियाँ मिलते ही गाँव में खबर आग की तरह फैल गई। हिंदू समाज के लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुँचे और मूर्तियों की पूजा शुरू कर दी, साथ ही मंदिर बनाने की माँग करने लगे।

इससे हिंदू और मुस्लिम, दोनों समुदायों के बीच तनाव की स्थिति बन गई। हालात संभालने के लिए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुँचे और फिलहाल निर्माण कार्य रुकवा दिया गया है। प्रशासन ने मूर्तियों की जाँच के लिए पुरातत्व विभाग को बुलाया है।

मस्जिद की खुदाई में मिलीं प्राचीन मूर्तियाँ

जानकारी के अनुसार, यह घटना सागर जिले की बंडा तहसील के पापेड़ गाँव की है। गाँव में बनी एक मस्जिद के परिसर में चारदीवारी बनाने के लिए खुदाई का काम चल रहा था। इसी खुदाई के दौरान जमीन के अंदर से भगवान राम और माता सीता की कुछ प्राचीन मूर्तियाँ मिली हैं। इनमें से कुछ मूर्तियाँ खंडित भी हैं। मजदूरों ने जब मूर्तियाँ मिलने की जानकारी गाँव वालों को दी, तो यह खबर तुरंत पूरे गाँव में फैल गई।

हिंदू संगठनों ने की पूजा और की मंदिर की माँग

मूर्तियाँ मिलने की सूचना मिलते ही हिंदू संगठनों और गाँव के लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुँच गए। उन्होंने वहाँ मिली मूर्तियों की पूजा-अर्चना शुरू कर दी। हिंदू संगठनों ने तो भगवान राम का अभिषेक करके, वहीं एक चबूतरा बनाकर मूर्तियों को स्थापित भी कर दिया। हिंदू संगठनों की माँग है कि इस जगह पर मंदिर बनाया जाए। उनका दावा है कि पहले यहाँ एक मंदिर था, जिसे तोड़कर मस्जिद बना दी गई थी।

दो समुदायों के आमने-सामने आने से बढ़ा तनाव

मंदिर बनाने की माँग को लेकर हिंदू और मुस्लिम, दोनों समुदायों के लोग आमने-सामने आ गए। इससे गाँव में माहौल तनावपूर्ण हो गया। मुस्लिम पक्ष के ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन करीब 200 साल पहले मस्जिद को दी गई थी। उनका यह भी कहना है कि मूर्तियाँ मस्जिद परिसर में नहीं मिली हैं, बल्कि पास में पत्थरों की खखरी (ढेर) से मिली हैं, जिन्हें बाद में परिसर में रखा गया है। दोनों पक्षों की बातों से गाँव में तनाव की स्थिति पैदा हो गई।

प्रशासन ने रुकवाया निर्माण, होगी पुरातत्व विभाग की जाँच

तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए तुरंत पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुँची। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर माहौल को शांत कराया। बंडा एसडीएम नवीन ठाकुर ने बताया कि फिलहाल मौके पर चल रहे निर्माण कार्य को रुकवा दिया गया है।
उन्होंने साफ किया कि यह जमीन मस्जिद के स्वामित्व की है, लेकिन जाँच पूरी होने तक कोई निर्माण नहीं होगा। मूर्तियों को पुलिस की निगरानी में रखा जाएगा और उनकी जाँच पुरातत्व विभाग से कराई जाएगी। जाँच के बाद ही यह पता चल पाएगा कि ये मूर्तियाँ कितनी पुरानी हैं और किसकी हैं।

हनुमान पाँचों वक्त का नमाज पढ़ते थे, राम जी ने पहली बार पढ़वाया था: सरकारी टीचर जियाउद्दीन ने क्लास में कहा- वे मूर्ख थे, गंगा भी देवी नहीं; इन जेहादियों को ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए अनवर शेख और अली सीना आदि की किताबों का वितरण होना चाहिए

                   शिक्षक मोहम्मद जियाउद्दीन और विद्यार्थियों के गुस्साए परिजन (साभार: ऑपइंडिया अंग्रेजी)
मदरसा छाप शिक्षकों को इतना भी नहीं मालूम कि पुरुषोत्तम श्री राम और उनके परमभक्त हनुमान हुए थे त्रेता युग में फिर आया द्वापर युग यानि अनेक लाख वर्षों के बाद आया कलयुग और इस्लाम आया लगभग 5 लाख वर्ष बीत जाने के बाद, अब कोई ऐसे उपद्रवी शिक्षकों से पूछो सबूत दिखा या सार्वजानिक जमीन पर नाक रगड़ कर माफ़ी मांगे। या फिर इन जैसे दंगाई उपद्रवियों और इनके समर्थकों को पाताललोक भेजने के लिए अनवर शेख और अली सीना की किताबों का वितरण करना चाहिए। जब इन लोगों को ईंट का जवाब मिलेगा तब इन जैसों और इन जेहादियों की अक्ल ठिकाने आएगी। वरना लोग कहेंगे कि हिन्दू हमेशा हिन्दू-मुसलमान करता रहता है। जबकि सच्चाई कुछ और है। ये जेहादी देश का माहौल ख़राब करने का प्रयास कर रहे हैं। इन जेहादियों को मालूम होना चाहिए कि द्वापर युग तक हर पशु-पक्षी इंसान की तरह बोलता था, लेकिन जैसे-जैसे द्वापर युग समाप्ति की ओर बढ़ कलयुग की शुरुआत होने लगी, सभी पशु-पक्षियों की आवाज़ सिवाए तोता और मैना को छोड़ सबकी बंद हो गयी।        
Understanding Mohammad & Muslim के लेखक अली सीना लिखते हैं कि किताब को पढ़ लोग इस्लाम छोड़ रहे हैं, जबकि लगता है सिर्फ इसी किताब को ही नहीं अन्य किताबों से भी बदलाव आ रहा है जिसका बीजारोपण अनवर शेख ने किया। फिर अनवर शेख से बहुत पहले सीता राम गोयल की किताब आयी थी Why I became Hindu, पुस्तक के प्रकाशित होने से पूर्व गोयल ने Organser Weekly में सीरीज शुरू करने के बाद पुस्तक रूप में प्रकाशित की। उस समय केवल रतन मलकानी मुख्य संपादक होते थे।         

बिहार के बेगूसराय में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक मोहम्मद जियाउद्दीन ने हिंदुओं के आराध्य भगवान राम और हनुमान जी को मुस्लिम बताया है। क्लास में पढ़ाते समय जियाउद्दीन ने बच्चों से कहा कि ‘भगवान राम और उनके भक्त हनुमान पहले मुसलमान थे। वे नमाज पढ़ा करते थे।’ इतना ही नहीं, उसने हनुमान जी को मूर्ख और माँ गंगा को शक्तिहीन बताया। इसकी जानकारी लोगों को मिली तो उन्होंने हंगामा कर दिया। वहीं, बेगूसराय से भाजपा सांसद एवं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने शिक्षक पर कार्रवाई की बात कही है।

मोहम्मद जियाउद्दीन बेगूसराय जिले के बछवाड़ा प्रखंड में स्थित हरिपुर कादराबाद के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में शिक्षक है। मंगलवार (8 अक्टूबर 2024) को वह 7वीं कक्षा के बच्चों को पढ़ा रहा था। सामान्य ज्ञान और व्याकरण की कक्षा के दौरान उसने यह आपत्तिजनक बातें कही। शिक्षक जियाउद्दीन ने कहा, हनुमान जी पाँचों वक्त का नमाज पढ़ते थे। रामजी ने उन्हें पहली बार नमाज पढ़वाया था।”

इतना ही नहीं, ईटीवी के रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2016 से इस स्कूल में पदस्थापित शिक्षक मोहम्मद जियाउद्दीन ने क्लास में बच्चों को पढ़ाते वक्त माँ गंगा के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की। गंगा नदी की शक्ति पर सवाल खड़ा करते हुए उसने बच्चों से कहा, “गंगा नदी देवी का रूप नहीं है। अगर ऐसा होता तो लोग गंगा नदी में डूब क्यों जाते… मर क्यों जाते…?” 

स्कूल के विद्यार्थी जब घर गए तो उन्होंने परिजनों और गाँव वालों को इस बात की जानकारी दी। इसके बाद गाँव वाले एकजुट होकर उसी दिन शिक्षक मोहम्मद जियाउद्दीन के घर गए थे। कहा जा रहा है कि लोगों के गुस्से को देखते हुए शिक्षक ने माफी माँग ली। हालाँकि, लोगों का गुस्सा कम नहीं हुआ। अगले दिन बुधवार को जब स्कूल खुला तो छात्रों के परिजन स्कूल पहुँच गए और विद्यार्थियों से पूछताछ की।

साहिबा परवीन नाम की छात्रा ने कहा, “टीचर ने कहा कि हनुमान जी हिंदू धर्म के पहले ऐसे भगवान हैं, जिन्होंने नमाज पढ़ी थी। उनको रामजी ने नमाज पढ़वाया था। हनुमान जी मुसलमान हैं।” वहीं, मानव कुमार नाम के छात्र ने कहा, “जियाउद्दीन सर ने क्लास में हनुमान जी मुस्लिम थे। हनुमान जी पढ़ने-लिखने में मूर्ख थे। मूर्खता के कारण ही वो पर्वत उठा लाए थे। उन्हें राम जी ने पहली बार नमाज पढ़ाया था।”

अन्य विद्यार्थियों ने भी यही बातें दोहराईं। इतनी बातें सुनकर परिजनों के साथ-साथ स्कूल के अन्य शिक्षक भी सन्न रह गए। उन्होंने मोहम्मद जियाउद्दीनसे नाराजगी जाहिर जाहिर की। विद्यार्थियों के मुँह से इतना सुनते ही परिजनों का गुस्सा बढ़ गया और हंगामा करते हुए शिक्षक पर कार्रवाई की माँग करने लगे। परिजनों की नाराजगी को देखते हुए मोहम्मद जियाउद्दीन ने एक बार फिर माफी माँगी।

शिक्षक मोहम्मद जियाउद्दीन ने कहा, “मैंने गलती से ऐसी बातें बच्चों को पढ़ा दी। मुझसे गलती हो गई, माफ कर दीजिए। आज के बाद ऐसा नहीं होगा।” जियाउद्दीन ने परिजनों से कहा कि वह उसने ‘मुसल्लम ईमान’ की बात छात्रों को बताई। जब परिजनों ने उससे पूछा कि बच्चों को उसने क्या पढ़ाया था तो इस सवाल के वह जवाब में चुप्पी साधे रहा। इसके बाद परिजनों के गुस्सा और बढ़ गया।

परिजनों ने शिक्षक जियाउद्दीन को निलंबित कर उस पर एफआईआर दर्ज करने की माँग पर अड़े रहे। विवाद बढ़ने की जानकारी जब अधिकारियों को हुई तो बीडीओ अभिषेक राज और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी निर्मला कुमारी स्कूल पहुँचे और जाँच की। बीडीओ ने कहा कि शिक्षक ने परिजनों के सामने सार्वजनिक रूप से माफी माँग ली है। हालाँकि, जाँच के दौरान शिक्षक ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है।

इस घटना के बाद बेगूसराय के सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि हनुमान जी हिंदू धर्म के महान भक्त हैं। इस प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी से करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुँची है। उन्होंने धार्मिक सौहार्द्र बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जिला प्रशासन से शिक्षक पर तुरंत कार्रवाई करने की माँग की है।

गिरिराज सिंह ने सोशल मीडिया साइट X पर अपने बयान का वीडियो जारी करते हुए कहा, “बछवाड़ा प्रखंड के हरपुर, कादराबाद (बेगूसराय) के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में शिक्षक जियाउद्दीन द्वारा भगवान राम और हनुमान जी को मुसलमान बताने पर ग्रामीणों ने विरोध जताया। जियाउद्दीन ने इसे स्वीकारा और मुस्लिम छात्राओं समेत अन्य ने पुष्टि की। समाज में विद्वेष फैलाने वाले ऐसे शिक्षकों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।”

‘बकवास किताब है रामचरितमानस, इस पर लगे बैन’: सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने बागेश्वर धाम पर भी उगला ज़हर, कहा – सत्यानाश हो ऐसे धर्म का

     समाजवादी पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस को बकवास कहा (चित्र साभार newstrack.com)
बुजुर्गों की कहावत है कि "जैसा खाए, वैसा हो जाए मन" जिसे सनातन धर्म पर प्रहार करने वाले सिद्ध कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्या द्वारा हिन्दू ग्रन्थ रामचरित्रमानस पर बकवास करना कोई हैरानी की बात नहीं। रामजन्मभूमि मंदिर पर हो रहे निहत्ते रामभक्त प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलवाने वाले इसी पार्टी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे। जिन विदेशी भीख पर सनातन का अपमान करने वालों को इतना भी नहीं मालूम कि संत तुलसीदास से हज़ारों वर्ष पूर्व राम जन्म से पूर्व ही महर्षि वाल्मीकि ने त्रेता युग में ही रामायण लिख दी थी। जबकि संत तुलसीदास ने वर्तमान कलयुग में यानि प्रभु श्रीराम के हज़ारों वर्ष बाद। शर्म आती है उन हिन्दुओं पर जो इस पार्टी को अपना समर्थन एवं वोट देते हैं। 

ये ढोंगी हिन्दू सनातन धर्म पर प्रहार कर सकते हैं, लेकिन अन्य धर्मों के विरुद्ध बोलने पर इनके घरों में शोक हो जाता है। हिन्दुओं बेशक अनेक वर्ग हैं, लेकिन सभी एक ही मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं, इतना ही नहीं मृतक का भी एक ही शमशान पर दाह-संस्कार होता है, जबकि अन्य मजहबों में एकदम विपरीत। ये विदेशी भीख पर पलने वाले 'हिन्दू आतंकवाद', 'भगवा आतंकवाद' आदि बयानों से हिन्दुओं को अपमानित करने का घिनौना काम करते आ रहे हैं। ऐसे हिन्दू विरोधियों का, चाहे वह किसी भी धर्म अथवा जाति से हो, परिवार सहित सामाजिक बहिष्कार जरुरी है। जब तक हिन्दू विरोधियों का परिवार सहित सामाजिक बहिष्कार नहीं होगा, इनका दुस्साहस बंद नहीं होगा। हिन्दुओं को जागृत होना पड़ेगा, अन्यथा वह दिन दूर नहीं होगा जब सनातन धर्म के दुश्मन घर में भी आरती करने पर कुत्तों की तरह भोंकना शुरू कर देंगे।    

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव के बाद अब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी रामचरितमानस के खिलाफ विवादित बयान दिया है। सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने हिन्दुओं के इस ग्रंथ को बकवास किताब बताते हुए बैन करने की माँग कर डाली है। मौर्य ने रामचरित मानस को तुलसीदास द्वारा अपनी ख़ुशी के लिए लिखी गई किताब करार दिया है। स्वामी प्रसाद ने यह बयान 22 जनवरी, 2023 को दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि भले ही वो सभी धर्मों का सम्मान करते हैं लेकिन जाति के नाम पर जो भी विशेष वर्ग को अपमानित करे उस पर आपत्ति जताते हैं। मौर्य ने सीधे रामचरितमानस का नाम लेते हुए कहा कि अब करोड़ों लोग इस किताब को नहीं पढ़ते हैं और इसमें सब बकवास है। स्वामी प्रसाद ने सरकार से रामचरितमानस में कुछ अंश को आपत्तिजनक बताते हुए उसे हटाने की माँग की। उन्होंने आगे कहा कि अगर वो अंश न हट पाएँ तो पूरी किताब को ही बैन कर देना चाहिए।

स्वामी प्रसाद ने अपनी बयानबाजी इसके बाद भी जारी। उन्होंने कहा कि वो रामचरितमानस को धर्म ग्रंथ मानते ही नहीं हैं क्योकि इस किताब को तुलसीदास ने अपनी खुद की ख़ुशी के लिए लिखा था। स्वामी प्रसाद ने आरोप लगाया कि रामचरितमानस में कुछ ऐसी चौपाइयाँ हैं, जिनमें शूद्रों को अधम होने का सर्टिफिकेट दिया गया है। उन्होंने उन चौपाइयों को एक वर्ग के लिए गाली जैसे बताया। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस के हिसाब से ब्राह्मण भले ही कितना गलत करे वो सही और शूद्र कितना भी सही करे वो गलत होता है। मौर्य के अनुसार, अगर उसे ही धर्म कहते हैं वो ऐसे धर्म का सत्यानाश हो और ऐसे धर्म को वो दूर से नमस्कार करते हैं।

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अपने बयान में सपा नेता ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री पर भी नकारात्मक टिप्पणी की। स्वामी प्रसाद मौर्य के मुताबिक, पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री सनातन धर्म का प्रचार नहीं कर रहे हैं बल्कि उसे दफनाने का काम कर रहे हैं। धीरेन्द्र शास्त्री के कार्यों को ढोंग और ढकोसला बताते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने प्रशासन से उनके ऊपर अंधविश्वास फैलाने के आरोप में एक्शन लेने की भी माँग की। इसी दौरान उन्होंने साल 2024 लोकसभा चुनावों में भाजपा द्वारा उत्तर प्रदेश में 80 सीटें जीतने के दावे को ‘मुंगेरीलाल का सपना’ बताया।

कर्नाटक : ‘माँ सीता के साथ बैठ भगवान राम पीते थे शराब, दोपहर में होता था ये काम…’ : लेखक केएस भगवान ने उगला जहर

केएस भगवान ने भगवान राम के बारे में फिर उगला जहर
(Hastagu Telugu)
हिन्दू धर्म विरोधी सपोलों ने बिलों से निकलना शुरू कर दिया है। इन हिन्दू विरोधी सपोलों का हर स्तर पर परिवार सहित बहिष्कार किया जाना चाहिए। 
कर्नाटक के लेखक और तथाकथित तर्कवादी केएस भगवान (KS Bhagwan) ने एक बार फिर भगवान राम के बारे में जहर उगला है। एक कार्यक्रम में उन्होंने भगवान राम के बारे में बोलते हुए कहा कि वह माँ सीता के साथ हर दोपहर बैठकर शराब पीते थे। उन्होंने साथ ही कहा कि वाल्मीकि रामायण में ऐसा कहा गया है। अपना बचाव करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि ये सब वो नहीं कह रहे हैं बल्कि दस्तावेज कह रहे हैं।

उन्होंने 20 जनवरी 2023 को कर्नाटक के मांड्या में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा, ”भगवान राम की दोपहर में मुख्य गतिविधि माँ सीता के साथ बैठकर शराब पीने की होती थी।” उन्होंने साथ ही अपनी बातों को सही ठहराने के लिए वाल्मीकि रामायण और दस्तावेजों का उदाहरण दिया।

ऐसा नहीं है कि इस लेखक ने पहली बार भगवान राम का अपमान किया। लेखक ने अपनी पुस्तक ‘राम मंदिर येके बेड़ा (Rama Mandira Yake Beda)’ में भगवान राम के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि भगवान राम नशा करते थे और माँ सीता को नशा करवाते थे। उस समय कुछ हिंदू संगठनों ने भगवान की इस टिप्पणी का व्यापक विरोध किया था और उनके घर के बाहर पूजा करने की कोशिश की थी। 

हालाँकि तब राज्य सरकार ने उनके आवास के बाहर सुरक्षा काफी कड़ी कर दी थी। वहीं भगवान राम के अस्तित्व पर बार-बार सवाल उठाने के विरोध में फरवरी 2021 में बेंगलुरू की एक अदालत में एक महिला वकील ने उनके चेहरे पर कालिख पोत दी थी।

बिहार के शिक्षा मंत्री ने किया रामचरितमानस का अपमान

इनके अलावा कुछ दिन पहले बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने रामचरितमानस को नफरत फैलाने वाला ग्रंथ करार दिया था। ‘नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी’ के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए RJD नेता रामचरितमानस को समाज को बाँटने वाला ग्रंथ बता दिया था। उन्होंने कहा था कि रामचरितमानस दलितों-पिछड़ों को शिक्षा ग्रहण करने से रोकता है। संबोधन के बाद मीडिया के सामने भी बिहार के शिक्षा मंत्री अपने बयान पर कायम नजर आए थे।
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पटना ज्ञान भवन में नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में चंद्रशेखर ने छात्र छात्राओं को संबोधित किया था। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने रामचरितमानस के एक दोहे “अधम जाति में विद्या पाए, भयहु यथा अहि दूध पिलाए” का जिक्र करते हुए कहा था कि यह समाज में नफरत फैलानेवाला ग्रंथ है। उन्होंने कहा था कि दोहे में अधम का अर्थ नीच होता है जिसे उन्होंने जाति से जोड़ते हुए कहा कि इस दोहे के अनुसार नीच जाति अर्थात दलितों-पिछड़ों और महिलाओं को शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार नहीं था।