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भगवान राम का अपमान, आजादी के नारे और तिरंगे से बदसलूकी: कॉकरोचों को ये तक नहीं पता कि वे क्यों आए हैं

                                                             साभार : ऑपइंडिया
कल(6 जून) को कॉकरोच जनता पार्टी ने दिखा दिया कि रात के अँधेरे में वह कहाँ जा रहा है, तो तेज सूरज की तपिश में उससे कोई उम्मीद की भी नहीं जा सकती थी। नेपाल जैसा उपद्रव करने के लिए करोड़ों रूपए खर्च कर इसके आका भी सिर पकड़ कर बैठ गए होंगे। कई उपद्रवियों को तो शिक्षा मंत्री तक नाम नहीं पता जिसका इस्तीफा मांग रहे थे। सोशल मीडिया पर कई वीडियो देखने को मिले जहाँ मोदी और योगी तक का पद नहीं बता पाए।
कई लोगों तो यह तक नहीं मालूम कि 'यहाँ आये किस लिए हैं?' यानि अगर किसी वजह से उपद्रव हो गया होता तो अरविन्द केजरीवाल और INDI गठबंधन की बल्ले-बल्ले हो गयी होती। लेकिन विधाता को तो कुछ और ही मंजूर था। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके तो तेज गर्मी की पहले ही भाग खड़ा हुआ था या विरोधियों की तैयारी से ये तो वही जानता है। लेकिन कोई उपद्रव नहीं होने पर इनके आकाओं के अरमानों पर पानी जरूर फिर गया।    

    

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शनिवार (6 जून 2026) को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी इस कथित पार्टी के सदस्यों यानी ‘कॉकरोचों’ को प्रदर्शन के लिए बुलाया था। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने समर्थकों से बड़ी संख्या में पहुँचकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी, लेकिन उनका साथ देने वाले कॉकरोचों की संख्या उनकी उम्मीदों को तोड़ने वाली रही।

अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर युवाओं और छात्रों से बड़ी से बड़ी संख्या में जुटने का आह्वान किया था लेकिन आह्वान का असर केवल कुछ कॉकरोचों पर ही पड़ा। सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोअर्स वाली इस CJP के प्रदर्शन में बमुश्किल कुछ सौ लोग ही पहुँचे। बात सिर्फ इतनी ही नहीं है इसमें शामिल होने वाले कॉकरोचों को देखकर भी साफ समझा जा सकता था कि इनकी मंशा केवल हिंसा फैलाना, सुर्खियाँ बटोरना, सरकार और भारतीय संस्कृति को बदनाम करना था।

कोई कॉकरोच यहाँ हिंदू देवी-देवता का अपमान कर रहा तो कोई अपनी पर्सनल डायरी को संविधान बता रहा। किसी को तिरंगे के सम्मान से कोई लेना-देना नहीं तो कोई डफली बजाते हुए आजादी-आजादी चिल्ला रहा और इनका कहना था कि ये छात्रों के भविष्य के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे, ये कॉकरोच जिनके पास ना तो ज्ञान है और ना ही तमीज।

यह आरोप कोई हमारा मनगढ़ंत नहीं है बल्कि ऑपइंडिया को इसके प्रमाण भी मिले हैं। पहली बात तो ये सामने आई कि प्रोटेस्ट के नाम पर शोर मचाने वाले ये कॉकरोच असल में ना तो कोई छात्र हैं और ना ही पढ़ाई या किसी तरह की परीक्षा से इनका कोई लेना-देना है और इसका प्रमाण इन्होंने खुद ही दे दिया ‘आजादी-आजादी’ के नारे लगाकर।

वायरल वीडियो अब तक आपने भी देख लिए होंगे और अगर नहीं देखें तो ऑपइंडिया के इन वीडियोज को देंखे, जिसमें ये अबर्न नक्सली डफली बजाते हुए ‘आजादी-आजादी’ चिल्ला रहे।

वीडियो में दिख रहे ये लोग चिल्ला रहे, “हम क्या चाहते आजादी, BJP से आजादी, हमारा नारा आजादी, मोदी सुनले आजादी, BJP सुनले आजादी, तुम जेल में डालो आजादी, हम लेके रहेंगे आजादी, मैं भी बोलूँ आजादी, तू भी बोले आजादी, देश बोले आजादी, मोदी तुझसे आजादी, BJP तुझसे आजादी।” अब आप सोचिए कि इसका पेपर लीक से क्या लेना देना है भला?

यह पहली बार नहीं जब ये वामपंथी गुट किसी भी अन्य मुद्दे को ढाल बनाकर सामने आया हो और बाद में असली रंग दिखाया हो। किसान आंदोलन के समय भी किसानों के साथ उनकी लड़ाई में शामिल होने को ढोंग कर के इन वामपंथियों ने एक शांत से धरने को हिंसक बना दिया था।

इसके अलावा साल 2019-20 का समय याद करें तो दिल्ली समेत जगह-जगह CAA-NRC के विरोध में सड़क पर आकर बैठे प्रदर्शनकारियों ने अपने प्रोटेस्ट का रंग बदल दिया था। उन्हीं प्रदर्शनों का नतीजा था कि दिल्ली को हिंदू विरोधी दंगे झेलने पड़े। 40-50 लोगों की निर्ममता से मौत हुई।

मकसद भी नहीं बता पा रहे अभिजीत के कॉकरोच, तिरंगे के अपमान का वीडियो आया सामने

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने अपने समर्थकों से अपील की थी कि वो अपने साथ तिरंगा झंडा, किताबें और फूल लेकर आएँ। उनके कॉकरोचों यानी समर्थकों ने ये बात मानी भी लेकिन शायज आशुतोष उन्हें ये बताना भूल गए कि तिरंगे को हर भारतीय, हर देशभक्त सम्मान की दृष्टि से देखता है।

ऑपइंडिया ने इसकी पुष्टि कर रही ऐसी ही एक घटना को कैप्चर भी किया है, जिसमें प्रदर्शन करने पहुँचे कॉकरोच तिरंगे का अपमान कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि कोई ऐसा व्यक्ति, जिसको अपने देश से प्रेम हो वो ऐसी घटिया हरकत कर सकता है। साफ समझ आ रहा कि ये हरकते भारत को बदनाम करने की वामपंथियों की केवल एक साजिश है।

दूसरी तरफ ऑपइंडिया के रिपोर्टर्स को ग्राउंड पर ऐसा कोई कॉकरोच नहीं मिला, जो यह बता सके कि उनका जुटान यहाँ हुआ किसलिए है। किसी के पास कोई मुद्दा नहीं जो वो बता सकें कि इसलिए वो प्रदर्शन करने आए हैं। कोई पेपर लीक पेपर लीक चिल्ला रहे तो वो उनके साथ मिल जा रहे।

कोई आजादी-आजाजी चिल्ला रहा तो उधर भी उपस्थिति दर्ज कर रहे। इस बैनर से उस बैनर, यहाँ से वहाँ, वहीं जो असल में कॉकरोच करते हैं।

हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ उगला जहर उगलने पहुँच रहे कॉकरोचों के दादा-परदादा

जंतर-मंतर पर पहुँचे एक बुजुर्ग ने ऑपइंडिया के रिपोर्टर से कहा कि ‘पांडव-वांडव’ तो कभी थे ही नहीं, ये सब बेकार बाते हैं। उन्होंने आगे कहा, “राम-वाम सब छोड़ दे, तु वहाँ मत जा, राम मोदी को नहीं मारता, सारे देश को लूट कर खा गया, वो मोदी को नहीं मारता, राम मंदिर के नाम पर कितने रुपए डकार गया, अडानी-अंबानी को नहीं मारता है।”

जब ऑपइंडिया के रिपोर्टर ने पूछा कि इसमें भगवान राम बीच में कहाँ से आ गए तो वो कहते हैं, “तेरे मेरे को डराने के लिए हैं राम तो, उसको नहीं मानते।” जिनको ना तो भारत के इतिहास, संस्कृति और धर्मग्रंथो से कोई लेना-देना नहीं, ना तो इन्हें हिंदू देवी-देवताओं का सम्मान करना आता है, ये लोग पहुँचे हैं कॉकरोचों को समर्थन करने।

कोई डायरी को बता रहा संविधान तो किसी का जवाब- अब्बा-डब्बा-जब्बा

प्रशांत राणा नाम के एक कॉकरोच से ऑपइंडिया के रिपोर्टर ने बात की तो उसने हाथ में ली हुई डायरी को भारत का संविधान बताया। जब रिपोर्टर ने दिखाने को कहा तो प्रशांत ने थोड़ा भाव खाया, लेकिन फिर डायरी खोली और कहा, ‘ये मेरे कुछ आर्टिकल्स हैं।’ जी हाँ यानी कॉकरोचों का अपना एक संविधान भी लिखा जा रहा है। उसने कहा कि ये मेरे लिए संविधान है।

रिपोर्टर ने जब उससे कहा कि भाई दिखाओ तो इस संविधान में क्या है तो कॉकरोच ने कहा- “इतनी पर्सनल चीज नहीं दिखा सकते।” इसके बाद वो लगातार अपने मन का बेतुकी बातें करता रहा जो संभवतः उसके अपने पर्सनल संविधान में लिखी होंगी।

ऑपइंडिया को प्रशांत की तरह ही एक और कॉकरोच मिला। उसने कहा कि वो सिस्टम का विरोध करने वालों का समर्थन कर रहा है। उसने कहा कि एजुकेशन सिस्टम पूरी तरह करप्ट हो चुका है। जब रिपोर्टर ने पूछा कि तो इसका हल क्या है और CJP के पास इसका क्या समाधान है तो उसने ना में सिर हिला दिया कि उसके पास इसका कोई जवाब नहीं है।

मास्क पहने एक कॉकरोच ने बताया कि नीट पेपर लीक हुआ है, इसलिए वो यहाँ आया है, लेकिन और कौन से पेपर कब लीक हुए हैं, इसके बारे में उसे कोई जानकारी नहीं थी। वह लगातार कहता रहा, “नीट का पेपर लीक हुआ है, होते रहते हैं, अब जैसे नीट का पेपर लीक हुआ है, नीट का पेपर लीक हुआ था, नीट का पेपर लीक हो जाएगा फिर।”

अंत में कॉकरोच ने रिपोर्टर से ही पूछ लिया कि वो बताए कौन-कौन से पेपर लीक हुए हैं। रिपोर्टर के हर सवाल में फँसते हुए कॉकरोच में अंत में चेहरा दिखाकर और बेईज्जती कराना सही नहीं समझा और चुप हो गया। जिन्हें किसी विषय की कोई जानकारी नहीं है, यहाँ तक की अपने भविष्य का भी कुछ नहीं पता ये औरों के भविष्य की क्या चिंता करेंगे।

मैं कोई तिरंगा-विरंगा नहीं… राजदीप सरदेसाई ने इस बार किया राष्ट्रीय ध्वज का अपमान: क्या ऐसे होते हैं वरिष्ठ पत्रकार?

                               सौरभ द्विवेदी और राजदीप सरदेसाई (फोटो साभार: द लल्लनटॉप)
इंडिया टुडे के वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई अपने मुँह से अनाप-शनाप निकालने की वजह से अक्सर सोशल मीडिया पर ट्रोल होते हैं। इस बार भी वह इसी कारण से गाली खा रहे हैं। उन्होंने एक वीडियो में तिरंगे को लेकर अपने मन की बात रखी और वही बात सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

 देख सकते हैं कि ‘द लल्लनटॉप’ के सौरभ द्विवेदी के साथ उनकी बातचीत क्रिकेट मैच देखने पर चल रही थी। इसी दौरान सौरभ बताने लगे कि वो स्टेडियम में बैठकर मैच देखने को लेकर इतने उत्साहित हैं कि उन्होंने निर्णय लिया है कि वो कलाई पर तिरंगा भी बनवाएँगे। इसके बाद उन्होंने कैमरे पर दिखाया कि वो अपने डेस्क पर भी हमेशा तिरंगा रखते हैं जिसे भारतीय सेना के बलिदानियों की विधवा (वार विडोज) द्वारा बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि ये तिरंगा उनके दोस्तों ने उन्हें दिया था इसलिए वो हमेशा मेज पर रहता है।

इसे सुन राजदीप सरदेसाई बड़ी हैरानी के साथ आँख निकालकर पूछते हैं- तो इसे आप लेकर जा रहे हो? इस पर सौरभ कहते हैं कि वो बस बात बता रहे हैं क्योंकि उन्हें याद आ गया है।तुरंत बाद राजदीप सरदेसाई कहना शुरू करते हैं, “मैं कोई तिरंगा-विरंगा नहीं रखता। तिरंगा मेरे दिल में है।”

सौरभ उनकी बात सुन नाराज होते हैं और उन्हें उनकी इस भाषा के लिए टोंकते हैं। वह समझाते हैं, :आप हमेशा कहते हो कि हिंदी आपकी पहली भाषा नहीं और उसके बाद आप ऐसी बात कहते हो। तिरंगा-विरंगा मत कहो।”

इस पर राजदीप बात को संभालते हुए कहते हैं, “मैं तिरंगे को अपने दिल में रखता हूँ और मैं इंडिया की शर्ट पहनूँगा लेकिन तिरंगा हाथ पर नहीं बनवाऊँगा।” इस पर सौरभ चुटकी लेते हुए कहते हैं- “अब आपकी ये सब करने की उम्र भी नहीं है।”

राजदीप सरदेसाई की यही क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। लोग इसे देखने के बाद राजदीप पर भड़क रहे हैं। कहा जा रहा है कि जिसके मन में तिरंगे के प्रति सम्मान नहीं होता वही इस तरह की बातें करता है।

कुछ यूजर्स इसे सीधे तौर पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान बता रहे हैं। राजदीप के बड़बोलेपन पर कार्रवाई करने की बातें हो रही हैं।

सवाल खड़ा किया जा रहा है कि जो व्यक्ति खुद को वरिष्ठ पत्रकार कहता है उसे ये भी नहीं पता क्या कि वो शब्द कैसे इस्तेमाल कर रहा है।

किसी का राजदीप सरदेसाई की वीडियो देख कहना है कि ये लोग कॉन्ग्रेसी पत्रकार हैं भारत का अपमान तो करेंगे ही।

मालदीव : जिस मुस्लिम महिला मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को दी थी गाली, उसने अब हमारे तिरंगे का किया अपमान: विरोध के बाद पोस्ट डिलीट कर भागी

भारत विरोधी एजेंडा करने वाली मरियम शिउना (बाएँ) और  मोदी (दाएँ) (चित्र साभार: Opindia Archive & ET)
मालदीव की सरकार में मंत्री मरियम शिउना ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगला है। शिउना ने मालदीव की विपक्षी पार्टी, भारत और भाजपा को निशाना बनाने के लिए एक फर्जी पोस्टर पोस्ट किया। इस पोस्टर में भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा में शामिल अशोक चक्र का अपमान किया गया।

शिउना ने शनिवार (6 अप्रैल, 2024) की रात्रि को अपनी पार्टी PPM के लिए समर्थन जुटाने वाला एक पोस्ट किया। इसमें विपक्षी पार्टी PPM को निशाना बनाते हुए अशोक चक्र को शामिल करके पोस्टर बनाया गया था और इस पर लिखा था, “MDP उनके (भारत) जाल में फंस रही है, हमें (मालदीव) उनके जाल में दोबारा फँसने की जरूरत नहीं है।”

इस पोस्टर को विपक्ष की पार्टी मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) के संसदीय चुनावी अभियान के लिए जारी किए गए पोस्टर को बिगाड़ करके बनाया गया था। जहाँ MDP के पोस्टर में एक कम्पास था, तो मंत्री शिउना के फर्जी पोस्टर में कम्पास की जगह पर भारत के तिरंगा में शामिल अशोक चक्र लगा दिया गया था। यह भारतीय ध्वज का अपमान करके के उद्देश्य से किया गया।

इस फर्जी पोस्टर में मात्र अशोक चक्र ही नहीं बल्कि भाजपा का चुनाव चिन्ह कमल भी शामिल किया गया है। यह चुनाव चिन्ह MDP के चुनाव चिन्ह के साथ उपयोग किया गया है और दोनों पार्टियों के बीच किसी गठबंधन का इशारा किया गया है। गौरतलब है कि MDP मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत विरोधी नीतियों का विरोध करती रही है।

यह पोस्ट शिउना ने हटा दिया है। शिउना की करतूत का काफी विरोध हुआ है। सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि जहाँ एक तरफ मालदीव भारत से मदद माँगता है वहीं दूसरी तरफ उसके मंत्री भारत का अपमान करते हैं और भारत के खिलाफ विषवमन करते हैं।

शिउना का यह भारत विरोधी पोस्ट तब आया है जब भारत ने हाल ही में मालदीव को भेजी जाने वाली सामग्रियों का कोटा बढ़ाया है। भारत ने चावल, दाल और अन्य खाद्य सामग्रियों से सम्बन्धित कोटा को मालदीव के आग्रह के बाद बढाया था। इसको लेकर मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जमीर ने भारत का धन्यवाद किया था।

भारत और मालदीव के रिश्ते बीते वर्ष के अंत से ही ठीक नहीं है। मालदीव में 2023 में मोहम्मद मुइज्जू चुनाव जीते थे। मुइज्जू ने भारत के खिलाफ अभियान चला कर यह चुनाव जीता था। इसके बाद भारत और मालदीव के बीच काफी बड़ा राजनयिक विवाद भी हुआ था। अब मालदीव में संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं तो मुइज्जू की पार्टी फिर से उसी हथकंडे को अपना रही है।

मालदीव के मंत्रियों की वजह से हुआ था राजनयिक विवाद

पीएम मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद एक्स (पहले ट्विटर) पर रौशन सिन्हा ने पीएम मोदी का ‘लक्षद्वीप में पर्यटन को बढ़ावा देने वाला’ वीडियो शेयर किया था। सिन्हा ने कहा था कि यह “मालदीव की नई चीनी कठपुतली सरकार के लिए एक बड़ा झटका” है।
इस पोस्ट से मालदीव की युवा, सूचना और कला मामलों उप मंत्री मरियम शिउना चिढ़ गई। शिउना ने मिस्टर सिन्हा की पोस्ट का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘जोकर’ और ‘इजरायल की कठपुतली’ कहा। यह पोस्ट बाद में हटा दिया गया। गौरतलब है कि पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में कहीं भी मालदीव का जिक्र नहीं किया था।
भारत सरकार ने मरियम शिउना की टिप्पणी को लेकर मालदीव से कड़ी आपत्ति जताई थी। शिउना को मालदीव की सत्तारूढ़ पार्टी के दो अन्य नेताओं के साथ बाद में निलंबित कर दिया गया था। इस पूरे विवाद के बाद बड़ी सँख्या में भारतीयों ने मालदीव की यात्रा ना करने को लेकर अभियान चलाया था।
इन सभी विवादों के बाद भी मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत को ‘निकटतम सहयोगी’ बताया था। उन्होंने इसके बाद भारत से कर्ज में राहत देने की माँग की थी। अब शिउना के भारतीय ध्वज के अपमान के बाद दोंनो देशों के बीच राजनयिक तनाव फिर बढ़ सकता है।