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सनातन का अपमान, स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘SHAKTI’ विकसित करने वाले वैज्ञानिक का उड़ाया मजाक


कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं की सनातन धर्म में कोई आस्था नहीं है। सनातन संस्कृति, गौ माता और भारतीय वैज्ञानिकों का अपमान करना इनकी आदत बन चुकी है। 7 नवंबर 1966 (गोपाष्टमी) को गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर स्वामी करपात्री जी महाराज और कई हिंदू संगठनों ने संसद भवन के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साधु-संतों पर गोली चलाने का निर्देश दिया था, जिसमें सैकड़ों साधु-संत मारे गए थे। पार्लियामेंट स्ट्रीट साधुओं के खून से लाल हो गयी थी। आज फिर इंदिरा गांधी की पोती प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस घटना की याद ताजा कर दी है। उन्होंने संसद में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन, पुलिस लाठीचार्ज और परीक्षा सुधार को लेकर गठित समितियों पर बोलते हुए गौ माता और वैज्ञानिक का अपमान किया।
चुनावों में हिन्दुओं को गुमराह करने रुद्राक्ष की माला पहन मन्दिरों में जाती है लेकिन मुस्लिम क्षेत्रों में हाथ में कलावा तक नहीं होता। आखिर मुस्लिमपरस्त पार्टी से सनातन का गुणगान कैसे कर सकती है? कुछ लोग कहते थे कि प्रियंका गाँधी कांग्रेस के लिए राहुल गाँधी से बेहतर विकल्प हो सकता है, मुझे भी लगता था!
लेकिन शायद कांग्रेस को हकीकत पता थी, शायद इसीलिए राहुल के लगातार फेलियर के बावजूद प्रियंका को कभी कांग्रेस अध्यक्ष या PM मेटेरियल के रूप में प्रोजेक्ट करने का साहस नही किया!
जुलाई 28 को संसद में छात्रों के भविष्य और पेपर लीक विरोधी कानून जैसे गम्भीर मुद्दे पर प्रियंका गाँधी ने सिर्फ एक लाइन बोली कि ये पूरा कानून ही बेकार है, इससे पेपर लीक नही रुक सकता है!
आपको याद होगा इसी मानसिकता से इसने राजस्थान में लगभग हर पेपर लीक पर गहलोत का बचाव करते हुए कहा था कि गहलोत जी प्रयास कर रहे है! फिर भी पेपर लीक हो रहे है तो क्या करे?
क्योकि मंशा छात्रहित न होकर सिर्फ छात्रों के नाम पर राजनीति करना हो तो फिर सुझाव कहाँ से आएंगे?
अपनी योग्यता से IIT मद्रास जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के निदेशक पद पर बैठे प्रोफेसर कामाकोटी वीझिनाथन को गोमूत्र विशेषज्ञ बताकर हंसने लगी जैसे तो सनातन आस्था का मजाक बना रही हो? और गुलाम हिन्दू कांग्रेसी हंस रहे थे।
प्रियंका का कहना कि IIT मद्रास के निदेशक को शिक्षा बारे में क्या पता, अब कोई इनसे पूछे कि वो इस पद पर किसी खानदान में पैदा होने से नही पँहुचे बल्कि शिक्षा के दम पर ही पँहुचे है!
तुम दोनो बहन भाइयों को शिक्षा के बारे में क्या पता? एक खानदान में पैदा होने के अलावा तुम्हारी क्या योग्यता है जो तुम लोगो की लांचिंग ही सीधे राष्ट्रीय पदों पर होती है?
तुम दोनो भाई बहिन कांग्रेस का लीक नही रोक पा रहे तुम से पेपर लीक पर सुझाव की वैसे भी कोई उम्मीद नही है!
कभी नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर अनर्गल आरोप लगाने लगी!
न किसी क्लोज की बात की, न कोई और सुझाव दिया सीधे बोल दिया, नई कमेटियां बनाने से काम नहीं चलेगा। राधाकृष्णन कमेटी भी बनी थी लेकिन उसकी एक भी सिफारिश लागू नहीं की गई।
यहाँ भी साफ झूठ बोला, राधाकृष्ण कमेटी की 60% सिफारिश लागू हो चुकी है!
अभी तक इस मुद्दे पर विपक्ष के किसी वक्ता की तरफ से इस मुद्दे पर कोई सुझाव नही आया, आएगा भी कैसे, इनके पास सुझाव ही होते तो पहले इनकी सरकारों में ही कोई ठोस कानून बन गए होते, पेपर लीक तो पहले भी होते थे लेकिन इन्होंने तो कोई कानून लाने का प्रयास ही नही किया था!
आज सरकार प्रयास कर रही है तो ये लोग इसे सिर्फ सरकार को गरियाने का मुद्दा समझकर चुनावी भाषण दे रहे है, गम्भीर मुद्दे को सदन में मजाक बनाकर रखा है!
प्रियंका वाड्रा ऐसे बोल रही थी जैसे वो देश के मालिक है और दुनिया मे सब लोग उनके आगे तुच्छ है!
उसका मकसद मुद्दे पर गम्भीर चर्चा के बजाय, इस विषय से जुड़े लोगों की मजाक बनाकर तालिया बजवाने और ठहाके लगवाने के अलावा कुछ नही लगा !  

प्रियंका गांधी ने लोकसभा में गौ माता का किया अपमान
दरअसल नीट (NEET) और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड रिफॉर्म टास्क फोर्स का गठन किया है। लोकसभा में इस कार्यबल पर तंज कसते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि इस नई समिति में तो पूर्व आईबी चीफ, एक आईटी कंपनी के मालिक, और एक गौ-मूत्र के विशेषज्ञ भी है। इन्हें शिक्षा के बारे में क्या पता जी। इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा के चेहरे पर कुटिल मुस्कान और लोकसभा में बैठे कांग्रेस सांसदों द्वारा मेज थप-थपाकर हंसना साबित करता हैं कि इन्हें सनातन संस्कृति और गौ-माता का अपमान करने में मजा आता है।

प्रियंका गांधी ने वैज्ञानिक वी.कामकोटि का उड़ाया मजाक
प्रियंका गांधी वाड्रा ने जिस गौ मूत्र विशेषज्ञ पर तंज कसा, उनका नाम प्रो.वी.कामकोटि हैं। इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स में देश के चुनिंदा शिक्षा और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इसमें आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो.वी.कामकोटि का नाम भी शामिल है। प्रो. कामकोटि सिर्फ एक शिक्षाविद ही नहीं, बल्कि भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘SHAKTI’के विकास का नेतृत्व करने वाले वैज्ञानिक भी हैं।

विकसित किया भारत का पहला स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘SHAKTI’
प्रो. कामकोटि को सबसे ज्यादा पहचान भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर SHAKTI माइक्रोप्रोसेसर परियोजना से मिली। उन्होंने उस रिसर्च टीम का नेतृत्व किया जिसने भारत का पहला स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर विकसित किया। इस परियोजना का उद्देश्य भारत को चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर तकनीक में आत्मनिर्भर बनाना था। आज SHAKTI को देश की महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धियों में गिना जाता है। प्रो.वी.कामकोटि का कंप्यूटर साइंस, साइबर सुरक्षा और टेक्‍नोलॉजी इनोवेशन के क्षेत्र में लंबा अनुभव रहा है। ऐसे में अब उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे NTA की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

आम दिनों में करो महिलाओं का अपमान, चुनावों के वक्त चिल्लाओ ‘नारीवाद’: कांग्रेसी नेताओं की दोगलई फिर उजागर, फेक वीडियो देख उड़ाया पत्रकार का मजाक

                                                                                        साभार: एक्स @NayakRagini, @chitraaum
कांग्रेस पार्टी जिसका नारा रहा है-‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’, लेकिन उसने कभी लड़कियों, महिलाओं की इज्जत को समाज में उछालने में कोई शर्म नहीं की है। पार्टी के नेता कभी सोशल मीडिया पर तो कभी किसी इंटरव्यू में नारी को मजाक का केंद्र बनाते रहे हैं। अब कांग्रेस नेत्री डॉक्टर रागिनी नायक ने भी इसी नीचता में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की है।

रागिनी नायक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आज तक की एंकर और पत्रकार चित्रा त्रिपाठी का एक वीडियो शेयर करते हुए ना सिर्फ उनका अपमान किया है, बल्कि सच्चाई सामने आने के बावजूद अपने पोस्ट को डिलीट नहीं किया है। आईए जानते हैं कि वीडियो में क्या है और कैसे कांग्रेस पार्टी का इतिहास ही हमेशा महिलाओं के अपमान का रहा है।

इस फेक वीडियो में कथित तौर पर चित्रा कहती दिखती हैं, “बलूचिस्तान को देखिए, खैबर पख्तूनख्वा को देखिए।” इस पर पाकिस्तानी कहता है, “चित्रा जी बलूचिस्तान को देखने के लिए जनरल आसिफ मुनीर काफी हैं, मैं तो सिर्फ आपको ही देखूँगा आज, अगर मेरी नजरें आपसे हटी तो 50 किलो मेकअप, जो आप अपने चेहरे पर थोप के आई हैं उसका क्या फायदा?”

इस पर चित्रा कहती हैं, “मेकअप पर टिप्पणी मत करिए, आपके पाकिस्तान में भी खातूने करती हैं मेकअप।” तो वह कहता है, “बिल्कुल पाकिस्तानी औरतें मेकअप करती हैं, मगर अपने खर्चे से, आपके मेकअप का खर्चा तो मोदी जी का है ना।”

वीडियो के साथ रागिनी नायक ने लिखा, “चित्रा – मेरे Makeup पर टिप्पणी मत करिए..पाकिस्तानी खातूनें भी Makeup करती हैं। Pak पैनलिस्ट- बिल्कुल, पाकिस्तानी औरतें Makeup करती हैं, पर अपने खर्चे से..आपके Makeup का खर्चा मोदी जी का है ना। पाकिस्तानियों को शो पर बुला कर, उनके हाथों यूँ जलील होने की क्या मजबूरी है भला???”

अगले ही ट्वीट में रागिनी नायक ने लिखा, “अब चित्रा कह रही हैं कि ये Video Fake है! चलिए अच्छा है! ऐसी बेइज्जती तो भगवान दुश्मन की भी ना कराए!” सोचने वाली बात है कि अगर चित्रा ने ये पुष्टि कर दी है कि वीडियो फेक है और रागिनी यह मान भी रहीं है तो भी अपना पोस्ट हटाया क्यों नहीं।

दरअसल उनका असल मुद्दा तो केवल एक महिला का मजाक उड़ाना था, बेइज्जती करना था। वो भी तब, जब बेइज्जती कर रहा व्यक्ति पाकिस्तान जैसे आतंकी देश का हो। साफ समझा जा सकता है कि नारीवाद के नाम पर चिल्लाने वाली इस पार्टी की नेताओं की मानसिकता क्या है।

इन्होंने ये बातें एक फर्जी वीडियो पर बोली हैं। यानी इन्हें प्रमाणिकता से लेना-देना नहीं होता, पाकिस्तान ही अगर इनके मतलब की बात कर देगा तो ये उसे कोट करके भारतीयों का मजाक उड़ा लेंगे।

रागिनी के साथ अलका लांबा को भी चित्रा त्रिपाठी ने दी नसीहत

कांग्रेस नेत्री लका लांबा ने भी X पर वहीं वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “चित्रा की क्या मजबूरी होगी जो पाकिस्तान के लोगों को अपने चैनल/शो में बुला कर चर्चा करवाने की? और यूँ उनके हाथों जलील होने की ??” अलका लांबा की पोस्ट पर जवाब देते हुए चित्रा ने लिखा, “अलका लांबा जी पाकिस्तान का यूट्यूबर अपने व्यूज बढ़ाने के लिये मेरे वीडियो में काँट छाँट करके फेक न्यूज तैयार करता है। आजतक कभी भी ये व्यक्ति मेरे शो का हिस्सा नहीं रहा।”

चित्रा ने आगे लिखा, “हैरानी होती हूँ जब कांग्रेस के बड़े पद पर बैठी महिला एक न्यूज एंकर के पीछे पड़ जाये, आप लगातार मेरे उपर टिप्पणी करती हैं और मैं इग्नोर करती हूँ। मगर मैडम पाकिस्तानी फेक न्यूज के एजेंडे में मत पड़ें। पाकिस्तान से आपकी मोहब्बत आपका ही नुकसान करेगी।”

मंडी में रं&… रेट सही मिलता है’: कॉन्ग्रेसियों ने कंगना रनौत पर की थी अभद्र टिप्पणी

भाजपा की ओर से हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से अभिनेत्री कंगना रनौत को टिकट मिलने के बाद उनके खिलाफ भी अभद्र टिप्पणियों की बाढ़ आ गई थी। टिप्पणी करने वालों में कांग्रेस के पदाधिकारी और इस्लामी नामों वाले अकाउंट थे।

खुद को नारीवादी और पत्रकार बताने वाली मृणाल पांडे ने एक्स पर लिखा, “शायद यूँ कि मंडी में सही रेट मिलता है?” हालाँकि चौतरफा छीछालेदर के बाद कांग्रेस मुखपत्र नेशनल हेराल्ड की संपादक मृणाल पांडे ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया।

कांग्रेस की ही राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत के अकाउंट से लिखा गया, “क्या भाव चल रहा है मंडी में कोई बताएगा?” यह पोस्ट भी श्रीनेत के अकाउंट से हटा दिया गया है। इस पर सुप्रिया श्रीनेत ने सफाई दी है कि उनके फेसबुक और इन्स्टाग्राम अकाउंट को किसी और का भी एक्सेस था और उसने यह पोस्ट की। उन्होंने कहा है कि वह ऐसा पोस्ट कभी नहीं करती।

सबसे घटिया बात कि कंगना का विरोध करने वालों ने भाषाई स्तर की बिलकुल भी परवाह नहीं की। एक और ट्विटर यूजर ने कंगना की एक फोटो के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया।

‘भगवा रंग की ब्रा पहन भक्तों को जवाब दें’: पठान के बचाव में कॉन्ग्रेसी उदित राज का बयान

बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान की फिल्म पठान (Pathaan) में ‘भगवा रंग’ के गाने को लेकर काफी विवाद हुआ था। इस बीच कांग्रेस के नेता उदित राज (Udit Raj) ने नारीवादियों से भगवा रंग की बिकनी और ब्रा पहनने की सलाह दी थी। इसको लेकर वो सोशल मीडिया यूजर के निशाने पर भी आ गए थे।

अक्सर विवादों में रहने वाले भाजपा के पूर्व नेता और वर्तमान में कांग्रेस पार्टी में शामिल उदित राज ने अपने ट्वीट में लिखा था, “स्त्रीवादियों से मेरी सलाह है बिकनी और ब्रा आदि भगवा रंग का ही पहनकर इन भक्तों को जवाब दें।” सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा कि इसकी शुरुआत उन्हें अपने घर से करनी चाहिए।

वहीं कुछ यूजर ने उन्हें मानसिक रूप से बीमार बताया है। एक अन्य यूजर ने लिखा, “जरा अपनी पार्टी के सबसे बड़े लीडर तक यह जवाब पहुँचा तो दो। यह जानबूझकर खाली सुनवाने के लिए यह ट्वीट किया गया लगता है। कसम खा लिए हो जबतक राहुल गांँधी को कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष नहीं बना देते ऐसे ही passive mode में गाली सुनवाते रहेंगे।”

अपनी असली मानसिकता स्वीकारो: नारीवाद को लेकर ढोंग क्यों?

देखा जाए तो कांग्रेस पार्टी को किसी भी महिला की इज्जत से कोई खास फर्क पड़ता नहीं है, तो फिर सवाल ये है कि नारीवाद-नारीवाद चिल्लाने की जरुरत क्या है? ये वहीं पार्टी है, जिसने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवगंत माँ को भी नहीं छोड़ा था। पार्टी अपने फायदे के लिए किसी को भी निशाना बना सकती है, चाहे आधार ही झूठा क्यों ना निकल जाए।

जिस पार्टी में देश की आधी आबादी की भी इज्जत ना हो, वह पार्टी, ‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’ जैसे नारे देकर ऐसे झूठे दिखावे करती है। सब छोड़िए पार्टी की महिला नेत्री भी खुद महिला होकर जब एक महिला की सरेआम बेइज्जती कर सकती हैं, तो फिर पार्टी के अन्य नेताओं से तो महिलाओं की इज्जत की क्या ही उम्मीद करना।

Poor Lady…अंत तक थक गई थीं-सोनिया गाँधी ; संवैधानिक पदों को अपमानित करना और कानूनों की धज्जियां उड़ाना कांग्रेस के DNA में इतिहास साक्षी है, कांग्रेस इंकार नहीं कर सकती

सोनिया गाँधी ने जो महामहिम राष्ट्रपति आदिवासी महिला को "PoorLady" कहा कर अपमानित किया है कोई नई बात नहीं। इतिहास साक्षी है कि संवैधानिक पदों, संविधान और कानून की धज्जियाँ उड़ाना कांग्रेस के DNA में है। जिसका चर्चित YouTuber सुभाष चंद्र और रिज़वान अहमद ने विस्तार से उल्लेख किया है। बात-बात पर दलितों, आदिवासियों की समस्याओं पर छातियां पीटने वाले क्यों खामोश हैं? अगर यही काम किसी बीजेपी की तरफ से हुआ होता सड़क से लेकर सदन तक ये ही INDI गठबंधन SC, ST, OBC और Adivasi को भड़का कर देश का माहौल ख़राब कर रहे होते। लेकिन महामहिम का अपमान सोनिया द्वारा करने पर सबके सब भीगी बिल्ली बन गए। कहाँ गया विदेशी भीख पर पलने वालों का SC, ST, OBC और Adivasi प्रेम?       

खैर, सरकार का एक नियम कह दो कानून है कि युद्ध के दौरान किसी भी एयरलाइन का पायलट 24 घंटे ड्यूटी के लिए तैयार रहेगा, छुट्टियों पर गए पायलटो की छुट्टियां रद्द कर दी जाती है। लेकिन इंडो-पाक युद्ध के दौरान पायलट राजीव गाँधी अपनी पत्नी सोनिया गाँधी के शादी का जश्न मनाने इटली चले गए, क्यों नहीं राजीव गाँधी को तुरंत बर्खास्त क्यों नहीं किया गया? बर्खास्त इसलिए नहीं किया कि माँ इंदिरा गाँधी प्रधानमंत्री थी। देश के प्रथम महामहिम डॉ राजेंद्र प्रसाद का जवाहर लाल नेहरू ने पता नहीं कितनी बार अपमान किया देश नहीं भूला।           
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। देश के सर्वोच्च पद पर बैठी आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू का अपमान करते हुए उन्होंने Poor Lady यानी बेचारी महिला कहकर तंज कसा। आज 31 जनवरी, 2025 को संसद के बजट सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी ने कहा कि Poor Lady…अंत तक बहुत थक गई थीं। राष्ट्रपति के अभिभाषण के बारे में जब सोनिया गांधी से प्रतिक्रिया देने के लिए कहा गया तो उन्होंने शुरू में मीडिया को कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन फिर कहा कि राष्ट्रपति के संबोधन झूठे वादे हैं। इसके बाद उनके बेटे राहुल गांधी ने अभिभाषण को बोरिंग कहा तो सोनिया गांधी ने कहा कि पुअर लेडी…आखिर में बहुत थक गई थीं। मुश्किल से बोल पा रही थीं।

देश के प्रथम नागरिक के इस अपमान से लोग काफी नाराज है। आदिवासी महिला राष्ट्रपति के प्रति कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की इस सोच को लेकर लोग तंज कस रहे हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया पर कांग्रेस की किरकिरी हो रही है।

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सोनिया गांधी ने विदेशी चिंगारी ही तो लगाई; कांग्रेस द्रौपदी मुर्मू को बर्दाश्त ही नहीं कर पा रह
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सोनिया गांधी ने विदेशी चिंगारी ही तो लगाई; कांग्रेस द्रौपदी मुर्मू को बर्दाश्त ही नहीं कर पा रह
सुभाष चन्द्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल(जनवरी 31) शुरू हुए संसद सत्र से पहले कहा था कि पहली बार संसद सत्र के पहल....

 

जब नेहरू ने डॉ. आंबेडकर को उनके ही पीए से हरवा दिया था चुनाव! कांग्रेस ने हर मोड़ पर बाबा साहेब का करती रही है अपमान; दलित समर्पित पार्टियां क्यों नहीं कांग्रेस से पूछती?


कांग्रेस पार्टी दलित समुदाय के समर्थन के लिए 9 अप्रैल 2018 को उपवास पर बैठी। खुद राहुल गांधी ने भी दो घंटे का सांकेतिक अनशन किया। जाहिर है राहुल गांधी इस बहाने राहुल गांधी खुद को दलितों की चिंता करने वाला स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी एक राजनैतिक दल है और उसे ऐसा करने का पूरा हक भी है, परन्तु दलितों को ये नहीं भूलना चाहिए कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा दलितों को दबाकर ही नहीं रखा बल्कि आजादी के छह दशक तक उनका दमन किया है, दबाकर रखा है।

अमित शाह के जिस बयान पर कांग्रेस कहर बड़पा रही है और समस्त INDI गठबंधन भी इसके होने दुष्परिणामों को समझे बिना एक गुलाम की तरह पिछलग्गू बने हुए हैं। वीर सावरकर को जिस तरह ब्रिटिश दलाल कहकर अपमानित किया जाता है, ठीक उसी तरह नेहरू ने आंबेडकर को भी अपमानित किया था। समस्त महाराष्ट्रियनों को कांग्रेस को सावरकर द्वारा ब्रिटिश सरकार से माफीनामा मांगने की मांग करनी चाहिए। लेकिन समस्त महाराष्ट्र इस गंभीर आरोप पर खामोश बैठा है। 

हकीकत यह है कि जिस किसी ने भी नेहरू से लेकर वर्तमान कांग्रेस तक कांग्रेस की नीतियों का विरोध किया, कांग्रेस के इकोसिस्टम ने मुस्लिम विरोधी और जनविरोधी कहकर बदनाम किया। वीर सावरकर, डॉ भीमराव आंबेडकर, तत्कालीन भारतीय जनसंघ वर्तमान भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस आदि इसके ज्वलंत उदाहरण है।     

दरअसल ये वही कांग्रेस पार्टी है जिस पार्टी ने सोनिया गाँधी को अध्यक्ष बनाने के लिए परिवार गुलामों ने दलित नेता सीताराम केसरी को पार्टी ऑफिस से बाहर फेंक दिया था। इस दौरान उनकी धोती भी खुल गयी थी। वर्तमान अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की केसरी से ज्यादा दुर्गति हो रही है, जिसे एक गुलाम की तरह बर्दास्त कर रहे हैं। यानि अपनी मर्जी से जो अध्यक्ष कोई निर्णय न ले सके ऐसे अध्यक्ष से क्या फायदा? कांग्रेस ने कभी किसी दलित समुदाय को प्रधानमंत्री पद के लायक समझा है। ये वही कांग्रेस पार्टी है जिसने जवाहर लाल नेहरू के सामने बाबा साहेब आंबेडकर को छोटा दिखाने की हर कोशिश की। ये वही कांग्रेस पार्टी है जिसने जगजीवन राम को योग्यता के बावजूद प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया। ये वही कांग्रेस पार्टी है जिसमें कोई दलित आज तक अध्यक्ष नहीं बना है।

नेहरू ने धारा 370 पर नहीं मानी बाबा साहेब की बात
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 जिसमें कश्मीर को कई विशेष अधिकार प्राप्त हैं उनके खिलाफ बाबा साहेब ने काफी मुखर होकर अपने विचार रखे थे। हालांकि पंडित नेहरू ने बाबा साहब की एक नहीं चलने दी और देश पर धारा 370 जबरन थोप दिया। बाबा साहेब के विचारों को इस तरह से खारिज कर कांग्रेस ने देश के नाम एक ऐसी समस्या कर दी जो किसी भी हालत में नहीं होनी चाहिए थी। गौरतलब है कि जिस दिन यह अनुच्छेद बहस के लिए आया उस दिन बाबा साहब ने इस बहस में हिस्सा नहीं लिया ना ही उन्होंने इस अनुच्छेद से संबंधित किसी भी सवाल का जवाब दिया।

बाबा साहेब को दलितों के दायरे में समेटने की कोशिश
बाबा साहब आंबेडकर युग पुरुष थे, दूर द्रष्टा थे, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने हमेशा उन्हें दलित नेता कहकर एक दायरे में समेटने की कोशिश की। कांग्रेस पार्टी ने लगातार बाबा साहेब को अपमानित करने का भी काम किया है। कांग्रेस की ये कोशिश रही है कि उनका कद किसी नेहरू-गांधी परिवार के समकक्ष भी खड़ा नहीं हो पाए। बाबा साहेब को भारत रत्न नहीं दिया जाना कांग्रेस की इसी कुत्सित सोच का नतीजा थी।

बाबा साहेब के देहांत के 34 वर्षों बाद मिला भारत रत्न
बाबा साहेब भीमराव रामजी का देहांत 1956 में ही हो गया था, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने बाबा साहेब को भारत रत्न देने से इनकार कर दिया था। फिर इंदिरा गांधी ने भी इन्हें भारत रत्न नहीं दिया। राजीव गांधी ने भी बाबा साहेब को उनका वाजिब सम्मान नहीं दिया। गौरतलब है कि भारत रत्न दिए जाने की बार-बार उठने वाली मांग को भी कांग्रेस पार्टी लगातार खारिज करती रही। हालांकि 1990 में भारतीय जनता पार्टी द्वारा समर्थित राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार ने सुब्रमण्यम स्वामी की पहल पर बाबा साहेब को भारत रत्न से सम्मानित किया।

बाबा साहेब का नहीं बनाया कोई राष्ट्रीय स्मारक

कांग्रेस ने बाबा साहेब की विद्वता और अस्मिता को हमेशा नीचा दिखाने का काम किया है। पंडित नेहरू तो विशेष तौर पर डॉ आंबेडकर को अपना प्रतिद्वंद्वी मानते थे। यही कारण था कि कांग्रेस ने बाबा साहेब के देहांत के बाद भी कोई राष्ट्रीय स्मारक नहीं बनने दिया। दूसरी ओर भाजपा के शासन काल में बाबा साहेब आंबेडकर को उचित सम्मान दिया गया। हालांकि भाजपा की सरकार ने उनके जन्म स्थान महू में बाबा साहेब का राष्ट्रीय स्मारक बनवाया। इसके साथ ही नरेन्द्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री बने जिन्होंने महू जाकर बाबा साहेब को श्रद्धांजलि दी।

बाबा साहेब को कांग्रेस ने दो बार चुनाव हरवाया
कांग्रेस नहीं चाहती थी कि वे दलितों के नेतृत्वकर्ता के तौर पर प्रचारित हो। यही कारण था कि कांग्रेस ने उन्हें दो बार लोकसभा चुनावों में हरवाने की साजिश रची थी।  गौरतलब है कि बाबा साहेब ने आजादी के बाद 1952 में हुए पहले आम चुनाव में अनुसूचित जाति संघ के टिकट पर उत्तरी मुंबई से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उन्हें कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार नारायण काजोलोलर ने हराया था। 1954 में भंडारा में हुए लोकसभा उप चुनाव एक बार फिर अम्बेडकर लोकसभा का चुनाव लड़े, लेकिन इस बार भी अम्बेडकर की बुरी तरह हार हुई।

संसद कक्ष में नहीं लगने दी बाबा साहेब की तस्वीर
कांग्रेस का दलित विरोधी चरित्र हमेशा उजागर होता रहा है। विशेषकर बाबा साहेब का अपमान करने को लेकर कांग्रेस पार्टी कुछ अधिक ही उत्सुक रहती थी। आप खुद सोच सकते हैं जिस व्यक्ति को संविधान निर्माता कहा जाता है उन्हीं की कोई तस्वीर संसद के केंद्रीय कक्ष में नहीं थी। कांग्रेस ने दीवार पर जगह नहीं होने का हवाला देकर तस्वीर लगाने की मांग को हमेशा खारिज किया। 1989 में जब भारतीय जनता पार्टी की समर्थित राष्ट्रीय मोर्चा सरकार बनी तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने पहल कर संसद के केंद्रीय कक्ष में बाबा साहेब का चित्र शामिल कराया।

डॉ. आंबेडकर अपने ही पीए से क्यों हार गए थे चुनाव?

संविधान लागू होने के बाद साल 1951-1952 में देश में पहला लोकसभा चुनाव हुआ। इसमें बाबा साहब बुरी तरह से हार गए थे. बाबा साहब को उन्हीं के पीए नारायण काजरोलकर ने हराया था और उनकी यह चुनावी हार लंबे समय तक चर्चा में रही थी. एक बार फिर डॉ. आंबेडकर बहस का विषय बन गए हैं। आइए इसी बहाने जान लेते हैं बाबा साहब की चुनावी हार का वह किस्सा।

मतभेद के कारण कांग्रेस से दे दिया था इस्तीफा

दरअसल, आजादी के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू की अगुवाई में देश में बनी पहली अंतरिम सरकार में बाबा साहब विधि और न्यायमंत्री बनाए गए थे। उनके नेतृत्व में बना संविधान लागू हो चुका है। हालांकि, बाद में कई मुद्दों पर उनका कांग्रेस से नीतिगत मतभेद हो गया। इसके कारण उन्होंने 27 सितंबर 1951 को पंडित जवाहरलाल नेहरू को एक पत्र लिखकर मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद साल 1942 में खुद के गठित शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन यानी अनुसूचित जाति संघ को नए सिरे से मजबूत करने में लग गए। इस संगठन को स्वतंत्रता संघर्ष की व्यस्तताओं के कारण वह ठीक से खड़ा नहीं कर पाए थे।

आम चुनाव में खुद के बनाए संगठन से मैदान में उतरे

इसी बीच, आम चुनाव की घोषणा हो गई जिसके लिए मतदान 1951 से लेकर 1952 तक हुए. डॉ. भीमराव आंबेडकर ने पहले आम चुनाव में शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन के बैनर के तले लोकसभा चुनाव में 35 प्रत्याशी खड़े किए। इसमें उनके दो ही प्रत्याशी जीत हासिल कर सके। इस चुनाव में डॉ. भीमराव आंबेडकर खुद भी लड़े पर जब नतीजे आए तो काफी चौंकाने वाले थे। वह चुनाव हार गए थे।

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आंबेडकर पर कांग्रेस के ढोंग की खुली पोल : 1946 का पत्र आया सामने, नेहरू ने लगाया था अंबेडकर पर अंग्र
आंबेडकर पर कांग्रेस के ढोंग की खुली पोल : 1946 का पत्र आया सामने, नेहरू ने लगाया था अंबेडकर पर अंग्र
 

यह वह दौर था जब डॉ. भीमराव आंबेडकर की पहचान देश भर में अनुसूचित जातियों के लिए काम करने वाले कद्दावर नेता के रूप में थी। डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने उत्तरी मुंबई सीट से चुनाव लड़ने का मन बनाया तो कांग्रेस ने उनके मुकाबले में उन्हीं के पीए नारायण एस काजरोलकर को मैदान में उतार दिया था। वह भी पिछड़े वर्ग से थे. इसके अलावा इस सीट से कम्युनिस्ट पार्टी और हिंदू महासभा ने भी अपना-अपना प्रत्याशी खड़ा किया था।

दूध का कारोबार करने वाले काजरोलकर राजनीति में नौसिखिए थे

नारायण काजरोलकर दूध का कारोबार करते थे और राजनीति में वह नौसिखिए नेता थे। इसके बावजूद पंडित जवाहर लाल नेहरू की लहर पहले चुनाव में इतनी तगड़ी थी कि नारायण काजरोलकर जीत गए थे। इस चुनाव में डॉ. भीमराव आंबेडकर को 1,23,576 वोट मिले थे और वह चौथे स्थान पर थे। वहीं, 1,37,950 वोट पाकर काजरोलकर चुनाव जीते थे। इसके बाद साल 1954 में बंडारा लोकसभा के लिए उप चुनाव हुआ था। इसमें भी डॉ. भीमराव आबंडेकर खड़े हुए पर एक बार फिर उन्हें कांग्रेस से हार का समाना करना पड़ा था।

डॉ. आंबेडकर को करना पड़ा था हार का सामना

वास्तव में पहले आम चुनाव के वक्त देश में कांग्रेस की जबरदस्त लहर थी. देश नया-नया आजाद हुआ था और पंडित जवाहरलाल नेहरू जनता की नजरों में हीरो थे। कहा जाता है कि तब अगर पंडित नेहरू के नाम पर बिजली के खंभे को भी चुनाव में खड़ा कर दिया जाता तो वह भी जीत जाता। ऐसा ही कुछ वास्तव में हुआ जब पहले लोकसभा चुनाव के लिए मतगणना के बाद नतीजा आया। कांग्रेस को बड़ी आसानी से स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ।

मैं कोई तिरंगा-विरंगा नहीं… राजदीप सरदेसाई ने इस बार किया राष्ट्रीय ध्वज का अपमान: क्या ऐसे होते हैं वरिष्ठ पत्रकार?

                               सौरभ द्विवेदी और राजदीप सरदेसाई (फोटो साभार: द लल्लनटॉप)
इंडिया टुडे के वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई अपने मुँह से अनाप-शनाप निकालने की वजह से अक्सर सोशल मीडिया पर ट्रोल होते हैं। इस बार भी वह इसी कारण से गाली खा रहे हैं। उन्होंने एक वीडियो में तिरंगे को लेकर अपने मन की बात रखी और वही बात सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

 देख सकते हैं कि ‘द लल्लनटॉप’ के सौरभ द्विवेदी के साथ उनकी बातचीत क्रिकेट मैच देखने पर चल रही थी। इसी दौरान सौरभ बताने लगे कि वो स्टेडियम में बैठकर मैच देखने को लेकर इतने उत्साहित हैं कि उन्होंने निर्णय लिया है कि वो कलाई पर तिरंगा भी बनवाएँगे। इसके बाद उन्होंने कैमरे पर दिखाया कि वो अपने डेस्क पर भी हमेशा तिरंगा रखते हैं जिसे भारतीय सेना के बलिदानियों की विधवा (वार विडोज) द्वारा बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि ये तिरंगा उनके दोस्तों ने उन्हें दिया था इसलिए वो हमेशा मेज पर रहता है।

इसे सुन राजदीप सरदेसाई बड़ी हैरानी के साथ आँख निकालकर पूछते हैं- तो इसे आप लेकर जा रहे हो? इस पर सौरभ कहते हैं कि वो बस बात बता रहे हैं क्योंकि उन्हें याद आ गया है।तुरंत बाद राजदीप सरदेसाई कहना शुरू करते हैं, “मैं कोई तिरंगा-विरंगा नहीं रखता। तिरंगा मेरे दिल में है।”

सौरभ उनकी बात सुन नाराज होते हैं और उन्हें उनकी इस भाषा के लिए टोंकते हैं। वह समझाते हैं, :आप हमेशा कहते हो कि हिंदी आपकी पहली भाषा नहीं और उसके बाद आप ऐसी बात कहते हो। तिरंगा-विरंगा मत कहो।”

इस पर राजदीप बात को संभालते हुए कहते हैं, “मैं तिरंगे को अपने दिल में रखता हूँ और मैं इंडिया की शर्ट पहनूँगा लेकिन तिरंगा हाथ पर नहीं बनवाऊँगा।” इस पर सौरभ चुटकी लेते हुए कहते हैं- “अब आपकी ये सब करने की उम्र भी नहीं है।”

राजदीप सरदेसाई की यही क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। लोग इसे देखने के बाद राजदीप पर भड़क रहे हैं। कहा जा रहा है कि जिसके मन में तिरंगे के प्रति सम्मान नहीं होता वही इस तरह की बातें करता है।

कुछ यूजर्स इसे सीधे तौर पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान बता रहे हैं। राजदीप के बड़बोलेपन पर कार्रवाई करने की बातें हो रही हैं।

सवाल खड़ा किया जा रहा है कि जो व्यक्ति खुद को वरिष्ठ पत्रकार कहता है उसे ये भी नहीं पता क्या कि वो शब्द कैसे इस्तेमाल कर रहा है।

किसी का राजदीप सरदेसाई की वीडियो देख कहना है कि ये लोग कॉन्ग्रेसी पत्रकार हैं भारत का अपमान तो करेंगे ही।

नीचता की भी हद होती है; मोदी विरोध में कायस्थों के अराध्य देव भगवान चित्रगुप्त का अपमान करने की कैसे हिम्मत की कांग्रेसी पवन खेरा? तेरे में शर्म है या नहीं ?

नीचता की भी हद होती है, पहले हिन्दू विरोधी कांग्रेस अपने शासनकाल में किस तरह पुरुषोत्तम श्रीराम का अपमान करती रही और अब कायस्थों के आराध्य देव भगवान चित्रगुप्त का अपमान कर रही है। कांग्रेस में जितने भी कायस्थ है, उन्हें तुरन्त कांग्रेस छोड़ देनी चाहिए। इतना ही नहीं जब तक पवन खेरा नाक रगड़ कर माफ़ी न मांगे कोई कायस्थ कांग्रेस को वोट नहीं दे।  कांग्रेस अपने आप साबित कर रही है कि यह एक हिन्दू विरोधी पार्टी है। 

लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर हर राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति तय करने में लगा हुआ है। हालाँकि, INDI गठबंधन की प्रमुख पार्टी कांग्रेस रोज-नए विवाद पैदा कर रही है। कभी कंगना रनौत को लेकर आपत्तिजनक बयान देती है तो कभी हिंदू देवी-देवताओं को लेकर टिप्पणी करती है। अब कांग्रेस के एक बयान को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है। यूजर्स का कहना है कि कांग्रेस ने कायस्थ समाज के कुलदेवता चंद्रगुप्त भगवान का अपमान किया है।


दरअसल, कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने रविवार (14 अप्रैल 2024) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। इस दौरान उन्होंने कहा, “आज की प्रेस कांग्रेस की शुरुआत में यमलोक की एक घटना का मैं जिक्र करना चाहता हूँ। यमराज ने एक ऐसी मशीन बनाई थी कि जब भी कोई झूठ बोलता था तो टन…टन… आवाज शुरू हो जाती। आज सुबह से मशीन बंद ही नहीं हुई। टन…टन…टन… बजे जा रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “यमराज बहुत चिंतित हुए और चित्रगुप्त को बुलाया और कहा कि चित्रगुप्त ये बंद क्यों नहीं हो रही है। चित्रगुप्त ने कहा- महाराज, आज मोदी जी का संकल्प पत्र जारी होने वाला है। अभी तक बज रही है, आपको आवाज आ रही होगी। ये स्थिति एक ऐसे नेता की हो गई है, जो 10 साल से प्रधानमंत्री है। मोदी जी के घोषणा पत्र का नाम संकल्प पत्र नहीं, माफीनामा होना चाहिए।”

पवन खेड़ा ने भाजपा और पीएम मोदी पर निशाना साधने के लिए जिस तरह की कहानी गढ़ी और उसमें यमराज एवं चित्रगुप्त का वर्णन किया, उससे सोशल मीडिया पर बवाल मच गया है। सोशल मीडिया यूजर्स पवन खेड़ा और कांग्रेस को हिंदू विरोधी बता रहे हैं। उन पर हिंदू देवता का अपमान करने का आरोप लग रहा है।

NCPCR के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने भी इसको लेकर पवन खेड़ा और कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने X पर लिखा, “चित्रगुप्त जी “भगवान” हैं, अपमानजनक तरीक़े से भगवान चित्रगुप्त जी का नाम लेना भगवान की निंदा करना है। ये केवल हमारे कायस्थ कुल का नहीं बल्कि समस्त हिंदुओं का अपमान है, ये असहनीय है।”

अंकुश नाम के सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “चित्रगुप्त जी संपूर्ण कायस्थ समाज के लिए भगवान स्वरुप हैं। वह तो स्वयं संपूर्ण कायस्थ समाज के कुलदेवता भी हैं। हैरानी तो नहीं हुई के पवन खेड़ा जी उनका सम्मान नहीं कर पाए क्यूंकि कांग्रेस तो समस्त सनातन के विनाश में ही लगी हुई है। कांग्रेस का विनाश निश्चित है।”

राकेश पांडेय नाम के यूजर ने लिखा, “चित्रगुप्त देव हैं, उनका अपमान करना हिंदुओं का अपमान है। संपूर्ण कांग्रेस हिंदुओं के देवी-देवताओं को अपमानित करने का ठेका लेकर बैठी है। अब इस पर कार्यवाही हो तो ये मूर्ख प्रवक्ता और नेता विक्टिम कार्ड दिखाने लगते है।”

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पंकज सिन्हा नाम के यूजर ने लिखा, “बोलते रहो, बोलते-बोलते अपने आप एक दिन ऐसा होगा कि मुख से आवाज आनी बंद हो जाएगी और फिर अचानक तुम्हारे मुख आवाज निकलने लगेगी – मोदी, मोदी। भारत को भारत नहीं बनने देनेवाले तुम्हारे जैसे लोग और तुम्हारा दल कांग्रेस का अब कोई महत्व नहीं है।”

शुभम वर्मा ने लिखा, “भगवान चित्रगुप्त सभी कायस्थों के अराध्य देव हैं । कांग्रेस को इनका अपमान करने का कोई अधिकार नहीं है। कॉन्ग्रेस को माफी माँगनी चाहिए, अन्यथा कोई भी कायस्थ कभी कांग्रेस को वोट नही करेगा।”

हिन्दू विरोधी I.N.D.I.A गठबंधन, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल तमिलनाडु की एमएमके पार्टी के अध्यक्ष ने माता सीता का किया अपमान


विपक्षी दलों का I.N.D.I.A गठबंधन हिन्दू विरोधियों का जमावड़ा है। इस गठबंधन का नेतृत्वकर्ता कांग्रेस है, जिसका इतिहास ही हिन्दू विरोध रहा है। इस गठबंधन में वहीं पार्टियां शामिल हैं, जो हिन्दू धर्म और उसके देवी-देवताओं से नफरत करती हैं। I.N.D.I.A गठबंधन में शामिल और तमिलनाडु सरकार के सहयोगी दल मनिथानेया मक्कल काची(MMK) के अध्यक्ष जवाहिरुल्ला ने सड़कों पर ऐसे पोस्टर लगवाए, जो हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने वाला था। यह अब सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इस पोस्टर में माता सीता को अपमानजनक तरीके से दिखाया गया है, जिससे करोड़ों हिन्दुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। हालांकि इसके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है, लेकिन स्टालिन की सरकार ने अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है। 

रविवार (30 जुलाई, 2023) को तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले में मणिपुर की घटना को लेकर एमएमके ने प्रदर्शन किया। इस दौरान सड़कों पर एक आपत्तिजनक पोस्टर लगाया गया। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे इस पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भगवान राम और गृह मंत्री अमित शाह को लक्ष्मण दिखाया गया है। वहीं इन दोनों के बीच में माता सीता को निर्वस्त्र दिखाया गया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय चिन्ह तिरंगे का भी अपमान किया गया है। इस पोस्टर को लेकर हिन्दुओं में जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि तमिलनाडु की डीएमके और कांग्रेस गठबंधन की सरकार में हिंदू देवी देवताओं का अपमान करना,उनका अश्लील चित्रण करना क्या कानूनी रूप से वैध है?

हालांकि बाद में विवाद बढ़ते देख एमएमके अध्यक्ष ने इस विवादित पोस्टर को हटा दिया और लोगों की भावनाएं आहत होने के लिए मांफी मांग ली, लेकिन एमएमके पार्टी के इस पोस्टर को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस निशाने पर आ गए। बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने दावा किया कि एमएमके प्रमुख को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान उनके साथ चलते हुए देखा गया था। गौरव भाटिया ने ट्वीट किया, “बहुत गहरा दुख पहुंचा है। हम उन्हें इतनी सख्ती से वापस देंगे। कानूनी युद्ध शुरू किया जाएगा। क्या यह धर्मनिरपेक्षता है? सिर्फ इसलिए कि हम सहिष्णु हैं, इससे भारत को हमारी धार्मिक भावनाओं को बेरहमी से कुचलने का अधिकार नहीं मिल जाता।”