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बेनकाब : डीप स्टेट, सोरोस और राहुल गांधी फैमिली की तिकड़ी भारत और मोदी सरकार विरोधी साजिशों में शामिल!


अब यह पूरी तरह खुलासा हो गया है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी अमेरिकी अरबपति जार्ज सोरोस और डीप स्टेट के साथ मिलकर भारत विरोधी षड्यंत्रों को अंजाम देने में लिप्त हैं! कड़ी से कड़ी जोड़ने पर स्पष्ट होता है कि कैसे राहुल गांधी के परिवार से जुड़ी एनजीओ, कांग्रेस के युवराज के खास सलाहकार विदेशों से भारत विरोध के नाम पर करोड़ों की फंडिंग ले रहे हैं। डीप स्टेट की करतूतों की कलई तो भाजपा ने ही अपने एक्स अकाउंट पर खोलकर रख दी है। जहां तक सोरोस और राहुल गांधी के संबंधों का सवाल है तो सोशल मीडिया पर इनकी घनिष्ठता के कई प्रमाण बिखरे हैं। इनसे साफ पता चलता है कि लोकसभा से लेकर विधानसभाओं में हार-दर-हार झेल रहे कांग्रेस के ‘कर्ताधर्ता’ राहुल गांधी अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए कितने निचले स्तर तक गिर गए हैं! राहुल अभी तक तो विदेशों में जाकर भारत और मोदी सरकार की बुराई करके देश को नीचा दिखाने के कोशिश किया करते थे। लेकिन अब उनपर साफ-साफ देश के साथ ‘गद्दारी’ करने के आरोप लगे हैं। दरअसल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लगातार तीसरी बार सत्ता में आना राहुल एंड कंपनी को हजम नहीं हो रहा है। उनके यह भी गले नहीं उतर रहा है कि पिछले एक दशक में भारत लगातार दुनिया में तेजी से एक शक्ति के तौर पर स्थापित हो रहा है। देश ने हर क्षेत्र में अपने प्रदर्शन में गुणात्मक सुधार किया है।

राहुल गांधी भारत विरोधी ‘कॉकस’ के त्रिकोण के केंद्र बिंदु बने
पीएम मोदी के दूरदर्शी विजन से भारत की बढ़ती आर्थिक और सामरिक ताकत को रोकने के लिए समय-समय पर विदेशी साजिश होती रही है। देश की अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने लिए विदेशी एजेंसी और संगठन सक्रिय रहे हैं। जॉर्ज सोरोस (George soros) जैसे लोगों की मदद से भारत की आर्थिक ताकत को कमजोर करने के लिए कई फर्जी और भ्रमित करने वाले रिपोर्ट जारी किए जाते हैं। अब इसका खुलासा हो रहा है कि राहुल गांधी भी सोरोस जैसे भारत विरोधी साजिशकर्ताओं और ओसीसीआरपी जैसे संगठनों के लिए टूल का काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं इस संगठन की फर्जी रिपोर्टों के आधार पर राहुल गांधी देश में प्रेस कॉंन्फ्रेंस कर मोदी सरकार को घेरने की असफल कोशिशें करते हैं। अभी कुछ दिन पहले यह भी उजागर हुआ था कि राहुल गांधी भारत विरोधी ‘कॉकस’ के त्रिकोण के केंद्र बिंदु बन गए हैं। इसमें एक तरफ संयुक्त राज्य अमेरिका में बैठे जॉर्ज सोरोस और अमेरिका की कुछ एजेंसियों के साथ उनके फाउंडेशन है, त्रिकोण के दूसरी तरफ नीदरलैंड की राजधानी एम्स्टर्डम से संचालित संगठित अपराध और भ्रष्टाचार रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (ओसीसीआरपी) नामक एक समाचार पोर्टल है और त्रिकोण के तीसरे कोने में सबसे महत्वपूर्ण खुद राहुल गांधी हैं। ये मिलकर महान भारत के साथ उच्चतम स्तर की गद्दारी को अंजाम देने की साजिशों में लगे हुए हैं।

एनजीओ राजीव गांधी फाउंडेशन के सीईओ भी हैं महाजन
राहुल गांधी के गुर्गे कहें या मुख्य सलाहकार विजय महाजन और योगेंद्र यादव जैसे कई लोग हैं, जो इन नापाक साजिशों में उनसे साथ जुड़े हैं। विजय महाजन राहुल गांधी के मुख्य सलाहकार और गांधी परिवार के निजी एनजीओ राजीव गांधी फाउंडेशन के सीईओ हैं। विजय महाजन निजी कंपनी BASIX के संस्थापक भी हैं। एक्यूमेन फंड बेसिक्स कृषि समृद्धि लिमिटेड में भागीदार और निवेशक है, जो बेसिक्स की सहायक कंपनियों में से एक है।

गांधी परिवार और सोरोस और उसकी बेटी के बीच सीधे वित्तीय संबंध
अब, यहां सबसे विस्फोटक मोड़ है। एंड्रिया सोरोस कोलोम्बेल एक्यूमेन फंड्स के सह-संस्थापक और निवेशक हैं! वह जॉर्ज सोरोस की बेटी और ओपन सोसाइटी फाउंडेशन की बोर्ड सदस्य हैं! क्या आप इस पर विश्वास कर सकते हैं कि सोरोस गांधी परिवार के सीईओ और राहुल गांधी के मुख्य सलाहकार विजय महाजन के प्रत्यक्ष भागीदार हैं! ये गांधी परिवार और सोरोस के बीच सीधे वित्तीय संबंध हैं!

राहुल की मेकओवर पीआर यात्रा ‘भारत जोड़ो’ का मास्टरमाइंड है महाजन
सोरोस के पार्टनर विजय महाजन राहुल गांधी की मेकओवर पीआर यात्रा भारत जोड़ो यात्रा के पीछे के मास्टरमाइंड हैं। योगेन्द्र यादव उनके दाहिने हाथ हैं। तो आप सोरोस के साथी, विजय महाजन के दाहिने हाथ को किसान विरोध के पीछे के मास्टरमाइंड में से एक के रूप में पाएंगे। इससे यह भी साफ हो गया है कि कैसे कांग्रेस से जुड़े लोग खुद को किसान नेता बताकर कांग्रेस से अपना संबंध छिपाकर किसान विरोध प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाते हैं।

PRADAN को 12 वर्षों में 596 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी फंडिंग
हैरतअंगेज तथ्य यह है कि विजय महाजन सिर्फ सोरोस के ही पार्टनर नहीं हैं! उनकी सीआईए-संबद्ध फोर्ड फाउंडेशन के साथ भी साझेदारी है। 1982 में फोर्ड फाउंडेशन के एक अधिकारी, दीप जोशी ने एक अन्य सह-संस्थापक, विजय महाजन के साथ एक प्रशिक्षण एनजीओ, PRADAN की सह-स्थापना की थी! चौंकाने वाली बात यह है कि PRADAN को पिछले 12 वर्षों में 596 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी फंडिंग प्राप्त हुई है!

अब विजय महाजन और मोहम्मद यूनुस पर वापस आते हैं। वे दोनों फोर्ड फाउंडेशन के उत्पाद हैं। जब विजय महाजन के ‘फोर्ड भाई’ मोहम्मद यूनुस को बांग्लादेश में कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, तो विजय महाजन और फोर्ड फाउंडेशन के पूर्व ट्रस्टी नारायण मूर्ति ने उनका समर्थन करने के लिए एक पत्र पर हस्ताक्षर किए।

दिलचस्प बात यह है कि विजय महाजन और डॉ. जी.के. जयराम (इन्फोसिस के पहले अध्यक्ष) ने अप्रैल 2010 में कांग्रेस नेतृत्व के लिए एक प्रशिक्षण संस्थान, जवाहरलाल नेहरू लीडरशिप इंस्टीट्यूट (जेएनएलआई) शुरू किया था।

आईपीएसएमएफ, जो जुबैर से लेकर आरफा और द कारवां से लेकर आर्टिकल 14 तक को फंड करता है, इंफोसिस के मालिक और उसके दोस्तों द्वारा फंड किया जाता है। इसमें सबसे दिलचस्प बात यह है कि रुक्मिणी बनर्जी, आईपीएसएमएफ के संस्थापक ट्रस्टियों में से एक, विजय महाजन के फोर्ड-वित्त पोषित एनजीओ की उपाध्यक्ष भी हैं!

1982 में, फोर्ड फाउंडेशन के एक अधिकारी दीप जोशी ने एक अन्य सह-संस्थापक, विजय महाजन के साथ एक प्रशिक्षण एनजीओ, PRADAN की सह-स्थापना की थी। उन्हें सीआईए-संबद्ध फोर्ड फाउंडेशन और अन्य अमेरिकी कंपनियों द्वारा अपने एनजीओ के माध्यम से लगातार वित्त पोषित किया जाता है। बता दें कि इस वित्त पोषण की रकम करोड़ों में है!

विजय महाजन ने एक और कंपनी, BASIX की स्थापना की। काबिले गौर तथ्य यह है कि यह न केवल फोर्ड फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित है, बल्कि इसके साथ भागीदार भी है।

विजय महाजन जैसे लोग किसानों को भड़काते हैं, लेकिन छिपाते हैं कि वे बायर जैसी विदेशी एग्रोकेमिकल कंपनियों के लिए काम करते हैं। विजय महाजन और योगेन्द्र यादव बहुत करीब से काम करते हैं और उनका दावा है कि वे अपने एनजीओ के माध्यम से किसानों के लिए काम करते हैं। लेकिन क्या किसानों को पता है कि कृषि रसायन और बीज की दिग्गज कंपनी मोनसेंटो भी विजय महाजन के एनजीओ को फंड देती है?

विजय महाजन के बच्चे स्विट्जरलैंड जैसे देशों में अपनी जिंदगी का आनंद लेते हैं, लेकिन वे आम किसानों को मरने के लिए सड़क पर फेंक देते हैं।फोर्ड फाउंडेशन अपने मनोवैज्ञानिक युद्ध को चलाने और अपने व्यावसायिक लाभों के लिए सीआईए की शाखा है।

यहाँ CIA का एक टॉप-सीक्रेट दस्तावेज लीक हुआ है। इसके मुताबिक, बीजेपी 2010 से ही अमेरिकी खुफिया एजेंसी की निगरानी में है। बड़ा सवाल उठता है कि कांग्रेस या अन्य राजनीतिक दल क्यो नहीं! जबकि उस समय तो भारत में कांग्रेस गठबंधन ही सत्ता में था। यदि आप इसकी और गहरे से पड़ताल करेंगे तो पाएंगे कि विजय महाजन के माध्यम से सीआईए-संबद्ध फोर्ड फाउंडेशन गांधी परिवार, उसके एनजीओ और कांग्रेस नेताओं के लिए उसके प्रशिक्षण केंद्र का प्रबंधन करता है।

इतना ही नहीं, वामपंथियों और इस्लामवादियों के पूरे शीर्ष नेतृत्व का प्रबंधन भी फोर्ड फाउंडेशन से जुड़े लोगों के एक ही समूह द्वारा किया जाता है। यह अकाट्य सत्य है कि कम्युनिस्टों और इस्लामवादियों के कैडरों को भी यह नहीं पता है कि फोर्ड फाउंडेशन अपने नेताओं को कैसे प्रबंधित करता है।फ्रांसीसी मीडिया ने आज ही उजागर किया है कि कैसे अमेरिका के डीट स्टेट ने मोदी सरकार और अडानी के खिलाफ ओसीसीआरपी को वित्त पोषित किया और हथियार बनाया। इनमें भी आपको वही नाम मिलेंगे, जैसे द फोर्ड फाउंडेशन, रॉकफेलर फाउंडेशन और ओपन सोसाइटी फाउंडेशन, जो विजय महाजन के एनजीओ को भी फंड देते हैं!

भारत विरोधी साजिशकर्ता ओसीसीआरपी जैसे संगठनों के लिए टूल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन से भारत की बढ़ती आर्थिक और सामरिक ताकत को रोकने के लिए समय-समय पर विदेशी साजिश होती रही है। देश की अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने लिए विदेशी एजेंसी और संगठन सक्रिय रहे हैं। जॉर्ज सोरोस (George soros) जैसे लोगों की मदद से भारत की आर्थिक ताकत को कमजोर करने के लिए कई फर्जी और भ्रमित करने वाले रिपोर्ट जारी किए जाते हैं। अब इसका खुलासा हो रहा है कि राहुल गांधी भी सोरोस जैसे भारत विरोधी साजिशकर्ताओं और ओसीसीआरपी जैसे संगठनों के लिए टूल का काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं इस संगठन की फर्जी रिपोर्टों के आधार पर राहुल गांधी देश में प्रेस कॉंन्फ्रेंस कर मोदी सरकार को घेरने की असफल कोशिशें करते हैं।

नीदरलैंड की OCCRP, भारत विरोधी जॉर्ज सोरेस और राहुल का कनेक्शन
इस तरह की एक साजिश का खुलासा एक फ्रेंच पब्लिकेशन ने किया है। उसने अपनी खोजी रिपोर्ट के आधार पर बताया है कि ऑर्गेनाइज्ड क्राईम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) किस तरह से भारत विरोधी गतिविधियों में संलग्न है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि OCCRP को अमेरिका से फॉरेन फंडिंग मिलती है और इसका सीधा कनेक्शन भारत विरोधी अमेरिकी अरबपति कारोबारी जॉर्ज सोरोस के साथ है। OCCRP की स्थापना पत्रकार ड्रू सुलिवन और पॉल राडू ने 2006-07 में की थी। सुलिवन सेंटर फॉर इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग (CIR) के संपादक के रूप में कार्यरत थे और राडू ने शुरुआती रोमानियाई केंद्र के साथ काम किया था।

क्या है OCCRP और कैसे, किसकी फंडिंग से करता है काम
• कहने के लिए तो आर्गनाइज्ड क्राइम ऐंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट पर काम करता है।
• OCCRP का दावा है कि दुनिया भर में उसके पास पत्रकारों का नेटवर्क है, जो उसके लिए मनचाहा काम करते हैं।
• OCCRP खुद को स्वतंत्र संगठन बताता है, लेकिन वह चलता कैसे है, इसको लेकर वह विवादों में रहा है।
• यह सर्वविदित है कि अमेरिकी सरकार और अमेरिकी एजेंसियों से उसे भारी फंड मिलता है। अब इसको लेकर वह सवालों के घेरे में है।
• फ्रेंच अखबार मीडिया पार्ट ने 2 दिसंबर को एक खोजी आर्टिकल में संगठन की पोल खोली है।
• इस आर्टिकल में OCCRP के बारे में कहा गया है कि उसके और अमेरिकी एजेंसियों के बीच गुप्त संबंध हैं। OCCRP के नीति नियंता अमेरिकी एजेंसियों के इशारे पर चलते हैं।
• फ्रांसीसी अखबार ने खुलासा किया कि अमेरिकी सरकार ने OCCRP को ‘वेनेजुएला में भ्रष्टाचार का खुलासा करने और उससे लड़ने’ के लिए 1,73,324 डॉलर दिए। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की अमेरिकी सरकार से दुश्मनी जगजाहिर है।

दिल्ली शराब नीति बनाने में शामिल थे संजय सिंह, मिला मोटा पैसा, हाई कोर्ट ने कहा- जमानत देने का आधार नहीं बनता

दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल बार-बार ED पूछताछ से क्यों भाग रहे हैं, उसका कारण है, केजरीवाल ही नहीं पूरी आम आदमी पार्टी और विपक्ष सभी जानते हैं कि ED के पास शराब घोटाले के अतिरिक्त अन्य घोटालों में भी केजरीवाल के खिलाफ इतने सबूत है कि संजय सिंह की तरह एक ही झटके में गिरफ्तार। और केजरीवाल के गिरफ्तार होते ही झाड़ू का एक-एक तिनका बुरी तरह तूफान में उड़ जायेगा। औरों के तो जेल से बाहर आने की संभावनाएं हो सकती है लेकिन केजरीवाल नहीं। यह भी सम्भावना है कि स्वाति मालीवाल भी लपेटे में आ सकती हैं, दोनों बाहर जाते हैं और वापस आते ही स्वाति को राज्य सभा भेज दिया जाता है। राज बहुत गहरा है। अब तो संभावनाएं केजरीवाल के बेटे पुनीत की भी बन रही हैं। शंकाएं यह भी व्यक्त हो रही है कहीं केजरीवाल की पूरी फैमिली को और आधे से अधिक मंत्रिमंडल को भी जेल न जाना पड़ जाये।  
दिल्ली शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में AAP सांसद संजय सिंह को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने संजय सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि केस के इस स्‍टेज पर आरोपी को जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता है। अदालत ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि संजय सिंह दिल्ली की शराब नीति बनवाने में शामिल थे। इसमें उन्हें मोटा कमीशन मिला। संजय सिंह ने कोर्ट में कहा था कि शराब घोटाले में उनकी कोई भूमिका नहीं है इसीलिए जमानत दिया जाए। वहीं ED के मुताबिक शराब घोटाले से जो आर्थिक लाभ हुआ, उसे पाने, रखने, छुपाने और इस्तेमाल करने में सिंह शामिल थे। ED ने कहा कि दिनेश अरोड़ा के अलावा कई और लोग भी है जिन्होंने संजय सिंह का नाम लिया है। सबूतों के आधार पर कोर्ट ने संजय सिंह की भूमिका के बारे में मुहर लगा दी है। 4 अक्टूबर 2023 को गिरफ्तार किए गए संजय सिंह तीन महीने से अधिक समय से हिरासत में हैं।

शराब नीति बनाने में शामिल थे संजय सिंह
दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने अपने 43-पृष्ठ के फैसले में कहा, “प्रथम दृष्टया, यह स्पष्ट है कि संजय सिंह पुरानी आबाकारी नीति की तैयारी का हिस्सा थे और उसके बाद, नई आबकारी नीति शराब घोटाले के आरोपियों को फायदा पहुंचाने के अनुरूप बनाई गई थी, इसके लिए उन्हें मोटा पैसा मिला था।

संजय सिंह के लिए सर्वेश मिश्रा ने लिए 2 करोड़ रुपये
अदालत ने कहा, “ऐसे बयान हैं कि संजय सिंह के लिए सर्वेश मिश्रा को उनके आधिकारिक आवास पर 2 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। संजय सिंह ने नई आबकारी नीति बनाने में भूमिका रही और कुछ निश्चित लोगों को लाभ पहुंचाया गया जिसके बदले रिश्वत दी गई। आवेदक की इस स्तर पर भूमिका पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता”।

दिनेश अरोड़ा, विवेक त्यागी, सर्वेश मिश्रा, विजय नायर, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह के बीच बैठकें हुईं
हाईकोर्ट ने कहा कि सह-आरोपी दिनेश अरोड़ा, विवेक त्यागी, सर्वेश मिश्रा, विजय नायर, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह आदि के बीच बैठकें और बातचीत के समय, स्थान और तरीके के बारे में निश्चित आरोप हैं और केस के इस स्टेज पर उसकी उपेक्षा नहीं जा सकती। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, “उपरोक्त चर्चा के मद्देनजर, इस स्तर पर जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता है।”

विजय नायर ने दिनेश अरोड़ा को दी थी धमकी
अदालत ने सरकारी गवाह बन चुके दिनेश अरोड़ा के बयान पर भी ध्यान दिया, जो पीएलएमए धारा 50 के तहत दर्ज किया गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें अगस्त 2022 में लंदन में AAP के पूर्व संचार प्रभारी विजय नायर ने धमकी दी थी कि डिप्टी सीएम या सिंह या अन्य बड़े राजनीतिक नेताओं के खिलाफ बोलने पर उन्हें बहुत परेशानी होगी।

हाईकोर्ट ने अरोड़ा के पीएमएलए बयान पर गौर किया
हाईकोर्ट ने जुलाई 2023 में मजिस्ट्रेट की अदालत के समक्ष सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज किए गए अरोड़ा के बयान पर भी गौर किया, जहां उन्होंने कहा था कि उन्हें नायर ने किसी भी राजनीतिक नेता का नाम न लेने की धमकी दी थी; इसलिए उन्होंने उनके नामों का खुलासा नहीं किया था, जिसका खुलासा उन्होंने अगस्त 2023 में दर्ज अपने पीएमएलए बयान में किया।

संजय सिंह शराब घोटाले में मिले पैसे पाने, रखने, छुपाने में शामिल
संजय सिंह ने जमानत का अनुरोध करते हुए कोर्ट में आधार दिया था कि वह पिछले तीन महीने से हिरासत में हैं। जिस अपराध का आरोप उन पर मढ़ा जा रहा है, उसमें उसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। दूसरी ओर, जांच एजेंसी ने याचिका का विरोध करते हुए दलील दी थी कि 2021-22 की विवादित नीति से जुड़े कथित शराब घोटाले से जो आर्थिक लाभ हुआ, उसे पाने, रखने, छुपाने और इस्तेमाल करने में सिंह शामिल थे।

शराब घोटाले का पैसा AAP ने गोवा विधानसभा चुनाव में खर्च किया
दिल्ली शराब घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 3 फरवरी को चार्जशीट में कहा कि दिल्ली की रद्द की गई आबकारी नीति में कथित रूप से ली गई 100 करोड़ रुपये की रिश्वत के एक हिस्से का इस्तेमाल AAP ने गोवा विधानसभा चुनाव में किया था। इस मामले में संजय सिंह के अलावा दिल्ली के उपमुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया भी आरोपी हैं। वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कई समन दिए गए हैं।

क्या सच में मर गया आतंकी मसूद अजहर? या फिर कोई गहरा षड़यंत्र ?

मर गया आतंकी मसूद अजहर?  (साभार: PTI)
भारत में सोशल मीडिया पर एक बार फिर से ‘अज्ञात लोग (Unknown Men)’ ट्रेंड हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि आतंकवादी मसूद अजहर मारा गया है। दावा है कि ‘अज्ञात’ ने उसी तरह मसूद अजहर को भी निपटाया है जैसे हाल में पाकिस्तान में कई आतंकी मारे गए हैं।

इस खबर की पुष्टि नहीं हुई है। आपको बता दें कि दिसंबर 1999 में भारत के विमान को हाईजैक कर कंधार ले जाया गया है, उस दौरान यात्रियों के बदले जिन 3 आतंकियों को छोड़ा गया था – उनमें मसूद अजहर भी शामिल था।

कुछ समय से पाकिस्तान में अज्ञात लोगों द्वारा आतंकियों के मारे जाने से भारत ही नहीं, बल्कि विश्व में सनसनी फैल रही है। हमें इस बात पर चिंतन करने की जरुरत है कि 'आखिर ये अज्ञात लोगों में ये चेतना कैसे जागी? कहीं इन हत्याओं के पीछे कोई षड़यंत्र तो नहीं? जो आतंकवादी ISI के संरक्षण में हो, उनकी हत्या? संभावनाएं व्यक्त जा रही हैं कि कंगाल पाकिस्तान को चीन भी मदद करने से पीछे हट रहा है, IMF का भी दबाव। 

और अब पाकिस्तान में चुनाव होने वाले वाले हैं और चुनावों में धन की जरुरत होती है। दूसरे, इमरान खान के नामांकन रद्द होना और नवाज़ शरीफ का सियासत में सक्रीय होना, क्योकि सभी जानते हैं कि शरीफ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाने की क्षमता रखता है। शरीफ को प्रधानमंत्री बना दिया जाए ताकि भारत के पास जमा 650 बिलियन रुपयों से कुछ अंश लेकर पाकिस्तान को सुचारु रूप से चलाया जा सके। इस विश्व के साथ-साथ भारत को अज्ञात लोगों द्वारा आतंकियों को मारे जाने की ख़बरों से अँधेरे में रख आर्थिक सहायता प्राप्त की जा सके। क्योकि जब तक आतंकी पाकिस्तान में रहेंगे, कोई मुस्लिम मुल्क भी खुलकर पाकिस्तान की मदद करने वाला नहीं। अब तक जितने भी आतंकवादी मारे गए हैं, उन्हें कब और कहाँ दफनाया गया, किसी पाकिस्तानी मीडिया ने पुष्टि नहीं की। क्या इन तथाकथित हत्याओं के पीछे कोई षड़यंत्र नहीं?

मसूद अजहर के मरने की खबरें सोशल मीडिया पर तैरने के बाद भले इसको लेकर टिप्पणियों की बाढ़ आ गई है। भले यूजर्स ‘अज्ञात’ को धन्यवाद दे रहे हैं। लेकिन उसकी मौत पर अभी तक पाकिस्तान की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। पाकिस्तान की मीडिया की ओर से भी इस संबंध में कुछ नहीं कहा गया है। सोशल मीडिया पर सक्रिय पाकिस्तान के पत्रकारों ने भी इस संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की है।

सोशल मीडिया के दावों पर कुछ भारतीय मीडिया संस्थानों ने रिपोर्ट की है, लेकिन इनमें भी उसकी मौत की पुष्टि नहीं हुई है। दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान में ‘अज्ञातों’ ने एक बम ब्लास्ट को अंजाम दिया है, जिसमें मसूद अजहर की मौत हो गई। सोशल मीडिया में कई वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिस पर लोग मजेदार कमेंट्स भी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि सोमवार (1 जनवरी, 2024) को तड़के सुबह 5 बजे हुए बम ब्लास्ट में वो मारा गया। बताया गया कि वो उस समय बहावलपुर मस्जिद में जा रहा था। मसूद अज़हर जैश-ए-मुहम्मद का मुखिया था।

‘टाइम्स अलजेब्रा’ नामक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल ने कुछ तस्वीरें भी शेयर की। इनमें से एक तस्वीर में एक कार के परखच्चे उड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरी तस्वीर में बम ब्लास्ट के बीच लोगों को भागते हुए देखा जा सकता है, साथ ही वहाँ पुलिस भी दिख रही है। एक अन्य हैंडल ने तो वीडियो तक शेयर कर दिया, जिसमें एक व्यस्त ट्रैफिक वाले इलाके में बम ब्लास्ट होता है। साथ ही ऑक्सीजन मास्क पहले एक मरीज की तस्वीर डाली गई, जिसे मसूद अजहर बताया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर तो यूजरों ने ‘अज्ञात लोगों’ को धन्यवाद देना भी शुरू कर दिया और कहने लगे कि नए साल पर भी ये ‘Unknown Men’ छुट्टी नहीं ले रहे हैं और अपना काम कर के खुशखबरी दे रहे हैं। वहीं कुछ बॉलीवुड के मीम्स भी शेयर हो रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि मोहम्मद ज़ुबैर, राना अय्यूब और अरफ़ा खानम शेरवानी जैसे भारत के कथित ‘पत्रकारों’ को बहुत दुःख हुआ होगा। वहीं कई लोगों ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की तस्वीर भी शेयर की।


नूहं हिंसा : कांग्रेस नेता विधायक मामन खान के खिलाफ मोबाइल-लैपटॉप में मिले दंगा करवाने के पुख्ता सबूत

                               कांग्रेस विधायक मामन खान को दो दिन की पुलिस रिमांड पर (साभार-हिंदुस्तान)
हरियाणा के फिरोजपुर झिरका से कांग्रेस विधायक मामन खान 31 जुलाई को हुए नूहं हिंसा के मामले में पुलिस के शिकंजे में हैं। नूहं में हिन्दुओं की शोभायात्रा पर हुए कातिलाना हमले की जाँच कर रही हरियाणा पुलिस की एसआईटी (SIT) को मामन खान के मोबाइल-लैपटॉप से पुख्ता सबूत मिले हैं।

मामले की जाँच कर रही एसआईटी (विशेष जाँच दल) के प्रमुख सतीश कुमार ने उनके गिरफ्तारी की पुष्टि की थी। जिसके बाद मामन खान को शुक्रवार (15 सितम्बर, 2023) दोपहर को एसआईटी ने कोर्ट में पेश किया। जहाँ से विधायक को दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। अब SIT उनसे पूछताछ कर उनके सोशल मीडिया पोस्ट, हिंसा के दौरान उनकी मोबाइल लोकेशन आदि की बाबत जानकारी जुटाएगी।

वहीं कांग्रेस विधायक मामन खान की गिरफ्तारी पर नूहं के SP नरेंद्र बिजारणियाँ ने बयान में कहा, ”नूहं के बडकली चौक पर हुई हिंसक घटना में मामन खान की भूमिका मिली है। इसके साथ ही MLA खान दंगा फैलाने वालों के संपर्क में भी थे। 31 जुलाई को MLA की लोकेशन भी हिंसा वाली जगह के आसपास मिली है।”

SIT इन सवालों पर करेगी पूछताछ

मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है विशेष जाँच दल ने विधायक से पूछ्ताछ के लिए सवालों की एक लम्बी सूची तैयार की है। बता दें कि कांग्रेस विधायक पर बड़कली चौक पर हुई हिंसा के आरोप हैं। पुलिस के पास अभी जो पुख्ता सबूत हैं उसके आधार पर खान को नूहं हिंसा के एक साजिशकर्ता के रूप में देखा जा रहा है। क्योंकि हिंसा वाले दिन मामन खान उस क्षेत्र से कहीं बहुत दूर नहीं बल्कि मात्र डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर थे। पुलिस ने कोर्ट में जो दस्तावेज सौपें हैं उनमें उनके दोनों गनर के बयान भी हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि हिंसा वाले दिन विधायक जहाँ-जहाँ गए वहाँ हिंसा हुई है। जबकि अपनी याचिका में मामन खान ने कहा था कि वह 26 जुलाई से 1 अगस्त के बीच अपने गुरुग्राम स्थित आवास पर थे और उन जगहों पर नहीं गए जहाँ हिंसा हुई थी। 
वहीं अभी तक रिपोर्ट में जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार मामन खान से SIT पुलिस रिमांड के दौरान जिन सवालों के जवाब तलाशेगी उनमें है कि हिंसा भड़काने के लिए मोबाइल से उस दिन कितने पोस्ट किया। हिंसा में उनके कितने समर्थक शामिल थे। विधायक के पास कितने मोबाइल फोन और सिमकार्ड हैं। साथ ही उनके सोशल मीडिया अकाउंट इंस्टाग्राम, फेसबुक, यू ट्यूब, टेलीग्राम, व्हॉट्सएप्प आदि की जानकारी भी जुटाएगी।  इसके अलावा राजस्थान के घाटमिया गाँव निवासी नासिर-जुनैद से उनके संबंधों, आर्थिक मदद, हिंसा की योजना, वहीं अब तक गिरफ्तार हुए आरोपितों से मुलाकात को लेकर सवाल किये जाएँगे। 
नूहं जिले के नगीना थाने में मामन खान के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की थी। जिसमें हत्या का प्रयास, लूट, दुकानों में आगजनी सहित कई अन्य धाराएँ  लगाई हैं। खान पर तेल मिल में आग लगाने, लूटपाट करने और तोड़फोड़ के भी आरोप हैं। यह FIR 1 अगस्त, 2023 को दर्ज हुई थी।

मामन खान के खिलाफ पुख्ता सबूत

रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा पुलिस के पास कांग्रेस विधायक पर आरोपों को साबित करने के लिए फोन कॉल रिकॉर्ड सहित कई अन्य सबूत हैं। वहीं मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी बुधवार को इसी मामले में चंडीगढ़ में संवाददाता सम्मेलन कहा था, “अगर जाँच के दौरान खान की संलिप्तता का पता चला तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।” जिसके एक दिन बाद ही मामन खान को गिरफ्तार कर लिया गया।
हरियाणा के अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक सभरवाल ने उच्च न्यायालय को बताया कि खान के खिलाफ सबूतों की जाँच के बाद ही उन्हें चार सितंबर को आरोपित बनाया गया था। बाद में उन्होंने बृहस्पतिवार (14 सितम्बर) को संवाददाताओं से कहा कि खान के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। 

एक आरोपित ने लिया था मामन खान का नाम

कोर्ट में महाधिवक्ता सभरवाल ने कहा था कि खान के कॉल डिटेल रिकॉर्ड, उनके फोन टावर लोकेशन, उनके निजी सुरक्षा अधिकारी (गनर) के बयान और अन्य सबूत विधायक के दावे को गलत साबित करते हैं कि वह हिंसा वाले दिन नूहं में नहीं थे। सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि सह-आरोपित तौफीक ने भी मामन खान का नाम लिया है।
तौफीक को 9 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। वहीं इस बारे में महाधिवक्ता सभरवाल ने कहा कि खान और तौफीक के फोन कॉल विवरण और टावर लोकेशन की जाँच की गई तो यह पाया गया कि 31 जुलाई की हिंसा से पहले 29 और 30 जुलाई को उनके बीच फोन पर बातचीत हुई थी। 
इससे पहले हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज भी यह बयान दे चुके हैं कि 28, 29 और 30 जुलाई को मामन खान जिन जगहों पर गए थे, वहाँ-वहाँ हिंसा हुई थी। इसके अलावा दूसरे कई भाजपा नेता भी मामन खान को नूहं हिंसा का मास्टरमाइंड बता चुके हैं।

हिन्दू विरोधी I.N.D.I.A गठबंधन, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल तमिलनाडु की एमएमके पार्टी के अध्यक्ष ने माता सीता का किया अपमान


विपक्षी दलों का I.N.D.I.A गठबंधन हिन्दू विरोधियों का जमावड़ा है। इस गठबंधन का नेतृत्वकर्ता कांग्रेस है, जिसका इतिहास ही हिन्दू विरोध रहा है। इस गठबंधन में वहीं पार्टियां शामिल हैं, जो हिन्दू धर्म और उसके देवी-देवताओं से नफरत करती हैं। I.N.D.I.A गठबंधन में शामिल और तमिलनाडु सरकार के सहयोगी दल मनिथानेया मक्कल काची(MMK) के अध्यक्ष जवाहिरुल्ला ने सड़कों पर ऐसे पोस्टर लगवाए, जो हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने वाला था। यह अब सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इस पोस्टर में माता सीता को अपमानजनक तरीके से दिखाया गया है, जिससे करोड़ों हिन्दुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। हालांकि इसके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है, लेकिन स्टालिन की सरकार ने अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है। 

रविवार (30 जुलाई, 2023) को तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले में मणिपुर की घटना को लेकर एमएमके ने प्रदर्शन किया। इस दौरान सड़कों पर एक आपत्तिजनक पोस्टर लगाया गया। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे इस पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भगवान राम और गृह मंत्री अमित शाह को लक्ष्मण दिखाया गया है। वहीं इन दोनों के बीच में माता सीता को निर्वस्त्र दिखाया गया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय चिन्ह तिरंगे का भी अपमान किया गया है। इस पोस्टर को लेकर हिन्दुओं में जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि तमिलनाडु की डीएमके और कांग्रेस गठबंधन की सरकार में हिंदू देवी देवताओं का अपमान करना,उनका अश्लील चित्रण करना क्या कानूनी रूप से वैध है?

हालांकि बाद में विवाद बढ़ते देख एमएमके अध्यक्ष ने इस विवादित पोस्टर को हटा दिया और लोगों की भावनाएं आहत होने के लिए मांफी मांग ली, लेकिन एमएमके पार्टी के इस पोस्टर को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस निशाने पर आ गए। बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने दावा किया कि एमएमके प्रमुख को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान उनके साथ चलते हुए देखा गया था। गौरव भाटिया ने ट्वीट किया, “बहुत गहरा दुख पहुंचा है। हम उन्हें इतनी सख्ती से वापस देंगे। कानूनी युद्ध शुरू किया जाएगा। क्या यह धर्मनिरपेक्षता है? सिर्फ इसलिए कि हम सहिष्णु हैं, इससे भारत को हमारी धार्मिक भावनाओं को बेरहमी से कुचलने का अधिकार नहीं मिल जाता।” 

हैदराबाद : गैंगरेप में AIMIM विधायक का बेटा शामिल

हैदराबाद नाबालिग रेप केस में भाजपा नेता का दावा
क्या आज राजनीतिक पार्टियां सफ़ेद पोश अपराधियों का अड्डा बन गयी हैं? शायद ही कोई पार्टी ऐसी होगी, जिसका कोई न कोई नेता किसी न किसी अपराध में लिप्त न हो। क्या सरकार ऐसा कोई कानून बनाएगी जो अन्य अपराधियों से अधिक नेता से  सम्बंधित व्यक्ति द्वारा अपराध किए जाने पर उस नेता के किसी चुनाव के  लड़ने पर पाबन्दी लगा दी जाए? 
हैदराबाद के जुबली हिल्स में नाबालिग से गैंगरेप केस में AIMIM विधायक के बेटे के बचने के रास्ते अब बंद होते जा रहे हैं। खबर है कि एक वीडियो के जरिए भाजपा नेता ने ये साबित किया है कि इस केस में शहर के विधायक के बेटे का हाथ है। इस बीच रविवार (5 जून 2022) को पुलिस ने इस केस में तीसरे नाबालिग आरोपित को गिरफ्तार किया है और कई टीमें अब भी आरोपित ओमेर खान की तलाश में छापेमारी कर रही हैं।

डेक्कन क्रॉनिकल ने अपनी रिपोर्ट में बेहद विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से बताया कि भाजपा विधायक एम रघुनंनदन राव ने शनिवार (4 जून 2022) को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक के बेटे की वीडियो प्रशासन को दिखाई। इस वीडियो में विधायक के बेटे द्वारा नाबालिग को छूने और चूमने का कृत्य कर पॉक्सो एक्ट का उल्लंघन करते हुए साफ देखा जा सकता है। रिपोर्ट में ये भी दावा है कि जाँच अधिकारियों ने शुरू में विधायक के बेटे के साथ चैट की थी। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने ये भी दावा किया था कि विधायक का बेटा इनोवा गाड़ी में नहीं था। हालाँकि 28 मई को वो मर्सीडीज बेंज में था इस बात में अब कोई संदेह नहीं रह गया है।

नाबालिग रेप केस में भाजपा नेता रघुनंदन राव ने शनिवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में एआईएमआईएम विधायक के बेटे का नाम लेकर सवाल किया था कि आखिर पुलिस कोई एक्शन क्यों नहीं ले रही। वहीं दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि वह पीड़ित नाबालिग से भी पूछताछ करके और आरोपितों के नाम निकलवा रहे हैं। अगर पीड़िता और किसी के नाम बताती है तो मामले में एक्शन लिया जाएगा।

17 साल की पीड़िता 28 मई को एक पार्टी के बाद अपने घर लौट रही थी। उसी वक्त हैदरबाद जुबली हिल्स इलाके में उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। यह मामला तब सामने आया जब पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है एक वीडियो में देख सकते हैं कि पीड़िता एक पब के बाहर संदिग्ध आरोपितों के साथ खड़ी दिखाई है। रिपोर्टस की मानें तो आरोपितों ने पहले पीड़िता से उसके घर छोड़ने की बात कही। बाद में एक पार्क की हुई कार के अंदर उसके साथ मारपीट की गई और फिर बारी-बारी से सभी ने उसके साथ बलात्कार किया। इस दौरान दूसरे आरोपित कार के बाहर पहरा दे रहे थे। घटना की जानकारी होने के बाद लड़की के पिता ने इस संबंध में शिकायत दी थी और पुलिस ने 5 लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और 323 और पॉक्सो एक्ट की धार 9 और 10 के तहत मामला दर्ज किया था।