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BJP बनाएगी कर्नल कुरैशी- विंग कमांडर सिंह को चेहरा: Times of India में छपी फर्जी खबर की भाजपा ने खोली पोल, बताया- मीडिया ने तोड़-मरोड़ के पेश किया बयान

भारतीय जनता पार्टी ने कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह को अपने अभियान का चेहरा बनाने की खबरें खारिज की हैं। भाजपा ने इन्हें फर्जी खबर करार दिया है। पार्टी ने कहा है कि वह ऐसी कोई योजना पर काम नहीं कर रही है। मीडिया में चलाया गया था कि ऐसा भाजपा महिलाओं में पैठ बढ़ाने के लिए करेगी।

भाजपा के आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने एक्स (पहले ट्विटर) पर यह दावा करने वाली खबरों को लेकर लिखा। उन्होंने कहा, “यह फेक न्यूज है। भाजपा की कर्नल सोफिया कुरैशी या विंग कमांडर व्योमिका सिंह को अभियान का चेहरा बनाने की कोई योजना नहीं है।”

आगे उन्होंने बताया, “भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने कर्नल कुरैशी को समुदाय के भीतर एक सशक्त मुस्लिम महिला के उदाहरण के रूप में दिखाने को लेकर बात कही थी।”

यह खबर Times मीडिया समूह के अखबारों ने प्रमुखता से छापी थी। टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी इस खबर में बताया गया था कि 9 जून, 2025 को भाजपा को मोदी सरकार के 11 वर्ष पूरे होने पर भाजपा महिलाओं को केंद्र में रख कर यह अभियान चलाएगी।

खबर में बताया गया था कि इस काम की जिम्मेदारी भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा को सौंपी गई है। इस खबर में बताया गया था कि मोर्चा को मस्जिदों, दरगाहों और बाकी जगहों पर ऐसी चौपालें आयोजित करने का आदेश भाजपा की तरफ से दिया गया है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर में यह भी दावा किया गया था कि पार्टी इससे अल्पसंख्यक समुदाय में अपनी पैठ बढ़ाना चाहती है। हालाँकि, भाजपा ने इस खबर को पूरी तरह फर्जी बताया है। गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान विश्व के सामने जानकारी देने वाला चेहरा कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ही थीं।

इससे पहले भाजपा ने दैनिक भास्कर की उस रिपोर्ट को खारिज किया था जिसमे पार्टी के घर-घर सिंदूर भेजने के अभियान चलाने का दावा किया गया था। भाजपा ने बताया था कि उसकी ऐसी कोई योजना नहीं है।

रोहिंग्या-बांग्लादेशी नहीं ले पाएँगे दिल्ली में मुफ्त राशन और फ्री की बिजली, रेखा गुप्ता सरकार बनाएगी डाटा हब


दिल्ली सरकार ने सरकारी योजनाओं में हो रही धाँधली से बचने के लिए यूनिफाइड डेटा हब (UDH) बनाने करने जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य लाभार्थियों का एक रिकॉर्ड बनाना है। इसमें तमाम विभागों से डेटा इकट्ठा किया जाएगा। इससे यह पता लग सकेगा कि केवल पात्र लोग ही योजनाओं का लाभ लें।

काफी समय से दिल्ली में यह मांग की जा रही है कि झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वालों के आधार कार्डों की गंभीरता से पुष्टि की जाए। इन लोगों ने सिर्फ दिल्ली ही नहीं दिल्ली से बाहर बंगाल और राजस्थान आदि राज्यों में भी आधार कार्ड बनवाकर सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। उदाहरण पूनम(काल्पनिक) ने दिल्ली में हिन्दू के नाम से आधार कार्ड और वोटर कार्ड बनवाया रखा है लेकिन दिल्ली से बाहर मुस्लिम नाम परवीन(काल्पनिक) के नाम से आधार कार्ड बनवा रखा है। ये बहुत बड़ा जाल है जिसका भंडाभोड़ होना बहुत जरुरी है। 

दूसरे, BPL कार्ड धारकों की भी आर्थिक स्थिति की जाँच होनी चाहिए। ताकि जरूरतमंद लोगों को सरकारी सहायता का लाभ मिल सके। भीख मांगना कोई मजबूरी नहीं एक व्यापार है। यह आरोप नहीं कटु सत्य है। एक भिखारिन जो सिर्फ शाम को ही भीख मांगती थी उसकी 2 टैक्सियां किराये पर चल रही थी और जब उसका निकाह हुआ तो महावीर वाटिका दरिया गंज में शानदार दावत और कार दहेज़ में। इतना ही नहीं, बेरोजगारी के दिनों में रजिस्ट्री करने वाले बाबू से पूछा कि सुबह मनीऑर्डर की खिड़की पर भिखारियों की ही लम्बी लाइन देखता हूँ। इस पर बाबू ने जवाब दिया “बेटा जिसने एक महीने जामा मस्जिद पोस्ट ऑफिस ड्यूटी दे दी वह कभी किसी भिखारी को एक पैसा नहीं देगा, जिसका अनुभव सेवानिर्वित होने के लगभग 2 साल के बाद उपरोक्त भिखारिन से हुआ। वेतनभोगी और व्यापारी पर तो हर कोई हाथ डाल देता है लेकिन इन पर नहीं। आज एक रिक्शा चालक से लेकर ठेला चलाने वाला भी हर महीने 20 से लेकर 25/30,000 रूपए कमा रहा है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट 2025-26 के भाषण में भी इसका जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि बीजेपी सरकार वेरिफिकेशन प्रकिया शुरु करेगी, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र दिल्लीवासियों तक पहुँच सके। इस डाटा से फ्री बिजली या मुफ्त राशन जैसी चीजें भी घुसपैठियों को नहीं मिलेंगी।

उन्होंने यह भी कहा था इस बात को भी सुनिश्चित किया जाएगा कि दिल्ली से बाहर से आने वाले लोग या रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिए इस योजनाओं का लाभ न ले सकें। अधिकारियों के अनुसार, यह डेटा हब सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ाने के लिए डिजिटल स्तर पर रिकॉर्ड एकत्र करना होगा।

बीजेपी सरकार जल्द ही ‘दिल्ली यूनिफाइड सिटीजन डेटा प्लेटफ़ॉर्म’ विकसित करने के लिए एक टेंडर भी जारी करेगी।

उत्तर प्रदेश : प्रयागराज के मदरसे में छापे जा रहे थे जाली नोट: कोई मौलवी, कोई आलिम… सब फेक करेंसी से कर रहे थे ‘मजहब’ मजबूत, 100 रूपए देने पर मिलते थे 3 नकली नोट

मदरसे में नकली नोट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर के प्रयागराज पुलिस ने मौलवी सहित 4 को दबोचा (चित्र साभार- X/@UPkesari)
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में बुधवार (28 अगस्त 2024) को पुलिस ने नकली नोट बनाने के एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह एक मदरसे से ऑपरेट हो रहा था जहाँ 100-100 रुपए के जाली नोट छापे जा रहे थे। पुलिस ने मदरसे में छापा मार कर 1 लाख 30 हजार रुपए के नकली नोट बरामद किए हैं। इस केस में ओडिशा के जाहिर खान सहित कुल 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपितों में मदरसे का मौलवी तफसीरुल भी शामिल है। पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना प्रयागराज जिले के अतरसुइया इलाके की है। यहाँ पर एक मदरसा है जिसका नाम जामिया हबीबिया मस्जिद-ए-आज़म है। पुलिस को पिछले कई दिनों से यहाँ पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। यहाँ पर कई बाहरी लोगों का आना-जाना लगा रहता था। पुलिस ने इस मदरसे पर बारीक नजर रखनी शुरू कर दी। जब पुलिस को इत्मीनान हो गया कि मदरसे में सब सही नहीं चल रहा तब बुधवार (28 अगस्त) को यहाँ दबिश दी गई।

पुलिस मदरसे के अंदर घुसी तब वहाँ एक प्रिंटिंग मशीन पर 3 लोग कुछ छापते नजर आए। जाँच के बाद पता चला कि तीनों नकली नोटों की छपाई कर रहे थे। इन तीनों से पूछताछ हुई तो इन्होंने इस गैरकानूनी काम में मदरसे के प्रिंसिपल की भी मिलीभगत बताई। 25 वर्षीय प्रिंसिपल का नाम मोहम्मद तफसीरुल है जो पेशे से मौलवी है। पुलिस ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए अन्य आरोपितों में 18 वर्षीय मोहम्मद अफ़ज़ल, 18 वर्षीय मोहम्मद शाहिद और 23 वर्षीय जाहिर खान का नाम है।

ज़ाहिर खान उर्फ़ अब्दुल ज़ाहिर मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला है। वह मदरसे में आलिम है। पढ़ाई के बाद जाहिर मदरसे में ही पढ़ाने लगा था। वहीं हाईस्कूल पास मोहम्मद अफ़ज़ल के अब्बा मोईद अहमद कपड़े की दुकान पर काम करते हैं। कक्षा 8 पास मोहम्मद शाहिद मदरसे में मौलवी बनने आया था लेकिन बाद में वह नकली नोट छापने वाले रैकेट से जुड़ गया। हाईस्कूल पास मौलवी तफसीरुल के अब्बा भी मदरसे में पढ़ाते थे। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वो पिछले 3 महीनों से नकली नोटों के इस काले कारोबार को संचालित कर रहे थे।

मदरसे की तलाशी ली गई तो वहाँ से 1 लाख 30 हजार रुपए के नकली नोट बरामद हुए। नकली नोट बनाने के लिए प्रिंटर और अन्य मशीनें ओडिशा के भद्रक निवासी अब्दुल ज़ाहिर ने अपने भाई से मँगवाई। ज़ाहिर का भाई भी पहले प्रयागराज में आधार कार्ड बनवाने का काम कर चुका है। 100 रुपयों के नोट में लोग ज्यादा जाँच पड़ताल नहीं करते, यही सोच कर आरोपितों ने इसे छापना शुरू किया था। अधिकतर नोटों को प्रयागराज के अलग-अलग हिस्सों में दुकानरों को धोखे से दिया जाता था।

आरोपितों ने बाजार में कितनी नकली नोट चलाए हैं इसकी जाँच पुलिस कर रही है। अनुमानित राशि लगभग 5 लाख रुपए बताई जा रही है। पकड़े गए आरोपित अपने काले कारोबार को चलाने के लिए युवाओं को अपने साथ जोड़ रहे थे। उनको 100 रुपए असली देने पर 300 रुपए नकली दिए जाते थे। अब पुलिस टीमें इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पड़ताल कर रही है। नकली नोट छापने वाले प्रिंटर व अन्य मशीनों को जब्त कर लिया गया है। पुलिस मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

इन सभी आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा सिविल लाइंस थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 178, 179, 180, 181 और 182 (1) के तहत कार्रवाई की गई है। इस मामले की जाँच के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की टीम भी पहुँच गई है।

दिल्ली शराब नीति बनाने में शामिल थे संजय सिंह, मिला मोटा पैसा, हाई कोर्ट ने कहा- जमानत देने का आधार नहीं बनता

दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल बार-बार ED पूछताछ से क्यों भाग रहे हैं, उसका कारण है, केजरीवाल ही नहीं पूरी आम आदमी पार्टी और विपक्ष सभी जानते हैं कि ED के पास शराब घोटाले के अतिरिक्त अन्य घोटालों में भी केजरीवाल के खिलाफ इतने सबूत है कि संजय सिंह की तरह एक ही झटके में गिरफ्तार। और केजरीवाल के गिरफ्तार होते ही झाड़ू का एक-एक तिनका बुरी तरह तूफान में उड़ जायेगा। औरों के तो जेल से बाहर आने की संभावनाएं हो सकती है लेकिन केजरीवाल नहीं। यह भी सम्भावना है कि स्वाति मालीवाल भी लपेटे में आ सकती हैं, दोनों बाहर जाते हैं और वापस आते ही स्वाति को राज्य सभा भेज दिया जाता है। राज बहुत गहरा है। अब तो संभावनाएं केजरीवाल के बेटे पुनीत की भी बन रही हैं। शंकाएं यह भी व्यक्त हो रही है कहीं केजरीवाल की पूरी फैमिली को और आधे से अधिक मंत्रिमंडल को भी जेल न जाना पड़ जाये।  
दिल्ली शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में AAP सांसद संजय सिंह को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने संजय सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि केस के इस स्‍टेज पर आरोपी को जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता है। अदालत ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि संजय सिंह दिल्ली की शराब नीति बनवाने में शामिल थे। इसमें उन्हें मोटा कमीशन मिला। संजय सिंह ने कोर्ट में कहा था कि शराब घोटाले में उनकी कोई भूमिका नहीं है इसीलिए जमानत दिया जाए। वहीं ED के मुताबिक शराब घोटाले से जो आर्थिक लाभ हुआ, उसे पाने, रखने, छुपाने और इस्तेमाल करने में सिंह शामिल थे। ED ने कहा कि दिनेश अरोड़ा के अलावा कई और लोग भी है जिन्होंने संजय सिंह का नाम लिया है। सबूतों के आधार पर कोर्ट ने संजय सिंह की भूमिका के बारे में मुहर लगा दी है। 4 अक्टूबर 2023 को गिरफ्तार किए गए संजय सिंह तीन महीने से अधिक समय से हिरासत में हैं।

शराब नीति बनाने में शामिल थे संजय सिंह
दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने अपने 43-पृष्ठ के फैसले में कहा, “प्रथम दृष्टया, यह स्पष्ट है कि संजय सिंह पुरानी आबाकारी नीति की तैयारी का हिस्सा थे और उसके बाद, नई आबकारी नीति शराब घोटाले के आरोपियों को फायदा पहुंचाने के अनुरूप बनाई गई थी, इसके लिए उन्हें मोटा पैसा मिला था।

संजय सिंह के लिए सर्वेश मिश्रा ने लिए 2 करोड़ रुपये
अदालत ने कहा, “ऐसे बयान हैं कि संजय सिंह के लिए सर्वेश मिश्रा को उनके आधिकारिक आवास पर 2 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। संजय सिंह ने नई आबकारी नीति बनाने में भूमिका रही और कुछ निश्चित लोगों को लाभ पहुंचाया गया जिसके बदले रिश्वत दी गई। आवेदक की इस स्तर पर भूमिका पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता”।

दिनेश अरोड़ा, विवेक त्यागी, सर्वेश मिश्रा, विजय नायर, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह के बीच बैठकें हुईं
हाईकोर्ट ने कहा कि सह-आरोपी दिनेश अरोड़ा, विवेक त्यागी, सर्वेश मिश्रा, विजय नायर, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह आदि के बीच बैठकें और बातचीत के समय, स्थान और तरीके के बारे में निश्चित आरोप हैं और केस के इस स्टेज पर उसकी उपेक्षा नहीं जा सकती। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, “उपरोक्त चर्चा के मद्देनजर, इस स्तर पर जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता है।”

विजय नायर ने दिनेश अरोड़ा को दी थी धमकी
अदालत ने सरकारी गवाह बन चुके दिनेश अरोड़ा के बयान पर भी ध्यान दिया, जो पीएलएमए धारा 50 के तहत दर्ज किया गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें अगस्त 2022 में लंदन में AAP के पूर्व संचार प्रभारी विजय नायर ने धमकी दी थी कि डिप्टी सीएम या सिंह या अन्य बड़े राजनीतिक नेताओं के खिलाफ बोलने पर उन्हें बहुत परेशानी होगी।

हाईकोर्ट ने अरोड़ा के पीएमएलए बयान पर गौर किया
हाईकोर्ट ने जुलाई 2023 में मजिस्ट्रेट की अदालत के समक्ष सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज किए गए अरोड़ा के बयान पर भी गौर किया, जहां उन्होंने कहा था कि उन्हें नायर ने किसी भी राजनीतिक नेता का नाम न लेने की धमकी दी थी; इसलिए उन्होंने उनके नामों का खुलासा नहीं किया था, जिसका खुलासा उन्होंने अगस्त 2023 में दर्ज अपने पीएमएलए बयान में किया।

संजय सिंह शराब घोटाले में मिले पैसे पाने, रखने, छुपाने में शामिल
संजय सिंह ने जमानत का अनुरोध करते हुए कोर्ट में आधार दिया था कि वह पिछले तीन महीने से हिरासत में हैं। जिस अपराध का आरोप उन पर मढ़ा जा रहा है, उसमें उसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। दूसरी ओर, जांच एजेंसी ने याचिका का विरोध करते हुए दलील दी थी कि 2021-22 की विवादित नीति से जुड़े कथित शराब घोटाले से जो आर्थिक लाभ हुआ, उसे पाने, रखने, छुपाने और इस्तेमाल करने में सिंह शामिल थे।

शराब घोटाले का पैसा AAP ने गोवा विधानसभा चुनाव में खर्च किया
दिल्ली शराब घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 3 फरवरी को चार्जशीट में कहा कि दिल्ली की रद्द की गई आबकारी नीति में कथित रूप से ली गई 100 करोड़ रुपये की रिश्वत के एक हिस्से का इस्तेमाल AAP ने गोवा विधानसभा चुनाव में किया था। इस मामले में संजय सिंह के अलावा दिल्ली के उपमुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया भी आरोपी हैं। वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कई समन दिए गए हैं।