दिल्ली सरकार ने सरकारी योजनाओं में हो रही धाँधली से बचने के लिए यूनिफाइड डेटा हब (UDH) बनाने करने जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य लाभार्थियों का एक रिकॉर्ड बनाना है। इसमें तमाम विभागों से डेटा इकट्ठा किया जाएगा। इससे यह पता लग सकेगा कि केवल पात्र लोग ही योजनाओं का लाभ लें।
काफी समय से दिल्ली में यह मांग की जा रही है कि झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वालों के आधार कार्डों की गंभीरता से पुष्टि की जाए। इन लोगों ने सिर्फ दिल्ली ही नहीं दिल्ली से बाहर बंगाल और राजस्थान आदि राज्यों में भी आधार कार्ड बनवाकर सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। उदाहरण पूनम(काल्पनिक) ने दिल्ली में हिन्दू के नाम से आधार कार्ड और वोटर कार्ड बनवाया रखा है लेकिन दिल्ली से बाहर मुस्लिम नाम परवीन(काल्पनिक) के नाम से आधार कार्ड बनवा रखा है। ये बहुत बड़ा जाल है जिसका भंडाभोड़ होना बहुत जरुरी है।
दूसरे, BPL कार्ड धारकों की भी आर्थिक स्थिति की जाँच होनी चाहिए। ताकि जरूरतमंद लोगों को सरकारी सहायता का लाभ मिल सके। भीख मांगना कोई मजबूरी नहीं एक व्यापार है। यह आरोप नहीं कटु सत्य है। एक भिखारिन जो सिर्फ शाम को ही भीख मांगती थी उसकी 2 टैक्सियां किराये पर चल रही थी और जब उसका निकाह हुआ तो महावीर वाटिका दरिया गंज में शानदार दावत और कार दहेज़ में। इतना ही नहीं, बेरोजगारी के दिनों में रजिस्ट्री करने वाले बाबू से पूछा कि सुबह मनीऑर्डर की खिड़की पर भिखारियों की ही लम्बी लाइन देखता हूँ। इस पर बाबू ने जवाब दिया “बेटा जिसने एक महीने जामा मस्जिद पोस्ट ऑफिस ड्यूटी दे दी वह कभी किसी भिखारी को एक पैसा नहीं देगा, जिसका अनुभव सेवानिर्वित होने के लगभग 2 साल के बाद उपरोक्त भिखारिन से हुआ। वेतनभोगी और व्यापारी पर तो हर कोई हाथ डाल देता है लेकिन इन पर नहीं। आज एक रिक्शा चालक से लेकर ठेला चलाने वाला भी हर महीने 20 से लेकर 25/30,000 रूपए कमा रहा है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट 2025-26 के भाषण में भी इसका जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि बीजेपी सरकार वेरिफिकेशन प्रकिया शुरु करेगी, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र दिल्लीवासियों तक पहुँच सके। इस डाटा से फ्री बिजली या मुफ्त राशन जैसी चीजें भी घुसपैठियों को नहीं मिलेंगी।
उन्होंने यह भी कहा था इस बात को भी सुनिश्चित किया जाएगा कि दिल्ली से बाहर से आने वाले लोग या रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिए इस योजनाओं का लाभ न ले सकें। अधिकारियों के अनुसार, यह डेटा हब सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ाने के लिए डिजिटल स्तर पर रिकॉर्ड एकत्र करना होगा।
बीजेपी सरकार जल्द ही ‘दिल्ली यूनिफाइड सिटीजन डेटा प्लेटफ़ॉर्म’ विकसित करने के लिए एक टेंडर भी जारी करेगी।
छल, कपट और झूठ बोल कर केजरीवाल सरकार कब तक चलती रहेगी? आज दिल्ली पानी संकट से झूझ रही, लेकिन केजरीवाल सरकार अपनी blame game से जनता को पागल बनाने से बाज नहीं आ रही। अपनी नाकामियों को दूसरों पर डाल रही है। दिल्ली में पानी संकट की असली वजह है कई सालों से यमुना नहीं का साफ न होना। चाहे देश की सारी नदियों का पानी दिल्ली छोड़ दिया दिक्कत वही रहेगी। गहराई न होने की वजह से यमुना में आया पानी ऊपर ही ऊपर बह दिल्ली से बाहर निकल रहा है, कुछ पानी टैंकर माफिया लेकर धंधा चला रहे हैं। लोक सभा चुनाव से पहले अरविन्द केजरीवाल को दिल्लीवासियों की बहुत फ़िक्र थी, रोज सन्देश भेजे जा रहे थे, लेकिन अब तिहाड़वासी को दिल्लीवासियों की परवाह नहीं।
दिल्ली में आम जनता पानी का संकट झेल रही है। टैंकर माफिया अपने ‘आम’ में जुटा है और दिल्ली सरकार सो रही है। ऐसे में ये मामला पहुँचा सुप्रीम कोर्ट, जिसके दिल्ली सरकार को जमकर फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि दिल्ली में पानी का संकट हर साल क्यों आता है? दिल्ली की सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या कर रही है? यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने ये भी पूछा है कि दिल्ली सरकार ने टैंकर माफिया के खिलाफ अबतक क्या कदम उठाए? अगर दिल्ली सरकार इसी तरह टैंकर माफिया के सामने नाकाम रही, तो हम दिल्ली पुलिस को सीधे माफिया से निपटने का आदेश देंगे।
दरअसल, ये मामला दिल्ली सरकार की तरफ से ही सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया है कि हिमाचल प्रदेश द्वारा दिल्ली के लिए छोड़ा गया पानी हरियाणा आगे ही नहीं बढ़ने दे रहा है। ऐसे में हरियाणा सरकार को सुप्रीम कोर्ट निर्देश दे कि वो पानी छोड़े।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की अवकाशकालीन पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस केस की सुनवाई करते हुए कहा कि पानी की समस्या को लेकर मुख्य सचिव को हलफनामा दायर करना चाहिए, और कोर्ट ने एक-2 दिन में हलफनामा दायर करने के लिए कहा। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी देखा कि हरियाणा के पास जो पानी था, वो दिल्ली आ चुका है, जबकि दिल्ली का दावा है कि हिमाचल प्रदेश ने उसके लिए 137 क्यूसेक पानी छोड़ा है। लेकिन हरियाणा कह रहा है कि उसके पास अतिरिक्त पानी है ही नहीं। इसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को घेरा है।
इसी दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने ‘टैंकर माफिया’ और पानी की बर्बादी को लेकर दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई और पूछा कि टैंकर माफिया के खिलाफ सरकार ने क्या कदम उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘दिल्ली में टैंकर माफिया काम कर रहा और आप कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अगर दिल्ली सरकार कार्रवाई नहीं कर सकती है, तो हम दिल्ली पुलिस से कार्रवाई करने के लिए कह सकते हैं।’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में जल संकट से लोग परेशान हैं। हम हर न्यूज चैनल पर तस्वीरें देख रहे हैं और कोर्ट में झूठे बयान दिए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर पूछा कि पानी हिमाचल प्रदेश से आ रहा है तो दिल्ली में पानी कहाँ जा रहा है? इतना पानी का रिसाव, टैंकर माफिया आदि हैं, इस संबंध में आपने क्या उपाय किए हैं। उसे हलफनामा दायर कर हमारे (सुप्रीम कोर्ट) सामने रखा जाए।
दिवाली और छठ पर पटाखे बैन करने और सनातन धर्म का अपमान करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिवाली पूजा के नाम पर सरकारी पैसा पानी की तरह बहाते हैं। एक तरफ सनातन धर्म का अपमान तो दूसरी तरफ दिवाली पूजा का ढोंग करने वाले केजरीवाल की नीयत पूजा के बहाने सरकार के खजाने से पैसा निकालना होता है। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि पिछले साल 2021 में पूजा के लिए दिल्ली सरकार ने 15 करोड़ खर्च किए लेकिन इनमें से पूजा पर सिर्फ तीन करोड़ रुपये पूजा में खर्च किए गए जबकि 12 करोड़ रुपये पूजा का मीडिया पर लाइव टेलीकास्ट करने के लिए तमाम मीडिया वालों को दिए गए। यानी उन्होंने पूजा को भी उन्होंने एक इवेंट बना दिया और मीडिया प्रचार पर पैसे लुटाए। पैसे लुटाने के इस खेल में केजरीवाल ने दोस्ती भी जमकर निभाई।
उन्होंने इस इवेंट का ठेका विजक्राफ्ट कंपनी को दिया जो कि उनके ईसाई दोस्त सब्बास जोसफ की कंपनी है। अब इससे समझ सकते हैं कि पूजा का आयोजन क्यों और किसलिए किया गया? इसी तरह दिल्ली सरकार ने वर्ष 2020 में दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा और उसके लाइव टेलीकास्ट कार्यक्रम पर 6 करोड़ रुपये खर्च किए थे। पूजा 30 मिनट हुई थी और इस तरह प्रति मिनट पूजा पर 20 लाख रुपये खर्च किए गए। करदाताओं के पैसे का इस तरह दुरुपयोग केजरीवाल ही कर सकते हैं। ये केजरीवाल का दिल्ली मॉडल है जिसका ढिंढोरा वे पीटते नहीं थकते हैं। अब गुजरात चुनाव के मद्देनजर केजरीवाल ने इस साल एक नया शिगूफा छोड़ा है कि भारतीय करेंसी (रुपये) पर लक्ष्मी-गणेश की फोटो छापी जाए। एक तरफ उनके करीबी हिंदू देवी-देवताओं को नहीं मानने की शपथ दिलाते हैं तो दूसरी तरफ केजरीवाल गुजरात में मंदिरों में पहुंच रहे हैं। अब पूजा के नाम पर किए जा रहे इस ढोंग को जनता समझ चुकी है।
दिल्ली मॉडल
यह पिछले साल की RTI है, जब अरविंद केजरीवाल ने अपनी सगी पत्नी और अपने गिरोह आप के लफंदरों के साथ दीपावली की पूजा की नौटंकी की थी।
इस पूजा के लिए दिल्ली सरकार ने 15 करोड़ खर्च किए... सिर्फ तीन करोड़ रुपए पूजा में खर्च किए गए जबकि 12 करोड़ pic.twitter.com/xGV915xyZU
टि्वटर यूजर Bharat-Ek VishwaGuru ने एक RTI के हवाले से यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि यह पिछले साल की RTI है, जब अरविंद केजरीवाल ने अपनी पत्नी और अपने गिरोह के लोगों के साथ दीपावली की पूजा की नौटंकी की थी। इस पूजा के लिए दिल्ली सरकार ने 15 करोड़ खर्च किए। इनमें से सिर्फ तीन करोड़ रुपये पूजा में खर्च किए गए जबकि 12 करोड़ रुपये इस केजरी गिरोह की दीपावली पूजा का मीडिया पर लाइव टेलीकास्ट करने के लिए तमाम मीडिया वालों को दिए गए।
केजरीवाल ने ईसाई दोस्त की कंपनी विजक्राफ्ट को दिया ठेका
सबसे आश्चर्य की बात यह है कि अरविंद केजरीवाल की यह दीपावली पूजा खुद दिल्ली सरकार की नजरों में एक इवेंट था और इस इवेंट का पूरा ठेका विजक्राफ्ट मीडिया नामक कंपनी को दिया गया था। इस विजक्राफ्ट मीडिया कंपनी का मालिक ‘सब्बास जोसफ’ मिशनरी ऑफ इंडिया संस्था में भी ट्रस्टी है और बेहद कट्टर ईसाई है। टीवी चैनलों पर जो सुबह ईसाई पादरियों के प्रोग्राम आते हैं, वह इसी विजक्राफ्ट मीडिया कंपनी के द्वारा होता है। विजक्राफ्ट मीडिया कंपनी का मालिक सब्बास जोसेफ अरविंद केजरीवाल का तब से साथी है जब दोनों मिशनरी आफ चैरिटी में एक साथ मदर टेरेसा के साथ काम कर रहे थे और जहां केजरीवाल ने ईसाई धर्म अपनाया था। मारवाड़ी में एक कहावत है कि घी गिरा भी तो थाली में गिरा… यानी अरविंद केजरीवाल किस तरह से सरकारी खजाना हिंदुओं और सनातन धर्म से नफरत करने वालों पर लुटा रहा है, यह एक नमूना है।
केजरीवाल ने वर्ष 2020 में दिवाली पूजा पर हर मिनट खर्च किए 20 लाख रुपये
इसी तरह वर्ष 2020 में दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार द्वारा दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा और उसके लाइव टेलीकास्ट कार्यक्रम पर 6 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। एक आरटीआई एक्टिविस्ट साकेत गोखले ने आरटीआई के जरिये यह जानकारी जुटाई थी। आरटीआई एक्टिविस्ट साकेत गोखले ने अपने ट्वीट में दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम (DTTDC) की ओर से भेजे गए आरटीआई के जवाब को साझा किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की AAP सरकार और अरविंद केजरीवाल द्वारा 14 नवंबर, 2020 को किए गए लक्ष्मी पूजा आयोजन और लाइव टेलीकास्ट पर करदाताओं के पैसे के 6 करोड़ खर्च कर दिए।
साकेत गोखले ने कहा कि 30 मिनट की इस पूजा पर कुल 6 करोड़ खर्च, मतलब प्रति मिनट 20 लाख रुपये किए गए। दिवाली की रात मुख्यमंत्री केजरीवाल और उनके कैबिनेट मंत्रियों द्वारा दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर में अपने जीवनसाथियों के साथ भाग लेने वाले मेगा इवेंट का लाइव टेलीकास्ट किया गया था। गोखले ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दिल्ली में AAP सरकार के पास पूजा पर खर्च करने के लिए धन था, जबकि दिल्ली अनेक पीड़ित मुआवजे का इंतजार कर रहे थे। हिसाब लगाएं और कल्पना करें कि धार्मिक समारोह में खर्च किए गए इस 6 करोड़ रुपये से उत्तर पूर्वी दिल्ली में कितने परिवारों को मदद मिल सकती है।
साकेत गोखले ने आरटीआई में ये तीन सवाल पूछे थे…
सवाल 1 : क्या दिल्ली सरकार के 14/11/20 के लक्ष्मी पूजा कार्यक्रम और इसके लाइव प्रसारण का खर्च दिल्ली सरकार ने वहन किया है?
जवाब : हां
सवाल 2 : यदि दिल्ली सरकार खर्च वहन कर रही है, तो कृपया सीएम की लक्ष्मी पूजा के इस समारोह और टेलीविजन पर इसके लाइव टेलीकास्ट के लिए निर्धारित राशि बताएं?
जवाब : लाइव टेलीकास्ट लागत सहित लगभग 6.00 करोड़ रुपये।
सवाल 3 : कृपया बताएं कि क्या यह एक आधिकारिक कार्यक्रम था जो दिल्ली सरकार के उपराज्यपाल के अनुमोदन के साथ आयोजित किया गया था?
जवाब : हां, यह दिल्ली सरकार का आधिकारिक कार्यक्रम था
अरविन्द केजरीवाल तानाशाह : वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी
वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने रंग बदलने में गिरगिट को भी मात देने वाले केजरीवाल को तानाशाह ही करार नहीं किया, बल्कि लोकतंत्र विरोधी होने का आरोप लगाया। इतना ही नहीं त्रिपाठी मीडिया हाउसों पर भी तीर छोड़ने से नहीं चुके। जिसका प्रमाण News18 पर 'भईयाजी कहिन' पर भी देखने को मिलता है, जहाँ आम आदमी समर्थक को ही ज्यादा समय दिया जाता है, जो इस बात को भी साबित करता है कि मीडिया द्वारा विज्ञापन के लालच में सच्चाई को छिपाने का प्रयास किया जाता है।
केजरीवाल पर हिन्दू विरोधी होने के अनेको प्रमाण हैं, जिसे केजरीवाल सहित पार्टी का कोई समर्थक भी झूठला नहीं सकता। जैसे मेरी नानी कहती थी..., अगर नेहरू जी ने स्टील अथॉरिटी बनाने की बजाए मंदिर बनवाया होता.... , मै तन मन धन से वक़्फ़ बोर्ड..., मुंबई में अम्बानी के भवन को गिराने की बात कर मुसलमानों को गुमराह करने वाले केजरीवाल पहले ईमानदारी से दिल्ली में ही वक़्फ़ की जमीनों पर हुए अतिक्रमण को हटाने की हिम्मत दिखाएं। जिस जमावड़े में बड़ी शान से वक़्फ़ बोर्ड के साथ खड़े होने की ठींगे हांक रहे थे, कोई बचाव को नहीं आएगा। 1993 में दरिया गंज में बच्चा घर में स्थित वक़्फ़ बोर्ड के तत्कालीन चपरासी से लेकर पदाधिकारियों से पुछ लो, जो दर्दनाक हादसा इसी मुद्दे पर उनसे संपर्क करने पर, मेरे स्कूल जाने वाले बच्चों की जान की खातिर हाथ जोड़ते हुए साझा करते हुए, जान सुरक्षित रखने की विनती की थी। प्रकाशित न करने की शर्त पर (मेरे टेप से बैटरी निकाल) जो दर्दनाक कहानी व्यक्त की, उसे आज भी याद कर तत्कालीन पुलिस अधिकारीयों और वक़्फ़ स्टाफ की हिम्मत की तारीफ करता हूँ। केजरीवाल जी वक़्फ़ स्टाफ को बचाने कोई नेता आगे नहीं आया, पुलिस ने बड़ी मुश्किल से मामला शांत करवाया था। उनकी दो दिनों तक गुंडों से हिफाजत पुलिस ने की थी। क्षेत्र पुलिस छावनी बन गया था। पुलिस ही सबके नाश्ते और खाने-पीने का चुपचाप प्रबंध कर रही थी।
एक तरफ सनातन धर्म से नफरत दूसरी तरफकरेंसी पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर छापने की मांग
अभी कुछ दिन पहले ही केजरीवाल के करीबी मंत्री ने लोगों को शपथ दिलाई थी कि ” हिंदू धर्म के देवी-देवताओं को नहीं मानेंगे”, अब केजरीवाल ने गुजरात चुनाव के मद्देनजर डैमेज कंट्रोल करते हुए भारतीय रुपये पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर छापने की मांग की है। अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से भारतीय करेंसी पर गांधी जी के साथ-साथ लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर छापने की मांग की है। गुजरात चुनाव से पहले केजरीवाल ने हिंदुत्व का दांव खेला है। उन्होंने कहा कि वह इसके लिए जल्द ही पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखेंगे। केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘मेरी केंद्र सरकार और पीएम से अपील है कि भारतीय करेंसी पर एक तरफ गांधी जी की तस्वीर है, उसे वैसे ही रहने दें। दूसरी तरफ गणेश और लक्ष्मी जी की तस्वीर भारतीय करेंसी पर लगाया जाए। इससे पूरे देश को उनका आशीर्वाद मिलेगा। हम ये नहीं कह रहें हैं कि सारे नोट बदले जाएं, लेकिन जो नए नोट छपते हैं, उनके ऊपर ये शुरुआत की जा सकती है और धीरे धीरे करके सर्कुलेशन में ये नए नोट आ जाएंगे। केजरावाल ने कहा कि अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए देवी देवाताओं का आशीर्वाद जरूरी है। उन्होंने कहा कि दिवाली पूजा के दिन इस तरह का विचार आया। वो किसी धर्म के खिलाफ नहीं हैं। उनका मानना है कि अगर इंडोनेशिया ऐसा कर सकता है तो हम क्यों नहीं कर सकते हैं।
गुजरात में केजरीवाल की कृष्ण भक्ति, दिल्ली में अपमान
सोशल मीडिया पर लोगों में अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्री राजेंद्र पाल गौतल के खिलाफ काफी आक्रोश देखा जा रहा है। हिन्दू धर्म के खिलाफ केजरीवाल की साजिश के खिलाफ लोग तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि केजरीवाल गुजरात चुनाव में जनता को बेवक़ूफ़ बनाने के लिए मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं और दिल्ली में अपने नेता राजेन्द्र पाल गौतम से हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करवा रहे हैं।
किस तरह हिन्दू विरोधी और चुनावी भक्त केजरीवाल ने कब-कब भगवान राम और हिन्दू देवी-देवाताओं का अपमान किया…
सत्यनारायण और भागवत कथा फालतू, हिजड़ों की तरह बजाते हैं ताली- गुजरात प्रदेश अध्यक्ष इटालिया
गुजरात में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं, राम मंदिर और हिंदू धर्म के खिलाफ बयान देने वाले आम आदमी पार्टी (AAP) संयोजक अरविंद केजरीवाल फिर से हिंदू बन गए हैं और इसी गोपाल इटालिया के साथ माथे पर त्रिपुंड लगा और गले में रुद्राक्ष की माला पहन गुजरात में मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं। सोशल मीडिया पर आप नेता गोपाल इटालिया का जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें वे कह रहे हैं, “लोग सत्यनारायण कथा और भागवत कथा जैसी अवैज्ञानिक और फालतू की चीजों पर पैसा और समय बर्बाद कर देते हैं। इसके बाद भी लोगों को यह नहीं पता चलता कि उन्हें ऐसा करके क्या हासिल हुआ। वे दूसरों का समय भी बर्बाद कर देते हैं। अगर हम 5 पैसे भी ऐसी फालतू चीजों पर खर्च कर देते हैं तो हमें मनुष्य की तरह जीने का अधिकार भी नहीं है।” उन्होंने कहा, “मुझे ऐसे लोगों पर शर्म आती है। जो मैं कहता हूं वह आपको अगर अच्छा न लगे तो मुझे ब्लॉक कर दीजिए। लेकिन हमें उनकी जरूरत नहीं है जो संस्कृति और प्रथाओं के नाम पर हिजड़ों की तरह ताली बजाते हैं। कुछ साधु स्टेज से फालतू बातें करेंगे और हम हिंजड़ों की तरह ताली बजाएंगे।”
श्रीराम श्रीकृष्ण से इतना बैर ?
ये हैं @AamAadmiParty सरकार के मंत्री राजेन्द्र गौतम पाल, जिनके द्वारा आयोजित जय भीम मिशन में 10 हजार लोगों को शपथ दिलाई गई "मैं हिंदू धर्म के देवी देवताओं ब्रह्मा,विष्णु,महेश, श्रीराम, श्रीकृष्ण को भगवान नहीं मानूंगा, न ही उनकी पूजा करूंगा।" https://t.co/pHipfGQ7kXpic.twitter.com/cmoELzEQHR
केजरीवाल ने दिवाली-छठ पर दिल्ली में फिर बैन किए पटाखे
हिंदू विरोधी केजरीवाल सरकार के कारण दिल्ली के लोगों की इस बार भी दिवाली बिना पटाखों वाली रहेगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने एक बार फिर से दिल्ली में दिवाली-छठ पर पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया है। दिल्ली में अगले साल एक जनवरी तक सभी तरह के पटाखों के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक रहेगी। यह प्रतिबंध पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर भी लागू रहेगी। केजरीवाल के करीबी मंत्री गोपाल राय ने ट्वीट किया कि ‘दिल्ली में लोगों को प्रदूषण के खतरे से बचाने के लिए पिछले साल की तरह ही इस बार भी सभी तरह के पटाखों के उत्पादन, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जा रहा है, तांकि लोगों की जिंदगी बचाई जा सके। इस बार दिल्ली में पटाखों की ऑनलाइन बिक्री / डिलीवरी पर भी प्रतिबंध रहेगा। यह प्रतिबंध 1 जनवरी 2023 तक लागू रहेगा। प्रतिबंध को कड़ाई से लागू करने को लेकर दिल्ली पुलिस, DPCC और राजस्व विभाग के साथ मिलकर कार्य योजना बनाई जाएगी।’
बकरीद और ईद पर छूट, छठ पूजा पर पाबंदी
केजरीवाल सरकार ने पर्यावरण-प्रदूषण के नाम पर पिछले साल भी दिवाली-छठ में पटाखों को प्रतिबंधित कर दिया था। जबकि तमाम जांच और रिपोर्ट से ये साफ हो गया था कि दिल्ली के प्रदूषण के लिए पटाखे स्रोत नहीं हैं। दिल्ली में प्रदूषण का मुख्य स्रोत पराली जलाना और कल-कारखानों के साथ गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण है। इसको लेकर लोगों ने दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से सवाल किए हैं कि ईद-बकरीद पर पशुओं की हत्या पर बैन क्यों नहीं लगाया जाता है? लोग सोशल मीडिया पर मुस्लिम तुष्टिकरण को लेकर केजरीवाल सरकार पर तंज कस रहे हैं। इससे पहले अक्टूबर 2021 में अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में यमुना घाट पर छठा पूजा करने पर पाबंदी लगा दी थी। दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) ने 30 सितंबर को दिल्ली में कोरोना से जुड़ी नई गाइडलाइंस जारी की। गाइडलाइंस के मुताबिक दिल्ली में मंदिरों, तालाबों, नदियों या जलाशयों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर छठ पूजा नहीं मन सकेगी। लेकिन केजरीवाल सरकार ने केंद्र सरकार के बिना गाइडलाइन के बकरीद और ईद मनाने की पूरी छूट दी थी। एक समुदाय को त्योहार मनाने की अनुमति और दूसरे समुदाय के त्योहार पर पाबंदी ऐसी चीज है जो केजरीवाल के तुष्टिकरण और सौतेले व्यवहार को प्रदर्शित करती है।
चलो बुद्ध की ओर मिशन जय भीम बुलाता है।
आज "मिशन जय भीम" के तत्वाधान में अशोका विजयदशमी पर डॉ०अंबेडकर भवन रानी झांसी रोड पर 10,000 से ज्यादा बुद्धिजीवियों ने तथागत गौतम बुद्ध के धम्म में घर वापसी कर जाति विहीन व छुआछूत मुक्त भारत बनाने की शपथ ली।
अब पता चला @ArvindKejriwal दिवाली,दशहरे पे हिंदुओं पर पाबंदी क्यू लगवाता है,कश्मीरी पंडितो के नरसंहार को झूठा क्यों बोलता है। ये मंच पर शपथ लेने वाला और हिंदू देवी-देवताओं को अपमानित करने वाला केजरीवाल का मंत्री राजेंद्र पाल हैं। केजरीवाल का हिंदू विरोधी चेहरा आज नंगा हो गया है pic.twitter.com/2hGVglAmw6
दक्षिण में गांधी परिवार खुले आम RSS व हिंदुओ को हटानें की बात कर रहें हैं और उत्तर में धर्मांतरण तथा हिंदुओ को गाली गलौच l भारत को एक सोची समझी साजिश के तहत गृह युद्ध में फसाने का काम चल रहा हैं l बहुत सतर्कता की आवश्यकता हैं l