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भगवान राम का अपमान, आजादी के नारे और तिरंगे से बदसलूकी: कॉकरोचों को ये तक नहीं पता कि वे क्यों आए हैं

                                                             साभार : ऑपइंडिया
कल(6 जून) को कॉकरोच जनता पार्टी ने दिखा दिया कि रात के अँधेरे में वह कहाँ जा रहा है, तो तेज सूरज की तपिश में उससे कोई उम्मीद की भी नहीं जा सकती थी। नेपाल जैसा उपद्रव करने के लिए करोड़ों रूपए खर्च कर इसके आका भी सिर पकड़ कर बैठ गए होंगे। कई उपद्रवियों को तो शिक्षा मंत्री तक नाम नहीं पता जिसका इस्तीफा मांग रहे थे। सोशल मीडिया पर कई वीडियो देखने को मिले जहाँ मोदी और योगी तक का पद नहीं बता पाए।
कई लोगों तो यह तक नहीं मालूम कि 'यहाँ आये किस लिए हैं?' यानि अगर किसी वजह से उपद्रव हो गया होता तो अरविन्द केजरीवाल और INDI गठबंधन की बल्ले-बल्ले हो गयी होती। लेकिन विधाता को तो कुछ और ही मंजूर था। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके तो तेज गर्मी की पहले ही भाग खड़ा हुआ था या विरोधियों की तैयारी से ये तो वही जानता है। लेकिन कोई उपद्रव नहीं होने पर इनके आकाओं के अरमानों पर पानी जरूर फिर गया।    

    

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शनिवार (6 जून 2026) को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी इस कथित पार्टी के सदस्यों यानी ‘कॉकरोचों’ को प्रदर्शन के लिए बुलाया था। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने समर्थकों से बड़ी संख्या में पहुँचकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी, लेकिन उनका साथ देने वाले कॉकरोचों की संख्या उनकी उम्मीदों को तोड़ने वाली रही।

अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर युवाओं और छात्रों से बड़ी से बड़ी संख्या में जुटने का आह्वान किया था लेकिन आह्वान का असर केवल कुछ कॉकरोचों पर ही पड़ा। सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोअर्स वाली इस CJP के प्रदर्शन में बमुश्किल कुछ सौ लोग ही पहुँचे। बात सिर्फ इतनी ही नहीं है इसमें शामिल होने वाले कॉकरोचों को देखकर भी साफ समझा जा सकता था कि इनकी मंशा केवल हिंसा फैलाना, सुर्खियाँ बटोरना, सरकार और भारतीय संस्कृति को बदनाम करना था।

कोई कॉकरोच यहाँ हिंदू देवी-देवता का अपमान कर रहा तो कोई अपनी पर्सनल डायरी को संविधान बता रहा। किसी को तिरंगे के सम्मान से कोई लेना-देना नहीं तो कोई डफली बजाते हुए आजादी-आजादी चिल्ला रहा और इनका कहना था कि ये छात्रों के भविष्य के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे, ये कॉकरोच जिनके पास ना तो ज्ञान है और ना ही तमीज।

यह आरोप कोई हमारा मनगढ़ंत नहीं है बल्कि ऑपइंडिया को इसके प्रमाण भी मिले हैं। पहली बात तो ये सामने आई कि प्रोटेस्ट के नाम पर शोर मचाने वाले ये कॉकरोच असल में ना तो कोई छात्र हैं और ना ही पढ़ाई या किसी तरह की परीक्षा से इनका कोई लेना-देना है और इसका प्रमाण इन्होंने खुद ही दे दिया ‘आजादी-आजादी’ के नारे लगाकर।

वायरल वीडियो अब तक आपने भी देख लिए होंगे और अगर नहीं देखें तो ऑपइंडिया के इन वीडियोज को देंखे, जिसमें ये अबर्न नक्सली डफली बजाते हुए ‘आजादी-आजादी’ चिल्ला रहे।

वीडियो में दिख रहे ये लोग चिल्ला रहे, “हम क्या चाहते आजादी, BJP से आजादी, हमारा नारा आजादी, मोदी सुनले आजादी, BJP सुनले आजादी, तुम जेल में डालो आजादी, हम लेके रहेंगे आजादी, मैं भी बोलूँ आजादी, तू भी बोले आजादी, देश बोले आजादी, मोदी तुझसे आजादी, BJP तुझसे आजादी।” अब आप सोचिए कि इसका पेपर लीक से क्या लेना देना है भला?

यह पहली बार नहीं जब ये वामपंथी गुट किसी भी अन्य मुद्दे को ढाल बनाकर सामने आया हो और बाद में असली रंग दिखाया हो। किसान आंदोलन के समय भी किसानों के साथ उनकी लड़ाई में शामिल होने को ढोंग कर के इन वामपंथियों ने एक शांत से धरने को हिंसक बना दिया था।

इसके अलावा साल 2019-20 का समय याद करें तो दिल्ली समेत जगह-जगह CAA-NRC के विरोध में सड़क पर आकर बैठे प्रदर्शनकारियों ने अपने प्रोटेस्ट का रंग बदल दिया था। उन्हीं प्रदर्शनों का नतीजा था कि दिल्ली को हिंदू विरोधी दंगे झेलने पड़े। 40-50 लोगों की निर्ममता से मौत हुई।

मकसद भी नहीं बता पा रहे अभिजीत के कॉकरोच, तिरंगे के अपमान का वीडियो आया सामने

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने अपने समर्थकों से अपील की थी कि वो अपने साथ तिरंगा झंडा, किताबें और फूल लेकर आएँ। उनके कॉकरोचों यानी समर्थकों ने ये बात मानी भी लेकिन शायज आशुतोष उन्हें ये बताना भूल गए कि तिरंगे को हर भारतीय, हर देशभक्त सम्मान की दृष्टि से देखता है।

ऑपइंडिया ने इसकी पुष्टि कर रही ऐसी ही एक घटना को कैप्चर भी किया है, जिसमें प्रदर्शन करने पहुँचे कॉकरोच तिरंगे का अपमान कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि कोई ऐसा व्यक्ति, जिसको अपने देश से प्रेम हो वो ऐसी घटिया हरकत कर सकता है। साफ समझ आ रहा कि ये हरकते भारत को बदनाम करने की वामपंथियों की केवल एक साजिश है।

दूसरी तरफ ऑपइंडिया के रिपोर्टर्स को ग्राउंड पर ऐसा कोई कॉकरोच नहीं मिला, जो यह बता सके कि उनका जुटान यहाँ हुआ किसलिए है। किसी के पास कोई मुद्दा नहीं जो वो बता सकें कि इसलिए वो प्रदर्शन करने आए हैं। कोई पेपर लीक पेपर लीक चिल्ला रहे तो वो उनके साथ मिल जा रहे।

कोई आजादी-आजाजी चिल्ला रहा तो उधर भी उपस्थिति दर्ज कर रहे। इस बैनर से उस बैनर, यहाँ से वहाँ, वहीं जो असल में कॉकरोच करते हैं।

हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ उगला जहर उगलने पहुँच रहे कॉकरोचों के दादा-परदादा

जंतर-मंतर पर पहुँचे एक बुजुर्ग ने ऑपइंडिया के रिपोर्टर से कहा कि ‘पांडव-वांडव’ तो कभी थे ही नहीं, ये सब बेकार बाते हैं। उन्होंने आगे कहा, “राम-वाम सब छोड़ दे, तु वहाँ मत जा, राम मोदी को नहीं मारता, सारे देश को लूट कर खा गया, वो मोदी को नहीं मारता, राम मंदिर के नाम पर कितने रुपए डकार गया, अडानी-अंबानी को नहीं मारता है।”

जब ऑपइंडिया के रिपोर्टर ने पूछा कि इसमें भगवान राम बीच में कहाँ से आ गए तो वो कहते हैं, “तेरे मेरे को डराने के लिए हैं राम तो, उसको नहीं मानते।” जिनको ना तो भारत के इतिहास, संस्कृति और धर्मग्रंथो से कोई लेना-देना नहीं, ना तो इन्हें हिंदू देवी-देवताओं का सम्मान करना आता है, ये लोग पहुँचे हैं कॉकरोचों को समर्थन करने।

कोई डायरी को बता रहा संविधान तो किसी का जवाब- अब्बा-डब्बा-जब्बा

प्रशांत राणा नाम के एक कॉकरोच से ऑपइंडिया के रिपोर्टर ने बात की तो उसने हाथ में ली हुई डायरी को भारत का संविधान बताया। जब रिपोर्टर ने दिखाने को कहा तो प्रशांत ने थोड़ा भाव खाया, लेकिन फिर डायरी खोली और कहा, ‘ये मेरे कुछ आर्टिकल्स हैं।’ जी हाँ यानी कॉकरोचों का अपना एक संविधान भी लिखा जा रहा है। उसने कहा कि ये मेरे लिए संविधान है।

रिपोर्टर ने जब उससे कहा कि भाई दिखाओ तो इस संविधान में क्या है तो कॉकरोच ने कहा- “इतनी पर्सनल चीज नहीं दिखा सकते।” इसके बाद वो लगातार अपने मन का बेतुकी बातें करता रहा जो संभवतः उसके अपने पर्सनल संविधान में लिखी होंगी।

ऑपइंडिया को प्रशांत की तरह ही एक और कॉकरोच मिला। उसने कहा कि वो सिस्टम का विरोध करने वालों का समर्थन कर रहा है। उसने कहा कि एजुकेशन सिस्टम पूरी तरह करप्ट हो चुका है। जब रिपोर्टर ने पूछा कि तो इसका हल क्या है और CJP के पास इसका क्या समाधान है तो उसने ना में सिर हिला दिया कि उसके पास इसका कोई जवाब नहीं है।

मास्क पहने एक कॉकरोच ने बताया कि नीट पेपर लीक हुआ है, इसलिए वो यहाँ आया है, लेकिन और कौन से पेपर कब लीक हुए हैं, इसके बारे में उसे कोई जानकारी नहीं थी। वह लगातार कहता रहा, “नीट का पेपर लीक हुआ है, होते रहते हैं, अब जैसे नीट का पेपर लीक हुआ है, नीट का पेपर लीक हुआ था, नीट का पेपर लीक हो जाएगा फिर।”

अंत में कॉकरोच ने रिपोर्टर से ही पूछ लिया कि वो बताए कौन-कौन से पेपर लीक हुए हैं। रिपोर्टर के हर सवाल में फँसते हुए कॉकरोच में अंत में चेहरा दिखाकर और बेईज्जती कराना सही नहीं समझा और चुप हो गया। जिन्हें किसी विषय की कोई जानकारी नहीं है, यहाँ तक की अपने भविष्य का भी कुछ नहीं पता ये औरों के भविष्य की क्या चिंता करेंगे।

विवादों में ‘कॉकरोचों’ का 6 जून का प्रदर्शन, दिपके ने माना- ‘नहीं ली प्रोटेस्ट की परमिशन’

                                                           प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार - AI)
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 6 जून 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अमेरिका से भारत लौटकर यहाँ प्रदर्शन करने की घोषणा की है।

लेकिन विवाद इस बात को लेकर खड़ा हो गया है कि प्रदर्शन की घोषणा के बावजूद पार्टी ने दिल्ली पुलिस को पहले से लिखित सूचना नहीं दी और न ही अनुमति लेने की प्रक्रिया पूरी की। CJP का कहना है कि जंतर-मंतर एक निश्चित विरोध स्थल है, इसलिए वहाँ प्रदर्शन के लिए अलग से अनुमति की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक वीडियो में समर्थकों से अपील की थी कि वे उनके भारत पहुँचने पर दिल्ली एयरपोर्ट पर जुटें और वहाँ से संसद मार्ग थाने तक मार्च करते हुए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करें।

दिपके ने इसे ‘शांतिपूर्ण’ और ‘संवैधानिक’ विरोध बताया था। हालाँकि इसी घोषणा के साथ यह सवाल भी उठने लगा कि क्या प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है और क्या दिल्ली पुलिस को इसकी पूर्व सूचना दी गई है।

 यहीं से सवाल उठता है कि आखिर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का वास्तविक नियम क्या है? क्या कोई भी संगठन सीधे पहुँचकर धरना या प्रदर्शन शुरू कर सकता है या फिर इसके लिए पहले से पुलिस की मंजूरी जरूरी होती है? इस पूरे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के फैसले और दिल्ली पुलिस के नियमों को समझना जरूरी हो जाता है।

जंतर-मंतर क्यों बना देश का प्रमुख प्रदर्शन स्थल?

दिल्ली का जंतर-मंतर कई दशकों से देशभर के आंदोलनों, धरनों और विरोध प्रदर्शनों का केंद्र रहा है। संसद और केंद्रीय मंत्रालयों के नजदीक होने के कारण विभिन्न संगठन अपनी माँगों को सरकार तक पहुँचाने के लिए यहाँ जुटते रहे हैं।

हालाँकि समय के साथ स्थानीय निवासियों ने शोर, यातायात बाधा और सुरक्षा संबंधी समस्याओं की शिकायतें उठाईं। इसके बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने 2017 में यहाँ प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

जुलाई 2018 में मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत नागरिकों का मौलिक अधिकार है। लेकिन यह अधिकार पूर्ण नहीं है और इस पर सार्वजनिक व्यवस्था, सुरक्षा तथा अन्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

                मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ, जुलाई 2018 के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला

यह मामला तब शुरू हुआ था जब 2017 में मजदूर किसान शक्ति संगठन ने दिल्ली पुलिस द्वारा धारा 144 के तहत लगाए गए प्रतिबंधों और NGT के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें जंतर-मंतर रोड पर प्रदर्शनों पर लगभग पूर्ण रोक लगा दी गई थी। स्थानीय निवासियों ने शोर, ट्रैफिक जाम और अन्य असुविधाओं की शिकायतें की थीं, जिसके बाद यह विवाद अदालत तक पहुँचा था।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। साथ ही यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों के अधिकार और स्थानीय लोगों के जीवन एवं शांति के अधिकार के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। अदालत ने दिल्ली पुलिस को प्रदर्शनों के लिए विस्तृत दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश दिया और यह भी कहा कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें प्रदर्शन से पहले पुलिस को लिखित रूप से सूचित किया जाए।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए क्या प्रक्रिया है?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली पुलिस ने 2018 में जंतर-मंतर और अन्य निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शन के लिए दिशा निर्देश लागू किए।

इन दिशा निर्देशों के अनुसार:

  • प्रदर्शन या सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए पहले से लिखित आवेदन देना होता है।
  • आवेदन नई दिल्ली जिला पुलिस के संबंधित अधिकारी को दिया जाता है।
  • प्रस्तावित कार्यक्रम से कम से कम 7 दिन पहले आवेदन देना आवश्यक होता है।
  • पुलिस, ट्रैफिक विभाग, विशेष शाखा और अन्य एजेंसियाँ सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था के पहलुओं की समीक्षा करती हैं।
  • स्थान की उपलब्धता और सुरक्षा मूल्यांकन के बाद ही अनुमति दी जाती है।
  • एक से अधिक आवेदन होने पर प्राथमिकता पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर तय की जा सकती है।
  • सुरक्षा कारणों, VIP मूवमेंट या अन्य आपात परिस्थितियों में अनुमति बाद में भी रद्द की जा सकती है।
दिल्ली पुलिस लंबे समय से यह कहती रही है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति और पूर्व सूचना आवश्यक है। इसलिए पूर्व अनुमति की व्यवस्था कोई नया नियम नहीं बल्कि कई वर्षों से लागू कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।

अभिजीत दिपके और आम आदमी पार्टी से जुड़ाव

अभिजीत दिपके का नाम पहले भी राजनीतिक अभियानों से जुड़ता रहा है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वह 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) के सोशल मीडिया और डिजिटल प्रचार तंत्र से जुड़े रहे थे।
उन्हें उन लोगों में गिना जाता था जो सोशल मीडिया कंटेंट, मीम्स, वीडियो और डिजिटल कैंपेन तैयार करने में भूमिका निभाते थे। दिपके का नाम AAP की चुनावी वॉर-रूम और सोशल मीडिया समन्वय गतिविधियों से भी जोड़ा जाता रहा है।
इंटरव्यू में उन्होंने युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं तक पहुँचने की रणनीतियों पर भी चर्चा की थी। सोशल मीडिया पर उनके राजनीतिक विचार भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं। यही कारण है कि आलोचकों का कहना है कि दिल्ली में प्रदर्शनों से जुड़े नियमों और अनुमति प्रक्रिया से दिपके पूरी तरह अनजान नहीं हो सकते।
दिलचस्प बात यह भी है कि वर्ष 2020 में AAP की नेता आतिशी समेत अन्य नेताओं ने प्रदर्शन संबंधी अनुमति के मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। उस दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत में दाखिल हलफनामे में 2018 के उन्हीं दिशानिर्देशों का हवाला दिया था, जिनके तहत जंतर-मंतर समेत संवेदनशील स्थानों पर प्रदर्शन के लिए पूर्व लिखित आवेदन आवश्यक बताया गया था।

क्या कॉकरोच जनता पार्टी ने इन नियमों का पालन किया?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी ने 6 जून 2026 के प्रदर्शन की घोषणा तो कर दी लेकिन प्रदर्शन से पहले आवश्यक अनुमति लेने की प्रक्रिया पूरी नहीं की थी।
विवाद तब और बढ़ गया जब बुधवार (3 जून 2026) को पत्रकार अजीत अंजुम को दिए एक इंटरव्यू में अभिजीत दिपके ने स्वयं स्वीकार किया कि उन्होंने प्रदर्शन के लिए पुलिस से अनुमति नहीं ली है। जब उनसे पूछा गया कि क्या आवश्यक अनुमति प्राप्त कर ली गई है, तो उन्होंने सीधे ‘नहीं’ में जवाब दिया।
बातचीत के दौरान जब उन्हें बताया गया कि आयोजकों को आमतौर पर पहले से आवेदन देकर प्रतिभागियों की संख्या, समय और अन्य विवरण उपलब्ध कराने होते हैं, तब दिपके ने कहा कि वह प्रदर्शन वाले दिन ही पुलिस स्टेशन जाकर अनुमति माँगेंगे।
जब उनसे पूछा गया कि पहले से आवेदन क्यों नहीं किया गया, तो उनका जवाब था, “हम अपने तरीके से काम करना चाहते हैं और उसी पर कायम रहेंगे।” एक अन्य सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वह अनुमति मिलने तक पुलिस स्टेशन में इंतजार करेंगे।
इन बयानों के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई कि यदि प्रदर्शन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक बताया जा रहा है, तो स्थापित कानूनी प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया जा रहा।

क्या 6 जून को दिल्ली में दंगे की साज़िश? : ‘एयरपोर्ट से शुरू करेंगे हंगामा, हाथ में लाठी-पेपर स्प्रे लेकर आना’ : कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक सरेआम कर रहे हिंसा भड़काने का प्रयास, बोल रहे- इस बार नेपाल बना देंगे

   दिल्ली का माहौल बिगाड़ने के लिए CJP समर्थक लोगों को उकसा रहा (फोटो साभार : X_@AnkurSingh Video SS
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक 6 जून को प्रदर्शन के नाम पर हिंसा भड़काने की तैयारी में हैं। इसके लिए उन्होंने अभी से कोशिशें शुरू कर दी हैं। सोशल मीडिया पर एक Video वायरल हुई, जिसमें एक CJP समर्थक हर्षित उकसाऊ बातें करता सुनाई पड़ता है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनका मकसद जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का नहीं बल्कि माहौल बिगाड़ने का है।

Video में ये समर्थक साफ तौर पर धमकी देता दिख रहा है कि अगर अभिजीत डीपके को इमिग्रेशन पर रोका गया, तो एयरपोर्ट से ही भारी हंगामा खड़ा किया जाएगा… इस बार ‘आर-पार’ की लड़ाई होगी। Video में खुलेआम कहा गया कि ‘अब बहुत सह लिया, इस बार दिल्ली को नेपाल बना देंगे… अपने साथ लाठियाँ और पेपर स्प्रे लेकर आना।

गौरतलब है कि 6 जून को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन के लिए कॉकरोच जनता पार्टी ने कहीं किसी से कोई परमिशन नहीं ली है। उलटा उसके प्रवक्ता इस बात पर गर्व कर रहे हैं कि वो इसी सिस्टम से लड़ने के लिए तो प्रदर्शन कर रहे हैं, तो परमिशन क्यों लेंगे?

कहने को तो ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) इसे एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन बता रहा है, लेकिन अंदरूनी हकीकत कुछ और ही है। Video में साफ सुना जा सकता है कि लोगों से सुरक्षा के बहाने लाठियाँ, डंडे और पेपर स्प्रे खरीदकर लाने को कहा जा रहा है ताकि पुलिस का सामना किया जा सके।

दावा किया जा रहा है कि इस बड़ी साजिश में वामपंथी छात्र संगठन AISA और JNU गैंग भी शामिल हो रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि एक बार फिर दिल्ली को हिंसा की आग में झोंकने के लिए पूरी प्लानिंग कर ली गई है। प्रशासन को इस भड़काऊ Video पर तुरंत सख्त एक्शन लेना चाहिए।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के पीछे दंगे वाली पुरानी साजिश

सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने माना है कि 6 जून के प्रदर्शन के लिए कोई परमिशन नहीं ली गई है। अभिजीत फिलहाल अमेरिका में पढ़ाई कर रहा है। वह दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपित उमर खालिद का पुराना समर्थक है। CJP के प्रवक्ता सौरभ दास भी उमर खालिद का खुलकर साथ देते रहे हैं।

साल 2020 में दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगे अचानक नहीं हुए थे। वह उमर खालिद और उसके वामपंथी-इस्लामी ग्रुप की एक सोची-समझी साजिश थी। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी है। तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के समय जानबूझकर हिंसा भड़काई गई थी।

अब यह संगठन एक बार फिर दिल्ली में वैसा ही माहौल बनाना चाहता है। Video में ‘नेपाल’ का जिक्र होना इसका बड़ा सबूत है। नेपाल में पिछले साल बेहद हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे। ये लोग अब भारत की राजधानी में भी उसी हिंसा और अराजकता को दोहराना चाहते हैं।