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मोदी के आवास के बाहर हंगामा कराने के लिए राहुल-प्रियंका गाँधी ने अपने ही सांसदों से बोला झूठ? रिपोर्ट में सामने आया कैसे बरगलाए गए MP

                               राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा को पुलिस ने हिरासत में लिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग के बाहर 21 जुलाई 2026 (मंगलवार) को उस समय बड़ा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला, जब कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी वाड्रा और पार्टी के कई सांसदों ने अचानक धरना शुरू कर दिया। राहुल गाँधी ने कहा कि उनका विरोध NEET पेपर लीक और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ है।

इससे पहले CJP के प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च निकालने निकले थे। इस दौरान भीड़ ने हिंसक रूप ले लिया, पुलिसकर्मियों पर हमला किया और संसद परिसर की ओर बढ़ने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आँसू गैस के गोले छोड़े। बाद में PM आवास के बाहर धरना देने वाले राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी वाड्रा और कई कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

प्रधानमंत्री मोदी के आवास के बाहर राहुल गाँधी और कांग्रेस नेताओं का धरना सुरक्षा में बड़ी चूक माना गया। इसी वजह से पुलिस ने कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया। हालाँकि, अब सामने आई रिपोर्ट में राहुल गाँधी की साजिश को लेकर गंभीर दावे सामने आए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राहुल गाँधी ने अपने ही नेताओं से झूठ बोलकर उन्हें इस सुरक्षा उल्लंघन में शामिल होने के लिए तैयार किया।

राहुल गाँधी ने अपने ही नेताओं से कैसे धरने के लिए बोला झूठ?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गाँधी के इस धरने की योजना आखिरी समय तक पूरी तरह गुप्त रखी गई थी। कांग्रेस सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार और एसपीजी (SPG) को इसकी भनक न लगे, इसलिए राहुल गाँधी ने अपने लगभग 25 सांसदों को यह तक नहीं बताया था कि वे प्रधानमंत्री के आवास के बाहर धरना देने जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा झूठ राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल ने मिलकर गढ़ा था।

रिपोर्ट के अनुसार, सांसदों से कहा गया था कि उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन की शुभकामनाएँ देने उनके आवास पर जाना है। मल्लिकार्जुन खरगे का आवास 10 राजाजी मार्ग पर है, जो पीएम मोदी के 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास से लगभग 500 मीटर की दूरी पर है।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, एक कांग्रेस सांसद ने बताया, “जन्मदिन का कार्यक्रम खत्म होने के बाद हमें कहा गया कि बिना कोई सवाल पूछे राहुल गांधी के काफिले के पीछे चलो। हमने ऐसा ही किया। जब हम 7 लोक कल्याण मार्ग पहुँचे, तब हमें बताया गया कि अब हमें यहीं बैठना है।”

सरकार बातचीत के लिए तैयार हुई तो राहुल गाँधी ने बदल दीं अपनी माँगें

धरने के दौरान सरकार ने राहुल गाँधी से बातचीत करने का फैसला किया। यह बातचीत इसलिए शुरू की गई क्योंकि प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने से आम लोगों को भारी असुविधा हो रही थी और यह सुरक्षा के लिहाज से भी खतरा बन गया था। हालाँकि, सरकार के बातचीत के लिए आगे आने के बाद भी राहुल गाँधी ने अपना रुख बदल लिया।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस के धरने के दौरान राहुल गांधी ने अपनी पहली माँग मान लिए जाने के बाद एक नई माँग जोड़ दी।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह करीब एक घंटे बाद प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे और राहुल गाँधी से बातचीत की। इसके बावजूद कांग्रेस सांसदों ने बाद में कहा कि बातचीत से कोई समाधान नहीं निकला और सरकार उनकी माँगों को पूरा करने में विफल रही।
जितेंद्र सिंह ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्हें और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए भेजा गया था क्योंकि प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा जैसे वरिष्ठ नेता कर रहे थे।
जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि बातचीत के दौरान राहुल गाँधी ने उनसे कहा था कि यदि सरकार संसद में NEET विवाद, कथित पेपर लीक और देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर चर्चा कराने के लिए तैयार हो जाए तो धरना समाप्त कर दिया जाएगा।
जितेंद्र सिंह के अनुसार, उन्होंने तुरंत सरकार के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत की और वापस आकर राहुल गाँधी को बताया कि सरकार संसद में NEET और परीक्षा विवाद से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा कराने के लिए तैयार है।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसके बाद धरना समाप्त करने के बजाय राहुल गाँधी ने एक नई शर्त रख दी। उनके अनुसार, राहुल गाँधी ने कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे तब तक धरना खत्म नहीं होगा।
जितेंद्र सिंह ने कहा, “सरकार द्वारा संसद में चर्चा कराने पर सहमति देने की जानकारी मिलने के बाद राहुल गाँधी ने कहा कि केवल इतना काफी नहीं है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा भी चाहिए।”
मंत्री ने आगे दावा किया कि उन्होंने राहुल गाँधी को याद दिलाया कि कुछ मिनट पहले तक उनकी केवल एक ही माँग थी कि संसद में चर्चा हो। इस पर राहुल गाँधी ने जवाब दिया कि अब उनकी माँगें बदल गई हैं। बाद में राहुल गाँधी ने कहा कि अपनी माँगें बदलना उनका अधिकार है।

अब क्या हैं राहुल गाँधी की माँगें

इसके बाद जब राहुल गाँधी को हिरासत में लिया गया तो उन्होंने अपनी माँगों की सूची और बढ़ा दी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी नई माँगों में शामिल हैं-
  • गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
  • सोमवार को छात्रों पर कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेना।
  • सोमवार की पुलिस कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री से माफी।
  • संसद में इस पूरे मुद्दे पर चर्चा।
  • जल्द से जल्द शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार।
यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी पर हिंसक तत्वों का समर्थन करने के आरोप लगे हैं। वर्ष 2020 के दिल्ली के हिंदू-विरोधी दंगों के दौरान भी राहुल गाँधी ने लगातार दंगाइयों का समर्थन किया था और सोनिया गाँधी के साथ मिलकर हिंसा भड़काने के आरोप लगे थे। इतना ही नहीं ऑपइंडिया की रिपोर्ट में खुलासा किया गया था कि राहुल गाँधी के करीबी सहयोगी सचिन राव उस व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा थे जहाँ इन दंगों की योजना बनाई गई थी।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को अस्पताल ले गई दिल्ली पुलिस; बड़ा खुलासा : देश, हिन्दुत्व और मोदी विरोधी ताकतों की अराजकता फैलाने की खतरनाक साजिश, हटाए गए दिल्ली के पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा


दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को शनिवार (18 जुलाई 2026) को दिल्ली पुलिस ने जबरन अस्पताल ले गई है। यह कार्रवाई हाई कोर्ट के आदेश और उनकी लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति और मेडिकल निगरानी सुनिश्चित करने के लिए की गई। अरविन्द केजरीवाल गैंग के मंसूबों पर पानी फिर गया।  

पुलिस के अस्पताल ले जाने के दौरान प्रदर्शन स्थल पर कुछ समय के लिए तनाव का माहौल भी देखने को मिला। दिल्ली पुलिस का कहना है कि कोर्ट के आदेशों और मेडिकल एक्सपर्ट्स की सलाह के अनुसार, सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें जरूरी मेडिकल देखभाल के लिए सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट किया गया है।

सोनम वांगचुक 28 जून 2026 से नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत विभिन्न माँगों को लेकर धरने और भूख हड़ताल पर बैठे थे। दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में उनकी सेहत को देखते हुए नियमित चिकित्सकीय जाँच और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि किसी भी नागरिक के जीवन की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। शनिवार (18 जुलाई 2026) की सुबह पुलिस की टीम जंतर-मंतर पहुँची और मेडिकल सहायता के लिए वांगचुक को अस्पताल ले गई। इस दौरान वहाँ मौजूद छात्रों और समर्थकों ने उन्हें रोकने की कोशिश की।

हालाँकि पुलिस उन्हें अपने साथ लेकर रवाना हो गई। इसके बाद जंतर-मंतर पर मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों को भी वहाँ से हटाया जाने लगा। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से आरोप लगाया गया कि पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को उनके ठहरने के स्थान पर रोककर हिरासत में लिया गया।

अभिजीत दीपके ने दावा किया कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। वहीं पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और कई लोगों को हटाया गया। हालांकि इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

वांगचुक ने शुक्रवार (17 जुलाई 2026) की रात एक वीडियो संदेश जारी कर कहा था कि उनके शरीर का करीब 20 प्रतिशत वजन कम हो चुका है. उन्होंने बताया कि शरीर की मांसपेशियाँ भी प्रभावित हो चुकी हैं, लेकिन उनका हौसला और मानसिक स्थिति अब भी मजबूत है।

वीडियो संदेश में वांगचुक ने देशवासियों से 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की थी।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे मशहूर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को 20 दिन पूरे हो चुके हैं। 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक नीट (NEET) जैसी बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। अभिजीत दीपके द्वारा संचालित आंदोलन में वांगचुक जब भूख हड़ताल पर बैठे तो उन्हें लगा कि वो महात्मा गांधी और समाज सेवी अन्ना हजारे की तरह एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर देंगे, लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे भीड़ गायब होती चली गई। इससे ना सिर्फ वांगचुक की हताशा बढ़ने लगी, बल्कि उन्हें मोहरा बनाने वाले देश, हिन्दुत्व और मोदी विरोधी ताकतों की बेचैनी भी बढ़ने लगी। अब ये ताकतें संसद के मानसून सत्र के दौरान अराजकता पैदा कर दिल्ली सहित पूरे देश का माहौल खराब करना चाहती हैं। इसलिए कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ आंदोलन का आह्वान किया है। वहीं खुफिया एजेंसियों से मिली गोपनीय रिपोर्ट के बाद केंद्र की मोदी सरकार भी सतर्क हो गई है।

क्यों हटाए गए दिल्ली के पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा? 
दिल्ली में कानून व्यवस्था के स्तर पर शुक्रवार 17 जुलाई, 2026 को बड़ा बदलाव हुआ। सतीश गोलचा को दिल्ली के पुलिस कमिश्नर के पद से हटा दिया गया। सतीश की जगह वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनुराग कुमार को दिल्ली पुलिस का नया कमिश्नर नियुक्त किया गया है। उन्होंने चंद घंटों में पदभार संभाल लिया। हैरानी की बात यह है कि सतीश गोलचा का कार्यकाल अभी खत्म नहीं हुआ था। करीब 11 माह पहले गोलचा को पद से क्यों हटाया गया इसको लेकर तरह-तरह की चर्चा की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, यह नियुक्ति दिल्ली की सुरक्षा स्थिति और आने वाली चुनौतियों को देखते हुए की गई है। साथ ही राजधानी में खुफिया जानकारी पर आधारित पुलिसिंग को मजबूत करने की जरूरत को भी ध्यान में रखा गया है। अनुराग कुमार लंबे समय से इंटेलिजेंस ब्यूरो में काम कर रहे थे और उन्होंने अपने कार्यकाल में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। उनका खुफिया एजेंसी में काम करने का अनुभव इस काम में मदद करेगा।

संसद के मानसून सत्र को बाधित करने की बड़ी साजिश
अभिजीत दीपके द्वारा संचालित आंदोलन की शुरुआत से ही बातें कही जा रही थीं कि सोनम वांगचुक तो सिर्फ मोहरा है। असली खिलाड़ी तो डीप स्टेट से जुड़ी वो ताकतें हैं, जो देश के अंदर और बाहर से इस फर्जी आंदोलन के लिए साजिशें रच रही हैं। आंदोलन की हवा निकलती देख दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी 16 जुलाई,2026 को वांगचुक से मिलने जंतर-मंतर पहुंच गए। इस दौरान सोनम वांगचुक और अरविंद केजरीवाल के बीच जो बातचीत हुई, वो एक बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रही है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया में एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें 0.25 सेकंड से लेकर 0.46 सेकंड तक उनकी बातचीत सुनी जा सकती है। 

केजरीवाल और वांगचुक के बीच बातचीत
वांगचुक – 28 को सफल बनाएंगे।
केजरीवाल – 28 को,
वांगचुक – सफल बनाए।
केजरीवाल – हां, सफल बनाएंगे।
वांगचुक – सफल बनाकर छोड़ूंगा नहीं तो भूत बन जाऊंगा।
केजरीवाल – आपको कुछ नहीं होगा। आपको कुछ नहीं होने देंगे।
वांगचुक – 20 को सफल बनाएंगे।
केजरीवाल – आपने पूरे देश को जगा दिया है।

20 तारीख को दिल्ली में अराजकता पैदा करने की होगी कोशिश
अरविंद केजरीवाल ने कॉकरोच जनता पार्टी के मंच से कहा कि हमें सोनम वांगचुक जैसा शिक्षा मंत्री भी चाहिए और उसके क्रांतिकारी कदम भी चाहिए। 20 तारीख को देश के कोने कोने में जो लोग सुन रहे हैं। जो लोग सोशल मीडिया में देखेंगे, जो लोग मीडिया के जरिए देखेंगे, सबको अपील करना चाहता हूं। ज्यादा से ज्याद संख्या में यहां पर आएंगे। 20 तारीख के आंदोलन को, इनके कॉल को, पार्लियामेंट तक की जो यात्रा है उसको सफल बनाना है। ज्यादा से ज्यादा संख्या में आना है। गौरतलब है कि 20 जुलाई, 2026 से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है, जो 13 जुलाई तक चलेगा।

वांगचुक को पंजाब का शिक्षा मंत्री क्यों नहीं बना रहे केजरीवाल ? 
सोनम वांगचुक से मुलाकात के दौरान अरविंद केजरीवाल ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार अहंकार में डूबी हुई है। मैं सरकार से कहना चाहता हूं कि युवाओं की आवाज सुन लीजिए, नहीं तो यही युवा 2029 में आपको सत्ता से बाहर कर देंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर असल में शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाना चाहते तो सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं प्रधानमंत्री ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें डर होगा कि सोनम वांगचुक शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव कर देंगे। अगर अरविंद केजरीवाल को सोनम वांगचुक पर इतना भरोसा है तो उनके पास वांगचुक को पंजाब का शिक्षा मंत्री बनाने का सुनहरा मौका है। पंजाब में भगवंत मान सरकार की लोकप्रियता खत्म हो चुकी है। अगले साल 2027 की शुरुआत में वहां चुनाव होने वाला है, ऐसे में केजरीवाल वांगचुक को पंजाब का शिक्षा मंत्री बनाकर अपनी सरकार की साख बचा सकते हैं, लेकिन वो ऐसा नहीं करेंगे।

वांगचुक को अन्ना हजारे की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं केजरीवाल 
दरअसल, अरविंद केजरीवाल का मकसद अन्ना हजारे की तरह वांगचुक को मोदी सरकार के खिलाफ इस्तेमाल करना है। वांगचुक से मुलाकात के दौरान केजरीवाल के अंदर की बात सामने आ गई। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इतिहास खुद को दोहराता है। इसी जंतर-मंतर पर 4 अप्रैल 2011 को अन्ना हजारे आंदोलन पर बैठे थे और तीन साल बाद उस समय की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। केजरीवाल चाहते हैं कि वांगचुक को मोहरा बनाकर वो फिर से दिल्ली में खिसकी हुई अपनी सियासी जमीन को हासिल कर सकते हैं। केजरीवाल के इस सियासी मकसद को पूरा करने के लिए इससे पहले आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना, मनीष सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज भी जंतर-मंतर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके है।

 

अभिजीत दीपके और उसके दोस्त ने खोली केजरीवाल की पोल


अभिजीत दीपके के दोस्त ने खुलासा किया कि हम दोनों एक-दूसरे को करीब सात साल से जानते हैं। हम दोनों अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया टीम से जुड़े हुए थे। 2019-20 में अभिजीत दीपके आम आदमी पार्टी का ट्वीटर हैंडल देखता था। मैं व्हाट्सएप टीम देखता था। तब से हम लोग एक-दूसरे से परिचित थे। अभिजीत दीपके के दोस्त ने आगे कहा कि हैरानी की बात है कि कॉकरोच वाले बयान के एक हफ्ते पहले मेरी और दीपके की बात हुई थी, क्योंकि दीपके जॉब ढूंढ़ रहा था।  

क्या 6 जून को दिल्ली में दंगे की साज़िश? : ‘एयरपोर्ट से शुरू करेंगे हंगामा, हाथ में लाठी-पेपर स्प्रे लेकर आना’ : कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक सरेआम कर रहे हिंसा भड़काने का प्रयास, बोल रहे- इस बार नेपाल बना देंगे

   दिल्ली का माहौल बिगाड़ने के लिए CJP समर्थक लोगों को उकसा रहा (फोटो साभार : X_@AnkurSingh Video SS
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक 6 जून को प्रदर्शन के नाम पर हिंसा भड़काने की तैयारी में हैं। इसके लिए उन्होंने अभी से कोशिशें शुरू कर दी हैं। सोशल मीडिया पर एक Video वायरल हुई, जिसमें एक CJP समर्थक हर्षित उकसाऊ बातें करता सुनाई पड़ता है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनका मकसद जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का नहीं बल्कि माहौल बिगाड़ने का है।

Video में ये समर्थक साफ तौर पर धमकी देता दिख रहा है कि अगर अभिजीत डीपके को इमिग्रेशन पर रोका गया, तो एयरपोर्ट से ही भारी हंगामा खड़ा किया जाएगा… इस बार ‘आर-पार’ की लड़ाई होगी। Video में खुलेआम कहा गया कि ‘अब बहुत सह लिया, इस बार दिल्ली को नेपाल बना देंगे… अपने साथ लाठियाँ और पेपर स्प्रे लेकर आना।

गौरतलब है कि 6 जून को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन के लिए कॉकरोच जनता पार्टी ने कहीं किसी से कोई परमिशन नहीं ली है। उलटा उसके प्रवक्ता इस बात पर गर्व कर रहे हैं कि वो इसी सिस्टम से लड़ने के लिए तो प्रदर्शन कर रहे हैं, तो परमिशन क्यों लेंगे?

कहने को तो ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) इसे एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन बता रहा है, लेकिन अंदरूनी हकीकत कुछ और ही है। Video में साफ सुना जा सकता है कि लोगों से सुरक्षा के बहाने लाठियाँ, डंडे और पेपर स्प्रे खरीदकर लाने को कहा जा रहा है ताकि पुलिस का सामना किया जा सके।

दावा किया जा रहा है कि इस बड़ी साजिश में वामपंथी छात्र संगठन AISA और JNU गैंग भी शामिल हो रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि एक बार फिर दिल्ली को हिंसा की आग में झोंकने के लिए पूरी प्लानिंग कर ली गई है। प्रशासन को इस भड़काऊ Video पर तुरंत सख्त एक्शन लेना चाहिए।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के पीछे दंगे वाली पुरानी साजिश

सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने माना है कि 6 जून के प्रदर्शन के लिए कोई परमिशन नहीं ली गई है। अभिजीत फिलहाल अमेरिका में पढ़ाई कर रहा है। वह दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपित उमर खालिद का पुराना समर्थक है। CJP के प्रवक्ता सौरभ दास भी उमर खालिद का खुलकर साथ देते रहे हैं।

साल 2020 में दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगे अचानक नहीं हुए थे। वह उमर खालिद और उसके वामपंथी-इस्लामी ग्रुप की एक सोची-समझी साजिश थी। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी है। तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के समय जानबूझकर हिंसा भड़काई गई थी।

अब यह संगठन एक बार फिर दिल्ली में वैसा ही माहौल बनाना चाहता है। Video में ‘नेपाल’ का जिक्र होना इसका बड़ा सबूत है। नेपाल में पिछले साल बेहद हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे। ये लोग अब भारत की राजधानी में भी उसी हिंसा और अराजकता को दोहराना चाहते हैं।