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बागेश्वर धाम सरकार को धमकियाँ दे रहा मुस्लिम से निहंग सिख बना तूफान सिंह: मर गई थी अम्मी, गुरुद्वारे में छोड़ गया था अब्बा

तूफ़ान सिंह (बाएँ) जिसने बागेश्वर धाम सरकार को धमकियाँ दी (साभार: Toofan Singh/IB & India TV)
मुस्लिम से निहंग सिख बना तूफ़ान सिंह उर्फ़ हरमनदीप सिंह बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को धमकियाँ दे रहा है। वह इससे सम्बंधित वीडियो इन्स्टाग्राम पर डाल रहा है। तूफ़ान सिंह ने 1 नवम्बर 2023 को इन्स्टाग्राम पर एक वीडियो डाली थी, जिसमें उसने बागेश्वर धाम सरकार को धमकाया था। धमकी देने से पहले उसने धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की एक वीडियो क्लिप भी अपने वीडियो में चलाई थी। इस वीडियो में वह हिन्दुओं के लिए समस्याएँ खड़ी करने वालों को चेतावनी देते हुए दिखते हैं।

तूफ़ान सिंह इस वीडियो में कहता है, “वो (पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री) सिखों को धमका रहा है। मेरा वीडियो उसे भेज देना, मैं उसे बताना चाहता हूँ कि बेटे तुम किसे धमका रहे हो? वो तुम्हारे जैसे 20 आदमियों पर रोज चलते हैं। हम किसी को भड़काते नहीं लेकिन जब समय आता है तो अपने और दूसरों के धर्म के लिए सर कटा देते हैं। क्या तुम हमें धमका रहे हो? जाकर अपने बाप को धमकाओ। ये सब कहने के बाद पंजाब में घुस कर दिखाओ। हम तुम्हें पीटेंगे और सिखाएँगे कि कैसे धमकी दी जाती है। हम धमकाते नहीं हम एक्शन लेते हैं।”  

तूफ़ान सिंह ने पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की जो क्लिप अपने वीडियो में चलाई है, उसमें वह सिखों नहीं बल्कि पंजाब में धर्मांतरण करवाने वाली ईसाई मिशनरियों पर बात कर रहे थे। वह इस वीडियो में कहते हुए दिखते हैं, “मेरा विरोध करने वालों पहले मुझे कभी पढ़ो, मुझे समझो, मुझे सुनो। हम तुम्हारे खिलाफ नहीं है, लेकिन तुम हमारे सनातन को छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं। आप बीज मत बोइए, फल आपको नहीं काटना पड़ेगा। मैं पंजाब सरकार से हाथ जोड़ के प्रार्थना करता हूँ कि इस व्यास गद्दी की बात सुनते हुए कड़ा धर्मांतरण कानून लाएँ।”    

साल 2023 के अक्टूबर में पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री पंजाब पहुँचे थे और उन्होंने यहाँ तेजी से चल रहे ईसाई धर्मांतरण पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि धर्मान्तरण करने वालों को गुरुद्वारों और मंदिरों में घुस कर हिन्दुओं को नहीं बरगलाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि वह हालेलुइया चिल्लाने वालों को हिन्दुओं को धर्मान्तरित नहीं करने देंगे।

इसको लेकर उनके खिलाफ एक ईसाई समूह ने शिकायत भी दर्ज करवाई थी। कुल मिलाकर मामला यह है कि तूफ़ान सिंह ने जिस वीडियो के आधार पर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को धमकी दी, दरअसल उसमें कथा सुनाने के दौरान सिखों नहीं बल्कि ईसाई मिशनरियों का विरोध किया था। यहाँ यह भी प्रश्न उठता है कि आखिर तूफ़ान सिंह है कौन?

तूफ़ान सिंह: पहले मुस्लिम, फिर निहंग और कट्टरपंथी

जानकारी के अनुसार, तूफ़ान सिंह का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। उसकी अम्मी की मौत उसके जन्म के समय हो गई थी। उसके अब्बा उसे गुरुद्वारे में छोड़ गए थे। वह यहीं रह कर पला बढ़ा है और बड़े होने पर उसने सिख धर्म अपना लिया। उसने यह जानकारी खुद एक वीडियो में दी थी।
तूफ़ान सिंह केवल इसी कारण से विवादों में नहीं है कि उसने पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को धमकी दी है। वह पहले भी सोशल मीडिया पर खालिस्तान, अमृतपाल सिंह और जरनैल सिंह भिंडरावाले का समर्थन करते हुए देखा जा चुका है।
फरवरी 2023 में सामने आए एक वीडियो में वह पुलिस वालों से छीनी हुई दंगा रोधी जैकेट पहने भी नजर आया था। उसने इस वीडियो में पुलिस वालों को ‘भइये’ कह कर संबोधित किया। ‘भइये’ पंजाब में हिंदी भाषी राज्यों से आए मजदूरों के लिए अपमानजनक तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। जिस विरोध प्रदर्शन में वह दिखा था, उसमें 33 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इसके पश्चात उसका नाम और फोटो पुलिस द्वारा जारी की गई वॉन्टेड लिस्ट में भी था।
विरोध-प्रदर्शन करने वाले लोग जेलों में बंद कुछ सिखों की रिहाई की माँग कर रहे थे। इनमें पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे भी थे। पुलिस ने जब इन प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की थी, इन्होंने पुलिस पर हमला बोल दिया था।
तूफ़ान सिंह के कई अन्य वीडियो भी सामने आए हैं। अपने इन्स्टाग्राम अकाउंट पर डाले गए एक वीडियो में वह एक पिस्टल से फायर करते हुए दिखता है। दूसरे पोस्ट में वह भिंडरावाले की फोटो वाले टीशर्ट पहने हुए है।
एक अन्य वीडियो में वह दावा करता है कि वह पंजाब की सरकार से लड़ रहा है, जो सिखों का दमन कर रही है और बंदी सिखों को नहीं छोड़ रही। गौरतलब है कि कट्टर खालिस्तानी लोग सरकार से लड़ने का बहाना लेकर हिंसात्मक गतिविधियाँ करते रहे हैं। एक अन्य वीडियो में वह खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह का समर्थन करता है, जहाँ वह बताता है कि अमृतपाल दुबई से सिखों का कल्याण करने के लिए वापस आया है।
तूफ़ान सिंह सोशल मीडिया का उपयोग पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री और सरकार के खिलाफ बयानबाजी के लिए कर रहा है। ऐसे अन्य भी कई सोशल मीडिया इन्फ़्लुएन्सर हैं, जो यही करके समाज में घृणा फैला रहे हैं। तूफ़ान सिंह का छोटी उम्र में कट्टरपंथी बन जाना इसका सबूत है।

‘तहजीब सीखो… सारी वकालत बंद हो जाएगी’: बागेश्वर बाबा की कथा रुकवाने हाईकोर्ट पहुंचे वकील को जज ने दी जेल की धमकी

बिना अध्ययन याचिका लेकर पहुँच गया वकील, जज ने सुनाई खरी-खरी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने सोमवार (22 मई, 2023) को प्रदेश में बागेश्वर धाम के धार्मिक आयोजन को रोकने के लिए दायर हुई दूसरी जनहित याचिका को भी खारिज कर दिया। यह आयोजन इसी माह 23 मई और 24 मई को जिला बालाघाट के गाँव लिंगा स्थित रानी दुर्गावती महाविद्यालय मैदान में होना प्रस्तावित है। यह याचिका एक वकील द्वारा कथित आदिवासी संगठन की तरफ से लगाई थी, जिसमें आयोजन से उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचने का आरोप था।

याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान गलत ढंग से बहस की जिस पर कोर्ट ने उसे चेतावनी भी दी।

इस याचिका पर हुई बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में याचिकाकर्ता के वकील ने धीरेन्द्र शास्त्री की कथा आदिवासियों के धर्मस्थल बड़ा देव भगवान के बजाय कहीं और करवाने की माँग की। इस माँग पर जस्टिस विवेक अग्रवाल ने सवाल किया कि जहाँ अभी कथा होनी है वहाँ किस बात से आदिवासी लोगों की भावनाएँ आहत होंगी और वहाँ की मान्यताएँ क्या हैं? कोर्ट के इस सवाल पर याचिकाकर्ता के वकील कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

इस दौरान उन्होंने संविधान का हवाला दिया और जज पर अपनी बात न सुनने का आरोप लगा दिया। वकील ने कहा, “ये संविधान में प्रावधान हैं। वही तो बता रहा हूँ। आप समझने को तैयार नहीं हैं।"

वकील के जवाब पर जस्टिस विवेक ने उन्हें ठीक से बात करने के लिए कहा। हालाँकि, इसके बाद भी वकील ने कोर्ट में जज से कहा, “आप सुनने को तैयार नहीं हैं। कुछ भी बोले जा रहे हैं।” वकील के इन शब्दों पर जज ने उन्हें अवमानना का नोटिस जारी करने के आदेश दिए। जस्टिस विवेक ने कहा, “आपको हाईकोर्ट में बहस करने का तरीका नहीं मालूम है। अपना जवाब आप नोटिस में दीजिएगा।” जज ने आगे से गलत बहस करने पर वकील को जेल भेजने की भी चेतावनी दी।

इस वीडियो में आगे जस्टिस विवेक ने वकील से ‘सर्व आदिवासी समाज’ के बारे में पूछते हुए सवाल किया कि उन्हें बहस के लिए किसने अधिकृत किया। साथ ही कहा, “ध्यान रहे। जरा सी भी उल्टी-सीधी बहस की तो यहीं से जेल भेजूँगा। वकालत ख़त्म हो जाएगी। तहजीब से बात करना सीखो। बदतमीजी करना भूल जाओगे सारी। तुम लोगों ने ये सोच लिया है कि बदतमीजी करके अपने आप के लिए बहुत बड़ी TRP जमा कर लोगे? ये भूल जाते हो कि जिस दिन हमने जेल भेज दिया उस दिन सारी वकालत बंद हो जाएगी। तुम लोगों को सिखा कर भेजा जाता है कि बदतमीजी करो।”

जज ने वकील से माफ़ी माँगने के लिए भी कहा। एक सवाल के सवाब में वकील ने खुद के हाईकोर्ट में साल 2007 से प्रैक्टिस किए जाने की बात कही। याचिकाकर्ता के नाम के तौर पर हेमलता दुर्वे और कर्नल हरनाम का नाम था। याचिकाकर्ता समूह सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष का नाम के तौर पर सादे कागज में मंशाराम मरावी दर्ज था। जस्टिस विवेक ने इस संगठन के रजिस्ट्रेशन और लेटर हेड आदि के बारे में पूछा तो वकील ने रजिस्ट्रेशन होने पर कोर्ट में न लगाने की जानकारी दी। इस जवाब पर जस्टिस विवेक ने टिप्पणी करते हुए ऐसी याचिका को ‘स्पॉन्सर पेटिशन’ कहा।

आखिरकार हाईकोर्ट ने यह याचिका ख़ारिज कर दी। जस्टिस विवेक ने वकील से रजिस्ट्रेशन लगा कर केस फिर से फाइल करने की सलाह दी। साथ ही अंत में कहा, “पक्षकार को बताइएगा कि हमारी गर्मी दिखाने की वजह से कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया।” अपने आदेश में जस्टिस विवेक अग्रवाल ने इस बात का भी जिक्र किया कि तथाकथित ‘सर्व आदिवासी समाज’ के वकील ने सवालों के जवाब देने के बजाय बेवजह की बहस की। आदेश के मुताबिक, अधूरे कागजातों के साथ पेश हुआ याचिकाकर्ता ये साबित नहीं कर पाया कि प्रस्तावित कथा से आदिवासी समाज की भावनाएँ कैसे आहत होंगी।

खास बात ये रही कि यह याचिका दायर करने वाले वकील को इसी मामले में जस्टिस विवेक अग्रवाल द्वारा 18 मई को दिए गए आदेश की जानकारी नहीं थी। तब जस्टिस विवेक ने धीरेन्द्र शास्त्री के कार्यक्रम को रोकने की याचिका ख़ारिज कर दी थी।

18 मई को ख़ारिज हुई थी पहली याचिका

गौरतलब है कि धीरेन्द्र शास्त्री के 23-24 मई वाले इसी कार्यक्रम को रद्द करवाने संबंधी एक याचिका 18 मई को जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच ने ख़ारिज कर दी थी। तब दिवासी विकास परिषद के दिनेश कुमार ध्रुव की ओर से पेश हुए वकील प्रह्लाद चौधरी ने कथा से आदिवासी क्षेत्रों के प्रभावित होने, आदिवासियों की मर्जी के विरुद्ध आयोजन होने, ग्रामसभा की अनुमति न होने और साल 2023 विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने जैसी दलीलें दी थीं। एडवोकेट चौधरी ने धीरेन्द्र शास्त्री पर धार्मिक वैमनस्यता फैलाने का भी आरोप लगाया था।
इन दलीलों के जवाब में जस्टिस विवेक अग्रवाल ने आपत्ति होने पर किसी संगठन की बजाय सीधे ग्रामसभा को कोर्ट आने की बात कही थी। आयोजन के लिए ग्रामसभा की अनुमति की जरूरत न होने की जानकारी देते हुए उन्होंने याचिका को प्रायोजित बताया था। साथ ही जस्टिस विवेक ने बताया था कि इस बात के भी सबूत नहीं हैं कि कथा से आदिवासियों पर असर पड़ेगा। कानून-व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी उन्होंने राज्य सरकार की बताई थी।
गौरतलब है कि हिन्दू धर्म को बढ़ावा देने वाले वीडियो के वायरल होने के बाद से बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र शास्त्री को फायरब्रांड कथावाचक कहा जाने लगा है। अभी कुछ समय पहले ही बिहार सरकार द्वारा उनके एक कार्यक्रम को रोकने का प्रयास किया गया था। खुद पर हो रहे इन हमलों पर टिप्पणी करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने उस हाथी का उदाहरण दिया जिसके गाँव में जाने पर कई लोग उसे केले, पूड़ी और तरह-तरह के पकवान खिलाते कर गणेश मानकर उसकी पूजा करते हैं तो दूसरी तरफ आवारा कुत्ते भौंकने लगते हैं।
बकौल धीरेन्द्र शास्त्री, अगर हाथी कुत्तों को जवाब देने लगे तो लोग हाथी को पागल ही कहेंगे, इसलिए हाथी उन कुत्तों को अनदेखा करते हुए अपने रास्ते पर आगे बढ़ता रहता है।

बिहार : क्या होटल के बाहर सरकारी बदमाशों ने फाड़ डाले बागेश्वर बाबा के पोस्टर? क्या मुस्लिम अधिवेशन के पोस्टर फाड़ने पर फुटेज के बावजूद पुलिस खाली हाथ रहती?

पटना में फिर फाड़े गए बाबा बागेश्वर के पोस्टर 
बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बिहार की राजधानी पटना के करीब नौबतपुर में हनुमंत कथा सुना रहे हैं। इस बीच एक बार फिर उनका पोस्टर फाड़ने की घटना सामने आई। धीरेंद्र शास्त्री जिस होटल में रुके हुए हैं, उसके पास में ही यह पोस्टर लगा हुआ था। इस घटना पर आयोजकों ने अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

दरअसल, बागेश्वर धाम सरकार के नाम से मशहूर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की पटना के पनाश होटल में रुके हुए हैं। इस होटल के पास लगे एक पोस्टर को अज्ञात लोगों द्वारा फाड़ दिया गया। हालाँकि इसके बाद पोस्टर की मरम्मत कर उसे सही कर दिया गया। लेकिन इस घटना से आयोजकों और बाबा बागेश्वर के भक्तों के बीच आक्रोश व्याप्त हो गया है। वे आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। इस मामले में आयोजकों ने पुलिस से शिकायत भी की है। हालाँकि अब तक कोई कार्रवाई सामने नहीं आई।

पोस्टर फाडे जाने से हिन्दुओं के मन में सरकार के विरुद्ध हिन्दू विरोधी छवि मुखरित होनी शुरू हो गयी है। उनका मानना है कि अगर किसी मुस्लिम अधिवेशन के पोस्टर फाड़े जाने पर cctv फुटेज होने के बाद भी उत्पादितों को नहीं पकड़ती? इसे सरकार की विफलता कही जाए या हिन्दू विरोध? 

धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के पटना पहुँचने से पहले भी कई जगहों पर उनके पोस्टर फाड़े गए थे। रात के अंधेरे में पोस्टर फाड़ने वालों की हरकत सीसीटीवी में कैद हो गई थी। हालाँकि, फुटेज हाथ लगने के बाद भी पुलिस अब तक आरोपितों तक नहीं पहुँच पाई है।

बिहार सरकार के मंत्रियों ने किया था बाबा की कथा का विरोध

धीरेंद्र शास्त्री की कथा की जानकारी सामने आने के बाद राजद नेताओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। नीतीश सरकार में मंत्री तेज प्रताप यादव ने एयरपोर्ट पर ही धीरेंद्र शास्त्री का घेराव करने की धमकी दी थी। यही नहीं, उन्होंने अपने धर्म निरपेक्ष सेवक संघ (DSS) के सदस्यों की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर शेयर की थी। इन तस्वीरों को भी बागेश्वर सरकार के विरोध में तैयारियों के रूप में देखा जा रहा था।
यही नहीं, बिहार के शिक्षा मंत्री चन्द्रशेखर यादव ने तो उन्हें जेल में डालने की बात कह दी थी। उन्होंने कहा था, “बाबा बागेश्वर अगर गंदे काम करने आएँगे तो बिहार इजाजत नहीं देगा, अगर नफरत फैलाने आए हो तो आडवाणी भी जेल गए थे, और लोग भी जाएँगे। बागेश्वर बाबा हो या कोई बाबा हों, उनके पास कोई तिलस्म या चमत्कार नहीं है।”
धीरेंद्र शास्त्री 13 मई 2023 से 17 मई 2023 तक 5 दिवसीय हनुमंत चरित्र सुनाएँगे। 5 दिवसीय कार्यक्रम में हर दिन शाम को 4 बजे से लेकर 7 बजे तक कथा का आयोजन होगा। 15 मई को धीरेंद्र शास्त्री दिव्य दरबार लगाएँगे। इसमें बिना टोकन और नंबर के भक्तों की अर्जी सुनी जाएगी।