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माँ दुर्गा को बताया ‘मू*ने वाली देवी’, देवी काली को कहा- ‘डरावना’: पुलिस ने अर्चना बौद्ध को पकड़ा, भीम कथावाचन के नाम पर कैसे फैला रही थी हिंदू घृणा

                    (साभार: यूट्यूब @Archana Singh Buddh Hathras, Gautam Studio Gyanpurwa)

खुद को भीम कथा वाचक बताने वाली अर्चना सिंह बौद्ध कथा के मंच से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का पाठ पढ़ाकर वैचारिक जहर परोस रही है। अर्चना सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है जिसमें वह भगवान हनुमान, भगवान गणेश, माँ दुर्गा और माँ काली को लेकर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणियाँ करती नजर आ रही है।

इस वायरल वीडियो में वह माँ दुर्गा के आठ हाथ, भगवान गणेश के सिर, माँ काली के रुप और भगवान हनुमान के चेहरे का ना केवल मखौल उड़ा रही है बल्कि वह लोगों से कह रही है कि इससे अच्छा तो घर में हीरो-हीरोइन की फोटो लगाओ। हिंदू आस्था को नीचा दिखाकर सस्ती तालियाँ बटोरने की कोशिश कर रही अर्चना का यह वीडियो उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के रसूलाबाद क्षेत्र का बताया जा रहा है। यहाँ मलखानपुर गाँव में अंबेडकर पार्क में भीम कथा का आयोजन किया गया था।

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया। संगठनों का कहना है कि इस तरह के बयान सीधे तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले हैं और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वायरल वीडियो के आधार पर हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में रसूलाबाद कोतवाली पहुँचे और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम का आयोजन गुलाब राम नामक व्यक्ति द्वारा कराया गया था।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और कथावाचक अर्चना सिंह बौद्ध और कार्यक्रम आयोजक गुलाब राम को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस आयोजन की अनुमति जिला प्रशासन से ली गई थी लेकिन कथा के दौरान तय की गई मर्यादाओं और शर्तों का कथित तौर पर पालन नहीं किया गया। हालाँकि, सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे हैं कि उसे जमानत भी दे दी गई है।

काली किसी बच्चे के सामने आ जाए तो एक महिने तक उसका बुखार ना उतरे: अर्चना सिंह बौद्ध

वायरल वीडियो में वह कह रही है, “आठ हाथ हैं दुर्गा महारानी के, हमें तो यहीं नहीं पता है भईया आठ हाथ वाली देवी पैदा हुई होंगी तो कैसे पैदा हुईं होंगी। जिस समय दुर्गा महारानी की मम्मी ने उनको जनम दिया होगा, पता नहीं उनके प्राण कहा रहें होंगे? पता नहीं कौन सा हॉस्पिटल बना है, उस हॉस्पिटल में आठ हाथ वाली देवी का जन्म हुआ होगा। इनके अम्मा-दादा तक का पता नहीं है कि इनके अम्मा-दादा हैं कौन? अगर आठ हाथ वाली देवी तुम्हारे घर में पैदा हो जाए फिर तुम्हें कैसी लगेगी?”
वीडियो में वह आगे कहती है, “तुम लोगों को तो दो हाथ वाले पैदा हों तो दो-दो महिना उठती नहीं, अरे आठ-आठ हाथ वाली देवी मईया कैसे पैदा हुईं होंगी? दिमाग लगाओ तुमलोग अपना, अगर आठ हाथ वाली देवी, ऐसी लड़की तुम्हारे घर में आ जाए तो अच्छी लगेगी? अच्छी नहीं लगेगी ना तो फिर इनकी अपने घर में फोटो और इनकी पूजा भी नहीं करनी चाहिए आप लोगों को। अब हनुमान की कोई सूरत है? हनुमान का मुँह कैसा है? अगर हनुमान जैसा संतान तुम्हारे घर में मिल जाए तो तुम्हें कैसी लगेगी वो संतान? ऐसा गलफुल्ला जैसा हो जाए तुम्हारे घर में तो तुम्हें वो बेटा कैसा लगेगा, अच्छा लगेगा? अच्छा लगेगा आपको हनुमान जैसा लड़का नहीं अच्छा लगेगा ना।”
माँ काली पर अपमानजनक टिप्पणी करते हुए वह कह रही है, “काली मईया का तो रूप ही ऐसा है कि बच्चे को बुखार इतनी जोर का आएगा कि एक महीने तक बुखार नहीं जाएगा उसका है ना? और आप ऐसी काली मईया की पूजा करती हो…अरे अच्छे लोगों का अपने घर में फोटो लगाओ, बाबा साहब का लगाओ, बड़े सुंदर थे बाबा साहब।”

भगवान गणेश का मजाक उड़ाते हुए हीरो-हीरोइन की फोटो लगाने की कही बात

अर्चना बौद्ध की यह घटिया बातें यहीं नहीं रुकी, वह आगे भगवान गणेश का भी मजाक उड़ाती है और कहती है, “अब गणेश भगवान हैं हमे तो यहीं समझ में नहीं आता कि गणेश भगवान आधे इंसान हैं और आधे जानवर हैं अब हमे यहीं नहीं पल्ले पड़ता है कि देखो हाथी का बच्चा भले छोटा हो लेकिन गर्दन उसकी छोटे पर भी मोटी होती है? अब गणेश की गर्दन और हाथी की गर्दन कैसे मैच खाई होगी?”
आगे कहती है, “इंसान की गर्दन तो इतनी सी होती है चार इंची की और गणेश भगवान के ऊपर का जो सर है वो हाथी का लगा है। अब हाथी का बच्चा भी तुम समझ लो तो गर्दन उसकी मोटी होती, लेकिन गणेश भगवान से कैसे मैच खा गया हाथी का सर? सोचने वाली बात है ना। अब हाथी का सर है और पेट इंसान का है अब हमें यहीं नहीं समझ आता है कि वो भोजन कौन सा करते होंगे हाथी वाला करते होंगे या इंसान वाला भोजन खाते होंगे? इन देवी-देवताओं की ना सूरत है, ना अकल है ना शक्ल है, इनसे अच्छा तो आप हीरो-हीरोइन की फोटो लगा लो ताकि अच्छे-अच्छे बच्चे तो पैदा हों।”

कौन है अर्चना सिंह बौद्ध?

अर्चना सिंह हाथरस की रहने वाली है। उसके वीडियोज यूट्यूब पर कई चैनल्स ने अपलोड किए है। हालाँकि, उसका अपना भी एक चैनल है जिसका नाम ‘Archana Singh Buddh Hathras’ है। इस चैनल पर उसके ऐसे ही कुल 554 वीडियोज अपलोड हैं। उसके करीब 4,000 सब्सक्राइबर्स हैं। उसका यह चैनल 25 सितंबर 2019 से चल रहा है।
इसके अलावा एक और चैनल है, जिससे उसके वीडियो शेयर किए गए हैं। इस चैनल का नाम ‘Gautam Studio Gyanpurwa’ है। इस पर अर्चना के अलावा ज्ञानसिंह बौद्ध कासगंज नाम के एक व्यक्ति का भी वीडियो शेयर किया गया है।
वीडियो में वह कह रहा है, “पूड़ी-कचौरी करे गोलगुला और करो गुलभत्ता और पथरा पूज के आई ढोकरिया, ओन्हें चाट गए कुत्ता।” इस वीडियो के थंबनेल में माँ काली की फोटो है, जिसके सामने एक कुत्ते को उन्हें चाटते हुए दिखाया गया है।
इस चैनल पर अर्चना का एक और वीडियो भी है, जिसके थंबनेल में लिखा है, ‘मूतादेवी का अविष्कार’ और नीचे लिखा है ‘कैसे मू**ने वाली देवी का जन्म हुआ।’ वीडियो मे वह माँ दुर्गा के बारे में उल्टी-सीधी बातें कर रही है।

महिषासुर को बताया राजा, माँ दुर्गा को बताया राक्षस की पत्नी

इस लड़की का इसी तरह का एक वीडियो यूट्यूब पर भी अपलोड है। इस वीडियो में वह कह रही है, “हमारा एक राजा हुआ यादव वंश में, जिनका नाम था महिषासुर राजा। जो हमारे समाज के लोग नौ दुर्गा मनाया करते हैं, आखिर ये नौ दुर्गा क्यों मनाया जाता है? कौन थी वो नौ दुर्गा? क्योंकि हमारी माताओं बहनों जो बिहार का राजा था बड़ा वीर बलवान, यादव समाज में जन्मा महिषासुर महाराज।”

वह कहती है, “महिषासुर राजा जब पहाड़ों से कूदा करते थे तो ऐसा लगता था, जमीन चटक जाती थी, ऐसा बल था उनके अंदर। इन मनुवादी लोगों को अच्छा नहीं लगा, इनलोगों को हमारे राजाओं का राज-पाठ अच्छा नहीं लगा तो इनलोगों ने क्या काम किया? ब्राह्मण समाज ने लड़की थी, जिसका नाम था दुर्गा। दुर्गा की शादी, इन्होंने सुंदर-सुंदर लड़कियाँ हमारे राजाओं-पुरखों को लाकर दी, हमारे राजा-पुरखे उन सुंदर-सुंदर लड़कियों में मस्त हो गए लेकिन ये नहीं पता था हमारे राजाओं को कि हमारे साथ में दुर्घटना भी घट सकती है।”

महिषासुर को माँ दुर्गा ने शराब पिलाकर मारा: अर्चना सिंह बौद्ध

वीडियो में वह आगे कहती है, “अपनी लड़की ब्राह्मण लोगों ने महाराज महिषासुर के साथ में शादी कर दी और उस लड़की से कहा देखो हम तुम्हारी शादी कर रहे हैं, लेकिन तुम्हें वहाँ घर नहीं पालना है तुम्हें पानी नहीं पीना है जब तक वो राजा मर ना जाए। दुर्गा की जब शादी महिषासुर के साथ हुई, यादव वंश का राजा था महिषासुर। महिषासुर महाराज के साथ में शादी होने के बाद ये मनुवादी विदेश से शराब बनाकर के लेते आए।”

उसने कहा, “जब शराब बनाकर लेते आए, वो अपनी लड़कियों को शराब दे दी बनाकर के और कहा कि इसे भगवान का प्रसाद बताकर के तुम्हें पिलाना होगा तो महिषासुर से वो लड़की दुर्गा बोली कि ये देखिए ये हमारे यहाँ भगवानों का प्रसाद है। ये प्रसाद तो पी लीजिए तो तुम्हें भगवान की तरफ से आराम मिलेगा। दुर्गा ने उसे इतना नशा करा दिया कि राजा को होश नहीं रहने दिया। एक दिन हाथों में तलवार उठाकर के राजा महिषासुर का बेहोशी में कत्ल कर दिया। कत्ल करने के बाद मेरे धम्मबंधुओं उससे पहले दुर्गा ने क्या काम किया था?”

माँ दुर्गा और महिषासुर के बेटे ने किए दुर्गा के नौ टुकड़े

वह कह रही है, “कत्ल करने के बाद दुर्गा ने महाराजा महिषासुर को मारने के बाद ये महिषासुर की गर्भवती हो गई थी, इसके बाद इसको एक लड़का पैदा हुआ, उसी लड़के का नाम था लांगुरिया। बड़े होने के बाद वो लड़का पूछने लगा कि माँ आज तक तुमने मेरे पिता का नाम नहीं बताया, मेरे पिता कहाँ हैं? तो दुर्गा बताया नहीं करती थी। एक दिन वो लड़का पीछे पड़ गया, आज मेरे पिता जी का पता बताओ।”

अर्चना आगे कहती है, “दुर्गा ने बताया कि तेरे पिता को मैंने मार दिया, जब मारने की खबर सुनी तो उसी लड़के ने हाथों में तलवार उठाकर के दुर्गा के नौ टुकड़े नौ दिशा में जब फेंक दिए, नौ टुकड़े कर के फेंके तब भी मनुवादी लोगों ने अपनी लड़की का पीछा नहीं छोड़ा, तब भी उन नौ टुकड़ों को इकट्ठा कर के नौ नाम दे दिए और कहा इसकी पूजा करो। उसे कहा गया नौ दुर्गा। उसकी हमारी माता-बहनें नौ दुर्गा कह कर पूजा करती हैं यानी तुम्हारे पुरखों का कत्ल किया गया और आप लोगों से उनकी पूजा करवाई गई।”

हिंदुओं के त्यौहार ना मनाने के लिए भड़काया

वीडियो में वह लोगों को भड़काते हुए कहती है, “मेरे समाज के लोगों आप जितने हिंदूवादी सनातनी त्यौहार करते हैं वो हमारे त्यौहार नहीं हैं याद रखना जो जो त्यौहार आता है, उसमें कोई ना कोई तुम्हारे राजाओं-पुरखों का कोई ना कोई रहस्य जरूर छिपा हुआ है। हमारे राजाओं को छल-कपट से मारने का काम किया। धीरे-धीरे इनलोगों ने हमारे दस राजा मार दिए गए, दस राजा मारने के बाद इन लोगों ने भारत पर कब्जा किया।”
वह सबको बताते हुए कहती है, “भारत भूमि बौद्धों की धरती थी, यहाँ हमारे राजा-पुरखों का राज रहा हमेशा और कोई दूसरा व्यक्ति नहीं था लेकिन हमारी माताओं-बहनों 85% ज्यादा है, 15% कम है लेकिन भारत देश में शासन सत्ता किसका होना चाहिए 15% का होना चाहिए, लेकिन अभी किसका सत्ता चल रहा है? ये लोग ताक में है कि संविधान को खत्म कर दिया जाए। लोगों के दिल में संविधान चुभता है, जैसे काँटा पैर में चुभता है।”

मणिपुर हिंसा पर गीत गाते सत्ता चलाने वालों को कहा दुष्ट

इसी तरह मणिपुर हिंसा को लेकर भी उसका एक वीडियो यूट्यूब पर अपलोड है, जिसमें वह मणिपुर हिंसा का दोष उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी दे रही है और कह रही कि इन दुष्टों को धूल चटाना होगा। इस वीडियो में वो गाना गा रही है, “आग लगी है भारत में और सत्ता सो रही दिल्ली में, चप्पा-चप्पा राख हुआ है जाकर देखो मणिपुर में।” इस वीडियो के थंबनेल में प्रधानमंत्री मोदी और सीएम योगी की फोटो लगी हुई है।

अर्चना ने सरोज सरगम से सीखा माँ दुर्गा का अपमान करना?

गौरतलब है कि इससे पहले मिर्जापुर पुलिस ने माँ दुर्गा पर आपत्तिजनक गाने के मामले में मुख्य आरोपित गायिका सरोज सरगम और उनके पति राममिलन बिंद को गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी लोगों के भारी विरोध और सोशल मीडिया पर उठी माँगों के बाद की गई थी। सरोज सरगम ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें उसने माँ दुर्गा के लिए वै$% और रं₹$ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था।
इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों में भारी आक्रोश था। वह भी अर्चना की तरह ही हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ भड़काऊ और अभद्र टिप्पणी कर के पैसे बटोर रही थी। दरअसल इन लोगों का एक उद्देश्य तो ये होता है कि ये लोगों के अंदर से भगवान के प्रति आस्था को खत्म कर सकें और दूसरा उद्देश्य होता है पैसे कमाना, वो भी इस तरह की ओछी हरकतें कर के, क्योंकि ऐसे थंबनेल से ये लोगों को मजबूर करते है कि लोग इनके वीडियो को ओपन करें।

हाथरस वाला सूरजपाल ही नहीं है अखिलेश का सगे वाला; रामवृक्ष यादव को भी नहीं भूलना चाहिए

सुभाष चन्द्र

हाथरस में हुए नरसंहार के लिए कथित बाबा सूरजपाल लापता है और उसके समागम में 80,000 लोगों की अनुमति की जगह ढाई लाख लोग एकत्र हुए और यह संयोग की बात है कि भाजपा उम्मीदवार अनूप प्रधान हाथरस से 2024 चुनाव में सपा के जसवीर वाल्मीकि को ढाई लाख वोट से ही हरा कर जीते थे। इसका मतलब यह भी निकाला जा सकता है कि सूरजपाल अखिलेश यादव के लिए वोट नहीं दिला सका

अखिलेश के घनिष्ठ संबंध सूरजपाल से ऐसे भी समझे जा सकते हैं कि अखिलेश ने ही उसके लिए कसीदे पढ़ते हुए कहा था “नारायण साकार हरि की सम्पूर्ण ब्रह्मांड में सदा-सदा के लिए जय जयकार हो” ये कथित बाबा दावा करता था कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने उसे अपना गुरु स्वीकार किया हुआ है लेकिन फिर भी अखिलेश का व्यक्ति चुनाव हार गया क्या यह नहीं हो सकता कि हाथरस की जनता को सबक सिखाने के लिए यह षड़यंत्र करके लोगों की जान ली गई हो

लेखक 
चर्चित YouTuber 
ऐसे विध्वंसकारी लोगों से अखिलेश यादव का पुराना नाता है याद कीजिए रामवृक्ष यादव की  रक्तपात की होली में मथुरा के जवाहरबाग में 2 जून, 2016 को अखिलेश के मुख्यमंत्री रहते हुए SP सिटी समेत 29 लोगों की मौत हुई थे और तब सपा खुल कर रामवृक्ष यादव का बचाव कर रही थी सपा शासन में उसने हजारो एकड़ जमीन पर अवैध कब्ज़ा किया हुआ था और 4 जून, 2016 को वह भी मुठभेड़ में मारा गया था वह अखिलेश के संरक्षण में पलने वाला रामवृक्ष यादव नई सरकार और नया देश बनाने के सपने देखता था और अखिलेश सरकार उसके कारनामों पर आंखें मूंद कर बैठी रही थी

आज अखिलेश और राहुल गांधी 121 लोगों के शवों को गिद्ध की तरह नोंच कर आग सेक रहे हैं, राहुल तो पर्यटन के लिए हाथरस पहुंच गया और सारा दोष योगी सरकार पर मढ़  दिया लेकिन तमिलनाडु में जहरीली शराब से करीब 70 लोगों की मौत पर सन्नाटे में है क्योंकि वहां राहुल के पिता की हत्या में आरोपी रही DMK की सरकार  है जो राहुल की जोड़ीदार पार्टी है

योगी सरकार ने हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं लेकिन फिर भी एक वकील गौरव द्विवेदी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की है हाथरस मामले की CBI जांच कराने के लिए और एक वकील विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में जांच होनी चाहिए क्या ऐसे वकीलों को हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज पर भरोसा नहीं है? सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट को ऐसी याचिकाओं को तुरंत खारिज कर देना चाहिए विपत्ति के समय योगी सरकार काम करे या अदालत में समय बर्बाद करे

एक खबर के अनुसार तमिलनाडु सरकार ने जहरीली शराब पीकर मरने वालों को 10-10 लाख के मुआवजा देने का ऐलान कर दिया जैसे वे लोग कोई बहादुरी का काम करके शहीद हुए हों, जिस पर मद्रास हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुआ कहा कि यह रकम कुछ ज्यादा है। अभी सुनवाई चल रही है हाथरस में सरकार को दोष दे रहे हो तो तमिलनाडु सरकार की जिम्मेदारी कौन तय करेगा

ऐसे कई कथित बाबा रहे हैं जिनके स्वर्गलोक जैसे आलीशान आश्रम रहें है उनमे एक कथित संत रामपाल भी थे जिसकी सेना से लड़ने में पुलिस को कई दिन लग गए थे एक और हैं कथित संत राम रहीम जिसका आशियाना किसी स्वर्गलोग से कम नहीं था पर उसे हत्या के आरोप में बरी कर दिया गया हाई कोर्ट ने

लेकिन इस्लाम और ईसाई धर्म के खलीफा मौज में रहते हैं और उनके खिलाफ तो सेकुलर लोग आवाज़ नहीं उठा सकते

उत्तर प्रदेश : "....ये क्या टट्टी सा मुँह लेकर राम-राम कर देते हो। बहन#द हम अलीगढ़ से टीचर बुला-बुला कर ला रहे हैं...." साईमा मंसूर पब्लिक स्कूल का टीचर मोहम्मद अदनान बर्खास्त, प्रिंसिपल पर कार्रवाई कब?

हाथरस के स्कूल में राम-राम बोलने वाले छात्र को प्रिंसिपल सलमान ने बकी गालियाँ (चित्र साभार- X/ @RajeshG66967196)
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक स्कूल के अंदर अपने टीचर को राम-राम बोलने पर एक छात्र को प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रिंसिपल ने पहले छात्र और बाद में उनके परिजनों को गालियाँ दीं। हिन्दू संगठनों ने स्कूल के आगे प्रदर्शन किया और मामले में शामिल सभी आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। फिलहाल मोहम्मद अदनान नाम के एक टीचर को बर्खास्त कर दिया गया है।

स्कूल प्रशासन ने इस मामले में लिखित माफीनामा भी जारी किया है। विवाद साईमा मंसूर पब्लिक स्कूल का है, जो कि अलीगढ़ की नूरुल उलूम एजुकेशन सोसाइटी द्वारा संचालित किया जाता है। घटना शुक्रवार (8 दिसंबर 2023) की बताई जा रही है।

यह मामला हाथरस जिले के चंदपा थानाक्षेत्र का है। 8 दिसंबर 2023 को स्कूल के गेट से एक छात्र के भाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल वीडियो में खुद को गजेंद्र सिंह सिसोदिया बता रहा व्यक्ति साईमा मंसूर पब्लिक स्कूल के गेट पर खड़ा दिखाई दिया। गजेंद्र ने बताया कि उनके भाई ने अपनी क्लास में पढ़ाने आए टीचर से राम-राम कह दी थी। टीचर ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया और वो क्लास खत्म होने के बाद चला गया। टीचर का नाम मोहम्म्द अदनान बताया जा रहा। आरोप है कि टीचर ने इस बात को लेकर प्रिंसिपल सलमान किदवई से शिकायत की।

गजेंद्र सिसोदिया का आरोप है कि टीचर मोहम्म्द अदनान की शिकायत के बाद प्रिंसिपल सलमान किदवाई क्लास में आए। इसके बाद क्लास में सलमान किदवाई ने कहा, “ये क्या गंदगी फैला रहे हो। ये क्या टट्टी सा मुँह लेकर राम-राम कर देते हो। बहन#द हम अलीगढ़ से टीचर बुला-बुला कर ला रहे हैं और तुम यहाँ गंदगी फैला रहे हो। कोई भी यहाँ राम-राम वैगरह नहीं कहेगा।”

गजेंद्र का दावा है कि स्कूल में ‘सलाम वाले क़ुम’ और ‘नमस्ते’ ही करने के लिए कहा जाता है। गजेंद्र के अनुसार पीड़ित छात्र कक्षा 11 में पढ़ता है।

गजेंद्र ने बताया कि जब वो इसकी शिकायत करने गए तो उनको धक्के मार कर निकाल दिया गया। इस दौरान सिक्यॉरिटी गार्ड पर भी आरोप है कि उसने पीड़ित अभिभावक को गालियाँ देते हुए कहा कि राम-राम क्या मतलब है?

शुक्रवार को इस मामले का वीडियो वायरल होने के बाद हाथरस के हिन्दू संगठनों में नाराजगी फैल गई। शनिवार (9 दिसंबर) को तमाम हिन्दू संगठन के पदाधिकारी साईमा मंसूर पब्लिक स्कूल के गेट पर जमा हो गए। उन्होंने वहाँ हनुमान चालीसा पढ़ी और जय श्री राम के नारे लगाए। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और हालात को संभाला।

हिन्दू संगठन के लोग स्कूल प्रिंसिपल और आरोपित टीचर पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। वहीं जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जाँच दल का गठन कर दिया है। इसी दौरान स्कूल प्रिंसिपल सलमान किदवई ने मीडिया को बताया कि राम-राम के अभिवादन पर आपत्ति जताने वाले टीचर मोहम्मद अदनान को नौकरी से निकाल दिया गया है। साथ ही उन्होंने 30 साल से चल रहे साईमा मंसूर पब्लिक स्कूल की तारीफ में कसीदे गढ़ते हुए वहाँ का माहौल धर्म निरपेक्ष बताया।

स्कूल प्रशासन ने अपनी गलती मानते हुए लिखित माफीनामा भी जारी किया है। इस माफीनामे में दोबारा ऐसी हरकत न करने का भरोसा भी दिया गया है।

साईमा मंसूर पब्लिक स्कूल मूलतः अलीगढ़ की नूरुल उलूम एजुकेशन सोसाइटी द्वारा संचालित किया जाता है। बच्चों को शिक्षा देने का दावा करने वाली नूरुल उलूम एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष नसीम अहमद, उपाध्यक्ष सनाउल्लाह खान और सचिव नफीस अहमद हैं। इस संस्थान का रजिस्ट्रेशन जनवरी 1998 में हुआ था।


हाथरस मामले में पत्रकार ने पूछे सवाल पर क्यों भड़के अखिलेश यादव? आरोपी समाजवादी नेता निकला इसलिए?

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाथरस मामले को लेकर योगी आदित्यनाथ की सरकार पर निशाना तो साध दिया, लेकिन जब गुनाहों के आरोप उनकी अपनी पार्टी के नेता तक पहुँचे तो वो बौखला गए और उलटा पत्रकार को ही डाँट दिया। इसे लेकर सवाल पूछने वाले पत्रकार पर अखिलेश यादव ने आपत्तिजनक टिप्पणी की। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद उनकी किरकिरी हुई।

दरअसल, जब उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित कर रहे थे तो इस मामले में समाजवादी पार्टी के नेता पर छेड़खानी का आरोप लगने पर एक पत्रकार ने उनसे जवाब माँगा। इस पर अखिलेश यादव ने कहा कि सवाल ये नहीं है। फिर वो उखड़ गए और कहने लगे, “फिर बिक गए तुम? इतने में बिक गए? जरा अपना चैनल का नाम बताइए जो बिक गए हो तुम।” उक्त पत्रकार ‘प्राइम न्यूज़’ नामक चैनल का था।

उन्होंने कहा, “अब कहाँ जाकर छिप गए हो? हैसियत है तो अपने चैनल का नाम क्यों नहीं बताते?” जब उन्हें चैनल का नाम पता चल गया, तब उन्होंने कहा – “प्राइम न्यूज़ के बिके हुए आदमी हो तुम।” हाथरस की पीड़िता का वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें वो रो-रो कर न्याय की गुहार लगा रही है। पीड़िता ने बताया कि छेड़खानी के बाद हुए केस से गुस्साए आरोपित ने उसके पिता की हत्या कर दी।

पीड़िता के पिता अनीश शर्मा (बदला हुआ नाम) ने जुलाई 2018 में गौरव शर्मा नाम के आरोपित के खिलाफ अपनी बेटी के साथ छेड़छाड़ की शिकायत पुलिस थाने में दर्ज कराई थी। छेड़छाड़ करने का आरोपित और विरोध करने पर हत्या-आरोपित गौरव शर्मा समाजवादी पार्टी का नेता है। वही समाजवादी पार्टी, जिसके मुखिया अखिलेश यादव इस मामले में प्रदेश की योगी सरकार को घेरते हुए ट्वीट कर रहे हैं। 

हाथरस : जातीय हिंसा की साजिश रचने वाला PFI चेयरमैन अब्दुल सलाम केरल का सरकारी कर्मचारी निकला

                                  केरल के बिजली विभाग में सरकारी पद पर है अब्दुल सलाम

देशभर में विवाद का विषय बन चुके हाथरस केस की जाँच जारी है और इस मामले में रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। हाथरस की वारदात के बाद उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर हिंसा फैलाने की साजिश हो रही है और इस साजिश में PFI यानी, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का हाथ सामने आया है। हाथरस में जातीय दंगा भड़काने की साजिश रचने वाला PFI का चेयरमैन अब्दुल सलाम केरल के बिजली विभाग का कर्मचारी है।

जानकारी के मुताबिक PFI का चेयरमैन केरल में सरकारी कर्मचारी है। जिसका नाम अब्दुल सलाम है और वह केरल में बिजली विभाग में कार्मचारी है। अब्दुल सलाम केरल विद्युत बोर्ड में वरिष्ठ सहायक कम कैशियर के पद पर तैनात है। एबीपी न्यूज का दावा है कि उसके पास पीएफआई के चेयरमैन की कई जानकारियाँ हैं और यही वो शख्स है जो सरकारी कर्मचारी रहते हुए देश में दंगे की साजिश रच रहा है।

ऐसे में क्या केरल सरकार अब्दुल सलाम को निष्कासित कर जेल में डालेगी? केवल जेल में ही नहीं, इनको मिलने वाली समस्त सरकारी सुविधाएं जैसे पेंशन आदि भी समाप्त कर देनी चाहिए। देश की शांति भंग करने वाले ऐसे लोग किसी भी सहानुभूति के अधिकारी नहीं। केरल में पॉपुलर फ्रंट के कार्यालयों पर कोर्ट के माध्यम से सील कर, समस्त पदाधिकारियों, कर्मचारियों और इनके समर्थकों पर सख्त कार्यवाही की जाए। इनके समस्त बैंक खातों की जाँच कर, सील किए जाएं। 

केरल के मल्लापुरम जिले में रहने वाले अब्दुल सलाम की साल 2000 में सरकारी नौकरी पर नियुक्ति हुई थी। अब्दुल पर बिना इजाजत विदेश जाने के भी आरोप लगे हैं। केरल के बिजली विभाग में काम करने वाला अब्दुल सलाम उस पीएफआई संगठन का मुखिया है, जिस पर उत्तर प्रदेश के हाथरस में दंगा भड़काने की साजिश का आरोप है। पीएफआई संगठन का नाम नागरिकता कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में सुर्खियों में आया था। 

मीडिया खबरों में ईडी की रिपोर्ट का हवाला देकर बताया जा रहा है कि इस कांड के बहाने जातीय दंगा फैलाने के लिए पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पास मॉरिशस से 50 करोड़ रुपए आए थे।

इसके अलावा, ईडी ने दावा किया है कि पूरी फंडिंग 100 करोड़ रुपए से अधिक की थी। अब आगे पूरे मामले की पड़ताल की जा रही है। जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया से अफवाहों को फैला कर प्रदेश और देश की शांति व्यवस्था को बिगाड़ने की साजिश रची जा रही थी। हालाँकि, उत्तर प्रदेश पुलिस की मुस्तैदी और खूफिया एजेंसियों के अलर्ट होने के कारण इस पूरी साजिश का पर्दाफाश हो गया।

मामले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि विपक्ष राज्य में सांप्रदायिक दंगे भड़काने की कोशिश कर रहा है। योगी ने कहा था, “जिसे विकास अच्छा नहीं लग रहा, वे लोग देश में और प्रदेश में भी जातीय दंगा, सांप्रदायिक दंगा भड़काना चाहते हैं। इस दंगे की आड़ में विकास रुकेगा। इस दंगे की आड़ में उनकी रोटियाँ सेंकने के लिए उनको अवसर मिलेगा, इसलिए नए-नए षड्यंत्र करते रहते हैं।”

उल्लेखनीय है कि दिल्ली से उत्तर प्रदेश के हाथरस जाते हुए 4 संदिग्ध लोगों को मथुरा पुलिस ने 5 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। पड़ताल में पता चला था कि इनके लिंक पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) से हैं। टोल प्लाजा पर चेकिंग के दौरान इनकी गिरफ्तारी हुई थी। अब मथुरा पुलिस इनसे जुड़े हर पहलू पर जाँच कर रही है।

हाथरस मामला : पीड़िता के भाई ने ही की हत्या: अधिवक्ता AP सिंह का दावा

अधिवक्ता एपी सिंह आरोपितों की तरफ से
इस केस में पैरवी करेंगे (फाइल फोटो)
भागवत गीता में स्पष्ट लिखा है, "विनाश काले विपरीत बुद्धि", जो हाथरस में हुए हंगामे ने फिर से चरितार्थ कर दिया। योगी विरोधी उत्तर प्रदेश में दंगा करवाने के उद्देश्य से अपने दलाल मीडिया से जातिवाद की मनगारंध आग फ़ैलाने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ रही है, सच्चाई सामने आने लगने से योगी विरोधियों और इनकी दलाल मीडिया को शर्मिंदा होना पड़ रहा है। अपनी TRP बढ़ाने को लालायित मीडिया को भ्रामक खबरें फ़ैलाने से पहले मौके पर मौजूद होने पर जमीनी हकीकत से रूबरू होना था, ना कि योगी विरोधियों के हाथ खेलकर भाजपा शासित राज्य में हिंसा फ़ैलाने में मददगार होना। अगर किसी कारण से राज्य में हिंसा हो गयी होती, कौन जिम्मेदार होता?कहाँ लुप्त हो गयी इनके खोजी पत्रकारों की पत्रकारिता? मीडिया अपनी नींद तब भी नहीं जागी, जब पीड़ित परिवार सीबीआई और नार्को जाँच से पीछे हट रहा है। विपरीत इसके आरोपी परिवार सीबीआई और नार्को दोनों जांचों की मांग कर रहा है। मीडिया को इन्हीं कारणों से बिकाऊ और दलाल कहा जाता है। 
भाजपा शासित राज्य में जिस उत्सुकता से मीडिया लगी हुई थी, वही मीडिया राजस्थान में हुए बलात्कारों पर क्यों मौन रही, वह इस लिए कि वहां आरोपी मुस्लिम समाज से हैं? आखिर ये दोगलापन किस लिए? क्यों नहीं यही मुस्तैदी राजस्थान में दिखाई? अब जिस तरह हाथरस कांड की सच्चाई सामने आ रही है, क्या उस मीडिया पर, जो सच्चाई से कोसों मील दूर सियासतखोरों के हाथ खेल रही थी, जनता यकीन करेगी? इन चैनलों ने अपनी विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगवा लिया है। 
हाथरस मामले में आरोपितों के वकील एपी सिंह ने पीड़ित परिवार पर बड़े आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे ‘ऑनर किलिंग’ का मामला बताते हुए कहा कि पीड़िता को उसके भाई ने ही मारा है। साथ ही वकील एपी सिंह ने इस मामले का राजनीतिकरण करने के भी आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के एक सप्ताह बाद जब नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की, उसके बाद ही बलात्कार का मामला दर्ज किया गया।

वकील एपी सिंह ने कहा कि उन्होंने आरोपितों के परिजनों से बातचीत की है और साथ ही कहा कि अब तक मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार की कोई पुष्टि नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निर्भया मामले के दो वकील एक बार फिर से आमने-सामने हो सकते हैं। निर्भया के दोषियों के खिलाफ पैरवी करने वाली वकील सीमा समृद्धि कुशवाहा ने हाथरस पीड़िता का केस लड़ने का ऐलान किया है।

एपी सिंह ने बताया कि आरोपितों के वकील के अलावा भारतीय क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री मानवेंद्र सिंह ने भी उनसे सपर्क कर के इस मामले में आरोपितों की तरफ से केस लड़ने को कहा है। मानवेन्द्र सिंह ने कहा है कि उनका संगठन वकील की फीस भरने के लिए धन इकठ्ठा करेगा। उन्होंने एससी-एसटी एक्ट के दुरूपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि सवर्ण समाज को बदनाम करने के लिए ऐसा किया जा रहा है, जिससे राजपूत समाज आहत हुआ है।

वहीं पीड़ित परिवार की तरफ से सीमा समृद्धि कुशवाहा ने वकालतनामे पर हस्ताक्षर भी कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वो सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर के इस मामले की सुनवाई दिल्ली स्थानांतरित करने की माँग करेंगी। उन्होंने कहा कि वो हाथरस की बेटी को न्याय दिलाएँगी और दोषियों को सज़ा मिलेगी लेकिन ये तब तक संभव नहीं हो पाएगा, जब तक मामला उत्तर प्रदेश से बाहर नहीं जाता।

उधर हाथरस मामले की जाँच कर रही SIT को इस मामले में रिपोर्ट सौंपने के लिए 10 दिनों का अतिरिक्त समय दिया गया है। इससे पहले बुधवार (अक्टूबर 7, 2020) को ही रिपोर्ट सौंपी जानी थी।गृह सचिव भगवान स्वरूप इस SIT की अगुवाई कर रहे हैं। SIT ने गाँव में जाकर इस मामले की पूरी छानबीन की है। इस मामले में यूपी सरकार सीबीआई जाँच की सिफारिश भी कर चुकी है। SIT ने चश्मदीदों के साथ क्राइम सीन क रिक्रिएट भी किया था।

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हाथरस : क्या न्याय’ माँग रहे कांग्रेस ‘दलित नेता’ उदित राज पिकनिक मनाने गए हैं?

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हाथरस : क्या न्याय’ माँग रहे कांग्रेस ‘दलित नेता’ उदित राज पिकनिक मनाने गए हैं?

भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने हाथरस पीड़िता के भाई से पूछताछ की माँग की है। उन्होंने कहा है कि आरोपित और पीड़ित परिवार के बीच कई फोन कॉल हुए। अक्टूबर 2019 से मार्च 2020 के बीच लड़की के भाई के नाम से रजिस्टर्ड फोन नंबर से 100 से अधिक फोन कॉल किए गए थे। 19 वर्षीय पीड़िता का भाई कथित तौर पर आरोपित के संपर्क में था। अमित मालवीय ने कहा कि यह मामला आपसी रंजिश का परिणाम हो सकता है।

हाथरस के बहाने रोटियां सेंकते दलित नेता : DM-SP को माँ-बहन की गाली, CM योगी के लिए भी ‘गंदी बात’

                             मुख्यमंत्री के लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने वाले नेता (साभार - ट्विटर)
उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई घटना का विरोध अभी तक जारी है। विरोध की आड़ में अनेक विपक्षी दल राजनीतिक रोटियाँ सेंकने का प्रयास कर रहे हैं। इस तरह की ख़बरें भी लगातार सामने आ रही हैं। ताज़ा मामले में एक दलित और पिछड़े वर्ग के नेता का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में कमल भारती नाम के नेता ने भरी सभा में बेहद अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया है।

उस नेता ने वीडियो के अंत में कई प्रशासनिक अधिकारियों समेत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी अत्यंत अभद्र टिप्पणी की। विडंबना यह है कि इतनी निम्न श्रेणी की बातें कहने के बाद नेता के आस-पास मौजूद लोग ताली बजा कर उन बातों की प्रशंसा कर रहे हैं।

कुलदीप शुक्ला नाम के इंटरनेट यूज़र ने यह वीडियो ट्विटर पर साझा किया। इसमें हाथरस और उत्तर प्रदेश के तमाम प्रशासनिक-पुलिस अधिकारियों को टैग किया गया है। वीडियो के कैप्शन में यह भी लिखा गया था, “यदि इन जैसों पर कार्यवाही नहीं हुआ तो पूरे उत्तर प्रदेश में मौहाल खराब हो सकता है, मायावती जी आप अपने नेताओं के जुबान को सुनो और निकाल भगाओ ऐसे लोगों को… थोड़ी सी भी इंसानियत हो तो दो शब्द बोलो कृपया संज्ञान लें।”

वीडियो में नेता ने अपना परिचय जिलाध्यक्ष अनुसूचित जाति प्रकोष्ट, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के रूप में दिया। वीडियो की शुरुआत में कमल भारती ने कहा:

“मेरी बहन की इज़्ज़त लूटी गई है तो मैं ठाकुरों की म#या की ऐसी की तैसी करता हूँ। मैं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का जिलाध्यक्ष हूँ अनुसूचित प्रकोष्ठ का, खुला चैलेंज देता हूँ कि जिस ठाकुर की माँ के गोद में अभी ताकत हो वह अपनी बहन बेटी को मेरे यहाँ ले आकर सुला दे। 1 करोड़ रुपया मैं उसको अपनी जायदाद बेच कर दूँगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हाथरस का डीएम अपनी माँ चु# रहा था, वहाँ का एसपी अपनी बहन चु# रहा था। इस प्रदेश का मुख्यमंत्री अपनी माँ के यहाँ सो रहा था।”     

 वीडियो चर्चा में आने के बाद पुलिस ने इस मामले का तत्काल प्रभाव से संज्ञान लिया। मऊ पुलिस ने कमल भारती के विरुद्ध धारा 153 ए, 504 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इसके अलावा पुलिस ने कमल भारती की गिरफ्तारी के 3 टीमों का गठन भी कर दिया है। पुलिस ने इस कार्रवाई की जानकारी ट्वीट के माध्यम से दी।

इसके पहले कांग्रेस नेता निजाम मलिक ने भी हाथरस मामले पर विवादित बयान दिया था। निजाम मलिक ने कहा था कि जो हाथरस मामलों के आरोपित का सिर काट कर ले आएगा उसे उनके समुदाय की तरफ से 1 करोड़ रुपए का इनाम दिया जाएगा।

हाथरस मामले पर इस तरह के वीडियो सामने आने के बाद दंगों की साजिश के आरोप के दावे पुख्ता होते जा रहे हैं। प्रदर्शन की आड़ में सार्वजनिक रूप से इस तरह की अमर्यादित भाषा के उपयोग का उद्देश्य न्याय दिलाना कैसे हो सकता है। इसके पहले यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस घटनाक्रम पर बयान देते हुए कहा था कि विपक्ष राज्य में सांप्रदायिक दंगे भड़काने की कोशिश कर रहा है।

हत्या और कथित बलात्कार के मामले में विपक्ष द्वारा जारी विरोध-प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सीएम ने कहा, “जिसे विकास अच्छा नहीं लग रहा, वे लोग देश में और प्रदेश में भी जातीय दंगा, सांप्रदायिक दंगा भड़काना चाहते हैं। इस दंगे की आड़ में विकास रुकेगा। इस दंगे की आड़ में उनकी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने के लिए उनको अवसर मिलेगा, इसलिए नए-नए प्रकार के षड्यंत्र करते रहते हैं।”

मीडिया के लिए पर्यटक स्थल बना हाथरस ; TRP और एजेंडा का घिनौना खेल  

हाथरस में घटी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद यह मीडिया पर्यटक स्थल बन गया है। विभिन्न मेनस्ट्रीम न्यूज नेटवर्क के पत्रकार नई-नई तकनीकें अपनाकर टीआरपी की होड़ में आगे बढ़ने की जुगाड़ में लगे हुए हैं। इन दिनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ऐसे वीडियो से भरे हुए हैं, जिसमें तथाकथित पत्रकार न्याय के लिए लड़ाई की आड़ में अपनी नीच आचरण का परिचय दे रहे हैं।

हिंदी न्यूज चैनल भारत समाचार के पत्रकार द्वारा इसी तरह का वीडियो शेयर किया गया है। इसमें पत्रकार खेत के पास बैठ जाती है और पीड़ितों से मिलने की जिद करती है। इतनी ही नहीं, वो पुलिस अधिकारियों को यह कहकर उकसाती है कि क्या वे भी उसे उसी तरह जला देंगे, जैसा उन्होंने हाथरस पीड़िता के शव का दाह संस्कार किया था।

महिला पुलिस अधिकारी उस पत्रकार के सामने हाथ जोड़ती है और वहाँ से उठने का निवेदन करती है। महिला पुलिस अधिकारी पत्रकार से कहती है कि वो वहाँ से उठ जाए, किसी तरह का तमाशा न करें। वहीं दूसरी तरफ पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा का पुलिस अधिकारियों को उकसाकर ये पूछना कि क्या वो उन्हें भी जलाएँगे, ये उनकी नैतिक स्तर का परिचय देती है।

इस तरह का व्यवहार करने के पीछे दो कारण हैं- पहला तो ये कि वह चाहते हैं कि दर्शकों को इस बात पर विश्वास को पत्रकार ग्राउंड लेवल पर जाकर भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ पीड़िता के लिए न्याय की लड़ रही है और दूसरा कारण है- टीआरपी, जो कि उल्लेखनीय गति के साथ घट रही है।

इसी तरह का एक वीडियो ABP न्यूज की तरफ से 2 अक्टूबर को शेयर किया गया। जिसमें मीडिया नेटवर्क की पत्रकार प्रतिमा मिश्रा हंगामा करते हुए जबरन गाँव के अंदर घुसने का प्रयास करती है। इस दौरान वो बार-बार ये कहती हैं कि वो अपना काम कर रही है। हालाँकि बाद में उन्हें और कैमरामैन को गाड़ी में बैठाकर गाँव के बाहर कर दिया जाता है। प्रतिमा मिश्रा आरोप लगाती है कि उन्हें बिना महिला पुलिसकर्मी वाली गाड़ी में बैठाकर जबरन गाँव के बाहर किया जाता है।

एबीपी न्यूज़ ने उसी दिन एक और वीडियो पोस्ट किया। इस पोस्ट का कैप्शन था, “हाथरस की बेटी के लिए एबीपी न्यूज के सत्याग्रह को पुलिस ने की रोकने की कोशिश। आखिर गाँधी जयंती पर बापू के विचारों को कुचलने वाला ‘गोडसे’ कौन?”

गाँधी जयंती पर नाथूराम गोडसे को स्मरण कर गोडसे को अमर कर दिया, लेकिन इन पाखंडियों के मुंह से गोडसे का नाम लेना शोभा नहीं देता। इन पाखंडियों को गोडसे को अपमानित दृष्टि से देखने से पूर्व उस महापुरुष के माइक से सुनाए 150 बयानों का गंभीरता से अध्ययन कर जनता को भी बताएं कि "आखिर तुष्टिकरण की अति होने के कारण ही गोडसे ने गाँधी को मारा था।"  

एक अन्य वीडियो में, एबीपी न्यूज ने दावा किया कि पीड़ित परिवार से मिलने की कोशिश कर रहे उनके पत्रकार और कैमरामैन के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस ने छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार किया।

‘पत्रकार’ बरखा दत्त ने भी 2 अक्टूबर को तस्वीरें पोस्ट करते हुए बताया था कि कैसे कई किलोमीटर तक पैदल चलने के बाद वो गाँव पहुँचने में कामयाब हुई, लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें और उनकी मोजो टीम को पकड़कर पुलिस वैन में बैठाया और उन्हें फिर से हाइवे पर पहुँचा दिया।

जब इन वीडियो और तस्वीरों को शूट किया गया था तब धारा 144 लगाई गई थी

उल्लेखनीय है कि जिस समय पर ये तस्वीरें और वीडियो शूट किया गया है, उस समय वहाँ पर SIT जाँच को देखते हुए धारा 144 लगाई गई थी। उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुख्य सड़क पर गाँव से लगभग 2 किमी की दूरी पर बैरिकेड्स लगा दिए थे, जिससे गाँव के सभी प्रवेश मार्ग बंद हो गए।

हालाँकि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गाँव में प्रवेश अनुमति नहीं देने के कदम पर सवाल उठाना मीडिया के अधिकार में है। लेकिन मीडिया द्वारा प्रदर्शित इन ड्रामेबाजी से लगता नहीं कि उनका मकसद पीड़ित परिवार से मिलना है।

इससे भी बुरी बात यह है कि एसआईटी जाँच पूरी होने के बाद यूपी सरकार द्वारा मीडिया को गाँव में जाने की अनुमति दिए जाने के बाद सभी चैनलों का दावा था कि ऐसा उनके दवाब की वजह से हुआ। जबकि सच्चाई यह थी कि मीडिया को अनुमति इसलिए दी गई क्योंकि एसआईटी जाँच पूरी हो चुकी थी। इस सबसे यह स्पष्ट होता है कि कोई पत्रकार या चैनल सच्चाई को सामने लाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी गिरती टीआरपी को उठाने के लिए ये सब कर रहे थे। 

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हाथरस : 100 करोड़ की फंडिंग, जातीय दंगों और हिन्दुओं में फूट डालने की साजिश

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इंडिया टुडे की पत्रकार का ऑडियो लीक

गौरतलब है कि ऑपइंडिया ने इंडिया टुडे के पत्रकार और हाथरस पीड़िता के भाई के बीच की लीक बातचीत की रिपोर्ट की थी। इसमें सुना जा सकता था कि इंडिया टुडे की पत्रकार तनुश्री मृतका के भाई संदीप को ऐसा स्टेटमेंट देने के लिए बोल रही हैं, जिसमें लड़की के पिता आरोप लगाए कि उनके ऊपर प्रशासन की ओर से बहुत दबाव था। बातचीत को सुनकर यह साफ पता चलता था कि तनुश्री पीड़िता के भाई से एक निश्चित बयान दिलवाने का प्रयास कर रही थी और संदीप की दबी आवाज सुनकर लग रहा था, जैसे वह ऐसा नहीं करना चाहते।