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केरल का पादरी कानपुर में चला रहा था ‘हाउस चर्च’, हिंदुओं को ईसाई बनाने के लिए विदेश से आ रहा था पैसा

                           केरल का पादरी एल्विन और उसकी पत्नी (साभार : FB_Shubham Shaurya)
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की घाटमपुर पुलिस ने 13 जनवरी 2026 को केरल के रहने वाले एक पादरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस पादरी पर लालच देकर और डरा-धमकाकर हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराने का गंभीर आरोप है। यह पूरा खेल घाटमपुर के नौरंगा गाँव में एक ‘हाउस चर्च’ (घर में बने अवैध चर्च) के जरिए चलाया जा रहा था। पादरी यहाँ आर्थिक रूप से कमजोर हिंदुओं को निशाना बनाता था और उन्हें तरह-तरह के प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए उकसाता था।

पुलिस ने यह कार्रवाई फतेहपुर जिले के जहानाबाद निवासी मुकेश कुमार की लिखित शिकायत के बाद की है। मुकेश की शिकायत के आधार पर पादरी के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई, जिसकी कॉपी ऑपइंडिया के पास उपलब्ध है। गिरफ्तारी के बाद आरोपित पादरी को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

बीमारी ठीक करने के नाम पर धर्मांतरण का धंधा

 यह घटना 13 जनवरी की है, जब पुलिस को सूचना मिली कि नौरंगा गाँव के एक घर के अंदर प्रार्थना सभा चल रही है। खबर मिलते ही बजरंग दल के कार्यकर्ता भी वहाँ पहुँच गए। उन्होंने देखा कि प्रार्थना और बीमारी ठीक करने के नाम पर असल में वहाँ लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। कार्यकर्ताओं ने तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दी। मौके पर पहुँची पुलिस ने वहाँ मौजूद सभी लोगों को हिरासत में लिया और पूछताछ के लिए थाने ले आई।

इस मामले में बजरंग दल के जिला संयोजक शुभम शौर्य अग्निहोत्री ने एसीपी कृष्णकांत यादव को एक लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत में बताया गया कि नौरंगा के एक घर से ‘हाउस चर्च’ चलाया जा रहा था, जहाँ केरल का रहने वाला एल्विन और उसकी पत्नी हिंदुओं को लालच देकर उनका धर्म बदलवाने का काम कर रहे थे।

शुरुआती पूछताछ के बाद पुलिस ने अन्य सभी लोगों को तो छोड़ दिया, लेकिन आरोपित पादरी को हिरासत में ले लिया। इस मामले में मुकेश कुमार की शिकायत पर एफआईआर (FIR) दर्ज की गई, जिसमें पादरी पर लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने और डराने-धमकाने के आरोप लगाए गए हैं।

पुलिस की जाँच और दर्ज शिकायत के मुताबिक, आरोपित पादरी एल्विन ने अपने घर को ही एक ‘हाउस चर्च’ बना रखा था। यहाँ वह नियमित रूप से प्रार्थना सभाएँ और बीमारी ठीक करने (हीलिंग सेशन) के नाम पर कार्यक्रम आयोजित करता था। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इन सभाओं में गरीब और मजबूर हिंदुओं को बुलाया जाता था। उन्हें पैसों का लालच और कई तरह के वादे किए जाते थे ताकि उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए मनाया जा सके।

मीडिया से बातचीत में स्थानीय लोगों ने बताया कि पादरी खुद के पास चमत्कारी शक्तियाँ होने का दावा करता था। उसका कहना था कि उसके घर पर होने वाली प्रार्थना से बड़ी से बड़ी बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं। कई बार तो लोगों को यह तक डराया जाता था कि उनकी बीमारी बुरी ताकतों (प्रेत बाधा) की वजह से है और अगर वे धर्म परिवर्तन कर लेंगे, तभी उन्हें इन बीमारियों से छुटकारा मिलेगा।

जाँच के दौरान पुलिस ने इस तथाकथित हाउस चर्च से कई फाइलें, दस्तावेज और भारी मात्रा में ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार की सामग्री बरामद की है। अब पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या इन सामग्रियों का इस्तेमाल योजनाबद्ध तरीके से हिंदुओं को प्रभावित करने और उन्हें ईसाई धर्म अपनाने का लालच देने के लिए किया जा रहा था।

विदेशी फंडिंग का एंगल

पुलिस की पूछताछ में यह बात सामने आई है कि आरोपित मूल रूप से केरल का रहने वाला है और पिछले करीब दस सालों से नौरंगा इलाके में रह रहा था। शुरुआत में वह किराए के मकान में रहता था, लेकिन बाद में उसने खुद की जमीन खरीदी और 2022 में अपना घर बना लिया। इसी घर को उसने बिना किसी अनुमति के एक ‘हाउस चर्च’ में बदल दिया।
हैरानी की बात यह है कि आरोपित का अपना कोई ज्ञात काम या कारोबार नहीं था, फिर भी वह काफी आराम की जिंदगी जी रहा था। इससे पुलिस को शक है कि उसे विदेश या कहीं और से भारी फंडिंग (पैसे) मिल रही थी। अब पुलिस इस बात की बारीकी से जांच कर रही है कि हाउस चर्च चलाने, प्रार्थना सभाएँ आयोजित करने और अन्य गतिविधियों के लिए पैसा कहाँ से आ रहा था।
अधिकारी इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि आरोपित अकेला ही यह सब कर रहा था या वह किसी ऐसे बड़े गिरोह का हिस्सा है जो अलग-अलग जिलों में धर्म परिवर्तन कराने के काम में लगा हुआ है।

एफआईआर में क्या लिखा है?

ऑपइंडिया के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, यह शिकायत 13 जनवरी को बजरंग दल के कार्यकर्ता मुकेश कुमार ने दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 352 और 351(3) के साथ-साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3 और 5(1) के तहत मामला दर्ज किया है।
मुकेश ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि नौरंगा गाँव में एल्विन नाम के व्यक्ति ने अपने घर को चर्च बना लिया है। वह वहाँ गरीब लोगों को बुलाकर उन्हें तरह-तरह के लालच देता था और ईसाई धर्म अपनाने के लिए उनका ब्रेनवॉश कर रहा था।
शिकायत में आगे कहा गया है कि जब मुकेश अपने दोस्त मनीष सचान के साथ उस चर्च में पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि आरोपित जबरन लोगों को घर के अंदर बिठाकर प्रार्थना करवा रहा था और उन्हें हिंदू धर्म छोड़ ईसाई बनने के लिए उकसा रहा था। जब मुकेश और उनके साथी ने इस पर आपत्ति जताई, तो आरोपित एल्विन ने उन्हें गालियाँ दीं और जान से मारने की धमकी दी, जिसके बाद वहाँ मौजूद लोग घर छोड़कर चले गए।

बजरंग दल के खिलाफ शिकायत

बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के खिलाफ शिकायत पादरी की गिरफ्तारी के बाद उसके परिवार और कुछ स्थानीय लोगों ने पुलिस को एक अलग शिकायत दी है। इसमें आरोप लगाया गया है कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उनके साथ बदसलूकी और मारपीट की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन आरोपों की अलग से जाँच की जा रही है और अगर सबूत मिलते हैं, तो उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

घाटमपुर इलाके में धर्मांतरण के पुराने विवादों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। इससे पहले भी यहाँ इस तरह की कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। पुलिस अधिकारी अब इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या इस पादरी के तार पहले के मामलों से जुड़े हैं। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि पादरी अकेला काम कर रहा था या वह किसी ऐसे संगठित गिरोह का हिस्सा है जो कई जिलों में सक्रिय है।

प्रशासन का कहना है कि जाँच के दौरान मिले दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और पैसों के लेनदेन (फंडिंग) के सबूतों के आधार पर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

माँ दुर्गा को बताया ‘मू*ने वाली देवी’, देवी काली को कहा- ‘डरावना’: पुलिस ने अर्चना बौद्ध को पकड़ा, भीम कथावाचन के नाम पर कैसे फैला रही थी हिंदू घृणा

                    (साभार: यूट्यूब @Archana Singh Buddh Hathras, Gautam Studio Gyanpurwa)

खुद को भीम कथा वाचक बताने वाली अर्चना सिंह बौद्ध कथा के मंच से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का पाठ पढ़ाकर वैचारिक जहर परोस रही है। अर्चना सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है जिसमें वह भगवान हनुमान, भगवान गणेश, माँ दुर्गा और माँ काली को लेकर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणियाँ करती नजर आ रही है।

इस वायरल वीडियो में वह माँ दुर्गा के आठ हाथ, भगवान गणेश के सिर, माँ काली के रुप और भगवान हनुमान के चेहरे का ना केवल मखौल उड़ा रही है बल्कि वह लोगों से कह रही है कि इससे अच्छा तो घर में हीरो-हीरोइन की फोटो लगाओ। हिंदू आस्था को नीचा दिखाकर सस्ती तालियाँ बटोरने की कोशिश कर रही अर्चना का यह वीडियो उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के रसूलाबाद क्षेत्र का बताया जा रहा है। यहाँ मलखानपुर गाँव में अंबेडकर पार्क में भीम कथा का आयोजन किया गया था।

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया। संगठनों का कहना है कि इस तरह के बयान सीधे तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले हैं और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वायरल वीडियो के आधार पर हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में रसूलाबाद कोतवाली पहुँचे और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम का आयोजन गुलाब राम नामक व्यक्ति द्वारा कराया गया था।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और कथावाचक अर्चना सिंह बौद्ध और कार्यक्रम आयोजक गुलाब राम को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस आयोजन की अनुमति जिला प्रशासन से ली गई थी लेकिन कथा के दौरान तय की गई मर्यादाओं और शर्तों का कथित तौर पर पालन नहीं किया गया। हालाँकि, सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे हैं कि उसे जमानत भी दे दी गई है।

काली किसी बच्चे के सामने आ जाए तो एक महिने तक उसका बुखार ना उतरे: अर्चना सिंह बौद्ध

वायरल वीडियो में वह कह रही है, “आठ हाथ हैं दुर्गा महारानी के, हमें तो यहीं नहीं पता है भईया आठ हाथ वाली देवी पैदा हुई होंगी तो कैसे पैदा हुईं होंगी। जिस समय दुर्गा महारानी की मम्मी ने उनको जनम दिया होगा, पता नहीं उनके प्राण कहा रहें होंगे? पता नहीं कौन सा हॉस्पिटल बना है, उस हॉस्पिटल में आठ हाथ वाली देवी का जन्म हुआ होगा। इनके अम्मा-दादा तक का पता नहीं है कि इनके अम्मा-दादा हैं कौन? अगर आठ हाथ वाली देवी तुम्हारे घर में पैदा हो जाए फिर तुम्हें कैसी लगेगी?”
वीडियो में वह आगे कहती है, “तुम लोगों को तो दो हाथ वाले पैदा हों तो दो-दो महिना उठती नहीं, अरे आठ-आठ हाथ वाली देवी मईया कैसे पैदा हुईं होंगी? दिमाग लगाओ तुमलोग अपना, अगर आठ हाथ वाली देवी, ऐसी लड़की तुम्हारे घर में आ जाए तो अच्छी लगेगी? अच्छी नहीं लगेगी ना तो फिर इनकी अपने घर में फोटो और इनकी पूजा भी नहीं करनी चाहिए आप लोगों को। अब हनुमान की कोई सूरत है? हनुमान का मुँह कैसा है? अगर हनुमान जैसा संतान तुम्हारे घर में मिल जाए तो तुम्हें कैसी लगेगी वो संतान? ऐसा गलफुल्ला जैसा हो जाए तुम्हारे घर में तो तुम्हें वो बेटा कैसा लगेगा, अच्छा लगेगा? अच्छा लगेगा आपको हनुमान जैसा लड़का नहीं अच्छा लगेगा ना।”
माँ काली पर अपमानजनक टिप्पणी करते हुए वह कह रही है, “काली मईया का तो रूप ही ऐसा है कि बच्चे को बुखार इतनी जोर का आएगा कि एक महीने तक बुखार नहीं जाएगा उसका है ना? और आप ऐसी काली मईया की पूजा करती हो…अरे अच्छे लोगों का अपने घर में फोटो लगाओ, बाबा साहब का लगाओ, बड़े सुंदर थे बाबा साहब।”

भगवान गणेश का मजाक उड़ाते हुए हीरो-हीरोइन की फोटो लगाने की कही बात

अर्चना बौद्ध की यह घटिया बातें यहीं नहीं रुकी, वह आगे भगवान गणेश का भी मजाक उड़ाती है और कहती है, “अब गणेश भगवान हैं हमे तो यहीं समझ में नहीं आता कि गणेश भगवान आधे इंसान हैं और आधे जानवर हैं अब हमे यहीं नहीं पल्ले पड़ता है कि देखो हाथी का बच्चा भले छोटा हो लेकिन गर्दन उसकी छोटे पर भी मोटी होती है? अब गणेश की गर्दन और हाथी की गर्दन कैसे मैच खाई होगी?”
आगे कहती है, “इंसान की गर्दन तो इतनी सी होती है चार इंची की और गणेश भगवान के ऊपर का जो सर है वो हाथी का लगा है। अब हाथी का बच्चा भी तुम समझ लो तो गर्दन उसकी मोटी होती, लेकिन गणेश भगवान से कैसे मैच खा गया हाथी का सर? सोचने वाली बात है ना। अब हाथी का सर है और पेट इंसान का है अब हमें यहीं नहीं समझ आता है कि वो भोजन कौन सा करते होंगे हाथी वाला करते होंगे या इंसान वाला भोजन खाते होंगे? इन देवी-देवताओं की ना सूरत है, ना अकल है ना शक्ल है, इनसे अच्छा तो आप हीरो-हीरोइन की फोटो लगा लो ताकि अच्छे-अच्छे बच्चे तो पैदा हों।”

कौन है अर्चना सिंह बौद्ध?

अर्चना सिंह हाथरस की रहने वाली है। उसके वीडियोज यूट्यूब पर कई चैनल्स ने अपलोड किए है। हालाँकि, उसका अपना भी एक चैनल है जिसका नाम ‘Archana Singh Buddh Hathras’ है। इस चैनल पर उसके ऐसे ही कुल 554 वीडियोज अपलोड हैं। उसके करीब 4,000 सब्सक्राइबर्स हैं। उसका यह चैनल 25 सितंबर 2019 से चल रहा है।
इसके अलावा एक और चैनल है, जिससे उसके वीडियो शेयर किए गए हैं। इस चैनल का नाम ‘Gautam Studio Gyanpurwa’ है। इस पर अर्चना के अलावा ज्ञानसिंह बौद्ध कासगंज नाम के एक व्यक्ति का भी वीडियो शेयर किया गया है।
वीडियो में वह कह रहा है, “पूड़ी-कचौरी करे गोलगुला और करो गुलभत्ता और पथरा पूज के आई ढोकरिया, ओन्हें चाट गए कुत्ता।” इस वीडियो के थंबनेल में माँ काली की फोटो है, जिसके सामने एक कुत्ते को उन्हें चाटते हुए दिखाया गया है।
इस चैनल पर अर्चना का एक और वीडियो भी है, जिसके थंबनेल में लिखा है, ‘मूतादेवी का अविष्कार’ और नीचे लिखा है ‘कैसे मू**ने वाली देवी का जन्म हुआ।’ वीडियो मे वह माँ दुर्गा के बारे में उल्टी-सीधी बातें कर रही है।

महिषासुर को बताया राजा, माँ दुर्गा को बताया राक्षस की पत्नी

इस लड़की का इसी तरह का एक वीडियो यूट्यूब पर भी अपलोड है। इस वीडियो में वह कह रही है, “हमारा एक राजा हुआ यादव वंश में, जिनका नाम था महिषासुर राजा। जो हमारे समाज के लोग नौ दुर्गा मनाया करते हैं, आखिर ये नौ दुर्गा क्यों मनाया जाता है? कौन थी वो नौ दुर्गा? क्योंकि हमारी माताओं बहनों जो बिहार का राजा था बड़ा वीर बलवान, यादव समाज में जन्मा महिषासुर महाराज।”

वह कहती है, “महिषासुर राजा जब पहाड़ों से कूदा करते थे तो ऐसा लगता था, जमीन चटक जाती थी, ऐसा बल था उनके अंदर। इन मनुवादी लोगों को अच्छा नहीं लगा, इनलोगों को हमारे राजाओं का राज-पाठ अच्छा नहीं लगा तो इनलोगों ने क्या काम किया? ब्राह्मण समाज ने लड़की थी, जिसका नाम था दुर्गा। दुर्गा की शादी, इन्होंने सुंदर-सुंदर लड़कियाँ हमारे राजाओं-पुरखों को लाकर दी, हमारे राजा-पुरखे उन सुंदर-सुंदर लड़कियों में मस्त हो गए लेकिन ये नहीं पता था हमारे राजाओं को कि हमारे साथ में दुर्घटना भी घट सकती है।”

महिषासुर को माँ दुर्गा ने शराब पिलाकर मारा: अर्चना सिंह बौद्ध

वीडियो में वह आगे कहती है, “अपनी लड़की ब्राह्मण लोगों ने महाराज महिषासुर के साथ में शादी कर दी और उस लड़की से कहा देखो हम तुम्हारी शादी कर रहे हैं, लेकिन तुम्हें वहाँ घर नहीं पालना है तुम्हें पानी नहीं पीना है जब तक वो राजा मर ना जाए। दुर्गा की जब शादी महिषासुर के साथ हुई, यादव वंश का राजा था महिषासुर। महिषासुर महाराज के साथ में शादी होने के बाद ये मनुवादी विदेश से शराब बनाकर के लेते आए।”

उसने कहा, “जब शराब बनाकर लेते आए, वो अपनी लड़कियों को शराब दे दी बनाकर के और कहा कि इसे भगवान का प्रसाद बताकर के तुम्हें पिलाना होगा तो महिषासुर से वो लड़की दुर्गा बोली कि ये देखिए ये हमारे यहाँ भगवानों का प्रसाद है। ये प्रसाद तो पी लीजिए तो तुम्हें भगवान की तरफ से आराम मिलेगा। दुर्गा ने उसे इतना नशा करा दिया कि राजा को होश नहीं रहने दिया। एक दिन हाथों में तलवार उठाकर के राजा महिषासुर का बेहोशी में कत्ल कर दिया। कत्ल करने के बाद मेरे धम्मबंधुओं उससे पहले दुर्गा ने क्या काम किया था?”

माँ दुर्गा और महिषासुर के बेटे ने किए दुर्गा के नौ टुकड़े

वह कह रही है, “कत्ल करने के बाद दुर्गा ने महाराजा महिषासुर को मारने के बाद ये महिषासुर की गर्भवती हो गई थी, इसके बाद इसको एक लड़का पैदा हुआ, उसी लड़के का नाम था लांगुरिया। बड़े होने के बाद वो लड़का पूछने लगा कि माँ आज तक तुमने मेरे पिता का नाम नहीं बताया, मेरे पिता कहाँ हैं? तो दुर्गा बताया नहीं करती थी। एक दिन वो लड़का पीछे पड़ गया, आज मेरे पिता जी का पता बताओ।”

अर्चना आगे कहती है, “दुर्गा ने बताया कि तेरे पिता को मैंने मार दिया, जब मारने की खबर सुनी तो उसी लड़के ने हाथों में तलवार उठाकर के दुर्गा के नौ टुकड़े नौ दिशा में जब फेंक दिए, नौ टुकड़े कर के फेंके तब भी मनुवादी लोगों ने अपनी लड़की का पीछा नहीं छोड़ा, तब भी उन नौ टुकड़ों को इकट्ठा कर के नौ नाम दे दिए और कहा इसकी पूजा करो। उसे कहा गया नौ दुर्गा। उसकी हमारी माता-बहनें नौ दुर्गा कह कर पूजा करती हैं यानी तुम्हारे पुरखों का कत्ल किया गया और आप लोगों से उनकी पूजा करवाई गई।”

हिंदुओं के त्यौहार ना मनाने के लिए भड़काया

वीडियो में वह लोगों को भड़काते हुए कहती है, “मेरे समाज के लोगों आप जितने हिंदूवादी सनातनी त्यौहार करते हैं वो हमारे त्यौहार नहीं हैं याद रखना जो जो त्यौहार आता है, उसमें कोई ना कोई तुम्हारे राजाओं-पुरखों का कोई ना कोई रहस्य जरूर छिपा हुआ है। हमारे राजाओं को छल-कपट से मारने का काम किया। धीरे-धीरे इनलोगों ने हमारे दस राजा मार दिए गए, दस राजा मारने के बाद इन लोगों ने भारत पर कब्जा किया।”
वह सबको बताते हुए कहती है, “भारत भूमि बौद्धों की धरती थी, यहाँ हमारे राजा-पुरखों का राज रहा हमेशा और कोई दूसरा व्यक्ति नहीं था लेकिन हमारी माताओं-बहनों 85% ज्यादा है, 15% कम है लेकिन भारत देश में शासन सत्ता किसका होना चाहिए 15% का होना चाहिए, लेकिन अभी किसका सत्ता चल रहा है? ये लोग ताक में है कि संविधान को खत्म कर दिया जाए। लोगों के दिल में संविधान चुभता है, जैसे काँटा पैर में चुभता है।”

मणिपुर हिंसा पर गीत गाते सत्ता चलाने वालों को कहा दुष्ट

इसी तरह मणिपुर हिंसा को लेकर भी उसका एक वीडियो यूट्यूब पर अपलोड है, जिसमें वह मणिपुर हिंसा का दोष उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी दे रही है और कह रही कि इन दुष्टों को धूल चटाना होगा। इस वीडियो में वो गाना गा रही है, “आग लगी है भारत में और सत्ता सो रही दिल्ली में, चप्पा-चप्पा राख हुआ है जाकर देखो मणिपुर में।” इस वीडियो के थंबनेल में प्रधानमंत्री मोदी और सीएम योगी की फोटो लगी हुई है।

अर्चना ने सरोज सरगम से सीखा माँ दुर्गा का अपमान करना?

गौरतलब है कि इससे पहले मिर्जापुर पुलिस ने माँ दुर्गा पर आपत्तिजनक गाने के मामले में मुख्य आरोपित गायिका सरोज सरगम और उनके पति राममिलन बिंद को गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी लोगों के भारी विरोध और सोशल मीडिया पर उठी माँगों के बाद की गई थी। सरोज सरगम ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें उसने माँ दुर्गा के लिए वै$% और रं₹$ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था।
इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों में भारी आक्रोश था। वह भी अर्चना की तरह ही हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ भड़काऊ और अभद्र टिप्पणी कर के पैसे बटोर रही थी। दरअसल इन लोगों का एक उद्देश्य तो ये होता है कि ये लोगों के अंदर से भगवान के प्रति आस्था को खत्म कर सकें और दूसरा उद्देश्य होता है पैसे कमाना, वो भी इस तरह की ओछी हरकतें कर के, क्योंकि ऐसे थंबनेल से ये लोगों को मजबूर करते है कि लोग इनके वीडियो को ओपन करें।

दिल्ली में रह रहे हैं 5000 पाकिस्तानी, IB ने तैयार की लिस्ट: 18 साल पहले क्रिकेट मैच देखने कानपुर आए 28 लोग भी गायब, पहलगाम अटैक के बाद तलाश तेज


भारत में CAA विरोध में बन रहे शाहीन बागों में हुए जमावड़े पर प्रश्नचिन्ह लगाने वालों को विपक्ष और उसके समर्थक मोदी का अंधभक्त बता बदनाम करते थे। शाहीन बागों में जमावड़ा करने वाले कोई भारतीय मुसलमान नहीं बल्कि पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों का था। जो अब सामने आ रहा है। राज्य और केंद्र सरकारों को उन लोगों से भी सख्ती से पेश आना चाहिए जिन्होंने इन लोगों को संरक्षण दिया।
दिल्ली और केंद्र सरकारों को उन सभी के आधार कार्डों की गंभीरता से जाँच करनी होगी। चर्चा यह है, पुष्टि तो नहीं हो पायी है, कि घरों में काम करने वाली दिल्ली और दूसरे राज्यों में भी आधार कार्ड बनवाकर हर सुविधा का लाभ उठा रही हैं। 

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के सभी शॉर्ट टर्म वीजा रद्द कर दिए हैं। इस फैसले के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) ने देशभर में पाकिस्तानी नागरिकों की तलाश शुरू कर दी है। इस बीच, कानपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ साल 2007 में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट सीरीज देखने आए 32 पाकिस्तानी नागरिकों में से 28 पिछले 18 साल से लापता हैं। हैरानी की बात यह है कि कानपुर पुलिस और एलआईयू के पास इनका कोई रिकॉर्ड तक नहीं है।

2007 में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट सीरीज के दौरान कानपुर में ग्रीनपार्क स्टेडियम में मैच हुआ था। इस दौरान कई पाकिस्तानी प्रशंसक भारत आए थे। इनमें से 32 लोग अपने देश वापस नहीं लौटे। ये सभी इक्जम्पटेड फॉर पुलिस रिपोर्ट (ईपीआर) वीजा पर थे, जिसके तहत उन्हें किसी भी जिले में जाने पर पुलिस को सूचना देने की जरूरत नहीं थी। इसी का फायदा उठाकर ये लोग अचानक गायब हो गए। पुलिस ने तलाश शुरू की, लेकिन सिर्फ चार लोगों का पता चला, जिन्हें पाकिस्तान वापस भेज दिया गया। बाकी 28 का आज तक कोई सुराग नहीं मिला। एलआईयू के एडीसीपी राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि ईपीआर वीजा के चलते लापता लोगों की जानकारी जुटाना मुश्किल है।

आईबी ने दिल्ली पुलिस को सौंपी 5000 पाकिस्तानियों की लिस्ट

दिल्ली में भी स्थिति गंभीर है। आईबी ने दिल्ली पुलिस को करीब 5000 पाकिस्तानी नागरिकों की सूची सौंपी है, जिन्हें देश छोड़ने को कहा गया है। फॉरेन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (एफआरआरओ) ने यह सूची दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच को दी है, जो अब जिलों में सत्यापन कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सेंट्रल और नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में सबसे ज्यादा पाकिस्तानी नागरिक रह रहे हैं। मजनू का टीला में करीब 900 और सिग्नेचर ब्रिज के पास 600-700 लोग हैं। दिल्ली पुलिस को दो सूचियाँ मिली हैं, एक में 3000 और दूसरी में 2000 नाम हैं, जिनमें कुछ नाम दोहराए गए हैं। इनका सत्यापन जारी है, क्योंकि कई लोग पहले ही देश छोड़ चुके हैं।
विदेश मंत्रालय ने 27 अप्रैल, 2025 से सभी पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए हैं, सिवाय लॉन्ग टर्म वीजा (एलटीवी), डिप्लोमैटिक और ऑफिशियल वीजा के। मेडिकल वीजा भी 29 अप्रैल तक ही वैध रहेंगे। हालाँकि, हिंदू पाकिस्तानी नागरिकों के एलटीवी को छूट दी गई है। कानपुर में 50 पाकिस्तानी नागरिक एलटीवी पर रह रहे हैं, जिनमें 42 मुस्लिम और 8 हिंदू परिवार शामिल हैं। ये लोग 60 और 90 के दशक में आए थे और यहीं शादी कर बस गए हैं। पुलिस इन पर नजर रख रही है।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने कई कड़े कदम उठाए हैं, जिनमें से वीजा छूट योजना और सिंधु जल संधि को निलंबित करना शामिल है। अब खुफिया एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन लापता पाकिस्तानी नागरिकों को ढूँढना है, जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं है। सुरक्षा एजेंसियाँ इस बात से चिंतित हैं कि ये लोग देश के किसी भी हिस्से में हो सकते हैं। दिल्ली और कानपुर में चल रही तलाश के साथ ही अन्य राज्यों में भी जाँच तेज कर दी गई है।

 

जैसे हिंदू माँ-बहनों का सिंदूर उजाड़ा है, वैसे ही आतंकियों और उनके आकाओं का करेंगे सफाया: CM योगी, पहलगाम में जिसे पत्नी के सामने मारी गोली उसके परिजनों से मिले


जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुस्सा प्रकट किया है। उन्होंने कहा है कि हिन्दू बहन-बेटियों का सिन्दूर उजाड़ा जाए, यह स्वीकार्य नहीं है। सीएम योगी ने यह बातें इस हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी के घर पहुँच कर कही हैं। उन्हें आतंकियों ने पहलगाम में मार दिया था।

सीएम योगी ने कहा, “22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम के अंदर हुए आतंकी हमले में कानपुर का एक परिवार प्रभावित हुआ है… यह एक क्रूर, वीभत्स और कायराना कृत्य है। इसकी देश और दुनिया के हर सभी समाज ने निंदा की है। यह घटना बताती है कि आतंक अपनी अंतिम सांस ले रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “जाति-धर्म पूछ कर हिन्दू बहन-बेटियों के सामने उनका सिन्दूर उजाड़ा जाए, यह कोई सभ्य समाज स्वीकार नहीं कर सकता। भारत में यह कतई स्वीकार्य नहीं है। भारत सरकार की आतंक के प्रति जीरो टोलरेंस की नीति रही है, उसी से इसका खात्मा होगा।”

उन्होंने कहा कि CCS बैठक में लिए गए निर्णयों से आतंक के खात्मे की शुरुआत हो चुकी है। सीएम योगी ने कहा कि पूरे भारत को इस दुखद घड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर विश्वास करना चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि उन्होंने शुभम द्विवेदी के परिवार से उलाक्त कर संवेदना प्रकट की है।

योगी ने स्पष्ट किया कि आतंकी छोड़े नहीं जाएँगे। उन्होंने कहा, “जिस तरीके से हिन्दू माँ-बहनों के सामने उनके सिन्दूर के साथ जो बर्बर कृत्य किया गया है, इसी प्रकार से आतंकियों और उनके आकाओं को इसकी सजा जरूर मिलेगी, इसमें कोई सन्देश किसी को नहीं होना चाहिए।”

योगी ने कहा है कि यह सरकार आतंकियों पर से मुकदमा वापस लेने वाली नहीं बल्कि उनका सफाया करने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि इस घटना के परिणाम अब जो आएँगे, उसको पूरा देश देखेगा। सीएम योगी के साथ इस दौरान और कई बड़े नेता शुभम द्विवेदी के घर मौजूद रहे।

दो माह पहले हुई थी शुभम की शादी

12 फरवरी 2025 को शुभम का विवाह ऐशान्या के साथ हुआ था। शादी के बाद पूरे परिवार ने कश्मीर घूमने की योजना बनाई थी और 17 अप्रैल को वे सभी कश्मीर पहुँचे थे। जिस समय शुभम की हत्या की गई, उस समय वे पत्नी ऐशान्या के साथ घुड़सवारी करने के लिए ऊपर पहाड़ी पर निकले थे। वहीं, शुभम के पिता और अन्य परिजन नीचे ही ही रुक गए थे।
मृतक शुभम की पत्नी ऐशान्या ने बताया कि जब वे घुड़सवारी कर रहे थे, उसी समय हमलावर आए। आतंकियों ने उनसे उनका नाम पूछा और कलमा पढ़ने को कहा। इसके बाद आतंकियों ने उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने आनन-फानन में उन्हें कश्मीर भेजा। कश्मीर के अस्पताल में शुभम की उपचार के दौरान मौत हो गई।

उत्तर प्रदेश : कानपुर में 120 मंदिर बंद मिले: जिन्होंने देवस्थल को बिरयानी की दुकान से लेकर बना दिया कूड़ाघर… वे अब कह रहे हमने कब्जा नहीं किया, हम हैं ‘रखवाले’

कानपुर के मुस्लिम बहुल इलाकों में बंद पड़े 5 मंदिरों में फिर से गूँजेगा शंखनाद, कब्ज़े के शिकार एक मंदिर के आगे मेयर प्रमिला पांडेय (चित्र- वायरल वीडियो स्क्रीनशॉट)
मुस्लिम बहुल इलाकों में मौजूद बंद पड़े हिन्दू मंदिरों को कब्ज़ा मुक्त करवाने की मुहिम अब कानपुर भी पहुँच गई है। यहाँ की मेयर पुलिस फ़ोर्स के साथ शहर के 5 अलग-अलग मंदिरों पर गईं। इन मंदिरों की दुर्दशा पर मेयर ने नाराजगी जताई जिसमें एक के पीछे तो बिरयानी बेची जा रही थी। अब यहाँ की साफ़-सफाई शुरू की जा चुकी है। यहाँ रोज पूजा-अर्चना का ऐलान हुआ है। ऐसे कुल कब्ज़ा प्रभावित मंदिरों की तादाद 100 से अधिक बताई जा रही है। हालाँकि प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद मुस्लिम पक्ष खुद को कब्जेदार नहीं बल्कि मंदिरों का रखवाला बताने में जुट गया है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, बेकनगंज के राम जानकी मंदिर के पीछे रहने वाले नफीस कहते हैं- “मंदिर को जैसे खोलना है, वैसे खोलें। हमको क्या लेना-देना है। मंदिर अलग है, घर अलग है। ये क्षेत्र पहले पुराना सर्राफा था। सारे हिंदू भाई यही रहते थे। फिर वो हिंदू बहुल क्षेत्रों में चले गए। मंदिर चारों तरफ से पैक है। हम लोग मंदिरों की देखभाल करते हैं। 92 के दंगों में हर जगह मंदिरों में तोड़फोड़ हुई। इसको हम लोगों ने बचाया।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार (21 दिसंबर 2024) को कानपुर की मेयर प्रमिला पांडेय 7 थानों की पुलिस फ़ोर्स के साथ मुस्लिम बहुल इलाके बेकनगंज पहुँची। बेकनगंज वही इलाका है जहाँ जून 2022 में मुस्लिम भीड़ ने भाजपा नेत्री नूपुर शर्मा के बयान के विरोध में पुलिस पर हमला कर दिया था। प्रमिला पांडेय को यहाँ कई मंदिरों पर अवैध कब्ज़े की सूचना मिली थी। इसी सूचना पर लगभग आधे घंटे तक वो बेकनगंज में रहीं।

प्रमिला पांडेय ने 30 मिनट के अंदर कुल 5 ऐसे मंदिरों को खोज निकाला जो अवैध कब्ज़े और बदहाली के शिकार हुए थे। इसमें पहले नंबर पर राम जानकी मंदिर है। इस मंदिर पर कानपुर 2022 हिंसा के मुख्य आरोपित मुख़्तार बाबा बिरयानी वाले का कब्ज़ा था। मंदिर के पीछे बिरयानी बनाई जाती थी। स्थानीय लोगों की माना जाए तो लगभग 100 साल पहले वर्ग गज में फैले इस मंदिर का अब बेहद छोटा सा ही हिस्सा शेष बचा है।

वहीं दूसरा मंदिर राधा कृष्ण का है। यह मंदिर बेहद जर्जर हालत में पाया गया। इसी इलाके में तीसरा मंदिर महादेव शिव का मिला। मंदिर में शिवलिंग के अवशेष भर मौजूद मिले। मंदिर के पीछे रिहायशी बस्तियाँ हैं। शिव मंदिर के बाद मेयर व साथ चल रही प्रशासनिक टीम को एक अन्य राधा-कृष्ण मंदिर मिला। इस मंदिर का शटर बंद मिला। शटर खोलने पर अंदर कूड़ा भरा मिला। मेयर प्रमिला ने सभी अवैध कब्जेदारों को फ़ौरन कब्ज़ा हटा लेने का आदेश दिया है। वो मंदिरों की ऐसी हालत देख कर काफी नाराज भी हुईं।

मेयर का ऐलान है कि खोजे जा रहे सभी मंदिरों के जीर्णोद्धार के बाद वहाँ पहले की तरह विधि-विधान से पूजा अर्चना शुरू करवाई जाएगी। मेयर प्रमिला पांडेय ने यह भी कहा कि मंदिर में स्थापित मूर्तियाँ कहाँ गई इसकी जाँच करवाई जाएगी। बताते चलें कि कानपुर नगर निगम के एक सर्वे के मुताबिक शहर के मुस्लिम क्षेत्रों में लगभग 120 मंदिर बंद पड़े हैं। वहीं प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद मुस्लिम पक्ष खुद को कब्जेदार के बजाय मंदिरों का रखवाला बताने में जुट गया है।

उत्तर प्रदेश : ‘हलाला के बाद तुरंत वापस कर दी जाती है बेगम ’ : वायरल हुआ खतना एक्सपर्ट हाजी लल्लू का कार्ड

                          कानपुर के खतना एक्सपर्ट हाजी लल्लू (तस्वीर साभार: X/@Thakur_VishalS)
सोशल मीडिया में एक विजटिंग कार्ड वायरल हो रहा है। इस पर लिखा है ‘हमारे यहाँ बेगम हलाला करने के बाद तुरंत वापस कर दी जाती है’। कार्ड पर मोबाइल नंबर के साथ एक तस्वीर भी छपी है। तस्वीर में दिख रहे शख्स कानपुर के रहने वाले हाजी लल्लू हैं जो ‘खतना एक्सपर्ट’ बताए जा रहे हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब सोशल मीडिया में यह विजटिंग कार्ड वायरल हुआ है। हाजी लल्लू ने ऑपइंडिया से बातचीत में इसे किसी की किसी की शरारत करार दिया है। उन्होंने बताया है कि उनके खतने वाले विजिटिंग कार्ड को किसी ने एडिट कर उस पर हलाला वाली लाइन लिख वायरल कर दी है। इस संबंध में उन्होंने पुलिस से शिकायत करने की बात भी कही है।

हाजी लल्लू ने ऑपइंडिया को बताया कि वे मूल रूप से कानपुर के बाबूपुरवा थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। उनका खानदानी काम खतना करना है। लगभग 70 साल के हो चुके हाजी लल्लू को खतना करते हुए 50 साल हो चुके हैं। वे अब तक हजारों लोगों का खतना कर चुके हैं। ऐसे लोग भी हैं जिनकी 3 पीढ़ियों का खतना हाजी लल्लू ने किया है। साल 2012 में हाजी लल्लू ने अपना विजिटिंग कार्ड छपवाया था।

खतना स्पेशलिस्ट को बना दिया हलाला एक्सपर्ट

हाजी लल्लू के अनुसार लगभग 1 साल पहले किसी ने उनके विजिटिंग कार्ड को एडिट कर दिया। एडिटेड कार्ड में ऊपर की तरफ एक लाइन बढ़ा दी गई। इस लाइन में ‘हमारे यहाँ बेगम हलाला करने के बाद तुरंत वापस कर दी जाती हैं’ लिख दिया गया। हाजी लल्लू बताया कि यह एडिटेड कार्ड वायरल होने के बाद उन्हें लगातार फोन कॉल देश के अलग-अलग हिस्सों से आ रहे हैं।
हाजी लल्लू के मुताबिक उनको फोन करने वालों में हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग हैं। वो हाजी से हलाला के बावत सवाल भी करते हैं। हाजी लल्लू के मुताबिक जब वो जवाब दे कर थक गए तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने का फैसला किया। उन्होंने दावा किया कि 17 फरवरी 2024 को उन्होंने बाबूपुरवा थाना जाकर SHO से अपना कार्ड एडिट करने वाले पर कार्रवाई की माँग की।

बच्चों से ले कर 75 साल तक के बुजुर्ग का भी खतना

हाजी लल्लू ने हमें बताया कि वो बच्चों से ले कर 75 साल तक के वृद्ध व्यक्ति तक का खतना कर चुके हैं। गरीबों से हाजी लल्लू खतने का 100 रुपए और अमीरों से वो 1500 रुपए तक चार्ज करते हैं। उनका दावा है कि उनकी प्रसिद्धि के चलते शहर में अक्सर लोग उनके यहाँ ही खतना करवाने आते हैं। 18 फरवरी 2024 को भी हाजी ने 4 लोगों का खतना करने का दावा किया। उन्होंने यह भी कहा कि खतने को ले कर उनकी प्रसिद्धि अल्लाह की देन है।

मनमोहन सिंह के मंच से दे चुके हैं सम्बोधन

हाजी लल्लू ने बताया कि वे पार्षदी का चुनाव बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर लड़ चुके हैं। उनका यह भी कहना है कि एक बार वे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ भी मंच साझा कर चुके हैं। तब मनमोहन सिंह चुनाव प्रचार के लिए कानपुर आए थे। हाजी खुद को कानपुर से कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल का करीबी बताते हैं। बकौल हाजी लल्लू उनका दिल्ली भी अक्सर आना-जाना लगा रहता है। उन्होंने आशंका जताई है कि उनके बढ़ते राजनैतिक कद और रसूख से जलन रखने वाले किसी शख्स ने ही उनका कार्ड एडिट कर वायरल किया है।

हाजी पहलवान के नाम से भी जानते हैं लोग

खतने के अलावा हाजी लल्लू जड़ी-बूटी बेचने का भी काम करते हैं। उनको हाजी पहलवान नाम से भी जाना जाता है। हाजी लल्लू का दावा है कि जवानी में उन्होंने खूब कुश्ती लड़ी है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि कई बड़े-बड़े डॉक्टर भी उनसे खतना संबंधी मामलों में सलाह लेते हैं। हालाँकि हाजी लल्लू का कहना है कि बढ़ती उम्र की वजह से वे अब बहुत ज्यादा कहीं आते-जाते नहीं हैं।

उत्तर प्रदेश : वीडियो कॉल पर बीवी का आइब्रो देख भड़के मोहम्मद सालिम ने सऊदी अरब से फोन पर ही दे दिया तीन तलाक

       आइब्रो बनवाने से नाराज कानपुर के मोहम्मद सालिम (दाएँ) ने अपनी बीवी को सऊदी अरब से दिया तीन तलाक
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से 3 तलाक का एक मामला सामने आया है। सऊदी अरब में कमाने गए एक व्यक्ति ने फोन करके अपनी बीवी को तीन तलाक दे दिया। तलाक की वजह पीडिता द्वारा आईब्रो बनवा है। पीड़िता ने अपने शौहर सहित ससुराल के कुल 5 लोगों पर दहेज़ के लिए प्रताड़ना देने का भी आरोप लगाया है। पुलिस ने इस मामले में मंगलवार (31 अक्टूबर 2023) को FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला कानपुर के बादशाही नाका थाना क्षेत्र का है। यहाँ रहने वाली पीड़िता का निकाह 17 जनवरी 2023 को प्रयागराज के फूलपुर इलाके के मोहम्मद सालिम से हुआ था। इस निकाह में लड़की के घर वालों ने अपनी हैसियत के मुताबिक दहेज दिया था और बारात की अच्छे से आवभगत की थी। आरोप है कि लड़की पक्ष की तमाम कोशिशों के बावजूद पीड़िता की सास मुज़फ़्फ़री, ननद रुखसार और देवर साकिब व सैफ दहेज़ से संतुष्ट नहीं थे।

शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि उनके शौहर सहित ससुराल के बाकी तमाम लोग दहेज में कार की माँग कर रहे थे। निकाह के 3 माह बाद पीड़िता के शौहर मोहम्मद सालिम कमाने के लिए सऊदी अरब चला गया। इसके बाद पीड़िता के ससुराल के बाकी सदस्य उसे खाने-पीने के अलावा पहनने और ओढ़ने के लिए भी परेशान करने लगे। ससुराल वालों की करतूतों को पीड़िता ने सहा और अपने शौहर के घर लौटने पर सब ठीक हो जाने की उम्मीद बनाए रखी।

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसकी ससुराल के बाकी सदस्य उनके शौहर को भड़काते थे। साथ ही पीड़िता को आए दिन तलाक देने की धमकी भी दी जाती रही। इस बीच 4 अक्टूबर 2023 को पीड़िता के शौहर ने रात लगभग 9:30 पर IMO एप के जरिए वीडियो कॉल की। थोड़ी देर की बातचीत में मोहम्मद सालिम ने पीड़िता पर उसकी मर्जी के खिलाफ आइब्रो बनवाने का आरोप लगाया। पीड़िता की कोई सफाई काम नहीं आई और आखिरकार आरोपित शौहर ने फोन पर उसे तीन तलाक दे दिया।

शिकायत के अंत में पीड़िता ने महज एक साल में ही बेसहारा हो जाने की दलील दी और पुलिस से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करवाई है। तहरीर के आधार पर मोहम्मद सालिम, मुजफ़्फ़री, रुखसार, साकिब और सैफ को नामजद आरोपित बनाया है। सभी पर दहेज़ अधिनियम व तीन तलाक कानून के तहत कार्रवाई की गई है।

आइब्रो बनवाना अजाब का सबब

ऑपइंडिया ने इस मामले में पीड़िता से बात की। पीड़िता ने बताया कि अब वो दुबारा अपनी ससुराल नहीं जाना चाहती। पीड़िता के पिता की मौत हो चुकी है और भाई बाहर कमाने गए हैं। वो अब अपनी माँ के साथ मायके में कुल 4 बहनों के साथ रह रही है। पीड़ित परिवार को आर्थिक संकट से भी गुजरना पड़ रहा है। मोहम्मद सालिम सऊदी अरब में रहकर गाड़ी चलाने का काम करता है।
महिला का कहना है कि उसका शौहर आइब्रो बनवाना गुनाह समझता था और इसे अजाब बताया। सालिम अपनी बीवी को हर बात के लिए टोका करता था। पीड़िता ने कहा कि उसने आइब्रो नहीं बनवाया था, इसके बावजूद इसका आरोप लगाकर उसके शौहर ने फोन पर तीन तलाक दे दिया।

उत्तर प्रदेश : इस्लामी टोपी लगाए लड़के से मारपीट कर हिन्दू विरोधी प्रोपेगंडा फैलाने वाला निकला मोहम्मद फैसल

                                           वीडियो का स्क्रीनग्रैब और अली सोहराब का पोस्ट
उत्तर प्रदेश के कानपुर के जाजमऊ थाना क्षेत्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में एक आदमी टोपी लगाए लड़के के साथ मारपीट करता नजर आ रहा है। इस मामले में पुलिस ने मोहम्मद फैसल नामक आरोपित को हिरासत में लिया है। लेकिन इस्लामवादी इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद आरोपित की गिरफ्तारी को लेकर ‘पुलिस कमिश्नरेट कानपुर नगर’ ने 30 सितंबर को ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट शेयर की थी। इसमें लिखा था, “जाजमऊ थानाक्षेत्र का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक व्यक्ति एक बच्चे को पीटते हुए दिख रहा है। प्रकरण का तत्काल संज्ञान लेकर थाना जाजमऊ पुलिस टीम द्वारा आरोपी मोहम्मद फैसल पुत्र अशरफ को हिरासत में ले लिया गया है, प्रकरण में FIR दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।”

इस पोस्ट के साथ ही पुलिस ने मोहम्मद फैसल की एक तस्वीर भी शेयर की थी। इसमें वह सलाखों के पीछे घुटने टेक कर हाथ जोड़े नजर आ रहा है।

दरअसल, 30 सितंबर को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में फैसल अपनी बाइक से आता नजर आता है। इसके बाद बाइक से उतरते ही वह टोपी लगाए लड़के की ओर बढ़ता है। फिर वह लड़के पर लात-घूँसों की बौछार कर देता है। फैसल पीड़ित को काफी देर तक मारता रहता है। इस दौरान कुछ लोग पीड़ित को बचाने की कोशिश करते भी नजर आ रहे हैं।

                                                                 पोस्ट का स्क्रीनग्रैब

वीडियो सामने आने के बाद इस्लामवादी इस मामले को सांप्रदायिक रंग देकर विवाद पैदा करने की कोशिश में जुट गए। ‘द मुस्लिम 786’ नामक यूजर ने लिखा कि एक दबंग ने पुलिस की जीप के सामने ही मुस्लिम युवक को थप्पड़ मार और लातों से कुचला। बेशक यहाँ पर इस्लामवादी ने हिंदू नहीं लिखा था लेकिन मुस्लिम को थप्पड़ मारे लिखकर अपना एजेंडा सेट करने की कोशिश की।

वहीं एक अन्य इस्लामवादी ने लिखा कि ये लोग पागल हो गए हैं और दंगा करवाना चाहते हैं। मुस्लिम की खामोशी का फायदा उठा रहे हैं। यही नहीं उस यूजर ने पुलिस को अपशब्द कहे।

                                                              पोस्ट का स्क्रीनग्रैब

सलीम खान राणा नामक यूजर ने लिखा, “पुलिस में भी तो काफ़िर ही हैं।” सलीम ने ‘भी’ शब्द का उपयोग कर पहले तो आरोपितों को गैर-मुस्लिम बताया फिर पुलिस को काफ़िर बता दिया।

तथाकथित ‘पत्रकार’ और झूठ फैलाते हुए कई बार पकड़ा जा चुका अली सोहराब ने भी पीड़ित को ‘मुस्लिम युवक’ लिखकर यह बताने की कोशिश की है कि आरोपित किसी अन्य धर्म से है। वरना मुस्लिमों के क्राइम में तो यह चूँ भी नहीं बोलता।

                                                                       पोस्ट का स्क्रीनग्रैब

सलीम खान राना ने एक अन्य पोस्ट में सभी गैर-मुस्लिमों के नरसंहार की धमकी दी। उसने लिखा, “जिस दिन मुस्लिम मैदान में आ जाएगा, काफ़िर दहशत में मर जाएगा।”

उत्तर प्रदेश : सहेली के साथ सेक्स से इनकार करने पर प्रेमिका ने चबाया शादीशुदा बॉयफ्रेंड का गुप्तांग

                                                                                                   प्रतीकात्मक चित्र साभार: Leonardo.ai
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में 2 सहेलियों ने मिल कर एक युवक के प्राइवेट पार्ट पर हमला कर दिया। आरोप है कि दोनों ने मिल कर युवक के गुप्तांग को चबा लिया जिस से पीड़ित घायल हो गया। हमले की वजह युवक द्वारा गर्लफ्रेंड की सहेली के साथ सेक्स करने से इनकार करना बताई जा रही है। युवक ने अस्पताल में अपना इलाज करवाया और फिर घर चला गया। मामले में अभी तक किसी भी पक्ष से पुलिस में शिकायत नहीं दी गई है। घटना रविवार (24 सितंबर, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला कानपुर के चौबेपुर क्षेत्र का है। यहाँ रौतापुर में लगभग डेढ़ साल पहले एक महिला शादी कर के आई थी। महिला का गाँव के ही रहने वाले एक शादीशुदा युवक से पहले परिचय हुआ जो बाद में अवैध संबंधों तक पहुँच गया। युवक का महिला के यहाँ आना-जाना भी शुरू हो गया। रविवार को एक बार फिर से युवक महिला के बुलाने पर उसके घर गया। महिला ने उस दिन अपनी सहेली को भी घर पर बुला रखा था। युवक ने अपनी प्रेमिका से सहेली की मौजूदगी में ही शारीरिक संबंध बनाने शुरू कर दिए।

थोड़ी देर बाद महिला की सहेली ने भी युवक से अपने साथ सेक्स करने को कहा। युवक ने ऐसा करने से मना कर दिया। युवक की प्रेमिका भी उस पर अपनी सहेली के साथ शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालने लगी। हालाँकि, बावजूद इसके युवक इनकार करता रहा। थोड़ी ही देर की बहस के बाद दोनों सहेलियाँ भड़क गईं। उन्होंने युवक पर हमला कर दिया। इस झगड़े के बीच दोनों में से किसी ने युवक का प्राइवेट पार्ट अपने दाँतों से चबा लिया। इस अप्रत्याशित घटना से घायल युवक दर्द से कराहने लगा।

घायल अवस्था में ही पीड़ित युवक अर्धनग्न हालत में घर पहुँचा। पत्नी ने चोट की वजह पूछी तो युवक ने सारी बात बता दी। पीड़ित की बीवी ने 112 नंबर डायल कर के पुलिस बुलाई। पुलिस ने घायल को स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती करवाया। हालत ठीक न होने के चलते युवक को बेहतर इलाज के लिए हैलट अस्पताल भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि हैलट में प्राथमिक चिकित्सा के बाद युवक अपने घर चला गया है।

पुलिस ने मीडिया को बताया कि अभी तक घटना में पीड़ित की तरफ से कोई तहरीर नहीं मिली है। चौबेपुर थाने के इंस्पेक्टर संजय चौबे के अनुसार शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

उत्तर प्रदेश : कानपुर में इस बार नहीं निकलेगा मुहर्रम का पाइकी जुलूस

(प्रतीकात्मक तस्वीर) (फोटो साभार: फैब होटेल्स)
उत्तर प्रदेश के कानपुर में 3 जून को नूपुर शर्मा के कथित बयान के विरोध में जुमे की नमाज के बाद पथराव किया गया था। अब अचानक से शहर के मुस्लिम संगठनों ने इस साल मुहर्रम के दौरान पाइकी जुलूस नहीं निकालने का फैसला किया है, क्योंकि उन्हें जुलूस के दौरान हालात बिगड़ने का डर है। माना जा रहा है कि वे शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर ‘चिंतित’ हैं।

जुलुस न निकाले जाने के पीछे और भी कई कारण बताए जा रहे हैं। सिर्फ नूपुर ही नहीं, और भी वजह हैं, जैसे जगह-जगह रामनवमी जुलुस पर पथराव, कांवर यात्रा में रुकावट डालना, हिन्दू नव वर्ष पर पथराव, फिर नूपुर के समर्थन में हिन्दू के बाहर आने का भी डर सताने लगा है आदि आदि। इसका सारा दोष आम मुसलमान मुस्लिम कट्टरवाद और इसको उकसाने वाली पार्टियों पर डाल रहे हैं। जिस कारण मुसलमान को केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे भारत में बदनामी झेलनी पड़ रही है। 

कोरोना महामारी के कारण बीते दो वर्षों को छोड़कर पिछले 225 सालों से लगातार ये जुलूस निर्बाध रूप से निकाले जाते रहे हैं। इस साल से इसके एक बार फिर से शुरू होने की संभावना थी, लेकिन अब एक बार फिर से इस पर रोक लग गई है। बता दें कि पाइकी जुलूस शहर में मुहर्रम के बड़े जुलूसों में से एक माना जाता है।

पाइकी वे लोग हैं, जो कि काले ‘कुर्ता-पायजामा’ पहने हुए रहते हैं। इनकी पीठ और कंधों पर रस्सियों के साथ घंटियाँ बंधी होती हैं। ये मुहर्रम के जुलूस के साथ इमामबाड़ा, कर्बला और इमाम चौक पर जाते हैं, ‘हाँ हुसैन, या हुसैन’ का नारा लगाते हैं।

तंज़ीम निशान-ए-पाइक कासीद-ए-हुसैन के खलीफा शकील और तंज़ीम-अल-पाइक कासिद-ए-हुसैन के लोग अच्छे मुस्लिमों से चंदा लेकर हर साल जुलूस निकालते रहे हैं। इस बार के जुलूस को लेकर जुलूस के वर्तमान प्रभारी कफील कुरैशी ने कहा कि इस साल मुहर्रम के मौके पर पाइकी जुलूस नहीं निकाला जाएगा। उन्होंने कहा, “शहर के माहौल को ध्यान में रखते हुए इस साल पाइकी जुलूस नहीं निकालने का फैसला किया गया है। हमने लोगों से इस मोहर्रम में अपने घरों में नमाज अदा करने और शहर में अमन बनाए रखने में मदद करने की अपील की है।”

खलीफा ने भी लिया ऐसा ही फैसला

कानपुर शहर के खलीफा शकील ने भी शहर की सख्त कानून व्यवस्था को देखते हुए इस साल पाइकी जुलूस नहीं निकालने की बात कही है। खलीफा ने कहा, “इस साल पाइकी का जुलूस नहीं निकाला जाएगा। प्रशासन को इस बारे में अवगत करा दिया गया है। यह निर्णय 3 जून की हिंसा के बाद शहर के माहौल को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। हमने लोगों से इस तरह के किसी भी काम में शामिल नहीं होने के लिए कहा है।”

कानपुर में रुपए देकर मदरसे के बच्चों से कराई पत्थरबाजी, बिरयानी खिलाकर पढ़ाया गया मजहबी कट्टरता का पाठ: CCTV फुटेज से हुआ खुलासा

                    कानपुर हिंसा में रुपए देकर मदरसे के बच्चों से कराई पत्थरबाजी (तस्वीर-इंडियन एक्सप्रेस)
CAA के विरोध में धरना/प्रदर्शन हो, किसान आंदोलन हो या फिर अब नूपुर के बहाने खेला गया साम्प्रदायिकता का नंगा नाच,सभी में रुपयों के लेन-देन की बात सामने आयी है, जो बहुत चिंताजनक है। फिर प्रदर्शनकारी गरीब, मज़लूम और बेगुनाह आदि कैसे? अब कानपुर दंगे में भी रुपयों का लेन-देन सामने आ रहा है। जिन बच्चों को रुपयों का लालच देकर पत्थरबाज़ी करवाई गयी, यदि यह बात सच है, फिर मास्टरमाइंड के साथ-साथ उन लालची बच्चों के साथ भी उसी सख्ती से पेश आना चाहिए, ताकि भविष्य में लालच में आकर देश की शांति भंग करने का साहस न कर सके। केवल बच्चा समझकर कोई नरमाई नहीं बरती जानी चाहिए। धन का लालच देकर इन्हें कभी भी ख़रीदा जा सकता है। इन बच्चों एवं परिजनों को मिली सरकारी सुविधाओं की ब्याज समेत वसूली की जाए, और भविष्य में भी इन्हें हर सरकारी सुविधा से वंचित किया जाना चाहिए। पूछा जाए पेट्रोल के किसने पैसे दिए, पेट्रोल बम बनाने का सामान और पत्थर कहाँ से और किसने प्रबंध करवाया।   

उत्तर प्रदेश के कानपुर में 3 जून, 2022 को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा के मामले में मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे पुलिस की रडार पर है। हिंसा के दौरान इन बच्चों ने जमकर पत्थरबाजी की और बम फेंके थे। CCTV फुटेज और वायरल फोटो-वीडियो की जाँच से इस बात की पुष्टि हुई है। इस मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के आदेश पर पुलिस ने जाँच शुरू की तो ऐसे कई चौकाने वाले खुलासे हुए। जिन मदरसों के ये बच्चे थे, उन मदरसों को बंद करने के साथ-साथ इन मदरसों के संरक्षकों को ब्लैकलिस्ट किया जाए। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की जाँच में यह बात भी सामने आई है कि जिले में हिंसा कराने के लिए मदरसे के बच्चों को पैसे दिए गए थे। यहाँ तक कि हिंसा से पहले उन्हें कई बार बिरयानी भी खिलाई गई। साथ ही बच्चों को मजहबी कट्‌टरता का भी पाठ पढ़ाया गया था।

कश्मीर में पत्थरबाजी करने के लिए आतंकी समूह भी ऐसा करते रहे हैं। जिससे इलाके के मदरसे में पढ़ने वाले छात्र भी अब पुलिस के रडार पर हैं। इसके अलावा एक बार फिर से कानपुर हिंसा के आरोपितों को पाँच दिन की रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दी गई है। वहीं इस मामले में कानपुर पुलिस जल्द ही जाँच पूरी करके अपनी रिपोर्ट NCPCR को सौंपेगी।

रिपोर्ट के अनुसार, JCP आनंद प्रकाश तिवारी ने बताया, “बच्चों का हिंसा में शामिल होना गंभीर बात है। NCPCR ने भी इसका संज्ञान लेते हुए कानपुर पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा को जाँच का आदेश दिया है। अभी तक कि जाँच में सामने आया कि नाबालिग बच्चों को रुपए देकर हिंसा के लिए डायवर्ट किया गया।”

उन्होंने बताया कि बच्चों तक फंड सीधे नहीं, बल्कि अलग-अलग चैनल से भेजे गए। यानी इलाके के नेताओं और गली-मोहल्ले के लोगों से रुपए बँटवाए गए। जिससे तय समय पर सैकड़ों नाबालिग हाथ में पत्थर लेकर सड़कों पर उतर आए थे और जमकर पथराव और बमबाजी किया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की जाँच में कानपुर के नामी बिल्डर हाजी वसी समेत आठ बिल्डरों का नाम सामने आया है। जिन्होंने कानपुर हिंसा के मास्टरमाइंड हयात जफर हाशमी को फंडिंग करते थे। पुलिस अब इस बात की भी जाँच कर रही है कि कहीं इस पैसे का इस्तेमाल हिंसा फैलाने के लिए तो नहीं किया गया है।

कानपुर (Kanpur ) में 3 जून को इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा की गई हिंसा के दौरान पेट्रोल बमों का इस्तेमाल किया गया था। इसको लेकर अब खुलासा हुआ है कि घटना के 48 घंटे पहले ही चरमपंथियों ने सुनियोजित तरीके से बोतलों में पेट्रोल इकट्ठा किया था। हिंसा के दैरान कानपुर में दंगाइयों ने करीब 50 धमाके किए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथियों ने शहर के डिप्टी पड़ाव स्थित भारत पेट्रोलियम के पंप से बोतलों में पेट्रोल भरवाया था। सीसीटीवी फुटेज से इसका खुलासा होने के बाद कानपुर के जिलाधिकारी ने पेट्रोल पंप का लाइसेंस कैंसिल कर दिया है। इसके साथ ही सभी 37 पंपों की जाँच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम गठित कर दिया था।

‘साइकिल का बटन दबाना है, नया पाकिस्तान बनाना है’: कानपुर में सपा प्रत्याशी के जनसंपर्क अभियान में लगे देश विरोधी नारे

आज मोदी-योगी विरोधियों के दिमाग का लगता है दिवाला निकल गया है। योगी-मोदी विरोध में पाकिस्तान की बोली बोले जाने का चुनाव आयोग को संज्ञान लेकर ऐसी पार्टियों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबन्ध लगाना चाहिए। चुनाव चिन्ह जब्त करना चाहिए। कोई सत्ता में आने पर हिन्दुओं को सबक सिखाने की धमकी देता है तो कोई अन्य बातों से हिन्दुओं में डर बैठाने की बात करता है, यदि स्थिति विपरीत होती ये छद्दम चुनाव आयोग तो क्या कोर्ट तक पहुँच गए होते। जो पार्टी देश विभाजन की बात करे, उसे सियासत से बाहर करने में जनता को इन्हें एक भी वोट न देकर चारों खाने चित कर सबक सिखाना होगा।  
उत्तर प्रदेश के कानपुर में जिन्ना के बाद समाजवादी पार्टी प्रत्याशी का पाकिस्तान प्रेम उजागर हुआ है। बिठूर विधानसभा से सपा प्रत्याशी मुनींद्र शुक्ला के समर्थकों द्वारा पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने की बात सामने आई है। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वायरल वीडियो में “साइकिल का बटन दबाना है, नया पाकिस्तान बनाना है” के नारे सुनाई दे रहे हैं। वहीं वीडियो वायरल होने के बाद यूपी पुलिस इसकी जाँच में जुट गई है।

कानपुर की बिठूर विधानसभा से सपा प्रत्याशी मुनींद्र शुक्ला के समर्थकों ने कथित तौर पर पाकिस्तान के समर्थन में लगाए नारे…
साइकिल का बटन दबाना है पाकिस्तान बनाना है#SamajwadiParty #UttarPradeshElection2022 pic.twitter.com/TcDszINajx

— Alok Kumar (@dmalok) February 4, 2022

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि बिठूर सीट एसपी प्रत्याशी मुनींद्र शुक्ला के समर्थक जनसंपर्क कर रहे थे। इसी दौरान नारे लग रहे थे कि मोहर मारो तान के साइकिल को पहचान के। इसी बीच पाकिस्तान के नारे लगे और ढोल बजने लगा। ट्विटर पर वीडियो वायरल होने के बाद कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने कहा कि वीडियो के स्थान तथा व्यक्तियों के संबंध में जानकारी पता लगाई जा रही है। मामले की पुष्टि होते ही वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि सपा का पाकिस्तान प्रेम नया नहीं है, इसके पहले सपा मुखिया अखिलेश यादव भी जिन्ना की तारीफ कर चुके हैं।

हालाँकि, सपा समर्थकों का दावा है कि वीडियो एडिटेड है। कानपुर की बिठूर विधानसभा सीट से सपा प्रत्याशी मुनींद्र शुक्ला ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि एक कथित वीडियो टिकरा गाँव में जनसंपर्क के दौरान राष्ट्रविरोधी नारा लगाते हुए दर्शाया गया है। ये वीडियो पूरी तरह से भ्रामक है। यह वीडियो विरोधियों की साजिश है। उनके जनसंपर्क के दौरान कहीं भी इस तरह के नारे नहीं लगाए गए हैं। यह वीडियो एडिटेड है।

विधानसभा चुनाव 2012 में एसपी से मुनींद्र शुक्ला ने जीत दर्ज की थी। वहीं, विधानसभा चुनाव 2017 बीजेपी के अभिजीत सांगा ने सपा के मुनींद्र शुक्ला को 58,987 मतों से हराया था। बीजेपी के अभिजीत सिंह सांगा को 1,13,289 वोट मिले थे। वहीं, एसपी के मुनींद्र शुक्ला को 54,302 वोट मिले थे। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में एक दूसरे के धुर विरोधी नेता आमने सामने हैं।