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राष्ट्रवाद का दम भरने वाली बीजेपी और शिवसेना की मौजूदगी में सना मलिक ने महाराष्ट्र विधानसभा में गूंज दिया ‘भारत में शरिया कानून और बहुविवाह…’ और ‘पाकिस्तान प्रेम’

       नवाब मलिक की बेटी सना मलिक ने भारत में शरिया कानून लागू करने की माँग की (फोटो साभार : Loksatta)
ये महाराष्ट्र ही नहीं पूरे देश के लिए डूब मरने की बात है जब अपने आपको राष्ट्रवादी बताने वाली बीजेपी और शिवसेना की मौजूदगी में विधायक सना मलिक ने शरिया, तीन तलाक और बहुविवाह की बात करते पाकिस्तान का उदाहरण दे दिया। सब चुप लेकिन अगर यही बात कांग्रेस या INDI गठबंधन के किसी विधायक ने बोल दी होती विधानसभा से लेकर सड़क तक हंगामा हो रहा होता। लेकिन यह मिसाल दी अजित पवार गुट की NCP की विधायक ने। क्या राष्ट्रवादी मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री में सना के विरुद्ध कार्यवाही करने की हिम्मत है? एक मुस्लिम महिला पत्रकार की बात याद आ जाती कि जब पूछा कि "गैर-मर्द के हमबिस्तर होने पर औरत पाक कैसे हो जाती है?" जवाब मिला "हलाला हमारा होता है और दर्द दूसरों को होता है।"      
महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में NCP (अजीत पवार गुट) की विधायक सना मलिक के एक बयान पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने सदन में चर्चा के दौरान भारत में भी कुरान पर आधारित कानून लागू करने की माँग की। सना मलिक ने तीन तलाक और बहुविवाह (पॉलिगेमी) का जिक्र करते हुए पाकिस्तान का उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान कुरान के नियमों को अपना कानून बना सकता है, तो भारत को भी ऐसा ही करना चाहिए। उनके इस बयान के बाद बीजेपी विधायकों ने सदन में जमकर हंगामा किया और सोशल मीडिया पर भी इसका विरोध हो रहा है।

कौन हैं सना मलिक? अब्बू का सियासी बैकग्राउंड

सना मलिक महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया और चर्चित चेहरा हैं। वह मुंबई के अणुशक्ति नगर विधानसभा क्षेत्र से साल 2024 में पहली बार विधायक चुनी गई हैं। सना मलिक वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व मंत्री नवाब मलिक की बेटी हैं। नवाब मलिक मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, जो बाद में मुंबई आकर राजनीति में सक्रिय हुए।

राजनीति में कदम रखने से पहले सना मलिक एक आर्किटेक्ट और वकील के तौर पर काम कर चुकी हैं। साल 2024 के चुनाव में नवाब मलिक ने अपनी सीट से बेटी सना को उम्मीदवार बनाया था। सना अपनी पार्टी में अल्पसंख्यक और मुस्लिम महिलाओं के मुद्दों पर काफी आक्रामक रुख रखती हैं।

विधानसभा में क्यों शुरू हुई बहुविवाह और तीन तलाक पर बहस?

विधानसभा सत्र के दौरान BJP विधायक देवयानी फरांडे ने तीन तलाक कानून को सख्ती से लागू करने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने सदन को बताया कि पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को आज भी प्रताड़ित किया जा रहा है। देवयानी ने इसके लिए पाकिस्तान का उदाहरण दिया था।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में दूसरे निकाह के लिए पहली बीवी की लिखित अनुमति और एक काउंसिल की मंजूरी जरूरी है। इसी सख्त नियम के कारण पाकिस्तान में बहुविवाह की दर सिर्फ एक प्रतिशत है। उन्होंने महाराष्ट्र में भी ऐसे ही कड़े कानून और समान नागरिक संहिता (UCC) लाने की माँग की।

सना मलिक का विवादित तर्क और ‘पाकिस्तानी प्रेम’

BJP विधायक के बयान पर पलटवार करते हुए सना मलिक ने आक्रामक रुख अपना लिया। उन्होंने दलील दी कि बहुविवाह सिर्फ मुस्लिम समाज में नहीं होता, बल्कि हर धर्म में है। सना मलिक ने कहा कि पाकिस्तान ने कुछ नया नहीं किया, उसने सिर्फ कुरान में लिखे मुस्लिम पर्सनल लॉ को ही कानून का रूप दिया है।

सना मलिक ने आगे कहा, “हम इस्लाम में कुरान की शिक्षाओं को मानते हैं। अगर पाकिस्तान इसे लागू कर सकता है, तो भारत को भी कुरान पर आधारित कानून लाना चाहिए, हम इसकी माँग करते हैं।” उनके इस बयान को लोगों ने हिंदुओं और भारतीय व्यवस्था के खिलाफ एक कट्टरपंथी सोच माना।

BJP का करारा पलटवार: ‘देश संविधान से चलेगा, शरिया से नहीं’

सना मलिक के इस बयान पर BJP विधायक अतुल भातखलकर ने सदन में तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने दहाड़ते हुए कहा कि यह देश केवल भारत के संविधान से चलता है, किसी मजहबी ग्रंथ या कुरान से नहीं। उन्होंने साफ किया कि सदन में पाकिस्तान और शरिया की वकालत करने की कोई जरूरत नहीं है।

वहीं, महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने भी सना मलिक को सीधे जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी कानून किसी धर्मग्रंथ के आधार पर नहीं बनता। कानून समाज में हो रहे अन्याय को रोकने के लिए बनता है, किसी धर्म को निशाना बनाने के लिए नहीं।

नितेश राणे की दो टूक: ‘शरिया चाहिए तो पाकिस्तान चले जाओ’

इस विवाद के बाद महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और BJP नेता नितेश राणे ने सना मलिक पर बेहद तीखा हमला बोला। नितेश राणे ने कहा कि सना मलिक शायद भूल गई हैं कि वह एक हिंदू बहुसंख्यक देश में बैठी हैं। वह भारत की विधायक हैं, पाकिस्तान की संसद में नहीं बैठी हैं।

नितेश राणे ने साफ कहा कि हमारे देश के संविधान में ही समान नागरिक संहिता (UCC) का जिक्र है। जो लोग संविधान की दुहाई देते हैं, वे ही आज धर्म के नाम पर इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर किसी को भारत का कानून पसंद नहीं है और शरिया कानून ही चाहिए, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर पाकिस्तान चले जाना चाहिए।

चौतरफा घिरने के बाद सना मलिक ने दी सफाई

चारों तरफ से घिरने और सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल होने के बाद सना मलिक ने अपने बयान पर सफाई जारी की है। सना मलिक ने दावा किया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। सना ने कहा कि वह पाकिस्तान को कोई आदर्श नहीं मानती हैं।

उन्होंने सिर्फ देवयानी फरांडे के पाकिस्तान वाले संदर्भ पर जवाब दिया था। सना ने कहा कि भारतीय मुसलमान होने के नाते उनका पाकिस्तान से कोई लेना-देना नहीं है। भारत का संविधान उन्हें अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है और उन्होंने केवल मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत बात रखी थी।

मुंबई : बेटी पैदा होने पर मर्चेंट नेवी अफसर तस्लीम मोहम्मद, बीवी को डाक से भेजा तीन तलाक: भाई-बहन-अब्बा सब केस में नामजद

प्रतीकात्मक चित्र
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से तीन तलाक का मामला सामने आया है। यहाँ मर्चेंट नेवी में काम करने वाले एक शख्स ने अपनी बीवी को डाक से तीन तलाक भेजा। ये डाक 2 बार अलग-अलग तारीखों पर भेजे गए। आरोपित का नाम तस्लीम मोहम्मद है। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। आरोपित शौहर के साथ इस केस में उसका अब्बा, भाई, बहन और बहनोई भी नामजद किए गए हैं। तलाक की वजह बेटा न पैदा होना और दहेज़ का लालच बताया गया है।

नवभारत टाइम्स के मुताबिक यह मामला मुंबई के थानाक्षेत्र वकोला का है। यहाँ रहने वाली एक 30 वर्षीया मुस्लिम महिला ने अपने ससुरालीजनों के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में बताया गया है कि साल 2018 में पीड़िता का निकाह तस्लीम मोहम्मद से हुआ था, तब तस्लीम पढ़ाई करता था। उस समय पीड़िता के अब्बा ने दहेज़ में 5 लाख रुपए दिए थे। इस बीच जनवरी 2021 में तस्लीम मोहम्मद को मर्चेंट नेवी में नौकरी मिल गई और वह 9 माह के लिए अपनी शिप पर चला गया।

आरोप है कि तस्लीम मोहम्मद के पानी के जहाज पर जाते ही ससुराल के बाकी सदस्यों ने पीड़िता को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। सबसे पहले घर छोटा होने का बहाना बताकर पीड़िता को उसके मायके भेज दिया गया। इस बीच पीड़िता गर्भवती हुई और एक बेटी को जन्म दिया। बेटी पैदा होने के बाद तस्लीम के घर वालों ने पीड़िता को और ज्यादा तंग करना शुरू कर दिया। बताया गया है कि आरोपित बेटा चाहते थे। इस बीच नवंबर 2023 को पीड़िता की सास की मौत हो गई।

शिकायत में आगे बताया गया है कि सास की मौत की जानकारी मिलते ही पीड़िता अपनी ससुराल पहुँची, तब पीड़िता की ननद ने उसे घर के अंदर घुसने भी नहीं दिया। कुछ दिनों बाद दिसंबर 2023 में तस्लीम मोहम्मद छुट्टी पर घर आया। उसने भी अपने घर के बाकी सदस्यों जैसी हरकत की और जनवरी 2024 को पीड़िता को तीन तलाक का नोटिस भेज दिया। जब पीड़िता ने यह नोटिस लेने से इंकार कर दिया तो उसके शौहर की तरफ से 17 फरवरी को दूसरा और 21 मार्च को तीसरी बार तलाक का नोटिस भेजा गया।

हालाँकि पीड़िता ने इसमें से एक भी नोटिस रिसीव नहीं किया, तब तस्लीम मोहम्मद ने तलाक की यही नोटिस पीड़िता को व्हाट्सएप कर दिया। पीड़िता तलाक के पक्ष में नहीं बताई जा रहीं है। उसने ससुराल में रहने की इच्छा जताई और काउंसिलिंग की माँग की। लेकिन, इन प्रयासों का तस्लीम और उसके घर वालों पर कोई असर नहीं पड़ा। आखिरकार मजबूर हो कर पीड़िता ने अपनी ससुराल पक्ष के कुल 7 आरोपितों के खिलाफ थाने में तहरीर दी।

इस शिकायत पर पुलिस ने तीन तलाक अधिनियम सहित कई अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर ली है। FIR में पीड़िता के शौहर तस्लीम मोहम्मद, ससुर इलियास खान, ननद आफरीन और परमीन, ननद का शौहर बिलाल, देवर इमरान और गुफरान को नामजद किया गया है। इन सभी पर साल 2018 से 2024 के बीच पीड़िता को मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करने, दहेज़ माँगने और तीन तलाक देने का आरोप है। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

निकाह, तीन तलाक, हलाला, फिर निकाह, फिर से तीन तलाक… दहेज़ में कार नहीं मिलने पर ससुराल वालों ने नंगा कर के पीटा, नवजात बच्चा भी मर गया

                                                                                                       प्रतीकात्मक चित्र साभार: Bing AI
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से तीन तलाक और हलाला का मामला सामने आया है। यहाँ लड़की के अब्बा ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को ससुराल में नंगा कर के पीटा गया है। पीड़िता को दहेज़ के लिए भी शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी गई है। देखरेख के अभाव में पीड़िता के बच्चे की भी मौत हो गई। शनिवार (1 जून, 2024) को पुलिस ने महिला के शौहर सहित कुल 6 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। मामले की जाँच की जा रही है।

यह मामला पीलीभीत जिले के थाना क्षेत्र पूरनपुर का है। शनिवार को यहाँ पीड़िता के अब्बा ने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया कि उनकी बेटी का निकाह 21 सितंबर, 2017 को खुर्शीद खाँ से हुआ था। निकाह में खुर्शीद को दहेज़ में बाइक और अन्य घरेलू सामान दिए गए थे। निकाह के कुछ दिनों बाद ही दुल्हन पर घर से 4 पहिया वाहन लाने का दबाव बनाया जाने लगा। कार के लिए पीड़िता को परेशान करने वालों में शौहर खुर्शीद के अलावा जेठ खुशनूद, ससुर फरमूद, ननद तरन्नुम और तबस्सुम के साथ नन्दोई मन्ना भी शामिल थे।

प्रताड़ना के इसी दौर में पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया। ससुराल में देखभाल न होने की वजह से बच्चा कुछ दिनों में बीमार हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई। बीमार बच्चे के इलाज का भी खर्च लड़की के अब्बा ने उठाया। कुछ दिनों के बाद खुर्शीद ने पीड़िता को 3 तलाक दे कर घर से बेदखल कर दिया। पीड़िता की प्रताड़ना यहीं खत्म नहीं हुई। 3 तलाक देने के बाद उसके ससुराल वालों ने पीड़िता का किसी अज्ञात व्यक्ति से हलाला करवाया। हलाला के बाद पीड़िता से खुर्शीद ने फिर निकाह किया और दहेज़ के लिए प्रताड़ना देने लगा।

शिकायतकर्ता ने आगे बताया कि 27 मई 2024 को खुर्शीद, खुशनूद, फरमूद, तरन्नुम, तबस्सुम और मन्ना ने पीड़िता को नंगा कर के बेरहमी से पीटा। पीड़िता का गला दबा कर मार डालने की भी कोशिश की गई। जैसे-तैसे महिला ने अपने आप को बचाया। बाद में खुर्शीद ने एक बार फिर से पीड़िता को तीन तलाक दिया और पुराने कपड़े पहना कर घर से भगा दिया। इन दौरान सभी आरोपितों द्वारा पीड़िता को कहीं भी मुँह खोलने या शिकायत करने पर जान से मार डालने की भी धमकी दी।

अपनी शिकायत में पीड़िता के अब्बा ने सभी आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। इन तहरीर पर खुर्शीद, खुशनूद, फरमूद, तरन्नुम, तबस्सुम और मन्ना को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली गई है। इन सभी पर IPC की धारा 498- A, 323 और 506 के साथ दहेज़ प्रतिषेध अधिनियम के सेक्शन 3/4 और ट्रिपल तलाक एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट : अब मुस्लिम महिलाएँ तलाक के बाद शौहर से ले सकेंगी गुजारा भत्ता : शाहबानो का हक छीन राजीव गाँधी लाए थे जो ‘तुष्टिकरण’ उस पर लगा फुलस्टॉप

सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई 2024 को एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला अपने पूर्व पति के खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का दावा दायर कर सकती है। इसको लेकर मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 1986 धर्मनिरपेक्ष कानून पर हावी नहीं होगा।

शीर्ष न्यायालय की न्यायामूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मुस्लिम महिला के अधिकार को बरकरार रखा। इसको लेकर पीठ ने अलग-अलग, लेकिन सहमति वाले फैसले सुनाए। दरअसल, एक मुस्लिम व्यक्ति ने तेलंगाना हाई कोर्ट के उस निर्देश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे अपनी पूर्व पत्नी को 10,000 रुपए का अंतरिम भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था।

न्यायमूर्ति नागरत्ना ने फैसला सुनाते हुए कहा, “सीआरपीसी की धारा 125 सभी महिलाओं पर लागू होगी, न कि केवल विवाहित महिलाओं पर।” पीठ ने कहा कि यदि धारा 125 के तहत आवेदन लंबित रहने के दौरान संबंधित मुस्लिम महिला तलाक ले लेती है तो वह मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019 का सहारा ले सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह अधिनियम सीआरपीसी की धारा 125 के तहत किए गए उपायों के अतिरिक्त उपाय भी प्रदान करता है। बताते चलें कि सर्वोच्च न्यायालय ने शाहबानो मामले में एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए कहा था कि सीआरपीसी की धारा 125 एक धर्मनिरपेक्ष प्रावधान है, जो मुस्लिम महिलाओं पर भी लागू होता है।

हालाँकि, मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 1986 द्वारा सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को निरस्त कर दिया गया और 2001 में कानून की वैधता बरकरार रखी गई थी। इस अधिनियम के तहत तलाकशुदा मुस्लिम महिला सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की माँग नहीं कर सकती है।

सीआरपीसी की धारा 125 के अनुसार, एक व्यक्ति जिसके पास पर्याप्त साधन हैं वह अपनी पत्नी, बच्चों (वैध या नाजायज) और पिता या माता का भरण-पोषण करने के लिए उत्तरदायी है। इस धारा के अनुसार, ‘पत्नी’ में वह महिला शामिल है, जिसका अपने पति से तलाक हो चुका है और उसने दोबारा विवाह नहीं किया है।

यह मामला तेलंगाना के हैदराबाद के मुस्लिम परिवार का है। मार्च 2019 में एक मुस्लिम महिला ने हैदराबाद की एक पारिवारिक अदालत में एक याचिका दी कि उसका पति अब्दुल समद ने उसे तीन तलाक दिया है। इसलिए उसने सीआरपीसी की धारा 125 के तहत 50,000 रुपए मासिक भरण-पोषण की माँग की। इसके बाद कोर्ट ने जून 2023 में 20,000 रुपए प्रतिमाह भरण-पोषण देने का निर्देश दिया।

अब्दुल समद ने पारिवारिक अदालत के आदेश को तेलंगाना हाई कोर्ट में चुनौती दी और तर्क दिया कि उसने साल 2017 में मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार तलाक लिया था। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उसने अपनी पूर्व पत्नी को ‘इद्दत’ अवधि के दौरान भरण-पोषण के रूप में पहले ही 15,000 रुपए का भुगतान कर दिया है।

इसके बाद हाई कोर्ट ने दिसंबर 2023 में उच्च न्यायालय ने भरण-पोषण की राशि को संशोधित कर 10,000 प्रतिमाह कर दिया। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय को छह महीने के भीतर इस मामले का निपटारा करने का निर्देश दिया। हाई कोर्ट के इस फैसले से अब्दुल समद संतुष्ट नहीं हुआ। उसने सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की।

याचिकाकर्ता मोहम्मद अब्दुल समद के वकील ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष बताया कि मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 1986 के अनुसार, तलाकशुदा मुस्लिम महिला सीआरपीसी की धारा 125 के तहत लाभ का दावा करने की हकदार नहीं है। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया।

मध्य प्रदेश : BJP को वोट देने को शौहर अब्दुल आशिफ मंसूरी ने बताया हराम, तीन-तलाक देकर घर से निकाला

                              वोट दिया बीजेपी को, शौहर ने तलाक देकर निकाला घर से 
भगौने में बहुत सारे चावल होते हैं, लेकिन एक ही चावल देखा जाता है कि चावल पका है या नहीं। ठीक यही स्थिति मुसलमानों की है। भारतीय जनसंघ से लेकर वर्तमान भारतीय जनता पार्टी लाख चाहे मुसलमानों के हितों के लिए चाहे जितने काम कर ले, लेकिन विरोधियों द्वारा इनमे जो 'मुसलमानों की दुश्मन' पार्टी का जहर भरा हुआ है, बाहर निकलेगा, समय लगेगा और ज्यों ज्यों ये जहर निकलना शुरू होगा मुल्लावाद ही नहीं छद्दम सेकुलरिज्म के पैरोकार बने फिर रहे वालों को कहीं मुंह छिपाने की जगह नहीं मिलेगी।  

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में एक मुस्लिम महिला ने बीजेपी की सदस्यता की और बीजेपी के लिए प्रचार किया, तो उसके शौहर ने बीजेपी को वोट देने को हराम बताते हुए उसे तीन-तलाक दे दिया। यही नहीं, शौहर की माँ और बहन से भी उसकी जमकर पिटाई की। उन लोगों ने महिला को घर से निकाल दिया है और महिला किराए के घर में रहने को विवश है। महिला का निकाह 8 साल पहले हुआ था, लेकिन अब तीन तलाक दिए जाने के बाद वो बेघर हो चुकी है। महिला ने शौहर और ससुराल के पक्ष के सदस्यों पर 5 लाख के दहेज के लिए प्रताड़ित करने के भी आरोप लगाए हैं।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, पीड़ित मुस्लिम महिला ने कहा, “8 साल पहले उसका निकाह अब्दुल आशिफ मंसूरी से हुआ। निकाह के बाद से पति, सास व चार ननद मायके से दहेज में 5 लाख रुपए लाने का दबाव बनाकर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना देने लगे। उसे घर से निकाल दिया गया। वह बेटे के साथ किराए के मकान में रह रही है। इस दौरान शौहर अब्दुल आशिफ मंसूरी ने उसके साथ मारपीट कर तीन तलाक बोलकर रिश्ता तोड़ लिया।” महिला ने कहा कि शौहर और परिजनों ने बीजेपी को वोट देने को हराम कहते हुए तीन तलाक दिया है।

 महिला ने छिंदवाड़ा कोतवाली में दी शिकायत में कहा है कि उसके शौहर ने उसे पहले 30 मार्च, 2022 को तलाक दिया और बाद में अक्टूबर और नवंबर 2023 में दो बार तलाक दिया। वहीं, महिला के शौहर ने कहा कि उसके परिवार में किसी ने भी उसे परेशान नहीं किया क्योंकि वह पिछले तीन साल से अलग रह रही थी। तलाक का मुद्दा पहले ही अदालत में दायर किया जा चुका था।

इस मामले में कोतवाली के टीआई उमेश गोल्हानी ने बताया, “पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से प्रभावित होकर उसने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को अपना वोट दिया। उसने बीजेपी के लिए प्रचार भी किया था। इससे महिला का पति, सास व ननद नाराज हो गए। इसके बाद पति ने मारपीट करने के साथ तीन तलाक कहकर उससे रिश्ता तोड़ लिया।”

हरियाणा : तीन तलाक देकर भी बीवी से किया सेक्स, फिर भाई से करवाया हलाला: पीड़िता बोली- सास देती थी मुँह बंद रखने की धमकी

बीवी को 3 तलाक दे कर भाई से करवाया हलाला 
हरियाणा के यमुनानगर जिले से तीन तलाक और हलाला का मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम महिला ने आरोप लगाया है कि उसके शौहर ने पहले उसे 3 तलाक दिया और बाद में देवर ने हलाला किया। हरियाणा पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर ली और केस को सहारनपुर जिले में ट्रांसफर कर दिया। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला यमुनानगर के थाना सिटी कोतवाली का है। यहाँ एक महिला का निकाह 7-8 साल पहले सहारनपुर में हुआ था। इस निकाह से महिला को 2 बच्चे हुए। लेकिन उसके शौहर ने 10 अगस्त 2022 को तीन तलाक दे कर उसे घर से निकाल दिया। आरोपित शौहर सहारनपुर के थानाक्षेत्र नई मंडी का रहने वाला है।

पीड़िता ने इस संबंध में यमुनाननगर पुलिस थाने में शिकायत दी और 22 अप्रैल 2023 को आरोपित शौहर के खिलाफ IPC की धारा 354, 406, 498- A के साथ मुस्लिम वुमेन प्रोटेक्शन राइट ऑन मैरिज एक्ट के तहत FIR दर्ज कर ली गई।

पुलिस का कहना है कि केस दर्ज होने के बाद 4 सितंबर को आरोपित शौहर ने अपनी बीवी से केस वापस लेने की गुहार लगाई। साथ ही उसने फिर से अपनी बीवी को साथ रखने का भरोसा दिया। इसी भरोसा पर पीड़िता के घर वालों ने आरोपित ससुराल वालों से समझौता कर लिया।

2 अक्टूबर को आरोपित शौहर एक बार फिर से पीड़िता के पास यमुनानगर गया। रात को वो अपनी बीवी के साथ रुका और शारीरिक संबंध बनाए। यहाँ वो 2 दिन रुका और 4 अक्टूबर को अपनी बीवी को ले कर सहारनपुर चला गया।

सहारनपुर में आरोपित शौहर अपनी बीवी को घर के आगे उतार कर थोड़ी देर में लौटने की बात कह कर कहीं चला गया। इसी 4 अक्टूबर की ही रात को पीड़िता के देवर ने उसके साथ रेप किया। उसने इस रेप को ‘हलाला’ का नाम दिया और पीड़िता के शौहर के साथ रहने के लिए बेहद जरूरी प्रक्रिया बताया। जब पीड़िता ने अपने देवर की करतूत अपनी सास को बताई तब उसे मुँह बंद रखने की धमकी मिली। साथ ही आरोपित सास ने भी हलाला का समर्थन किया।

मालूम हो कि यमुनानगर पुलिस ने केस में जीरो FIR दर्ज कर के मामले को आगे की जाँच और कार्रवाई के लिए नई मंडी कोतवाली सहारनपुर भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक कुल 5 लोगों को FIR में नामजद किया गया है। इन आरोपितों पर IPC की धारा 376 और 323 के तहत कार्रवाई की गई है।

उत्तर प्रदेश : वीडियो कॉल पर बीवी का आइब्रो देख भड़के मोहम्मद सालिम ने सऊदी अरब से फोन पर ही दे दिया तीन तलाक

       आइब्रो बनवाने से नाराज कानपुर के मोहम्मद सालिम (दाएँ) ने अपनी बीवी को सऊदी अरब से दिया तीन तलाक
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से 3 तलाक का एक मामला सामने आया है। सऊदी अरब में कमाने गए एक व्यक्ति ने फोन करके अपनी बीवी को तीन तलाक दे दिया। तलाक की वजह पीडिता द्वारा आईब्रो बनवा है। पीड़िता ने अपने शौहर सहित ससुराल के कुल 5 लोगों पर दहेज़ के लिए प्रताड़ना देने का भी आरोप लगाया है। पुलिस ने इस मामले में मंगलवार (31 अक्टूबर 2023) को FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला कानपुर के बादशाही नाका थाना क्षेत्र का है। यहाँ रहने वाली पीड़िता का निकाह 17 जनवरी 2023 को प्रयागराज के फूलपुर इलाके के मोहम्मद सालिम से हुआ था। इस निकाह में लड़की के घर वालों ने अपनी हैसियत के मुताबिक दहेज दिया था और बारात की अच्छे से आवभगत की थी। आरोप है कि लड़की पक्ष की तमाम कोशिशों के बावजूद पीड़िता की सास मुज़फ़्फ़री, ननद रुखसार और देवर साकिब व सैफ दहेज़ से संतुष्ट नहीं थे।

शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि उनके शौहर सहित ससुराल के बाकी तमाम लोग दहेज में कार की माँग कर रहे थे। निकाह के 3 माह बाद पीड़िता के शौहर मोहम्मद सालिम कमाने के लिए सऊदी अरब चला गया। इसके बाद पीड़िता के ससुराल के बाकी सदस्य उसे खाने-पीने के अलावा पहनने और ओढ़ने के लिए भी परेशान करने लगे। ससुराल वालों की करतूतों को पीड़िता ने सहा और अपने शौहर के घर लौटने पर सब ठीक हो जाने की उम्मीद बनाए रखी।

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसकी ससुराल के बाकी सदस्य उनके शौहर को भड़काते थे। साथ ही पीड़िता को आए दिन तलाक देने की धमकी भी दी जाती रही। इस बीच 4 अक्टूबर 2023 को पीड़िता के शौहर ने रात लगभग 9:30 पर IMO एप के जरिए वीडियो कॉल की। थोड़ी देर की बातचीत में मोहम्मद सालिम ने पीड़िता पर उसकी मर्जी के खिलाफ आइब्रो बनवाने का आरोप लगाया। पीड़िता की कोई सफाई काम नहीं आई और आखिरकार आरोपित शौहर ने फोन पर उसे तीन तलाक दे दिया।

शिकायत के अंत में पीड़िता ने महज एक साल में ही बेसहारा हो जाने की दलील दी और पुलिस से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करवाई है। तहरीर के आधार पर मोहम्मद सालिम, मुजफ़्फ़री, रुखसार, साकिब और सैफ को नामजद आरोपित बनाया है। सभी पर दहेज़ अधिनियम व तीन तलाक कानून के तहत कार्रवाई की गई है।

आइब्रो बनवाना अजाब का सबब

ऑपइंडिया ने इस मामले में पीड़िता से बात की। पीड़िता ने बताया कि अब वो दुबारा अपनी ससुराल नहीं जाना चाहती। पीड़िता के पिता की मौत हो चुकी है और भाई बाहर कमाने गए हैं। वो अब अपनी माँ के साथ मायके में कुल 4 बहनों के साथ रह रही है। पीड़ित परिवार को आर्थिक संकट से भी गुजरना पड़ रहा है। मोहम्मद सालिम सऊदी अरब में रहकर गाड़ी चलाने का काम करता है।
महिला का कहना है कि उसका शौहर आइब्रो बनवाना गुनाह समझता था और इसे अजाब बताया। सालिम अपनी बीवी को हर बात के लिए टोका करता था। पीड़िता ने कहा कि उसने आइब्रो नहीं बनवाया था, इसके बावजूद इसका आरोप लगाकर उसके शौहर ने फोन पर तीन तलाक दे दिया।