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तीन तलाक की पैरवी करने वाले मुनव्वर राना की सबसे छोटी बेटी हिबा को शौहर से मिले धक्के, गाली और कुटाई: हिस्से में तीन तलाक आई

                    हिबा राना (बाएँ), मुनव्वर राना (दाएँ), (साभार : Aajtak & naidunia & Grok)
‘किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई, मैं घर में सब से छोटा था मिरे हिस्से में माँ आई’
… ये शायर मुनव्वर राना का शेर है। जब मोदी सरकार तीन तलाक के खिलाफ कानून लेकर आई थी, तब मुनव्वर राना और उनका खानदान इस कानून के विरोध में संसद से सड़क तक उतरा था। अब दुर्भाग्य देखिए कि उनकी ही सबसे छोटी बेटी के हिस्से में तीन तलाक आया है।

दरअसल, लखनऊ में मुनव्वर राना की बेटी हिबा राना ने अपने शौहर सैय्यद मोहम्मद साकिब और ससुराल वालों पर तीन तलाक, दहेज के लिए प्रताड़ना और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं। लखनऊ के सआदतगंज थाने में दर्ज FIR के मुताबिक, हिबा को उनके शौहर ने 20 लाख रुपए और एक फ्लैट की माँग पूरी न होने पर बेरहमी से पीटा और ‘तीन तलाक’ बोलकर घर से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया।

यह वही मुनव्वर राना का परिवार है, जिसने केंद्र सरकार के तीन तलाक विरोधी कानून का सड़कों पर उतरकर विरोध किया था। आज वक्त का पहिया ऐसा घूमा है कि जिस कानून को उन्होंने ‘इस्लाम में हस्तक्षेप’ बताया था, आज उसी कानून की धाराओं के तहत हिबा राना न्याय की गुहार लगा रही हैं।

20 लाख की भूख और सुसराल का असली चेहरा

हिबा राना ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि उनकी निकाह 19 दिसंबर 2013 को हुई थी। निकाह के समय उनके परिवार ने अपनी हैसियत से बढ़कर करीब 10 लाख रुपए नकद और सोने-हीरे के आभूषण दिए थे। लेकिन ससुराल वालों की लालच की भूख कभी शांत नहीं हुई। निकाह के कुछ समय बाद ही शौहर और ससुर ने 20 लाख रुपए नकद और एक अलग फ्लैट की माँग शुरू कर दी।

हिबा राना का आरोप है कि इस माँग को पूरा न करने पर उन्हें लगातार शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया गया। कई बार उनके साथ जानवरों की तरह मारपीट की गई और जान से मारने की धमकियाँ दी गईं। हिबा के अनुसार, 9 अप्रैल 2025 को विवाद इतना बढ़ गया कि शौहर साकिब ने उनके साथ गाली-गलौज की और मारपीट शुरू कर दी।

जब हिबा की बहन उन्हें बचाने पहुँची, तो आरोपित और भी भड़क गया। उसने चिल्लाते हुए तीन बार ‘तलाक’ बोला और हिबा को धक्के मारकर घर से बाहर निकाल दिया। इतना ही नहीं, हिबा के दोनों मासूम बच्चों को कमरे में बंद कर दिया गया।

हिबा किसी तरह अपनी जान बचाकर मायके पहुँची और अब पुलिस के पास अपनी सुरक्षा और न्याय के लिए खड़ी हैं। सआदतगंज पुलिस ने शौहर और ससुर के खिलाफ दहेज प्रतिषेध अधिनियम और मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

FIR: आरोपों और धाराओं का जाल

लखनऊ पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (संख्या 31/2026) में हिबा राना ने अपने शौहर सैय्यद मोहम्मद साकिब और ससुर सैय्यद हसीब अहमद को मुख्य आरोपित बनाया है। पुलिस ने इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85 (क्रूरता), 115(2) (चोट पहुँचाना), 351(2) (आपराधिक धमकी) और 352 के साथ-साथ मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम की धारा 3 और 4 लगाई है। यह वही धाराएँ हैं जिनके तहत ‘तीन तलाक’ देना एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है, जिसमें तीन साल तक की जेल का प्रावधान है।

                                                                     सोर्स: यूपी पुलिस

मुनव्वर की बेटी हिबा ने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया है कि कैसे उनके ससुर भी इस दहेज की माँग और धमकियों में शामिल थे। आरोपितों ने उन्हें मानसिक और शारीरिक यातनाएँ दीं। शिकायत में यह भी दर्ज है कि आरोपित शौहर और उसका परिवार लगातार हिबा को डरा-धमका रहा है। हिबा ने अपनी तहरीर में लिखा है कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर भय है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सबूत जुटाने शुरू कर दिए हैं और जल्द ही आरोपितों की गिरफ्तारी हो सकती है। यह FIR एक दस्तावेज है जो बताता है कि जब रसूखदार परिवारों में भी बेटियाँ सुरक्षित नहीं होतीं, तब सख्त कानूनों की कितनी जरूरत होती है।

                                                                       सोर्स: यूपी पुलिस

जब जुबाँ पर था विरोध और हकीकत ने दी पटकनी

आजतक चैनल पर एंकर अंजना ओम कश्यप के साथ बहस के दौरान मुनव्वर राना की बेटी ने इस कानून को लेकर जहर उगला था। उरूसा राना का तर्क था कि तलाक की प्रक्रिया में वक्त इसलिए दिया जाता है ताकि सुलह हो सके, इसलिए कानूनी दखल की जरूरत नहीं है। आज विडंबना देखिए, जिस ‘तीन तलाक’ को ये बहनें अस्तित्वहीन बता रही थीं, उसी के जरिए हिबा को घर से निकाला गया।

जब ‘मजहबी रवायत’ के पैरोकारों पर ही गिरी गाज

यह मामला केवल एक महिला के साथ हुई हिंसा का नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के दोहरे मापदंडों की पोल खोलता है जो प्रगतिशीलता का नकाब ओढ़कर कट्टरपंथी कुरीतियों का समर्थन करते हैं। मुनव्वर राना ने साल 2016-17 में तीन तलाक कानून का खुलकर विरोध किया था।

मुनव्वर राना ने सार्वजनिक मंचों से उलेमाओं का साथ देते हुए कहा था कि सरकार को मजहबी मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया था कि ‘जब मुसलमान किसी दूसरे मुल्क का चाँद देखकर ईद नहीं मनाते, तो पाकिस्तान या बांग्लादेश जैसे कानून से यहाँ के मामले कैसे हल हो सकते हैं?’

मुनव्वर राना और उनकी बेटियों- ‘सुमैया और हिबा’ ने इस कानून को मुस्लिम पुरुषों को फँसाने की साजिश करार दिया था। उनका कहना था कि अगर शौहर जेल चला जाएगा, तो औरत और बच्चों का खर्च कौन उठाएगा? लेकिन आज जब हिबा खुद उसी कुप्रथा का शिकार हुईं, तो उन्हें उलेमाओं के फतवों में नहीं, बल्कि भारतीय संविधान और मोदी सरकार के बनाए उसी कानून में सुरक्षा दिखी। यह विडंबना ही है कि जिन रिवाजों को ये लोग अपनी पहचान का हिस्सा मानते हैं, वही रवायतें जब इनके घर की बेटियों को बेघर करती हैं, तब इन्हें ‘सेकुलर’ और ‘आधुनिक’ कानून की याद आती है।

इस्लामी रवायत बनाम आधुनिक बेड़ियाँ: सोशल मीडिया पर उठे सवाल

यह अक्सर देखा गया है कि एक विशेष विचारधारा के लोग इस्लामी रवायतों के पक्ष में बड़े-बड़े तर्क देते हैं। वे इसे अपनी धार्मिक स्वायत्तता बताते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या कोई रवायत किसी इंसान की गरिमा से बड़ी हो सकती है? मुनव्वर राना जैसे लोग, जो अपनी शायरी में ‘माँ’ और ‘ममताबोध’ की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, वे तीन तलाक जैसी महिला विरोधी प्रथा पर उलेमाओं के साथ खड़े नजर आए थे। इन लोगों के लिए मजहबी पहचान अक्सर मानवाधिकारों से ऊपर हो जाती है। लेकिन हकीकत यह है कि ये रवायतें अक्सर महिलाओं के लिए बेड़ियाँ बन जाती हैं।

हिबा राना का केस यह साबित करता है कि धार्मिक कट्टरता और रूढ़िवाद का समर्थन करना तब तक अच्छा लगता है जब तक आग पड़ोसी के घर में लगी हो। जब अपनी ही बेटी को सड़क पर खड़ा कर दिया गया, तब समझ आया कि ‘तलाक-ए-बिद्दत’ (एक बार में तीन तलाक) कितनी खतरनाक बीमारी है। इन लोगों ने जिस कानून को ‘बेवजह’ बताया था, आज वही कानून हिबा के लिए आखिरी उम्मीद की किरण है।

सोशल मीडिया पर नेटिजन्स अब जायज सवाल पूछ रहे हैं कि जब आप इस कानून के खिलाफ थे, तो अब इसका सहारा क्यों ले रहे हैं? एक यूजर ने लिखा कि हिबा और मुनव्वर राना तो तीन तलाक के कट्टर समर्थक थे। जिस कानून का विरोध कर रहे थे, अब उसी की शरण में जाना पड़ रहा है।

एक यूजर ने तीन तलाक कानून के विरोध करने वालों के लिए लिखा, “कुकर्मों का फल”।

एक अन्य यूजर ने लिखा, “दर्दनाक सच सामने है। ट्रिपल तलाक सिर्फ बहस का मुद्दा नहीं, महिलाओं की ज़िंदगी का सवाल है। आज फिर साबित हुआ- कड़ा क़ानून क्यों ज़रूरी था।”

सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत प्रशांत उमराव ने भी लिखा, “जब ट्रिपल तलाक का कानून बन रहा था तब इसका विरोध करने वालों में प्रमुख शायर मुनव्वर राणा और उनकी बेटियाँ थी। अब दिवंगत शायर मुनव्वर राना की बेटी हिबा राना को उनके शौहर ने तीन तलाक दे दिया है। हिबा राना ने अपने शौहर मोहम्मद साकिब और ससुर हसीब अहमद के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया है।”

दोहरेपन की हार और इंसाफ की पुकार

अंत में, यह मामला मुनव्वर राना के उस पूरे नैरेटिव को ध्वस्त कर देता है जिसमें वे खुद को लोकतंत्र और आजादी का सिपाही बताते थे। साक्षर समाज और प्रभावशाली परिवारों में भी अगर ‘तीन तलाक’ जैसा जहर मौजूद है, तो कल्पना कीजिए कि आम गरीब मुस्लिम महिलाओं का क्या हाल होता होगा। यह कानून किसी मजहब के खिलाफ नहीं, बल्कि उन जालिम मर्दों के खिलाफ है जो अपनी बीवी को एक इस्तेमाल की हुई वस्तु समझकर तीन शब्दों में बाहर फेंक देते हैं।

हिबा राना के साथ जो हुआ वह निंदनीय है, लेकिन उनके परिवार का जो वैचारिक पतन दिखा, वह शर्मनाक है। जिस कानून को मुनव्वर राना और उनकी बेटियों ने कोसते हुए संसद से सड़क तक विरोध किया, आज उसी कानून के नीचे शरण लेना उनकी सबसे बड़ी नैतिक हार है। यह उन तमाम लोगों के लिए सबक है जो तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के लिए महिला अधिकारों की बलि चढ़ा देते हैं। आज मोदी सरकार का वही ‘कड़ा’ कानून हिबा राना को उनके बच्चों की कस्टडी और गुजारा भत्ता दिलाने का आधार बनेगा।

मुंबई : बेटी पैदा होने पर मर्चेंट नेवी अफसर तस्लीम मोहम्मद, बीवी को डाक से भेजा तीन तलाक: भाई-बहन-अब्बा सब केस में नामजद

प्रतीकात्मक चित्र
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से तीन तलाक का मामला सामने आया है। यहाँ मर्चेंट नेवी में काम करने वाले एक शख्स ने अपनी बीवी को डाक से तीन तलाक भेजा। ये डाक 2 बार अलग-अलग तारीखों पर भेजे गए। आरोपित का नाम तस्लीम मोहम्मद है। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। आरोपित शौहर के साथ इस केस में उसका अब्बा, भाई, बहन और बहनोई भी नामजद किए गए हैं। तलाक की वजह बेटा न पैदा होना और दहेज़ का लालच बताया गया है।

नवभारत टाइम्स के मुताबिक यह मामला मुंबई के थानाक्षेत्र वकोला का है। यहाँ रहने वाली एक 30 वर्षीया मुस्लिम महिला ने अपने ससुरालीजनों के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में बताया गया है कि साल 2018 में पीड़िता का निकाह तस्लीम मोहम्मद से हुआ था, तब तस्लीम पढ़ाई करता था। उस समय पीड़िता के अब्बा ने दहेज़ में 5 लाख रुपए दिए थे। इस बीच जनवरी 2021 में तस्लीम मोहम्मद को मर्चेंट नेवी में नौकरी मिल गई और वह 9 माह के लिए अपनी शिप पर चला गया।

आरोप है कि तस्लीम मोहम्मद के पानी के जहाज पर जाते ही ससुराल के बाकी सदस्यों ने पीड़िता को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। सबसे पहले घर छोटा होने का बहाना बताकर पीड़िता को उसके मायके भेज दिया गया। इस बीच पीड़िता गर्भवती हुई और एक बेटी को जन्म दिया। बेटी पैदा होने के बाद तस्लीम के घर वालों ने पीड़िता को और ज्यादा तंग करना शुरू कर दिया। बताया गया है कि आरोपित बेटा चाहते थे। इस बीच नवंबर 2023 को पीड़िता की सास की मौत हो गई।

शिकायत में आगे बताया गया है कि सास की मौत की जानकारी मिलते ही पीड़िता अपनी ससुराल पहुँची, तब पीड़िता की ननद ने उसे घर के अंदर घुसने भी नहीं दिया। कुछ दिनों बाद दिसंबर 2023 में तस्लीम मोहम्मद छुट्टी पर घर आया। उसने भी अपने घर के बाकी सदस्यों जैसी हरकत की और जनवरी 2024 को पीड़िता को तीन तलाक का नोटिस भेज दिया। जब पीड़िता ने यह नोटिस लेने से इंकार कर दिया तो उसके शौहर की तरफ से 17 फरवरी को दूसरा और 21 मार्च को तीसरी बार तलाक का नोटिस भेजा गया।

हालाँकि पीड़िता ने इसमें से एक भी नोटिस रिसीव नहीं किया, तब तस्लीम मोहम्मद ने तलाक की यही नोटिस पीड़िता को व्हाट्सएप कर दिया। पीड़िता तलाक के पक्ष में नहीं बताई जा रहीं है। उसने ससुराल में रहने की इच्छा जताई और काउंसिलिंग की माँग की। लेकिन, इन प्रयासों का तस्लीम और उसके घर वालों पर कोई असर नहीं पड़ा। आखिरकार मजबूर हो कर पीड़िता ने अपनी ससुराल पक्ष के कुल 7 आरोपितों के खिलाफ थाने में तहरीर दी।

इस शिकायत पर पुलिस ने तीन तलाक अधिनियम सहित कई अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर ली है। FIR में पीड़िता के शौहर तस्लीम मोहम्मद, ससुर इलियास खान, ननद आफरीन और परमीन, ननद का शौहर बिलाल, देवर इमरान और गुफरान को नामजद किया गया है। इन सभी पर साल 2018 से 2024 के बीच पीड़िता को मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करने, दहेज़ माँगने और तीन तलाक देने का आरोप है। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

हरियाणा : तीन तलाक देकर भी बीवी से किया सेक्स, फिर भाई से करवाया हलाला: पीड़िता बोली- सास देती थी मुँह बंद रखने की धमकी

बीवी को 3 तलाक दे कर भाई से करवाया हलाला 
हरियाणा के यमुनानगर जिले से तीन तलाक और हलाला का मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम महिला ने आरोप लगाया है कि उसके शौहर ने पहले उसे 3 तलाक दिया और बाद में देवर ने हलाला किया। हरियाणा पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर ली और केस को सहारनपुर जिले में ट्रांसफर कर दिया। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला यमुनानगर के थाना सिटी कोतवाली का है। यहाँ एक महिला का निकाह 7-8 साल पहले सहारनपुर में हुआ था। इस निकाह से महिला को 2 बच्चे हुए। लेकिन उसके शौहर ने 10 अगस्त 2022 को तीन तलाक दे कर उसे घर से निकाल दिया। आरोपित शौहर सहारनपुर के थानाक्षेत्र नई मंडी का रहने वाला है।

पीड़िता ने इस संबंध में यमुनाननगर पुलिस थाने में शिकायत दी और 22 अप्रैल 2023 को आरोपित शौहर के खिलाफ IPC की धारा 354, 406, 498- A के साथ मुस्लिम वुमेन प्रोटेक्शन राइट ऑन मैरिज एक्ट के तहत FIR दर्ज कर ली गई।

पुलिस का कहना है कि केस दर्ज होने के बाद 4 सितंबर को आरोपित शौहर ने अपनी बीवी से केस वापस लेने की गुहार लगाई। साथ ही उसने फिर से अपनी बीवी को साथ रखने का भरोसा दिया। इसी भरोसा पर पीड़िता के घर वालों ने आरोपित ससुराल वालों से समझौता कर लिया।

2 अक्टूबर को आरोपित शौहर एक बार फिर से पीड़िता के पास यमुनानगर गया। रात को वो अपनी बीवी के साथ रुका और शारीरिक संबंध बनाए। यहाँ वो 2 दिन रुका और 4 अक्टूबर को अपनी बीवी को ले कर सहारनपुर चला गया।

सहारनपुर में आरोपित शौहर अपनी बीवी को घर के आगे उतार कर थोड़ी देर में लौटने की बात कह कर कहीं चला गया। इसी 4 अक्टूबर की ही रात को पीड़िता के देवर ने उसके साथ रेप किया। उसने इस रेप को ‘हलाला’ का नाम दिया और पीड़िता के शौहर के साथ रहने के लिए बेहद जरूरी प्रक्रिया बताया। जब पीड़िता ने अपने देवर की करतूत अपनी सास को बताई तब उसे मुँह बंद रखने की धमकी मिली। साथ ही आरोपित सास ने भी हलाला का समर्थन किया।

मालूम हो कि यमुनानगर पुलिस ने केस में जीरो FIR दर्ज कर के मामले को आगे की जाँच और कार्रवाई के लिए नई मंडी कोतवाली सहारनपुर भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक कुल 5 लोगों को FIR में नामजद किया गया है। इन आरोपितों पर IPC की धारा 376 और 323 के तहत कार्रवाई की गई है।