Showing posts with label muslim woman. Show all posts
Showing posts with label muslim woman. Show all posts

मध्य प्रदेश : BJP को वोट देने को शौहर अब्दुल आशिफ मंसूरी ने बताया हराम, तीन-तलाक देकर घर से निकाला

                              वोट दिया बीजेपी को, शौहर ने तलाक देकर निकाला घर से 
भगौने में बहुत सारे चावल होते हैं, लेकिन एक ही चावल देखा जाता है कि चावल पका है या नहीं। ठीक यही स्थिति मुसलमानों की है। भारतीय जनसंघ से लेकर वर्तमान भारतीय जनता पार्टी लाख चाहे मुसलमानों के हितों के लिए चाहे जितने काम कर ले, लेकिन विरोधियों द्वारा इनमे जो 'मुसलमानों की दुश्मन' पार्टी का जहर भरा हुआ है, बाहर निकलेगा, समय लगेगा और ज्यों ज्यों ये जहर निकलना शुरू होगा मुल्लावाद ही नहीं छद्दम सेकुलरिज्म के पैरोकार बने फिर रहे वालों को कहीं मुंह छिपाने की जगह नहीं मिलेगी।  

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में एक मुस्लिम महिला ने बीजेपी की सदस्यता की और बीजेपी के लिए प्रचार किया, तो उसके शौहर ने बीजेपी को वोट देने को हराम बताते हुए उसे तीन-तलाक दे दिया। यही नहीं, शौहर की माँ और बहन से भी उसकी जमकर पिटाई की। उन लोगों ने महिला को घर से निकाल दिया है और महिला किराए के घर में रहने को विवश है। महिला का निकाह 8 साल पहले हुआ था, लेकिन अब तीन तलाक दिए जाने के बाद वो बेघर हो चुकी है। महिला ने शौहर और ससुराल के पक्ष के सदस्यों पर 5 लाख के दहेज के लिए प्रताड़ित करने के भी आरोप लगाए हैं।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, पीड़ित मुस्लिम महिला ने कहा, “8 साल पहले उसका निकाह अब्दुल आशिफ मंसूरी से हुआ। निकाह के बाद से पति, सास व चार ननद मायके से दहेज में 5 लाख रुपए लाने का दबाव बनाकर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना देने लगे। उसे घर से निकाल दिया गया। वह बेटे के साथ किराए के मकान में रह रही है। इस दौरान शौहर अब्दुल आशिफ मंसूरी ने उसके साथ मारपीट कर तीन तलाक बोलकर रिश्ता तोड़ लिया।” महिला ने कहा कि शौहर और परिजनों ने बीजेपी को वोट देने को हराम कहते हुए तीन तलाक दिया है।

 महिला ने छिंदवाड़ा कोतवाली में दी शिकायत में कहा है कि उसके शौहर ने उसे पहले 30 मार्च, 2022 को तलाक दिया और बाद में अक्टूबर और नवंबर 2023 में दो बार तलाक दिया। वहीं, महिला के शौहर ने कहा कि उसके परिवार में किसी ने भी उसे परेशान नहीं किया क्योंकि वह पिछले तीन साल से अलग रह रही थी। तलाक का मुद्दा पहले ही अदालत में दायर किया जा चुका था।

इस मामले में कोतवाली के टीआई उमेश गोल्हानी ने बताया, “पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से प्रभावित होकर उसने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को अपना वोट दिया। उसने बीजेपी के लिए प्रचार भी किया था। इससे महिला का पति, सास व ननद नाराज हो गए। इसके बाद पति ने मारपीट करने के साथ तीन तलाक कहकर उससे रिश्ता तोड़ लिया।”

‘बिना बुर्का के थाने क्यों ले गई पुलिस, उन पर एक्शन लो’: दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की मुस्लिम महिला की याचिका

                                                                                                                             प्रतीकात्मक चित्र
दिल्ली हाईकोर्ट ने मुस्लिम महिला को बिना बुर्का पहनाए थाने ले जाने के मामले में दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में किसी मुस्लिम महिला को बिना बुर्का के थाने ले जाने की कार्रवाई को संवेदनशील मामला बताते हुए पुलिस पर कार्रवाई के साथ भविष्य के लिए निर्देश देने की माँग की गई थी। याचिकाकर्ता रेशमा ने खुद को पर्दानशीं बताते हुए पुलिस पर खुद को बिना बुर्का के पकड़ कर ले जाने का आरोप लगाया था। मामला की सुनवाई शुक्रवार (1 मार्च 2024) को हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला दिल्ली के थानाक्षेत्र चांदनी महल में पड़ने वाले रकाबगंज का है। यहाँ 2 लोगों ने खुद को पीड़ित बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में उन्होंने 3 लोगों पर आरोप लगाया था। याचिकाकर्ता रेशमा इन तीनों आरोपितों की बहन हैं। बताया जा रहा है कि रेशमा ने बालकनी से सारा झगड़ा होते देखा था। दावा यह भी है कि जब रेशमा अपने भाइयों (जो मारपीट के आरोपित हैं) द्वारा 2 लोगों (जो मार खाए, पीड़ित हैं) को पीटते देख रही थीं, तब उन्होंने बुर्का नहीं पहना था।

रेशमा के वकील ने हाईकोर्ट में आरोप लगाया कि सुबह 3 बजे दिल्ली पुलिस उनकी मुवक्किल के घर में घुसी थी। याचिका में इस कार्रवाई के दौरान पुलिस पर अभद्रता करने के साथ रेशमा को घसीट कर थाने ले जाने की भी शिकायत की गई थी।

रेशमा का यह कहना था कि पुलिस पहले से जानती थी कि वह बुर्कानशीं महिला है लेकिन उन्हें पर्दा करने का भी टाइम नहीं दिया गया। याचिका में बुर्का को रेशमा ने अपनी व्यक्तिगत पसंद बताया था और पुलिस पर कार्रवाई की माँग की थी। इस दौरान भविष्य में भी पुलिस को बुर्का वाली महिलाओं के मामलों को संवेदनशील मान कर दिशा-निर्देश देने की माँग उठाई गई थी।

रेशमा के इन तमाम आरोपों पर पुलिस ने भी अपना पक्ष अदालत में रखा। तब पुलिस ने रेशमा द्वारा लगाए गए प्रताड़ना के तमाम आरोपों को गलत बताया था। पुलिस ने यह भी दावा किया था कि खुद रेशमा ने उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए बुलाया था। पुलिस के मुताबिक तब रेशमा को यह डर था कि कहीं वो लोग उन पर हमला न कर दें, जिन्हे रेशमा के 3 भाइयों ने मिल कर पीटा है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और उनके द्वारा पेश किए गए सबूतों पर गौर किया।

याचिका की सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने अपना फैसला सुनाया। जस्टिस शर्मा ने कहा कि पुलिस की जाँच में गोपनीयता जैसी बातों के लिए जगह नहीं हो सकती। अदालत ने सुरक्षा और न्याय को ही सबसे पहली प्राथमिकता बताते हुए कहा कि इन दोनों को सुनिश्चित करने के लिए पहचान आवश्यक होती है। अदालत ने कहा कि धार्मिक या व्यक्तिगत चॉइस के नाम पर प्राइवेसी का अधिकार मिल जाने से इसके दुरूपयोग की आशंका बढ़ेगी और जाँच में रुकावट खड़ी होगी।

अंत में अदालत ने रेशमा की याचिका ख़ारिज कर दी। रेशमा की तरफ से वकील एम सूफियान सिद्दीकी, आलिया, नियाजुद्दीन और राकेश भुंगरा ने बहस की जबकि दिल्ली पुलिस का पक्ष एडिशनल स्टैंडिंग काउंसिल रुपाली बंधोपाध्याय ने रखा था।

सुन्नी मुस्लिमों के दबाव में शरीयत में सुधार की बात करने वाली मुस्लिम महिला को वामपंथियों ने UCC के विरोध में गोष्ठी में बोलने से रोका

                                                                   साभार: AI
समान नागरिक संहिता के नाम पर मुस्लिमों में डर बैठाने वाले बेनकाब होने शुरू हो चुके हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी -मार्क्सवादी (CPIM) ने 15 जुलाई 2023 को सीताराम येचुरी के नेतृत्व में समान नागरिक संहिता (UCC) के विरोध में केरल में एक संगोष्ठी का आयोजन किया है। इस कार्यक्रम में 28 वक्ता हैं। हालाँकि, इन वक्ताओं में एक भी मुस्लिम महिला नहीं है। इस तरह UCC को लेकर मुस्लिम महिलाओं की आवाज को दबा दिया गया है।

कोझिकोड में आयोजित वाली इस जन संगोष्ठी में शहर की मेयर डॉक्टर बीना फिलिप और केरल महिला आयोग की अध्यक्ष पी सतीदेवी को आमंत्रित किया गया है। वहीं, लेखिका डॉक्टर खदीजा मुम्थास ने कहा कि आयोजकों ने उनसे संपर्क किया था, लेकिन उन्हें औपचारिक निमंत्रण नहीं दिया, क्योंकि UCC पर उनके कुछ विचार CPM के विचारों के विपरीत थे।

डॉक्टर खदीजा ने कहा, “उन्होंने (आयोजकों ने) मुझसे कार्यक्रम से पहले एक बैठक के दौरान सेमिनार में बोलने की मेरी इच्छा के बारे में पूछा। उस समय जब मैंने अपने विचार के बारे में बताया तो उनकी प्रतिक्रिया सकारात्मक नहीं थी।” उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाएँ ही मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) की कठिनाइयों का सामना कर रही हैं।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) का कहना है कि UCC शरीयत कानून को खतरे में डाल देगा। दरअसल, शरीयत में विवाह, तलाक और विरासत सहित अन्य मामलों में इसके नियम पुरुषों के लिए उदार हैं जबकि महिलाओं पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसलिए सीपीएम भी इसका आयोजन सिर्फ अपने राजनीतिक फायदे के लिए ही करती दिख रही है।

‘फोरम फॉर मुस्लिम वीमेन्स जेंडर जस्टिस’ की अध्यक्ष डॉक्टर खदीजा कहती हैं, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूसीसी को लागू करने की बात कही है। उन्होंने कहा, मुस्लिम महिलाओं द्वारा सामना किए जाने वाले मुद्दे अभी भी एक वास्तविकता हैं। इस संदर्भ में, UCC पर चर्चा के लिए सेमिनार में मुस्लिम महिलाओं को वक्ता के रूप में शामिल किया जाना चाहिए।”

हालाँकि, डॉक्टर खदीजा समान नागरिक संहिता के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि उनका मानना है कि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एजेंडे को पूरा करता है। उनका कहना है, “मैं मुस्लिम पर्सनल लॉ में सुधार के पक्ष में हूँ। नियमों में सुधार होना चाहिए। मैंने उनसे (सीपीएम सेमिनार आयोजकों से) कहा कि अगर मैं वक्ता रहूँगी तो मैं इस रुख को उठाऊँगी।”

मुस्लिम पर्सनल लॉ में सुधार के लिए आंदोलन चलाने वालीं NISA के संस्थापक वीपी ज़ुहारा ने कहा, “वे मुस्लिम महिलाओं को मंच पर आमंत्रित नहीं कर सकते, क्योंकि वे समस्त (केरल जेम-इयाथुल उलमा) नेताओं को खुश करना चाहते हैं। वे विधायक कनाथिल जमीला जैसे नेताओं या अपने संगठनों के अन्य वक्ताओं को आमंत्रित कर सकते थे।”

ज़ुहारा ने कहा वह समान नागरिक संहिता लागू करने की माँग लंबे समय से करती आ रही थीं, लेकिन अब चिंतित हैं। उन्होंने कहा, “NISA समान नागरिक संहिता को लागू करने की माँग करता आ रहा था, लेकिन वर्तमान में हम केंद्र सरकार के एजेंडे को लेकर चिंतित हैं। अब हम मुस्लिमों को भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के तहत शामिल करने की माँग करते हैं।”

ऑन मनोरमा से बात करते हुए केरल के लेखक और सामाजिक आलोचक डॉक्टर हमीद चेन्नामंगलूर ने हाल ही में एक साक्षात्कार में सीपीएम सेमिनार में मुस्लिम महिलाओं की अनुपस्थिति के बारे में बात की। उन्होंने कहा था कि यह समस्त (केरल जेम-इयाथुल उलमा) के नेताओं को नाराज़ करने से बचने के लिए है।” यह सेमिनार शनिवार को शाम 4 बजे होगा। इसके बाद केरल के हर जिले में इस तरह का आयोजन किया जाएगा।

केरल में सुन्नी मुस्लिमों का सबसे बड़ा संगठन Samastha (समस्त) है। इसके सदस्यों में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (Indian Union Muslim League- IUML) के प्रमुख नेता भी शामिल हैं। सेमिनार में ‘समस्त’ नेताओं के अलावा एपी सुन्नी गुट के नेता कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार भी बोलेंगे। इसके अलावा, सेमिनार में केरल कॉन्ग्रेस (M) और जनता दल (सेक्युलर) सहित सभी प्रमुख वामपंथी सहयोगी दल भी भाग लेंगे।

वहीं, ‘समस्त’ से जुड़े The Samastha Kerala Sunni Mahallu Federation (SKSMF) के अध्यक्ष अब्दुसमंद पूकोतूर ने कहा कि सीपीएम पिछले रूख को देखते हुए इसके आयोजन पर शंका होती है। उन्होंने कहा कि सीपीएम पर्सनल लॉ में सुधार की हिमायती रही है और यह बात इस वामपंथी पार्टी के नंबुदरीपाद जैसे पूर्व नेताओं ने कही है।

‘यहाँ भाई-बहन की आपस में शादी नहीं होती’: बागेश्वर धाम के मंच पर सुल्ताना बेगम ने अपनाया हिन्दू धर्म

                                                             फोटो क्रेडिट: बागेश्वर धाम सरकार फेसबुक पेज
बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेन्द्र शास्त्री (Mahant Pandit Dhirendra Shastri) के मँच पर 21 जनवरी 2023 को एक मुस्लिम महिला सुल्ताना बेगम (Sultana Begum) ने सनातन धर्म अपना लिया। धीरेन्द्र शास्त्री ने इनदिनों छत्तीसगढ़ में अपना दरबार लगाया हुआ है। वहीं पर सुल्ताना बेगम ने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म अपना लिया। उल्लेखनीय है कि पंडित धीरेन्द्र शास्त्री पर कुछ लोग अंधविश्वास फैलाने के आरोप लग रहे थे।

इस संबंध में ‘रिपब्लिक टीवी’ ने एक ट्वीट किया है, जिसमे मुस्लिम महिला सनातन धर्म को स्वेच्छा से अपनाती हुई देखी जा सकती है। वीडियो में 26 सेकेंड के बाद पंडित धीरेन्द्र शास्त्री कहते हैं कि आज यह बहन ने अपनी इच्छा से बालेश्वर बालाजी का चमत्कार देखकर और सनातन हिंदू धर्म को सर्वोपरि मानकर हिंदू धर्म में आना चाह रही हैं। इसके बाद मुस्लिम महिला कहती हैं, “मेरा नाम सुल्ताना है। मैं छतीसगढ़ बिलासपुर से हूँ। मेरे पिता का नाम आमिर खान है और माता का नाम सरवरी बेगम है। मैं मूर्ति पूजा करती हूँ, इसलिए मेरे घर वालों ने मुझे त्याग दिया है। मुझे ये लोग कहते हैं कि मैं मुस्लिम के नाम पर कलंक हूँ। मरूँगी तो जहन्नुम जाऊँगी।”

महिला आगे कहती हैं, “मेरा मन बोलता है कि हिन्दू धर्म से अच्छा कोई धर्म हो ही नहीं सकता है। क्योंकि यह धर्म सभ्यता वाला धर्म है, संस्कारों वाला धर्म है। इसमें भाई-बहन में शादियाँ नहीं होती। इसमें औरतों की जिंदगी बर्बाद नहीं होती। इसमें तीन तलाक नहीं होता। इसमें एक बार शादी होती है सात फेरों की, जिसमें सिंदूर का महत्व होता है, मंगलसूत्र का महत्व होता है। पूरे सोलह श्रृंगार का महत्व होता है। मैं लड्डू गोपाल की भी पूजा करती हूँ।”

इस संबंध में बागेश्वर धाम सरकार के फेसबुक पेज से भी पोस्ट किया गया है। पोस्ट के कैप्शन में लिख है, “आज (21 जनवरी, 2023) दिव्य दरबार में बागेश्वर धाम सरकार के मंच पर मुस्लिम महिला ने हिन्दू धर्म स्वीकार किया।”    

कुछ दिन पहले जब महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराष्ट्र गए थे तो वहाँ कथा के समापन के बाद ‘महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ के राष्ट्रीय संयोजक श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था। साथ ही, उन्होंने कहा था कि उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को चुनौती थी। इसलिए वे दो दिन पहले ही नागपुर से भाग गए। वहीं पूरे विवाद पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा था कि उनकी प्रेरणा से लोग सनातन धर्म में वापसी कर रहे हैं।

इसलिए, मिशनरी के लोग करोड़ों खर्च कर उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। वहीं अब धीरे-धीरे महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को मिल रहा समर्थन बढ़ता जा रहा है। बाबा रामदेव भी अब उनके समर्थन में आगे आ गए हैं।