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‘प्रसाद खाने से लौटी बेटे की आँख की रौशनी’ : रानी बेगम और जुनैद द्वारा इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने पर मिल रही कत्ल की धमकियाँ

कानपुर में मंदिर के प्रसाद से बेटे की आँखें ठीक हुई तो मुस्लिम महिला बनी हिन्दू (चित्र साभार- @tusharcrai)
उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक मुस्लिम महिला ने अपने बेटे सहित हिंदू धर्म अपना लिया है। दिव्यांग रानी बेगम नाम की इस महिला का दावा है कि मंदिर का प्रसाद खाने से उनके बेटे जुनैद की आँखों की रौशनी लौटी आई है। जुनैद की आँखें बचपन में ही खराब हो गईं थीं। हिंदू धर्म अपनाने के बाद जुनैद को अब उसकी ससुराल से मौत की धमकियाँ मिल रहीं हैं। शुक्रवार (9 जून 2023) को जुनैद ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस ने इन धमकियों का संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला कानपुर के बाबूपुरवा का है। यहाँ एक किराए के मकान में दिव्यांग महिला रानी बेगम अपने 26 वर्षीय बेटे जुनैद के साथ रहती है। रानी के शौहर खुर्शीद का इंतकाल काफी समय पहले हो गया था। रानी का दावा है कि हिंदू धर्म में उनकी आस्था बचपन से थी। जुनैद के जन्म के समय उनकी आँखों में कुछ दिक्कत थी। थोड़े समय बाद उनके बेटे को पूरी तरह से दिखना बंद हो गया। रानी ने अपने बेटे का कई जगहों पर इलाज करवाया लेकिन उस से कोई फायदा नहीं हुआ।

रानी बेगम कुछ समय तक कानपुर के भाजपा नेता सतीश महाना के घर भी किराए पर रहीं हैं। इस दौरान उनकी एक हिंदू पड़ोसन उन्हें ले कर शोभन सरकार के मंदिर गईं। रानी का दावा है कि यहाँ मिले प्रसाद से उनके बेटे की आँखों की रौशनी लौट आई। इस चमत्कार के बाद रानी और उनके बेटे की हिंदू धर्म में और आस्था बढ़ गई। इस बीच जुनैद की शादी साल 2019 में कानपुर के ही बिंदकी इलाके की रहने वाली एक लड़की से हुई। जब लड़की के घर वालों को जुनैद की हिंदू धर्म में आस्था के बारे में पता चला तो वो काफी नाराज हुए।

हालाँकि जुनैद इस बीच में भगवा वस्त्र पहनने लगे थे और हाथों में अक्सर भगवान गणेश की मूर्ति रखा करते थे। आरोप है कि इन बातों से नाराज हो कर जुनैद की ससुराल वालों ने एक बार रानी बेगम को करेंट से मारने की भी साजिश रची। गले में रुद्राक्ष की माला डाल कर मीडिया से बात करते हुए जुनैद ने कहा, “भगवा वस्त्र हमें सुकून देता है। हिंदुओं ने हमारे साथ हमेशा अच्छा किया है। हम उन्हीं के बीच रहते आए हैं। गणेश जी हमारे लिए बहुत शुभ हैं। वो 5 वर्षों से घर में विराजमान हैं। समस्या सिर्फ ससुराल वालों से है। वो हमारे कत्ल की धमकी दे रहे हैं।”

जुनैद ने इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस से की लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार 9 जून को जुनैद कानपुर के DCP दक्षिणी शिवजी शुक्ला से मिला और अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई। DCP के निर्देश पर पुलिस ने जुनैद को उनकी ससुराल से मिल रही धमकियों पर जाँच शुरू कर दी।


असम : 142 लोगों ने ईसाई मजहब को अलविदा कह हिन्दू धर्म अपनाकर की घर वापसी

असम में 142 लोगों ने घर वापसी कर ली। इन सभी ने ईसाइयत छोड़ सनातन धर्म को अपनाया है। इसे असम में हुई अब तक सबसे बड़ी घर-वापसी कहा जा रहा है। इसको लेकर राज्य की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार भी चर्चा में है। चर्चा का कारण यह है कि घर-वापसी को भाजपा हिमंता सरकार की नीतियों का प्रभाव बता रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घर-वापसी का यह कार्यक्रम सोमवार (27 फरवरी, 2023) को मोरीगाँव जिले के जागीरोड़ के तिवासोंग गाँव में हुआ। यहाँ सनातन धर्म संस्कृति के अनुसार यज्ञ तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के बाद सभी लोगों ने हिंदू धर्म अपना लिया।

इस घर-वापसी को लेकर गोबा देवराजा राज परिषद के महासचिव जुरसिंह बोरदलोई का कहना है कि इस घर-वापसी कार्यक्रम में जनजाति समुदाय के 142 लोगों ने अपनी इच्छा से घर वापसी की है। स्थानीय तिवा जनजाति के लोगों ने प्रलोभन व अन्य कारणों के चलते ईसाई मजहब अपना लिया था। लेकिन। अब इन लोगों ने गोबा देवराजा राज परिषद संस्था से संपर्क किया था। इसके बाद यह कार्यक्रम आयोजित कर घरवापसी कराई गई।

बोरदलोई ने यह भी कहा कि घर-वापसी करने वाले इन सभी लोगों ने हमेशा हिंदू धर्म में आस्था और विश्वास रखने का वचन दिया है। घर-वापसी करने वाले तिवा जनजाति के ये लोग जन्म से हिंदू थे। लेकिन इनके दादा-दादी ने गरीबी तथा शिक्षा की कमी के चलते भ्रमित होकर ईसाई बन गए थे। बोरदलोई ने यह भी कहा है कि वह और उनका संगठन घरवापसी करने वाले सभी लोगों का हरसंभव सहयोग करेंगे।

गोबा देवराजा राज परिषद के महासचिव जुरसिंह बोरदलोई ने यह भी कहा है कि कहा है कि सभी 142 लोगों के जीवन में किसी प्रकार की समस्या न हो इसके लिए वह प्रयास करते रहेंगे। सभी को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

बोरदलोई ने दावा किया है कि तिवा जनजाति के करीब 1100 परिवार के लोगों ने सनातन धर्म में घर-वापसी करने का फैसला किया है। घर-वापसी करने वालों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, इसके लिए तिवा परिषद द्वारा स्कूलों की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा इन सभी के नाम मतदाता सूची में जोड़ने तथा राशनकार्ड बनवाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

जनजातियों के हित की बात करने वाले जनजाति सुरक्षा मंच असम और तिवा देवराजा परिषद ने माँग की है कि असम सरकार ईसाई धर्म अपनाने वालों का अनुसूचित जनजाति का दर्जा रद्द कर दे, ताकि उन्हें अल्पसंख्यक और अनुसूचित जनजाति होने का दोहरा लाभ ना मिल सके। वहीं, भाजपा विधायक पीयूष हजारिका ने दावा किया है कि हिमंता सरकार की नीतियों से प्रभावित होकर इन सभी ने घर-वापसी की है।

‘रामचरितमानस घोषित हो राष्ट्रीय ग्रन्थ’: बागेश्वर धाम में मिशनरियों के चंगुल में फंसे 220 लोगों ने की घर-वापसी

बागेश्वर धाम में पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की मौजूदगी में 220 धर्मांतरित ईसाइयों ने की घर-वापसी (साभार; आज तक)
मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम में पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की मौजूदगी में 220 धर्मांतरित ईसाइयों ने हिन्दू धर्म में घर-वापसी की है। इससे पहले भी वहाँ बालाजी के दरबार में घर-वापसी के कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। बता दें की दशकों से मिशनरियों ने गरीब इलाकों, खासकर दलितों और जनजातीय समाज को निशाना बनाया हुआ है। उन्हें लालच देकर उनका धर्म-परिवर्तन कराया जाता है। उनमें हिन्दू धर्म के प्रति घृणा भरी जाती है।

सभी 220 लोगों को पीले रंग की पट्टिका पहनाई गई थी, जिसके बाद उनकी घर-वापसी कराई गई। ‘हिन्दू जागरण मंच’ की इस कार्यक्रम में मुख्य भूमिका रही, जो इन लोगों को लेकर यहाँ पहुँची थी। बुंदेलखंड इलाके के टपरियन, बनापुर, चितौरा और बम्हौरी सहित कई गाँवों के लोग घर-वापसी करने वालों में शामिल हैं, जिन्हें मिशनरियों ने बरगला लिया था। पीठाधीश्वर शास्त्री ने इस दौरान उन लोगों से अपील की कि वो प्रतिदिन मंदिर जाएँ।

घर-वापसी करने वालों ने बताया कि ईसाई मिशनरियों ने उन्हें घर देने का लालच दिया था, जिसके बाद उन्होंने हिन्दू धर्म को छोड़ दिया था। हालाँकि, वादा नहीं निभाया गया और उन्हें घर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि वो अपनी मर्जी से घर-वापसी कर रहे हैं। धीरेन्द्र कृष्ण ने कहा कि शनिवार और मंगलवार को लोग हनुमान जी के मंदिर जाया करें। उन्होंने दोहराया कि वो किसी पंथ के विरोधी नहीं, लेकिन अपने धर्म के कट्टर हैं।

उन्होंने कहा कि भूल सबसे होती है। उन्होंने खुद के बारे में कहा कि उन्हें लोकप्रियता नहीं चाहिए। पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित करने और भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की भी माँग की। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि राजनीतिक पार्टियाँ आशीर्वाद के अलावा उनसे और कोई अपेक्षा न रखें। घर-वापसी करने वालों में 62 परिवार के लोग शामिल हैं। ये लोग बसों में सवार होकर आए थे। उन्होंने बताया कि ईसाइयों के प्रभाव में आकर वो चर्च तक जाने लगे थे।

हाल ही में बागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि के मौके पर आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में 125 जोड़े विवाह बंधन में बंधे थे। इसमें शामिल हुई 125 लड़कियों में से 58 ऐसी लड़कियाँ थीं, जिनके माता या पिता का निधन हो चुका है, यानी वो अनाथ थीं। इससे पहले यहीं एक मुस्लिम महिला सुल्ताना बेगम ने सनातन धर्म अपनाते हुए कहा था कि यहाँ भाई-बहन की आपस में शादी नहीं होती। क्रिसमस 2022 के दिन पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की रामकथा के दौरान भी दमोह में 300 लोगों ने घर-वापसी की थी।

‘इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं धीरेन्द्र शास्त्री’: भारत हिंदू राष्ट्र कभी नहीं बन सकता : घर वापसी पर मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी, ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Krishna Shastri) की बढ़ती लोकप्रियता के बीच उन पर इस्लाम के खिलाफ प्रचार करने का आरोप लगा है। यह आरोप ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने लगाया है।
धीरेन्द्र शास्त्री के विरोध का मूल कारण अब धीरे-धीरे मुखरित होने लगा है। मुस्लिम कट्टरपंथियों और इनके सियासतखोर कुर्सी के भूखे नेताओं का बेचैन होना स्वाभाविक है। क्योकि ईसाई एवं मुस्लिम बन चुके अगर वापस अपने वास्तविक धर्म में आ गए, इनकी दुकान बंद होने में अधिक समय नहीं लगेगा और इनमे से अधिकतर रोटी-पानी के लिए भी तरसते नज़र आने वाले हैं।  

छत्तीसगढ़ के रायपुर में धीरेन्द्र शास्त्री के कार्यक्रम के मंच पर एक मुस्लिम महिला ने घर वापसी की थी। शहाबुद्दीन ने मुस्लिम महिला के धर्मान्तरण का आरोप लगाते हुए छत्तीसगढ़ सरकार से कार्रवाई की माँग की है। शहाबुद्दीन ने धीरेन्द्र शास्त्री पर नफरत फैलाने का भी आरोप लगाया है। मौलाना ने यह बयान गुरुवार (26 जनवरी 2023) को दिया है।

मौलाना शाहबुद्दीन ने अपना बयान वीडियो के माध्यम से दिया है। अपने बयान की शुरुआत ‘बिस्मिल्लाह-ए-रहमान-ए-रहीम’ से करने के बाद मौलाना ने कहा, “बागेश्वर धाम के संचालक बाबा धीरेन्द्र शास्त्री ने जो तौर-तरीका इख़्तियार किया है, उससे पूरे भारत में नफरत फैल रही है।”

मौलाना ने कहा, “उन्होंने अब तक 328 लोगों का मजहब तब्दील करवाया और वो इस्लाम के खिलाफ नफरत प्रचारित कर रहे हैं। उन्होंने खुद कहा कि हम टोपी वालों को भी सनातनधर्मी बना देंगे। मीडिया चैनलों के सामने इस तरीके की बात कर के प्रसारित करना इस्लाम की तौहीन है। मुसलमानों को इससे सख्त तकलीफ है।”

मौलाना शहाबुद्दीन ने आगे कहा, “मेरी भारत सरकार से गुजारिश है कि वो धर्मान्तरण के खिलाफ क़ानून लाई है तो इस्लाम को बदनाम करने वाले ऐसे बाबाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और इन्हें रोका जाए।”

हिंदू राष्ट्र को लेकर मौलाना ने कहा, “कुछ लोग भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की बात कह रहे हैं। मैं दावे से कहता हूँ कि हिंदुस्तान एक जम्हूरी मुल्क है। यह आईन (कानून) और संविधान से चलता है। यहाँ के रहने वाले संविधान के हिसाब से रहते हैं। इसलिए ये देश कभी भी न तो हिन्दू राष्ट्र बन सकता है और न ही मुस्लिम राष्ट्र। इसलिए जो ऐसा ख्वाब देख रहे वो सपने देखना बंद कर दें।”

CAA विरोध में ऐसे भड़काऊ नारे क्यों लगे?

भारत में कट्टरपंथी जब सब तरफ से घिर जाते हैं, तब इनको संविधान दिखाई देता, वरना भारत गुलाम-ए-मुफ्तफा बनाने में अपना समर्थन देते समय भारतीय संविधान याद नहीं आता। CAA के विरोध में जब हिन्दुत्व को कलंकित किया जा रहा था, तब किसी को संविधान याद नहीं आया। खूब बिरयानी और फलों का नाश्ता दिया जा रहा था। वास्तव अब इन छद्दम संविधान की बात और गंगा-जमुनी तहजीब जैसे भ्रामिक नारों से जनता को मुर्ख बनाया जा रहा था।    

मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी आला हजरत बरेली से जुड़े हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि अगर कोई मुस्लिम धर्मगुरु धर्मान्तरण करवा रहा होता तो उसे 24 घंटे के अंदर जेल भेज दिया गया होता।

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मौलाना शहाबुद्दीन ने यह भी कहा कि अगर छत्तीसगढ़ सरकार धीरेन्द्र शास्त्री पर एक्शन नहीं लेगी तो वो अदालत का रुख करेंगे। मौलाना ने धीरेन्द्र शास्त्री की मंच से कही कई बातों को इस्लाम को कमजोर करने की साजिश करार दिया है।

‘यहाँ भाई-बहन की आपस में शादी नहीं होती’: बागेश्वर धाम के मंच पर सुल्ताना बेगम ने अपनाया हिन्दू धर्म

                                                             फोटो क्रेडिट: बागेश्वर धाम सरकार फेसबुक पेज
बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेन्द्र शास्त्री (Mahant Pandit Dhirendra Shastri) के मँच पर 21 जनवरी 2023 को एक मुस्लिम महिला सुल्ताना बेगम (Sultana Begum) ने सनातन धर्म अपना लिया। धीरेन्द्र शास्त्री ने इनदिनों छत्तीसगढ़ में अपना दरबार लगाया हुआ है। वहीं पर सुल्ताना बेगम ने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म अपना लिया। उल्लेखनीय है कि पंडित धीरेन्द्र शास्त्री पर कुछ लोग अंधविश्वास फैलाने के आरोप लग रहे थे।

इस संबंध में ‘रिपब्लिक टीवी’ ने एक ट्वीट किया है, जिसमे मुस्लिम महिला सनातन धर्म को स्वेच्छा से अपनाती हुई देखी जा सकती है। वीडियो में 26 सेकेंड के बाद पंडित धीरेन्द्र शास्त्री कहते हैं कि आज यह बहन ने अपनी इच्छा से बालेश्वर बालाजी का चमत्कार देखकर और सनातन हिंदू धर्म को सर्वोपरि मानकर हिंदू धर्म में आना चाह रही हैं। इसके बाद मुस्लिम महिला कहती हैं, “मेरा नाम सुल्ताना है। मैं छतीसगढ़ बिलासपुर से हूँ। मेरे पिता का नाम आमिर खान है और माता का नाम सरवरी बेगम है। मैं मूर्ति पूजा करती हूँ, इसलिए मेरे घर वालों ने मुझे त्याग दिया है। मुझे ये लोग कहते हैं कि मैं मुस्लिम के नाम पर कलंक हूँ। मरूँगी तो जहन्नुम जाऊँगी।”

महिला आगे कहती हैं, “मेरा मन बोलता है कि हिन्दू धर्म से अच्छा कोई धर्म हो ही नहीं सकता है। क्योंकि यह धर्म सभ्यता वाला धर्म है, संस्कारों वाला धर्म है। इसमें भाई-बहन में शादियाँ नहीं होती। इसमें औरतों की जिंदगी बर्बाद नहीं होती। इसमें तीन तलाक नहीं होता। इसमें एक बार शादी होती है सात फेरों की, जिसमें सिंदूर का महत्व होता है, मंगलसूत्र का महत्व होता है। पूरे सोलह श्रृंगार का महत्व होता है। मैं लड्डू गोपाल की भी पूजा करती हूँ।”

इस संबंध में बागेश्वर धाम सरकार के फेसबुक पेज से भी पोस्ट किया गया है। पोस्ट के कैप्शन में लिख है, “आज (21 जनवरी, 2023) दिव्य दरबार में बागेश्वर धाम सरकार के मंच पर मुस्लिम महिला ने हिन्दू धर्म स्वीकार किया।”    

कुछ दिन पहले जब महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराष्ट्र गए थे तो वहाँ कथा के समापन के बाद ‘महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ के राष्ट्रीय संयोजक श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था। साथ ही, उन्होंने कहा था कि उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को चुनौती थी। इसलिए वे दो दिन पहले ही नागपुर से भाग गए। वहीं पूरे विवाद पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा था कि उनकी प्रेरणा से लोग सनातन धर्म में वापसी कर रहे हैं।

इसलिए, मिशनरी के लोग करोड़ों खर्च कर उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। वहीं अब धीरे-धीरे महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को मिल रहा समर्थन बढ़ता जा रहा है। बाबा रामदेव भी अब उनके समर्थन में आगे आ गए हैं।

छत्तीसगढ़ : ‘धर्मांतरण हमारी संस्कृति पर खतरा’ : ईसाई मिशनरियों के खिलाफ सड़क पर उतरे सैकड़ों ग्रामीण

                                                                       ईसाई मिशनरियों के खिलाफ सड़क पर उतरे सैकड़ों ग्रामीण
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में धर्मान्तरण के विरोध में सैकड़ों ग्रामीणों ने सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया है। उन्होंने अपने घर परिवार के लोगों के ईसाई बन जाने का आरोप लगाया है। ग्रमीणों ने इसे अपनी संस्कृति पर खतरा बताया है और ये सब न रुकने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है। हालाँकि, मौके पर पुलिस ने पहुँच कर हालात को संभाला। घटना रविवार (7 अगस्त 2022) की है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक मामला राजिम के गाँव कौंदकेरा का है जहाँ हर रविवार को ईसाइयों की प्रार्थना सभा होती है। इस बार प्रार्थना सभा आयोजित होते ही वहाँ ग्रामीणों ने विरोध करना शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उस प्रार्थना में कुछ बाहरी लोग भी आते है। वो हमें ईसाई बनाने के लिए तरह-तरह के लालच देते हैं। हालत ऐसे हो चुके हैं कि एक ही माता-पिता के अलग-अलग बच्चे अब अलग-अलग मजहब में हैं।”

मिली जानकारी के मुताबिक यह सभा कांकेर के संतोष कुमार मरकाम के घर पर होती है। हालाँकि, ग्रामीणों के गुस्से को देख कर उन्होंने भी अपने कदम पींछे खींच लिए हैं। उन्होंने दुबारा किसी को बाहर से न बुलाने की हामी भरी है। आक्रोश की सूचना पर मौके पर पहुँचे SDM अविनाश को भी ग्रामीणों ने सख्त अंदाज़ में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि धर्मान्तरण न रुका तो वो सब उग्र आंदोलन करेंगे। इस दौरान ग्रामीणों ने SDM से ये भी कहा कि धर्मान्तरण सिर्फ उनके ही नहीं बल्कि अन्य कई गाँवों में भी हो रहा है।

गाँव वालों ने सोशल मीडिया से भी ईसाई धर्मान्तरण के विरोध की अपनी इस मुहिम को हवा दी है। अपने विरोध प्रदर्शन के दौरान गाँव वालों ने न सिर्फ गाँव में दोबारा इसे धर्मान्तरण न करने देने का संकल्प लिया बल्कि धर्मांतरित हो चुके लोगों की घर वापसी का भी ऐलान किया। उन्होंने कहा, “जो लोग भी अपना मूल धर्म बदल चुके हैं उन्हें एक बार फिर से वापस लाने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए उनके हाथ में नारियल पकड़ाया जाएगा। जो भी व्यक्ति वापस आता है वही उनका अपना होगा। जो वापस नहीं आता उसे विदेशी माना जाएगा।”

वहीं छत्तीसगढ़ के जशपुर के साजबहार गाँव से भी एक मामला सामने आया है। यहाँ सरपंच सोनम लकड़ा के घर चंगाई सभा में ईसाई धर्मान्तरण का आरोप लगाया है। जिसमें भाजयुमो ने हंगामा कर दिया। बता दें कि यहाँ हिन्दू युवा नेता विजय सिंह जूदेव सरपंच सोनम लकड़ा के घर पहुँचे थे। उनके मुताबिक यहाँ चंगाई सभा कर रहे थे। उनका आरोप है कि यहाँ चंगाई सभा की आड़ में लोगों को ईसाई बनाने का काम हो रहा था। लेकिन हमने उनकी करतूत पर पानी फेर दिया। उनके मुताबिक प्रार्थना सभा में हिन्दू समुदाय के 4 लोग शामिल थे। जिसके बाद भाजयुमो के कार्यकर्ता भड़क गए और सरपंच को बर्खास्त करने की माँग करने लगे।

हालाँकि, यहाँ पुलिस ने उल्टे हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं को ही गिरफ्तार कर लिया है। और ईसाई धर्मान्तरण से इनकार कर दिया है।

मई 2022 में छत्तीसगढ़ के जशपुर में ग्रामीणों की शिकायत पर 2 पादरी धर्मान्तरण करवाते हुए गिरफ्तार किए गए थे। इसी के साथ अक्टूबर 2021 में भी दुर्ग जिले में ग्रामीणों ने धर्मान्तरण के आरोप में 45 ईसाइयों को बंधक बना लिया था। बता दें कि ईसाई धर्मान्तरण को रोकने के लिए दिसम्बर 2021 में जशपुर में आयोजित एक सम्मेलन में जनजातीय सुरक्षा मंच ने राज्य सरकार से अवैध धर्मान्तरण पर तत्काल रोक लगाने को कहा था।