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राष्ट्रवाद का दम भरने वाली बीजेपी और शिवसेना की मौजूदगी में सना मलिक ने महाराष्ट्र विधानसभा में गूंज दिया ‘भारत में शरिया कानून और बहुविवाह…’ और ‘पाकिस्तान प्रेम’

       नवाब मलिक की बेटी सना मलिक ने भारत में शरिया कानून लागू करने की माँग की (फोटो साभार : Loksatta)
ये महाराष्ट्र ही नहीं पूरे देश के लिए डूब मरने की बात है जब अपने आपको राष्ट्रवादी बताने वाली बीजेपी और शिवसेना की मौजूदगी में विधायक सना मलिक ने शरिया, तीन तलाक और बहुविवाह की बात करते पाकिस्तान का उदाहरण दे दिया। सब चुप लेकिन अगर यही बात कांग्रेस या INDI गठबंधन के किसी विधायक ने बोल दी होती विधानसभा से लेकर सड़क तक हंगामा हो रहा होता। लेकिन यह मिसाल दी अजित पवार गुट की NCP की विधायक ने। क्या राष्ट्रवादी मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री में सना के विरुद्ध कार्यवाही करने की हिम्मत है? एक मुस्लिम महिला पत्रकार की बात याद आ जाती कि जब पूछा कि "गैर-मर्द के हमबिस्तर होने पर औरत पाक कैसे हो जाती है?" जवाब मिला "हलाला हमारा होता है और दर्द दूसरों को होता है।"      
महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में NCP (अजीत पवार गुट) की विधायक सना मलिक के एक बयान पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने सदन में चर्चा के दौरान भारत में भी कुरान पर आधारित कानून लागू करने की माँग की। सना मलिक ने तीन तलाक और बहुविवाह (पॉलिगेमी) का जिक्र करते हुए पाकिस्तान का उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान कुरान के नियमों को अपना कानून बना सकता है, तो भारत को भी ऐसा ही करना चाहिए। उनके इस बयान के बाद बीजेपी विधायकों ने सदन में जमकर हंगामा किया और सोशल मीडिया पर भी इसका विरोध हो रहा है।

कौन हैं सना मलिक? अब्बू का सियासी बैकग्राउंड

सना मलिक महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया और चर्चित चेहरा हैं। वह मुंबई के अणुशक्ति नगर विधानसभा क्षेत्र से साल 2024 में पहली बार विधायक चुनी गई हैं। सना मलिक वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व मंत्री नवाब मलिक की बेटी हैं। नवाब मलिक मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, जो बाद में मुंबई आकर राजनीति में सक्रिय हुए।

राजनीति में कदम रखने से पहले सना मलिक एक आर्किटेक्ट और वकील के तौर पर काम कर चुकी हैं। साल 2024 के चुनाव में नवाब मलिक ने अपनी सीट से बेटी सना को उम्मीदवार बनाया था। सना अपनी पार्टी में अल्पसंख्यक और मुस्लिम महिलाओं के मुद्दों पर काफी आक्रामक रुख रखती हैं।

विधानसभा में क्यों शुरू हुई बहुविवाह और तीन तलाक पर बहस?

विधानसभा सत्र के दौरान BJP विधायक देवयानी फरांडे ने तीन तलाक कानून को सख्ती से लागू करने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने सदन को बताया कि पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को आज भी प्रताड़ित किया जा रहा है। देवयानी ने इसके लिए पाकिस्तान का उदाहरण दिया था।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में दूसरे निकाह के लिए पहली बीवी की लिखित अनुमति और एक काउंसिल की मंजूरी जरूरी है। इसी सख्त नियम के कारण पाकिस्तान में बहुविवाह की दर सिर्फ एक प्रतिशत है। उन्होंने महाराष्ट्र में भी ऐसे ही कड़े कानून और समान नागरिक संहिता (UCC) लाने की माँग की।

सना मलिक का विवादित तर्क और ‘पाकिस्तानी प्रेम’

BJP विधायक के बयान पर पलटवार करते हुए सना मलिक ने आक्रामक रुख अपना लिया। उन्होंने दलील दी कि बहुविवाह सिर्फ मुस्लिम समाज में नहीं होता, बल्कि हर धर्म में है। सना मलिक ने कहा कि पाकिस्तान ने कुछ नया नहीं किया, उसने सिर्फ कुरान में लिखे मुस्लिम पर्सनल लॉ को ही कानून का रूप दिया है।

सना मलिक ने आगे कहा, “हम इस्लाम में कुरान की शिक्षाओं को मानते हैं। अगर पाकिस्तान इसे लागू कर सकता है, तो भारत को भी कुरान पर आधारित कानून लाना चाहिए, हम इसकी माँग करते हैं।” उनके इस बयान को लोगों ने हिंदुओं और भारतीय व्यवस्था के खिलाफ एक कट्टरपंथी सोच माना।

BJP का करारा पलटवार: ‘देश संविधान से चलेगा, शरिया से नहीं’

सना मलिक के इस बयान पर BJP विधायक अतुल भातखलकर ने सदन में तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने दहाड़ते हुए कहा कि यह देश केवल भारत के संविधान से चलता है, किसी मजहबी ग्रंथ या कुरान से नहीं। उन्होंने साफ किया कि सदन में पाकिस्तान और शरिया की वकालत करने की कोई जरूरत नहीं है।

वहीं, महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने भी सना मलिक को सीधे जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी कानून किसी धर्मग्रंथ के आधार पर नहीं बनता। कानून समाज में हो रहे अन्याय को रोकने के लिए बनता है, किसी धर्म को निशाना बनाने के लिए नहीं।

नितेश राणे की दो टूक: ‘शरिया चाहिए तो पाकिस्तान चले जाओ’

इस विवाद के बाद महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और BJP नेता नितेश राणे ने सना मलिक पर बेहद तीखा हमला बोला। नितेश राणे ने कहा कि सना मलिक शायद भूल गई हैं कि वह एक हिंदू बहुसंख्यक देश में बैठी हैं। वह भारत की विधायक हैं, पाकिस्तान की संसद में नहीं बैठी हैं।

नितेश राणे ने साफ कहा कि हमारे देश के संविधान में ही समान नागरिक संहिता (UCC) का जिक्र है। जो लोग संविधान की दुहाई देते हैं, वे ही आज धर्म के नाम पर इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर किसी को भारत का कानून पसंद नहीं है और शरिया कानून ही चाहिए, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर पाकिस्तान चले जाना चाहिए।

चौतरफा घिरने के बाद सना मलिक ने दी सफाई

चारों तरफ से घिरने और सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल होने के बाद सना मलिक ने अपने बयान पर सफाई जारी की है। सना मलिक ने दावा किया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। सना ने कहा कि वह पाकिस्तान को कोई आदर्श नहीं मानती हैं।

उन्होंने सिर्फ देवयानी फरांडे के पाकिस्तान वाले संदर्भ पर जवाब दिया था। सना ने कहा कि भारतीय मुसलमान होने के नाते उनका पाकिस्तान से कोई लेना-देना नहीं है। भारत का संविधान उन्हें अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है और उन्होंने केवल मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत बात रखी थी।

सिलेक्टिव है RJ सायमा का नारीवाद… हिजाब पर करनी थी बात, करने लगी मजहब का बचाव: सोचिए क्या सच में इस्लाम में ‘मर्जी’ चला सकता है इंसान?

           RJ सायमा ने कहा इस्लाम में मर्जी चलती जबरदस्ती नहीं (साभार : X_@_sayema & Chatgpt)
इस्लाम में इंसान की मर्जी की महत्वता है, जबरदस्ती की कोई जगह नहीं- मजहब की ये परिभाषा हाल में आरजे सायमा ने दी है। उन्होंने बड़ी चालाकी से हिजाब-बुर्का मुद्दे पर इस्लाम को डिफेंड किया है कि दुनियाभर में घटना कोई भी हो जाए, लेकिन बात मजहब की आलोचना पर न आए।

ये तरीका ऑस्ट्रेलिया आतंकी हमले के समय अरफा खानम शेरवानी ने भी अपनाया था। हालाँकि, उनकी स्ट्रैटेजी चली नहीं और उनके अपने ही समुदाय के लोग उनपर सवाल खड़ा करने लगे। सायमा के साथ भी यही हुआ है लेकिन वो आँख मूंदकर रखेंगी क्योंकि उन्हें नैरेटिव ये बनाना है कि जो लोग हिजाब पहनने को मजबूर कर रहे हैं वो अच्छे से इस्लाम को नहीं जानते।

दिलचस्प बात है कि सायमा जैसे बुद्धिजीवियों की हिजाब पर राय मौका, घटना और स्थान देखकर बदलती रहती है। जैसे भारत की बात आती है तो ये हिजाब पहनने को सीधा मजहबी अधिकार से जोड़ती हैं, शैक्षणिक संस्थानों में उसे पहने जाने की पैरवी करती हैं और किसी बाहर मुल्क में ये मुद्दा बनता है तो नारीवादी पक्ष निकल आता है, तब ये क्रांतिकारी भी बनती हैं, हिजाब को च्वाइस भी बताती हैं और इस्लाम को डिफेंड करने का लिबरल वर्जन भी खोजती हैं।

मगर, अफसोस उनका ये वर्जन जमीनी हकीकत और मीडिया में मौजूद तमाम उदाहरणों से बिलकुल निकलता है। बहुत पीछे जाने की जरूरत नहीं है। 2025 के दिसंबर माह में ही यूपी के शामली में एक मुस्लिम व्यक्ति ने अपनी बीवी और दो नाबालिग बेटियों की हत्या कर दी। कारण? तीनों बिना बुर्का पहने घर से बाहर निकल गई थीं। 2021 में असम से खबर आई थी एक महिला को दुकान से सिर्फ इसलिए बाहर निकाल दिया गया क्योंकि उसने जींस पहनी थी, बुर्का नहीं। 2022 में कर्नाटक से रिपोर्ट आई थी कि एक संगठित समूह मुस्लिम महिलाओं पर नजर रखने के लिए बनाया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी महिला सार्वजनिक स्थानों पर बिना हिजाब या बुर्का के न दिखें।

यह सब भारत की घटनाएँ हैं, किसी दूर-दराज के कट्टर इस्लामिक देश की नहीं। क्या इन पर कभी सायमा कि कोई प्रतिक्रिया या विरोध देखने को मिला? क्या ऐसी खबरों को सुनने के बाद कभी आरजे सायमा ये कहने गईं कि इस्लाम में तो मर्जी चलती है, जबरदस्ती नहीं।

इसी तरह विदेशों में महिलाओं के साथ हिजाब न पहनने पर क्या हुआ, इसके भी तमाम उदाहरण हैं। ईरान की महसा अमीनी याद है आपको? 22 साल की वह लड़की जिसे ‘ठीक से हिजाब न पहनने’ के आरोप में हिरासत में लिया गया और इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उसकी मौत हो गई।

2014 में ईरान के इस्फाहान में महिलाओं पर तेजाब हमलों की घटनाएँ सामने आईं। जाँच में पता चला कि निशाना वे महिलाएँ थीं जो ‘ढंग से’ हिजाब या बुर्का नहीं पहन रही थीं।
इसी तरह कनाडा की अक्सा परवेज, महज 16 साल की लड़की, जिसकी हत्या उसके अपने परिवार ने इसलिए कर दी क्योंकि वह खुद को ढककर बाहर नहीं जाती थी।

ये तो सिर्फ वे मामले हैं जो मीडिया में आ सके। कितनी घटनाएँ चार-दीवारी के भीतर दबा दी जाती होंगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। आरजे सायमा क्या इन सभी मामलों में पीड़ित महिलाओं और बच्चियों को यह समझाने जाएँगी कि इस्लाम मर्जी का मजहब है, जबरदस्ती का नहीं? या फिर हमेशा की तरह यह कहकर पल्ला झाड़ लेंगी कि यह ‘असल इस्लाम’ नहीं है?

विडंबना यह है कि जिस इस्लाम की परिभाषा सायमा गढ़ती हैं, उसे बार-बार गलत उन्हीं लोगों ने साबित किया है जो इस मजहब को सबसे ज्यादा कट्टरता से मानते हैं। अगर आम लोगों को ‘नासमझ’ मान भी लिया जाए, तो उन मुल्ला-मौलानाओं की तकरीरों का क्या जवाब है, जिनकी बातें सुनकर समाज दिशा तय करता है?

खुले मंचों से बार-बार कहा जाता है कि कुरान में हिजाब का जिक्र है और लड़कियों को इसे पहनना ही चाहिए। कई बार तो ये भी बताया जाता है कि महिलाओं को आजादी देना ही गलत बात है। उनके स्कूल जाने से लेकर उनके खुले सर घूमने की चाह तक को इस्लाम के खिलाफ बता दिया जाता है। तब सवाल उठता है- क्या समस्या कुछ ‘भटके हुए लोगों’ की है, या फिर उस विचारधारा की, जिसे हर बार बचाने के लिए कभी आरफा को और कभी आरजे सायमा को नया नैरेटिव गढ़ना पड़ता है?

पाकिस्तान : ‘पैगंबर मुहम्मद न लिखना जानते थे, न पढ़ना… कुरान लिखने में कई गलती हुई वो अब तक ठीक नहीं किया गया’: मौलाना का ही सिर माँग रहे मुस्लिम कट्टरपंथी

            मौलाना तारिक मसूद के खिलाफ कट्टर इस्लामी कर रहे 'सर तन से जुदा' की माँग (भीड़ प्रतीकात्मक)
पाकिस्तानी मौलाना तारिक मसूद पर इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद और कुरान के अपमान के आरोप लगे हैं। तारिक मसूद के एक बयान पर इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए हैं। वह मसूद के खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगा रहे हैं। तारिक मसूद के माफी माँगने के बाद भी मामला शांत नहीं हो रहा। मौलाना तारिक मसूद इससे पहले भी कई बार विवादित बयान दे चुका है।

मौलाना तारिक मसूद का हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ। इस वीडियो में मौलाना मसूद ने कथित तौर पर एक सभा में इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद की शैक्षणिक स्थिति पर टिप्पणी की। मौलाना तारिक मसूद ने कहा, “हमारे नबी के बारे में पूरी उम्मत का मानना है कि ना वो लिखना जानते थे ना पढ़ना। वह उम्मी (अरबी में इसका अर्थ अशिक्षित या ऐसे आदमी से होता है जो लिखना ना जानता हो) थे। कुरान कहता है कि पैगम्बर जो कुरान पेश कर रहे हैं, उसका एक इनके दाएँ हाथ ने नहीं लफ्ज लिखा है।”

आगे तारिक मसूद ने कहा, “जैसे ही कोई नई आयत बनती तो किसी को बुला रहे हैं, भाई लिखो। हमारे नबी ने जब कुरान लिखवाया, चूँकि आप लिखना-पढ़ना नहीं जानते थे तो कई बार लिखने वालों से कुरान में व्याकरण की गलती हुई। हमारे नबी ने उसको सही नहीं करवाया, आपको नहीं पता चला कि ये व्याकरण के रूप से गलत है, वो आज तक चला आ रहा है।”

तारिक मसूद ने इसके बाद कुरान की कुछ आयतों के उदाहरण दिए जिनमें वह मानते हैं कि गलतियाँ हैं। मसूद ने इसके बाद कहा कि इन गलतियों को कोई सुधार नहीं पाया क्योंकि अल्लाह ने बता दिया कि नबी उम्मी थे। इसने बताया कि हमने कुरान की हिफाजत की है।

तारिक मसूद के इस बयान पर पाकिस्तान में विवाद हो गया। उन पर कई अन्य मौलानाओं और आम लोगों ने आरोप लगाया कि उन्होंने पैगम्बर और कुरान का अपमान किया है। लोगों ने कहा कि तारिक मसूद ने उन पर टिप्पणी करके एक सीमारेखा पार कर दी है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उनके खिलाफ कई संगठनों ने कार्रवाई की माँग की।

तारिक मसूद का यह बयान वायरल होने के बाद उन्हें जान के लाले पड़ गए हैं। तारिक मसूद ने इसको लेकर माफ़ी भी माँगी है। तारिक मसूद ने एक वीडियो जारी करके कहा है कि वह अपने शब्द वापस ले रहे हैं और उनसे गलती हुई है। मौलाना तारिक मसूद ने कुरान का हवाला देकर माफ़ी माँगी है।

उन्होंने पिछले 48 घंटों में कई बार माफी माँगी है। उन्होंने ट्विटर पर भी एक बयान जारी किया है। मसूद ने कहा है कि वह नबी के अपमान के बारे में सोच तक नहीं सकते हैं।

माफ़ी के बाद भी तारिक मसूद के खिलाफ मामला ठंडा नहीं हो रहा है। लोग उनके ही पुराने बयानों को उनके खिलाफ उपयोग में ला रहे हैं। इन बयानों में मौलाना तारिक खुद ईशनिंदा करने वालों के खिलाफ कड़े कानून बनाने की माँग कर रहे हैं। एक और वीडियो में उन्हें ईशनिंदा करने वाले को मारने की वकालत करते तक सुना गया। इस वीडियो में वह कहते हैं कि अगर आप किसी को पैगम्बर मुहम्मद का अपमान करते सुने तो उसे मौत के घाट उतार दें।

मौलाना तारिक मसूद इससे पहले निकाह पर दिए बयानों को लेकर चर्चा में रहा है। पाकिस्तान में मौलाना तारिक मसूद पर ईशनिंदा का आरोप ऐसे समय में लगा है जब पिछले ही कुछ दिनों में दो लोगों की इन्हीं आरोपों पर हत्या हो चुकी है। पाकिस्तान में हाल ही में एक व्यक्ति को एक पुलिसवाले ने ही पुलिस हिरासत में मार दिया था।

उस व्यक्ति पर ईशनिंदा का आरोप था। वहीं एक और मामले में एक डॉक्टर को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस ने कहा कि ईशनिंदा का आरोपित भागने का प्रयास कर रहा था, इसके बाद उसे मार दिया गया। पाकिस्तान में इन सभी पुलिस वालों का सम्मान किया गया।

स्वीडन, डेनमार्क के बाद अब बांग्लादेश में जलाई गई कुरान की 45 पुस्तकें

                                          बांग्लादेश में कुरान जलाने पर हुआ प्रदर्शन((फोटो साभार: Wion)
स्वीडन और डेनमार्क के बाद अब इस्लामिक देश बांग्लादेश में कुरान की दर्जनों प्रतियाँ जलाई गईं। नुरूर रहमान और महबूब आलम नामक दो व्यक्तियों ने मिलकर इस घटना को अंजाम दिया। इसकी जानकारी सामने आने के बाद करीब 10 हजार लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। साथ ही दोनों आरोपितों को मारने की कोशिश की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुरान जलाने के आरोप में बांग्लादेश के पूर्वोत्तर शहर सिलहट से पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपितों की पहचान स्कूल के प्रिंसिपल नुरूर रहमान और उसके सहयोगी महबूब आलम नामक के रूप में हुई। आरोपितों का कहना है कि कुरान की प्रतियाँ बहुत पुरानी और कुछ में प्रिंटिंग मिस्टेक थी। इसलिए उन्होंने उनमें आग लगा दी। पुलिस ने दोनों के पास से कुरान की जली हुई 45 प्रतियाँ जब्त की हैं।

एएफपी ने पुलिस अधिकारी अजबहार अली शेख के हवाले से कहा है कि रविवार से लेकर सोमवार रात (6-7 अगस्त 2023) तक कुरान जलाने के विरोध में 10 हजार लोग प्रदर्शन कर रहे थे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रबर की गोलियाँ और आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

Wion ने ढाका ट्रिब्यून के हवाले से कहा है कि सिलहट मेट्रोपोलिटन पुलिस आयुक्त मोहम्मद एलियास शरीफ का कहना है कि कुरान जलाए जाने को लेकर स्कूल के शिक्षक, छात्र व क्षेत्र के अन्य लोग प्रिंसिपल व अन्य आरोपित से नाराज थे। इसलिए भीड़ ने दोनों को घेरकर पिटाई कर दी। हालाँकि बाद में पुलिस ने दोनों को बचा लिया। इस दौरान गुस्साई भीड़ ने पुलिस पर भी हमला किया। हमले में 14 पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस और इस्लामवादियों के बीच हुई झड़प में कुछ अन्य लोगों के घायल होने की भी खबर है। हालाँकि घायलों की संख्या की पुष्टि नहीं हुई।

बीते कुछ महीनों में यूरोपीय देश स्वीडन और डेनमार्क में कई बार कुरान जलाई गई है। कई इस्लामिक देश इसका विरोध करते हुए दोनों देशों की सरकारों से रोक लगाने व कार्रवाई करने की माँग कर चुके हैं। हालाँकि स्वीडन और डेनमार्क दोनों ही देशों का कहना है कि वह देश के कानून के चलते कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल, स्वीडन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर मजबूत कानून है। इसके तहत ही लोग वहाँ कुरान जला रहे हैं।