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इस्लाम के विरुद्ध स्वीडन उठा, बड़े नेताओं को खरीद जॉर्ज सोरोस कोशिश कर रहा पूरे यूरोप के इस्लामीकरण के लिए

सुभाष चन्द्र

स्वीडन की उप प्रधानमंत्री एब्बा बुश ने मुस्लिम समुदाय को सख्त संदेश देते हुए कहा है कि “शरिया कानून वाले इस्लाम के लिए स्वीडन में कोई जगह नहीं है। मुसलमान अपने जीवन में स्वीडिश मूल्यों को अपनाएं या फिर देश छोड़ दें। इस्लाम को स्वीडिश मूल्यों के अनुसार ढलना होगा। स्वीडन और यूरोप में बहुत से लोग इस्लाम का उसी तरह जैसे वे अधिनायकवादी राज्यों में करते हैं”।

एब्बा बुश ने आगे भी कहा कि “इस्लाम को हमारे मौलिक साझा मूल्यों के अनुकूल होना चाहिए, जो स्वीडन और यूरोप को यूरोप बनाते हैं, ये वही मूल्य हैं जो हमें एक दूसरे के साथ सहिष्णुता, शांति और स्वतंत्रता में रहने में सक्षम बनाते हैं, कुछ मूल्य वैकल्पिक नहीं होते”। 

एब्बा बुश के समर्थक बयान की तारीफ कर कह रहे हैं कि उनका रुख स्वीडिश सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण है। उनके विरोधी (लगता है सेकुलर हैं) कह रहे हैं कि वे इस्लामोफोबिया को बढ़ा रही हैं। वो मुसलमानों को कलंकित कर उन्हें अलग थलग कर देंगी। स्वीडन इसी वर्ष मार्च में NATO में शामिल हुआ है।

 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
पूरा यूरोप और ब्रिटेन मुस्लिम शरणार्थियों से भरा पड़ा है और ये सब शरणार्थी इस्लामिक देशों से आये हैं जिन्हें 56 इस्लामिक देश कभी अपने यहाँ शरण नहीं देते और आज ये शरणार्थी ब्रिटेन और कई यूरोपीय देशों में समस्या बन चुके हैं। स्वीडन में हाल ही में शरणार्थी प्रवासियों की संख्या बढ़ी है और जाहिर एब्बा बुश की चिंता का कारण यही है। स्वीडन के वर्तमान आबादी करीब एक करोड़ 70 लाख है जिसमें 1,88,000 मुस्लिम हैं और सबसे ज्यादा 20% मुस्लिम स्वीडन के शहर Maimo में रहते हैं।

पिछले कुछ समय में स्वीडन, डेनमार्क, बुल्गारिया, ब्रिटेन, नॉर्वे, जर्मनी (बर्लिन) और फ्रांस में मुस्लिमों ने जम कर दंगे किए और करोड़ों की संपत्ति को आग लगा दी। एक ही तरह से दंगे किए जाते रहे हैं, यूरोप के अलावा म्यांमार, दिल्ली, हल्द्वानी,श्रीलंका, थाईलैंड और बांग्लादेश में भी दंगे किए गए।

ये सभी यूरोपीय देश और ब्रिटेन जहां दंगे हुए NATO के सदस्य हैं और इन देशों में दंगे करने वाले मुस्लिमों को कोई इस्लामिक देश कंट्रोल नहीं करना चाहता जबकि कई इस्लामिक देशों से उन्हें  पूरी मदद पहुंचती है। किसी इस्लामिक देश में इतनी हिम्मत नहीं कि मुस्लिम समुदाय के लिए इनमे से किसी देश पर हमला कर दे क्योंकि सब NATO मेंबर हैं। 

कुछ समय पहले नीदरलैंड के Geert Wilders ने भी अपने मुल्क में मुस्लिमों पर सख्त टिप्पणियां करते हुए मस्जिदों को बैन करने की भी बात कही थी। इटली की Giorgia Meloni ने भी नई मस्जिदों पर पाबंदी लगाई थी और यहां तक कहा था मस्जिदों में जो कुछ भी होता है सरकार को बताना पड़ेगा।

जर्मनी और ब्रिटेन को भी अब कुछ समझ आ रहा है जहां मस्जिदों पर निगरानी की जा रही है और बंद किया जा रहा है क्योंकि वहां आतंकी गतिविधियों के सबूत मिले। सबसे बड़ा रहस्य तो हंगरी के प्रधानमंत्री Viktor Orban ने खोला है कि George Soros की योजना पूरे यूरोप का इस्लामीकरण करने की है जिसके लिए उसने यूरोपीय देशों के कुछ बड़े नेताओं को खरीद लिया है। 

अभी अमेरिका इस्लाम के खतरों से परिचित होते हुए भी ध्यान नहीं दे रहा लेकिन कल वहां भी वही होगा जो आज यूरोपीय देशों में हो रहा है। 

किसी समाज में Integrate (एकीकृत) होकर रहना इस्लाम में संभव नहीं है क्योंकि उनके लिए किसी भी देश के संविधान और कानून से ऊपर शरिया है। चीन ने जो मुस्लिमों का इलाज किया है उस पर कोई इस्लामिक देश नहीं बोलता और लगता है एक दिन पूरे विश्व को चीन का फार्मूला अपनाना पड़ेगा। 

उत्तर प्रदेश : इस्लामी टोपी लगाए लड़के से मारपीट कर हिन्दू विरोधी प्रोपेगंडा फैलाने वाला निकला मोहम्मद फैसल

                                           वीडियो का स्क्रीनग्रैब और अली सोहराब का पोस्ट
उत्तर प्रदेश के कानपुर के जाजमऊ थाना क्षेत्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में एक आदमी टोपी लगाए लड़के के साथ मारपीट करता नजर आ रहा है। इस मामले में पुलिस ने मोहम्मद फैसल नामक आरोपित को हिरासत में लिया है। लेकिन इस्लामवादी इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद आरोपित की गिरफ्तारी को लेकर ‘पुलिस कमिश्नरेट कानपुर नगर’ ने 30 सितंबर को ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट शेयर की थी। इसमें लिखा था, “जाजमऊ थानाक्षेत्र का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक व्यक्ति एक बच्चे को पीटते हुए दिख रहा है। प्रकरण का तत्काल संज्ञान लेकर थाना जाजमऊ पुलिस टीम द्वारा आरोपी मोहम्मद फैसल पुत्र अशरफ को हिरासत में ले लिया गया है, प्रकरण में FIR दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।”

इस पोस्ट के साथ ही पुलिस ने मोहम्मद फैसल की एक तस्वीर भी शेयर की थी। इसमें वह सलाखों के पीछे घुटने टेक कर हाथ जोड़े नजर आ रहा है।

दरअसल, 30 सितंबर को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में फैसल अपनी बाइक से आता नजर आता है। इसके बाद बाइक से उतरते ही वह टोपी लगाए लड़के की ओर बढ़ता है। फिर वह लड़के पर लात-घूँसों की बौछार कर देता है। फैसल पीड़ित को काफी देर तक मारता रहता है। इस दौरान कुछ लोग पीड़ित को बचाने की कोशिश करते भी नजर आ रहे हैं।

                                                                 पोस्ट का स्क्रीनग्रैब

वीडियो सामने आने के बाद इस्लामवादी इस मामले को सांप्रदायिक रंग देकर विवाद पैदा करने की कोशिश में जुट गए। ‘द मुस्लिम 786’ नामक यूजर ने लिखा कि एक दबंग ने पुलिस की जीप के सामने ही मुस्लिम युवक को थप्पड़ मार और लातों से कुचला। बेशक यहाँ पर इस्लामवादी ने हिंदू नहीं लिखा था लेकिन मुस्लिम को थप्पड़ मारे लिखकर अपना एजेंडा सेट करने की कोशिश की।

वहीं एक अन्य इस्लामवादी ने लिखा कि ये लोग पागल हो गए हैं और दंगा करवाना चाहते हैं। मुस्लिम की खामोशी का फायदा उठा रहे हैं। यही नहीं उस यूजर ने पुलिस को अपशब्द कहे।

                                                              पोस्ट का स्क्रीनग्रैब

सलीम खान राणा नामक यूजर ने लिखा, “पुलिस में भी तो काफ़िर ही हैं।” सलीम ने ‘भी’ शब्द का उपयोग कर पहले तो आरोपितों को गैर-मुस्लिम बताया फिर पुलिस को काफ़िर बता दिया।

तथाकथित ‘पत्रकार’ और झूठ फैलाते हुए कई बार पकड़ा जा चुका अली सोहराब ने भी पीड़ित को ‘मुस्लिम युवक’ लिखकर यह बताने की कोशिश की है कि आरोपित किसी अन्य धर्म से है। वरना मुस्लिमों के क्राइम में तो यह चूँ भी नहीं बोलता।

                                                                       पोस्ट का स्क्रीनग्रैब

सलीम खान राना ने एक अन्य पोस्ट में सभी गैर-मुस्लिमों के नरसंहार की धमकी दी। उसने लिखा, “जिस दिन मुस्लिम मैदान में आ जाएगा, काफ़िर दहशत में मर जाएगा।”

इंग्लैंड : हिंदू मंदिर को कट्टरपंथी मुस्लिमों ने घेरा, ‘अल्लाह-हु-अकबर’ के नारों के साथ अश्लील हरकत

हिंदू मंदिर की दीवार पर चढ़ अश्लील हरकत करता एक कट्टरपंथी मुस्लिम
इंग्लैंड के लेस्टर (Leicester) शहर में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा हिंदू लोगों पर हमले का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ कि बर्मिंघम के स्मेथविक से दुर्गा मंदिर के बाहर हंगामे की खबर आई है। जानकारी के मुताबिक, इंग्लैंड के वेस्ट मिडलैंड्स के स्मेथविक शहर में 20 सितंबर 2022 को स्पॉनलेन में स्थित मंदिर के बाहर करीब 200 कट्टरपंथी मुस्लिम इकट्ठा हो गए।

इंग्लैंड पुलिस की मौजूदगी में दुर्गा भवन को इस्लामी कट्टरपंथियों ने घेर लिया। इस दौरान उन्होंने जमकर हंगामा किया। कुछ तो मंदिर की दीवार पर भी चढ़ गए। मंदिर और मंदिर जाने वाले लोगों में खौफ पैदा करने के लिए इन लोगों ने ‘अल्लाह-हु-अकबर’ के नारे लगाए। साथ ही मंदिर की ओर मुँह करके हस्तमैथुन जैसे इशारे किए।

सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में आप इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ को स्पॉनलेन स्थित दुर्गा भवन हिंदू सेंटर की ओर बढ़ते और कई लोगों को ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाते हुए देख-सुन सकते हैं।

इंग्लैंड की पुलिस स्थिति को नियंत्रित करने को वहाँ मौके पर पहुँची। हालाँकि वो कुछ ज्यादा नहीं कर पाए। उनकी मौजूदगी में ही भीड़ में कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम मंदिर की दीवारों पर चढ़ गए। इतना ही नहीं, “फक यू” और हस्तमैथुन करने जैसे इशारे करके उन्होंने हिंदुओं को डराने का भी काम किया।

बर्मिंघम वर्ल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘अपना मुस्लिम’ नाम के एक सोशल मीडिया अकाउंट ने मंगलवार को दुर्गा भवन मंदिर के बाहर ‘शांतिपूर्ण विरोध’ के लिए भीड़ को बुलाया था। मंदिर की दीवार पर चढ़ना अगर शांतिपूर्ण विरोध है, मंदिर के सामने हस्तमैथुन जैसे इशारे अगर शांतिपूर्ण विरोध है तो आतंकी हरकत किसे कहते हैं?

स्काई न्यूज के मुताबिक, मंदिर के बाहर करीब 200 लोग (इस्लामी कट्टरपंथी भीड़) एकत्र हो गई थी। इनमें में से किसी ने बोतलें भी फेंकी। इससे हालात काफी संवेदनशील हो गया।

लेस्टर (Leicester) में हिंदुओं पर हमला

बर्मिंघम के स्मेथविक से दुर्गा मंदिर के बाहर हंगामे की खबर से पहले लेस्टर में हिंदुओं पर हमला किया गया। इसकी शुरुआत एशिया कप 2022 में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के बाद से हुई थी। पाकिस्तान के हारने के बाद हिंदुओं के समूह पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया था।
लेस्टर में 18 सितंबर, 2022 को हिंदुओं के समूह पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया था। इस दौरान ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का नारा लगाते हुए मंदिर पर भी अटैक हुआ और उसके ऊपर लगे भगवा ध्वज को भी तोड़कर नीचे गिरा दिया गया। हिंदुओं के समूह पर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा किए गए हमले में पुलिस अब तक 47 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। लेस्टर पुलिस ने 19 सितंबर 2022 को ट्वीट कर यह जानकारी दी थी।
लेस्टर पुलिस के अनुसार, शहर में फैली अशांति के मामले में 20 वर्षीय एक युवक को प्रतिबंधित हथियार रखने का दोषी पाया गया। ऐमॉस नोरोन्हा (Amos Noronha) नाम के इस शख्स को 10 महीने जेल की सजा सुनाई गई है।

आज़ादी के अमृत महोत्सव में जरा याद उन्हें भी कर लो , जो इस्लामिक कट्टरवाद के शिकार हुए क्योंकि वे हिंदू थे: जिसका नहीं दिख रहा कोई पूर्ण विराम

जिस स्वतंत्रता को हमने मजहब के नाम पर भारत माता के बँटवारे के बाद पाया, उसकी आयु 75 साल हो चुकी है। पर मुहम्मदवाद और ईसायत के खतरे खत्म नहीं हुए हैं। आज भी हिंदू होना, हिंदुओं की बात करना अपराध है। ऐसे लोगों की खुलेआम हत्या हो रही है। वे कभी रात के अँधेरे में आकर वार करते हैं। कभी ग्राहक बन दुकान में घुसते हैं और गला काट जाते हैं। कभी भगवा पहन मिलने के बहाने आते हैं और चाकुओं से गोद कर चले जाते हैं। घात लगाए बैठे रहते हैं और राह चलते काट जाते हैं। 

मजहब के नाम पर मार-काट 1926 से लेकर आज तक चल रही है। 1926 में कट्टरपंथियों द्वारा हिन्दुत्व पर हमला बोलते हुए "कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी" प्रकाशित कर मुफ्त में बांटे जाने के जवाब में हिन्दुओं द्वारा "रंगीला रसूल" प्रकाशित करने पर प्रकाशक आर्य समाजी महाशय राजपाल का क़त्ल कर दिया। उसके बाद मुस्लिम धर्मांतरण को रोक रहे स्वामी श्रद्धानंद का क़त्ल। तब महात्मा गाँधी ने स्वामी श्रद्धानन्द के हत्यारे को अपना भाई बताकर बचाव किया था, यहीं से भारत में मुस्लिम तुष्टिकरण की गन्दी सियासत शुरू होने पर छद्दम धर्म-निरपेक्ष गाँधी को याद करते हैं। जब मुस्लिम कट्टरपंथियों को इस्लाम या उनके पैगम्बर की बुराई बर्दास्त नहीं, फिर हिन्दू देवी-देवताओं का क्यों अनावश्यक अपमान करते हैं? 

 

साधु-संत हों या आस्थावान सामान्य हिंदू, सब एक जैसे ही खतरे में हैं। न घर सुरक्षित हैं, न आश्रम। ओडिशा में एक जगह है कंधमाल। कंधमाल के जलेसपट्टा में ही था, स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का आश्रम। तारीख थी 23 अगस्त 2008। जन्माष्टमी का कार्यक्रम चल रहा था। स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती अराधना में लीन थे। पहले उन्हें गोली मारी गई फिर मृत शरीर को कुल्हाड़ी से काट दिया गया। उस दिन स्वामी लक्ष्माणानंद सरस्वती सहित कुल 5 साधु की इसी तरीके से आश्रम में हत्या हुई। वजह स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती गो रक्षा की बात करते थे। वनवासी इलाकों में बहला-फुसलाकर धर्मांतरित किए गए हिंदुओं की घर वापसी के लिए अभियान चला रहे थे।

स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती संत थे। जय श्रीराम कहते रहे होंगे, जो अनुराग कश्यप जैसे टुटपुंजिए बॉलीवुडिए के हिसाब से ‘वॉर क्राई’ है। मोहम्मद जुबैर के शब्दों में कहे तो ‘हेट मोंगर्स’ थे।

लेकिन सर्वानंद कौल पूरे सेकुलर थे। सर्व धर्म समभाव वाले। जैसी संस्कृत पर पकड़, वैसी ही फारसी पर। जैसे हिंदी के जानकार, वैसे ही उर्दू के। जैसी अंग्रेजी पर पकड़, वैसी ही कश्मीरी पर। कवि थे। अपने पूजा घर में कुरान रखते थे। एक रात शांतिदूतों ने उनके घर दस्तक दी। बारिश हो रही थी। 66 साल के सर्वानंद कौल और उनके 27 साल के बेटे को साथ ले गए। दो दिन बाद पिता पुत्र की पेड़ से टँगी लाश मिली। जहाँ तिलक लगाते थे, वहाँ की चमड़ी तक छील दी गई थी।

सर्वानंद कौल बुजुर्ग थे। उम्र के अंतिम पड़ाव पर थे। बाल भी बाँका नहीं होने देने का वचन देने वालों ने धोखा दे दिया। लेकिन 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस में जो जिंदा जला दिए गए, उनमें 10 तो बच्चे ही थे। कुल 59 लोग जिंदा जले थे। 27 महिला, 22 पुरुष और 10 बच्चे। अयोध्या से लौट रहे थे।

कासगंज में 26 जनवरी 2018 को चंदन गुप्ता की हत्या कर दी गई, क्योंकि उसने तिरंगा यात्रा निकाली। प्रशांत पुजारी फूल विक्रेता थे। मन्नूलाल वैष्णव घर-घर अखबार पहुँचाते थे। सारे मारे गए। आज कोई जीवित नहीं है।

हर्षा, किशन भरवाड, उमेश कोल्हे, कन्हैयालाल, प्रवीण नेट्टारू… ये ताजा नाम हैं। स्वतंत्र भारत में उन नामों की फेहरिस्त काफी लंबी है जो केवल इसलिए मार दिए, क्योंकि वे हिंदू थे। वे हिंदू समाज को एकजुट कर रहे थे। वे धर्मांतरित हिंदुओं की घर वापसी में जुटे थे। वे भारत, तिरंगा, गोरक्षा की बात कर रहे थे।

70 साल की काला देवी को इसलिए मार दिया गया क्योंकि उन्होंने वैश्विक कोरोना महामारी के खिलाफ भारत की लड़ाई में एकजुटता दिखाने के लिए घर में दीप जला लिया। 12वीं की छात्रा लावण्या से कहा गया कि पढ़ना है तो धर्म बदलो या टॉयलेट साफ करो। दबाव नहीं झेल पाई। खुद ही अपनी जान ले ली। कुछ लव जिहाद के शिकार हुए तो कुछ को इस्लाम के लिए खतरा बता मार दिया गया।

स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव पर लेकर आए हैं, स्वतंत्र भारत के ऐसे 75 नाम/घटना, जो केवल इसलिए मार दिए गए क्योंकि वे हिंदू थे;

  1. प्रवीण नेट्टारू
  2. कन्हैया लाल साहू
  3. उमेश कोल्हे
  4. हर्षा
  5. किशन भरवाड
  6. रुपेश पांडेय
  7. नीरज राम प्रजापति
  8. मुकेश सोनी
  9. कमलेश तिवारी
  10. स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती
  11. वी रामलिंगम
  12. ध्रुव त्यागी
  13. पालघर: कल्पगिरि महराज, सुशील गिरि महराज, नीलेश तेलगडे
  14. गौरव-सचिन
  15. प्रशांत पुजारी
  16. संजय कुमार
  17. अंकित सक्सेना
  18. रतनलाल
  19. अंकित शर्मा
  20. गंगाराम सिंह चौहान
  21. भरत यादव
  22. विष्णु गोस्वामी
  23. सुबोध सिंह
  24. अविनाश सक्सेना
  25. अमित गौतम
  26. चंदन गुप्ता
  27. रविंदर कुमार
  28. रिया गौतम
  29. योगेश कुमार
  30. पंकज नारंग
  31. काला देवी
  32. मिथुन ठाकुर
  33. रवि निंबारगी
  34. रेवती सिंह
  35. राजेश कुमार
  36. निकिता तोमर
  37. डॉ संजय सिंह
  38. रिंकू शर्मा
  39. सन्नी सिन्हा
  40. राहुल राजपूत
  41. राहुल सोलंकी
  42. शंभूलाल
  43. भरत वैष्णव
  44. रंजीत बच्चन
  45. प्रिया-कशिश
  46. नागराजू
  47. दिलबर नेगी
  48. रितिक आदर्श
  49. बीके गंजू
  50. सर्वानंद कौल
  51. विनोद कुमार
  52. टीकालाल टपलू
  53. साधु सरवनन
  54. अजय पंडिता
  55. सतीश भंडारी
  56. माखन लाल बिंद्रू
  57. गिरिजा टिक्कू
  58. सतिंदर कौर
  59. दीपक चंद
  60. हीरालाल गुजराती
  61. रामेश्वर अंकुश
  62. आलोक तिवारी
  63. प्रेम सिंह
  64. दिनेश
  65. वीरभान
  66. बीना झा
  67. साबरमती एक्सप्रेस में सवार कारसेवक
  68. कृष्ण राजदान
  69. पीएन कौल
  70. नीलकंठ गंजू
  71. रजनी बाला
  72. सतीश कुमार टिकू
  73. एकता देशवाल
  74. कांति प्रसाद
  75. संतोला देवी
ऐसे नाम और घटनाओं को केवल 75 के आँकड़े में समेटा नहीं जा सकता। यह एक ऐसी अंतहीन सूची है जिसका पूर्ण विराम न जाने कब आयेगा। तारीख बदलते ही सूची में नया नाम जुड़ जाता है। अमृत महोत्सव के इस साल में ऑपइंडिया सूची में शामिल नाम में से कई के परिवार तक पहुँचा है। हम एक-एक कर उनका हाल आपके सामने लाएँगे।
हम न इन हिंदुओं को भूले थे, न भूलेंगे। आपको भी बार-बार, तब तक इनकी याद दिलाते रहेंगे, जब तक आप इस खतरे में घिरे हैं। जब तक आप काफिर हैं। ताकि आप मुहम्मदवाद और ईसायत के खतरे से सचेत रहें।

सेकुलरिज्म-माइनॉरिटी का रोना कब तक? गंगा जमुनी तहजीब का नारे से गुमराह कब तक?

भाजपा से निलंबित चल रहीं नूपुर शर्मा के पैगंबर मुहम्मद पर कथित टिप्पणी के खिलाफ देशभर में शुक्रवार (10 जून, 2022) को हिंसक प्रदर्शन किए गए। इसी क्रम में तेलंगाना में कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने देश की आन के प्रतीक भारतीय तिरंगे के साथ छेड़छाड़ कर दी। राज्य में दंगाइयों ने तिरंगे के बीच में अशोक चक्र को हटाकर इस्लामिक कलमा लिख दिया।

‘टाइम्स नाउ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उक्त घटना महबूबनगर में मस्जिद-ए-रहमत मस्जिद के बाहर हुई, जहाँ सैकड़ों इस्लामवादी पैगंबर मुहम्मद पर की गई टिप्पणियों के विरोध में एकत्र हुए थे। भीड़ ने कथित तौर पर नूपुर शर्मा और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की और पूर्व भाजपा प्रवक्ता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग करते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

इस्लामिक कट्टरपंथियों ने भारतीय तिरंगे से छेड़छाड़ कर अशोक चक्र को हटाकर उसकी जगह इस्लामिक कलमा को पेंट कर तिरंगे का अनादर किया।

आगजनी, पत्थरबाज़ी और पेट्रोल बम के बाद अब दंगाइयों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज पर कलमा लिखकर अपनी असली मंशा जाहिर कर दी है। आखिर किसके इशारे पर इस अनर्थ को किया गया? केंद्र सरकार को इस पर सख्ती से पेश आना होगा। दंगाइयों, पत्थरबाज और पेट्रोल बम फेंकने वालों को जेलों में डालने के साथ-साथ पेट्रोल और पत्थर सप्लाई करवाने वालों को भी जेलों में डाला जाए। दूसरे, मुस्लिम विद्वानों और इमामों को बैठाकर पूछे कि नूपुर शर्मा ने जो कहा है क्या आपकी इस्लामिक किताब में नहीं लिखा? यदि सच है फिर ये हंगामा क्यों? हैरानी इस बात है कि कोई टीवी जड़ को नहीं पकड़ रहा, अपनी TRP के लिए इस्लामिक विद्वानों के नाम पर "फालतू" लोगों को बुलाकर अपने दर्शकों का समय ख़राब करते हैं। नूपुर को उकसाने वाले तस्लीम रहमानी पर सबने चुप्पी साधी हुई है,क्यों? जो असली गुनहगार है। जो इस्लामिक किताब का हवाला देने की बजाए नूपुर को जेल में डालने का ही ढोल पीट गुमराह कर अपने असली मकसद छुपा रहे हैं। लेकिन वह मकसद यूट्यूब पर सबूतों के साथ खूब उजागर हो रहा है। जिसका किसी भी इस्लामिक विद्वान द्वारा खंडन नहीं किया जा रहा। 

नूपुर शर्मा मामले में मुस्लिम समुदाय के लोग देश भर में हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं। शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद मुस्लिम कट्टरपंथियों ने कई शहरों में पत्थरबाजी की और संपतियों को नुकसान पहुंचाया। जबकि मामला सिर्फ इतना है कि एक चैनल में डिबेट के दौरान वाराणसी के ज्ञानवापी मामले में शिवलिंग को फव्वारा बताए जाने पर नूपुर शर्मा ने सवाल किया कि जैसे आप लोग लोग बार-बार हमारे भगवान का मजाक उड़ा रहे हो, वैसे वो भी दूसरे धर्मों का मजाक उड़ा सकती हैं। इसके बाद नूपुर ने जो कुछ भी कहा, उसे मुस्लिम मौलाना और भगोड़ा जाकिर नाइक भी कह चुका है। इसको लेकर नूपुर शर्मा को रेप, जान से मारने और सिर कलम करने की धमकियां मिल रही हैं। जबकि आज से नहीं काफी समय पहले से ही फिल्म, कहानी, कॉर्टून, कॉमेडी, फोटो या पेंटिंग के माध्यम से हिंदू धर्म का मजाक उड़ाया जाता रहा है।

सबसे बड़ी बात यह है कि जो दूसरे की आस्था और धर्म का मजाक उड़ाते हैं, खुद अपने धर्म के बारे में एक शब्द भी बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। अपने धर्म के खिलाफ कुछ भी सुनने को तैयार नहीं होते। अपने धर्म के बारे में कुछ भी कहे जाने पर बौखला जाते हैं और हिंसा का रास्ता अपना लेते हैं। सदियों तक दूसरे धर्म स्थल को तबाह करने और नुकसान पहुंचाने वाले खास समुदाय के लोग आज भी दूसरे धर्म के बारे में अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कुछ भी बोल-लिख देते हैं, लेकिन जब अपनी बात आती है तो मरने-मारने पर आतुर हो जाते हैं।

टीवी डिबेट में नूपुर शर्मा ने जो कहा उसे मुस्लिम मौलाना जाकिर नाइक भी हदीस के हवाले से कह चुका है। जाकिर नाइक हदीस के हवाले से मुसलमानों के बीच कहता दिख रहा है कि पैगंबर ने 6 साल की बच्ची से शादी की थी और 9 साल की उम्र में उससे शारीरिक संबंध बनाए थे। लेकिन यही बात जब नूपुर शर्मा ने कही तो दुनिया भर में बवाल हो गया। नूपुर शर्मा ने 26 मई को ये टिप्पणी की थी, लेकिन इतने दिनों बाद 10 जून को पत्थरबाजी, हिंसा और प्रदर्शन ने दूसरे धर्म के लोगों को इनके बारे में गंभीरता से सोचने पर विवश कर दिया है। 

लोगों का कहना है कि धर्मनिरपेक्ष का हवाला देने वाले सिर्फ अपने धर्म के मुद्दों पर ही सड़कों पर क्यों उतरते हैं? जब अपने धर्म के बारे में कुछ सुनना बर्दाश्त नहीं को दूसरे धर्म का मजाक क्यों उड़ाते हैं? छोटी-छोटी बातों पर भी हिंसक प्रदर्शन और फतवा क्यों? अगर जाकिर नाइक और हदीस सही तो नूपुर का वही ‘कोट’ गलत कैसे? देश के मुस्लिम आखिर कब तक सेकुलरिज्म और माइनॉरिटी का ढाल लेकर दूसरे को परेशान करते रहेंगे। किसी आतंकी घटना पर कार्रवाई होने पर अल्पसंख्यक का रोना कब तक रोते रहेंगे। लोगों ने तो यहां तक कहना शुरू कर दिया है कि वे अब तो जुमे के नमाज के दिन घर से बाहर निकलना बंद कर दिया है। किसी मुस्लिम पर्व के दौरान सब ठीक रहता है लेकिन होली, रामनवमी, दशहरा जूलुस के दौरान पत्थरबाजी क्यों? दुनिया भर में हिंदू धर्मस्थलों को तोड़ दिया जाता है तो चु्प्पी साध लेते हैं लेकिन उनके खिलाफ एक शब्द भी निकल जाए तो सर तन से जुदा का फतवा जारी हो जाता है। 

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मुंबई में सड़क पर निकलीं बुर्कानशीं महिलाएँ ; क्या यह चीखा-चिल्ली नूपुर और नवीन के विरुद्ध है या

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अब तो सोशल मीडिया पर यूजर्स कह रहे है कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। जुमे के दिन पत्थरबाजी का चलन बन गया है, अभी तक बहुसंख्यक उस तरह आक्रामक नहीं हुआ है, लेकिन ऐसा होता रहा तो बहुसंख्यक प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक है। गर ऐसा हुआ तो फिर उसका अंदाज़ ही लगाया जा सकता है।