स्वीडन की उप प्रधानमंत्री एब्बा बुश ने मुस्लिम समुदाय को सख्त संदेश देते हुए कहा है कि “शरिया कानून वाले इस्लाम के लिए स्वीडन में कोई जगह नहीं है। मुसलमान अपने जीवन में स्वीडिश मूल्यों को अपनाएं या फिर देश छोड़ दें। इस्लाम को स्वीडिश मूल्यों के अनुसार ढलना होगा। स्वीडन और यूरोप में बहुत से लोग इस्लाम का उसी तरह जैसे वे अधिनायकवादी राज्यों में करते हैं”।
एब्बा बुश ने आगे भी कहा कि “इस्लाम को हमारे मौलिक साझा मूल्यों के अनुकूल होना चाहिए, जो स्वीडन और यूरोप को यूरोप बनाते हैं, ये वही मूल्य हैं जो हमें एक दूसरे के साथ सहिष्णुता, शांति और स्वतंत्रता में रहने में सक्षम बनाते हैं, कुछ मूल्य वैकल्पिक नहीं होते”।
एब्बा बुश के समर्थक बयान की तारीफ कर कह रहे हैं कि उनका रुख स्वीडिश सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण है। उनके विरोधी (लगता है सेकुलर हैं) कह रहे हैं कि वे इस्लामोफोबिया को बढ़ा रही हैं। वो मुसलमानों को कलंकित कर उन्हें अलग थलग कर देंगी। स्वीडन इसी वर्ष मार्च में NATO में शामिल हुआ है।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
पिछले कुछ समय में स्वीडन, डेनमार्क, बुल्गारिया, ब्रिटेन, नॉर्वे, जर्मनी (बर्लिन) और फ्रांस में मुस्लिमों ने जम कर दंगे किए और करोड़ों की संपत्ति को आग लगा दी। एक ही तरह से दंगे किए जाते रहे हैं, यूरोप के अलावा म्यांमार, दिल्ली, हल्द्वानी,श्रीलंका, थाईलैंड और बांग्लादेश में भी दंगे किए गए।
ये सभी यूरोपीय देश और ब्रिटेन जहां दंगे हुए NATO के सदस्य हैं और इन देशों में दंगे करने वाले मुस्लिमों को कोई इस्लामिक देश कंट्रोल नहीं करना चाहता जबकि कई इस्लामिक देशों से उन्हें पूरी मदद पहुंचती है। किसी इस्लामिक देश में इतनी हिम्मत नहीं कि मुस्लिम समुदाय के लिए इनमे से किसी देश पर हमला कर दे क्योंकि सब NATO मेंबर हैं।
कुछ समय पहले नीदरलैंड के Geert Wilders ने भी अपने मुल्क में मुस्लिमों पर सख्त टिप्पणियां करते हुए मस्जिदों को बैन करने की भी बात कही थी। इटली की Giorgia Meloni ने भी नई मस्जिदों पर पाबंदी लगाई थी और यहां तक कहा था मस्जिदों में जो कुछ भी होता है सरकार को बताना पड़ेगा।
जर्मनी और ब्रिटेन को भी अब कुछ समझ आ रहा है जहां मस्जिदों पर निगरानी की जा रही है और बंद किया जा रहा है क्योंकि वहां आतंकी गतिविधियों के सबूत मिले। सबसे बड़ा रहस्य तो हंगरी के प्रधानमंत्री Viktor Orban ने खोला है कि George Soros की योजना पूरे यूरोप का इस्लामीकरण करने की है जिसके लिए उसने यूरोपीय देशों के कुछ बड़े नेताओं को खरीद लिया है।
अभी अमेरिका इस्लाम के खतरों से परिचित होते हुए भी ध्यान नहीं दे रहा लेकिन कल वहां भी वही होगा जो आज यूरोपीय देशों में हो रहा है।
किसी समाज में Integrate (एकीकृत) होकर रहना इस्लाम में संभव नहीं है क्योंकि उनके लिए किसी भी देश के संविधान और कानून से ऊपर शरिया है। चीन ने जो मुस्लिमों का इलाज किया है उस पर कोई इस्लामिक देश नहीं बोलता और लगता है एक दिन पूरे विश्व को चीन का फार्मूला अपनाना पड़ेगा।


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