अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग के अनुसार रूस अमेरिकी चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत चाहता है और डेमोक्रैट कमला हर्रिस को हराना चाहता है, और बाइडेन की तरफ से आरोप लगाए गए हैं कि -
-पुतिन अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में हस्तक्षेप कर इसे प्रभावित करने की कोशिश में लगे हैं;
-गलत सूचना को बढ़ावा देने के साथ ही दुष्प्रचार के लिए कुछ मजबूत और प्रभावशाली americans को अपने साथ मिलाने का प्रयास कर रहा है;
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| लेखक चर्चित YouTuber |
अमेरिकी सरकार ने RT Official पर प्रतिबंध लगा दिया जिसे Law डिपार्टमेंट ने विदेशी एजेंट के रूप में रजिस्टर करवाने के लिए मजबूर किया था और उसके वीजा पर प्रतिबंध लगाए थे।
RT पहले Russia Today थी और रूस सरकार से funded news agency थी। RT ने अमेरिका में 2017 में विदेशी सरकार के एजेंट के रूप में REGISTER करवाया था। और हाल ही में RT ने अमेरिका के Influencers को चोरी छिपे recruit करना शुरू किया।
दूसरी तरफ रूस ने इन सब बातों का खंडन किया है हमारे ट्रंप के पिछले कार्यकाल के 4 साल बहुत ही ख़राब थे। इसलिए हमें अमेरिकी चुनावों में कोई रूचि नहीं है।
लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर रूस दखल दे भी रहा है तो अमेरिका को तो कोई आपत्ति होनी ही नहीं चाहिए जब उसने और George Soros ने भारत के चुनाव में झूठ तंत्र का ताना बाना फैला कर मोदी को सत्ता से हटाने की कोशिश और साजिश की थी।
अमेरिका ने ही बांग्लादेश के चुनाव में दखल दिया लेकिन जब शेख हसीना फिर भी जीत गई तो कथित American Deep State ने उसे उखाड़ फेंका।
अमेरिका बात कर रहा है कि रूस ने American Influencers और प्रभावशाली लोगों को अपने साथ मिला रहा है, तो फिर अमेरिका भारत में क्या कर रहा था 2024 के चुनाव में? भारत में अमेरिका ने सबसे बड़े influencer राहुल गांधी, केजरीवाल और ECHO System के वामपंथी गैंग को समझा और उनसे मोदी के खिलाफ पूरा “दुष्प्रचार और झूठ फैलाया” जिसमे प्रमुख रूप से थे मोदी संविधान को ख़त्म कर देगा, इसके बाद कभी चुनाव नहीं होंगे, बेरोजगारी और महंगाई बढ़ रही है, संवैधानिक संस्थाओं को कब्जे में लिया हुआ है और ED/CBI को इस्तेमाल किया जा रहा है विपक्षी नेताओं को जेल में डालने के लिए।
केजरीवाल के जेल जाने पर तो अमेरिका सीधा कूद पड़ा कि Judicial trial fair होना चाहिए और हमारी नज़र है केजरीवाल के मामले पर।
भारत में जो भी मोदी विरोधी थे उन्हें अमेरिका ने खरीदना चाहा, अमेरिका, George Soros, पाकिस्तान, चीन और अन्य देशों ने जोर लगा दिया मोदी को हराने के लिए। अमेरिका का Deep State भारत समेत हर देश में सक्रिय रहता है लेकिन George Soros तो अपने आप में एक अलग ही Deep State की तरह काम करता है।
अमेरिका, सोरोस, पाकिस्तान और चीन समेत अनेक देश सभी मोदी विरोधियों को ऐसे बुलाते थे कि “मुफ्त का चंदन घिस मेरे लाला, खुद भी आ, अपने बाप को भी बुला ला”, सब आ जाओ बस मोदी को हटा दो।
जब आज अमेरिका को रूस का उसके चुनाव में दखल बुरा लग रहा है, लेकिन तब भी अमेरिकी दूतावास के अधिकारी हमारे विपक्षी दलों के साथ मिलकर भारत में बांग्लादेश Repeat करने की साजिश रचने में लगे हैं। लेकिन अमेरिका को याद रखना चाहिए कि अति का एक दिन अंत जरूर होता है और भारत अमेरिका के लिए “अति का अंतिम पड़ाव” है और यहां से उसका पतन निश्चित है।
रूस अमेरिका में तख्तापलट करे या न करे, चीन जरूर इस कोशिश में रहेगा। मजे की बात है आज रूस ट्रंप को लाना चाहता लेकिन पिछले चुनाव में चीन ने ही ट्रंप को उखाड़ फेंका था।


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