भाजपा से निलंबित चल रहीं नूपुर शर्मा के पैगंबर मुहम्मद पर कथित टिप्पणी के खिलाफ देशभर में शुक्रवार (10 जून, 2022) को हिंसक प्रदर्शन किए गए। इसी क्रम में तेलंगाना में कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने देश की आन के प्रतीक भारतीय तिरंगे के साथ छेड़छाड़ कर दी। राज्य में दंगाइयों ने तिरंगे के बीच में अशोक चक्र को हटाकर इस्लामिक कलमा लिख दिया।
‘टाइम्स नाउ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उक्त घटना महबूबनगर में मस्जिद-ए-रहमत मस्जिद के बाहर हुई, जहाँ सैकड़ों इस्लामवादी पैगंबर मुहम्मद पर की गई टिप्पणियों के विरोध में एकत्र हुए थे। भीड़ ने कथित तौर पर नूपुर शर्मा और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की और पूर्व भाजपा प्रवक्ता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग करते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
इस्लामिक कट्टरपंथियों ने भारतीय तिरंगे से छेड़छाड़ कर अशोक चक्र को हटाकर उसकी जगह इस्लामिक कलमा को पेंट कर तिरंगे का अनादर किया।
आगजनी, पत्थरबाज़ी और पेट्रोल बम के बाद अब दंगाइयों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज पर कलमा लिखकर अपनी असली मंशा जाहिर कर दी है। आखिर किसके इशारे पर इस अनर्थ को किया गया? केंद्र सरकार को इस पर सख्ती से पेश आना होगा। दंगाइयों, पत्थरबाज और पेट्रोल बम फेंकने वालों को जेलों में डालने के साथ-साथ पेट्रोल और पत्थर सप्लाई करवाने वालों को भी जेलों में डाला जाए। दूसरे, मुस्लिम विद्वानों और इमामों को बैठाकर पूछे कि नूपुर शर्मा ने जो कहा है क्या आपकी इस्लामिक किताब में नहीं लिखा? यदि सच है फिर ये हंगामा क्यों? हैरानी इस बात है कि कोई टीवी जड़ को नहीं पकड़ रहा, अपनी TRP के लिए इस्लामिक विद्वानों के नाम पर "फालतू" लोगों को बुलाकर अपने दर्शकों का समय ख़राब करते हैं। नूपुर को उकसाने वाले तस्लीम रहमानी पर सबने चुप्पी साधी हुई है,क्यों? जो असली गुनहगार है। जो इस्लामिक किताब का हवाला देने की बजाए नूपुर को जेल में डालने का ही ढोल पीट गुमराह कर अपने असली मकसद छुपा रहे हैं। लेकिन वह मकसद यूट्यूब पर सबूतों के साथ खूब उजागर हो रहा है। जिसका किसी भी इस्लामिक विद्वान द्वारा खंडन नहीं किया जा रहा।
I am surprised that no one even naming Dr Taslim Rehmani, President Muslim Political Council of India. He was the one who provoked @NupurSharmaBJP by mocking #Shivling time and again..Should he face the legal action????
— prafulla ketkar 🇮🇳 (@prafullaketkar) June 10, 2022
Why hasn’t this man Tasleem Rehmani been investigated by @NIA_India till now ? @HMOIndia https://t.co/Dnf2Xxe8oy pic.twitter.com/rVPeWtgoAe
— অবন্তিকা 🇮🇳 (@DrAVSriv) June 11, 2022
— The Jaipur Dialogues (@JaipurDialogues) May 2, 2022
नूपुर शर्मा मामले में मुस्लिम समुदाय के लोग देश भर में हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं। शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद मुस्लिम कट्टरपंथियों ने कई शहरों में पत्थरबाजी की और संपतियों को नुकसान पहुंचाया। जबकि मामला सिर्फ इतना है कि एक चैनल में डिबेट के दौरान वाराणसी के ज्ञानवापी मामले में शिवलिंग को फव्वारा बताए जाने पर नूपुर शर्मा ने सवाल किया कि जैसे आप लोग लोग बार-बार हमारे भगवान का मजाक उड़ा रहे हो, वैसे वो भी दूसरे धर्मों का मजाक उड़ा सकती हैं। इसके बाद नूपुर ने जो कुछ भी कहा, उसे मुस्लिम मौलाना और भगोड़ा जाकिर नाइक भी कह चुका है। इसको लेकर नूपुर शर्मा को रेप, जान से मारने और सिर कलम करने की धमकियां मिल रही हैं। जबकि आज से नहीं काफी समय पहले से ही फिल्म, कहानी, कॉर्टून, कॉमेडी, फोटो या पेंटिंग के माध्यम से हिंदू धर्म का मजाक उड़ाया जाता रहा है।
Nupur Sharma said exactly what your leader Zakir Nail said. If its hate mongering then call out your leader 1st. And if he is right, time for ghar wapsi. https://t.co/e1MRA3ky4B pic.twitter.com/a1uN5tnfOF
— Facts (@BefittingFacts) May 27, 2022
No @ranaayyub, Nupur didnt accuse anything. She didnt say that Prophet had sex with a 6 year old but 9 year old. She just quoted Hadith. You should read Hadith before accusing anyone. And if you are ashamed of what's written in it then you should raise voice against it. pic.twitter.com/aKeU8lDoaL
— Facts (@BefittingFacts) May 28, 2022
If Nupur should be jailed then what should be done about Akbaruddin Owaisi? His brother Assauddin Owaisi should be asked this question. Watch Dr Syed Rizwan Ahmed exposing them completely. #WhoProvokedNupur pic.twitter.com/49UNU1FOYk
— Sandy 🇮🇳(Sundeep) (@ssingapuri) June 10, 2022
सबसे बड़ी बात यह है कि जो दूसरे की आस्था और धर्म का मजाक उड़ाते हैं, खुद अपने धर्म के बारे में एक शब्द भी बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। अपने धर्म के खिलाफ कुछ भी सुनने को तैयार नहीं होते। अपने धर्म के बारे में कुछ भी कहे जाने पर बौखला जाते हैं और हिंसा का रास्ता अपना लेते हैं। सदियों तक दूसरे धर्म स्थल को तबाह करने और नुकसान पहुंचाने वाले खास समुदाय के लोग आज भी दूसरे धर्म के बारे में अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कुछ भी बोल-लिख देते हैं, लेकिन जब अपनी बात आती है तो मरने-मारने पर आतुर हो जाते हैं।
This is Aishwini from West Bengal.
— Shashank Shekhar Jha (@shashank_ssj) June 11, 2022
She put a Facebook post:
“Riotèrs can leave the country instead of damaging everything”
Later, Beldanga Police of Murshidabad arrested her.
Police is refusing to give information over call.@NCWIndia @smritiirani pic.twitter.com/yMesQJyt5p
पहले हंगामा करो, हिंसा करो और फिर कहो कि हमारा धर्म शांति की बात करता है। खुद की कोई जिम्मेदारी नहीं है, सारा दोष पुलिस पर कि बंदोबस्त क्यों नहीं किया गया, क्यों खुफिया एजेंसियां पता नहीं लगा पाईं।पहले इकट्ठा हो, मिलकर रणनीति बनाओ, सड़क पर हंगामा काटो और फिर सारा जिम्मा पुलिस पर।
— Brajesh Kumar Singh (@brajeshksingh) June 10, 2022
आज की स्थिति के लिए केवल कायर मीडिया उत्तरदायी है। नुपुर शर्मा ने authentic कहा था। मीडिया उस पर ओपन डिस्कशन करना चाहिए था, पर मीडिया आग लगाकर बिल में दुबक जाता है। जिस दिन मीडिया इस्लामी ग्रंथों के शब्दों पर डिबेट करने लगेगा, मुसलमानों की उपद्रव व दबाव की रणनीति फुस्स हो जाएगी।
— 🅰️⭕💢🇮🇳 (@amitsanatan) June 10, 2022
सालों से हिन्दू देवी देवताओं की अभद्र पेंटिंग्स "कला की अभिव्यक्ति",उनके कार्टून "अच्छा व्यंग्य",उनके ऊपर कॉमेडियन्स की भद्दी टिप्पणियां "अभिव्यक्ति की आज़ादी" थे इसलिए देश कभी यूं जला नहीं..न ऐसी हिंसा हुई..लेकिन बर्दाश्त करने वालों को ही intolerant,bigot कहने वाले आज चुप हैं👏🏻
— richa anirudh (@richaanirudh) June 11, 2022
सेकुलरिज्म काल नेमी की तरह ही है।
— dhananjay mishra (@dkmishrasc) June 11, 2022
टीवी डिबेट में नूपुर शर्मा ने जो कहा उसे मुस्लिम मौलाना जाकिर नाइक भी हदीस के हवाले से कह चुका है। जाकिर नाइक हदीस के हवाले से मुसलमानों के बीच कहता दिख रहा है कि पैगंबर ने 6 साल की बच्ची से शादी की थी और 9 साल की उम्र में उससे शारीरिक संबंध बनाए थे। लेकिन यही बात जब नूपुर शर्मा ने कही तो दुनिया भर में बवाल हो गया। नूपुर शर्मा ने 26 मई को ये टिप्पणी की थी, लेकिन इतने दिनों बाद 10 जून को पत्थरबाजी, हिंसा और प्रदर्शन ने दूसरे धर्म के लोगों को इनके बारे में गंभीरता से सोचने पर विवश कर दिया है।
लोगों का कहना है कि धर्मनिरपेक्ष का हवाला देने वाले सिर्फ अपने धर्म के मुद्दों पर ही सड़कों पर क्यों उतरते हैं? जब अपने धर्म के बारे में कुछ सुनना बर्दाश्त नहीं को दूसरे धर्म का मजाक क्यों उड़ाते हैं? छोटी-छोटी बातों पर भी हिंसक प्रदर्शन और फतवा क्यों? अगर जाकिर नाइक और हदीस सही तो नूपुर का वही ‘कोट’ गलत कैसे? देश के मुस्लिम आखिर कब तक सेकुलरिज्म और माइनॉरिटी का ढाल लेकर दूसरे को परेशान करते रहेंगे। किसी आतंकी घटना पर कार्रवाई होने पर अल्पसंख्यक का रोना कब तक रोते रहेंगे। लोगों ने तो यहां तक कहना शुरू कर दिया है कि वे अब तो जुमे के नमाज के दिन घर से बाहर निकलना बंद कर दिया है। किसी मुस्लिम पर्व के दौरान सब ठीक रहता है लेकिन होली, रामनवमी, दशहरा जूलुस के दौरान पत्थरबाजी क्यों? दुनिया भर में हिंदू धर्मस्थलों को तोड़ दिया जाता है तो चु्प्पी साध लेते हैं लेकिन उनके खिलाफ एक शब्द भी निकल जाए तो सर तन से जुदा का फतवा जारी हो जाता है।
अवलोकन करें:-
अब तो सोशल मीडिया पर यूजर्स कह रहे है कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। जुमे के दिन पत्थरबाजी का चलन बन गया है, अभी तक बहुसंख्यक उस तरह आक्रामक नहीं हुआ है, लेकिन ऐसा होता रहा तो बहुसंख्यक प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक है। गर ऐसा हुआ तो फिर उसका अंदाज़ ही लगाया जा सकता है।
जिनके दिमाग में अब भी गंगा- जमुनी तहजीब के जाले लगे हुए हैं, उनको आज के दिन के तमाशे़ देखकर जालों को साफ कर लेेना चाहिए। आज के ये दृश्य बताने के लिए काफी हैं कि इस देश में कुछ लोग हुड़दंग की किस सीमा तक जा सकते हैं, अपनी भावनाओं के इजहार के नाम पर, दूसरे धर्मों का अनादर करते हुए।
— Brajesh Kumar Singh (@brajeshksingh) June 10, 2022
Would have been happy to see if such crowd from minority community had come on streets in various states against the terrorist organization Al Qaeda when Al Qaeda recently threatened for suicide attacks in India to fight for the honour of Prophet.
— Anshul Saxena (@AskAnshul) June 10, 2022
Accept it or not but they've already declared a war against Hindus..
— Mr Sinha (@MrSinha_) June 11, 2022
Yesterday it was Ramnavmi, Today it's Nupur, tomorrow it will be something else… They’ll find reason to create violence & k!II Hindus out of nothing.....
हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। जुमे के दिन पत्थरबाजी का चलन बन गया है, अभी तक बहुसंख्यक उस तरह आक्रामक नहीं हुआ है, लेकिन ऐसा होता रहा तो बहुसँख्यक प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक है। गर ऐसा हुआ तो फिर उसका अंदाज़ ही लगाया जा सकता है।#thoughtoftheday #Nupur_Sharma
— उमेश चतुर्वेदी Umesh Chaturvedi (@uchaturvedi) June 11, 2022
ये हुजूम कभी कसाब, अफ़ज़ल, बुरहान जैसे आतंकियों के लिए फांसी मांगने सड़को पर क्यूं नहीं उतरा ?
— Kapil Mishra (@KapilMishra_IND) June 10, 2022
कभी जैश ए मोहम्मद या अल कायदा जैसे आतंकी संगठनों के नामों में मजहब का अपमान क्यूं नहीं दिखा ?
सोचिये , आज सोचना बहुत जरूरी हैं
— जागरण सिद्धार्थ (@jagran_osho) June 10, 2022
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