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पाकिस्तान : कसाब को भर्ती करने वाला आतंकी जुल्फिकार ढेर

कालचक्र जब घूमता है तो कहीं आनंद की बौझार तो कहीं डर का साया। 2014 में मोदी सरकार से पहले जो पाकिस्तान भारत में पल रहे अपने sleeper cells और आकाओं के संरक्षण में भारत को आतंक से डराकर रखता था आज वही पाकिस्तान अपने ही बुने जाल में जी रहा है। किस आतंकी को कब 72 हूरों के पास पहुंचा दिया जाए कुछ नहीं पता।   
पाकिस्तान में भारत के एक और बड़े दुश्मन को अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलियों से भूनकर मौत की नींद सुला दिया। मारा गया आतंकी हाफिज जुल्फिकार वही था, जिसने 2008 के मुंबई आतंकी हमले के दोषी अजमल कसाब को भारत पर हमला करने के लिए तैयार और भर्ती किया था। वर्ष 2022 से अब तक पाकिस्तान और अन्य विदेशी जमीनों पर भारत के खिलाफ षडयंत्र रचने वाले 50 से अधिक कुख्यात आतंकी रहस्यमय तरीके से मारे जा चुके हैं।

यह पीएम मोदी का नया भारत है: घर में घुसकर हो रहा हिसाब
यह पीएम मोदी का नया भारत है, जहां देश के दुश्मनों को चुन-चुनकर खत्म किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व और आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति का ही असर है कि भारत विरोधी आतंकी अब अपनी पनाहगाहों में भी सुरक्षित नहीं हैं। पाकिस्तान में अज्ञात बंदूकधारी लगातार आतंकियों का सफाया कर रहे हैं। वर्ष 2022 से शुरू हुआ यह सिलसिला लगातार तेज हुआ है—वर्ष 2022 में 5, 2023 में दो दर्जन से अधिक, 2024 में 2, 2025 में 5 और वर्ष 2026 में अब तक 7 बड़े आतंकी ठिकाने लगाए जा चुके हैं। पिछले वर्षों में हरदीप सिंह निज्जर, अवतार सिंह खांडा, परमजीत पंजवार, रिपुदमन सिंह मलिक, हरविंदर रिंडा, सुखदूल सिंह, हैप्पी संघेड़ा, अबू कासिम, जहूर मिस्त्री, अब्दुल सलाम भुट्टावी, सैयद नूर, एजाज अहमद, खालिद रजा, बशीर अहमद, शाहिद लतीफ, मुफ्ती कैसर फारूक, जियाउर रहमान, मलिक दाऊद, सुक्खा दुनिके, ख्वाजा शाहिद, मौलाना रहीम उल्लाह तारिक, साजिद मीर, अदनान अहमद उर्फ हंजला अदनान, मौलाना शेर बहादुर, अब्दुल्ला शाहीन, अबू सैफुल्लाह, अबू कताल, शाह मीर, मौलाना कासिफ अली और लखबीर सिंह रोडे जैसे दुश्मनों का अंत हो चुका है।

26/11 के साजिशकर्ता लखवी का करीबी और कसाब का रिक्रूटर हाफिज जुल्फिकार ढेर
मोदी सरकार के आतंकवाद विरोधी कड़े संदेश के दौर में पाकिस्तान की धरती पर भारत के दुश्मनों का चुन-चुनकर अंत हो रहा है। 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के मुख्य साजिशकर्ता जकी-उर-रहमान लखवी के करीबी रिश्तेदार और जैश-ए-मोहम्मद के बड़े रिक्रूटर हाफिज जुल्फिकार को अज्ञात हमलावरों ने सिर में गोली मारकर ढेर कर दिया। जुल्फिकार वही आतंकी था जो अजमल कसाब जैसे आतंकियों की भर्ती और प्रशिक्षण नेटवर्क से जुड़ा रहा था। पाकिस्तान में अज्ञात हमलावरों द्वारा आतंकियों को ठिकाने लगाने की इस श्रृंखला ने सीमा पार बैठे भारत विरोधी आकाओं की नींद उड़ा दी है।

भारत विरोधी लश्कर आतंकी गाजी मुमताज का हुआ सफाया
नए भारत के सख्त तेवर और आतंकवाद के समूल नाश के संकल्प से पाकिस्तान में बैठे आतंकी आकाओं की नींद उड़ी हुई है। लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के टॉप कमांडर और हाफिज सईद के बेहद करीबी आतंकी गाजी मुमताज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। गाजी मुमताज लंबे समय तक जम्मू-कश्मीर में सक्रिय रहकर आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था, लेकिन भारतीय सुरक्षाबलों की कड़ी कार्रवाई के खौफ से वह पाकिस्तान भाग गया था। वह खैबर पख्तूनख्वा के अपर दीर (बाराहवाल) का रहने वाला था और तब से हाफिज सईद व पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के संरक्षण में रहकर लश्कर के कैंपों में नए आतंकियों को ट्रेनिंग देने व लॉजिस्टिक नेटवर्क संभालने का काम कर रहा था। पाकिस्तान में पनाह लिए बैठे इस खूंखार कमांडर का खात्मा कश्मीर में आतंकी नेटवर्क के लिए एक बहुत बड़ा झटका है।

पीओके में जैश आतंकी हमजा बुरहान का अंत, भारत पर नजर गड़ाने वालों का नामोनिशान मिटा
गुलाम कश्मीर (पीओके) में भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी हमजा बुरहान को अज्ञात हमलावरों ने मौत के घाट उतार दिया। बुरहान नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार आतंकियों की घुसपैठ की साजिशों में शामिल था। मोदी सरकार द्वारा सीमा पार आतंकियों के नेटवर्क को बेअसर करने की स्पष्ट रणनीति का असर है कि अब गुलाम कश्मीर के आतंकी कैंपों में भी भारत के दुश्मन पूरी तरह खौफजदा हैं।

बहावलपुर में जैश का जहर उगलने वाला मौलाना सलमान अजहर खत्म, आतंक के आकाओं में मची भगदड़
जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के करीबी और भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले मौलाना सलमान अजहर को बहावलपुर में एक अज्ञात वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सलमान अजहर जैश के मदरसों में युवाओं का ब्रेनवॉश करने और भारत के खिलाफ जेहादी ट्रेनिंग देने का मुख्य कर्ताधर्ता था। इस रहस्यमयी खात्मे के बाद जैश के मुख्यालय बहावलपुर में सन्नाटा पसरा हुआ है।

खैबर पख्तूनख्वा में लश्कर आतंकी शेख यूसुफ अफरीदी ढेर, मोदी राज में भारत विरोधियों की उल्टी गिनती
खैबर पख्तूनख्वा में अज्ञात हमलावरों ने लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख संचालक शेख यूसुफ अफरीदी को गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया। अफरीदी सीमा पार हथियारों की तस्करी और कश्मीर में हिंसा भड़काने के लिए आतंकियों को साजो-सामान मुहैया कराने का नेटवर्क चला रहा था। नए भारत के कड़े संदेश के बाद से पाकिस्तान में छुपे बैठे आतंकवादियों में अपनी जान बचाने की होड़ मची है, लेकिन अज्ञात हमलावर चुन-चुनकर उनका हिसाब कर रहे हैं।

मुरीदके में लश्कर कमांडर बिलाल आरिफ सलाफी का खात्मा, नए भारत की नीति से पाकिस्तान में खौफ
आतंकवाद पर भारत के कड़े रुख और जीरो टॉलरेंस नीति के असर के बीच पाकिस्तान में भारत विरोधी आतंकियों का सफाया लगातार जारी है। लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख कमांडर बिलाल आरिफ सलाफी को मुरीदके स्थित लश्कर कैंप के बाहर अज्ञात हमलावरों ने मौत के घाट उतार दिया। बिलाल आरिफ भारत के खिलाफ साजिश रचने और आतंकियों की नई पौध तैयार करने के नेटवर्क में जुटा हुआ था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं और फिर चाकू से वार कर उसे वहीं ढेर कर दिया। जो आतंकी कभी पाकिस्तान में बैठकर सुरक्षित महसूस करते थे, वे अब अपने ही गढ़ में डर के साये में जी रहे हैं।

आतंकी हैंडलर लेफ्टिनेंट कर्नल इमरान दयाल को अज्ञात हमलावरों ने भूना
भारत विरोधी आतंकवाद को संरक्षण देने वाले पाकिस्तानी तंत्र को एक और बड़ा झटका लगा है। डेरा इस्माइल खान में अज्ञात बंदूकधारियों ने पाकिस्तानी सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल और आतंकी हैंडलर इमरान दयाल को गोलियों से छलनी कर ढेर कर दिया। इमरान दयाल जैश और लश्कर के आतंकियों को ट्रेनिंग देने और भारत में अशांति फैलाने के ऑपरेशनों को कोऑर्डिनेट करता था। इस हमले ने पाकिस्तानी सेना और आतंकियों के नापाक गठजोड़ में भारी दहशत पैदा कर दी है।

लश्कर के सक्रिय कमांडर अब्दुल गफ्फार का खात्मा, सुरक्षित पनाहगाहों में भारत के दुश्मनों का अंत
आतंकवाद को घर में घुसकर खत्म करने की भारत की नीति के बीच पाकिस्तान में आतंकियों के खात्मे का सिलसिला लगातार आगे बढ़ रहा है। लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय कमांडर अब्दुल गफ्फार संदिग्ध और रहस्यमयी परिस्थितियों में मारा गया। गफ्फार लंबे समय से भारत के खिलाफ आतंकी हमलों के लिए युवाओं को भड़काने और फंड जुटाने का काम कर रहा था। पाकिस्तान की जमीन पर एक के बाद एक आतंकियों का इस तरह सफाया होना यह साबित करता है कि अब देश के गद्दारों और दुश्मनों के लिए कोई भी सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है।

पेशावर में जैश आतंकी मुश्ताक उर्फ गाजी बाबा का काम तमाम, नए भारत के डर से थर्राया पाकिस्तान
मोदी सरकार की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति और भारत के कड़े रुख का खौफ सीमा पार साफ नजर आ रहा है। पेशावर के पास चामकानी इलाके में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कुख्यात कमांडर मुश्ताक उर्फ गाजी बाबा को अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियों से भून दिया। गाजी बाबा भारत में कई आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने और आतंकियों की घुसपैठ कराने में शामिल था। अज्ञात बंदूकधारियों की इस कार्रवाई ने पाकिस्तान में बैठे भारत विरोधी नेटवर्क की कमर तोड़ दी है।

IISc बेंगलुरु पर हुए हमले की साजिश में भी शामिल था सैफुल्लाह
लश्कर-ए-तैयबा और जमात का आतंकवादी रजुल्लाह निजामनी उर्फ अबू सैफुल्लाह को पाकिस्तान के सिंध के बादिन जिले के मातली में उस समय गोली मार दी गई जब वह अपने घर से बाहर निकला था। लश्कर ए तैयबा का प्रमुख आतंकवादी अबु सैफुल्लाह नेपाल में लश्कर मॉड्यूल पर काम कर रहा था। वह नेपाल में विनोद कुमार के नाम से काम करता था। उसने नेपाली महिला नगमा बानू से शादी की थी। सैफुल्लाह लश्कर के ऑपरेशनल कमांडर आजम चीमा उर्फ बाबाजी का सहयोगी था। नागपुर में RSS हेडक्वाटर पर हमले के अलावा वह रामपुर में 2002 में सीआरपीएफ कैंप पर हुए आतंकी हमले और 2005 में IISc बेंगलुरु पर हुए हमले की साजिश में भी शामिल था। सैफुल्लाह भारत में आतंकियों की घुसपैठ और आर्थिक मदद जुटाने जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम दे रहा था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सैफुल्लाह लश्कर के ऑपरेशनल कमांडर आजम चीमा उर्फ बाबाजी का सहयोगी था।

जम्मू-कश्मीर में कई घातक हमलों को अंजाम देने वाले अबु कताल को गोली मारी
जम्मू-कश्मीर में कई घातक हमलों को अंजाम देने में अपनी भूमिका के कारण अबु कताल उर्फ फैसल नदीम राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और भारतीय सेना सहित भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के टारगेट पर था। अबू कताल को मार्च 2025 में पाकिस्तान में झेलम के दीना में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मार दी, जिसमें उसकी मौत हो गई। इस हमले में उसके ड्राइवर की भी मौत हो गई। अबू कताल 26/11 मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का रिश्तेदार और लश्कर-ए-तैयबा का आतंकवादी था। अबू कताल दो दशक से जम्मू कश्मीर में बड़े आतंकी हमलों और घुसपैठ कराने का अहम रोल निभाता आया है। पुंछ जिले में सेना के काफिलों से लेकर राजौरी के गांव में हिंदुओं पर अबू कताल के इशारे पर ही हमले हुए थे। जम्मू कश्मीर में भेजे जाने से पहले ही अबू कताल ही आतंकियों को ट्रेंड करता था, ताकि वो अपने नापाक मंसूबों में कामयाब हो पाए।

सूर्या को चाकू घोंपने वाला असद एनकाउंटर में ढेर, बकरीद के दिन किया था हिंदू युवक का मर्डर: UP पुलिस ने बताई मुठभेड़ की इनसाइड स्टोरी

            सूर्या (सबसे दाएँ) को असद (सबसे बाएँ) ने घोंपा था चाकू (फोटो साभार: आज तक/UP Police)
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के सूर्या चौहान हत्याकांड में मुख्य आरोपित असद को पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया है। दरअसल, बकरीद के दिन 17 साल के सूर्या चौहान पर असद और उसके साथियों ने चाकू से हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल सूर्या की बाद में अस्पताल में मौत हो गई थी।

पुलिस के अनुसार, इस मामले में पाँच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। तीन आरोपितों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था, जबकि मुख्य आरोपित असद फरार चल रहा था। उस पर 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था।

DCP धवल जायसवाल ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि असद अपने कुछ साथियों से मिलने खोड़ा इलाके में आने वाला है। सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की। इसी दौरान असद और उसका एक साथी बाइक पर आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी।

पुलिस ने बताई एनकाउंटर की इनसाइड स्टोरी

पुलिस को सूचना मिली कि असद अपने एक साथी से मिलने खोड़ा इलाके में आने वाला है। बताया गया कि वह कुछ पैसे लेकर इलाके से बाहर भागने की फिराक में था। सूचना मिलते ही पुलिस ने पूरे क्षेत्र में कॉम्बिंग अभियान शुरू किया और कई जगह बैरियर लगाकर सघन चेकिंग शुरू कर दी।

इसी दौरान वसुंधरा क्षेत्र में पुलिस टीम को एक बाइक पर दो संदिग्ध युवक आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया लेकिन आरोप है कि मुख्य आरोपित असद ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। मुठभेड़ में असद गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया।

पुलिस ने घायल असद को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुँचाया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस गोलीबारी में खोड़ा थाना क्षेत्र में तैनात एक कॉन्स्टेबल भी घायल हुआ है जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। वहीं, असद का एक साथी मौके से फरार हो गया जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

मौके से पुलिस ने एक पिस्तौल और बाइक बरामद की है। अधिकारियों का कहना है कि असद के आपराधिक इतिहास की भी जाँच की जा रही है। साथ ही, बरामद हथियार की फोरेंसिक जाँच कराई जाएगी और पूरे मुठभेड़ मामले की नियमानुसार जाँच भी की जा रही है। सूर्या चौहान हत्याकांड के मुख्य आरोपित के मारे जाने के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है और पुलिस अब फरार साथी की गिरफ्तारी में जुटी है।

पाकिस्तान में फिर अज्ञात हमलावरों ने ईद की नमाज के बाद निपटाया आतंकी बिलाल सलाफी: मुरिदके में लश्कर के गढ़ ‘मरकज तैयबा’ में घुसकर वार

                                                     आतंकी बिलाल आरिफ सलाफी
पाकिस्तान के मुरिदके से लश्कर-ए-तैयबा के लिए डराने वाली खबर सामने आई है। इस खबर ने ना केवल आतंकी संगठन बल्कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों की भी नींद उड़ा दी है। दरअसल, ईद के दिन आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ठिकाने ‘मरकज तैयबा’ के अंदर घुसकर अज्ञात हमलावरों ने खूंखार कमांडर बिलाल आरिफ सलाफी की हत्या कर दी।

बताया जा रहा है कि यह घटना ईद की नमाज के तुरंत बाद हुई। जैसे ही नमाज खत्म हुई, हमलावर ने मौके पर मौजूद बिलाल आरिफ सलाफी को निशाना बनाया। पहले उस पर गोलियाँ चलाई गईं और फिर यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह बच न सके, उस पर चाकू से कई वार किए गए। हमलावर तब तक नहीं रुका जब तक उसने बिलाल की मौत की पूरी पुष्टि नहीं कर ली।

सोशल मीडिया पर इस घटना के बाद के कुछ वीडियो भी वायरल हो रहे हैं जिनमें बिलाल जमीन पर पड़ा दिख रहा है और लोग उसकी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।

मरकज तैयबा को लश्कर-ए-तैयबा का हाई-सिक्योरिटी हेडक्वार्टर माना जाता है जहाँ बाहरी व्यक्ति का प्रवेश लगभग असंभव बताया जाता है। शुरुआती आशंका यह जताई जा रही है कि हमलावर पहले से ही नमाज के दौरान अंदर मौजूद था और उसने सही मौके का इंतजार किया। घटना को अंजाम देने के बाद हमलावर मौके से फरार हो गया और अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मिलकर उसकी तलाश कर रही हैं।

कौन था बिलाल आरिफ सलाफी?

लश्कर-ए-तैयबा में बिलाल आरिफ सलाफी को एक अहम सदस्य माना जाता था। वह मुरिदके के सेंटर में नए लोगों को जोड़ने और उन्हें विचारधारा सिखाने का काम करता था। उसकी जिम्मेदारी युवाओं को पहचानकर उन्हें संगठन से जोड़ना और ट्रेनिंग की देखरेख करना थी। इसी वजह से वह संगठन के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता था और मरकज तैयबा में उसकी मौजूदगी उसकी अहमियत दिखाने कि लिए काफी थी।

PAK फौजियों का काम तमाम, पुलिस चौकियों पर कब्जा और ताबड़तोड़ हवाई हमले: रमजान के बीच ही पाकिस्तान और अफगानिस्तान में शुरू हुई जंग

चमन बॉर्डर क्रॉसिंग के पास पाकिस्तानी फौज (बाएँ), तोरखम बॉर्डर क्रॉसिंग पर तालिबान फौज (दाएँ), ( साभार : aljazeera)
रमजान के महीने के बीच डूरंड लाइन पर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भीषण युद्ध छिड़ गया है। गुरुवार (26 फरवरी) रात से जारी इस खूनी संघर्ष में तालिबान ने 55 पाकिस्तानी फौजियों को मार गिराने और 19 सैन्य चौकियों पर कब्जा करने का दावा किया है। अफगानिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों के जवाब में की गई है।

वहीं, बुरी तरह घिरे पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपनी विफलता का ठीकरा भारत पर फोड़ते हुए तालिबान को ‘भारत का प्रॉक्सी‘ करार दिया है। इस टकराव ने दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है।

पाकिस्तान ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उसके सिर्फ दो फौजी मारे गए हैं और 36 अफगान लड़ाके मारे गए हैं। दोनों देशों के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल उलट हैं। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह सैन्य कार्रवाई गुरुवार (26 फरवरी 2026) की रात शुरू हुई, जो इस्लामी कैलेंडर के अनुसार 9 रमजान 1447 के दिन थी।

अफगानिस्तानी मंत्रालय ने कहा कि कुछ दिन पहले पाकिस्तानी फौज ने अफगान क्षेत्र का उल्लंघन करते हुए मिसाइल और हवाई हमले किए थे, जिनमें महिलाएँ और बच्चे मारे गए थे। इसी के जवाब में तालिबान बलों ने पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी अफगानिस्तान के पक्तिका, पक्तिया, खोस्त, नंगरहार, कुनार और नूरिस्तान प्रांतों से लगे डूरंड लाइन के पार समन्वित जवाबी हमले किए।

अफगान रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, करीब चार घंटे चली इस लड़ाई में तालिबान बलों ने पाकिस्तान के दो सैन्य अड्डों और 19 चौकियों पर कब्जा कर लिया, जबकि चार अन्य चौकियों से पाकिस्तानी फौजी भाग खड़े हुए। मंत्रालय ने दावा किया कि इस दौरान 55 पाकिस्तानी फौजी मारे गए, कई को जिंदा पकड़ा गया।

वहीं कुछ शव अफगानिस्तान लाए गए और भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद भी जब्त किए गए हैं। एक पाकिस्तानी टैंक को नष्ट करने और एक सैन्य परिवहन वाहन को कब्जे में लेने का भी दावा किया गया। तालिबान ने माना कि 8 तालिबान लड़ाके मारे गए और 11 घायल हुए।

तालिबान का आरोप: काबुल, कंधार और पक्तिया पर हवाई हमले

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “कायर पाकिस्तानी फौजियों ने काबुल, कंधार और पक्तिया के कुछ इलाकों में हवाई हमले किए हैं, सौभाग्य से अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।”

प्रवक्ता जबीहुल्लाह ने कहा कि इन हमलों के बाद अफगान बलों ने कड़ी जवाबी कार्रवाई की। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अफगान वायु रक्षा बलों ने अफगान हवाई क्षेत्र में घुसे एक पाकिस्तानी विमान को भी मार गिराया है। हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।

तालिबान सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान की ओर से नंगरहार में स्थित एक शरणार्थी शिविर पर मिसाइल हमला किया गया, जिसमें महिलाओं और बच्चों समेत 13 अफगान नागरिक घायल हुए।

पाकिस्तान का पलटवार: तालिबान ने बिना उकसावे के की फायरिंग

पाकिस्तान ने तालिबान के सभी दावों को खारिज करते हुए कहा कि सीमा पर झड़प की शुरुआत अफगान-तालिबान बलों ने की थी। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा कि सिर्फ उनके दो फौजी मारे गए और तीन घायल हुए हैं, जबकि 36 अफगान लड़ाके मारे गए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बिना उकसावे की गई फायरिंग का जवाब दे रहा है।

पीएम शहबाद शरीफ के प्रवक्ता मुशर्रफ अली जैदी ने कहा कि पाकिस्तानी फौजियों के पकड़े जाने की खबर गलत है। पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, “अफगान-तालिबान शासन ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पाकिस्तान-अफगान सीमा पर बिना उकसावे के फायरिंग शुरू की। इसका पाकिस्तान द्वारा प्रभावी जवाब दिया जा रहा है।”

इसके अलावा राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी बयान जारी करते हुए कहा, “पाकिस्तान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं करेगा। हमारी सशस्त्र फौजियों की प्रतिक्रिया व्यापक और निर्णायक है। जो लोग हमारी शांति को हमारी कमजोरी समझते हैं, उन्हें कड़ा जवाब मिलेगा।”

संघर्ष का असर तोरखम सीमा चौकी तक फैल गया, जो दोनों देशों के बीच एक प्रमुख व्यापारिक और आवागमन मार्ग है। अफगान अधिकारियों ने सीमा के पास स्थित एक शरणार्थी शिविर को खाली कराना शुरू कर दिया, क्योंकि कई शरणार्थी घायल हो गए थे। वहीं पाकिस्तानी पुलिस ने बताया कि सीमा से सटे गाँवों के लोग सुरक्षित इलाकों की ओर पलायन कर रहे हैं।

पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि अफगान क्षेत्र से दागे गए मोर्टार गोले सीमावर्ती गाँवों में गिरे, हालाँकि किसी नागरिक के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई।

क्यों बार-बार भड़कता है विवाद

डूरंड रेखा अफगनिस्तान और पाकिस्तान के बीच लगभग 2,600 किलोमीटर लंबी सीमा है जो 1893 में ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच स्थापित की गई थी। अंग्रेजों के बनाए इस सीमा रेखा को अफगानिस्तान नहीं मानता है। रेखा के एक ओर अफगानिस्तान के 12 प्रांत हैं, दूसरी ओर पाकिस्तान के खैबर पखतूनख्वा, बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान।

दोनों देशों के लोग इस खुली सीमा के आर-पार आते जाते हैं और परंपरागत रूप से जुड़े हुए हैं। धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक तौर पर काफी समानताएँ हैं। यही वजह है कि खैबर पखतूनख्वा, बलूचिस्तान और गिलगित जैसे इलाकों में पाकिस्तानी फौज के खिलाफ लोग विद्रोह कर रहे हैं। यहाँ पाकिस्तानी फौज का जुर्म सुर्खियों में भी रहा है।

महिलाओं-बच्चों के साथ अमानवीय हरकत, पुरुषों का लगातार गायब होने को लेकर लोग पाकिस्तान के फौज को जिम्मेदार मानते हैं। अफगानिस्तान के लिए यह एक संवेदनशील मामला है। यहाँ कोई भी शासन में आ जाए, वह डूरंड रेखा को नहीं मानेगा, क्योंकि ये भावनाओं से जुड़ा है।

अफगानिस्तान ने पश्तून प्रभाव वाले क्षेत्र खैबर पख्तूनख्वाह को पश्तूनिस्तान बनाने का भी समर्थन किया है। पाकिस्तान ने जब पख्तूनख्वाह सीमा पर वीजा और पासपोर्ट अनिवार्य किया, तो पख्तूनों ने प्रदर्शन किया। ब्रिटिश विदेश सचिव सर मोर्टिमर डूरंड ने 1893 में अफगानिस्तान और भारत के बीच सीमा की स्थापना की थी और पख्तून प्रांत को अलग कर दिया था।

दोनों देशों के बीच फैली हुई लंबी डूरंड रेखा पख्तून जनजातीय क्षेत्रों से होकर गुजरती है और उन्हें दो अलग-अलग मुल्कों में विभाजित करती है। पाकिस्तान बनने के बाद डूरंड रेखा उसे विरासत में मिली, लेकिन इस पर कोई औपचारिक समझौता या मान्यता नहीं है।

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) के उपाध्यक्ष काशिफ पानेजई के मुताबिक, सीमा पर जो इलाका बँटा हुआ है, वह सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं है, वह उनका घर है। उन्होंने कहा, “डूरंड रेखा कई गाँवों को आधे में विभाजित करती है और कई लोगों को उनके कृषि वाली भूमि से विभाजित करती है। यह जनजातियों और अन्य समूहों को बीच से बाँटता है।”

डूरंड रेखा के बावजूद कई इलाके ऐसे भी हैं, जहाँ पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की रेखा अस्पष्ट है। ये दुर्गम और सुलेमान पर्वत श्रृंखला वाला इलाका है। ओरकजई, स्पिन बोल्डक से गजनी तक कई क्षेत्र ऐसे हैं। इसको लेकर भी दोनों देशों में तनाव रहता है।

इजरायल से बदला लेने की तैयारी कर रहा था तैयारी, तभी आसमान से बरसीं मिसाइलें: यमन पर कब्जा जमाए हूतियों का प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी मंत्रियों समेत ढेर

                    इजरायली हवाई हमले में अहमद अल-रहावी मारा गया। (साभार - एपी और द इकोनॉमिस्ट)
यमन की राजधानी सना में बीते 28 अगस्त को हुए इजरायली हवाई हमले ने मध्य पूर्व की राजनीति में नया मोड़ ला दिया। इस हमले में हूती विद्रोहियों की सरकार के प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी की मौत हो गई है, जिसकी पुष्टि खुद हूतियों ने दो दिन बाद की है।

यह सिर्फ एक हत्या नहीं बल्कि इजरायल के लिए एक बड़ी जीत थी, जिसने सबसे वरिष्ठ हूती नेता को निशाना बनाया। अल-रहावी को पिछले साल ही प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था और अल-रहावी की मौत इजरायल-हूती संघर्ष की दिशा को बदल सकती है।

 हमले के वक्त अल-रहावी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी सना के बाहरी इलाके में सरकारी सेमिनार में मौजूद थे। उसी दौरान टीवी पर उनके नेता अब्दुल-मलिक अल-हौती का पहले से रिकॉर्ड किया गया भाषण चलाया जा रहा था, जिसमें वे गाजा संघर्ष पर इजरायल से बदला लेने की धमकी दे रहे थे।

हवाई हमले ने हूती नेतृत्व की कमजोरियों को उजागर किया और यह स्पष्ट कर दिया कि इजराइल अब केवल बुनियादी ढाँचे पर नहीं बल्कि नेतृत्व पर सीधे वार करने की रणनीति अपना रहा है। अहमद अल-रहावी कभी यमन के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के करीबी रहे थे और 2014 में हूतियों के साथ जुड़े।

हाल ही में उन्होंने इजराइल पर हमलों का समर्थन करते हुए कहा था कि यमन फिलिस्तीनी संघर्ष के लिए बहुत कुछ सहने को तैयार है। उनकी हत्या के बाद हूती नेतृत्व में गहरा आघात है। सर्वोच्च राजनीतिक परिषद के प्रमुख महदी अल-मशात ने बदला लेने की घोषणा की और विदेशी कंपनियों को इजरायल छोड़ने की धमकी दी।

इजराइली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने इसे हूतियों पर ‘करारा झटका’ बताया और कहा कि यह तो बस शुरुआत है। विश्लेषकों के अनुसार, यह हमला इजरायल की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह अब हमास और हिज़्बुल्लाह की तरह हूतियों के नेतृत्व को भी सीधे निशाना बना रहा है।

क्राइसिस ग्रुप के वरिष्ठ विश्लेषक अहमद नागी ने कहा कि यह बदलाव हूतियों के कमांड ढाँचे को भारी खतरे में डालता है। हूती अक्टूबर 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से ही सक्रिय हैं। उन्होंने लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय शिप्स को निशाना बनाया और इजरायल पर मिसाइलें दागीं, जिससे वैश्विक व्यापार मार्ग बाधित हुआ।

हाल ही में उन्होंने इजरायल की ओर क्लस्टर हथियारों से लैस बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जो 2023 के बाद अपनी तरह का पहला हमला था लेकिन अल-रहावी पर हुआ ताजा हमला दिखाता है कि इजरायल अब केवल हमास या लेबनान के हिज़्बुल्लाह तक सीमित नहीं है।

सीरिया में असद सरकार के ठिकाने, ईरान समर्थक मिलिशिया और अब यमन के हूती सब इजरायली निशाने पर हैं। मानो इजरायल अपने आखिरी बड़े दुश्मनों तक का सफाया करने की ओर बढ़ रहा हो। गाजा से लेकर बेरूत, दमिश्क से लेकर सना तक, इजरायल एक साथ कई मोर्चों पर लड़ रहा है और धीरे-धीरे हर दुश्मन की रीढ़ तोड़ने की कोशिश में है।

इजरायल के हमले में मारा गया ईरान का कमांडर अली शादमानी, युद्धकालीन सैन्य प्रमुख बताता था शिया देश: मिसाइल हमले में गई जान, ड्रोन फैक्ट्री भी कर दी तबाह

                                                         ईरान मिलिट्री का चीफ अली शादमानी
इजरायल और ईरान के बीच हवाई हमले पाँचवे दिन भी जारी हैं। इजरायल लगातार ईरान पर मिसाइल अटैक कर रहा है। इसी अटैक में युद्धकालीन चीफ ऑफ स्टाफ अली शादमानी की मौत हो गई है। इजरायली सेना ने दावा किया है कि अली ईरान के सैन्य कमांडर भी थे।

इजरायली सेना इजरायल पर बड़ा हमला करने का दावा किया है। इजरायली सेना (आईडीएफ) के मुताबिक उसने तेहरान पर किए गए एक हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी और आईआरजीसी (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के ख़ातम-अल अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रमुख मेजर जनरल अली शादमानी की हत्या कर दी है। आईडीएफ ने एक ट्वीट करके यह जानकारी एक्स पर साझा की है।

इजरायली सेना (IDF) ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स के जरिए दी। उन्होंने लिखा, “5 दिनों में दूसरी बार IDF ने ईरान के युद्धकालीन चीफ ऑफ स्टाफ, शासन के शीर्ष सैन्य कमांडर को मार गिराया है।”

ईरान ने दावा किया कि अली शादमानी सैन्य अधिकारी और खामेनेई के सबसे करीबी सैन्य सलाहकार भी थे। IDF ने बताया कि सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर मध्य तेहरान में मिसाइल हमले में वह मारे गए।

इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जी 7 शिखर सम्मेलन को बीच में छोड़ दिया। उन्होंने ईरान की राजधानी तेहरान के लोगों को शहर खाली करने की चेतावनी दी। वहीं, भारत ने भी ईरान में फँसे भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।

कौन था अली शादमानी

इज़रायल ने दावा किया है कि उसने ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर अली शादमानी की हत्या कर दी है। शादमानी'ख़ातम-अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर' का प्रमुख था। इज़रायली सैन्य प्रवक्ता के अनुसार शादमानी ईरान के “सबसे वरिष्ठ सैन्य कमांडर” होने के साथ ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली ख़ामेनेई का बेहद करीबी था। गौरतलब है कि अली शादमानी को इस पद पर हाल ही में तब नियुक्त किया गया था, जब इज़रायल ने शुक्रवार को इसी पद पर रहे पूर्व कमांडर घोलाम अली राशिद की हत्या कर दी थी। ईरान की ओर से इस दावे पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

जोरदार धमाकों से दहला तेहरान, ईरान ने भी किया पलटवार

तेहरान में जोरदार धमाकों से शहर दहल उठा है। वहीं ईरान भी इजरायल पर पलटवार कर रहा है। इससे तेल अवीव में एयर रेड सायरन बजने लगे हैं। इस बीच ईरान ने एक और घोषणा की है कि वह इज़रायली भूमि पर अब तक का सबसे बड़ा और सबसे तीव्र मिसाइल हमला करने की तैयारी कर रहा है। ईरान की मिसाइल हमले की चेतावनी के कुछ ही देर बाद तेल अवीव और पश्चिम यरुशलम के ऊपर जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। 

इजरायल में कहां-कहां ईरान ने किया पलटवार

तेहरान पर हमले के बाद ईरान भी पलटवार कर रही है। इज़रायली सेना एयर डिफेंस सिस्टम से उसे रोकने का प्रयास कर रही है। आईडीएफ ने एक बयान में कहा है कि वायुसेना "खतरे को खत्म करने के लिए आवश्यक स्थानों पर रोकथाम और हमले की कार्रवाई कर रही है।" हमले के लगभग 20 मिनट बाद सेना ने बताया कि देश के कई इलाकों में लोग अब सुरक्षित स्थानों से बाहर निकल सकते हैं। इज़रायली पुलिस ने कहा कि खोज और बचाव दल उन स्थानों पर कार्यरत हैं, जहां "गिरते हुए प्रोजेक्टाइल्स (मिसाइल या उनके टुकड़े) की रिपोर्टें मिली हैं"। "तेल अवीव क्षेत्र में मिसाइल और उसके टुकड़े गिरे, जिससे भारी भौतिक नुकसान हुआ, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।"

फायर और रेस्क्यू सेवा ने भी बताया कि तेल अवीव से सटे दान ज़िले (Dan District) में मिसाइल हमले हुए। वहीं इज़रायल के समाचार मंच YNet News के अनुसार, ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलें इज़रायल के चार अलग-अलग इलाकों में गिरीं, जिससे तटीय शहर हर्ज़लिया में एक आठ मंजिला इमारत को नुकसान पहुंचा और एक खाली बस में आग लग गई।

IDF ने 2 दिन पहले IGRC के इंटेलीजेंस चीफ की भी कर दी थी हत्या

ईरान के IGRC चीफ को मारने से 2 दिन पहले 15 जून को इजरायली सेना ने आईआरजीसी (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) की खुफिया इकाई के प्रमुख मोहम्मद काज़ेमी और उनके डिप्टी हसन मोहाकेक इज़राइली हवाई हमले में मार गिराया था। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इन दोनों के शव ईरानी खुफिया मुख्यालय के मलबे के नीचे दबे गए। यह हमला आईआरजीसी के खुफिया विभाग को सीधे निशाना बनाकर किया गया था।

जैसे हिंदू माँ-बहनों का सिंदूर उजाड़ा है, वैसे ही आतंकियों और उनके आकाओं का करेंगे सफाया: CM योगी, पहलगाम में जिसे पत्नी के सामने मारी गोली उसके परिजनों से मिले


जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुस्सा प्रकट किया है। उन्होंने कहा है कि हिन्दू बहन-बेटियों का सिन्दूर उजाड़ा जाए, यह स्वीकार्य नहीं है। सीएम योगी ने यह बातें इस हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी के घर पहुँच कर कही हैं। उन्हें आतंकियों ने पहलगाम में मार दिया था।

सीएम योगी ने कहा, “22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम के अंदर हुए आतंकी हमले में कानपुर का एक परिवार प्रभावित हुआ है… यह एक क्रूर, वीभत्स और कायराना कृत्य है। इसकी देश और दुनिया के हर सभी समाज ने निंदा की है। यह घटना बताती है कि आतंक अपनी अंतिम सांस ले रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “जाति-धर्म पूछ कर हिन्दू बहन-बेटियों के सामने उनका सिन्दूर उजाड़ा जाए, यह कोई सभ्य समाज स्वीकार नहीं कर सकता। भारत में यह कतई स्वीकार्य नहीं है। भारत सरकार की आतंक के प्रति जीरो टोलरेंस की नीति रही है, उसी से इसका खात्मा होगा।”

उन्होंने कहा कि CCS बैठक में लिए गए निर्णयों से आतंक के खात्मे की शुरुआत हो चुकी है। सीएम योगी ने कहा कि पूरे भारत को इस दुखद घड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर विश्वास करना चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि उन्होंने शुभम द्विवेदी के परिवार से उलाक्त कर संवेदना प्रकट की है।

योगी ने स्पष्ट किया कि आतंकी छोड़े नहीं जाएँगे। उन्होंने कहा, “जिस तरीके से हिन्दू माँ-बहनों के सामने उनके सिन्दूर के साथ जो बर्बर कृत्य किया गया है, इसी प्रकार से आतंकियों और उनके आकाओं को इसकी सजा जरूर मिलेगी, इसमें कोई सन्देश किसी को नहीं होना चाहिए।”

योगी ने कहा है कि यह सरकार आतंकियों पर से मुकदमा वापस लेने वाली नहीं बल्कि उनका सफाया करने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि इस घटना के परिणाम अब जो आएँगे, उसको पूरा देश देखेगा। सीएम योगी के साथ इस दौरान और कई बड़े नेता शुभम द्विवेदी के घर मौजूद रहे।

दो माह पहले हुई थी शुभम की शादी

12 फरवरी 2025 को शुभम का विवाह ऐशान्या के साथ हुआ था। शादी के बाद पूरे परिवार ने कश्मीर घूमने की योजना बनाई थी और 17 अप्रैल को वे सभी कश्मीर पहुँचे थे। जिस समय शुभम की हत्या की गई, उस समय वे पत्नी ऐशान्या के साथ घुड़सवारी करने के लिए ऊपर पहाड़ी पर निकले थे। वहीं, शुभम के पिता और अन्य परिजन नीचे ही ही रुक गए थे।
मृतक शुभम की पत्नी ऐशान्या ने बताया कि जब वे घुड़सवारी कर रहे थे, उसी समय हमलावर आए। आतंकियों ने उनसे उनका नाम पूछा और कलमा पढ़ने को कहा। इसके बाद आतंकियों ने उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने आनन-फानन में उन्हें कश्मीर भेजा। कश्मीर के अस्पताल में शुभम की उपचार के दौरान मौत हो गई।

सिक्योरिटी नहीं आई काम, मौके पर ही ढेर हो गया वैष्णो देवी के भक्तों का कातिल आतंकी अबु कताल, कैसे पाकिस्तान में बैठे भारत के दुश्मनों को एक-एक कर ढेर कर रहे ‘अज्ञात’

                                                    अबु कताल (फोटो साभार: आजतक)
लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी अबु कताल की कल (16 मार्च 2025) पाकिस्तान के झेलम में अज्ञात लोगों द्वारा हत्या कर दी गई। घटना के वक्त अबु कताल अपने सिक्योरिटी गार्ड के साथ जा रहा था तभी, कुछ लोग आए और 15-20 राउंड फायरिंग की। इस हमले में उसके साथ उसका गार्ड भी मारा गया और उसने खुद भी वहीं दम तोड़ दिया।

कौन था अबु कताल?

अबु कताल पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख और मोस्ट वांटेड आतंकी था। उसकी संलिप्ता भारत में हुए कई हमलों में थी। वह आतंकी संगठन का मुख्य हैंडलर था जो पुंछ-राजौरी इलाके से एक्टिव था। उसका काम केवल आतंकी साजिश रचना नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर आतंकियों को LET से जोड़ना भी था। उसने सबसे पहली बार साल 2000 में जम्मू में घुसपैठ की थी। हाफिज सई से उसका रिश्ता चाचा-भतीजे वाला था। उसे हाफिज का दाहिना हाथ भी कहा जाता था।

आतंकी गतिविधियों में था शामिल

रिपोर्ट्स बताती हैं कि अबु कताल का नाम 1 जनवरी 2023 को राजौरी जिले के ढांगरी गांव में हुए एक आतंकवादी हमले में भी शामिल था, जिसमें सात लोग मारे गए थे। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी जिसमें अबु कताल सहित अन्य आतंकियों का नाम शामिल किया गया था। इसके अलावा अबु कताल का नाम 9 जून 2024 को शिवखोड़ी में हुए आतंकी हमले भी आया था। उस हमले में 10 लोगों की मौत हो गई थी।

पाकिस्तान में किन-किन आतंकियों को ‘अज्ञात’ ने किया ढेर

पाकिस्तान में अज्ञात लोगों द्वारा आतंकियों के मारे जाने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी बड़े-बड़े आतंकियों को अज्ञात द्वारा मारने के मामले सामने आए हैं।
  • साल 2024 में कुछ अज्ञात लोगों ने हाफिज सईद के ही करीबी लश्कर के आतंकी आमिर सरफराज की पाकिस्तान के लाहौर में हत्या कर दी गई थी। अज्ञात हमलावरों ने उसके ठिकाने पर डोरबेल बजाकर उसे मौत के घाट उतारा था।
  • साल 2023 में LeT के अकरम गाजी को खैबर पख्तूनख्वा में मोटरसाइकल पर सवार हमलावरों द्वारा गोली से मार दिया गया था।
  • मौलाना रहीम उल्लाह तरीक को भी 14 नवंबर 2023 को कराची के ओरंगी टाउन में गोली मार दी गई थी।
  • शाहिद लतीफ, भी जैश का मोस्ट वांटेड आतंकी था, उसकी हत्या भी 11 अक्तूबर 2023 को हुई थी।
  • आतंकी सरदार हुसैन अराइन को भी 1 अगस्त 2023 को कराची में उसी दुकान के पास गोली मारी गई थी।
  • ख्वाजा शाहिद, नाम का लश्कर आतंकी भी जो 2019 में जम्मू में सुंजवान आर्मी कैंप पर हुए हमले का मास्टरमाइंड था उसकी हत्या भी कश्मीर के पीओके में हुई थी। बाद में उसकी लाश सिर कटी अवस्था में मिली थी।
  • इसी प्रकार साल 2022 में कंधार विमान हाईजैक के आतंकी मिस्त्री जहूर की पाकिस्तान में हत्या कर दी गई थी।

 

स्वीडन : स्कूल में अंधाधुन फायरिंग, कम-से-कम 10 की मौत, मारा गया हमलावर भी: कुरान जलाने वाले सलवान मोमिका की भी यहीं हुई थी हत्या

                                                          स्वीडन स्कूल फायरिंग (साभार: NPR)
यूरोपीय देश स्वीडन के ऑरेब्रो शहर में मंगलवार (4 फरवरी 2025) को बंदूकधारी हमलावर ने एक स्कूल में अंधाधुन फायरिंग की, जिसमें कम-से-कम 10 लोग मारे गए हैं। मृतकों में हमलावर भी शामिल है। मृतकों के पहचान के बारे में अभी तक पुलिस ने नहीं बताया है। पुलिस का कहना है कि वह हमले के संभावित मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

गोलीबारी स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम से लगभग 200 किलोमीटर (125 मील) पश्चिम में स्थित ऑरेब्रो में कैंपस रिसबर्गस्का सेकेंड्री स्कूल हुई। इसमें प्राइमरी और अपर सेकेंडरी की पढ़ाई होती है। इसके साथ ही इस विद्यालय में आप्रवासियों के लिए स्वीडिश कक्षाएँ, व्यावसायिक प्रशिक्षण और बौद्धिक विकलांग लोगों के लिए कार्यक्रम भी प्रदान किए जाते हैं।

इस स्कूल के छात्रों की उम्र 20 साल से अधिक है। जिस समय गोलीबारी हुई, उस समय वहाँ कई स्कूली बच्चे, टीचर एवं अन्य लोग उपस्थित थे। ऑरेब्रो के पुलिस प्रमुख रॉबर्टो ईद फॉरेस्ट ने बताया, “करीब 10 लोग मारे गए हैं। संख्या के बारे में हम अभी स्पष्ट नहीं हैं।” पुलिस को आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। वहीं, इसे आतंकी घटना मानने से भी इनकार किया है।

इस हमले के कई प्रत्यक्षदर्शी भी सामने आए हैं। उनमें से एक 28 वर्षीय एंड्रियास सुंडलिंग ने कहा कि उसने तीन धमाके और तेज चीखेें सुनीं। इसके बाद वह जान बचाने के लिए एक कक्षा में जाकर छिप गई। स्कूल के अधिकारियों का कहना है कि हमले के वक्त घटनास्थल पर बहुत कम बच्चे थे। अधिकांश बच्चे घर जा चुके थे। माना जा रहा है कि हमला ऑटोमेटिक राइफल से की गई है।

वहीं, स्कूल की 54 वर्षीय टीचर मारिया पेगाडो ने बताया कि लंच ब्रेक के ठीक बाद किसी ने उनकी कक्षा का दरवाज़ा खोला और चिल्लाते हुए सभी को बाहर निकलने के लिए चिल्लाया। उन्होंने कहा, “मैंने अपने सभी 15 छात्रों को बाहर हॉलवे में ले जाकर भागना शुरू कर दिया। फिर मैंने दो गोलियाँ सुनीं, लेकिन हम बच गए। हम स्कूल के प्रवेश द्वार के करीब थे।”

टीचर मारिया ने आगे कहा, “मैंने लोगों को घायलों को घसीटते हुए बाहर निकलते देखा। पहले एक को देखा, फिर दूसरे को। मुझे एहसास हुआ कि यह बहुत गंभीर स्थिति है।” पुलिस ने मृतकों की उम्र, लिंग या निवास स्थान आदि को लेकर कोई जानकारी नही दी है। पुलिस का मानना है कि हमलावर अकेला था। स्थानीय मीडिया के अनुसार, पुलिस ने हमलावर के घर पर छापेमारी की है।

कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि संदिग्ध हमलावर की उम्र करीब 35 साल है और उसके पास हथियार रखने का लाइसेंस है। उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन उसकी पहचान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। पुलिस ने इस जानकारी की पुष्टि नहीं की है। बता दें कि मुस्लिमों के दीनी किताब कुरान जलाने वाले सलवान मोमिका की भी कुछ दिन पहले स्वीडन में हत्या कर दी गई थी।

स्वीडन के राजा कार्ल सोलहवें गुस्ताफ ने इस घटना की निंदा की है। वहीं, स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने इस हमले को देश के इतिहास में सबसे भयानक सामूहिक गोलीबारी बताया है। इस देश में संगठित अपराधिक गिरोहों को लेकर क्रिस्टरसन ने कहा, “यह स्वीडन को विरासत में मिली समस्या है। वे बहुत लंबे समय से विकसित हो रहे हैं। हिंसा पर हमारा नियंत्रण नहीं है, यह बिल्कुल स्पष्ट है।”

स्वीडन में गिरोह अपराध की समस्या के कारण गोलीबारी और बम विस्फोट की घटनाएँ बढ़ रही हैं। हालाँकि स्कूलों में घातक हमले अभी भी दुर्लभ हैं। स्वीडिश नेशनल काउंसिल फॉर क्राइम प्रिवेंशन के अनुसार 2010 से 2022 के बीच स्कूलों में घातक हिंसा की सात घटनाओं में दस लोग मारे गए।

मुल्ला अफरोज ने की थी संभल हिंसा में बिलाल-अयान की हत्या, दुबई में रहने वाले गाड़ी चोर शारिक साठा का है गुर्गा: पुलिस पर फायरिंग का आरोप लगाने वालों के मुँह सिले, 9 पत्थरबाज भी पकड़ाए

पुलिस की गिरफ्त में मुल्ला अफरोज (फोटो साभार: Amrit Vichar)

उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा पर सारे योगी विरोधी चील-कौओं की तरह चिल्ला-चुल्ली कर रहे थे, लेकिन दंगाइयों की पकड़-धकड़ में मुसलमानों के ही लपेटे में आने पर सारे योगी विरोधियों की बोलती बंद। बहुत हिन्दू-मुसलमान कर योगी पर कीजड़ फेंक रहे थे अब किसी की आवाज़ नहीं निकल रही, सबके मुंह में दही जम गया। यानि दंगा हुआ नहीं था करवाया गया था। सोंचा पुलिस पकड़ नहीं पायेगी। लेकिन अब वही उत्तर प्रदेश है और वही उत्तर प्रदेश पुलिस।     

संभल में नवम्बर में माह में हुई हिंसा में दो लोगों की हत्या करने के आरोपित मुल्ला अफरोज को पुलिस ने पकड़ा है। मुल्ला अफरोज ने पुलिस को निशाना बनाकर गोली चलाई थी लेकिन यह दो मुस्लिम युवकों के लगी, जिससे वह मारे गए। अफरोज शारिक साठा गैंग का गुर्गा है। पुलिस ने उसके पास से हथियार भी बरामद किए हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने रविवार(19 नवम्बर, 2025) को मुल्ला अफरोज को पकड़ा है। वह संभल शहर का ही रहने वाला है। उसके पास से पुलिस को 32 बोर की एक पिस्टल और पुलिस से लूटे गए कारतूस भी बरामद हुए हैं। मुल्ला अफरोज दुबई में रहने वाले ऑटोलिफ्टर गैंग के सरगना शारिक साठा का गुर्गा है।

उसने पुलिस पूछताछ में बताया है कि शारिक साठा ने ही उन लोगों को हथियार मुहैया करवाए थे और हिंसा की साजिश रची थी। मुल्ला अफरोज ने बताया है कि शारिक साठा ने एक साथी के जरिए हिंसा का पूरा प्लान खींचा था और 24 नवम्बर, 2024 को मस्जिद के बाहर नेताओं द्वारा इकट्ठा भीड़ को निशाना बनाने की बात कही थी।

मुल्ला अफरोज ने बताया है कि इस साजिश के तहत 10-20 लोगों की हत्या की जानी थी, जिसमें आमलोगों और पुलिस को निशाना बनाया जाना था। मुल्ला अफरोज के अलावा और भी लोगों को इस काम के लिए हथियार मिले थे। जब 24 नवम्बर, 2024 को मस्जिद के बाहर मुस्लिम भीड़ ने हिंसा चालू की तो इसी में शामिल अफरोज फायरिंग करने लगा।

अफरोज ने पुलिस को निशाना बनाया लेकिन भगदड़ मचने के कारण यह गोली बिलाल और अयान को लग गई और वह मौके पर ही मारे गए। इस हत्या के लिए उसने 32 बोर का एक हथियार उपयोग किया था। इसके बाद वह छिप गया था। पुलिस ने अब उसे ढूंढ निकाला है।

मुल्ला अफरोज की गिरफ्तारी के बाद इस हिंसा में हुई मौतों के लिए पुलिस को जिम्मेदार बताने वालों के भी मुँह सिल गए हैं। पुलिस पहले ही बता चुकी है कि आपसी फायरिंग में ही इस हिंसा में 4 लोग मारे गए थे। हालाँकि, मृतकों के परिवार समेत बाकी कॉन्ग्रेस के नेताओं ने पुलिस वालों पर ही मुकदमा दर्ज करने की बात कही थी।

पुलिस शारिक साठा गैंग की भी संलिप्तता भी बता चुकी है। शारिक साठा संभल का रहने वाला है और देश के कुख्यात ऑटोलिफ्टर में से एक है। वह भारत से लक्ज़री गाड़ियाँ चुरा कर नेपाल और बाकी जगह भेजता था। उसे पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था लेकिन बाद में वह फर्जी पासपोर्ट के सहारे दुबई भाग गया था।

पुलिस ने संभल हिंसा मामले में मुल्ला अफरोज के अलावा 9 पत्थरबाज भी पकड़े हैं। इन सभी को पुलिस ने जेल भेज दिया है। पुलिस ने बताया है कि अब तक वह हिंसा मामले में 70 उपद्रवी पकड़ चुकी है। पुलिस इस हिंसा के बाकी आरोपितों की भी पहचान कर दबिश दे रही है।

बदले का ऐलान कर पाकिस्तानी सीमा में घुसे तालिबानी, मार गिराए 19 फौजी: अंग्रेजों की खींची डूरंड लाइन को भी सीमा मानने से किया इनकार

बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से होए यानि पाकिस्तान ने जिस आतंकवाद को पालापोसा आज वही आतंकवाद पाकिस्तान को बर्बाद करने को कमर कस चुका है। तालिबान जिस तरह पाकिस्तान पर हमले कर रहा है पाकिस्तानी आतंकवादियों की ही नींद हराम हो गयी। 
अफगानिस्तान में तालिबान शासन ने शनिवार (27 दिसंबर 2024) को पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों पर बड़े हमले किए, जिसमें अब तक 19 पाकिस्तानी फौजियों के मारे जाने की खबर है। तालिबान ने यह हमला पाकिस्तान द्वारा 26 दिसंबर को अफगान सीमा पर की गई बमबारी के जवाब में किया है। पाकिस्तानी हमलों में अफगानिस्तान के 46 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें कई बच्चे भी शामिल थे। अपने एक आधिकारिक बयान में तालिबान ने खुल कर पाकिस्तान का नाम तो नहीं लिया लेकिन इशारों में परोक्ष तौर पर बताया कि उन्होंने सीमा पार हमले किए हैं।

अल जजीरा के मुताबिक, अफगानिस्तान के प्रवक्ता ने कथित ‘काल्पनिक रेखा’ (डूरंड लाइन) पर हमले की बात कबूली है। काल्पनिक रेखा नाम का यह शब्द अफगानिस्तान के अधिकारियों द्वारा उस बॉर्डर से संबंधित है जिसका विवाद पाकिस्तान से चल रहा है। तालिबान ने इन हमलों को सही ठहराते हुए कहा कि यह उनकी रक्षा और अफगान विरोधी ताकतों को खत्म करने के लिए जरूरी था।

तालिबान के प्रवक्ता इनायतुल्लाह खोवाराज़मी ने बयान देते हुए कहा, “हम इसे पाकिस्तान का क्षेत्र नहीं मानते। यह हमारी सैन्य कार्रवाई का हिस्सा था।” तालिबान डूरंड लाइन को काल्पनिक रेखा मानता है, जिसे 19वीं सदी में अंग्रेजों ने खींचा था। यह सीमा अफगानिस्तान और पाकिस्तान को अलग करती है, लेकिन तालिबान इसे कभी स्वीकार नहीं करता।

तालिबान ने कहा कि उनकी सैन्य कार्रवाई 26 दिसंबर को उनके इलाकों में पाकिस्तान की तरफ से की गई बमबारी का जवाब है। अफगानिस्तान के अधिकारियों का दावा है कि सीमा के उस पार बने ठिकानों पर कार्रवाई जरूरी थी क्योंकि ये अफगान विरोधी ताकतों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे थे। पाकिस्तानी फ़ौज के इन हमलों में अफगानिस्तान के 46 लोगों की मौत हुई थी।

पाकिस्तान ने साधी चुप्पी

इन हमलों में अब तक 19 पाकिस्तानी फौजियों की मौत का दावा किया जा रहा है। हालाँकि आधिकारिक आँकड़े अभी आना बाकी हैं। तालिबान की इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। गौरतलब है कि डूरंड लाइन को लेकर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच दशकों से विवाद जारी है।
तालिबान इसे मानने से इंकार करता है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। तालिबान का कहना है कि डूरंड लाइन के उस पार के क्षेत्र को वह पाकिस्तान का हिस्सा नहीं मानता। बहरहाल, यह हमला सीमा विवाद को और गहरा कर सकता है और अफगानिस्तान-पाकिस्तान संबंधों में नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

राजस्थान : चचा और खाला को बच्चों ने सेक्स करते देखने पर छाती पर बैठ सोनिया बानो ने घोंट दिया गला, दूसरे का एहसान ने फाड़ दिया सर

                                 बच्चों की हत्या में सोनिया बानो और एहसान अली गिरफ्तार (फोटो साभार: जी न्यूज)
राजस्थान के जैसलमेर में 5 अक्टूबर 2024 को दो बच्चों का शव पानी टंकी से बरामद किया गया था। पुलिस ने इस हत्या की गुत्थी सुलझाते हुए एहसान अली और सोनिया बानो को गिरफ्तार किया है। दोनों मृतक बच्चों के रिश्ते में चाचा और मौसी लगते हैं।

मृत बच्चों की पहचान 7 साल के मोहम्मद हसनेन और 8 साल के मोहम्मद आदिल के तौर पर हुई है। रिपोर्टों के अनुसार इन्होंने एहसान और सोनिया को आपत्तिजनक हालत में देख लिया था। इसके बाद बदनामी के डर से दोनों ने मिलकर बच्चों की हत्या कर दी। मृत बच्चे रिश्ते में चचेरे भाई थे।

रिपोर्ट में बताया गया है कि हसनेन की छाती पर सोनिया बैठ गई और गला दबाकर मार डाला। एहसान ने इसी तरीके से आदिल को मारने की कोशिश की। लेकिन उसकी मौत नहीं हुई तो घर में रखे लोहे के एक रॉड से उसके सिर पर वार कर दिया। सिर फटने से उसकी भी मौत हो गई।

हत्या के बाद बच्चों का शव इन्होंने बोरे में भरा और उसके पास के एक खाली मकान के पानी टैंक में डाल दिया। इसके बाद एहसान और सोनिया ने मिलकर मौके पर खून साफ किए व अन्य सबूत मिटाने का प्रयास किया।

जिस दिन दोनों बच्चों की हत्या हुई वे खेलते हुए एहसान के घर चले गए थे। उन्होंने इसी दौरान उसे सोनिया के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिया। एहसान और सोनिया का घर आसपास में ही है और कई साल से दोनों के बीच अफेयर चल रहा है।

5 अक्टूबर की शाम को जब दोनों बच्चे घर नहीं लौटे तो उनकी तलाश शुरू हुई। इसमें एहसान भी शामिल था। वह पुलिस के एक्शन पर भी नजर बनाए हुआ था। कई घंटे बाद पुलिस ने पानी टंकी से दोनों शव बरामद किए। शव की स्थिति से अनहोनी की आशंका गहराई। बच्चों के परिजन भी हत्या का शक जाहिर करते हुए उस अस्पताल में धरने पर बैठ गए थे, जहाँ पोस्टमार्टम हुआ था।

इसके बाद पुलिस ने हत्या के एंगल से जाँच शुरू की तो उसे एहसान पर शक हुआ। उसके घर की तलाशी लेने पर खून के कुछ छींटे मिले। इसके बाद हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की गई। पुलिस के सामने वह टूट गया और बच्चों की हत्या कबूल कर ली।

इजरायल ने पैगम्बर मोहम्मद के वंशज को भी मार गिराया : हफ्ते भर पहले ही बना था हिजबुल्लाह का सरगना, इस्लामी बता रहे थे इसे ‘खूंखार योद्धा’; पाकिस्तान TV ने आतंकवादी मुस्लिमों के होने का कारण बताया , देखिए वीडियो

इजरायल ने इस्लामी आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के नए सरगना हाशिम सैफिद्दीन को भी मार गिराया है। उसे लेबनान के भीतर एक हवाई हमले में मार दिया गया। हिजबुल्लाह ने इस संबंध में अभी आधिकरिक जानकारी नहीं दी है। नए हिजबुल्लाह सरगना की मौत उसके पिछले मुखिया हसन नसरुल्लाह के मारे जाने के एक सप्ताह के भीतर हो गई है।

इजरायली मीडिया ने जानकारी दी है कि शुक्रवार रात (4 अक्टूबर, 2024) को इजरायल की वायु सेना के तीन विमानों ने बेरूत के भीतर एक जगह पर भारी हवाई बमबारी की। इस बमबारी में हिजबुल्लाह का नया सरगना हाशिम सैफिद्दीन मारा गया। हमले के दौरान वह के बंकर में मौजूद था और अपने कमांडरों के साथ बैठक कर रहा था। 

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल(जिसकी पुष्टि नहीं हो पायी है) हो रहे नीचे दिए वीडियो जिसे पाकिस्तान का बताया जा रहा है। 

Why are terrorists always Muslims? Thank God this information was given by Pakistan TV. 

Indian Secularist and supporters of Islam must listen to this so that, by mistake, if it opens their mind.

हिजबुल्लाह के नए सरगना के मारे जाने को लेकर इजरायली सुरक्षा बलों (IDF) और हिजबुल्लाह ने अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। इजरायल के इस हवाई हमले के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर आए हैं। इनमें एक रिहायशी इलाके में आग की लपटें उठती दिखाई देती हैं।

कौन था हाशिम सैफिद्दीन?

हिजबुल्लाह के मुखिया हसन नसरल्लाह को शुक्रवार (27 सितम्बर, 2024) को इजरायल ने एक हवाई हमले में मार गिराया था। इसी के साथ हिजबुल्लाह के कई और कमांडर भी मारे गए थे। इसके बाद प्रश्न उठा था कि इस आतंकी संगठन का सरगना अब कौन बनेगा। इस बीच हाशिम सैफिद्दीन का नाम उठा था।
सैफिद्दीन को हिजबुल्लाह का नया मुखिया माना जा रहा था। सैफिद्दीन भी नसरल्लाह की तरह एक शिया इमाम है। वह हिजबुल्लाह के सबसे वरिष्ठ लोगों में से एक है। लेबनान में जन्मा सैफिद्दीन हिजबुल्लाह की शूरा कमिटी का सदस्य था।
यह कमिटी हिजबुल्लाह को नियंत्रित करती है। इसके अलावा यह एग्जीक्यूटिव कमिटी और जिहाद काउंसिल का मुखिया था जो कि हिजबुल्लाह के आतंक समेत बाकी मामलों को देखती है। सैफिद्दीन 60 वर्ष का था और वह हिज्बुलाह के मृत सरगना नसरल्लाह का ममेरा भाई था।
उसके बेटे की शादी ईरान की क़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर कासिम सुलेमानी के बेटी के साथ हुई थी। सैफिद्दीन काली पगड़ी पहनता था, यह शियाओं के बड़े इमाम पहना करते हैं। वह खुद को इस्लाम के पैगम्बर मोहम्मद के वंशज के तौर पर दर्शाता था। उसे इस्लामी सोशल मीडिया मीडिया हैंडल्स ने ‘खूंखार योद्धा’ बताया था।
सैफिद्दीन को अमेरिका ने 2017 में आतंकी घोषित कर दिया था। माना जाता है कि उसे लम्बे समय से हिजबुल्लाह का अगला मुखिया बनने के लिए तैयार किया जा रहा था। ईरान भी उसे नया मुखिया बनाने जाने के पक्ष में था। सालों से उसे इस बात की ट्रेनिंग दी जा रही थी। हालाँकि, अब उसके मारे जाने की बात सामने आई है।

हिजबुल्लाह पर इजरायल का कहर जारी

इजरायल लगातार आतंक के खात्मे के लिए लेबनान में हिजबुल्लाह और गाजा के भीतर हमास पर हमले कर रहा है। उसने लेबनान में सैफिद्दीन के अलावा एक अन्य हमले में राकेट और मिसाइल के विशेषज्ञ मुहम्मद युसूफ अनीसी को मार गिराया है। मैकेनिकल इंजीनियर की शिक्षा लेने वाला अनीसी इजरायल पर हमले के लिए रॉकेट बनाता था।
इजरायल ने इसी के साथ वेस्ट बैंक में भी बमबारी की और यहाँ के हमास कमांडर यासिर अब्दुलरज्जाक को मार गिराया। इस आतंकी ने इजरायल में बीते माह एक हमले को अंजाम दिया था। इससे पहले इजरायल ने लगभग 2 दशक पहले 2 इजरायली सैनिकों को मारने वाले एक हमास आतंकी को भी मार गिराया।

इजरायल की ताबड़तोड़ कार्रवाई से डरा ईरान! सेफ हाउस भेजे गए आयतुल्ला अली खामेनेई: हिज्बुल्लाह चीफ से पहले हमास प्रमुख का भी ऐसे ही किया था खात्मा

                              ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली खामेनेई (फोटो साभार: इंडिया टुडे)
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को हिज्बुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह की मौत के बाद सुरक्षा कारणों से सुरक्षित स्थान पर भेजा गया है। इजरायल के हवाई हमले में नसरल्लाह के मारे जाने की खबर के बाद, क्षेत्र में तनाव चरम पर है। ईरान हिज्बुल्लाह और अन्य सहयोगियों के साथ निकट संपर्क में है और इजरायल के खिलाफ रणनीति तैयार कर रहा है।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने इजरायल की क्रूरता की निंदा करते हुए कहा कि वह(ईरान) लेबनान के साथ खड़ा है। ईरान ने मुस्लिम देशों को इजरायल के खिलाफ एकजुट होने की अपील की है। फिलहाल उन्हें सुरक्षित जगह पर भेजा जा चुका है। बता दें कि इजरायल ने ईरान की राजधानी में अपने सबसे बड़े दुश्मनों से एक हमास के चीफ इस्माइल हानिया को ढेर कर दिया था। ऐसे में ईरान को डर है कि कहीं इजरायल वैसा ही कदम न उठा ले। इस बीच, इजरायल में भी हाई अलर्ट जारी किया जा चुका है।

हिज्बुल्लाह प्रमुख की मौत के बाद लेबनान के प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, इजरायल के बढ़ते हमले और हिज्बुल्लाह के भविष्य को लेकर विचार-विमर्श हो रहा है। मिकाती ने कहा कि यह बैठक लेबनान की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है।

ईरान और हिज्बुल्लाह के बीच संपर्क और भी गहरा हो गया है। ईरान ने हिज्बुल्लाह को सैन्य और रणनीतिक समर्थन देने की पुष्टि की है और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ाने वाली इजरायली गतिविधियों की आलोचना की है। नसरल्लाह की मौत के बाद, ईरान ने मुस्लिम देशों की बैठक (ओआईसी) बुलाने का प्रस्ताव रखा है, ताकि इस क्षेत्रीय संकट का हल निकाला जा सके।

इजरायल ने हिज्बुल्लाह के खिलाफ लगातार हवाई हमले किए हैं, जिससे लेबनान की राजधानी बेरूत में व्यापक विनाश हुआ है। इजरायली सेना का कहना है कि उन्होंने हिज्बुल्लाह के केंद्रीय ठिकाने पर हमला कर नसरल्लाह को खत्म कर दिया है, हालाँकि हिज्बुल्लाह ने अभी तक इस बारे में कोई बयान नहीं दिया है। इजरायल की इन कार्रवाइयों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। लेबनान ने ईरानी विमानों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसके बाद ईरान से आ रहे एक विमान को वापस लौटना पड़ा।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस संघर्ष को ‘आवश्यक’ बताते हुए कहा कि हिज्बुल्लाह और उसके समर्थकों से निपटना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और हिज्बुल्लाह के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा। वहीं, इजरायल ने नसरल्लाह को मारने के बाद हाई अलर्ट जारी किया है।

हिज्बुल्लाह और ईरान के ऐतिहासिक संबंध

ईरान और हिज्बुल्लाह के बीच लंबे समय से गहरे राजनीतिक और सैन्य संबंध हैं। नसरल्लाह की मौत के बाद, ईरान के नेता खामेनेई ने हिज्बुल्लाह को अपने समर्थन का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि इजरायल ने गाजा युद्ध से कोई सबक नहीं सीखा और यह मूर्खतापूर्ण रणनीति उसे ही नुकसान पहुँचाएगी। ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि वह लेबनान के साथ मजबूती से खड़ा है और इजरायल की क्रूरता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजागर करेगा।
ईरान ने इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) की आपात बैठक की माँग की है, ताकि मुस्लिम देशों के बीच एकजुटता बढ़ाई जा सके और इजरायल के खिलाफ सामूहिक रुख अपनाया जा सके। ईरान का यह कदम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम साबित हो सकता है।
नसरल्लाह की मौत के बाद, हिज्बुल्लाह के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। ईरान और हिज्बुल्लाह के सहयोगियों के बीच इस पर विचार किया जा रहा है कि अब अगला कदम क्या होगा। इजरायल के खिलाफ किसी बड़े जवाबी हमले की आशंका बनी हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र में और ज्यादा हिंसा फैल सकती है।