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बदल रहा मिडिल ईस्ट का नक्शा, इजरायल ने कब्जाया दक्षिणी लेबनान का हिस्सा: क्या यह स्थायी है या ईरान से सौदेबाजी का हथियार?

              इजरायली फौज द्वारा बनाई गई येलो लाइन, बेंजामिन नेतान्याहू (साभार: X_IDF/AI ChatGPT)
पूरी दुनिया जब अप्रैल 2026 के बीच में इजरायल-लेबनान के बीच 10 दिन के युद्धविराम पर नजर टिकाए हुए थी, तभी इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में एक नई ‘येलो लाइन’ (Yellow Line) या ‘फॉरवर्ड डिफेंस लाइन’ बना दी। इजरायली रक्षा बल (IDF) ने खुद एक नक्शा जारी कर बताया कि दक्षिणी लेबनान के अंदर करीब 10 किलोमीटर गहरी यह सैन्य जोन अब उनके नियंत्रण में है। पाँच डिवीजनों की ताकत के साथ इजरायली सैनिक इस लाइन के दक्षिण में तैनात हैं।

आईडीएफ ने कहा है कि उसके सैनिक हिजबुल्लाह के ठिकानों को नष्ट करने और उत्तरी इजरायल पर हमले रोकने के लिए मैदान में डटे हैं। हालाँकि लेबनान और हिजबुल्लाह इसे संप्रभु क्षेत्र पर कब्जा बताते हुए इस कदम का विरोध किया है। एक तरफ अभी युद्धविराम की स्याही सूखी भी नहीं है कि दूसरी तरफ इजरायली बुलडोजर दक्षिणी लेबनान के भीतर बसे गाँवों में घरों को तोड़ रहे थे, तोपें चल रहे थे और हवाई हमले हो रहे थे। हालाँकि अभी युद्धविराम लागू है, लेकिन छिटपुट हमले दोनों तरफ से हो रहे हैं।

लेबनान के दक्षिणी हिस्सा में घट रही यह घटना महज एक स्थानीय तनाव नहीं है। यह मिडिल ईस्ट के भू-राजनीतिक नक्शे में एक नया अध्याय जोड़ रही है। इजरायल ने पहले भी लेबनान पर कब्जा किया था, जिसमें 1982 से 2000 तक 18 साल तक दक्षिणी लेबनान पर कब्जा रखा था। तब भी उसने लिटानी नदी तक पहुँचने का सपना देखा था और आज फिर वही रणनीति इजरायल की तरफ से दोहराई जा रही है। लेकिन इस बार सवाल यह है कि क्या इजरायल का यह कब्जा स्थायी होगा? या उसका ये कदम अमेरिका-ईरान वार्ता में सौदेबाजी का हथियार बनेगा। 

येलो लाइन का जन्म और युद्धविराम का मजाक

मध्य पूर्व में एक बार फिर सीमाओं की लकीरें स्याही से नहीं, बल्कि टैंकों के टायरों और सैन्य चौकियों से खींची जा रही हैं। इजरायल द्वारा दक्षिणी लेबनान में बनाई गई ‘येलो लाइन’ (Yellow Line) ने दुनिया भर के कूटनीतिज्ञों और सैन्य विश्लेषकों को चौंका दिया है। यह सिर्फ एक सैन्य घेराबंदी नहीं है, बल्कि एक ऐसी रणनीतिक चाल है जो दशकों पुराने विवादों को नया रंग दे रही है।

दरअसल, अमेरिका की मध्यस्थता में 16 अप्रैल 2026 को इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिन का युद्धविराम शुरू हुआ है। करीब 46 दिन के इजरायली हमलों और जमीनी ऑपरेशन के बाद यह समझौता हुआ। लेकिन कुछ घंटों में ही IDF ने दक्षिणी लेबनान में ‘येलो लाइन’ की घोषणा कर दी।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा, “हम लेबनान में 10 किलोमीटर गहरी मजबूत सुरक्षा पट्टी में रहेंगे। यह पहले से कहीं ज्यादा ठोस, निरंतर और मजबूत है। हम यहाँ से नहीं जाएँगे।”

IDF के बयान में कहा गया कि लाइन के दक्षिण में पाँच डिवीजनों के सैनिक हिजबुल्लाह के आतंकी ढाँचे को तोड़ रहे हैं। जिसकी वजह से 55 लेबनानी गाँवों और कस्बों में निवासियों को वापस लौटने की इजाजत नहीं दी गई।

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, युद्धविराम शुरू होते ही इजरायली सेना ने हनीन गाँव में घर उड़ाए, बेत लिफ, अल-कांतारा और तौल पर तोपें दागीं। बुलडोजर से जमीन साफ की जा रही है। गाजा में इसी येलो लाइन मॉडल का इस्तेमाल हो रहा है, जहाँ का 60 प्रतिशत इलाका इजरायली नियंत्रण में है और सैकड़ों घर ध्वस्त किए गए। अब लेबनान में भी वही रणनीति दोहराई जा रही है।

 हिजबुल्लाह के महासचिव नईम कासिम ने कहा, “युद्धविराम एकतरफा नहीं हो सकता। अगर इजरायल उल्लंघन करेगा तो हम जवाब देंगे। हमारे लड़ाके मैदान में हैं, ट्रिगर पर उँगली रखे हुए।” हिजबुल्लाह इसे देश का अपमान मान रहा है और पूर्ण वापसी की माँग कर रहा है।

इजरायल ने कब कब बदला मिडिल ईस्ट का नक्शा?

इजरायल का विस्तारवाद नया नहीं है। साल 1918 में डेविड बेन-गुरियन और यित्जाक बेन-ज्वी ने ‘एरेट्स यिसराइल’ किताब में लिखा कि यहूदियों का देश लिटानी नदी तक फैला होना चाहिए। इसके बाद 1919 में वर्ल्ड जियोनिस्ट ऑर्गनाइजेशन ने पेरिस शांति सम्मेलन में लिटानी नदी को उत्तरी सीमा बताते हुए नक्शा पेश किया गया।

इजरायल की आजादी के बाद साल 1948 के अरब-इजरायल युद्ध में इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के 15 गाँवों पर कब्जा कर लिया। हालाँकि बाद में साल 1949 में आर्मिस्टिस समझौते के तहत इसमें से सात गाँवों को इजरायल को सौंप दिए गए।

इसके बाद साल 1978 में ऑपरेशन लिटानी के तहत इजरायल ने दक्षिणी लेबनान पर कब्जा कर लिया। इसके बाद वो साल 1982 में ऑपरेशन पीस फॉर गैलिली में बेरूत तक पहुँच गए। और फिर करीब 18 साल तक दक्षिणी लेबनान पर इजरायल का कब्जा बना रहा। हालाँकि साल 2000 में यूनिफिल और हिजबुल्लाह के दबाव में इजरायल ने वहाँ से वापसी की, लेकिन शेबा फार्म्स पर कब्जा आज भी जारी है।

वहीं साल 1967 के छह दिन युद्ध में गोलान हाइट्स (सीरिया) पर कब्जा कर लिया, जिसे साल 1981 में इजरायल ने अपने आप में मिला लिया। यही नहीं, वेस्ट बैंक और गाजा पर उसका साल 1967 से ही कब्जा है। और अब 2026 में लेबनान में फिर वही पैटर्न दिख रहा है, जिसमें पहले सुरक्षा जोन, फिर स्थायी नियंत्रण।

इजरायल का तर्क हमेशा ‘सुरक्षा’ रहा है। लेकिन आलोचक इसे ‘ग्रेटर इजरायल’ का हिस्सा मानते हैं, जिसमें लिटानी नदी, गोलान और वेस्ट बैंक शामिल हैं। अभी 2026 के जमीनी ऑपरेशन में इजरायल ने पहले ही दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में बफर जोन बना लिया था। जिसे अब येलो लाइन संस्थागत रूप दे रही है।

क्या यह स्थाई कब्जा है या ईरान से सौदेबाजी का हथियार?

विश्लेषकों का मानना है कि यह कब्जा अस्थायी नहीं होगा। चूँकि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू साफ कह चुके हैं कि इजरायली सेना ‘क्लियर और सिक्योर’ पोजीशंस को छोड़ने वाली नहीं है। इसके साथ ही गाजा मॉडल की तरह लेबनान में भी सफाई अभियान जोर-शोर से चल रहा है, जिसकी वजह से लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं।

हालाँकि दक्षिणी लेबनान का यह इलाका (जिस पर अभी इजरायली सेना मौजूद) भविष्य की बातचीत (ईरान या लेबनान के साथ) में ‘लीवरेज’ (दबाव का हथियार) बन सकता है, इसमें कोई शक नहीं है।

दरअसल, इस इलाके का और खासकर हिज्बुल्लाह का ईरान से जुड़ाव और गहरा है। ईरान ने स्पष्ट किया कि लेबनान में युद्धविराम अमेरिका-ईरान वार्ता का पूर्व शर्त है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में चल रही बातचीत में ईरान ने कहा कि जब तक इजरायल लेबनान से नहीं हटेगा, कोई समझौता नहीं होगा। ईरान के इस स्टैंड के बाद ही इजरायल-लेबनान में संघर्ष विराम हुआ, लेकिन अब जब ईरान बातचीत की टेबल पर आएगा तो उसके बाद सिर्फ हॉर्मूज ही नहीं दक्षिणी लेबनान का हिस्सा भी जोर-आजमाइश के लिए मौजूद रहेगा।

इस बीच, हिजबुल्लाह ने चेतावनी दी है कि अगर इजरायल नहीं हटा तो वे जवाब देंगे। लेबनानी सेना और सरकार भी संप्रभुता की बात कर रही है। यूएनएफआईएल (UNIFIL) पहले से ही रेजोल्यूशन 1701 का हवाला दे रही है, जिसमें इजरायल को ब्लू लाइन के दक्षिण में रहना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र से मान्यता मिलेगी या मिलेगी हमेशा की तरह निंदा?

इतिहास गवाह है कि संयुक्त राष्ट्र ने इजरायल के कब्जों को कभी मान्यता नहीं दी है। गोलान हाइट्स पर 1981 के एनेक्सेशन को यूएन ने अवैध घोषित किया। वेस्ट बैंक पर बस्तियों को भी वो अवैध कहता है। लेबनान भी रेजोल्यूशन 1701 (2006) के तहत इजरायल से पूर्ण वापसी की माँग करता रहा है। तो यूएन एक्सपर्ट्स ने इजरायल के बमबारी को ‘एथनिक क्लिंजिंग’ और ‘डोमिसाइड’ (घरों का विनाश) बताया है।

लेकिन व्यावहारिक रूप से देखें तो यूएन की ताकत बहुत सीमित है। यूएन में इजरायल के लिए उठ रही किसी भी समस्या पर अमेरिका तुरंत वीटो कर देता है। ऐसे में साल 2026 में भी यूएन सुरक्षा परिषद में इजरायल के खिलाफ प्रस्ताव तो आ सकते हैं, लेकिन कुछ भी लागू होना मुश्किल है। हालाँकि फ्रांस, कनाडा और यूरोपीय देशों ने ‘येलो लाइन’ की निंदा की है, लेकिन इजरायल ‘आत्मरक्षा’ का हवाला देकर कार्रवाई जारी रखे हुए है। ऐसे में अगर यूएन कोई निंदा प्रस्ताव लाता भी है, तो भी इजरायल पर कोई खास फर्क पड़ेगा, ये अभी तो नहीं देखा जा रहा।

भविष्य में होगी शांति या खुलेगा वॉर का नया फ्रंट?

अगर पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका-ईरान की बातचीत सफल हुई तो लेबनान से इजरायली वापसी हो सकती है। हालाँकि विश्लेषकों का कहना है कि इजरायल न सिर्फ लेबनान बल्कि सीरिया में भी क्षेत्रीय विस्तार की रणनीति अपना रहा है। क्योंकि भविष्य की किसी भी बातचीत में यह जमीन ‘लीवरेज’ बनेगी। लेकिन इतिहास गवाह है कि जबरन कब्जा भी ज्यादा समय तक टिकता नहीं है।

चूँकि इजरायल पहले भी 18 साल के कब्जे के बाद साल 2000 में दक्षिणी लेबनान से हटा था, ऐसे में किसी समझौते और स्थाई सुरक्षा गारंटी के नाम पर वो फिर से अपने कदम वापस खींच भी सकता है। बशर्ते उस पर अमेरिकी दबाव बना रहे।

क्या हो सकती हैं संभावनाएँ?

फिलहाल, इस मामले में अभी दो ही संभावित रास्ते दिखते हैं-

रास्ता A (बड़ा समझौता): अगर अमेरिका ईरान को कुछ बड़ी आर्थिक राहत देता है और बदले में ईरान हिजबुल्लाह को सीमा से पीछे हटने के लिए मना लेता है, तो एक ‘अस्थाई डील’ हो सकती है। इसमें ‘येलो लाइन’ को हटाकर वहाँ लेबनानी सेना या एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय फोर्स को तैनात किया जा सकता है।

रास्ता B (लंबा संघर्ष): यह ज्यादा संभव लग रहा है। इजरायल जिस तरह से 55 गाँवों को खाली कराकर वहाँ बुनियादी ढाँचे को नष्ट कर रहा है, उससे लगता है कि वह वहाँ ‘स्थाई सुरक्षा चौकियाँ’ बनाना चाहता है। अगर ऐसा हुआ, तो हिजबुल्लाह इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानकर गुरिल्ला वॉर शुरू करेगा, जिससे यह संघर्ष महीनों या सालों तक खिंच सकता है।

लेबनान में इजरायल की सैन्य उपस्थिति ने यह साफ कर दिया है कि पुरानी सीमाएँ अब सिर्फ कागज पर रह गई हैं। यह कब्जा न केवल लेबनान की भौगोलिक स्थिति को बदल रहा है, बल्कि यह ईरान और अमेरिका के बीच होने वाले ‘ग्रैंड बार्गेन’ का भविष्य भी तय करेगा।

बहरहाल, दशकों से युद्ध का मैदान बन चुका मिडिल ईस्ट अब भी दहक रहा है। क्षेत्रीय स्तर पर यह ‘ग्रेटर इजरायल’ vs ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ (ईरान-हिजबुल्लाह-हमास) की जंग है। इन सबके बीच हकीकत यही है कि मिडिल ईस्ट का नक्शा सचमुच बदल रहा है। ऐसे में इजरायल का यह ताजा विस्तार स्थाई होता है या अस्थाई, ये देखने वाली बात होगी, क्योंकि इसका फौरी जवाब किसी के पास नहीं है। चूँकि अब पूरा मामला सौदेबाजी, समय और कूटनीतिक चालों में उलझ चुका है, ऐसे में इस समस्या को लेकर आगे क्या बदलाव आते हैं, इस पर नजर बनाए रखने की जरूरत होगी।

अस्पताल के नीचे बंकर, बंकर में 4000 करोड़ रूपए का खजाना… हिजबुल्लाह के बैंक पर इजरायल ने की बमबारी; आतंकी संगठन के पास कहाँ से आया इतना सोना-कैश?

हॉस्पिटल के बेसमेंट में वह बैंक जिस पर हमला हुआ (बाएँ) और 4000 करोड़ वाला बंकर (चित्र साभार: IDF & Le Devoir)
इजरायल सुरक्षाबलों ने हिजबुल्लाह की आतंकी गतिविधियों को फंडिंग करने वाले एक बैंक पर बमबारी की है। इस बैंक की कई शाखाओं पर लेबनान के भीतर बमबारी हुई है। इजरायल ने यह खुलासा भी किया है कि हिजबुल्लाह ने एक अस्पताल के नीचे सोना और करोड़ों डॉलर छुपा रखे हैं।

इजरायल ने सोमवार(21 अक्टूबर, 2024) को बेरूत के भीतर अल कर्द अल हसन नाम के एक वित्तीय संस्थान की शाखाओं पर बमबारी की। यह एक इस्लामी बैंकिंग संस्थान है, यानी यह ब्याज पर काम नहीं करता। इस संस्थान पर आरोप है कि इसके जरिए हिजबुल्लाह अपनी वित्तीय गतिविधियाँ चलाता है।

इस संस्थान को अमेरिका ने 2007 में बैन कर दिया था। हिजबुल्लाह लेबनान के लोगों को यह संस्थान उपयोग करने के लिए बढ़ावा देता रहा है। एक बार जब इस बैंक का सर्वर हैक हुआ था तब इसमें खाता रखने वालों का नाम खुलासा हुआ था। इसमें हिजबुल्लाह के लोगों के नाम भी थे।

हिजबुल्लाह के पूर्व मुखिया नसरुल्लाह ने इस संस्थान में हिजबुल्लाह समर्थकों से अपना एक-एक पैसा इसमें जमा कर दें। यह हिजबुल्लाह की फर्जी कम्पनियों को चलाने में भी मदद करता है। इजरायल ने हिजबुल्लाह की आर्थिक रूप से कमर तोड़ने को बेरूत में इसकी शाखाओं को निशाना बनाया। बेरूत में इस संस्थान की 15 शाखाएँ हैं।

दूसरी तरफ इजरायली सुरक्षा बलों (IDF) के प्रवक्ता डैनिएल हगारी ने भी इसको लेकर बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि लेबनान के लोगों का पैसा लेकर हिजबुल्लाह अपनी आतंकी गतिविधियाँ चला रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान से आया पैसा और लेबनान के लोगों को पैसा हिजबुल्लाह को फंड किया जा रहा है।

इजरायल ने खुलासा किया कि ‘4400 यूनिट’ हिजबुल्लाह की वित्तीय गतिविधियाँ चलाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान से पैसा और सोना हिजबुल्लाह के लिए आता है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि लेबनान से हिजबुल्लाह डॉलर चुराता है, इस कारण से लेबनान की अर्थव्यवस्था रसातल में चली गई है।

इजरायल ने एक और बड़ा खुलासा इस दौरान किया। डेनियल हगारी ने बताया, “आज मैं वह सूचना सार्वजनिक कर रहा हूँ जहाँ पर हमने बमबारी नहीं की। यह हिजबुल्लाह के पूर्व मुखिया नसरुल्लाह का बंकर है। यह बंकर अल सालेह अस्पताल के ठीक नीचे स्थित है। इसके नीचे बड़ी सुरंग बनाई है और इसमें घुसने और निकलने के रास्ते भी पास की इमारतों में हैं।”

उन्होंने आगे बताया, “यह एक बड़ा बंकर है, यहाँ बेडरूम हैं और लम्बे समय तक लड़ने और छुपने की भी व्यवस्था है। यहाँ करोड़ों डॉलर नगद में रखे हुए हैं और सोना भी रखा हुआ है। यह पैसा और सोना अब भी रखा हुआ है। हम लेबनान की सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने माँग करते हैं कि इस पैसे का इस्तेमाल आतंक के लिए ना हो।” हगारी ने बताया है कि हिजबुल्लाह ने यहाँ 500 मिलियन डॉलर (लगभग 4200 करोड़ रूपए) छुपाए हैं।

इजरायल लगातार लेबनान के भीतर हिजबुल्लाह को निशाना बना रहा है। उसने हाल ही में हिजबुल्लाह के मुखिया नसरुल्लाह और उसके उत्तराधिकारी को मार गिराया था। इजरायल गाजा में भी आतंकियों को ठिकाने लगा रहा है।

इजरायल ने पैगम्बर मोहम्मद के वंशज को भी मार गिराया : हफ्ते भर पहले ही बना था हिजबुल्लाह का सरगना, इस्लामी बता रहे थे इसे ‘खूंखार योद्धा’; पाकिस्तान TV ने आतंकवादी मुस्लिमों के होने का कारण बताया , देखिए वीडियो

इजरायल ने इस्लामी आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के नए सरगना हाशिम सैफिद्दीन को भी मार गिराया है। उसे लेबनान के भीतर एक हवाई हमले में मार दिया गया। हिजबुल्लाह ने इस संबंध में अभी आधिकरिक जानकारी नहीं दी है। नए हिजबुल्लाह सरगना की मौत उसके पिछले मुखिया हसन नसरुल्लाह के मारे जाने के एक सप्ताह के भीतर हो गई है।

इजरायली मीडिया ने जानकारी दी है कि शुक्रवार रात (4 अक्टूबर, 2024) को इजरायल की वायु सेना के तीन विमानों ने बेरूत के भीतर एक जगह पर भारी हवाई बमबारी की। इस बमबारी में हिजबुल्लाह का नया सरगना हाशिम सैफिद्दीन मारा गया। हमले के दौरान वह के बंकर में मौजूद था और अपने कमांडरों के साथ बैठक कर रहा था। 

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल(जिसकी पुष्टि नहीं हो पायी है) हो रहे नीचे दिए वीडियो जिसे पाकिस्तान का बताया जा रहा है। 

Why are terrorists always Muslims? Thank God this information was given by Pakistan TV. 

Indian Secularist and supporters of Islam must listen to this so that, by mistake, if it opens their mind.

हिजबुल्लाह के नए सरगना के मारे जाने को लेकर इजरायली सुरक्षा बलों (IDF) और हिजबुल्लाह ने अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। इजरायल के इस हवाई हमले के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर आए हैं। इनमें एक रिहायशी इलाके में आग की लपटें उठती दिखाई देती हैं।

कौन था हाशिम सैफिद्दीन?

हिजबुल्लाह के मुखिया हसन नसरल्लाह को शुक्रवार (27 सितम्बर, 2024) को इजरायल ने एक हवाई हमले में मार गिराया था। इसी के साथ हिजबुल्लाह के कई और कमांडर भी मारे गए थे। इसके बाद प्रश्न उठा था कि इस आतंकी संगठन का सरगना अब कौन बनेगा। इस बीच हाशिम सैफिद्दीन का नाम उठा था।
सैफिद्दीन को हिजबुल्लाह का नया मुखिया माना जा रहा था। सैफिद्दीन भी नसरल्लाह की तरह एक शिया इमाम है। वह हिजबुल्लाह के सबसे वरिष्ठ लोगों में से एक है। लेबनान में जन्मा सैफिद्दीन हिजबुल्लाह की शूरा कमिटी का सदस्य था।
यह कमिटी हिजबुल्लाह को नियंत्रित करती है। इसके अलावा यह एग्जीक्यूटिव कमिटी और जिहाद काउंसिल का मुखिया था जो कि हिजबुल्लाह के आतंक समेत बाकी मामलों को देखती है। सैफिद्दीन 60 वर्ष का था और वह हिज्बुलाह के मृत सरगना नसरल्लाह का ममेरा भाई था।
उसके बेटे की शादी ईरान की क़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर कासिम सुलेमानी के बेटी के साथ हुई थी। सैफिद्दीन काली पगड़ी पहनता था, यह शियाओं के बड़े इमाम पहना करते हैं। वह खुद को इस्लाम के पैगम्बर मोहम्मद के वंशज के तौर पर दर्शाता था। उसे इस्लामी सोशल मीडिया मीडिया हैंडल्स ने ‘खूंखार योद्धा’ बताया था।
सैफिद्दीन को अमेरिका ने 2017 में आतंकी घोषित कर दिया था। माना जाता है कि उसे लम्बे समय से हिजबुल्लाह का अगला मुखिया बनने के लिए तैयार किया जा रहा था। ईरान भी उसे नया मुखिया बनाने जाने के पक्ष में था। सालों से उसे इस बात की ट्रेनिंग दी जा रही थी। हालाँकि, अब उसके मारे जाने की बात सामने आई है।

हिजबुल्लाह पर इजरायल का कहर जारी

इजरायल लगातार आतंक के खात्मे के लिए लेबनान में हिजबुल्लाह और गाजा के भीतर हमास पर हमले कर रहा है। उसने लेबनान में सैफिद्दीन के अलावा एक अन्य हमले में राकेट और मिसाइल के विशेषज्ञ मुहम्मद युसूफ अनीसी को मार गिराया है। मैकेनिकल इंजीनियर की शिक्षा लेने वाला अनीसी इजरायल पर हमले के लिए रॉकेट बनाता था।
इजरायल ने इसी के साथ वेस्ट बैंक में भी बमबारी की और यहाँ के हमास कमांडर यासिर अब्दुलरज्जाक को मार गिराया। इस आतंकी ने इजरायल में बीते माह एक हमले को अंजाम दिया था। इससे पहले इजरायल ने लगभग 2 दशक पहले 2 इजरायली सैनिकों को मारने वाले एक हमास आतंकी को भी मार गिराया।

हिजबुल्लाह के हर पेजर में 3gm विस्फोटक, मोसाद ने सिग्नल हैक कर बैट्री किए गर्म, इजरायल ने सप्लाई चेन में किया घुसपैठ

                                                        धमाके वाले पेजर (बाएँ) और घायल लोग (दाएँ)
मध्य पूर्व के देश लेबनान के भीतर मंगलवार (17 सितम्बर, 2024) को हजारों धमाके एक साथ हुए। यह धमाके संदेश भेजने-पाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पेजर में हुए। लेबनान और पड़ोसी देश सीरिया के भीतर हजारों पेजर एक साथ फट गए। इस कारण लगभग 3000 लोग घायल हुए हैं, 9 लोगों की मौत की भी सूचना है। घायल होने वाले अधिकांश लोग इस्लामी आतंकी संगठन हिजबुल्लाह से जुड़े हुए थे। पेजर में धमाके करने का आरोप हिजबुल्लाह ने इजरायल पर लगाया है।

यह अभी साफ़ नहीं हो सका है कि एक साथ इतने पेजरों में धमाके कैसे हुए। इसको लेकर अलग-अलग थ्योरी चलाई जा रही हैं। कहीं यह कहा जा रहा है कि पेजरों को एक सिग्नल भेज कर धमाका कर दिया गया तो कहीं कोई और तरीका इस संबंध में बताया गया। लेबनान के लोगों ने भी इस संबंध में इजरायल पर आरोप लगाए हैं।

बैटरी गरम करके किया धमाका?

लेबनान के भीतर हुए धमाकों में देखा गया कि पेजर इकट्ठे गरम हो कर फट गए। इनमें तेज धमाके हुए और इनको रखने वाले के साथ ही आसपास के लोग इसकी चपेट में आ गए। इस कारण बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। सबसे पहले कहा गया कि इन हजारों पेजरों के बीच के सिग्नल को इजरायल ने हैक कर लिया और इसमें ऐसी फ्रीक्वेंसी के संदेश भेजे जिससे उनकी बैटरी गरम हो गई और उसमें विस्फोट हो गया। हालाँकि, इसके विरोध में तर्क दिया गया कि बैटरियों में गरम हो कर आग नहीं लगी और वह सीधे फट ही गए, ऐसा इस तरीके से नहीं हो सकता।

पेजरों में कर दी गड़बड़?

पेजरों में हुई गड़बड़ के पीछे एक और थ्योरी यह दी जा रही है कि इजरायल ने इन पेजरों की आपूर्ति के बीच में ही गड़बड़ कर दी। बताया गया कि 5000 पेजर ताइवान से मँगाए गए थे और इसी साल की शुरुआत में हिजबुल्लाह के पास पहुँचे थे। लेबनान से जुड़े लोगों ने मीडिया को बताया कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने इन पेजरों के भीतर एक ऐसा बोर्ड लगाया जिससे धमाका हुआ। इस बोर्ड को आसानी से पहचाना नहीं जा सकता और इसी कारण हिजबुल्लाह इस बारे में अनभिज्ञ रहा।
यह भी कहा जा रहा है कि इजरायल ने यह पेजर हिजबुल्लाह के पास पहुँचने से पहले ही इनमें यह गड़बड़ कर दी और जब यह हिजबुल्लाह के लोगों के पास पहुँचे तो उनमें धमाका कर दिया। लेबनान के लोगों ने बताया कि इन पेजर में पड़े बोर्ड को जब मोसाद ने एक कोड वाला मैसेज भेजा तो यह फट गए। हालाँकि, इन पेजरों में इनको बनाने वाली फैक्ट्री में छेड़छाड़ हुई या फिर रास्ते में कहीं पर इनमें बोर्ड डाले गए, इसको लेकर अभी कोई जानकारी नहीं है।
हिजबुल्लाह के लोगों के पास फटने वाले पेजरों के भीतर 3 ग्राम विस्फोटक रखने की बात भी सामने आई है। कहा गया है कि इतनी छोटी मात्रा में पेजरों के भीतर रखा गया विस्फोटक हिजबुल्लाह पहचान नहीं पाया और उसने इन्हें अपने लोगों के बीच बाँट दिया। इसके बाद जब इजरायल ने सही मौक़ा देखा तो इनके भीतर धमाका कर दिया। हालाँकि, अभी इस थ्योरी को लेकर कोई पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इस धमाके का निशाना हिजबुल्लाह के लोग बने हैं, इसलिए पूरा शक इजरायल की तरफ है।

पेजर का इस्तेमाल क्यों करते हैं हिजबुल्लाह के लोग?

हिजबुल्लाह पर हुए इस पेजर हमले के बीच यह प्रश्न भी उठा कि आखिर यह हजारों करोड़ का मालिक यह आतंकी समूह दशकों पुरानी तकनीक पर क्यों निर्भर है। बताया गया कि हिजबुल्लाह ने कई सालों से अपने आतंकियों और बाकी लोगों के फोन उपयोग करने पर प्रतिबंध लगा रखा है। ऐसा इसलिए क्योंकि इजरायल इन्हें हैक कर सकता है और बातचीत सुन कर बड़ा नुकसान पहुँचा सकता है। पेजर का इस्तेमाल इसकी तकनीक साधारण और आसानी से हैक ना हो पाने के कारण किया जाता है। इजरायल ने इसमें भी सेंध लगा दी।

कंपनी ने नकारे दावे, हिजबुल्लाह ने बोला- बदला लेंगे

ताइवान की जिस कंपनी से यह पेजर मँगाए जाने की बात कही जा रही है, उसने यह सभी दावे नकार दिए हैं। ताइवान की गोल्ड अपोलो कंपनी ने कहा है कि उसने हिजबुल्लाह के पास पहुँचने वाले पेजर नहीं बनाए थे। गोल्ड अपोलो ने बताया है कि यूरोप की एक कंपनी पेजर बनाती है और उसने गोल्ड अपोलो से ही लाइसेंस ले रखा है।
इसीलिए फटने वाले पेजरों पर गोल्ड अपोलो का स्टीकर लगा हुआ था और डिजाइन भी वही थी जो गोल्ड अपोलो के पेजरों पर थी। हिजबुल्लाह ने इस घटना के बाद कहा है कि वह बदला लेंगे और उसने इजरायल को ही इसका जिम्मेदार माना है।

हमास के बाद हिज़्बुल्ला ने भी बोला हमला: इजरायल ने उन मस्जिदों को तबाह किया, जिनमें छिपे थे आतंकी

इस्लामी आतंकी संगठन हमास के दक्षिणी इजरायल पर हमले के बाद अब लेबनान की तरफ से भी इजरायल पर हमले चालू हो गए हैं। हमास को सहायता देने वाला आतंकी संगठन हिज़्बुल्ला (Hezbollah) अब खुद लड़ाई में उतर आया है।

हिज़्बुल्ला ने एक वीरान इलाके में रॉकेट दागे हैं। (चित्र साभार : BBC)
हिज़्बुल्ला ने इजरायल से सटी लेबनान सीमा की तरफ से रॉकेट दागे हैं। हेज्बोल्लाह ने इजरायल के शेबा फार्म इलाके में राकेट और गोले दागे हैं। हालाँकि, इस हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हिज़्बुल्ला ने कहा है कि उसका निशाना इजरायल के कुछ राडार स्टेशन थे, जिनको ध्वस्त करने के लिए उसने ये रॉकेट दागे। इजरायल ने भी इसके प्रतिरोध में काफी फायरिंग की है। हिज़्बुल्ला ने इजरायल, सीरिया और लेबनान की सीमा पर बसे गोलान हाइट्स इलाके में भी बमबारी की है। यह इलाका वर्ष 1967 के बाद से इजरायल के कब्जे में है। हिज़्बुल्ला ने सबसे पहले हमास के हमले की प्रशंसा की थी।

हिज़्बुल्ला ईरान समर्थित शिया आतंकी समूह है जिसने लेबनान में अपना बेस बनाया हुआ है। वह यहाँ काफी प्रभावशाली है और कई तरह के अवैध व्यापार समेत तस्करी और अन्य धंधों में लिप्त है। वह लेबनान के भीतर से ही इजरायल पर लगातार हमले करता है। हालाँकि, अभी अन्य अरब देशों ने इजरायल के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई को लेकर कोई भी बात नहीं कही है। क़तर को छोड़ कर बाकी सभी देशों ने इजरायल में हुए हमले की निंदा की है। ईरान ने इस हमले का समर्थन किया है और ईरानी जनता ने सड़कों पर आकर इसका जश्न मनाया है।

इसके अतिरिक्त, हमास ने कहा है कि वह लगातार इजरायल से लड़ रहा है और अभी भी उनका इजरायल के कुछ हिस्सों पर कब्ज़ा है, कम से कम 7 स्थानों पर दोनों के बीच लड़ाई चल रही है। इजरायल ने गाजा के भीतर घुस कर हवाई हमले चालू कर दिए हैं और अपनी रिज़र्व सेना को भी बुला लिया है। एक जानकारी के अनुसार, इजरायल द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में अब तक लगभग गाजा में 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लगातार घायलों को अस्पताल लाया जा रहा है। इजरायल ने अपनी कार्रवाई में गाजा के भीतर कई मस्जिदों को तबाह कर दिया है। इजरायल का कहना है कि फिलिस्तीनी आतंकी इन्हीं मस्जिदों के भीतर से काम कर रहे थे।

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हमास के हमले में मरने वाले इजरायलियों की संख्या भी 350 पार हो गई है। इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने 26 सैनिकों की मौत की आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है। मरने वालों में 18 से 42 वर्ष तक के सैनिक शामिल थे जो कि हमास के हमले के समय सीमा पर तैनात थे। इस बात के भी कयास लगाए जा रहे हैं कि इजरायल अपनी सेनाओं को जमीन के रास्ते गाजा पट्टी और फिलिस्तीन के भीतर भेज सकता है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि वह गाजा पट्टी को रेगिस्तान में बदल देंगे।