Showing posts with label mosques. Show all posts
Showing posts with label mosques. Show all posts

हमास के बाद हिज़्बुल्ला ने भी बोला हमला: इजरायल ने उन मस्जिदों को तबाह किया, जिनमें छिपे थे आतंकी

इस्लामी आतंकी संगठन हमास के दक्षिणी इजरायल पर हमले के बाद अब लेबनान की तरफ से भी इजरायल पर हमले चालू हो गए हैं। हमास को सहायता देने वाला आतंकी संगठन हिज़्बुल्ला (Hezbollah) अब खुद लड़ाई में उतर आया है।

हिज़्बुल्ला ने एक वीरान इलाके में रॉकेट दागे हैं। (चित्र साभार : BBC)
हिज़्बुल्ला ने इजरायल से सटी लेबनान सीमा की तरफ से रॉकेट दागे हैं। हेज्बोल्लाह ने इजरायल के शेबा फार्म इलाके में राकेट और गोले दागे हैं। हालाँकि, इस हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हिज़्बुल्ला ने कहा है कि उसका निशाना इजरायल के कुछ राडार स्टेशन थे, जिनको ध्वस्त करने के लिए उसने ये रॉकेट दागे। इजरायल ने भी इसके प्रतिरोध में काफी फायरिंग की है। हिज़्बुल्ला ने इजरायल, सीरिया और लेबनान की सीमा पर बसे गोलान हाइट्स इलाके में भी बमबारी की है। यह इलाका वर्ष 1967 के बाद से इजरायल के कब्जे में है। हिज़्बुल्ला ने सबसे पहले हमास के हमले की प्रशंसा की थी।

हिज़्बुल्ला ईरान समर्थित शिया आतंकी समूह है जिसने लेबनान में अपना बेस बनाया हुआ है। वह यहाँ काफी प्रभावशाली है और कई तरह के अवैध व्यापार समेत तस्करी और अन्य धंधों में लिप्त है। वह लेबनान के भीतर से ही इजरायल पर लगातार हमले करता है। हालाँकि, अभी अन्य अरब देशों ने इजरायल के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई को लेकर कोई भी बात नहीं कही है। क़तर को छोड़ कर बाकी सभी देशों ने इजरायल में हुए हमले की निंदा की है। ईरान ने इस हमले का समर्थन किया है और ईरानी जनता ने सड़कों पर आकर इसका जश्न मनाया है।

इसके अतिरिक्त, हमास ने कहा है कि वह लगातार इजरायल से लड़ रहा है और अभी भी उनका इजरायल के कुछ हिस्सों पर कब्ज़ा है, कम से कम 7 स्थानों पर दोनों के बीच लड़ाई चल रही है। इजरायल ने गाजा के भीतर घुस कर हवाई हमले चालू कर दिए हैं और अपनी रिज़र्व सेना को भी बुला लिया है। एक जानकारी के अनुसार, इजरायल द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में अब तक लगभग गाजा में 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लगातार घायलों को अस्पताल लाया जा रहा है। इजरायल ने अपनी कार्रवाई में गाजा के भीतर कई मस्जिदों को तबाह कर दिया है। इजरायल का कहना है कि फिलिस्तीनी आतंकी इन्हीं मस्जिदों के भीतर से काम कर रहे थे।

अवलोकन करें:-

इजरायल की हो या जर्मनी की, सभी गैर-मुस्लिम लड़कियों-औरतों को लूटेंगे-खसोटेंगे: हमास के इस्लामी आ

हमास के हमले में मरने वाले इजरायलियों की संख्या भी 350 पार हो गई है। इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने 26 सैनिकों की मौत की आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है। मरने वालों में 18 से 42 वर्ष तक के सैनिक शामिल थे जो कि हमास के हमले के समय सीमा पर तैनात थे। इस बात के भी कयास लगाए जा रहे हैं कि इजरायल अपनी सेनाओं को जमीन के रास्ते गाजा पट्टी और फिलिस्तीन के भीतर भेज सकता है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि वह गाजा पट्टी को रेगिस्तान में बदल देंगे।

ज्ञानवापी अकेला नहीं, हर विवादित ढाँचे के नीचे मंदिर… 1800 स्थल जहाँ हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त कर बनाई गई मस्जिदें-मजार: राज्यवार सूची

अहमदाबाद का सुल्तान अहमद शाह मस्जिद, पलक्कड़ में टीपू सुल्तान का किला, मांडू में दिलावर खान मस्जिद, अजमेर में ढाई दिन का झोंपड़ा (बाएँ से दाएँ)
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) ने साफ कर दिया है कि वाराणसी स्थित ज्ञानवापी को मस्जिद कहना गलत है। उन्होंने कहा कि इसमें त्रिशूल सहित हिंदू धर्म के अन्य निशान हैं। साथ ही कहा है कि इस ‘ऐतिहासिक भूल’ के समाधान के लिए ​मुस्लिम समाज की ओर से प्रस्ताव आना चाहिए।

हालाँकि, देश भर में ऐसे कई निर्माण हैं। वर्ष 1990 में इतिहासकार सीता राम गोयल ने अन्य लेखकों अरुण शौरी, हर्ष नारायण, जय दुबाशी और राम स्वरूप के साथ मिलकर ‘हिंदू टेम्पल: व्हाट हैपन्ड टू देम’ (Hindu Temples: What Happened To Them) नामक दो खंडों की किताब प्रकाशित की थी। उसमें गोयल ने 1800 से अधिक मुस्लिमों द्वारा बनाई गई इमारतों, मस्जिदों और विवादित ढाँचों का पता लगाया था, जो मौजूदा मंदिरों/या नष्ट किए गए मंदिरों की सामग्री का इस्तेमाल करके बनाए गए थे। कुतुब मीनार से लेकर बाबरी मस्जिद, ज्ञानवापी विवादित ढाँचे, पिंजौर गार्डन और अन्य कई का उल्लेख इस किताब में मिलता है।

लेखकों द्वारा उपयोग की जाने वाली पद्धति

पुस्तक के कुछ अध्याय में लेखकों के समाचार पत्रों में पहले प्रकाशित लेखों का भी एक संग्रह है। अध्याय छह में, ‘Historians Versus History’ अर्थात ‘इतिहासकार बनाम इतिहास’ राम स्वरूप ने उल्लेख किया है कि हिंदू मंदिरों को कैसे ध्वस्त किया गया और इससे जुड़ी अन्य जानकारियों के बारे ब्रिटिश और मुस्लिम दोनों इतिहासकारों ने अपने-अपने तरीके से कैसे लिखा है। बात करें ब्रिटिश इतिहासकारों की तो उन्होंने भारत को गुलाम बनाने और यहाँ राज करने को सही ठहराते हुए मुगलों द्वारा की गई क्रूरता और बर्बरता को गलत करार दिया है। इसके विपरीत, मुस्लिम इतिहासकारों ने इस्लाम और उनके तत्कालीन संरक्षकों का महिमामंडन करते हुए विस्तार से बताया कि कैसे मुस्लिम आक्रांताओं ने मंदिरों को तोड़ा और उसके स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया।
देश भर में मौजूद मस्जिदों और कई ऐतिहासिक इमारतों में उपलब्ध शिलालेखों में अल्लाह, पैगंबर और कुरान को कोट करके लिखा हुआ है। इन अभिलेखों से पता चलता है कि इन इमारतों का निर्माण किसके द्वारा, कैसे और कब किया गया था। पुस्तक में कहा गया है, “शिलालेखों को विद्वान मुस्लिम एपिग्राफिस्टों द्वारा उनके ऐतिहासिक संदर्भ से जोड़ा गया है। वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा अपने एपिग्राफिया इंडिका अरबी और फारसी में प्रकाशित किए गए हैं। पहली बार 1907-08 में एपिग्राफिया इंडो-मोस्लेमिका के रूप में प्रकाशित हुआ था।”
5 फरवरी, 1989 को अरुण शौरी (Arun Shourie) का एक लेख प्रकाशित हुआ था। उसमें उन्होंने एक प्रसिद्ध और प्रभावशाली व्यक्ति मौलाना हकीम सैयद अब्दुल हाई (Maulana Hakim Sayid Abdul Hai) का जिक्र किया था। शौरी ने बताया था कि उन्होंने कई किताबें लिखी हैं, जिनमें से एक किताब ‘हिंदुस्तान की मस्जिदें’ है, जिसमें 17 पन्नों का अध्याय था। उस अध्याय के बारे में बात करते हुए शौरी ने कहा था, उसमें मस्जिदों का संक्षिप्त विवरण लिखा गया था, जिसमें हाई ने बताया था कि कैसे मस्जिदों के निर्माण के लिए हिंदू मंदिरों को नष्ट कर दिया गया था।
उदाहरण के लिए बाबरी मस्जिद, जिसके बारे में हमने पढ़ा है, “अयोध्या, जिसे भगवान श्रीराम की जन्मभूमि कहा जाता है। वहाँ पर प्रथम मुगल सम्राट बाबर के आदेश पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया था। इस जगह को लेकर एक प्रसिद्ध कहानी है। कहा जाता है कि यहाँ श्रीराम चंद्र भगवान की पत्नी सीता का एक मंदिर था, जिसमें वह रहती थीं और अपने पति के लिए खाना बनाती थीं।” उसी स्थान पर बाबर ने एच. 963 में इस मस्जिद का निर्माण किया था।” यहाँ एच 963 का अर्थ हिजरी कैलेंडर वर्ष 963 से है, जो अंग्रेजी कैलेंडर के वर्ष 1555-1556 के बीच होता है।

इस्लामिक जगहों की राज्यवार सूची

इसके अलावा किताब में विभिन्न राज्यों के 1800 से अधिक स्थानों का उल्लेख है। हिंदू मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए समर्पित संगठन, ‘रिक्लेम टेंपल’ ने सीता राम गोयल द्वारा पुस्तक में दी गई सूचियों पर बखूबी काम किया है।

आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश को लेकर सीता राम गोयल और अन्य लेखकों ने इस किताब में उल्लेख किया है कि मंदिरों को ध्वस्त करने के बाद उसकी सामग्री का इस्तेमाल मस्जिदों, दरगाहों, प्रवेश द्वार और किलों के निर्माण में किया गया था। अकेले आंध्र प्रदेश को लेकर लेखकों ने 142 जगहों की पुष्टि की है, जिनमें कदिरी में जामी मस्जिद, पेनुकोंडा में अनंतपुर शेर खान मस्जिद, बाबया दरगाह पेनुकोंडा, जो इवारा मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। तदपत्री में ईदगाह, गुंडलाकुंटा में दतगिरी दरगाह, दतगिरी दरगाह को जनलापल्ले में जंगम मंदिर के ऊपर बनाया गया है।
वहीं, हैदराबाद के अलियाबाद में मुमिन चुप की दरगाह है, जिसे 1322 में एक मंदिर की जगह पर बनाया गया था। इसी तरह, राजामुंदरी में जामी मस्जिद का निर्माण 1324 में वेणुगोपालस्वामी मंदिर को नष्ट करके किया गया था। आंध्र प्रदेश में मंदिरों का विनाश सदियों से जारी है। 1729 में बनाई गई गचिनाला मस्जिद (Gachinala Masjid,) को राज्य की सबसे नई मस्जिद के रूप में जाना जाता था। यह भी एक मंदिर की जगह पर बनाई गई है।

असम

किताब में असम के दो मंदिरों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें तोड़कर मस्जिद और मजार में परिवर्तित कर दिया गया था। इनके नाम हैं, पोआ मस्जिद (Poa Mosque) और सुल्तान गयासुद्दीन बलबन (Ghiyasuddin Balban) की मजार। ये दोनों कामरूप जिले के हाजो के मंदिरों की जगह पर आज भी मौजदू हैं।

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में 102 जगहों पर मस्जिदें, किले और दरगाह हैं, जिन्हें मुस्लिम शासकों ने मंदिर को नष्ट करके बनाया था। उन्होंने मंदिरों को नष्ट करने के बाद इकट्ठा हुए मलबे का इस्तेमाल करके इसे बनाया था। इन संरचनाओं में लोकपुरा की गाजी इस्माइल मजार भी शामिल है, जो वेणुगोपाल मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। बीरभूम सियान (1221) Birbhum Siyan (1221) में मखदूम शाह दरगाह को बनाने के लिए मंदिर की सामग्री का उपयोग किया गया था। सुता में सैय्यद शाह शाहिद महमूद बहमनी दरगाह को बौद्ध मंदिर की सामग्री से बनाया गया था। बनिया पुकुर में 1342 में बनाई गई अलाउद-दीन अलौल हक़ मस्जिद (Alaud-Din Alaul Haqq Masjid) को भी मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल करके बनाया गया था।
बारहवीं शताब्दी ईस्वी के अंत में मुस्लिमों ने एक हिंदू राजधानी लक्ष्मण नवती को नष्ट कर उसकी सामग्री उपयोग करके गौर में एक मुस्लिम शहर बनाया था। छोटी सोना मस्जिद, तांतीपारा मस्जिद, लटन मस्जिद, मखदुम अखी सिराज चिश्ती दरगाह, चमकट्टी मस्जिद, चाँदीपुर दरवाजा और अन्य संरचनाओं सहित कई मुस्लिम संरचनाएँ शहर में मंदिर की सामग्री का उपयोग करके दो शताब्दियों के अंदर बनाई गई थीं।

बिहार

बिहार में कुल 77 जगहों पर मंदिर को नष्ट करके या फिर उसकी सामग्री का उपयोग करके मस्जिदों, मुस्लिम संरचनाओं, किलों आदि को बनाया गया था। भागलपुर में, हजरत शाहबाज की दरगाह 1502 में एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। इसी तरह चंपानगर में जैन मंदिरों को नष्ट कर कई मजारों का निर्माण कराया गया था। मुंगेर जिले के अमोलझोरी में मुस्लिम कब्रिस्तान एक विष्णु मंदिर की जगह पर बनाया गया था। गया के नादरगंज में शाही मस्जिद 1617 में एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी।
नालंदा जिले में और बिहारशरीफ में भी मंदिरों को नष्ट किया गया था। 1380 में मखदुमुल मुल्क शरीफुद्दीन की दरगाह, बड़ा दरगाह, छोटा दरगाह और अन्य शामिल हैं। पटना में शाह जुम्मन मदारिया की दरगाह एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। शाह मुर मंसूर की दरगाह, शाह अरज़ानी की दरगाह, पीर दमरिया की दरगाह भी बौद्ध स्थलों पर बनाई गई थीं।

दिल्ली

किताब में दिल्ली का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि यहाँ कुल 72 जगहों की पहचान की गई है, जहाँ पर मुस्लिम आक्रमणकारियों ने सात शहरों का निर्माण करने के लिए इंद्रप्रस्थ और ढिलिका को नष्ट कर दिया था। मंदिर की सामग्री का उपयोग कई स्मारकों, मस्जिदों, मजारों और अन्य संरचनाओं में किया गया था, जिनमें कुतुब मीनार, कुव्वतुल इस्लाम मस्जिद (1198), शम्सूद-दीन इल्तुतमिश का मकबरा, जहाज़ महल, अलल दरवाजा, अलल मीनार, मदरसा और अलाउद-दीन खिलजी का मकबरा और माधी मस्जिद शामिल हैं।

गुजरात

किताब में गुजरात की 170 ऐसी जगहों के बारे में बताया गया है, जहाँ मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई हैं। असवल, पाटन और चंद्रावती के मंदिरों को नष्ट कर इनकी सामग्री का उपयोग अहमदाबाद को एक मुस्लिम शहर बनाने के लिए किया गया था। अहमदाबाद में मंदिर सामग्री का उपयोग करने वाले जो स्मारक बनाए गए हैं, वह हैं- अहमद शाह की जामी मस्जिद, हैबिट खान की मस्जिद।
ढोलका जिले में बहलोल खान की मस्जिद और बरकत शहीद की मजार भी मंदिरों को ध्वस्त करके बनाई गई थी। इसी तरह, सरखेज में, Shaikh Ahmad Khattu Ganj Baksh की दरगाह 1445 में मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी। 1321 में, भरूच में हिंदू और जैन मंदिरों के विध्वंस के बाद जो सामग्री इकट्ठा हुई थी। उसका उपयोग करके जामी मस्जिद का निर्माण किया गया था।
भावनगर में बोटाद में पीर हमीर खान की मजार एक मंदिर की जग​ह पर बनाई गई थी। 1473 में द्वारका में एक मंदिर के स्थल पर मस्जिद का निर्माण किया गया था। भुज में, जामी मस्जिद और बाबा गुरु के गुंबद मंदिर के स्थान पर बनाए गए थे। जैन समुदाय के लोगों को रांदेर से निकाल दिया गया और मंदिरों की जगह मस्जिद बना दी गई थीं। जैसे जामी मस्जिद, नित नौरी मस्जिद, मियां की मस्जिद, खारवा मस्जिद को भी मंदिर के स्थान पर बनाया गया था। इसके अलावा सोमनाथ पाटन में बाजार मस्जिद, चाँदनी मस्जिद और काजी की मस्जिद भी मंदिर के स्थानों पर बनाई गई थी।

दीव

दीव में जो जामी मस्जिद है, उसका निर्माण 1404 में किया गया था। पुस्तक में इसका भी उल्लेख किया गया है। इसे भी एक मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

हरियाणा

इतिहासकारों द्वारा हरियाणा में कुल 77 स्थलों का उल्लेख किया गया है। पिंजौर, अंबाला में मंदिर की सामग्री का उपयोग फिदई खान के बगीचे के निर्माण में किया गया था। फ़िदाई खान गार्डन, जिसे बाद में एक सिख सम्राट ने बदलकर यादवेंद्र गार्डन कर दिया था। इसे पिंजौर गार्डन के नाम से भी जाना जाता है। ये भी मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाया गया था। फरीदाबाद में, जामी मस्जिद 1605 में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। नूंह में, मंदिर की सामग्री का उपयोग करके 1392 में एक मस्जिद का निर्माण किया गया था।
बावल में मस्जिदें और गुरुग्राम जिले के फर्रुखनगर में जामी मस्जिद मंदिर के स्थान पर बनाई गई हैं। कैथल में बल्ख के शेख सलाह-दीन अबुल मुहम्मद (Salahud-Din Abul Muhammad) की दरगाह 1246 में मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी। कुरुक्षेत्र में टीले पर मदरसा और झज्जर में काली मस्जिद मंदिर स्थलों पर बनाई गई थी। हिसार का निर्माण फिरोज शाह तुगलक ने अग्रोहा से लाई गई मंदिर सामग्री का उपयोग करके किया था। अग्रोहा शहर का निर्माण भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज महाराजा अग्रसेन ने करवाया था। महाराजा अग्रसेन का जन्म भगवान राम के बाद 35वीं पीढ़ी में हुआ था। 1192 में मुहम्मद गौरी ने इस शहर को नष्ट कर दिया था।

हिमाचल प्रदेश

किताब में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में एक जगह के बारे में बताया गया है, यहाँ मंदिर सामग्री का उपयोग करके जहाँगीरी गेट बनाया गया था।

कर्नाटक

कर्नाटक में कुल 192 स्थान हैं। बेंगलुरु के डोड्डा बल्लापुर में अजोधन की मुहिउद-दीन चिश्ती की दरगाह मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी। कुदाची में मखदूम शाह की दरगाह और शेख मुहम्मद सिराजुद-दीन पिरदादी की मजार भी मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। हम्पी के विजयनगर में मस्जिद और ईदगाह भी मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाए गए थे। काफी पुराने हिंदू शहर बीदर को बदलकर एक मुस्लिम राजधानी का निर्माण किया गया था। सोला खंबा मस्जिद, जामी मस्जिद, मुख्तार खान की मस्जिद मंदिर के स्थान पर बनाई गई थीं और कुछ में मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल भी किया गया था।शहर के मंदिरों को या तो ध्वस्त कर दिया गया या फिर उन्हें मस्जिदों में बदल दिया गया। जामी मस्जिद, महला शाहपुर में मंदिर के स्थान पर आज भी मस्जिद मौजूद हैं। बीजापुर एक प्राचीन हिंदू शहर हुआ करता था, लेकिन इसे एक मुस्लिम राजधानी में तब्दील कर दिया गया था। जामी मस्जिद, करीमुद-दीन की मस्जिद, छोटा मस्जिद, आदि मंदिर स्थलों पर बनाए गए थे या मंदिर सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। टोन्नूर, मैसूर में सैय्यद सालार मसूद की मजार मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी।

केरल

केरल की दो जगहों का उल्लेख किया गया है। पहला कोल्लम में जामी मस्जिद और दूसरा पालघाट में टीपू सुल्तान द्वारा बनाए गए किले का, जिसमें मंदिर की सामग्री का उपयोग किया गया था।

लक्षद्वीप

लक्षद्वीप में दो जगहों के बारे में बताया गया है। कल्पेनी में मुहिउद-दीन-पल्ली मस्जिद (Muhiud-Din-Palli Masjid) और कवरती में प्रोट-पल्ली मस्जिद भी मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। यह सर्वविदित है कि लक्षद्वीप में अब 100% के आसपास मुस्लिम हैं।

मध्य प्रदेश

किताब में मध्य प्रदेश के 151 स्थलों का उल्लेख है। भोपाल में कुदसिया बेगम (Qudsia Begum) द्वारा जामी मस्जिद का निर्माण किया गया था, जहाँ कभी सभामंडल मंदिर हुआ करता था। दमोह में गाजी मियां की दरगाह भी पहले एक मंदिर ही था। धार राजा भोज परमार की राजधानी हुआ करती थी। इसे भी मुस्लिम राजधानी में बदल दिया गया। कमल मौला मस्जिद, लाट की मस्जिद, अदबुल्लाह शाह चंगल की मजार आदि का निर्माण मंदिर की जगह पर या ​फिर उनकी सामग्री का इस्तेमाल करके बनाया गया है।
मांडू एक प्राचीन हिंदू शहर था। इसे भी मुस्लिम राजधानी में भी बदल दिया गया था। जामी मस्जिद, दिलावर खान की मस्जिद, छोटी जामी मस्जिद आदि का निर्माण मंदिर के स्थानों पर किया गया है। चंदेरी को भी मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाया गया था। मोती मस्जिद, जामी मस्जिद और अन्य संरचनाओं में भी मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। ग्वालियर में, मुहम्मद गौस की दरगाह, जामी मस्जिद और गणेश द्वार के पास मस्जिद मंदिर स्थलों पर बनाई गई थी।

महाराष्ट्र

किताब में महाराष्ट्र के 143 स्थलों के बारे में बात की गई है। अहमदनगर में अम्बा जोगी किले में मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। गॉग (Gogh) में ईदगाह, जिसे 1395 में बनाया गया था, यह भी एक मंदिर के स्थान पर बना है। अकोट (Akot) की जामी मस्जिद 1667 में एक मंदिर के स्थल पर बनाई गई थी। करंज में अस्तान मस्जिद 1659 में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। रीतपुर में औरंगजेब की जामी मस्जिद मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। हजरत बुरहानुद्दीन-दीन गरीब चिश्ती की दरगाह खुल्दाबाद में एक मंदिर स्थल पर 1339 में बनाई गई थी।
मैना हज्जम की मजार मुंबई में महालक्ष्मी मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। मुंबई में जामी मस्जिद एक मंदिर स्थल पर बनाई गई थी। परंदा में तलाब के पास नमाजगाह का निर्माण मनकेवरा मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था। लातूर में, मीनापुरी माता मंदिर को मबसू साहिब की दरगाह में बदल दिया गया था, सोमवारा मंदिर को सैय्यद कादिरी की दरगाह में बदल दिया गया था। वहीं, रामचंद्र मंदिर को पौनार की कादिमी मस्जिद (Qadimi Masjid) में बदल दिया गया था।

ओडिशा

ओडिशा में 12 ऐसी जगह हैं, जहाँ मंदिरों को तोड़कर उसके स्थान पर मस्जिद, दरगाह और मजार बनाई गई है। बालेश्वर में महल्ला सुन्नत में जामी मस्जिद श्री चंडी मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। शाही मस्जिद और कटक में उड़िया बाजार की मस्जिदों के साथ-साथ केंद्रपाड़ा में एक मस्जिद को मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

पंजाब

किताब में पंजाब के 14 जगहों का जिक्र है। इसमें बाबा हाजी रतन की मजार बठिंडा में एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। जालंधर के सुल्तानपुर की बादशाही सराय बौद्ध विहार के स्थान पर बनी हुई है। लुधियाना में अली सरमस्त की मस्जिद भी एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। बहादुरगढ़ में किले अंदर एक मस्जिद बनाई गई है। उसका निर्माण भी मंदिर की जगह पर किया गया है।

राजस्थान

पुस्तक में राजस्थान के 170 स्थलों का उल्लेख है। पहले अजमेर एक हिंदू राजधानी हुआ करती थी, जिसे मुस्लिम शहर में बदल दिया गया था। अढ़ाई-दिन-का-झोंपरा 1199 में बनाया गया था, मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह 1236 में बनाई गई थी, और अन्य मस्जिदों का निर्माण मंदिर के स्थान पर किया गया था। तिजारा में भरतारी मजार (Bhartari mazar) एक मंदिर को ध्वस्त करके बनाई गई थी। बयाना में नोहारा मस्जिद का निर्माण उषा मंदिर के स्थान पर किया गया था। भितरी-बहारी (Bhitari-Bahari Mahalla) की मस्जिद में विष्णु भगवान की मंदिर की सामग्री का उपयोग किया गया था।
काम्यकेश्वर मंदिर को कामां में चौरासी खंबा मस्जिद में बदल दिया गया था। पार्वंथा मंदिर (Parvantha) की सामग्री का उपयोग जालोर में तोपखाना मस्जिद में किया गया था, जिसे 1323 में बनाया गया था। शेर शाह सूरी के किले शेरगढ़ में हिंदू, बौद्ध और जैन मंदिरों की सामग्री का उपयोग किया गया था। लोहारपुरा में पीर जहीरुद्दीन की दरगाह मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। 1625 में, सलावतन में मस्जिद एक मंदिर स्थल पर बनाई गई थी। पीर जहीरुद्दीन की मजार और नागौर में बाबा बद्र की दरगाह भी मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी।

तमिलनाडु

किताब में तमिलनाडु के 175 स्थलों का उल्लेख किया गया है। Chingleput के आचरवा में शाह अहमद की मजार भी एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। कोवलम में मलिक बिन दिनार की दरगाह एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। पंचा पद्यमलाई की पहाड़ी का नाम बदलकर मौला पहाड़ कर दिया गया था। एक प्राचीन गुफा मंदिर के सेट्रल हॉल को मस्जिद में बदल दिया गया था। कोयंबटूर में, टीपू सुल्तान ने अन्नामलाई किले की मरम्मत के लिए मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया। टीपू सुल्तान की मस्जिद भी एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। तिरुचिरापल्ली (Tiruchirapalli) में नाथर शाह वाली की दरगाह एक शिव मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। मंदिर के लिंगम का उपयोग लैंप के रूप में किया गया था।

उत्तर प्रदेश

अब आते हैं उत्तर प्रदेश पर। किताब में यूपी के 299 स्थलों का उल्लेख है, जो मंदिर सामग्री और मंदिर के स्थानों पर बनाए गए थे। आगरा की कलां मस्जिद का निर्माण मंदिर की सामग्री से किया गया था। अकबर के किले में नदी के किनारे का हिस्सा जैन मंदिर के स्थान पर बनाया गया था। अकबर का मकबरा भी एक मंदिर के ऊपर खड़ा है। इलाहाबाद में अकबर का किला मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। मियां मकबुल और हुसैन खान शाहिद की मजार भी मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। पत्थर महल में मस्जिद का निर्माण लक्ष्मी नारायण मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था।
अयोध्या में राम जन्मभूमि के स्थल पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया था। हालाँकि उस विवादित ढाँचे को ध्वस्त कर दिया गया है और उस स्थान अब भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा स्वर्गद्वार मंदिर और त्रेता का ठाकुर मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था और उन जगहों पर औरंगजेब द्वारा मस्जिदों का निर्माण किया गया था।
शाह जुरान गौरी (Shah Juran Ghuri) की मजार एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। सर पैगंबर और अयूब पैगंबर की मजार एक बौद्ध मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी, जहाँ बुद्ध के पदचिन्ह थे। गोरखपुर में इमामबाड़ा एक मंदिर के स्थान पर बनाया गया था। इसी तरह, पावा में कर्बला एक बौद्ध स्तूप के स्थान पर बनाया गया था।
टिलेवाली मस्जिद लखनऊ में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। मेरठ में जामा मस्जिद एक बौद्ध विहार के खंडहर पर स्थित है। एक दरगाह नौचंड़ी देवी के मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। वाराणसी में, ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को विश्वेश्वर मंदिर सामग्री का उपयोग करके बनाया गया है। हाल ही में अदालत ने विवादित ढाँचे के सर्वेक्षण का आदेश दिया था। सर्वेक्षण करने वाली टीम को वहां एक शिवलिंग भी मिला है। इसके बाद अदालत ने उस जगह को सील कर दिया है।

‘यह केवल एक संक्षिप्त सारांश है’

गोयल ने अपनी किताब में लिखा है कि उनके द्वारा बताई गई सूची अभी अधूरी है, यह सिर्फ एक संक्षिप्त विवरण था। अभी सूची में और कई मस्जिदें व दरगाह हैं, जिनके मंदिर की जगह पर और मंदिर की सामग्री के इस्तेमाल से बनाने के सबूत मौजूद हैं। उन्होंने लिखा, “हमने उल्लेख किए गए स्मारकों के स्थानों, नामों और तारीखों के संबंध में सटीक होने की पूरी कोशिश की है। फिर भी कुछ गलतियाँ और भ्रम रह गए होंगे। हालाँकि, ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि विभिन्न स्रोत एक ही स्मारक के लिए अलग-अलग तिथियाँ और नाम का प्रयोग करते हों। कुछ मुस्लिम फकीरों को कई नामों से जाना जाता है, जो उनकी मजारों या दरगाह की पहचान करने में भ्रम पैदा करते हैं। या फिर कुछ जिलों का नाम बदलकर अगर नया नाम रख दिया गया तो ऐसा हो सकता है। खैर, यह केवल एक संक्षिप्त सारांश है।”
(साभार : अनुराग की यह रिपोर्ट मई 2022 में ​पहली बार प्रकाशित हुई थी। आंशिक बदलावों के साथ इसे दोबारा प्रकाशित किया गया है।)
 

किस कानून के तहत मस्जिदों में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल: कर्नाटक हाईकोर्ट का सरकार से सीधा सवाल

कर्नाटक हाईकोर्ट ने मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर मामले में 16 नवंबर 2021 को सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस ऋतु राज अवस्थी (Ritu Raj Awasthi) और जस्टिस सचिन शंकर मागादुब (Sachin Shankar Magadum) ने इस केस की सुनवाई करते हुए कर्नाटक सरकार से पूछा कि आखिर अनुमति से पहले 16 मस्जिदों द्वारा लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किस प्रावधान के तहत हुआ और ध्वनि प्रदूषण को देखते हुए इन्हें प्रतिबंधित करने के लिए क्या कार्रवाई की जा रही है।

इस मामले में बता दें कि थानिसंद्रा मेन रोड स्थित आइकॉन अपार्टमेंट के 32 निवासियों ने लाउडस्पीकर और माइक से हो रहे ध्वनि प्रदूषण को लेकर 16 मस्जिदों के खिलाफ जनहित याचिका दायर की थी। कोर्ट में राकेश पी और अन्य की ओर से पेश हुए वकील श्रीधर प्रभु ने कहा कि लाउडस्पीकर और माइकों के इस्तेमाल को हमेशा चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

उन्होंने अपनी याचिका में नियम 5 (3) का हवाला दिया। ये नियम लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को प्रतिबंधित करता है। ये राज्य सरकार को अधिकार देता है कि वो रात में होने वाले किसी धार्मिक, सांस्कृतिक या त्योहार पर कुछ समय के लिए लाउडस्पीकर को अनुमति दे दें। लेकिन ये सब भी साल में 15 दिन से ज्यादा के लिए नहीं।

वकील ने बताया कि कर्नाटक वक्फ बोर्ड को ऐसे मामलों में अनुमति देने का अधिकार नहीं है, जिनका सर्कुलर दिखाकर कहा जा रहा है कि इस कारण से उन्होंने (मस्जिदों) लाउडस्पीकर लगाए। वहीं मस्जिद पक्ष से इस याचिका का विरोध किया गया और कहा गया कि उन्होंने पुलिस से परमिशन ली थी। उनके मुताबिक लाउडस्पीकर ऐसे डिवाइस के साथ लगाए गए हैं जिससे किसी एक तय जगह से ज्यादा आवाज नहीं जाएगी। इसके अलावा लाउडस्पीकर प्रतिबंधित समय यानी कि 10 से 6 बजे के बीच भी नहीं बजाया जाता।

इसी केस में कोर्ट ने मस्जिदों को Noise Pollution Act 2000 के तहत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। कोर्ट के निर्देश थे कि वे तब तक लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं करेंगे, जब तक कि उन्हें शोर के अनुसार अधिकारियों से लिखित में सहमति नहीं मिल जाती।

कर्नाटक हाईकोर्ट से पहले मस्जिदों के लाउडस्पीकर को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी टिप्पणी की थी। अदालत ने माना था कि लाउडस्पीकर से अजान पर प्रतिबंध वैध है, क्योंकि यह इस्लाम का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा था कि किसी भी मस्जिद से लाउडस्पीकर से अजान करना दूसरे लोगों के अधिकारों में दखल देना है। दूसरों को सुनने के लिए मजबूर करने का अधिकार किसी को नहीं है।

चीन में मुस्लिमों पर थम नहीं रहा कहर, ढहा दीं दर्जनों मस्जिदें

चीन में मुस्लिमों पर थम नहीं रहा कहर, ढहा दीं दर्जनों मस्जिदें, फीका रहा रमजान
चीन के अशांत शिनजियांग क्षेत्र में हेयितका मस्जिद के इर्द-गिर्द एक वक्त रौनक सी रहती थी, लेकिन ऊंची गुंबददार इमारत की निशानी मिटने के साथ यह जगह अब वीरान हो चुकी है। दुनिया भर के मुसलमान खुशी और उत्साह के साथ ईद मना रहे हैं लेकिन हालिया समय में शिनजियांग में दर्जनों मस्जिदों को ढहाए जाने के कारण उइगुर और अन्य अल्पसंख्यक आबादी सुरक्षाकर्मियों की भारी मौजूदगी वाले इस क्षेत्र में दबाव का सामना कर रहे हैं और उनका रमजान भी फीका गुजरा। होतन शहर में इस जगह के पीछे एक प्राथमिक स्कूल की दीवार पर लाल रंग में लिखा है ‘पार्टी के लिए लोगों को पढ़ाएं’ और इस स्कूल में प्रवेश से पहले छात्रों को अपना चेहरा स्कैन कराना पड़ता है। 
पास के बाजार के एक दुकानदार ने कहा कि मस्जिद की बनावट ‘शानदार’ थी। वहां पर कई लोग रहते थे। उपग्रह से मिली तथा अन्य तस्वीरों को खंगालने से पता चलता है कि 2017 के बाद से 36 मस्जिदों और धार्मिक स्थलों को गिराया जा चुका है। जो मस्जिद खुले हैं, वहां जाने के लिए श्रद्धालुओं को मेटल डिटेक्टर से होकर गुजरना पड़ता है और सर्विलांस कैमरा से लगातार उन पर निगरानी रखी जाती है। दमन के डर से पहचान नहीं उजागर करने का अनुरोध करते हुए एक उइगुर मुसलमान ने कहा कि यहां पर हालात बहुत सख्त है, दिल कड़ा करके रहना पड़ता है। 
मई 5 को ईद मनाने वाले मुसलमान बड़ी खामोशी से ईदगाह मस्जिद पहुंचे
ईद मनाने वाले मुसलमान बड़ी खामोशी से ईदगाह मस्जिद पहुंचे। इस मस्जिद को प्रशासन ने मंजूरी दे रखी है और यह चीन की सबसे बड़ी मस्जिदों में एक है। आसपास की सड़कों, इमारतों पर सादी वर्दी में सुरक्षाकर्मी आने-जाने वालों पर कड़ी नजर रखे हुए थे। शिनजियांग में मुस्लिमों के लिए इस बार भी रमजान पर कोई रौनक नहीं थी। 
जब मुसलमान रोजा रखते थे, रेस्तरां में उमड़ी भीड़ को पूरे दिन भोजन परोसा जाता था।शुक्रवार को होतन में सूर्यास्त के बाद भी यह इकलौती मस्जिद सुनसान थी। इससे पहले दिन में करीब 100 लोग नमाज पढ़ने आए थे, लेकिन उनमें ज्यादातर बुजुर्ग मुसलमान थे। चीन के ला त्रोबे विश्वविद्यालय में जातीय समुदाय और नीति के विशेषज्ञ जेम्स लीबोल्ड ने कहा कि सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी धर्म को खतरा मानती है। 
लंबे समय से चीन सरकार चीनी समाज को धर्मनिरपेक्ष बनाना चाहती है। शिनजियांग सरकार ने कहा कि वह धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करती है और नागरिक कानून की सीमा के दायरे में रहते हुए रमजान मना सकते हैं। घातक हमले की आशंका के मद्देनजर सरकार ने पूरे क्षेत्र में कैमरे लगा रखे हैं। मोबाइल पुलिस थाने और जगह-जगह जांच चौकी बनायी गयी है। 
दस लाख उइगुर और तुर्की भाषी लोगों को अस्थायी शिविरों में रखा गया है.
अनुमानों के मुताबिक दस लाख उइगुर और तुर्की भाषी लोगों को अस्थायी शिविरों में रखा गया है। शुरुआत में उनकी मौजूदगी से इनकार करते हुए चीनी प्रशासन ने पिछले साल माना कि वे व्यावसायिक शिक्षा केंद्र चला रहे हैं, जिसका मकसद है कि लोग मंदारिन और चीनी कानूनों से वाकिफ होकर धार्मिक चरमपंथ का रास्ता त्याग दें। 
अवलोकन करें:-
About this website

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
हर वर्ष जब भी रमजान शुरू होते हैं, चीन में मुसलमानों पर कोई न कोई पाबन्दी लग जाती है। मस्जिद के बाहर नमाज पर पाबन्दी, ...

इन केंद्रों में रमजान को लेकर कोई उत्साह नहीं था। शिनजियांग सरकार ने कहा कि लोगों को धार्मिक गतिविधियों की इजाजत नहीं दी गयी क्योंकि चीनी कानून शैक्षिक केंद्रों में इस पर रोक लगाते हैं, लेकिन सप्ताहांत में वापसी पर उन्हें ऐसा करने की इजाजत होगी। (एजेंसीज इनपुट्स सहित)

हरियाणा : ‘मुस्लिमों को किराये पर नहीं देंगे घर और दुकान’, हिन्दू संगठनों की पंचायत

हिन्दू संगठनों की पंचायत- मुस्लिमों को किराये पर नहीं देंगे घर और दुकान !
देश की राजधानी देहली के सटे हरियाणा के गुरुग्राम की शीतला कॉलोनी में एक घर में बनी कथित मस्जिद को लेकर शुरू हुअा विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है ! 12 सितंबर को इस मस्जिद को नगर निगम ने सील कर दिया था। इस सील को खुलवाने के लिए मुस्लिम संगठन लगातार प्रयासरत हैं। वहीं, दूसरी ओर हिन्दू संगठन ने कथित मस्जिद की सील खोलने पर आंदोलन की चेतावनी दी है ! इस सिलसिले में रविवार (16 सितंबर) को शीतला माता मंदिर में हिन्दू संगठनों की पंचायत हुई। पंचायत में स्वामी विवेकानंद गिरी की उपस्थिति में मुस्लिम परिवारों को किराए पर घर व दुकान नहीं देने का फैसला लिया गया !
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हिन्दू संगठनों ने यह चेतावनी दी है कि कथित मस्जिद को सील करने से पहले जिला उपायुक्त ने एसडीएम से इसकी रिपोर्ट तैयार करवाई थी। इसके बाद ही सील करने की कार्रवाई हुई। अब यदि प्रशासनद्वारा इस सील को खोलने का प्रयास किया जाता है तो बड़ा आंदोलन होगा। इसके साथ ही हिन्दू संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले साल इसी तरह ओम विहार इलाके में एक घर को मस्जिद व मदरसा बता दिया गया था ! स्थानीय लोगोंद्वारा भारी विरोध के बाद प्रशासनद्वारा इसे बंद कर दिया गया। हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने मुस्लिम समुदाय के लोगों को नमाज पढ़ने के लिए ३५ जगह चिन्हित किए। इमें 24 जगह मुस्लिमों के हैं। शीतला कॉलोनी में करीब 30 मकान ही मुस्लिमों के हैं, लेकिन नमाज के समय सैंकड़ों लोग आ जाते हैं। इससे यहां के हिन्दुओं को परेशानी होती है !
मुस्लिम समाज ने हरियाण नगर निगम के इस फैसले पर आपत्ति जताई है।
इस कथित मस्जिद को लेकर हिन्दू और मुस्लिम दोनों समाज के लोग आमने-सामने आ गए हैं। हिन्दू संगठनों का कहना है कि निजी मकान को मस्जिद का रूप दे दिया गया है। प्रशासनद्वारा इसे सील किया जाना सही कदम है। वहीं, मुस्लिम संगठनों का कहना है कि हमारे पास इसके दस्तावेज हैं। यह जमीन 2016 में मस्जिद बनाने के लिए खरीदी गई थी। प्रशासन जानबूझ कर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है ! इसे किसी भी कीमत पर बर्दास्त नहीं किया जाएगा ! इसका परिणाम सरकार व प्रशासन को भुगतना होगा !                                                               स्त्रोत : जनसत्ता