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30 साल से सरकारी जमीन पर चल रहा था अवैध मदरसा, वक्फ कानून लागू होते ही संचालक ने खुद गिरवाया: मध्य प्रदेश के पन्ना का Video

वक़्फ़ कानून को लेकर मुसलमानों में ही दो ही नहीं कई फाड़ हो गए हैं। एक तरफ जहां वक़्फ़ जमींन का दुरुपयोग कर सड़क हंगामा करने से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच रहे हैं तो दूसरी तरफ सच्चाई को रूबरू हो अवैध मदरसे खुद ही हटा रहे हैं। हंगामा करने वाले कोई और नहीं, वक़्फ़ की जमींन हथिया कर चुटकी भर किराया देकर हर महीने करोड़ों कमा अपनी आने वाली पीडियों को राजशाही जिंदगी जीने का इंतेज़ाम कर रहे हैं। और वक़्फ़ की जमीनों से करोडो की की जा रही कमाई से लोगों को खरीदकर हंगामा किया जा रहा है। 
साभार सोशल मीडिया 

वक़्फ़ कानून के समर्थन में खड़े मुसलमान वक़्फ़ बोर्ड को ही ख़त्म करने के साथ-साथ ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड को भी ख़त्म करने की वकालत कर रहे हैं। मुसलमानों में इस्लाम का डर दिखाकर भड़काया जा रहा है, जबकि हकीकत यह है कि वक़्फ़ का इस्लाम से कोई वास्ता नहीं। यह तो मुसलमानों को कांग्रेस से जुड़े रखने का कांग्रेस ने हथियार बनाकर मुसलमानों को पागल बना रखा है।       

वक्फ कानून पास होने के बाद अवैध कब्जाधारियों में इसका खौफ भी दिखने लगा है। मध्य प्रदेश के पन्ना में एक संचालक ने अवैध मदरसे को खुद गिरा दिया। मदरसा संचालक को पहले भी नोटिस दिया जा चुका था, मामला कोर्ट में पहुंच गया था, लेकिन अब कानून पास होने के बाद संचालक ने खुद ही मदरसा गिरा दिया।

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में सरकारी जमीन पर कब्जा कर एक अवैध मदरसा करीब 30 साल से चलाया जा रहा था। लेकिन वक्फ कानून के अमल में आते ही संचालक ने शनिवार (12 अप्रैल 2025) को खुद ही इस मदरसे को गिरवा दिया।

इस अवैध मदरसे का काफी समय से विरोध हो रहा था। इसके नाम पर बड़े पैमाने में चंदा भी लिया जा रहा था, जिसकी जाँच की जा रही है। पन्ना जिले की बीडी कॉलोनी में स्थित अवैध मदरसा की शिकायत प्रशासन और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और सांसद विष्णु दत्त शर्मा से भी की गई थी।

शिकायत के बाद एसडीएम ने मदरसा संचालक को नोटिस जारी किया था। प्रशासन की कार्रवाई से पहले ही संचालक ने मजदूर लगाकर और बुलडोजर बुलाकर मदरसे को ध्वस्त करवा दिया।

मदरसा संचालक अब्दुल रऊफ कादरी का कहना है कि उसने ग्राम पंचायत से अनुमति ली थी। लेकिन अब यह क्षेत्र नगर निगम के अंतर्गत चला गया है, इसलिए निर्माण अवैध हो गया था।

पन्ना जिले की बीडी कॉलोनी में पिछले 30 वर्षों से अवैध मदरसा संचालित हो रहा था। प्रशासन द्वारा कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन मदरसा संचालक ने कोई जवाब नहीं दिया। वक्फ संशोधन बिल के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी, जिसके परिणामस्वरूप मदरसा संचालक ने स्वयं मदरसे पर बुलडोजर चलवा दिया। 

सरकारी जमीन पर बना था मदरसा 
पन्ना जिले की बीडी कॉलोनी में बेशकीमती सरकारी जमीन पर अवैध रूप से मदरसा बनाया गया था। कई वर्षों से स्थानीय लोग और समाजसेवी इस पर आपत्ति जता रहे थे, शिकायतें की गईं, लेकिन पहले कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप ये थे कि मदरसे के नाम पर पैसा वसूला जा रहा था और कुछ संदिग्ध गतिविधियां भी संचालित हो रही थीं। यह मदरसा 30 सालों से बिना वैध अनुमति के संचालित हो रहा था।
मामला लंबे समय से न्यायालय में लंबित था, इसलिए प्रशासन सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सका। लेकिन वक्फ संशोधन बिल और हाल की सख्त नीति के चलते प्रशासन ने नोटिस देकर कार्रवाई की चेतावनी दी। प्रशासन की चेतावनी के बाद मदरसा संचालक ने स्वेच्छा से बुलडोजर लगवाकर अवैध निर्माण को गिरवा दिया। उनका कहना है कि उन्हें ग्राम पंचायत से अनुमति मिली थी, पर अब जब वह क्षेत्र नगर निगम की सीमा में आ गया है, तो प्रशासन इसे अवैध मान रहा है। इसलिए उन्होंने विवाद को बढ़ाने की बजाय खुद निर्माण हटाने का फैसला किया।

दिल्ली : ध्वस्त हो चुकी अखूँदजी मस्जिद की जगह पर नहीं होगी ईद पर नमाज

                               अखूँदजी मस्जिद को डीडीए ने ढहाया था (फोटो साभार : जागरण)
दिल्ली हाई कोर्ट ने अखूँदजी मस्जिद पर ईद के मौके पर नमाज अदा करने की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में उस स्थान पर प्रवेश की माँग की गई थी, जहाँ महरौली में अखूँदजी मस्जिद हुआ करती थी और रमजान के महीने के दौरान ‘तरावीह’ की नमाज अदा की जाती थी। इस साल 30 जनवरी को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था।

दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया कि मुंतजामिया कमेटी मदरसा बहरुल उलूम और कब्रिस्तान की अपील को सात मई की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध संबंधित मामले के साथ जोड़ दिया जाए। ये याचिका 7 मार्च को दायर की गई थी। जिसे अब 7 मई को सुना जाएगा। मस्जिद कमेटी ने एकल न्यायाधीश के 23 फरवरी के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें रमजान और ईद की नमाज के लिए मस्जिद स्थल में दाखिल होने की इजाजत देने वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था।

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से अपील पर एक आदेश पारित करने की गुजारिश करते हुए कहा कि तब तक रमजान के साथ-साथ ईद की अवधि भी समाप्त हो जाएगी, लेकिन हाई कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर मामले में कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता है, खासकर जब एकल न्यायाधीश ने करीब एक महीने पहले राहत देने से इनकार कर दिया था।

इस दौरान हाई कोर्ट ने 23 फरवरी के आदेश पर भी ध्यान दिया, जिसने “साइट तक पहुँच की माँग करने वाली समान प्रार्थना” के साथ एक आवेदन खारिज कर दिया था। इससे पहले आवेदन में लोगों को ‘शब-ए-बारात’ के अवसर पर मस्जिद स्थल पर अपने परिवार के सदस्यों की कब्रों पर प्रार्थना करने की अनुमति माँगी गई थी।

600 साल से ज्यादा पुरानी मानी जाने वाली अखूँदजी मस्जिद और साथ ही वहाँ के बहरुल उलूम मदरसे को संजय वन में अवैध ढाँचा घोषित कर दिया गया था और इसे 30 जनवरी को दिल्ली विकास प्राधिकरण ने ध्वस्त कर दिया।

गुजरात : ‘108 अवैध मजारें जमींदोज, बाकी के लिए बुलडोजर तैयार’: हर्ष सांघवी, गृह मंत्री ने याद दिलाया- कांग्रेस ने कैसे मंदिर से हटवाई थी मूर्तियाँ

गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी ने बताया कि राज्य में 108 अवैध मजार गिराई गई है (चित्र साभार: HT & AnyTv)
गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी ने कहा है कि उनके राज्य में अब तक 108 अवैध मजार जमींदोज कर गई हैं। उन्होंने जूनागढ़ के ऊपरकोट में बनाई गई अवैध मजारों के गिराए जाने की बात बताते हुए कहा- “हमारा बुलडोजर हर उस इमारत को गिराने के लिए तैयार है जो कि साजिशन बनाई गई है।”

गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी ने बुधवार (21 फरवरी, 2024) को गुजरात विधानसभा में यह बातें कही। वह गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए बजट को लेकर गुजरात विधानसभा में हो रही चर्चा में हिस्सा ले रहे थे। इस दौरान उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला भी बोला और अपनी सरकार के कामकाज के बारे में बताया।

उन्होंने कहा, “जो बिंदु MLA अमित शाह भाई के द्वारा यहाँ उठाया गया कि कांग्रेस के राज के दौरान अहमदाबाद के जमालपुर में एक जैन मंदिर से मूर्तियों को हटाया गया था। अब दादा (सीएम भूपेन्द्र पटेल) का बुलडोजर राज्य के हर कोने में घूम रहा है जिससे कोई भी मंदिर या देवस्थान साजिशन किसी जगह से हटाया ना सके। अब किसी को नहीं मालूम कि यह बुलडोजर कहाँ जाएगा।”

इसके बाद उन्होंने बताया कि राज्य में 108 अवैध मजार को ढहाया गया है जो कि अतिक्रमण करके बनाई गई थीं। मंत्री हर्ष सांघवी ने बताया, “अब तक 108 मजार राज्य में गिराई गई हैं और राज्य की संपत्तियों को मुक्त कराया गया है। सोमनाथ के पास किया गया अवैध कब्जा भी हटाया गया है। दादा का बुलडोजर 20 फीट चौड़ी गली और 80 मीटर चौड़ी रोड में घुस सकता है।”

उन्होंने इस दौरान जूनागढ़ के ऊपरकोट किले में बनाई गई अवैध मजारों के गिराए जाने की बात भी की। मंत्री हर्ष सांघवी ने कहा, “कोई नहीं जानता कि ऊपरकोट में इतनी मजारें कहाँ से आ गईं। इतनी जल्दी यहाँ मजार कैसे बन सकती हैं।”

जूनागढ़ किले के पास से हटवाई गई थी अवैध मजारें

मई 2023 में राज्य सरकार जूनागढ़ के इस किले में सैकड़ों अवैध मजारों को जमींदोज कर दिया था। इस दौरान कुछ और इमारतें भी यहाँ गिराई गईं थीं। इस किले की सरकार ने 74 करोड़ रूपए की लागत से मरम्मत भी करवाई थी। यहाँ मजारें गिराए जाने के दौरान मुस्लिमों ने प्रदर्शन भी किया था।

राम मंदिर पर BBC की भड़काऊ कवरेज पर ब्रिटिश संसद में ही इसके खिलाफ उठी माँग : बाबरी का रोना रो छिपाया 1527 वाला इतिहास

BBC की नकारात्मक कवरेज का ब्रिटेन में ही विरोध
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर UK (यूनाइटेड किंगडम) के सरकारी मीडिया संस्थान BBC (ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन) की नकारात्मक कवरेज को लेकर उसका उसके ही देश में विरोध शुरू हो गया है। ब्रिटेन के सांसद ने 22 जनवरी, 2024 को हुए इस कार्यक्रम को लेकर BBC की कवरेज को पक्षपाती, भेदभावपूर्ण और भड़काऊ करार दिया है। सांसद बॉब ब्लैकमैन ने गुरुवार (1 फरवरी, 2024) को ‘हॉउस ऑफ कॉमन्स में ‘BBC की निष्पक्षता पर बहस की माँग उठाई है। BBC द्वारा भड़काऊ रिपोर्टिंग करने का कारण जान कार्यवाही पर भी चर्चा चल रही है। आज जब भारत अपनी खोई अस्मिता को प्राप्त कर रहा है,BBC वास्तविकता को नकार भड़काऊ लोगों को ऊर्जा दे रहा है।   

कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद ने कहा कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से दुनिया भर के हिन्दू खुश हैं। उन्होंने इस पर दुःख जताया कि BBC ने इसे एक मस्जिद को तबाह कर के उस स्थल पर बनी हुई संरचना बता दिया, और मीडिया संस्थान ये भूल गया है कि 2000 वर्षों से भी अधिक समय पहले तक वहाँ भव्य मंदिर हुआ करता था। उन्होंने ये भी याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए शहर में ही 5 एकड़ जमीन आवंटित की गई है।

सांसद बॉब ब्लैकमैन ने कहा कि दुनिया भर में क्या चल रहा है, इस पर बीबीसी की कवरेज कितनी निष्पक्ष है इसका रिकॉर्ड लाया जाना चाहिए और इस पर बहस होनी चाहिए। ‘हॉउस ऑफ कॉमन्स’ की नेता पोनी पैनी मॉर्डौंट ने कहा कि BBC की समीक्षा को लेकर महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। BBC को अपनी इस रिपोर्ट को लेकर सफाई भी प्रकाशित करनी पड़ी थी। इसमें उसने कहा था कि कुछ पाठकों को ने महसूस किया कि ये लेख पक्षपाती है और इसमें भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया गया है।

BBC ने सफाई में आगे कहा कि जो कुछ हुआ उसका सटीक और निष्पक्ष विवरण बताया जाना चाहिए। मीडिया संस्थान ने इससे असहमति जताई कि ये लेख हिन्दुओं का अपमान कर रहा है। उसने बड़ी चालाकी से दिसंबर 1992 के बाबरी विध्वंस का तो जिक्र किया, लेकिन मीर बाक़ी द्वारा राम मंदिर को सन् 1527 में ध्वस्त किए जाने की घटना का जिक्र नहीं किया। बीबीसी लेस्टर और बर्मिंघम में हुई हिन्दू विरोधी हिंसा में भी इस्लामी भीड़ का पक्ष लेकर हिन्दुओं को बदनाम करने वाली रिपोर्टिंग कर चुका है।

ब्रिटिश हिन्दुओं के अभियान ‘इनसाइट यूके’ ने भी बीबीसी को एक खुला पत्र लिखते हुए उसके कवरेज पर आपत्ति जताई। साथ ही लिखा कि मीडिया संस्थान ने ये छिपा लिया कि एक मुस्लिम आर्कियोलॉजिस्ट (KK मुहम्मद) ने बाबरी ढाँचे के नीचे राम मंदिर होने का पता लगाया, और सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुनाने वाले जजों में भी एक मुस्लिम जज (जस्टिस अब्दुल नज़ीर) थे। तमाम आलोचनाओं के बावजूद BBC अपनी सफाई में अपनी बात पर अड़ा रहा।

जिस खबर को लेकर आपत्ति जताई जा रही है, उसे गीता पांडेय और योगिता लिमये ने लिखा था। इस खबर का भड़काऊ शीर्षक था – “अयोध्या राम मंदिर: भारत के पीएम मोदी ने ढहाई गई बाबरी मस्जिद वाले स्थल पर हिंदू मंदिर का उद्घाटन किया”। इस खबर में लिखा गया था कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से मुस्लिम डरे हुए हैं, इस कार्यक्रम ने उनकी ‘दर्दनाक यादें’ ताज़ा कर दी हैं। वहीं बाबरी ढाँचे के निर्माण को लेकर लिखा गया कि ‘हिन्दू ऐसा यकीन करते हैं’ कि राम मंदिर ढाह कर इसे बनाया गया था। जबकि, इसके साक्ष्य हर रूप में मौजूद हैं।


देहरादून : ढाह दी गई शत्रु संपत्ति काबुल हाउस: 40 साल से फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रहे थे कब्जेदार

                             शत्रु संपत्ति काबुल हाउस को प्रशासन ने किया ध्वस्त (फोटो साभार: aajtak.in)
देहरादून के बीचों बीच ईस्ट कैनाल पर शत्रु संपत्ति घोषित ऐतिहासिक काबुल हाउस को जिला प्रशासन ने शनिवार (2 दिसंबर 2023) की सुबह ध्वस्त कर दिया। इसमें कई दशकों से साल 1947 के बंटवारे का बाद 17 परिवार रह रहे थे। दो दिन पहले ही इन परिवारों से ये जगह खाली करवा ली गई थी। मौजूदा वक्त में यह 400 करोड़ रुपए की संपत्ति है।

सरकार द्वारा काबुल हाउस को शत्रु संपत्ति घोषित होने के बाद इसके रखरखाव की जिम्मेदारी देहरादून जिला प्रशासन के जिम्मे थी। बताते चलें कि देहरादून प्रशासन की इस जगह को खाली कराने के लिए इन परिवारों के साथ 1984 से ही कानूनी लड़ाई चल रही थी। आखिरकार 40 साल बाद प्रशासन को इसमें कामयाबी मिल गई।

अक्टूबर में ही जिला अदालत ने काबुल हाउस में रह रहे परिवारों को इस परिसर को खाली करने का आदेश दिया था। इसके बाद यहाँ रहने वाले परिवारों ने जिला अदालत के इस फैसले को नैनीताल हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

नैनीताल हाई कोर्ट ने काबुल हाउस के कब्जाधारियों को जगह छोड़ने के लिए 1 दिसंबर तक का वक्त दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद देहरादून प्रशासन ने काबुल हाउस के घरों को आंशिक तौर से सील कर दिया था।

                                                                                                                        साभार: aajtak.in

1879 में बना कॉबुल हाउस

दरअसल काबुल हाउस कभी अफगानिस्तान के राजा याकूब खान का महल हुआ करता था। इसे आज मंगला देवी कॉलेज कहते हैं। राजा को यहाँ से निर्वासित कर भेजा गया था। इसे याकूब खान ने 1879 में बनवाया था। 1947 के बंटवारे के बाद उसके वशंज पाकिस्तान चले गए। इसके बाद कई लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर इस पर कब्जा कर लिया था। इसे खाली कराने को लेकर देहरादून प्रशासन 40 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहा था।

क्या है शत्रु संपत्ति

शत्रु संपत्तियाँ उन लोगों से जुड़ी संपत्ति को कहा जाता है, जो लोग बंटवारे के दौरान और 1962 और 1965 के युद्ध के बाद भारत छोड़ने के बाद पाकिस्तान और चीन की नागरिकता ले चुके हैं। संसद ने मार्च 2017 में शत्रु संपत्ति (संशोधन और मान्यकरण) अधिनियम 2016 पारित किया था।
इसमें युद्ध के बाद पाकिस्तान और चीन चले गए लोगों की छोड़ी गई संपत्ति पर उत्तराधिकार के दावों को रोकने के प्रावधान किए गए थे। दरअसल दो देशों में युद्ध छिड़ने पर ‘शत्रु देश’ के नागरिकों की संपत्ति सरकार कब्जे में ले लेती है ताकि शत्रु युद्ध के दौरान उसका लाभ न उठा सके।
इसी के तहत भारत ने भी 1962 में चीन, 1965 और 1971 में पाकिस्तान से युद्ध छिड़ने पर भारत सुरक्षा अधिनियम के तहत इन देशों के नागिरकों की संपत्तियों पर कब्जा कर लिया था। इस संपत्ति के तहत ज़मीन, मकान, सोना, गहने, कंपनियों के शेयर और शत्रु देश के नागरिकों की किसी भी दूसरी अन्य तरह की संपत्ति को सरकार अपने अधिकार में ले सकती है।
सरकार के सामने ऐसे कई मामले आए थे, जब शत्रु संपत्ति का बेजा इस्तेमाल किया गया था। शत्रु संपत्ति को लेकर साल 2023 फरवरी में गृह मंत्रालय (एमएचए) के एक अधिकारी ने बयान जारी किया था, “भारत के शत्रु संपत्ति संरक्षक (सीईपीआई) ने शत्रु संपत्तियों का निपटान कर कुल 3,407.98 करोड़ रुपए कमाए हैं।”

इजरायल ने आतंक के हर अड्डे 7 मस्जिद, इस्लामी यूनिवर्सिटी को किया ‘समतल’, वीडियो

इजरायल ने अब तक कम से कम 7 मस्जिदों को जमींदोज कर दिया है (चित्र साभार: Middle East Eye)
इजरायल की वायुसेना ने कहा है कि उसने गाजा शहर के अंदर इस्लामिक विश्वविद्यालय को अपने हवाई हमले का निशाना बनाया है। इजरायली वायु सेना ने कहा है कि यह विश्वविद्यालय हमास के इंजीनियरों के लिए ट्रेनिंग केंद्र का काम कर रहा था। इस पर इजरायली वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने बमबारी कर इसे जमींदोज कर दिया है।

यह विश्वविद्यालय हमास के राजनीतिक और सैन्य लक्ष्यों को पूरा करने और इजरायल के खिलाफ उपयोग किए जाने वाले हथियार बनाने का बड़ा केंद्र थी। इजरायल की वायु सेना ने इस शिक्षण संस्थान पर बमबारी का वीडियो भी जारी किया है।

वायु सेना ने इस बमबारी का वीडियो भी जारी किया है। इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर 7 अक्टूबर को हमला किया था जिसके जवाब में अब वह गाजा पर बम बरसा कर आतंकियों का सफाया कर रहा है।

इजरायल ने इस हमले के बाद से गाजा में स्थित 7 मस्जिदों पर भी बमबारी कर के आतंक के अड्डों को समतल कर दिया है। इजरायल का कहना है कि इन मस्जिदों में आतंकी शरण लेते हैं और यहीं से इजरायल के विरुद्ध आतंक की तैयारी होती थी। इजरायल की वायु सेना ने अल-अब्बास, अल-सूसी, अल-यारमौक, अल-अमीन मोहम्मद, अहमद यासीन, अल-हबीब मोहम्मद और अल गरबी मस्जिदों पर बमबारी करके उन्हें मलबे में तब्दील कर दिया है।

गाजा में स्थित मस्जिदों के अलावा अन्य कई ठिकानों तथा प्रमुख इमारतों पर भी बमबारी की है। इजरायली सुरक्षा बलों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक 2300 से अधिक निशानों पर बमबारी की जा चुकी है। इजरायली सुरक्षा बलों ने हमास की आतंकी सैन्य टुकड़ी अल कासम ब्रिगेड के सरगना मोहम्मद दायफ के घर पर भी बम बरसाए हैं। बताया जा रहा है कि इस हमले में आतंकी दायफ के पिता समेत अन्य परिवारीजनों की मृत्यु हो गई है।

इस्लामी आतंकी संगठन हमास के हमले में अब तक 1200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि घायल होने वालों की संख्या भी बढ़कर 3000 के आसपास पहुँच गई है। इजरायल पर भी गाजा की तरफ से लगातार रॉकेट दागे जा रहे हैं।

इजरायल की प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई में लगभग 1000 फिलीस्तीनी आतंकी मारे जा चुके हैं जबकि 5,000 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। इजरायल द्वारा गाजा की नाकाबंदी कर दी गई है। गाजा में बिजली, पानी और गैस की भी आपूर्ति रोक दी गई है और मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि जल्द ही गाजा अँधेरे में डूब जाएगा। इजरायल ने गाजा में जिस मस्जिदों को ध्वस्त किया है, वो हैं – अल-अमीन मुहम्मद मस्जिद खान यूनिस में स्थित है। दक्षिणी गाजा पट्टी में स्थित इस मस्जिद को इजरायल ने ध्वस्त कर दिया:

इसके बाद इजरायल ने अल-सौसी मस्जिद को गिराया। यहाँ पर शाति कैम्प भी स्थित है, जहाँ कई आतंकी मौजूद थे। इसमें कहाँ 10 लोग मारे गए, वहीं 60 घायल भी हुए। इजरायली वायुसेना ने इसे निशाना बनाया।

वहीं वहाँ से थोड़ी ही दूरी पर स्थित अल-कार्बी मस्जिद पर भी बम बरसाए गए।

इतना ही नहीं, गाजा स्थित अल-यरमूक मस्जिद को भी इजरायल ने ध्वस्त किया और ये नज़ारा भी वीडियो में दिखा।

इजरायल के फाइटर जेट्स ने अल-अब्बास मस्जिद को भी मिट्टी में मिला दिया। इस दौरान धुएँ का भयंकर गुब्बार उठता हुआ दिखा।

इजरायल ने शती कैम्प स्थित ही ‘द वेस्टर्न मॉस्क’ को भी नहीं छोड़ा।

गाजा सिटी स्थित अहमद यासीन मस्जिद को भी इजरायल ने ध्वस्त किया।


ज्ञानवापी अकेला नहीं, हर विवादित ढाँचे के नीचे मंदिर… 1800 स्थल जहाँ हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त कर बनाई गई मस्जिदें-मजार: राज्यवार सूची

अहमदाबाद का सुल्तान अहमद शाह मस्जिद, पलक्कड़ में टीपू सुल्तान का किला, मांडू में दिलावर खान मस्जिद, अजमेर में ढाई दिन का झोंपड़ा (बाएँ से दाएँ)
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) ने साफ कर दिया है कि वाराणसी स्थित ज्ञानवापी को मस्जिद कहना गलत है। उन्होंने कहा कि इसमें त्रिशूल सहित हिंदू धर्म के अन्य निशान हैं। साथ ही कहा है कि इस ‘ऐतिहासिक भूल’ के समाधान के लिए ​मुस्लिम समाज की ओर से प्रस्ताव आना चाहिए।

हालाँकि, देश भर में ऐसे कई निर्माण हैं। वर्ष 1990 में इतिहासकार सीता राम गोयल ने अन्य लेखकों अरुण शौरी, हर्ष नारायण, जय दुबाशी और राम स्वरूप के साथ मिलकर ‘हिंदू टेम्पल: व्हाट हैपन्ड टू देम’ (Hindu Temples: What Happened To Them) नामक दो खंडों की किताब प्रकाशित की थी। उसमें गोयल ने 1800 से अधिक मुस्लिमों द्वारा बनाई गई इमारतों, मस्जिदों और विवादित ढाँचों का पता लगाया था, जो मौजूदा मंदिरों/या नष्ट किए गए मंदिरों की सामग्री का इस्तेमाल करके बनाए गए थे। कुतुब मीनार से लेकर बाबरी मस्जिद, ज्ञानवापी विवादित ढाँचे, पिंजौर गार्डन और अन्य कई का उल्लेख इस किताब में मिलता है।

लेखकों द्वारा उपयोग की जाने वाली पद्धति

पुस्तक के कुछ अध्याय में लेखकों के समाचार पत्रों में पहले प्रकाशित लेखों का भी एक संग्रह है। अध्याय छह में, ‘Historians Versus History’ अर्थात ‘इतिहासकार बनाम इतिहास’ राम स्वरूप ने उल्लेख किया है कि हिंदू मंदिरों को कैसे ध्वस्त किया गया और इससे जुड़ी अन्य जानकारियों के बारे ब्रिटिश और मुस्लिम दोनों इतिहासकारों ने अपने-अपने तरीके से कैसे लिखा है। बात करें ब्रिटिश इतिहासकारों की तो उन्होंने भारत को गुलाम बनाने और यहाँ राज करने को सही ठहराते हुए मुगलों द्वारा की गई क्रूरता और बर्बरता को गलत करार दिया है। इसके विपरीत, मुस्लिम इतिहासकारों ने इस्लाम और उनके तत्कालीन संरक्षकों का महिमामंडन करते हुए विस्तार से बताया कि कैसे मुस्लिम आक्रांताओं ने मंदिरों को तोड़ा और उसके स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया।
देश भर में मौजूद मस्जिदों और कई ऐतिहासिक इमारतों में उपलब्ध शिलालेखों में अल्लाह, पैगंबर और कुरान को कोट करके लिखा हुआ है। इन अभिलेखों से पता चलता है कि इन इमारतों का निर्माण किसके द्वारा, कैसे और कब किया गया था। पुस्तक में कहा गया है, “शिलालेखों को विद्वान मुस्लिम एपिग्राफिस्टों द्वारा उनके ऐतिहासिक संदर्भ से जोड़ा गया है। वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा अपने एपिग्राफिया इंडिका अरबी और फारसी में प्रकाशित किए गए हैं। पहली बार 1907-08 में एपिग्राफिया इंडो-मोस्लेमिका के रूप में प्रकाशित हुआ था।”
5 फरवरी, 1989 को अरुण शौरी (Arun Shourie) का एक लेख प्रकाशित हुआ था। उसमें उन्होंने एक प्रसिद्ध और प्रभावशाली व्यक्ति मौलाना हकीम सैयद अब्दुल हाई (Maulana Hakim Sayid Abdul Hai) का जिक्र किया था। शौरी ने बताया था कि उन्होंने कई किताबें लिखी हैं, जिनमें से एक किताब ‘हिंदुस्तान की मस्जिदें’ है, जिसमें 17 पन्नों का अध्याय था। उस अध्याय के बारे में बात करते हुए शौरी ने कहा था, उसमें मस्जिदों का संक्षिप्त विवरण लिखा गया था, जिसमें हाई ने बताया था कि कैसे मस्जिदों के निर्माण के लिए हिंदू मंदिरों को नष्ट कर दिया गया था।
उदाहरण के लिए बाबरी मस्जिद, जिसके बारे में हमने पढ़ा है, “अयोध्या, जिसे भगवान श्रीराम की जन्मभूमि कहा जाता है। वहाँ पर प्रथम मुगल सम्राट बाबर के आदेश पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया था। इस जगह को लेकर एक प्रसिद्ध कहानी है। कहा जाता है कि यहाँ श्रीराम चंद्र भगवान की पत्नी सीता का एक मंदिर था, जिसमें वह रहती थीं और अपने पति के लिए खाना बनाती थीं।” उसी स्थान पर बाबर ने एच. 963 में इस मस्जिद का निर्माण किया था।” यहाँ एच 963 का अर्थ हिजरी कैलेंडर वर्ष 963 से है, जो अंग्रेजी कैलेंडर के वर्ष 1555-1556 के बीच होता है।

इस्लामिक जगहों की राज्यवार सूची

इसके अलावा किताब में विभिन्न राज्यों के 1800 से अधिक स्थानों का उल्लेख है। हिंदू मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए समर्पित संगठन, ‘रिक्लेम टेंपल’ ने सीता राम गोयल द्वारा पुस्तक में दी गई सूचियों पर बखूबी काम किया है।

आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश को लेकर सीता राम गोयल और अन्य लेखकों ने इस किताब में उल्लेख किया है कि मंदिरों को ध्वस्त करने के बाद उसकी सामग्री का इस्तेमाल मस्जिदों, दरगाहों, प्रवेश द्वार और किलों के निर्माण में किया गया था। अकेले आंध्र प्रदेश को लेकर लेखकों ने 142 जगहों की पुष्टि की है, जिनमें कदिरी में जामी मस्जिद, पेनुकोंडा में अनंतपुर शेर खान मस्जिद, बाबया दरगाह पेनुकोंडा, जो इवारा मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। तदपत्री में ईदगाह, गुंडलाकुंटा में दतगिरी दरगाह, दतगिरी दरगाह को जनलापल्ले में जंगम मंदिर के ऊपर बनाया गया है।
वहीं, हैदराबाद के अलियाबाद में मुमिन चुप की दरगाह है, जिसे 1322 में एक मंदिर की जगह पर बनाया गया था। इसी तरह, राजामुंदरी में जामी मस्जिद का निर्माण 1324 में वेणुगोपालस्वामी मंदिर को नष्ट करके किया गया था। आंध्र प्रदेश में मंदिरों का विनाश सदियों से जारी है। 1729 में बनाई गई गचिनाला मस्जिद (Gachinala Masjid,) को राज्य की सबसे नई मस्जिद के रूप में जाना जाता था। यह भी एक मंदिर की जगह पर बनाई गई है।

असम

किताब में असम के दो मंदिरों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें तोड़कर मस्जिद और मजार में परिवर्तित कर दिया गया था। इनके नाम हैं, पोआ मस्जिद (Poa Mosque) और सुल्तान गयासुद्दीन बलबन (Ghiyasuddin Balban) की मजार। ये दोनों कामरूप जिले के हाजो के मंदिरों की जगह पर आज भी मौजदू हैं।

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में 102 जगहों पर मस्जिदें, किले और दरगाह हैं, जिन्हें मुस्लिम शासकों ने मंदिर को नष्ट करके बनाया था। उन्होंने मंदिरों को नष्ट करने के बाद इकट्ठा हुए मलबे का इस्तेमाल करके इसे बनाया था। इन संरचनाओं में लोकपुरा की गाजी इस्माइल मजार भी शामिल है, जो वेणुगोपाल मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। बीरभूम सियान (1221) Birbhum Siyan (1221) में मखदूम शाह दरगाह को बनाने के लिए मंदिर की सामग्री का उपयोग किया गया था। सुता में सैय्यद शाह शाहिद महमूद बहमनी दरगाह को बौद्ध मंदिर की सामग्री से बनाया गया था। बनिया पुकुर में 1342 में बनाई गई अलाउद-दीन अलौल हक़ मस्जिद (Alaud-Din Alaul Haqq Masjid) को भी मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल करके बनाया गया था।
बारहवीं शताब्दी ईस्वी के अंत में मुस्लिमों ने एक हिंदू राजधानी लक्ष्मण नवती को नष्ट कर उसकी सामग्री उपयोग करके गौर में एक मुस्लिम शहर बनाया था। छोटी सोना मस्जिद, तांतीपारा मस्जिद, लटन मस्जिद, मखदुम अखी सिराज चिश्ती दरगाह, चमकट्टी मस्जिद, चाँदीपुर दरवाजा और अन्य संरचनाओं सहित कई मुस्लिम संरचनाएँ शहर में मंदिर की सामग्री का उपयोग करके दो शताब्दियों के अंदर बनाई गई थीं।

बिहार

बिहार में कुल 77 जगहों पर मंदिर को नष्ट करके या फिर उसकी सामग्री का उपयोग करके मस्जिदों, मुस्लिम संरचनाओं, किलों आदि को बनाया गया था। भागलपुर में, हजरत शाहबाज की दरगाह 1502 में एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। इसी तरह चंपानगर में जैन मंदिरों को नष्ट कर कई मजारों का निर्माण कराया गया था। मुंगेर जिले के अमोलझोरी में मुस्लिम कब्रिस्तान एक विष्णु मंदिर की जगह पर बनाया गया था। गया के नादरगंज में शाही मस्जिद 1617 में एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी।
नालंदा जिले में और बिहारशरीफ में भी मंदिरों को नष्ट किया गया था। 1380 में मखदुमुल मुल्क शरीफुद्दीन की दरगाह, बड़ा दरगाह, छोटा दरगाह और अन्य शामिल हैं। पटना में शाह जुम्मन मदारिया की दरगाह एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। शाह मुर मंसूर की दरगाह, शाह अरज़ानी की दरगाह, पीर दमरिया की दरगाह भी बौद्ध स्थलों पर बनाई गई थीं।

दिल्ली

किताब में दिल्ली का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि यहाँ कुल 72 जगहों की पहचान की गई है, जहाँ पर मुस्लिम आक्रमणकारियों ने सात शहरों का निर्माण करने के लिए इंद्रप्रस्थ और ढिलिका को नष्ट कर दिया था। मंदिर की सामग्री का उपयोग कई स्मारकों, मस्जिदों, मजारों और अन्य संरचनाओं में किया गया था, जिनमें कुतुब मीनार, कुव्वतुल इस्लाम मस्जिद (1198), शम्सूद-दीन इल्तुतमिश का मकबरा, जहाज़ महल, अलल दरवाजा, अलल मीनार, मदरसा और अलाउद-दीन खिलजी का मकबरा और माधी मस्जिद शामिल हैं।

गुजरात

किताब में गुजरात की 170 ऐसी जगहों के बारे में बताया गया है, जहाँ मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई हैं। असवल, पाटन और चंद्रावती के मंदिरों को नष्ट कर इनकी सामग्री का उपयोग अहमदाबाद को एक मुस्लिम शहर बनाने के लिए किया गया था। अहमदाबाद में मंदिर सामग्री का उपयोग करने वाले जो स्मारक बनाए गए हैं, वह हैं- अहमद शाह की जामी मस्जिद, हैबिट खान की मस्जिद।
ढोलका जिले में बहलोल खान की मस्जिद और बरकत शहीद की मजार भी मंदिरों को ध्वस्त करके बनाई गई थी। इसी तरह, सरखेज में, Shaikh Ahmad Khattu Ganj Baksh की दरगाह 1445 में मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी। 1321 में, भरूच में हिंदू और जैन मंदिरों के विध्वंस के बाद जो सामग्री इकट्ठा हुई थी। उसका उपयोग करके जामी मस्जिद का निर्माण किया गया था।
भावनगर में बोटाद में पीर हमीर खान की मजार एक मंदिर की जग​ह पर बनाई गई थी। 1473 में द्वारका में एक मंदिर के स्थल पर मस्जिद का निर्माण किया गया था। भुज में, जामी मस्जिद और बाबा गुरु के गुंबद मंदिर के स्थान पर बनाए गए थे। जैन समुदाय के लोगों को रांदेर से निकाल दिया गया और मंदिरों की जगह मस्जिद बना दी गई थीं। जैसे जामी मस्जिद, नित नौरी मस्जिद, मियां की मस्जिद, खारवा मस्जिद को भी मंदिर के स्थान पर बनाया गया था। इसके अलावा सोमनाथ पाटन में बाजार मस्जिद, चाँदनी मस्जिद और काजी की मस्जिद भी मंदिर के स्थानों पर बनाई गई थी।

दीव

दीव में जो जामी मस्जिद है, उसका निर्माण 1404 में किया गया था। पुस्तक में इसका भी उल्लेख किया गया है। इसे भी एक मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

हरियाणा

इतिहासकारों द्वारा हरियाणा में कुल 77 स्थलों का उल्लेख किया गया है। पिंजौर, अंबाला में मंदिर की सामग्री का उपयोग फिदई खान के बगीचे के निर्माण में किया गया था। फ़िदाई खान गार्डन, जिसे बाद में एक सिख सम्राट ने बदलकर यादवेंद्र गार्डन कर दिया था। इसे पिंजौर गार्डन के नाम से भी जाना जाता है। ये भी मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाया गया था। फरीदाबाद में, जामी मस्जिद 1605 में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। नूंह में, मंदिर की सामग्री का उपयोग करके 1392 में एक मस्जिद का निर्माण किया गया था।
बावल में मस्जिदें और गुरुग्राम जिले के फर्रुखनगर में जामी मस्जिद मंदिर के स्थान पर बनाई गई हैं। कैथल में बल्ख के शेख सलाह-दीन अबुल मुहम्मद (Salahud-Din Abul Muhammad) की दरगाह 1246 में मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी। कुरुक्षेत्र में टीले पर मदरसा और झज्जर में काली मस्जिद मंदिर स्थलों पर बनाई गई थी। हिसार का निर्माण फिरोज शाह तुगलक ने अग्रोहा से लाई गई मंदिर सामग्री का उपयोग करके किया था। अग्रोहा शहर का निर्माण भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज महाराजा अग्रसेन ने करवाया था। महाराजा अग्रसेन का जन्म भगवान राम के बाद 35वीं पीढ़ी में हुआ था। 1192 में मुहम्मद गौरी ने इस शहर को नष्ट कर दिया था।

हिमाचल प्रदेश

किताब में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में एक जगह के बारे में बताया गया है, यहाँ मंदिर सामग्री का उपयोग करके जहाँगीरी गेट बनाया गया था।

कर्नाटक

कर्नाटक में कुल 192 स्थान हैं। बेंगलुरु के डोड्डा बल्लापुर में अजोधन की मुहिउद-दीन चिश्ती की दरगाह मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी। कुदाची में मखदूम शाह की दरगाह और शेख मुहम्मद सिराजुद-दीन पिरदादी की मजार भी मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। हम्पी के विजयनगर में मस्जिद और ईदगाह भी मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाए गए थे। काफी पुराने हिंदू शहर बीदर को बदलकर एक मुस्लिम राजधानी का निर्माण किया गया था। सोला खंबा मस्जिद, जामी मस्जिद, मुख्तार खान की मस्जिद मंदिर के स्थान पर बनाई गई थीं और कुछ में मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल भी किया गया था।शहर के मंदिरों को या तो ध्वस्त कर दिया गया या फिर उन्हें मस्जिदों में बदल दिया गया। जामी मस्जिद, महला शाहपुर में मंदिर के स्थान पर आज भी मस्जिद मौजूद हैं। बीजापुर एक प्राचीन हिंदू शहर हुआ करता था, लेकिन इसे एक मुस्लिम राजधानी में तब्दील कर दिया गया था। जामी मस्जिद, करीमुद-दीन की मस्जिद, छोटा मस्जिद, आदि मंदिर स्थलों पर बनाए गए थे या मंदिर सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। टोन्नूर, मैसूर में सैय्यद सालार मसूद की मजार मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी।

केरल

केरल की दो जगहों का उल्लेख किया गया है। पहला कोल्लम में जामी मस्जिद और दूसरा पालघाट में टीपू सुल्तान द्वारा बनाए गए किले का, जिसमें मंदिर की सामग्री का उपयोग किया गया था।

लक्षद्वीप

लक्षद्वीप में दो जगहों के बारे में बताया गया है। कल्पेनी में मुहिउद-दीन-पल्ली मस्जिद (Muhiud-Din-Palli Masjid) और कवरती में प्रोट-पल्ली मस्जिद भी मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। यह सर्वविदित है कि लक्षद्वीप में अब 100% के आसपास मुस्लिम हैं।

मध्य प्रदेश

किताब में मध्य प्रदेश के 151 स्थलों का उल्लेख है। भोपाल में कुदसिया बेगम (Qudsia Begum) द्वारा जामी मस्जिद का निर्माण किया गया था, जहाँ कभी सभामंडल मंदिर हुआ करता था। दमोह में गाजी मियां की दरगाह भी पहले एक मंदिर ही था। धार राजा भोज परमार की राजधानी हुआ करती थी। इसे भी मुस्लिम राजधानी में बदल दिया गया। कमल मौला मस्जिद, लाट की मस्जिद, अदबुल्लाह शाह चंगल की मजार आदि का निर्माण मंदिर की जगह पर या ​फिर उनकी सामग्री का इस्तेमाल करके बनाया गया है।
मांडू एक प्राचीन हिंदू शहर था। इसे भी मुस्लिम राजधानी में भी बदल दिया गया था। जामी मस्जिद, दिलावर खान की मस्जिद, छोटी जामी मस्जिद आदि का निर्माण मंदिर के स्थानों पर किया गया है। चंदेरी को भी मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाया गया था। मोती मस्जिद, जामी मस्जिद और अन्य संरचनाओं में भी मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। ग्वालियर में, मुहम्मद गौस की दरगाह, जामी मस्जिद और गणेश द्वार के पास मस्जिद मंदिर स्थलों पर बनाई गई थी।

महाराष्ट्र

किताब में महाराष्ट्र के 143 स्थलों के बारे में बात की गई है। अहमदनगर में अम्बा जोगी किले में मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। गॉग (Gogh) में ईदगाह, जिसे 1395 में बनाया गया था, यह भी एक मंदिर के स्थान पर बना है। अकोट (Akot) की जामी मस्जिद 1667 में एक मंदिर के स्थल पर बनाई गई थी। करंज में अस्तान मस्जिद 1659 में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। रीतपुर में औरंगजेब की जामी मस्जिद मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। हजरत बुरहानुद्दीन-दीन गरीब चिश्ती की दरगाह खुल्दाबाद में एक मंदिर स्थल पर 1339 में बनाई गई थी।
मैना हज्जम की मजार मुंबई में महालक्ष्मी मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। मुंबई में जामी मस्जिद एक मंदिर स्थल पर बनाई गई थी। परंदा में तलाब के पास नमाजगाह का निर्माण मनकेवरा मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था। लातूर में, मीनापुरी माता मंदिर को मबसू साहिब की दरगाह में बदल दिया गया था, सोमवारा मंदिर को सैय्यद कादिरी की दरगाह में बदल दिया गया था। वहीं, रामचंद्र मंदिर को पौनार की कादिमी मस्जिद (Qadimi Masjid) में बदल दिया गया था।

ओडिशा

ओडिशा में 12 ऐसी जगह हैं, जहाँ मंदिरों को तोड़कर उसके स्थान पर मस्जिद, दरगाह और मजार बनाई गई है। बालेश्वर में महल्ला सुन्नत में जामी मस्जिद श्री चंडी मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। शाही मस्जिद और कटक में उड़िया बाजार की मस्जिदों के साथ-साथ केंद्रपाड़ा में एक मस्जिद को मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

पंजाब

किताब में पंजाब के 14 जगहों का जिक्र है। इसमें बाबा हाजी रतन की मजार बठिंडा में एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। जालंधर के सुल्तानपुर की बादशाही सराय बौद्ध विहार के स्थान पर बनी हुई है। लुधियाना में अली सरमस्त की मस्जिद भी एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। बहादुरगढ़ में किले अंदर एक मस्जिद बनाई गई है। उसका निर्माण भी मंदिर की जगह पर किया गया है।

राजस्थान

पुस्तक में राजस्थान के 170 स्थलों का उल्लेख है। पहले अजमेर एक हिंदू राजधानी हुआ करती थी, जिसे मुस्लिम शहर में बदल दिया गया था। अढ़ाई-दिन-का-झोंपरा 1199 में बनाया गया था, मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह 1236 में बनाई गई थी, और अन्य मस्जिदों का निर्माण मंदिर के स्थान पर किया गया था। तिजारा में भरतारी मजार (Bhartari mazar) एक मंदिर को ध्वस्त करके बनाई गई थी। बयाना में नोहारा मस्जिद का निर्माण उषा मंदिर के स्थान पर किया गया था। भितरी-बहारी (Bhitari-Bahari Mahalla) की मस्जिद में विष्णु भगवान की मंदिर की सामग्री का उपयोग किया गया था।
काम्यकेश्वर मंदिर को कामां में चौरासी खंबा मस्जिद में बदल दिया गया था। पार्वंथा मंदिर (Parvantha) की सामग्री का उपयोग जालोर में तोपखाना मस्जिद में किया गया था, जिसे 1323 में बनाया गया था। शेर शाह सूरी के किले शेरगढ़ में हिंदू, बौद्ध और जैन मंदिरों की सामग्री का उपयोग किया गया था। लोहारपुरा में पीर जहीरुद्दीन की दरगाह मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। 1625 में, सलावतन में मस्जिद एक मंदिर स्थल पर बनाई गई थी। पीर जहीरुद्दीन की मजार और नागौर में बाबा बद्र की दरगाह भी मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी।

तमिलनाडु

किताब में तमिलनाडु के 175 स्थलों का उल्लेख किया गया है। Chingleput के आचरवा में शाह अहमद की मजार भी एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। कोवलम में मलिक बिन दिनार की दरगाह एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। पंचा पद्यमलाई की पहाड़ी का नाम बदलकर मौला पहाड़ कर दिया गया था। एक प्राचीन गुफा मंदिर के सेट्रल हॉल को मस्जिद में बदल दिया गया था। कोयंबटूर में, टीपू सुल्तान ने अन्नामलाई किले की मरम्मत के लिए मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया। टीपू सुल्तान की मस्जिद भी एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। तिरुचिरापल्ली (Tiruchirapalli) में नाथर शाह वाली की दरगाह एक शिव मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। मंदिर के लिंगम का उपयोग लैंप के रूप में किया गया था।

उत्तर प्रदेश

अब आते हैं उत्तर प्रदेश पर। किताब में यूपी के 299 स्थलों का उल्लेख है, जो मंदिर सामग्री और मंदिर के स्थानों पर बनाए गए थे। आगरा की कलां मस्जिद का निर्माण मंदिर की सामग्री से किया गया था। अकबर के किले में नदी के किनारे का हिस्सा जैन मंदिर के स्थान पर बनाया गया था। अकबर का मकबरा भी एक मंदिर के ऊपर खड़ा है। इलाहाबाद में अकबर का किला मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। मियां मकबुल और हुसैन खान शाहिद की मजार भी मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। पत्थर महल में मस्जिद का निर्माण लक्ष्मी नारायण मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था।
अयोध्या में राम जन्मभूमि के स्थल पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया था। हालाँकि उस विवादित ढाँचे को ध्वस्त कर दिया गया है और उस स्थान अब भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा स्वर्गद्वार मंदिर और त्रेता का ठाकुर मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था और उन जगहों पर औरंगजेब द्वारा मस्जिदों का निर्माण किया गया था।
शाह जुरान गौरी (Shah Juran Ghuri) की मजार एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। सर पैगंबर और अयूब पैगंबर की मजार एक बौद्ध मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी, जहाँ बुद्ध के पदचिन्ह थे। गोरखपुर में इमामबाड़ा एक मंदिर के स्थान पर बनाया गया था। इसी तरह, पावा में कर्बला एक बौद्ध स्तूप के स्थान पर बनाया गया था।
टिलेवाली मस्जिद लखनऊ में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। मेरठ में जामा मस्जिद एक बौद्ध विहार के खंडहर पर स्थित है। एक दरगाह नौचंड़ी देवी के मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। वाराणसी में, ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को विश्वेश्वर मंदिर सामग्री का उपयोग करके बनाया गया है। हाल ही में अदालत ने विवादित ढाँचे के सर्वेक्षण का आदेश दिया था। सर्वेक्षण करने वाली टीम को वहां एक शिवलिंग भी मिला है। इसके बाद अदालत ने उस जगह को सील कर दिया है।

‘यह केवल एक संक्षिप्त सारांश है’

गोयल ने अपनी किताब में लिखा है कि उनके द्वारा बताई गई सूची अभी अधूरी है, यह सिर्फ एक संक्षिप्त विवरण था। अभी सूची में और कई मस्जिदें व दरगाह हैं, जिनके मंदिर की जगह पर और मंदिर की सामग्री के इस्तेमाल से बनाने के सबूत मौजूद हैं। उन्होंने लिखा, “हमने उल्लेख किए गए स्मारकों के स्थानों, नामों और तारीखों के संबंध में सटीक होने की पूरी कोशिश की है। फिर भी कुछ गलतियाँ और भ्रम रह गए होंगे। हालाँकि, ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि विभिन्न स्रोत एक ही स्मारक के लिए अलग-अलग तिथियाँ और नाम का प्रयोग करते हों। कुछ मुस्लिम फकीरों को कई नामों से जाना जाता है, जो उनकी मजारों या दरगाह की पहचान करने में भ्रम पैदा करते हैं। या फिर कुछ जिलों का नाम बदलकर अगर नया नाम रख दिया गया तो ऐसा हो सकता है। खैर, यह केवल एक संक्षिप्त सारांश है।”
(साभार : अनुराग की यह रिपोर्ट मई 2022 में ​पहली बार प्रकाशित हुई थी। आंशिक बदलावों के साथ इसे दोबारा प्रकाशित किया गया है।)
 

उत्तराखंड : 3 महीने में 330+ मजार ध्वस्त; समान नागरिक संहिता पर जून तक पूरा हो जाएगा कमिटी का काम : पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के लिए उत्तराखंड की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक कमिटी का गठन किया। इस कमिटी का काम जून 2023 के अंत तक पूरा हो जाएगा। यह जानकारी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दी है। इस बीच राज्य में मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर वन विभाग अवैध मजारों पर बुलडोजर चला रहा है। बीते 3 महीनों में 330 से अधिक ऐसे मजार ध्वस्त किए गए हैं।

उत्तराखंड में ‘मजहबी अतिक्रमण’ पर खुफिया रिपोर्ट के बाद अवैध मजारों को हटाने की कार्रवाई में तेजी आई है। इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी अभियान छेड़ रखा है। अवैध मजार हटाने की कार्रवाई सोमवार (15 मई 2023) को भी जारी रही। इस कार्रवाई में जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन जंगल के अंदर बनी 9 अवैध मजारों पर बुलडोजर चलाया। 
किसी भी टाइगर रिजर्व में मानवी गतिविधियाँ पूरी तरह से प्रतिबंधित होती हैं। हालाँकि पर्यटकों को घूमने की अनुमति होती है। लेकिन इसमें भी एक निश्चित दायरा तय किया जाता है। फिर भी जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में मजार बन गए और वहाँ बिना किसी रोक-टोक के आवाजाही हो रही थी। मामला उजागर होने के बाद वन विभाग सक्रियता दिखाते हुए अवैध मजारों को तोड़ते हुए जमीन अतिक्रमण मुक्त कराने की कोशिश में जुटा हुआ है।
इस मामले में जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर धीरज पांडे ने न्यूज18 से हुई बातचीत में कहा है कि सरकार के निर्देशों के अनुसार उन्होंने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। मजारों का मालिकाना हक साबित करने के लिए एक सप्ताह पहले नोटिस जारी किया गया था। लेकिन कोई भी सामने नहीं आया। इसके बाद, इन अवैध कब्जों को हटा दिया गया। पिछले तीन महीनों में 330 से अधिक मजारों को हटाया गया है। इससे वन विभाग की 91 हेक्टेयर जमीन अतिक्रमण मुक्त हुई। अतिक्रमण हटाने को लेकर की गई इस कार्रवाई पर सीएम धामी ने कहा है, “देवभूमि में अतिक्रमण हटाने का प्रयास जारी रहेगा। उत्तराखंड में किसी भी तरह के लैंड जिहाद की अनुमति नहीं दी जाएगी।”

UCC पर कमिटी का 90 फीसदी काम पूरा

देश में समान नागरिक संहिता को लेकर उठ रही माँगों के बीच उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार इसके लिए तैयारियाँ कर रही है। उधमसिंह नगर जिले के काशीपुर में मीडिया से बात करते हुए सीएम ने कहा, “समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए हमने एक कमिटी बनाई थी। इस कमिटी का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। कमिटी 30 जून तक काम पूरा लेगी। इसके बाद हम समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। हमें उम्मीद है कि देश के सभी राज्य समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।”
अप्रैल 2022 में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि CAA, अनुच्छेद 370, राम मंदिर और तीन तलाक के बाद अब समान नागरिक संहिता की बारी है। उन्होंने कहा था कि उत्तराखंड की तर्ज पर ही भाजपा शासित अन्य राज्यों में भी समान नागिरक संहिता लागू किया जाएगा।

मुंबई में समुद्र के बीच बने ‘दरगाह’ पर चला बुलडोजरः राज ठाकरे ने उठाया था सवाल, कहा था- नहीं हटा तो बनेगा गणपति मंदिर

                              मुंबई में अवैध दरगाह पर चला प्रशासन का बुलडोजर (फोटो साभार- एएनआई)
मुंबई के माहिम में समुद्र किनारे बनाए गए अवैध दरगाह को तोड़ दिया गया है। गुरुवार (23 मार्च 2023) को सुबह 8 बजे ही अधिकारी मौके पर पहुँच गए। भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के बीच बुलडोजर चलाकर अवैध दरगाह को तोड़ दिया गया। दरगाह के मलबे को बाहर निकालने के लिए कई ट्रकों को लगाया गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने बुधवार (22 मार्च) को ही यह मुद्दा उठाया था।

मुंबई के माहिम में भी प्रशासन की तरफ से अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की गई। दरगाह को तोड़ने से पहले भारी पुलिस बल की तैनाती की गई। बुधवार को गुड़ी पड़वा के अवसर पर आयोजित MNS की रैली को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने कहा था कि 2 साल पहले यहाँ कुछ नहीं था। अब अवैध रूप से मजार बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस और बीएमसी के लोग सोए हुए हैं।

अपने भाषण के दौरान राज ठाकरे ने पूछा कि यह किसकी दरगाह है? क्या यह किसी मछली की है? मनसे प्रमुख ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह अवैध निर्माण तुरंत नहीं गिराया गया तो इसी स्थान पर गणपति मंदिर की स्थापना की जाएगी। इसके लिए राज ठाकरे ने प्रशासन को एक महीने का समय दिया था।

मनसे के अधिकारिक ट्विटर हैंडल से अवैध दरगाह को लेकर वीडियो शेयर करते हुए लिखा गया कि समुद्र के बीच एक नया हाजी अली तैयार किया जा रहा है। पुलिस और नगरपालिका को इसकी भनक भी नहीं लगी।

पोस्ट किए गए वीडियो में माहिम बीच से कुछ ही दूरी पर समुद्र में एक निर्माणाधीन दरगाह को देखा जा सकता है। कुछ लोग यहाँ पानी से गुजरते और दरगाह पर प्रार्थना करते देखे जा सकते हैं। इस वीडियो को मनसे प्रमुख ने अपने कार्यक्रम के दौरान भी चलवाया था।

रिपोर्टों के मुताबिक इस अवैध दरगाह को तोड़ने के आदेश मुंबई के रेजिडेंट कलेक्टर ने दिए थे। प्रशासन की कार्रवाई के दौरान कलेक्टर और डीसीपी भी मौके पर मौजूद रहे।

तमिलनाडु : ‘100 साल पुराने 3 मंदिरों को मैंने ही तोड़ा: मनमोहन सरकार में मंत्री रहे बालू ने गिनाए लक्ष्मी-सरस्वती-पार्वती मंदिर के नाम

                                                      वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट
टीआर बालू का एक बयान वायरल हो रहा है। इसमें वे तीन मंदिरों को तोड़ने की बात कर रहे हैं। डीएमके सांसद बालू मनमोहन सिंह की पहली सरकार में मंत्री रह चुके हैं। पिछले दिनों उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और अपनी पार्टी के नेता स्टालिन को छूने पर हाथ काटने की धमकी दी थी।

बालू का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। बीजेपी के तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने भी इसे ट्वीट किया है। इस वीडियो में बालू एक सभा को संबोधित करते दिख रहे हैं। वे कहते हैं, “मैंने 100 साल पुराने सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती मंदिर को तोड़ा है। ये तीनों मंदिर मेरे निर्वाचन क्षेत्र में जीएसटी रोड (ग्रैंड सदर्न ट्रंक रोड) पर थे।”

यह वीडियो वीडियो मदुरै की एक जनसभा का बताया जा रही है। इसे ट्वीट करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई ने कहा है कि DMK नेताओं को मंदिर तोड़ने पर फक्र है, जबकि वे मंदिरों को सरकारी कब्ज़े से निकालना चाहते हैं। अन्नामलाई ने अपने ट्वीट में HR&CE (हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम) को भंग करने की भी बात की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बालू ने सेतुसमुद्रम प्रोजेक्ट के समर्थन में सभा को संबोधित करते हुए यह बात कही। रामसेतु को नुकसान पहुॅंचने की वजह से हिंदूवादी संगठन इस प्रोजेक्ट के विरोध में हैं। वहीं डीएमके चाहती है कि यह परियोजना जल्द से जल्द शुरू हो।

इसी कड़ी में केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक परियोजना के लिए मंदिरों को तोड़े जाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मेरे निर्वाचन क्षेत्र में जीएसटी रोड पर सरस्वती मंदिर, लक्ष्मी मंदिर और पार्वती मंदिर को तोड़ा गया। मैंने ही इन तीनों मंदिरों को तोड़ा। मुझे पता है कि मुझे वोट नहीं मिलेंगे, लेकिन मुझे यह भी पता है कि मुझे वोट कैसे मिलेंगे। मेरे समर्थकों ने मुझे चेतावनी भी दी थी कि अगर मंदिर तोड़े गए तो मुझे वोट नहीं मिलेंगे। लेकिन मैंने उनसे कहा कि कोई दूसरा रास्ता नहीं है।”

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बालू ने अपने संबोधन में मस्जिद का भी जिक्र किया। साथ ही यह भी कहा कि मंदिर गिराने से नाराज लोगों को उन्होंने उससे भी बड़े और भव्य मंदिर बनवाने का भरोसा दिया और उसे बनवाया भी। गौरतलब है कि DMK के वरिष्ठ नेता बालू ने इससे पहले शनिवार (28 जनवरी 2023) को अपनी पार्टी के अध्यक्ष स्टालिन को छूने पर हाथ काट लेने की धमकी दी थी।

राजस्थान के अलवर में 300 साल पुराने हिंदू मंदिर को बुलडोजर से जमींदोज किया

गुजरात के गोधरा से लेकर दिल्ली में जहांगीरपुरी तक को पिकनिक स्पॉट बनाने वाले समस्त भाजपा विरोधी कांग्रेस शासित राजस्थान में हो रहे दंगों और अब 300 वर्ष पुराने हिन्दू मंदिर को जमीदोज करने पर क्यों खामोश हैं? हिन्दुओं आंखें खोलो और पहचानों इन हिन्दू विरोधी जयचंदों को। दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों पर ये सब खामोश रहते हैं, अखिलेश यादव के कार्यकाल में मुज़फ्फरनगर दंगे पर ये सब खामोश रहते हैं, लेकिन गोधरा और भाजपा शासित राज्य में कुछ होने पर हरकत में आना इनके दोगलापन को उजागर कर रहा है। 
राजस्थान के अलवर जिले (Alwar in Rajasthan) के राजगढ़ में वर्षों पुराने हिंदू मंदिर को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया है। स्थानीय लोग इससे बेहद आहत हैं। अशोक गहलोत सरकार के इस फैसले की वहाँ की जनता आलोचना कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 300 साल पुराने मंदिर को जमींदोज करने के लिए जेसीबी मशीन लाई गई थी। इंडिया टीवी के मुताबिक, मंदिर के अंदर रखे शिवलिंग को भी ड्रिल मशीन का उपयोग करके उखाड़ दिया गया।

स्थानीय विधायक जौहरी लाल मीणा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है कि कॉन्ग्रेस नगरपालिका विध्वंस अभियान को रोक सकती थी। उन्होंने कहा कि अगर 34 पार्षदों को उनके पास लाया जाता, तो वह विध्वंस अभियान को रोक सकते थे।

भारतीय जनता पार्टी राज्य में गहलोत सरकार पर 300 साल पुराने शिव मंदिर को तोड़ने और हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुँचाने का दोषी ठहरा रही है। भाजपा ने एक ट्वीट में कहा है कि जहाँगीरपुरी का बदला लेने के लिए अलवर के राजगढ़ में गहलोत सरकार ने शिव मंदिर ध्वस्त कर दिया।

                                                   राजस्थान भाजपा ने ट्वीट कर दी जानकारी

हिंदू मंदिर के अलावे राजगढ़ के अधिकारियों ने मास्टरप्लान का हवाला देते हुए ‘सड़क चौड़ीकरण’ अभियान में 85 से अधिक हिंदू परिवारों के घरों को ध्वस्त कर दिया। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार राजगढ़ नगरीय मास्टरप्लान के नाम पर नगर पालिका प्रशासन और अफसरों ने 85 दुकान-मकानों के साथ सौ से ज्यादा परिवारों की जिंदगी भी ध्वस्त कर दी। ये परिवार भूखे मरने के हालात में आ गए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, नगर पालिका ईओ और एसडीएम का तर्क था कि मौके पर 60 फीट ही रोड है। जहाँ कम है, वहाँ मास्टरप्लान जितना चौड़ा करने को निर्माण तोड़े गए। नगर पालिका का यह तर्क हालाँकि दमदार नहीं है क्योंकि उसने खुद जो गौरव पथ बनाया है, उसमें भी औसत चौड़ाई 45 फीट नहीं है।

जिन स्थानीय लोगों के घरों और दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया है, उन सभी के पास उनकी संपत्तियों के वैध दस्तावेज थे। इसके बावजूद नगर पालिका ने इनके मकानों को गिरा दिया है। पत्रिका की एक रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में 17 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान में अब तक पुराने मंदिरों सहित 150 से अधिक घरों और दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया है।