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सूर्या को चाकू घोंपने वाला असद एनकाउंटर में ढेर, बकरीद के दिन किया था हिंदू युवक का मर्डर: UP पुलिस ने बताई मुठभेड़ की इनसाइड स्टोरी

            सूर्या (सबसे दाएँ) को असद (सबसे बाएँ) ने घोंपा था चाकू (फोटो साभार: आज तक/UP Police)
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के सूर्या चौहान हत्याकांड में मुख्य आरोपित असद को पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया है। दरअसल, बकरीद के दिन 17 साल के सूर्या चौहान पर असद और उसके साथियों ने चाकू से हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल सूर्या की बाद में अस्पताल में मौत हो गई थी।

पुलिस के अनुसार, इस मामले में पाँच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। तीन आरोपितों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था, जबकि मुख्य आरोपित असद फरार चल रहा था। उस पर 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था।

DCP धवल जायसवाल ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि असद अपने कुछ साथियों से मिलने खोड़ा इलाके में आने वाला है। सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की। इसी दौरान असद और उसका एक साथी बाइक पर आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी।

पुलिस ने बताई एनकाउंटर की इनसाइड स्टोरी

पुलिस को सूचना मिली कि असद अपने एक साथी से मिलने खोड़ा इलाके में आने वाला है। बताया गया कि वह कुछ पैसे लेकर इलाके से बाहर भागने की फिराक में था। सूचना मिलते ही पुलिस ने पूरे क्षेत्र में कॉम्बिंग अभियान शुरू किया और कई जगह बैरियर लगाकर सघन चेकिंग शुरू कर दी।

इसी दौरान वसुंधरा क्षेत्र में पुलिस टीम को एक बाइक पर दो संदिग्ध युवक आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया लेकिन आरोप है कि मुख्य आरोपित असद ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। मुठभेड़ में असद गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया।

पुलिस ने घायल असद को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुँचाया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस गोलीबारी में खोड़ा थाना क्षेत्र में तैनात एक कॉन्स्टेबल भी घायल हुआ है जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। वहीं, असद का एक साथी मौके से फरार हो गया जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

मौके से पुलिस ने एक पिस्तौल और बाइक बरामद की है। अधिकारियों का कहना है कि असद के आपराधिक इतिहास की भी जाँच की जा रही है। साथ ही, बरामद हथियार की फोरेंसिक जाँच कराई जाएगी और पूरे मुठभेड़ मामले की नियमानुसार जाँच भी की जा रही है। सूर्या चौहान हत्याकांड के मुख्य आरोपित के मारे जाने के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है और पुलिस अब फरार साथी की गिरफ्तारी में जुटी है।

सड़कों पर की कुर्बानी तो सीधे FIR, उत्तर प्रदेश-बंगाल के बाद अब दिल्ली में बकरीद के लिए जारी सख्त गाइडलाइंस: गाय-बछड़ा-ऊँट काटने पर बैन


उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में बकरीद पर कुर्बानी के नियमों के बाद अब दिल्ली में भी कुर्बानी के नियमों को लेकर गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं। दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने शुक्रवार (22 मई 2026) को X पर एक पोस्ट में लिखा, “बकरीद पर गौवंश, गाय, बछड़ा, ऊँट व अन्य प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी पूरी तरह गैरकानूनी है और ऐसा करने वालों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा।”

सरकार को प्रतिबंधित जानवरों की बिक्री पर ही रोक लगा देनी चाहिए ताकि जब प्रतिबंधित जानवर बिका ही नहीं फिर कोई इनकी कुर्बानी नहीं दे पायेगा और कानूनी कार्यवाही से बच जाएगा। वरना वही बात होगी सिगरेट और शराब पर लिखा होता है "सेहत के लिए नुकसानदायक" लेकिन धरल्ले से बिक रही है। क्योकि जितनी आय सरकार को इन उत्पादनों से होती है किसी और से नहीं।   

उन्होंने आगे लिखा, “सार्वजनिक स्थलों गली, सड़कों पर कुर्बानी की अनुमति नहीं है, ऐसा करने वालों पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कुर्बानी के बाद सीवर व नाली या सार्वजनिक स्थलों पर वेस्ट को डालना पूरी तरह प्रतिबंधित है , कुर्बानी सिर्फ वैध स्थलों पर ही की जा सकती है।”

साथ ही, कपिल मिश्रा ने साफ कर दिया है कि अगर कहीं पर इन गाइडलाइंस का उल्लंघन होता है तो लोग पुलिस व दिल्ली सरकार के विकास मंत्रालय को सूचित कर सकते हैं।

बंगाल : ‘मुसलमानो, गायों की कुर्बानी मत देना’ : भाजपा आने के बाद नखोदा मस्जिद के इमाम ने बकरीद से पहले की अपील, कहा- पहले अलग थी बात, अब बदल गई है सरकार

                          बकरीद से पहले मौलाना की अपील (फोटो साभार- डेली हिंदी, नवभारत टाइम्स और किसान तक)
बंगाल में पशु वध अधिनियम को लेकर हुई सख्ती के बाद नखोदा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी ने मुसलमानों से अपील की है कि बकरीद पर गायों की कुर्बानी न दी जाए।

इमाम की इस अपील साफ शब्दों में बता रही है कि बंगाल में ममता के राज में किस तरह गौ हत्या करना आम बात थी। लेकिन सरकार बदलते ही अब तेवर बदलने शुरू हो गए हैं। इस अपील से यह भी जाहिर होता है कि किस तरह ममता के राज में सनातन का खुलेआम क़त्ल हो रहा है। अब देखना यह है कि खुले में किसी भैसे, बैल या ऊंट की कुर्बानी दे जाएगी या नहीं।   

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने जो पशु वध को लेकर नए नियम जारी किए हैं उसके बाद गाय की कुर्बानी देना व्यावहारिक रूप से मुश्किल हो गया है। ऐसे में मुस्लिम समुदाय के लोग गाय की नहीं बल्कि बकरियों की कुर्बानी को प्राथमिकता दें।

मौलाना कासमी ने मुस्लिम समुदाय के लोगों को समझाया कि पहले की सरकार की बात अलग थी इस सरकार की बात अलग है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 से लागू है, लेकिन मौजूदा सरकार इसे पहले की तुलना में अधिक सख्ती से लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने मुसलमानों को छूट तो दी, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकाला।

कासमी ने सरकार के लिए भी अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि सरकार यदि पशु वध के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं करा सकती, तो उसे गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देशभर में गोवध और गोमांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा देना चाहिए। उन्होंने माँग की कि हर इलाके में आधुनिक बूचड़खाने बनाए जाएँ और बाजारों में पशु चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में पशु वध को लेकर नई अधिसूचना जारी की है। इसके तहत बिना सरकारी स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के किसी भी पशु के वध पर रोक लगा दी गई है। अधिकारियों को प्रमाण पत्र जारी करने से पहले पशुओं की उम्र और उनकी शारीरिक स्थिति की जांच करनी होगी।

मुगल काल में हिंदुओं से उठवाए जाते थे गोवंश के अवशेष, अब बकरीद पर नहीं करेंगे ‘बड़े’ पशुओं की ‘कुर्बानी’ की सफाई : शाहजहाँपुर में हिंदू कर्मचारियों की माँग, पत्र लेकर DM के पास पहुँचे

                                  शाहजहाँपुर नगर निगम (फोटो साभार - अमृत विचार)
उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले में हिंदू सफाई कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि वो बकरीद के दौरान ‘बड़े पशुओं’ की कुर्बानी के अवशेषों को नहीं उठाएँगे। सफाई कर्मचारियों ने इसे लेकर जिलाधिकारी को पत्र भी लिखा है। पत्र में नगर निगम और नगर पंचायतों में कार्यरत हिंदू सफाई कर्मचारियों ने इस बार कुर्बानी के पशुओं के अवशेषों की सफाई कार्य में भाग नहीं लेने की बात कही है। उनका कहना है कि मुगलिया दौर से चल रहा ये काम उनकी धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं के खिलाफ है और अब वह इस परंपरा को आगे नहीं बढ़ाना चाहते।

मुगलिया दौर बीता तो उस दौर की व्यवस्था भी हो खत्म

सफाई कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री प्रदीप कुमार बाल्मीकि ने कहा कि जिस समुदाय द्वारा कुर्बानी की जाती है, उसी समुदाय के लोगों को उस कचरे और बचे हुए अवशेषों की सफाई करनी चाहिए। उनके अनुसार यह एक मजहबी उत्सव है, जिसमें वों हिस्सा नहीं लेना चाहते, क्योंकि यह उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाता है।

उनके अनुसार मुगल काल से यह कार्य हिंदू समुदाय के लोग करते आए हैं, लेकिन अब वे इसे अपनी धार्मिक आस्था के खिलाफ मानते है और इसी कारण से वो अब यह कार्य नहीं करना चाहते है। उनका कहना है कि 80% कर्मचारी हिंदू ऐसे कामों को नहीं करना चाहते है।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उन पर ये काम करने का दबाव डाला गया, तो वे सामूहिक रूप से हड़ताल पर चले जाएँगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। बाल्मीकि समाज ने यह भी कहा है कि मुगल काल से लेकर अब तक यह काम हमेशा से ही हिंदू सफाई कर्मचारियों द्वारा किया जाता रहा है, लेकिन अब देश आजाद हो चुका है उन्हें भी अपने धर्म और आस्था के साथ जीने का संवैधानिक अधिकार है।

कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें कुर्बानी के अवशेषों की सफाई के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गंदगी और बदबू की वजह से उन्हें अक्सर उल्टियाँ, सिर दर्द और मानसिक तनाव जैसी समस्याएँ होती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्य सफाई कर्मचारियों के लिए एक प्रकार की मानसिक प्रताड़ना बन जाता है। जो न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि उनके आत्म-सम्मान को भी ठेस पहुँचाता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी और नगर निगम अधिकारी कर्मचारियों से बातचीत कर रहे हैं। प्रशासन स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

महाराष्ट्र : ‘हिंदुओं की माँ $^&#, गणेश को देख उलटी आती है’: मीरा रोड की सोसायटी के हिन्दुओं ने गाली बकने वाले वजूद पर दर्ज कराई FIR, बकरीद पर किया था बवाल

                            मुंबई के मीरा रोड इलाके में पूरे हिन्दू समाज को माँ की गाली देने वाले वजूद पर FIR
मुंबई के मीरा रोड इलाके की एक सोसायटी में बकरों की कुर्बानी को लेकर 16 जून (रविवार) को मुस्लिम पक्ष के कुछ लोगों का सोसायटी में रहने वाले हिन्दुओं से विवाद हो गया था। उस समय वजूद नाम के आरोपित ने पूरे हिन्दू समाज को माँ की गाली देते हुए भगवान गणेश तक के खिलाफ अपशब्द बोले थे। 17 जून (सोमवार) को इस मामले की शिकायत पुलिस स्टेशन में की गई थी। अब पुलिस ने आरोपित वजूद के खिलाफ FIR 
दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला मीरा रोड इलाके के काशीगाँव थानाक्षेत्र का है। यहाँ पुलिस ने हिल गैलेक्सी में रहने वाले वजूद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295 ए और 153 ए के तहत FIR दर्ज किया है। वजूद पर “हिन्दुओं की माँ ** देंगे” जैसे शब्द बोल कर उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप है। यह गालियाँ उसने तब दी थीं जब बकरीद के मौके पर हिन्दुओं ने सोसायटी के अंदर बकरे की कुर्बानी का विरोध किया था। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुँच कर हालत को संभाला था।

                                                                  FIR कॉपी

पुलिस ने सोसायटी के अंदर पशुओं को ले कर कोई नियम न बने होने का हवाला देकर वजूद को बकरियाँ रखने की अनुमति दे दी थी। FIR कॉपी में बताया गया है कि मुस्लिमों द्वारा हिन्दुओं को धमकी दी गई थी। उन्होंने कहा था, “हम सोसायटी में ही बकरों की कुर्बानी देंगे। चाहे कुछ भी हो जाए। जो भी कर सको कर लो।” इसी विवाद के दौरान भगवान गणेश का भी अपमान किया था। वजूद ने कहा, “जब तुम लोग गणेश उत्सव मनाते हो तब हम कुछ कहते हैं ? जब हम तुम्हारे भगवान गणेश को देखते हैं तो हमें गुस्सा और उल्टी आती है। हम भी देखेंगे कि तुम यहाँ अपना गणेश उत्सव कैसे मनाते हो।”

                                                                   शिकायत कॉपी

तब ऑपइंडिया से बात करते हुए हिन्दुओं ने सोसायटी को मुस्लिम बहुल बताया था। उन्होंने ये भी जानकारी दी थी कि मकान खरीदने से पहले उन्हें जिम और क्लब के लिए जो जगह बताई गई थी बाद में बिल्डर की तरफ से वहाँ मस्जिद बना दी गई थी। सोसायटी आर आर बिल्डर्स द्वारा बनाई गई है। इसके मालिक रसूल, इरफ़ान, जुनैद और जब्बार शेख हैं। बकरों की कुर्बानी सोसायटी के अंदर करने पर अड़े वजूद को समझाने के लिए जब बिल्डर को बुलवाया गया तो उन्होंने शहर से बाहर होने की दलील दी थी। सोसायटी के सिख समुदाय के भी कई लोग खुद को मुस्लिमों द्वारा प्रताड़ित बताते हैं।

हैदराबाद : ट्रक में गोवंश, मुस्लिम भीड़… फिर भी नहीं डरीं हिंदू शेरनी: माधवी लता ने मैथिली और सुनीता को किया सम्मानित, कहा- नारी शक्ति जिंदाबाद

विरोध करती हिन्दू महिलाएँ (बाएँ) और उन्हें सम्मानित करती माधवी लता (चित्र साभार: @Kompella_MLatha/X & @KreatelyMedia/X)
हैदराबाद में गोवंश ले जा रहे ट्रक को रोकने वाली दो हिन्दू गौरक्षक महिलाओं को भाजपा नेता माधवी लता ने सम्मानित किया है। दोनों महिलाओं ने बकरीद से पहले एक ट्रक में भर कर ले जाए जा रहे गोवंश को बीच सड़क रोक लिया था। दोनों महिलाओं ने इस दौरान मुस्लिम भीड़ का सामना किया था।

जानकारी के अनुसार, बकरीद से एक दिन पहले 16 जून, 2024 को हैदराबाद के मलकापेट में एक वाहन में भर कर गोवंश ले जाए जा रहे थे। इसकी जानकारी जब इन दोनों गौरक्षक महिलाओं को हुई तो उन्होंने इसका विरोध किया। यह महिलाएँ इस ट्रक को रोक कर बैठ गईं और गोवंश ले जाने का विरोध करने लगीं।

इनमें से एक महिला ट्रक के बोनट पर चढ़ गई और उसे आगे बढ़ने देने से इनकार कर दिया। इस दौरान इन महिलाओं को मुस्लिमों की बड़ी भीड़ ने घेर लिया और महिला गौरक्षकों से बदसलूकी भी की। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

वायरल वीडियो में दिखता है कि महिला ट्रक के बोनट पर बैठी है और उसे कई टोपी लगाए लोगों ने घेर रखा है। इस बीच उसके बैठे होने के बावजूद एक बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति गाड़ी आगे बढाने को कहता है, जिसका यह महिला विरोध करती है। एक दो मुस्लिम उसे ट्रक से खींचने का भी प्रयास करते हैं।

बाद में इस घटनास्थल पर पुलिस आई और महिलाओं को अपने साथ ले गई। इन दोनों महिलाओं का नाम भी सामने आया है। गोवंश को बचाने के लिए प्रयास करने वाली महिलाओं के नाम श्रीवनिता मैथिली और सुनीता हैं।

भाजपा नेता और लोकसभा चुनाव 2024 में प्रत्याशी बनाई गईं माधवी लता ने इस घटना की सूचना होने के बाद दोनों को सम्मानित किया है। उन्होंने इसका एक वीडियो भी साझा किया है। माधवी लता ने बताया है कि इन महिलाओं ने पूरे जीवन भर गायों को बचाने का संकल्प लिया है।

झारखंड : राजधानी राँची में बकरीद पर खुलेआम गोवंश को काटा, देख रहीं थी औरतें-बच्चे: Video वायरल, अमानुल्लाह और हकीम खान फरार

गौहत्या का वायरल वीडियो (चित्र साभार: Yourbabulal/X)
झारखंड की राजधानी राँची में बकरीद पर एक गोवंश की कुर्बानी के लिए हत्या कर दी गई। गोवंश को सार्वजनिक स्थान पर काटा गया, इसका एक वीडियो भी वायरल हो गया है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच चालू कर दी है और दो लोगों की तलाश कर रही है।

जानकारी के अनुसार, राँची शहर के रमजान कॉलोनी थाना क्षेत्र में सोमवार (17 जून, 2024) को यह घटना हुई। यहाँ कुछ लोगों ने एक गोवंश की खुले मैदान में हत्या कर दी। यह हत्या बकरीद में क़ुरबानी के लिए की गई। पास में मौजूद एक व्यक्ति ने इस घटना का वीडियो बना लिया।

यह वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो में कुछ लोग एक जानवर को जमीन पर डालते दिखते हैं। आसपास में भी कई लोग खड़े हैं जिनमें महिलाएँ और बच्चे भी हैं। वीडियो में कुछ लोग टोपी लगाए हुए भी दिखते हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद राँची में इस पर बवाल हो गया और कार्रवाई की माँग की गई। गोवंश काटने के संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और इसे काटने वाले दो लोगों की पहचान भी कर ली गई है। पुलिस इन दोनों की तलाश में छापेमारी कर रही है।

राँची शहर के डिप्टी एसपी केवी रमन ने इस मामले में ऑपइंडिया को बताया कि सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुँची थी। यहाँ से उसे मांस बरामद हुआ है जिसे जाँच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। उन्होंने बताया है कि प्रारम्भिक जाँच में मामला गौवंश की हत्या का बनता है।

केवी रमन ने ऑपइंडिया को बताया कि इस मामले में गौवंश की हत्या में शामिल मोहम्मद अमानुल्लाह और हकीम खान की पहचान कर ली गई है। यह दोनों राँची के रहने वाले हैं। यह घटना के बाद मौके से फरार हो गए थे। इनकी तलाश में कई टीमें लगाई गई हैं और लगातार छापेमारी की जा रही है।

उन्होंने यह भी बताया है कि मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जाँच हो रही है, यदि किसी और का नाम आता है तो उसे भी जोड़ा जाएगा। गौरलतब है कि झारखंड में 2005 से ही गौवध निषेध क़ानून लागू है। इसके अंतर्गत गौवंश की हत्या गैर जमानती अपराध है और इसके लिए 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है।

इस मामले को लेकर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने झामुमो-कॉन्ग्रेस सरकार को घेरा है। बाबूलाल मरांडी ने इस घटना का वीडियो साझा करते हुए लिखा, “पाकुड़ के बाद आज राजधानी रांची के बीचोबीच स्थित पीस रोड वाले इलाके में खुलेआम गौहत्या कर दी गई। झामुमो-कॉन्ग्रेस द्वारा किया जा रहा मुस्लिम तुष्टिकरण बेहद खतरनाक संकेत है। घुसपैठियों को राजनीतिक प्रश्रय देकर बंगाल जैसी भयावह स्थिति उत्पन्न करने की कोशिश हो रही है।”

पाकुड़ में भी गौवंश काटने का आरोप

इससे पहले बकरीद के ही पाकुड़ के गोपीनाथपुर थाना क्षेत्र में गौवंश काटने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया था। ग्रामीणों के इस क़ुरबानी का विरोध करने पर उन पर हमला कर दिया गया था। उनके घरों पर पत्थरबाजी और बम चलाए गए थे। कई लोगों को मारा पीटा भी गया था।