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राँची में सोरेन सरकार की कँटीली तारें भी नहीं आईं काम, बैरिकेड फाँदकर विधानसभा के पास पहुँचे 15000+ छात्र: झारखंड में वाटरकैनन पर नाचे प्रदर्शनकारी

आखिरी बैरिकेड तोड़कर दीवार तक पहुँचे हजारों छात्र, वाटर कैनन के बीच नाचते दिखे प्रदर्शनकारी (फोटो साभार: हिंदुस्तान, एक्स)
इंडी गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि छात्रों की बाकी मांगें मान लेंगे, लेकिन CBI जांच नहीं होगी। जांच हमारी सरकार और CID ही करेगी।
अब जरा सोचिए...
जिस सरकार पर ही छात्रों और विपक्ष की तरफ से नौकरी में गड़बड़ी और पैसे लेकर नौकरी बेचने जैसे गंभीर आरोप लग रहे हैं, अगर वही सरकार अपनी एजेंसी से अपनी ही सरकार के खिलाफ जांच करवाएगी तो क्या सच सामने आएगा?
आरोप है कि झारखंड में नौकरियों की मंडी लगी हुई है और दलालों के जरिए दूसरे राज्यों से पैसे वाले लोगों को लाकर क्लास-1, क्लास-2 और क्लास-3 की नौकरियां बेचने का खेल चल रहा है।
अगर ये आरोप झूठे हैं तो फिर CBI जांच से डर कैसा?
ईमानदारी है तो CBI को जांच करने दीजिए।
क्योंकि सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं है...
सवाल ये है कि जांच आरोपी की पसंद की एजेंसी करेगी या सच की?
झारखंड की राजधानी राँची में JPSC, JSSC समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्रों का आंदोलन सोमवार (10 अगस्त 2026) को उग्र रूप लेता दिखाई दिया। हजारों की संख्या में छात्र नई विधानसभा के घेराव के लिए सड़कों पर उतरे और बैरिकेड्स को पार करते हुए विधानसभा परिसर की दीवार तक पहुँच गए। छात्र आंदोलन के बीच JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खांग्याते को CID ने गिरफ्तार कर लिया गया है। परीक्षा धांधली के मामले में छापेमारी के दौरान इन्होंने इस्तीफा दिया था।

प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन पानी की बौछार के बावजूद छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। कुछ प्रदर्शनकारी खेतों के रास्ते भी विधानसभा की दीवार तक पहुँच गए। पुलिस और छात्रों के बीच कई जगहों पर गतिरोध की स्थिति बनी रही।

हजारों छात्रों ने तोड़े बैरिकेड, वाटर कैनन के बावजूद नहीं रुका मार्च

छात्र सुबह पुरानी विधानसभा से नई विधानसभा की ओर विधानसभा घेराव के लिए निकले थे। पूरे झारखंड से पहुँचे अभ्यर्थियों के कारण मार्च में बड़ी संख्या में भीड़ जुटी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 15 हजार से अधिक छात्र मार्च में शामिल हो चुके थे और दूसरे छात्र भी लगातार राँची पहुँच रहे थे।

प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिरंगा था और आंदोलन में किसी राजनीतिक दल या संगठन का झंडा-बैनर नहीं दिखाई दिया। छात्रों ने आगे बढ़ते हुए पहले बैरिकेड को पार किया, फिर तीसरे और चौथे बैरिकेड को भी तोड़ दिया। जगन्नाथपुर मंदिर के पास चौथा बैरिकेड पार करने के बाद प्रदर्शनकारी नई विधानसभा से करीब 500 मीटर की दूरी तक पहुँच गए।

इसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन चलाया। वाटर कैनन से पानी की तेज बौछार के बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ। कुछ छात्र पानी की बौछार के बीच नाचते नजर आए। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने आखिरी बैरिकेड भी पार कर लिया और कुछ छात्र खेतों के रास्ते विधानसभा की दीवार तक पहुँच गए।

पुलिस लगातार छात्रों से आगे नहीं बढ़ने की अपील करती रही, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी माँगों पर अड़े रहे। इस दौरान छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी आंदोलन में शामिल रहे। पिछले नौ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे महतो पहले एंबुलेंस से मार्च में पहुँचे और बाद में छात्रों ने उन्हें अपने कंधों पर उठा लिया। उनके हाथ में शिबू सोरेन की तस्वीर भी थी।

17वें दिन भी आंदोलन जारी, वार्ता बेनतीजा रहने के बाद विधानसभा मार्च

JPSC और JSSC की नियुक्ति परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों के आंदोलन का सोमवार को 17वाँ दिन है। इससे पहले रविवार को छात्रों और सरकार के प्रतिनिधिमंडल के बीच तीसरे दौर की बातचीत हुई, लेकिन इसमें भी छात्रों की प्रमुख माँगों पर सहमति नहीं बन सकी।

इसके बाद छात्रों ने विधानसभा घेराव का ऐलान किया और बड़ी संख्या में अभ्यर्थी राँची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जुटे। छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा था कि पुलिस प्रशासन जहाँ भी उन्हें रोकेगा, छात्र वहीं बैठ जाएँगे और उनका आंदोलन सांकेतिक है। उनका कहना था कि छात्र अपनी माँगों पर कायम हैं और सरकार के फैसले से वे संतुष्ट नहीं हैं।

CGL परीक्षा रद्द करने और CBI जाँच की माँग

छात्रों और सरकार के बीच सबसे बड़ा विवाद JSSC CGL परीक्षा को लेकर है। प्रदर्शनकारी इस परीक्षा को रद्द करने के साथ-साथ पूरी अनियमितता की जाँच CBI से कराने की माँग कर रहे हैं। छात्रों की माँगों में परीक्षा रद्द करना, उसके बाद जाँच कराना और परीक्षा प्रणाली में जरूरी सुधार करना शामिल है।

उनका कहना है कि जब तक CGL परीक्षा रद्द नहीं की जाती और CBI जाँच के आदेश नहीं दिए जाते, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

वहीं सरकार CBI जाँच की माँग पर सहमत नहीं हुई है। सरकार की ओर से रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक जाँच कराने की बात कही गई है। साथ ही वित्तीय अनियमितता सामने आने पर प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से जाँच कराने का विकल्प भी रखा गया है।

विधानसभा के 750 मीटर दायरे में धारा 163, पेंटबॉल गन को लेकर भी चर्चा

छात्रों के विधानसभा घेराव के मद्देनजर राँची प्रशासन ने नई विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेडिंग की और कंटीले तार लगाए। वाटर कैनन भी तैनात किए गए थे।

इसके बावजूद छात्रों ने एक के बाद एक बैरिकेड पार किए और विधानसभा की ओर बढ़ते रहे। प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आने के बाद पुलिस के पास कथित पैलेट गन होने की चर्चा भी हुई। हालाँकि राँची के सिटी एसपी पारस राणा ने स्पष्ट किया कि ये पैलेट गन नहीं, बल्कि पेंटबॉल गन हैं।

पेंटबॉल गन आम तौर पर एक खेल में इस्तेमाल होती है, जिसमें संपीड़ित हवा की मदद से रंग से भरी छोटी गेंदें चलाई जाती हैं। गेंद किसी व्यक्ति या सतह से टकराकर फटती है और उस पर रंग छोड़ देती है। प्रदर्शन के संदर्भ में ऐसी गन का इस्तेमाल कथित तौर पर उपद्रव करने वालों की पहचान करने के लिए किया जा सकता है।

क्योंकि उनके कपड़ों पर लगा रंग बाद में पहचान में मदद कर सकता है। कुछ पेंटबॉल सिस्टम में पेपर बॉल का इस्तेमाल भी संभव है, जिसमें मिर्च जैसी सामग्री भरी जा सकती है। पेंटबॉल गन को पैलेट गन से अलग बताया गया है। पैलेट गन में धातु के छर्रे इस्तेमाल होते हैं, जो शरीर को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं और आंखों के लिए खतरनाक हो सकते हैं।

इसके विपरीत पेंटबॉल गन में आम तौर पर नरम जेलाटिन की रंगीन गेंदें इस्तेमाल होती हैं, जो टकराने पर फटकर रंग छोड़ती हैं और सामान्य परिस्थितियों में उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को गंभीर रूप से घायल करना नहीं, बल्कि निशान छोड़ना होता है।

फिलहाल रांची में छात्रों का मार्च पुलिस बैरिकेडिंग और वाटर कैनन के बीच विधानसभा की दीवार तक पहुँच चुका है और छात्र फिलहाल पीछे हटने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं।

राँची के RSS के दफ्तर पर देर रात पेट्रोल बम से अटैक, बम फेंकने का CCTV फुटेज आया सामने

                                  देर रात RSS के दफ्तर पर बम फेंकते दिखे लोग (फोटो साभार: X/@ANI)
पेट्रोल के दाम बढ़ने पर शोर मचाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय पर पेट्रोल बम फेंकने वालों से पूछो 'क्या पेट्रोल 50 रूपए सस्ता हो गया है?' जो पेट्रोल बम फेंके जा रहे हैं।  
झारखंड की राजधानी राँची में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला किया गया है। निवारणपुर स्थित संघ कार्यालय पर मंगलवार (16 जून 2026) देर रात दो अज्ञात युवकों ने पेट्रोल बम फेंका। हालाँकि, दोनों बोतलें कार्यालय परिसर के अंदर नहीं पहुँच सकीं जिससे बड़ा हादसा टल गया। यह घटना रात करीब 12:36 बजे की बताई जा रही है।

घटना की जानकारी बुधवार सुबह उस समय हुई जब स्वयंसेवक कार्यालय परिसर में पहुँचे। परिसर के बाहर संदिग्ध बोतलें मिलने पर CCTV फुटेज की जाँच की गई और उसमें दो युवक पेट्रोल बम फेंकते हुए दिखाई दिए। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई।

पुलिस की प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि हमलावरों ने चिली सॉस की काँच की बोतलों में पेट्रोल भरकर उन्हें पेट्रोल बम की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की। पहला बम फेंके जाने के दौरान उसमें लगी जलती हुई सुतली जमीन पर ही गिर गई, जिससे वह प्रभावी नहीं हो सका। दूसरा बम भी कार्यालय की बाउंड्री पार नहीं कर पाया और बाहर ही गिर गया। इस कारण कार्यालय को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुँचा है।

घटना के समय कार्यालय परिसर में प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा, प्रांत सह व्यवस्था प्रमुख आनंद तुलस्यान, प्रांत कार्यालय प्रमुख नरसिंह सिंह समेत कई स्वयंसेवक, विद्यार्थी और कर्मचारी मौजूद थे। घटना की जानकारी मिलते ही केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी तथा भाजपा के कई नेता और कार्यकर्ता कार्यालय पहुँचे।

बाबूलाल मरांडी ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हमलावर किसी वाहन से आए थे और घटना की गहन जाँच की जानी चाहिए। वहीं रांची पुलिस ने कहा है कि मामले की जाँच के लिए एफएसएल समेत कई टीमों को लगाया गया है। CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही घटना में शामिल लोगों को पकड़ लिया जाएगा।

झारखण्ड : हिन्दू बंटा तो कटा, हिन्दू एक हुआ झुक गया प्रशासन ;‘RIMS में नहीं होगी सरस्वती पूजा, जाकर हॉस्टल में मनाओ’: झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कानून-व्यवस्था का दिया था हवाला, विरोध के बाद फैसला वापस


झारखंड के राँची में स्थित राजेन्द्र इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (RIMS) में सरस्वती पूजा के आयोजन पर रोक लगा दी गई। कई दशकों से होते आ रहे इस आयोजन को रद्द करने को कहा गया। छात्रों को सभी तैयारियाँ बंद करने और चंदे का पैसा वापस करने का आदेश RIMS प्रशासन ने जारी किया। RIMS के ही एक बड़े डॉक्टर समेत बाकी लोगों ने जब मामला उठाया तो RIMS को पीछे हटना पड़ा और उसने अनुमति दी।

RIMS में हर साल सरस्वती पूजा का आयोजन छात्र मिल कर करते हैं। यह आयोजन MBBS के दूसरे वर्ष के छात्र करते हैं। इस बार की सरस्वती पूजा आयोजन के लिए छात्रों ने लाखों का चंदा इकट्ठा करके सारे इंतजाम कर लिए थे। लगभग 70% काम हो चुका था। कई वेंडरों को भी पैसा दिया जा चुका था। हालाँकि, इसी बीच RIMS प्रशासन ने सरस्वती पूजा पर प्रतिबन्ध लगा दिया।

RIMS की डीन शशिबाला सिंह ने शनिवार (25 जनवरी, 2025) को एक आदेश जारी करके पूजा को निरस्त करने को कहा। इस आदेश में RIMS में मारपीट की एक घटना का हवाला दिया गया। यह घटना शुक्रवार (24 जनवरी, 2025) को घटी थी जिसमें छात्र और कुछ बाहरी लोग आपस में भिड गए थे। RIMS प्रशासन के इस आदेश पर छात्रों ने नाराजगी जताई।

RIMS में न्यूरो सर्जन डॉक्टर विकास कुमार ने भी इस आदेश को लेकर आवाज उठाई। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर RIMS प्रशासन को निशाने पर लिया। डॉक्टर विकास ने कहा, “लगता है रिम्स में बैठे बड़े पद वालो से RIMS संभल नहीं रहा है और अपनी कमी को छुपाने के लिए इस देश की सांस्कृतिक परंपराओं पर सीधा आघात किया जा रहा है, जो हर दृष्टि से निंदनीय है।”

सोशल मीडिया पर इसको लेकर भाजपा ने भी सरकार को निशाने पर लिया। भाजपा झारखंड के मुखिया बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी की साम्प्रदायिक सोच के चलते यह रोक लगी है। उन्होंने इसे धार्मिक विभाजन को बढ़ावा देने वाला बताया।

वहीं स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी ने इसे बाद दावा किया कि रोक कानून व्यवस्था को देखते हुए लगाई गई है। उन्होंने कहा कि छात्र हॉस्टल में ही सरस्वती पूजा मनाएँगे। मंत्री अंसारी ने आरोप लगाया कि बाबूलाल मरांडी भाईचारे को तोड़ रहे हैं। हालाँकि, सोशल मीडिया पर काफी विरोध के बाद RIMS ने रोक का फैसला वापस ले लिया।

इसकी जानकारी डॉक्टर विकास कुमार ने दी। विकास कुमार ने लिखा, “सरस्वती पूजा की परमिशन मिल गई है ,प्रबंधन ने अपनी रोक को वापस ले लिया है। इस छात्रों में खुशी की लहर है।”

2022 में रांची में हुए दंगों के दौरान 2 मुस्लिम पुलिस फायरिंग में मारे गए थे। इरफ़ान अंसारी ने इन्हें शहीद का दर्जा, 50 लाख रुपए का मुआवजा और उसके परिजनों को सरकारी नौकरी देने की माँग की थी। 

बिहार से मिले घातक हथियार, उत्तर प्रदेश में गन बनाने की ट्रेनिंग, राजस्थान में फायरिंग: अलकायदा आतंकियों के नेटवर्क में MBBS डॉक्टर भी

                                   इस्लामी आतंकियों की प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: फर्स्टपोस्ट)
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, एनआईए और कई राज्यों की एटीएस ने अलकायदा इंडियन सब कॉन्टिनेन्ट (AQIS) के मॉड्यूल का पर्दाफाश किया था। उसका मुखिया राँची के अस्पताल में काम करने वाला डॉक्टर इश्तियाक निकला है। इश्तियाक ने इस मॉड्यूल के लिए खतरनाक हथियार बिहार के लखीसराय लिए थे। वह पाकिस्तान में ट्रेंड आंतकी टंडवा निवासी फरार आतंकी अबू सूफियान के संपर्क में था। 

NIA एवं अन्य टीमों ने इस मामले में राजस्थान के भिवाड़ी से 6 आतंकियों को ट्रेनिंग करते हुए पकड़ा था। इसके अलावा झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से 8 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया था। एक आतंकवादी की गिरफ्तारी यूपी से की गई है। अब तक इस मॉड्यूल के 16 आतंकी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनसे पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

आतंकियों का सेफ जोन बुलंदशहर

पूछताछ में एजेंसियों को पता चला कि आतंकियों कोे दूसरे चरण का प्रशिक्षण लेने के लिए भिवाड़ी भेजा गया था। ये सभी किराए के कमरे ले रखे थे और वहाँ से करीब 5 किलोमीटर दूर पहाड़ों में उन्हें फायरिंग का अभ्यास करना था। यह भी पता चला है कि ट्रेनिंग लेने वाले संदिग्ध आतंकी कुछ वर्ष पहले दिल्ली में भी रुके थे। तब डॉक्टर इश्तियाक के मॉड्यूल से इनका संपर्क नहीं हुआ था।
पूछताछ में संदिग्ध आतंकियों ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में भी ट्रेनिंग लेने का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि बुलंदशहर आतंकियों का सेफ हाउस जैसा है। वहाँ पर उन्हें फिटनेस, कॉम्बेट फाइट के साथ हथियार बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था। वहाँ से वे राँची गए और फिर भिवाड़ी पहुँचे। संदिग्धों ने दिल्ली रूट से भिवाड़ी आने की बात कबूली है।

बिहार से मिले हथियार

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, संदिग्ध आतंकियों ने बताया है कि भिवाड़ी पहुँचने के बाद वहाँ उन्हें कुछ मददगार भी मिले। इन मददगारों ने आतंकियों के लिए लेबर कॉलोनी में किराए के कमरे का इंतजाम किया था। इनके लिए दो कमरे 10 अगस्त 2024 को ही बुक हो चुके थे। अब एजेंसियाँ इन सब की जानकारी जुटा रही है। इसके साथ ही हथियारों की सप्लाई करने वालों का भी पता लगा रही है।
भिवाड़ी में रेड के दौरान एजेंसियों ने संदिग्ध आतंकियों के साथ-साथ हथियार भी बरामद किए थे। ये हथियार उन्हें बिहार के लखीसराय से मिले थे। डॉक्टर इश्तियाक ने ये हथियार खरीदे थे। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जब भिवाड़ी इलाके में छापा मारा तो संदिग्ध आतंकी लोहरदगा निवासी अल्ताफ से यह हथियार बरामद हुए। छापेमारी में मिली एक कार्बाइन 40 हजार रुपए में खरीदी गई थी।

चतरा का फरार आतंकी सूफियान से संपर्क

यह भी पता चला है कि डॉक्टर ​इश्तियाक का झारखंड के चतरा जिले के टंडवा निवासी फरार आतंकी अबू सूफियान से संपर्क था। सूफियान ने पाक अधिकृत क​श्मीर के कैंपों में ट्रेनिंग ली है। उसी ने इश्तियाक को अलकायदा का झारखंड मॉड्यूल खड़ा करने वाले ओडिशा निवासी आतंकी अब्दुल रहमान कटकी से मिलवाया था। अबू सूफियान अभी तक पकड़ा नहीं गया है, जबकि आतंकी कटकी पकड़ा चुका है।
जाँच एजेंसियों को पता चला है कि आतंकी अबू सूफियान साल 2016 से ही सक्रिय है। इसके बावजूद वह अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है। कहा जाता है कि ट्रेनिंग के बाद वह पाकिस्तान में है। यह भी कहा जाता है कि वह भारत में कहीं अंडरग्राउंड होकर काम कर रहा है। वह AQIS का टॉप नेता है। बंगाल और केरल की तर्ज पर ही अलकायदा झारखंड मॉड्यूल खड़ा करना चाह रहा था।

डॉक्टर इश्तियाक ने की थी खिलाफत की तैयारी

अलकायदा इंडियन सब कॉन्टिनेन्ट (AQIS) के इस मॉड्यूल का नेतृत्व डॉक्टर इश्तियाक कर रहा था। उसने इस मॉड्यूल का विस्तार राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक कर लिया था। डॉ. इश्तियाक राँची के प्रतिष्ठित मेडिका अस्पताल में सेवा दे रहा था। हालाँकि एटीएस की कार्रवाई के बाद 22 अगस्त को ही मेडिका के मैनेजमेंट ने डॉ. इश्तियाक अहमद को टर्मिनेट कर दिया।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल से मिले इनपुट पर झारखंड एटीएस ने रांची के बरियातू जोड़ा तालाब के अल हसन रेसीडेंसी में दबिश देकर डॉक्टर इश्तियाक को गिरफ्तार किया, इसके बाद उसके लैपटॉप और मोबाइल फोन की जाँच की। जाँच में कई संदिग्ध चीजें मिलने के बाद एटीएस उसे गुप्त ठिकाने पर ले गई, जहाँ पूछताछ कर यूपी, राजस्थान समेत अन्य शहरों में गतिविधि की जानकारी उससे जुटाई गई।
भिवाड़ी में मौके से पुलिस ने एके 47 राइफल, प्वाइंट 38 बोर की रिवाल्वर और छह जिंदा कारतूस , .32 बोर की 30 जिंदा कारतूस, एके 47 की 30 कारतूस, डमी इंसास, एयर राइफल, आयरन एल्बो पाइप, हैंड ग्रेनेड समेत अन्य चीजें जब्त की हैं। खास बात ये है कि राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किए गए 6 आतंकी भी झारखंड के ही निकले हैं।

डॉ इश्तियाक के बारे में जानिए

  • डॉक्टर इश्तियाक पेशे से रेडियोलॉजिस्ट है, जिसने राँची के RIMS से मेडिकल की पढ़ाई की
  • मेडिका अस्पताल में 3 साल तक फुल टाइम कर चुका है काम
  • बीते 3 साल से पार्ट टाइम दे रहा था मेडिका अस्पताल में सेवा
  • हजारीबाग में भी क्लीनिक चलाता है इश्तियाक
  • भारत को इस्लामिक देश बनाने की कर रहा था कोशिश

झारखंड से इन आतंकियों की गिरफ्तारी

झारखंड एटीएस की टीम ने 22 अगस्त 2024 लोहरदगा में कुडू के हेंजला कौवाखाप गाँव अल्ताफ उर्फ इल्ताफ की तलाश में पहुँची थी। उसके घर से दो हथियार और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए। इसके साथ ही राँची के चान्हों इलाके में एटीएस की टीम ने कई जगहों पर दबिश दी। एटीएस ने चान्हों के बलसोकरा के मोहम्मद मोदब्बीर, रिजवान, चटवल के मुफ़्ती रहमतुल्लाह मजहिरी और पिपराटोली के मतिउर रहमान को हिरासत में लिया था।
एटीएस की टीम ने एक साथ चान्हों के बलसोकरा, चटवल, पिपराटोली के अलावा पकरियो गाँव के एनामुल अंसारी, शहबाज अंसारी तथा शहबाज अंसारी के घर में छापेमारी की। छापेमारी के दौरान मोहम्मद मोदब्बिर, मोहम्मद रिजवान, मुफ़्ती व मतीउर रहमान को उनके घर से और मुफ्ती रहमतुल्लाह को एटीएस ने उसके मदरसा से हिरासत में लिया। इस दौरान पकरियो में छापेमारी में एनामुल अंसारी और शहबाज घर में नहीं मिले। परिजनों की ओर से बताया गया कि जेयारत अंसारी का बेटा शहबाज परीक्षा के लिए दिल्ली गया हुआ है, जबकि शहबाज और एनामुल अंसारी तबलीगी जमात में गए हुए हैं।

झारखंड : राजधानी राँची में बकरीद पर खुलेआम गोवंश को काटा, देख रहीं थी औरतें-बच्चे: Video वायरल, अमानुल्लाह और हकीम खान फरार

गौहत्या का वायरल वीडियो (चित्र साभार: Yourbabulal/X)
झारखंड की राजधानी राँची में बकरीद पर एक गोवंश की कुर्बानी के लिए हत्या कर दी गई। गोवंश को सार्वजनिक स्थान पर काटा गया, इसका एक वीडियो भी वायरल हो गया है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच चालू कर दी है और दो लोगों की तलाश कर रही है।

जानकारी के अनुसार, राँची शहर के रमजान कॉलोनी थाना क्षेत्र में सोमवार (17 जून, 2024) को यह घटना हुई। यहाँ कुछ लोगों ने एक गोवंश की खुले मैदान में हत्या कर दी। यह हत्या बकरीद में क़ुरबानी के लिए की गई। पास में मौजूद एक व्यक्ति ने इस घटना का वीडियो बना लिया।

यह वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो में कुछ लोग एक जानवर को जमीन पर डालते दिखते हैं। आसपास में भी कई लोग खड़े हैं जिनमें महिलाएँ और बच्चे भी हैं। वीडियो में कुछ लोग टोपी लगाए हुए भी दिखते हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद राँची में इस पर बवाल हो गया और कार्रवाई की माँग की गई। गोवंश काटने के संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और इसे काटने वाले दो लोगों की पहचान भी कर ली गई है। पुलिस इन दोनों की तलाश में छापेमारी कर रही है।

राँची शहर के डिप्टी एसपी केवी रमन ने इस मामले में ऑपइंडिया को बताया कि सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुँची थी। यहाँ से उसे मांस बरामद हुआ है जिसे जाँच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। उन्होंने बताया है कि प्रारम्भिक जाँच में मामला गौवंश की हत्या का बनता है।

केवी रमन ने ऑपइंडिया को बताया कि इस मामले में गौवंश की हत्या में शामिल मोहम्मद अमानुल्लाह और हकीम खान की पहचान कर ली गई है। यह दोनों राँची के रहने वाले हैं। यह घटना के बाद मौके से फरार हो गए थे। इनकी तलाश में कई टीमें लगाई गई हैं और लगातार छापेमारी की जा रही है।

उन्होंने यह भी बताया है कि मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जाँच हो रही है, यदि किसी और का नाम आता है तो उसे भी जोड़ा जाएगा। गौरलतब है कि झारखंड में 2005 से ही गौवध निषेध क़ानून लागू है। इसके अंतर्गत गौवंश की हत्या गैर जमानती अपराध है और इसके लिए 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है।

इस मामले को लेकर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने झामुमो-कॉन्ग्रेस सरकार को घेरा है। बाबूलाल मरांडी ने इस घटना का वीडियो साझा करते हुए लिखा, “पाकुड़ के बाद आज राजधानी रांची के बीचोबीच स्थित पीस रोड वाले इलाके में खुलेआम गौहत्या कर दी गई। झामुमो-कॉन्ग्रेस द्वारा किया जा रहा मुस्लिम तुष्टिकरण बेहद खतरनाक संकेत है। घुसपैठियों को राजनीतिक प्रश्रय देकर बंगाल जैसी भयावह स्थिति उत्पन्न करने की कोशिश हो रही है।”

पाकुड़ में भी गौवंश काटने का आरोप

इससे पहले बकरीद के ही पाकुड़ के गोपीनाथपुर थाना क्षेत्र में गौवंश काटने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया था। ग्रामीणों के इस क़ुरबानी का विरोध करने पर उन पर हमला कर दिया गया था। उनके घरों पर पत्थरबाजी और बम चलाए गए थे। कई लोगों को मारा पीटा भी गया था।

राष्ट्रमंडल खेल की तरह झारखंड में बड़ा घोटाला, ई-रिक्शा के लिए डीजल का भुगतान, 19 हजार की भोजन की थाली

बिहार के मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव ने चारा घोटाला के दौरान स्कूटर से भैंस और अन्य जानवरों को ढोने का कीर्तिमान रचा था। अब कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा की झारखंड सरकार ने ई रिक्शा और पेट्रोल गाड़ी में डीजल भरवाने का नया रिकॉर्ड कायम किया है। रांची में 27 अक्टूबर से पांच नवंबर 2023 के बीच एशियाई महिला हॉकी चैंपियनशिप का आयोजन किया गया था जिसमें जमकर घोटाला किया गया। इस दौरान बैट्री से संचालित ई रिक्शा में भी डीजल भरने के बिल का भुगतान कर दिया गया। इतना ही नहीं 19 हजार रुपये प्रति प्लेट की थाली गटक गए जो सबसे महंगे होटल के रेट से भी कई गुना ज्यादा है। आयोजन के लिए टेंडर देते समय चहेती एजेंसी को टेंडर देने के लिए तय दरों में हेरफेर कर दी गई। इससे साफ है कि एशियन महिला हॉकी चैम्पियनशिप के दौरान खेल मंत्रालय द्वारा आयोजन में भारी अनियमितता बरती गई और जमकर भ्रष्टाचार हुआ। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इस घोटाले की सीबीआई जांच की मांग है। इंडी अलायंस के दल किस तरह राज्य के संसाधनों को लूट रहे हैं यह उसका ताजा उदाहरण है।

19 हजार रुपये प्रति प्लेट की थाली मंगवाई
बिहार में लालू राज में स्कूटर पर भैंस लाद कर ले जाते थे। अब झारखंड में इंडी अलायंस यानि कांग्रेस, राजद और झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार ने पेट्रोल कार में डीजल भरवाने के बिल का भुगतान कर दिया। इसी तरह बैट्री से चलने वाली ई-रिक्शा में भी डीजल डलवाने के बिल का भुगतान कर किया गया। यही नहीं एशियन महिला हॉकी चैम्पियनशिप के दौरान 19 हजार रुपये प्रति प्लेट की थाली मंगवाई गई। इन सबसे चारा घोटाला की याद ताजा हो आई है। कहीं यह चारा घोटाला वाले पार्टी के साथ सरकार का असर तो नहीं ? इंडी अलायंस की सरकार ने झारखंड को लूटने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है।

खेल निदेशालय ने करोड़ों का घोटाला किया, सीबीआई जांच हो
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि पेट्रोल कारों और बैटरी से चलने वाले ई-रिक्शा के बिलों को डीजल खर्च के तौर पर दिखाया गया और इसके साथ ही भोजन की कीमत 19,000 रुपये प्रति प्लेट थी, जो सबसे महंगे होटलों की दरों से भी कहीं अधिक है। उन्होंने विशिष्ट एजेंसियों के पक्ष में निविदा प्रक्रियाओं में हेरफेर किए जाने का भी आरोप लगाया। मरांडी ने कहा कि कोयला, बालू-पत्थर, युवाओं की नौकरी लूटते-लूटते राज्य की गठबंधन सरकार ने अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन को भी भ्रष्टाचार में झोंक दिया। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आग्रह है कि मुख्यमंत्री चंपई सोरेन इस मामले में संज्ञान में लेकर शीघ्र कारवाई करें और इसकी सीबीआई जांच की अविलंब अनुशंसा करें।

ई-रिक्शा और पेट्रोल कार के लिए डीजल का भुगतान
एशियन महिला हॉकी चैम्पियनशिप के दौरान खेल मंत्रालय द्वारा आयोजन में भारी अनियमितता बरती गई। ई रिक्शा और पेट्रोल कार में डीजल भरवाने के नाम पर भुगतान कर दिया गया। इसके अलावा भोजन प्रति प्लेट 19 हजार रुपये का मंगवाया गया।

मंत्री के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिएः निशिकांत दुबे
गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि पर्यटन, खेलकूद और युवा मामलों के मंत्री हफीजुल हसन के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। निशिकांत दुबे ने अखबार में छपी एक खबर के हवाले से रांची में साल 2023 में आयोजित हुए एशियन महिला हॉकी चैंपियनशिप मामले में ‘घोटाला’ होने की आशंका जाहिर की है। इस मामले में हफीजुल हसन पर तंज कसते हुए उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाया है। सोशल मीडिया एक्स पर निशिकांत ने हफीजुल हसन को निशाने पर लेते कहा है कि ‘अब तेरा क्या होगा रे कालिया? चुनाव के समय तो मेरा FD करवा रहा था। अच्छे पिता का घटिया पुत्र। अब तो होटवार की तैयारी कर लेनी चाहिए। वैसे भी ये केले का पेड़ है क्योंकि केले का पेड़ दोबारा फल नहीं देता, यानि ये दुबारा विधायक नहीं बनेगा। ईडी के डायरेक्टर को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।’

32 करोड़ से अधिक का जो कैश स्कूटी से ढोए
झारखंड प्रदेश कितनी तरक्की कर चुका है इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि लोकसभा चुनाव के दौरान झारखंड में ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम के आप्त सचिव (PS) संजीव लाल के कारिंदे शाहजहां के घर से 32 करोड़ से अधिक का जो कैश बरामद हुआ, उसे भी ठिकाने तक लाने में स्कूटी का ही इस्तेमाल हुआ है। यानी 32 करोड़ की राशि स्कूटर पर ही ढोई गई। ईडी की पूछताछ में शाहजहां ने 32 करोड़ रुपए स्कूटी से ढोने और ठिकाने तक लाने की जानकारी देकर सबको चौंका दिया है। उसने बताया है कि किसी के शक से बचने के लिए उसने साधारण झोलों में भर कर नोट स्कूटी से ढोए। उसने कहां-कहां से नोट कलेक्ट किए, इस बारे में भी ईडी को जानकारी दी है।

राँची : ‘जिन्होंने बदला धर्म उनको ST से बाहर करो’: अब दिल्ली आने को तैयार हैं जनजातीय समाज के लोग, क्रिसमस से पहले हुआ था जुटान

डी लिस्टिंग की मांग को लेकर राँची में जुटे जनजातीय समाज के लोग (फोटो साभार: टीओआई)
डी लिस्टिंग यानी धर्मांतरण कर ईसाई अथवा मुस्लिम बनने वाले जनजातीय समाज के लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) के दायरे से बाहर करने को लेकर देशव्यापी आंदोलन चल रहा है। फरवरी 2024 में जनजातीय समाज के लोग अपनी माँगों के समर्थन में दिल्ली में जुट सकते हैं। क्रिसमस से ठीक पहले 24 दिसंबर 2023 को झारखंड की राजधानी राँची में जुटान कर वह अपना इरादा जता चुके हैं।

अनुसूचित जनजाति के लोगों का यह अभियान जनजाति सुरक्षा मंच (JSM) के बैनर तले चल रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इस अभियान को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अन्य हिंदुवादी संगठनों का भी समर्थन हासिल है। इसी रिपोर्ट में देशभर के जनजातीय समाज के लोगों का दिल्ली में फरवरी में जुटान होने की बात कही गई है। हालाँकि इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है।

जनजातीय समाज के लोगों का कहना है कि धर्मांतरण करने वाले लोग ST का लाभ उठाकर उनके अधिकार को छीन रहे हैं। उनके अनुसार ईसाई बनने वाले ST बीते 75 साल से अनुसूचित जनजाति को मिलने वाले आरक्षण लाभ का 80 फीसदी फायदा उठा रहे हैं। जेएसएम का कहना है कि ईसाइयों अथवा मुस्लिमों का एसटी आरक्षण पर अधिकार नहीं हैं। लेकिन वे जनजातीय समाज के लोगों को मिले संवैधानिक अधिकारों का अतिक्रमण कर रहे हैं।

इन्हीं माँगों के समर्थन में जनजातीय समाज के करीब 5000 लोगों का जुटान क्रिसमस से ठीक पहले 24 दिसंबर 2023 को राँची के मोरहाबादी मैदान में हुआ। उलगुलान आदिवासी डीलिस्टिंग नमक इस महारैली का आयोजन JSM की ओर से किया गया था। झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से आए अनुसूचित जनजाति समाज के लोगों ने पारंपरिक पोशाकों और तीर-धनुष जैसे पारंपरिक हथियारों के साथ इस रैली में शिरकत की थी।

जनजातीय समाज के लोगों की डी-लिस्टिंग की डिमांड नई नहीं है। मुंडा ने बताया कि राँची की तरह ही नागपुर, नासिक, मुंबई जैसे कई जगहों पर इन्हीं माँगों को लेकर जनजातीय समाज के लोगों का जुटान हो चुका है। वहीं जेएसएम के राष्ट्रीय सह संयोजक राजकिशोर हांसदा ने कहा कि भारतीय संविधान के निर्माताओं ने देश के 700 से अधिक जनजातीय समूहों के अधिकारों की रक्षा के लिए बेहतरीन कोशिशें की थीं, लेकिन ये फायदा मुट्ठी भर उनलोगों को मिल रहा है जो धर्म बदल चुके हैं। जिन्हें चर्च का समर्थन हासिल है।