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क्या अमेरिका इस्लामीकरण की ओर बढ़ रहा है? हमास का समर्थन, अल-कायदा का ‘बचाव’… कौन हैं DSA के चुनाव में ममदानी के समर्थन से जीतने वालीं ‘हिजाबन’ अबर कवास और दारियालिजा?

                          अबर कवास, जोहरान ममदानी और डारियालिजा अवीला शेवेलियर (बाएँ से दाएँ)

दुनिया के किसी भी कोने में चले जाओ मुस्लिम आतंकवाद का विरोध करने की बजाए victim card खेलने से पीछे नहीं। जबकि आतंकवाद कितने बेगुनाहों की जान ले रहा है वो नही दिखता। अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले से जो मीडिया यह बता रहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का उनके ही देश में विरोध हो रहा। जबकि हकीकत यह है कि जिस तरह Surgical Air Strike, Operation Sindoor आदि के समय भारतीय विपक्ष  पाकिस्तान की बोली बोल रहा था और मीडिया विपक्ष को प्रमुखता दे रहा था, ठीक उसी तरह अमेरिका में मुस्लिम कट्टरपंथी ट्रम्प के विरुद्ध बोल रहे थे। जिसे मीडिया ने नहीं बताया,  इस मसले पर ट्रम्प का "मीडिया को बिकाऊ" कहना बिलकुल सही है। वैसे भारतीय मीडिया की भी लगभग यही हालत है। "जहां दिखे तवा परात वहीं बिसाई सारी रात।" मीडिया को बस चिंता है अपनी TRP की। 

अमेरिका में इस साल नवंबर में होने वाले जनरल इलेक्शन में अपना उम्मीदवार खड़ा करने के लिए हर पार्टी अपने आंतरिक चुनाव कराती है, जिसे देश में प्राइमरी चुनाव (Primary Election) कहा जाता है। डेमोक्रेटिक पार्टी (DSA) के भीतर भी प्राइमरी चुनाव हुआ और 23 जून 2026 को नतीजे सामने आए। इन नतीजों में चर्चा न्यूयॉर्क से चुने मुस्लिम प्रतिनिधि अबर कवास (Aber Kawas) और दारियालिजा एविला शेवेलियर (Darializa Avila Chevalier) की हो रही है। इन ‘हिजाबन’ को न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी का समर्थन मिला है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी जोहरान ममदानी के समर्थन से जीते नेताओं पर प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने इस पर मीडिया को घेरते हुए कहा, “मेयर ममदानी ने 3 पक्के वामपंथियों को चुनाव जितवा दिया और इसके लिए बिकाऊ मीडिया (Fake News Media) उनकी जमकर तारीफ कर रहा है। मेयर साहब को बधाई! कल रात मैंने 16-0 का रिकॉर्ड बनाया (यानी जिन 16 लोगों का मैंने समर्थन किया, वे सब जीत गए) और शानदार अमेरिकी देशभक्तों को चुनाव जिताने में मदद की, लेकिन मीडिया ने इस पर एक शब्द भी नहीं बोला।”

उन्होंने अपनी तारीफ में आगे लिखा, “पिछले दो सालों में, मेरे समर्थन से लोगों को प्राइमरी चुनाव में 259 जीत मिली हैं, और लगभग कोई हार नहीं हुई, फिर भी मीडिया इस पर बिल्कुल ध्यान नहीं देता!!! बिकाऊ मीडिया।”

डोनाल्ड ट्रंप जो कह रहे हैं, वह सच है। चर्चा तो हो रही है जोहरान ममदानी का समर्थन मिलने वाले जीते हुए नेताओं की। खासकर अबर कवास और दारियालिजा एविला शेवेलियर की। जहाँ पश्चिमी मीडिया इन नेताओं की जीत पर बड़े-बड़े लेख लिख रही है, वहीं सोशल मीडिया पर इनके पुराने बयान और इनकी पहचान काफी चर्चा में चल रहे हैं। सोशल मीडिया पर अमेरिकी इन दोनों मुस्लिम नेताओं के मुस्लिम-प्रोपेगेंडा, हमास का समर्थन और अमेरिकियों के लिए घृणा वाली सोच को सामने ला रहे हैं।

कौन हैं अबर कवास?

अबर कवास खुद को फिलिस्तीन का निवासी बताती हैं। उनका दावा है कि उनके अम्मी-अब्बा फिलिस्तीन से माइग्रेट होकर अमेरिका आए थे। कवास के अनुसार, उनका जन्म भी न्यूयॉर्क के ब्रूकलिन में ही हुआ है। कवास ने सिटी कॉलेज ऑफ न्यूयॉर्क से ‘इंटरनेशनल स्टडीज’ की पढ़ाई की है। इससे अलग कवास ने अपनी पहचान अमेरिका में सख्त प्रवासन नीतियों और देश में मुस्लिम-विरोधी रवैये के पीड़ित के रूप में बनाई है।

वो दावा करती है कि जब वह किशोरावस्था में थीं, तब उनके पिता को अमेरिका की इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) ने हिरासत में ले लिया और देश से डिपोर्ट कर दिया था। अपनी चुनावी अभियान की वेबसाइट में भी उन्होंने यह जानकारी लिखी है।

इसी पहचान के साथ कवास न्यूयॉर्क के डिस्ट्रिक्ट 12 क्विन्य सीट से डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी चुनाव में 58.3 प्रतिशत वोट हासिल कर जीत दर्ज की। कवास ने असेंबली मेंबर स्टीवन रागा को 20 प्रतिशत वोटों के बड़े अंतर से हराया। इस जीत के साथ अब वे नवंबर में होने वाले आम चुनाव में उम्मीदवार बन सकती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि इस जीत के साथ अबर कवास ने इतिहास रचा है क्योंकि वे न्यूयॉर्क सीनेट के लिए चुनी जाने वाली पहली फिलिस्तीनी मुस्लिम महिला बन गई हैं।

फिलिस्तीन और मुस्लिम-पीड़ित का रोना रोने वाली अबर कवास का बैकग्राउंड निकला ‘आपराधिक’

कवास ने बेशक फिलिस्तीन और अमेरिका में मुस्लिम पीड़ित की रोना रोकर चुनाव लड़ा हो, लेकिन असलियत कुछ और है। मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर चल रही खबरों में सामने आया कि उनके द्वारा गढ़ी गई इमिग्रेशन के कारण परिवार को डिपोर्ट करने वाली कहानी झूठी है। कवास के परिवार को इसीलिए डिपोर्ट किया गया क्योंकि उनके अब्बा ‘अब्दुलकरीम कवास’ एक दोषी अपराधी थे।
अमेरिकी की एक कोर्ट में इसके सबूत भी हैं, जिसे न्यूयॉर्क पोस्ट ने कवर भी किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अबर कवास के अब्बा अब्दुलकरीम कवास जॉर्डन के नागरिक थे, जो 1989 में टूरिस्ट वीजा पर अमेरिका आए थे और कभी वापस नहीं गए। यहाँ अब्दुलकरीम का जघन्य अपराधों में नाम सामने आया। 1995 में उन्हें वर्जीनिया की रिचमंड सिटी सर्किट कोर्ट में झूठी गवाही का दोषी पाया गया और इसके 10 साल बाद न्यू जर्सी में प्रॉपर्टी चोरी के आरोप में दोषी पाने के बाद अगस्त 2006 में तीन साल की जेल तक हुई थी।
इसी बीच उनका इमिग्रेशन का मामला भी अदालतों में चलता रहा। एक फेडरल इमिग्रेशन जज ने शुरू में उन्हें 2004 की सुनवाई में उपस्थित न होने पर देश से निकालने का आदेश दिया था। इसके बाद देश में जॉर्ज बुश (George W. Bush) की सरकार के दौरान उन्हें जॉर्डन डिपोर्ट कर दिया गया था। लेकिन अबर कवास अपने चुनावी अभियान के दौरान लगातार ट्रंप प्रशासन की सख्त इमेग्रेशन नीतियों पर इसका ठीकरा फोड़ती रही हैं।

9/11 आतंकी हमलों पर अबर कवास का अमेरिकी-विरोधी बयान

यही नहीं, अबर कवास की सोच भी अमेरिकी-विरोधी है। यह तब और ज्यादा मुखर होकर सामने आया जब अबर कवास ने अमेरिकी के काले पन्नों में दर्ज 9/11 आतंकी हमले पर अपना पक्ष रखा। कवास ने इस आतंकी हमले का जिम्मेदार अमेरिकियों को ही ठहरा दिया और अलकायदा का बचाव किया। कवास के बयान की वीडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
इस क्लिप में अबर कवास कहती हैं, “पूँजीवाद, नस्लवाद, गोरों को दूसरों से श्रेष्ठ समझना और इस्लामोफोबिया- इन सब चीजों का इस्तेमाल हमेशा से दूसरों की जमीनों पर कब्जा करने और उनके संसाधनों को छीनने के लिए किया गया है। यह बहुत लंबे समय से चला आ रहा है और 9/11 का हमला भी इसी पुरानी सोच और सिलसिले का ही एक हिस्सा था।
कवास आगे कहती हैं, “यह सोचना कि हमें (मुस्लिमों को) एक ऐसे आतंकवादी हमले के लिए माफी माँगनी चाहिए जो सिर्फ चंद लोगों ने किया था जबकि इतिहास में हुए बड़े-बड़े नरसंहारों और गुलामी की प्रथा के लिए कभी किसी ने माफी नहीं माँगी और न ही कोई मुआवजा दिया, यह बात मुझे बहुत गलत और घिनौनी लगती है।”
जिस 9/11 आतंकी हमले की अबर कवास यहाँ बात कर रही हैं, वह आतंकी संगठन अलकायदा ने अंजाम दिया था। इस हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन था। उसके नेतृत्व में 11 सितंबर 2001 को अलकायदा के 19 आतंकियों ने अमेरिका के 4 विमानों को हाइजैक किया और उन्हें आत्मघाती बम की तरह इस्तेमाल किया था। इस पूरे हमले में 2,977 मासूम लोगों ने जानें गवाई थीं, जिनमें 90 प्रतिशत अमेरिकन थे।

कौन हैं डारियालिजा अवीला शेवेलियर?

डारियालिजा अवीला शेवेलियर ने भी अपनी पहचान प्रवासी नागरिक के तौर पर मजबूत की है। उनकी चुनावी अभियान की वेबसाइट के अनुसार, वह खुद को अप्रवासन की सख्त नीतियों का पीड़ित होने का दावा करती हैं। उनका डोमिनिकन परिवार है जो फ्लोरिडा से अमेरिका माइग्रेट हुआ था। शेवेलियर बताती हैं कि वह गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं जहाँ उनके अब्बा ट्रक ड्राइवर और अम्मी एक केस वर्कर हैं, जिसने अपने बचपन का ज्यादा समय वेनेजुएला में अपनी दादा के साथ बिताया है।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मिडिल ईस्टर्न, साउथ एशियन और अफ्रीकन स्टडीज में ग्रेजुएशन पूरी की है और फिलहाल सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क (CUNY Graduate Center) से सोशियोलॉजी में पीएचडी की डिग्री पूरी कर रही हैं। कॉलेज के समय से ही शेवेलियर कट्टर वामपंथी आंदोलनों का हिस्सा रही हैं, इस दौरान वह हिजाब भी पहना करती थीं लेकिन प्राइमरी चुनाव में अभियान के दौरान उनका हिजाब गायब दिखा।
शेवेलियर ने फिलिस्तीन समर्थित, ब्लैक लाइव्स मैटर और खासकर अप्रवासन नीतियों के खिलाफ अभियानों का हिस्सा रहकर अपनी पहचान बनाई। इसी पहचान के साथ शेवेलियर ने प्राइमरी चुनाव में 13वें डिस्ट्रिक्ट सीट से जीत हासिल की है। उन्होंने 5 बार के मौजूदा और बेहद शक्तिशाली सांसद एड्रियानो एस्पेलियाट (Adriano Espaillat) को 2,326 वोटो के अंतर से चुनाव में मात दी है।

शेवेलियर के अमेरिकी-विरोधी और प्रो-हमास होने पर सोशल मीडिया पर आलोचना

शेवेलियर को चुनाव में जोहरान ममदानी का समर्थन मिला। इसके बावजूद भी सोशल मीडिया पर अमेरिकन शेवेलियर के खिलाफ बोल रहे हैं, लोग उनके इस्लामी हित और अमेरिकी-विरोधी बयानों और विवादित बैकग्राउंड पर बात कर रहे हैं। यह भी सामने आया है कि शेवेलियर ने अपना इस्लाम में धर्म परिवर्तन कर लिया है। इसके अलावा लोग उनके डोमिनिकन मूल से होने पर भी सवाल उठा रहे हैं, लोगों का कहना हैं कि वह हैतीयन (Haitian) मूल की हैं।
शेवेलियर की सोशल मीडिया हिस्ट्री खंगालकर अमेरिकी बता रहे हैं कि वह अमेरिकन झंडे का इस्तेमाल नैपकिन की तरह करती हैं। इसके अलावा 07 अक्टूबर 2025 को ठीक एक दिन बाद, उन्होंने इजरायली नागरिकों की हत्या का जश्न मनाने वाली एक रैली में भी हिस्सा लिया था। उनके अमेरिकी-विरोधी होने का भी राज खोलते हुए कहा कि वह गोरी महिलाओं को ‘बदसूरत उपनिवेशवादी’ बताती हैं।
इतना ही नहीं अमेरिकन ने बताया कि शेवेलियर कह चुकी हैं कि अपराधियों सहित किसी भी व्यक्ति का निर्वासन (देश से निकालना) उचित नहीं है। वह पुलिस से नफरत करती हैं और उन्हें ‘सूअर’ कहती हैं, अमेरिकी सैनिकों को युद्ध अपराधी बताती हैं और कहती हैं कि अमेरिका एक शर्मनाक देश है। वह सिर्फ़ न्यूयॉर्क से चुनाव लड़ रही हैं क्योंकि उन्हें पता है कि फ्लोरिडा में उनके जीतने की कोई संभावना नहीं है।”
ऐसा ही उनका एक पुराना वीडियो भी सामने आया, जिसमें शेवेलियर कहती दिख रही हैं कि अगर वह कॉन्ग्रेस में पहुँचती हैं तो ‘इंशाल्लाह’ यह पक्का करना चाहेंगी कि ‘सत्ता के गलियारों’ में उनके मुस्लिम मजहब की झलक दिखे।

निष्कर्ष: न्यूयॉर्क में जोहरान ममदानी ने अपने जैसे दो को बनाया अगला प्रतिनिधि

शेवेलियर और कवास के बैकग्राउंड को देखते हुए लगता है कि यह भी जोहरान ममदानी की राह पर ही हैं। इन्होंने भी न्यूयॉर्क में मुस्लिम-पीड़ित पहचान, हमास को समर्थन और अमेरिकी नीतियों की आलोचना करके ही चुनाव जीता है। लगता है कि न्यूयॉर्क को कई जोहरान मिल गए हैं और इनका प्राइमरी चुनाव जीतने यही अंदेशा है कि ऐसे अमेरिकी विरोधी नेता आम चुनाव भी आसानी से जीत जाएँगे, क्योंकि न्यूयॉर्क पहले से ही सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी का गढ़ रहा है।
हालाँकि इससे यह सवाल जरूर खड़ा होता है कि क्या न्यूयॉर्क में सचमुच लोग ट्रंप प्रशासन की नीतियों से परेशान हैं या फिर शहर में मुस्लिमों की आबादी बढ़ रही है। वैसे भी आए दिन सोशल मीडिया पर वीडियोज सामने आते रहते हैं कि जिसमें न्यूयॉर्क की सड़कों पर मुहर्रम के शोक हो रहे हैं, टाइम्स स्क्वायर से अजान की आवाजें आती हैं और इसी न्यूयॉर्क में बैठकर जोहरान ममदानी और उसके जैसे नेता अमेरिका के विरोध में बयान देते हैं और आतंकियों के मरने पर शोक मनाते हैं। क्या ऐसे नेताओं को सत्ता में लाकर अमेरिका इस्लामीकरण की ओर है?

ISIS-अलकायदा आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, 12 गिरफ्तार : लादेन की देखते थे वीडियो, गेमिंग ऐप से करते थे आका से संपर्क, पाकिस्तान जाने का था प्लान

                                           आतंकरोधी अभियान के तहत पकड़े गए 12 आतंकी
देश के विभिन्न राज्यों में चलाए गए एक बड़े आतंकरोधी अभियान के तहत सुरक्षा एजेंसियों ने ISIS-अलकायदा से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। जानकारी सामने आई है कि आंध्र प्रदेश और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में हुए अंतर-राज्यीय ऑपरेशन में 12 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया।

इन 12 आतंकियों की पहचान मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ (आंध्र प्रदेश), मिर्जा सोहेल बेग (आंध्र प्रदेश), मोहम्मद दानिश (आंध्र प्रदेश), शादमान दिलकुश (बिहार), अजमनुल्लाह खान (बिहार), लकी अहमद (दिल्ली), मीर आसिफ अली (पश्चिम बंगाल), जीशान (राजस्थान), अब्दुल सलाम (कर्नाटक), शाहरुख खान (महाराष्ट्र), शियाक पियाज उर रहमान (महाराष्ट्र) और सईदा बेगम (तेलंगाना) के रूप में हुई है।

                                        साभार : सोशल मीडिया 
पुलिस की छानबीन में इनके संबंध अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) और ISIS से जुड़े सामने आए हैं। जाँच में ये भी पता चला है कि ये आतंकी एक गेमिंग ऐप के जरिए विदेशी हैंडलरों के संपर्क में थे और इनके तार ISIS से संबंध रखने वाले Benex Com नामक एक समूह से भी जुड़े थे।

पुलिस के अनुसार, ये लोग सोशल मीडिया पर भड़काऊ गतिविधियों में शामिल थे। इन्होंने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया, ISIS के झंडे का समर्थन किया और भारत को इस्लामिक स्टेट बनाने की बात कही। आगे इनकी योजना पाकिस्तान जाकर आतंकी प्रशिक्षण लेने की थी और साथ ही अपने साथ अन्य युवाओं को भी जिहाद के लिए प्रेरित करने की थी।

इनमें से तीन- मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ, मोहम्मद दानिश और मोहम्मद सोहेल बेग ने तो ‘अल-मलिक इस्लामिक यूथ’ नाम से ग्रुप भी बनाया था। इसके जरिए ये युवाओं को भड़काने और जिहाद के लिए तैयर करने का काम करते थे।

वहीं अन्य लगातार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए जिहाद से जुड़े प्रचार में सक्रिय थे और ओसामा बिन लादेन के वीडियो देखकर आतंकी-कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा दे रहे थे।

पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जाँच कर रही है और सभी डिजिटल साक्ष्यों व संपर्कों की पड़ताल की जा रही है, ताकि इस आतंकी साजिश के हर पहलू का खुलासा किया जा सके।

बिहार से मिले घातक हथियार, उत्तर प्रदेश में गन बनाने की ट्रेनिंग, राजस्थान में फायरिंग: अलकायदा आतंकियों के नेटवर्क में MBBS डॉक्टर भी

                                   इस्लामी आतंकियों की प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: फर्स्टपोस्ट)
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, एनआईए और कई राज्यों की एटीएस ने अलकायदा इंडियन सब कॉन्टिनेन्ट (AQIS) के मॉड्यूल का पर्दाफाश किया था। उसका मुखिया राँची के अस्पताल में काम करने वाला डॉक्टर इश्तियाक निकला है। इश्तियाक ने इस मॉड्यूल के लिए खतरनाक हथियार बिहार के लखीसराय लिए थे। वह पाकिस्तान में ट्रेंड आंतकी टंडवा निवासी फरार आतंकी अबू सूफियान के संपर्क में था। 

NIA एवं अन्य टीमों ने इस मामले में राजस्थान के भिवाड़ी से 6 आतंकियों को ट्रेनिंग करते हुए पकड़ा था। इसके अलावा झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से 8 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया था। एक आतंकवादी की गिरफ्तारी यूपी से की गई है। अब तक इस मॉड्यूल के 16 आतंकी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनसे पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

आतंकियों का सेफ जोन बुलंदशहर

पूछताछ में एजेंसियों को पता चला कि आतंकियों कोे दूसरे चरण का प्रशिक्षण लेने के लिए भिवाड़ी भेजा गया था। ये सभी किराए के कमरे ले रखे थे और वहाँ से करीब 5 किलोमीटर दूर पहाड़ों में उन्हें फायरिंग का अभ्यास करना था। यह भी पता चला है कि ट्रेनिंग लेने वाले संदिग्ध आतंकी कुछ वर्ष पहले दिल्ली में भी रुके थे। तब डॉक्टर इश्तियाक के मॉड्यूल से इनका संपर्क नहीं हुआ था।
पूछताछ में संदिग्ध आतंकियों ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में भी ट्रेनिंग लेने का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि बुलंदशहर आतंकियों का सेफ हाउस जैसा है। वहाँ पर उन्हें फिटनेस, कॉम्बेट फाइट के साथ हथियार बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था। वहाँ से वे राँची गए और फिर भिवाड़ी पहुँचे। संदिग्धों ने दिल्ली रूट से भिवाड़ी आने की बात कबूली है।

बिहार से मिले हथियार

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, संदिग्ध आतंकियों ने बताया है कि भिवाड़ी पहुँचने के बाद वहाँ उन्हें कुछ मददगार भी मिले। इन मददगारों ने आतंकियों के लिए लेबर कॉलोनी में किराए के कमरे का इंतजाम किया था। इनके लिए दो कमरे 10 अगस्त 2024 को ही बुक हो चुके थे। अब एजेंसियाँ इन सब की जानकारी जुटा रही है। इसके साथ ही हथियारों की सप्लाई करने वालों का भी पता लगा रही है।
भिवाड़ी में रेड के दौरान एजेंसियों ने संदिग्ध आतंकियों के साथ-साथ हथियार भी बरामद किए थे। ये हथियार उन्हें बिहार के लखीसराय से मिले थे। डॉक्टर इश्तियाक ने ये हथियार खरीदे थे। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जब भिवाड़ी इलाके में छापा मारा तो संदिग्ध आतंकी लोहरदगा निवासी अल्ताफ से यह हथियार बरामद हुए। छापेमारी में मिली एक कार्बाइन 40 हजार रुपए में खरीदी गई थी।

चतरा का फरार आतंकी सूफियान से संपर्क

यह भी पता चला है कि डॉक्टर ​इश्तियाक का झारखंड के चतरा जिले के टंडवा निवासी फरार आतंकी अबू सूफियान से संपर्क था। सूफियान ने पाक अधिकृत क​श्मीर के कैंपों में ट्रेनिंग ली है। उसी ने इश्तियाक को अलकायदा का झारखंड मॉड्यूल खड़ा करने वाले ओडिशा निवासी आतंकी अब्दुल रहमान कटकी से मिलवाया था। अबू सूफियान अभी तक पकड़ा नहीं गया है, जबकि आतंकी कटकी पकड़ा चुका है।
जाँच एजेंसियों को पता चला है कि आतंकी अबू सूफियान साल 2016 से ही सक्रिय है। इसके बावजूद वह अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है। कहा जाता है कि ट्रेनिंग के बाद वह पाकिस्तान में है। यह भी कहा जाता है कि वह भारत में कहीं अंडरग्राउंड होकर काम कर रहा है। वह AQIS का टॉप नेता है। बंगाल और केरल की तर्ज पर ही अलकायदा झारखंड मॉड्यूल खड़ा करना चाह रहा था।

डॉक्टर इश्तियाक ने की थी खिलाफत की तैयारी

अलकायदा इंडियन सब कॉन्टिनेन्ट (AQIS) के इस मॉड्यूल का नेतृत्व डॉक्टर इश्तियाक कर रहा था। उसने इस मॉड्यूल का विस्तार राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक कर लिया था। डॉ. इश्तियाक राँची के प्रतिष्ठित मेडिका अस्पताल में सेवा दे रहा था। हालाँकि एटीएस की कार्रवाई के बाद 22 अगस्त को ही मेडिका के मैनेजमेंट ने डॉ. इश्तियाक अहमद को टर्मिनेट कर दिया।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल से मिले इनपुट पर झारखंड एटीएस ने रांची के बरियातू जोड़ा तालाब के अल हसन रेसीडेंसी में दबिश देकर डॉक्टर इश्तियाक को गिरफ्तार किया, इसके बाद उसके लैपटॉप और मोबाइल फोन की जाँच की। जाँच में कई संदिग्ध चीजें मिलने के बाद एटीएस उसे गुप्त ठिकाने पर ले गई, जहाँ पूछताछ कर यूपी, राजस्थान समेत अन्य शहरों में गतिविधि की जानकारी उससे जुटाई गई।
भिवाड़ी में मौके से पुलिस ने एके 47 राइफल, प्वाइंट 38 बोर की रिवाल्वर और छह जिंदा कारतूस , .32 बोर की 30 जिंदा कारतूस, एके 47 की 30 कारतूस, डमी इंसास, एयर राइफल, आयरन एल्बो पाइप, हैंड ग्रेनेड समेत अन्य चीजें जब्त की हैं। खास बात ये है कि राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किए गए 6 आतंकी भी झारखंड के ही निकले हैं।

डॉ इश्तियाक के बारे में जानिए

  • डॉक्टर इश्तियाक पेशे से रेडियोलॉजिस्ट है, जिसने राँची के RIMS से मेडिकल की पढ़ाई की
  • मेडिका अस्पताल में 3 साल तक फुल टाइम कर चुका है काम
  • बीते 3 साल से पार्ट टाइम दे रहा था मेडिका अस्पताल में सेवा
  • हजारीबाग में भी क्लीनिक चलाता है इश्तियाक
  • भारत को इस्लामिक देश बनाने की कर रहा था कोशिश

झारखंड से इन आतंकियों की गिरफ्तारी

झारखंड एटीएस की टीम ने 22 अगस्त 2024 लोहरदगा में कुडू के हेंजला कौवाखाप गाँव अल्ताफ उर्फ इल्ताफ की तलाश में पहुँची थी। उसके घर से दो हथियार और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए। इसके साथ ही राँची के चान्हों इलाके में एटीएस की टीम ने कई जगहों पर दबिश दी। एटीएस ने चान्हों के बलसोकरा के मोहम्मद मोदब्बीर, रिजवान, चटवल के मुफ़्ती रहमतुल्लाह मजहिरी और पिपराटोली के मतिउर रहमान को हिरासत में लिया था।
एटीएस की टीम ने एक साथ चान्हों के बलसोकरा, चटवल, पिपराटोली के अलावा पकरियो गाँव के एनामुल अंसारी, शहबाज अंसारी तथा शहबाज अंसारी के घर में छापेमारी की। छापेमारी के दौरान मोहम्मद मोदब्बिर, मोहम्मद रिजवान, मुफ़्ती व मतीउर रहमान को उनके घर से और मुफ्ती रहमतुल्लाह को एटीएस ने उसके मदरसा से हिरासत में लिया। इस दौरान पकरियो में छापेमारी में एनामुल अंसारी और शहबाज घर में नहीं मिले। परिजनों की ओर से बताया गया कि जेयारत अंसारी का बेटा शहबाज परीक्षा के लिए दिल्ली गया हुआ है, जबकि शहबाज और एनामुल अंसारी तबलीगी जमात में गए हुए हैं।

‘बांग्लादेश के बाद अब भारत की बारी, जल्द दिखेगा असर’: रेजुवान को असम पुलिस ने दबोचा, पूछताछ में कहा – अलकायदा के लिए काम करता हूँ

फेसबुक पर खुद को अलकायदा का आतंकी बता रहे रेजुवान उल्ला मज़रभुइया को असम पुलिस ने दबोचा
बांग्लादेश में चल रही उठापटक के बीच भारत में कई कट्टरपंथी लोगों को भड़काने के की कोशिशों में जुट गए हैं। असम पुलिस ने खुद को अलकायदा का सदस्य बताने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपित का नाम रेजुवान उल्ला मज़रभुइया है। बुधवार (7 अगस्त, 2024) को रेजुवान ने सोशल मीडिया पर लोगों को असम सहित पूरे भारत में बांग्लादेश जैसी हिंसा के लिए उकसाने की कोशिश की थी। गिरफ्तार आरोपित से पूछताछ के बाद शुक्रवार (9 अगस्त, 2024) को उसे अदालत में पेश किया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला असम के हैलाकांडी का है। यहाँ के रेजुवान उल्ला मज़रभुइया ने गुरुवार को फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट किया। उसने लिखा कि बांग्लादेश के बाद अब भारत की बारी है। साथ ही उसने कहा कि बांग्लादेश का असर जल्द ही भारत में भी दिखने वाला है। इसी दौरान एक अन्य फेसबुक यूजर ने रेजवान उल्ला के बारे में जानकारी माँगी। जवाब में रेजुवान ने बताया कि वो भारत में रहता है लेकिन काम अलक़ायदा के लिए करता है।

रेजुवान ने अपने जवाब में कहा कि वो हमेशा खुद को बांग्लादेश के करीब मानता है। यह बातें रेजुवान ने ‘अमादर हैलाकांडी’ नाम के एक ग्रुप में लिखी थीं। इस कमेंट पर हैलाकांडी पुलिस की नजर पड़ी। पुलिस ने जाँच की और रेजुवान को रंगपुर स्थित उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपित को लाला पुलिस स्टेशन ला कर पूछताछ की गई। पूछताछ में रेजुवान ने बताया कि उसके कनेक्शन पाकिस्तान में सक्रिय अलकायदा के आतंकियों से हैं।

                                                               रेजुवान की फेसबुक पोस्ट

हैलाकांडी पुलिस के एडिशनल एसपी क्राइम समीर दप्तर बरुआ ने रेजुवान पर की गई कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि आरोपित ने अपनी फेसबुक प्रोफ़ाइल पर भी बांग्लादेश से जुड़े आपत्तिजनक पोस्ट किए थे। पुलिस को रेजुवान उल्ला मज़रभुइया के खिलाफ सबूत मिले और इसी के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश), 147 (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना) और 196 (शत्रुता को बढ़ावा देना) के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) की धारा 39 के तहत कार्रवाई की गई है।

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बगावत के तेवर दिखा रहा हैलाकांडी का रेजुवान ही ऐसी मानसिकता वाला अकेला व्यक्ति नहीं है। बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों को जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी समूहों द्वारा हाईजैक किए जाने के बाद उन्हीं हरकतों को भारत में भी दोहराने के खतरनाक मंसूबे कई अन्य लोगों ने भी पाल रखे हैं। कई राज्यों में ऐसे लोगों पर पुलिस ने कार्रवाई की है। ऐसी टिप्पणियाँ करने वालों में कॉन्ग्रेस पार्टी के कई नेता भी शामिल हैं। इन नेताओं में सलमान खुर्शीद और मणिशंकर अय्यर भी शामिल हैं।

मुस्लिमों डरो मत, मूर्ति पूजा बंद करने को करो जिहाद ; राम मंदिर को तबाह कर वहीं बनाएँगे मस्जिद: अल-कायदा का ‘गजवा-ए-हिंद’ में ऐलान

                             अल-कायदा के जिहादी पत्रिका में दी राम मंदिर को तबाह करने की धमकी
इस्लामी आतंकी संगठन अल-कायदा (Al-Qaeda) ने फिर से भारत और हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला है। अयोध्या में बन रहे राम मंदिर को तबाह करने की बात कही है। कहा है कि मंदिर को तबाह कर उसी जगह मस्जिद बनाएगा। मूर्ति पूजा खत्म करने और भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने के लिए मुस्लिमों से जिहाद को कहा है।

अल-कायदा की ​जिहादी पत्रिका ‘गजवा-ए-हिंद’ के ताजा अंक में राम मंदिर को लेकर यह नफरत दिखाई गई है। रिपोर्टों के अनुसार 110 पन्नों के संपादकीय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भी आतंकी संगठन ने भड़काऊ बातें की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पत्रिका के ताजा अंक में कहा गया है कि जिस तरह बाबरी मस्जिद के ढाँचे पर राम मंदिर बनाया जा रहा है, उसी तरह अल-कायदा राम मंदिर को तोड़कर उसकी जगह मस्जिद बनाएगा। इसी हफ्ते जारी इस ऑनलाइन मैगजीन में लिखा गया है कि मूर्तियों की जगह अल्लाह के नाम पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया जाएगा। लेकिन इन सब के लिए कुर्बानी देनी होगी।

इस लेख में अल-कायदा ने भारतीय मुस्लिमों से कहा है, “तुम्हें किसी तरह के नुकसान से डरने की जरूरत नहीं है। पहले ही बहुत नुकसान हो चुका है। यदि तुमने पहले ही जिहाद किया होता तो आज इतना नुकसान नही होता। तुम्हारे लिए धर्मनिरपेक्षता जहन्नुम की तरह है। हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की बात एक धोखा है।”

मैगजीन में कहा गया है, “यह सब सिर्फ कहने की बात नहीं है। बाबरी मस्जिद को 30 साल पहले नष्ट कर दिया गया था। गुजरात के अहमदाबाद में 20 साल पहले गर्भवती महिलाओं को उनके बच्चों के साथ जलाया गया और आज हर जगह बुलडोजर चलाए जा रहे हैं। जामिया मिलिया से लेकर अलीगढ़ तक और जामिया उस्मानिया (हैदराबाद) से देवबंद तक हिंदू लोग चाकू, भाले और तलवारें तेज कर रहे हैं।”

अल-कायदा ने कहा है, “सभी हिंदुओं को लाठी चलाने की शिक्षा दी जा रही है। हिंदू महिलाएँ सब्जी काटने वाले चाकुओं से मुसलमानों के चेहरे और सिर काटने की बात कर रही हैं। अल-कायदा एक ऐसा जिहाद चाहता है कि पूरा हिंदुस्तान इस्लामी दुनिया का हिस्सा बन जाए और मूर्ति पूजा बंद हो जाए। हमारा भारत के मुस्लिमों से ला इलाहा इल्लल्लाह का रिश्ता है जो खून और देश के रिश्ते से बढ़कर होता है। यही रिश्ता हमें आपके मोहब्बत में बार-बार आपकी ओर खींचता है।”

लेख में धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक शासन को नकारने की बात की गई है। कहा गया है कि अमेरिका की सरकार मोदी का समर्थन करती है। लेख में जोर देकर कहा गया है कि जब तक पूरा भारत इस्लामिक शासन के अधीन नहीं हो जाता तब तक अन्य सभी उपाय व्यर्थ हैं। मुसलमानों के लिए मूर्ति पूजा करने वालों के शासन में रहना शर्मनाक है। जिहाद की लड़ाई में भारतीय मुसलमानों से समर्थन माँगा गया है। मैगजीन के आखिरी पन्ने पर टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन ने जिहाद को ही सारी समस्याओं का हल बताया है।

‘हिंदुओं को भगाएँ मुस्लिम मुल्क, भारत और भारतीय उत्पादों का करें बहिष्कार’: अलकायदा के ‘वन उम्माह’ में टारगेट पर PM मोदी और नूपुर शर्मा

                       अल-कायदा की पत्रिका 'वन उम्माह' में पैर की मोहर के साथ पीएम मोदी की छपी तस्वीर
आतंकी संगठन अलकायदा (Al Qaeda) ने भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की पैगंबर मोहम्मद से संबंधित की गई टिप्पणी को लेकर एक बार फिर भारत पर निशाना साधा है। ‘वन उम्माह (One Ummah)’ नाम की पत्रिका के पाँचवें अंक में आतंकी संगठन ने सभी मुस्लिम देशों से भारत और भारतीय उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील की है। इसके साथ ही आतंकी संगठन ने अरब देशों में काम करने वाले सभी हिंदुओं को देश से बाहर निकालने की आह्वान किया है।

आतंकी संगठन की आधिकारिक मीडिया शाखा या मुखपत्र ‘अस-सहाब’ ने त्रैमासिक पत्रिका ‘वन उम्माह’ का पाँचवा संस्करण जारी किया है। पत्रिका के एक भाग में भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा गया है। साथ ही पत्रिका ने नूपुर शर्मा के बयान के बहाने मुस्लिमों को भारत के खिलाफ एकजुट होने के लिए कहा गया है। लेख में पीएम मोदी की तस्वीर को अपमानजनक तरीके से पैर की मोहर के साथ छापा गया है।

अलकायदा के लेख में कहा गया है, “भारत की हिंदू सरकार मुस्लिम दुनिया की चुप्पी से उत्साहित थी और इस बार हद पार कर पैगंबर का अपमान कर दिया।” इसके साथ ही आतंकी संगठन ने कश्मीर घाटी में आतंकी हमलों को अंजाम देने में मुस्लिम देशों की मदद भी माँगी है।

                             आतंकवादी संगठन द्वारा प्रकाशित भारत सरकार पर निशाना साधते हुए लेख

पत्रिका में आगे कहा गया है, “हम अपनी नेक उम्माह को इस हिंदू सरकार के खिलाफ एकजुट होने और भारत में हमारे भाइयों और बहनों की मदद करने के लिए आमंत्रित करते हैं, ताकि अल्लाह के दुश्मन हमारे पैगंबर के खिलाफ इस तरह के अपमानजनक अपराध को दोहराने की हिम्मत न कर सकें।”

पत्रिका के अनुसार, “हम सभी मुस्लिमों, विशेष रूप से व्यापारियों को भारतीय उत्पादों का बहिष्कार करने, हिंदू कर्मचारियों को मुस्लिम देशों से बाहर निकालने का आह्वान करते हैं।” पत्रिका में हिंदुओं की तुलना यहूदियों से की गई है और देश में कथित तौर पर मुस्लिमों को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया है।

बकौल ‘वन उम्माह‘, भारतीय शासक वर्ग में हमेशा इस्लाम के प्रति अनादर और घृणा व्यक्त करने की प्रवृत्ति रही है। भारतीय शासक का मुस्लिमों के जबरन विस्थापन, उन्हें सालाखों के पीछे धकेलने, जेलों में यातना देने और मुस्लिम समुदाय को बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित करने का आपराधिक रिकॉर्ड है। पत्रिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिस तरह से यहूदियों ने फिलीस्तीनियों के साथ आपराधिक व्यवहार किया है, उससे भारत अलग नहीं हैं।

इसमें यह भी कहा गया है कि ‘भारत की हिंदू सरकार मुस्लिम देशों की चुप्पी से प्रोत्साहित हुई और पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया’। पत्रिका में मुस्लिम राष्ट्रों को नूपुर शर्मा की कथित टिप्पणी की केवल निंदा करने और भारत के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने के लिए भी फटकार लगाई गई है।

पत्रिका के अनुसार, “इन रीढ़़विहीन सरकारों ने अपमान और अपराध का जवाब केवल खोखली निंदा से दिया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। दूसरी ओर इन देशों ने भारत की हिंदू नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देना जारी रखा हुआ है और उनके साथ व्यापक राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध बनाए भी बनाए हुए हैं।” पत्रिका ने इसके साथ 9/11 में जान गँवाने वाले आतंकवादियों की तस्वीर छापी है और मुस्लिमों से कहा है कि वे इन ‘नायकों’ को कभी न भूलें।

अलकायदा भी पड़ा नूपुर शर्मा के पीछे, ‘ईशनिंदा की सज़ा’ देने के लिए भारत के मुस्लिमों को उकसाया: ख़ुफ़िया एजेंसियों के कान खड़े

                                                                                                                                   प्रतीकात्मक
खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन अलकायदा भी अब नूपुर शर्मा के पीछे पड़ गया है। उसने भारत के मुस्लिमों को उकसाते हुए कहा है कि वो नूपुर शर्मा को ईशनिंदा की सज़ा दें। पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी करने के आरोप लगने के बाद से ही नूपुर शर्मा पर जिहादी ख़तरा बढ़ गया है। अब अलकायदा के इस परिदृश्य में सामने आने के बाद ख़ुफ़िया एजेंसियाँ सतर्क हो गई हैं। अलकायदा ने अपने मुखपत्र के जरिए नूपुर शर्मा को ‘सज़ा’ दिलाने का ऐलान किया है।

जिस तरह नूपुर शर्मा के पीछे अब अल कायदा के भी मैदान में कूदने पर सबसे पहले भाजपा के मुस्लिम (अल्पसंख्यक) प्रकोष्ठ और संघ को अपने राष्ट्रीय मुस्लिम मंच को कट्टरपंथियों के विरुद्ध सड़क पर लाकर जनता को यह समझाना होगा कि "नूपुर ने जो कहा वह हमारी इस्लामिक किताबों में भी लिखा है फिर अपमान किस बात का?" अगर नहीं आते उस स्थिति में भाजपा और संघ को अपने इन प्रकोष्ठों को तुरंत बंद कर देना चाहिए, ताकि जनता इन भ्रमित प्रकोष्ठों से गुमराह न होने पाए। भारत में सोशल मीडिया के अलावा केवल News Nation ऐसा चैनल है जिसने TRP की परवाह न करते हुए "इस्लाम क्या कहता है" शो शुरू किया हुआ है, जिसमें इस्लाम छोड़ चुके मुस्लिम किस तरह मौलवियों और मौलानाओं को बेनकाब कर रहे हैं। मौलानाओं को पसीने पोंछते देखा गया है; कुरान की आयतें ठीक से न पढ़े जाने पर डांटते हुए देखा जाता है। दूसरे, जनता को उन कपटियों से सावधान रहना चाहिए जो टीवी पर 'सर तन से जुदा' को किसी इस्लाम या धर्म के विरुद्ध तो बोलते हैं लेकिन सड़क पर आकर उनके सामाजिक बहिष्कार एवं कानून के हवाले करने की आवाज़ बुलंद नहीं कर सकते। इन लोगों की असलियत को पहचानना होगा। जो परदे के पीछे बैठ देश में अशांति और अराजकता फैलाकर अपनी किसी निजी स्वार्थ को पूरा कर रहे हैं। 

अलकायदा के इस मुखपत्र का नाम ‘नवा-ए-घवा-ए-हिन्द’ है, जिसमें नूपुर शर्मा पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी कर के ईशनिंदा की है। इस पत्रिका के ताज़ा अंक में आतंकी संगठन ने भारतीय मुस्लिमों से कहा है कि वो नूपुर शर्मा से बदला लें। साथ ही मुस्लिमों को उकसाते हुए उन्हें हथियार इकट्ठा करने और इसे चलाना सीखने के लिए भी कहा गया है। अलकायदा ने इसे ‘बचाव वाला जिहाद’ नाम दिया है।

इसके साथ ही भारतीय मुस्लिमों से कहा गया है कि उनके सबसे नजदीक में कश्मीर में जिहाद हो रहा है, जिसमें उन्हें हिस्सा लेना चाहिए। अमेरिका में जिस तरह से इस्लामी कट्टरपंथियों ने लेखक सलमान रुश्दी को निशाना बनाया, उसके बाद से अब नूपुर शर्मा की सुरक्षा को लेकर ख़ुफ़िया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। इससे पहले जून में अलकायदा ने नूपुर शर्मा से बदला लेने के लिए आत्मघाती हमलों का ऐलान किया था।

उस समय अलकायदा ने भड़काते हुए लिखा था कि अगर मुस्लिमों ने पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी का बदला नहीं लिया तो उनका बुरा हाल होगा। ‘अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS)’ का मुखिया असीम उमर उत्तर प्रदेश के संभल का रहने वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने भी नूपुर शर्मा पर खतरे को देखते हुए उन पर दर्ज सारे FIR को दिल्ली ट्रांसफर करने का फैसला सुनाया। पड़ोस में अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अलकायदा ने अपना गढ़ बना रखा है, जिस कारण भारत के लिए वो एक खतरा बना हुआ है।