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महागठबंधन में दरार: लालू-तेजस्वी को आंखें दिखाने लगी कांग्रेस, RJD से नहीं मिले कांग्रेस नेता

जब राहुल गाँधी सिर्फ मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में तेजस्वी के साथ अपना रोड शो कर रहे थे तभी इसी ब्लॉग पर लिखा था कि तेजस्वी ने अपनी जमीन और अपने ही कार्यकर्ताओं को लेकर राहुल को खुला मैदान देने से अपने ही पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मार ली है। दूसरे यह कि जब तक INDI गठबंधन राहुल को सिरमौर बनाकर रखेगा कांग्रेस के साथ-साथ अपना भी नुकसान करते रहेंगे। क्योकि जितना राहुल ही नहीं गाँधी परिवार बोलेगा बीजेपी को कोई नहीं हरा सकता।   
बिहार में विधानसभा चुनाव के ऐलान के बाद महागठबंधन में सीट और टिकटों के लेकर घमासान मच गया है। आरजेडी चीफ लालू यादव की कार की घेराबंधी कर डाली तो राबड़ी के आवास के बाहर नाराज कार्यकर्ताओं का अखाड़ा बन गया। उधर कांग्रेस भी महागठबंधन की कमजोर कड़ी होने के बावजूद लालू-तेजस्वी पर आंखे तरेर रही है। आलाकमान की शह पर कांग्रेस के बड़े नेता अब लालू यादव को भी भाव नहीं दे रहे। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, जयराम रमेश और अधीर रंजन चौधरी चुनाव प्रबंधन के लिए पटना पहुंच चुके हैं। लेकिन उन्होंने जानबूझकर लालू और तेजस्वी से मुलाकात नहीं की। इससे महागठबंधन पर महा-संकट आने के आसार नजर आने लगे हैं। यदि दो-तीन दिन में सियासी पेच ना सुलझा तो दरार और बढ़ सकती है। दूसरी ओर पहली बार चुनावी मैदान में उतरे प्रशांत किशोर भी विवादों में घिर गए हैं। उनकी जन सुराज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ही पीके पर पैसे लेकर सीटें बांटने के आरोप लगाए हैं। ऐन चुनाव से पहले ऐसी पोल खुलने के बीच मानहानि मामले में नोटिस ने पीके की टेंशन और बढ़ा दी है।

 राहुल के पीछे लग तेजस्वी ने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारी

दरअसल, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने वोटर अधिकार यात्रा के दौरान अपने पैर पर ही कुल्हाड़ी मार ली थी। इस यात्रा में राहुल गांधी 17 दिनों तक बिहार में रहे। तेजस्वी ने ही राहुल को लीड करने का मौका दिया और वे पहली बार राहुल गांधी के पीछे-पीछे घूमे। तेजस्वी ने यात्रा में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। इससे बिहार में मृतप्राय पड़ी कांग्रेस की कुछ सांसें चलने लगीं। राहुल गांधी को गुमान हो गया कि यह सब उनकी वजह से है। इसलिए इसके बाद से कांग्रेस अब आरजेडी को आंखे दिखाने लगी है। तेजस्वी के सीएम फेस पर भी एतराज जताने के बाद अब कांग्रेस ने सीट बंटवारा के लिए राजद को अल्टीमेट तक दे दिया है। यदि दो-तीन दिन में दोनों दलों में सहमति नहीं बनी तो कांग्रेस अपनी पहली सूची जारी कर सकती है। कांग्रेस ने पहले 15 उम्मीदवारों की सूची बना ली है। यदि कांग्रेस आम सहमति के पहले लिस्ट जारी कर देती है तो महागठबंधन पर महा-संकट के बादल छा सकते हैं।
कांग्रेस के बड़े नेता अब लालू-तेजस्वी को नहीं दे रहे भाव
कांग्रेस ने भले ही पिछले विधानसभा चुनाव में मात्र 19 सीटें जीतकर सबसे कमजोर प्रदर्शन किया हो। इसके बावजूद वह अगले माह होने वाले चुनाव के लिए राजद की आंख में आंख मिला कर बात कर रही है। यही वजह है कि कांग्रेस के बड़े नेता अब लालू यादव और तेजस्वी को भी भाव नहीं दे रहे। हाइकमान के आदेश पर अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, जयराम रमेश और अधीर रंजन चौधरी चुनाव प्रबंधन के लिए पटना आए। लेकिन उन्होंने लालू यादव और तेजस्वी से मुलाकात करने की जरूरत ही नहीं समझी। भूपेश बघेल ने तो सीधे-सीधे तेजस्वी यादव को चुनौती ही दे डाली। उन्होंने कहा, तेजस्वी खुद को अपनी ओर से सीएम फेस बता रहे हैं, लेकिन सीएम का चेहरा उनकी पार्टी का हाईकमान घटक दलों की सहमति से तय करेगा।
महागठबंधन उम्मीदवारों की घोषणा में देरी से चुनाव पर असर
चुनाव के लिए पहले चरण के नामांकन की शुरुआत 10 अक्टूबर से हो चुकी है। लेकिन 10 अक्टूबर तक महागठबंधन का सीट बंटवारा फाइनल नहीं हो सका है। संभावित प्रत्याशियों में इसको लेकर रोष है कि पिछली बार उम्मीदवारों की घोषणा में देरी से तैयारी का समय नहीं मिला था। पहले चरण के चुनाव के नामांकन की अंतिम तारीख से एक दिन पहले प्रत्याशियों के नाम घोषित किये गये। कांग्रेस ने आंतरिक गुटबाजी और संभावित असंतोष से निपटने के लिए यह देरी की थी। लेकिन इस कोशिश में उम्मीदवारों को हड़बड़ी में आधी अधूरी तैयारी के साथ चुनाव में उतरना पड़ा। टिकट को लेकर भी असंतोष था। पूर्व केन्द्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता केके तिवारी ने सोनिया गांधी को पत्र लिख कर टिकट वितरण में धांधली का आरोप लगाया था। उन्होंने चुनाव प्रबंधन से जुड़े नेताओं की जांच कराये जाने की मांग की थी।
तीन साल पीके के साथ घूमी, अब कर दिया विश्वासघात 
जन सुराज पार्टी की लिस्ट की घोषणा होते ही कार्यकर्ताओं और संभावित प्रत्याशियों की नाराजगी और रोष सामने आ गया है। जन सुराज की महिला कार्यकर्ता पुष्पा सिंह ने टिकट ना देने पर पीके पर विश्वासघात का आरोप लगाया है। उन्होंने मीडिया से कहा कि तीन साल मैं घर में नहीं बैठी। अपना सारा सुख त्याग दिया और जन सुराज के लिए काम किया। घर की बेटी-बहू होकर भी मैंने हिम्मत जुटाई। वे पैदल चले तो मैं भी उनके साथ चल पड़ी। आज मेरे साथ अन्याय हुआ है। टिकट के लिए उन लोगों का नाम अनाउंस हुआ जो क्षेत्र में घूमे ही नहीं, जनता उनको पसंद तक नहीं करती है। बहुत उम्मीद लेकर आई थी, सब पर पानी फिर गया है। मैंने तो उम्मीदवार बनने का प्रोसेस भी पूरा कर लिया था। पुष्पा ने कहा कि बनियापुर-मशरख की जनता जन सुराज का हिसाब कर देगी।
जन सुराज पार्टी ने 21 हजार लिए, टिकट किसी और को दिया
पाटलिपुत्र ऑफिस के बाहर पहुंचे कार्यकर्ता अमर कुमार सिन्हा ने दावा किया, ‘पार्टी ने उनको कुम्हरार विधानसभा से टिकट देने की बात कही थी। इसके लिए 21000 रुपए भी लिए काम कराया। 5 जनसभाएं करवाई और एंड मोमेंट पर ये सीट केसी सिन्हा को दे दी। सिन्हा के मुताबिक RCP सिंह ने अपनी बेटी को टिकट दिलवा दिया। पीके ने काम करवाया और RCP सिंह ने भरोसा दिया। हमने जन सुराज पार्टी छोड़ दिया। ये आदमी (प्रशांत किशोर) बिहार बदलाव की बात कर रहा है और दूसरे को चोर बोलकर खुद को ईमानदार साबित करना चाहता है।
मुजफ्फरपुर की सीट पीके ने 40 लाख में बेची- केजरीवाल
दरअसल, गुरुवार को जन सुराज ने 51 सीटों पर कैंडिडेट्स के नाम की घोषणा की। नाम की घोषणा के साथ ही हंगामा शुरू हो गया। कई कार्यकर्ता टिकट नहीं मिलने से नाराज दिखे। मुजफ्फरपुर में जन सुराज के नेता संजय केजरीवाल ने पार्टी से त्यागपत्र देने के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा की है। संजय केजरीवाल ने कहा कि जन सुराज में अब सिद्धांत-विचारधारा नहीं, बल्कि पैसे का बोलबाला हो गया है। मुजफ्फरपुर नगर विधानसभा की टिकट 40 लाख रुपए में बेची गई है।
125 करोड़ के मानहानि केस में नोटिस ने पीके की बढ़ाई टेंशन
दूसरी ओर 125 करोड़ के मानहानि केस में प्रशांत किशोर को कोर्ट से नोटिस जारी हुआ है। भाजपा सांसद डॉ. संजय जायसवाल की ओर से दायर मानहानि केस की सुनवाई सब जज 1 बेतिया के न्यायालय में हुई। कोर्ट ने मानहानि केस एडमिट कर लिया है। इसमें जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने प्रशांत किशोर को विशेष दूत से समन देने का आदेश दिया है। सांसद की तरफ से मैंडेटरी इंजेक्शन पिटीशन भी दाखिल किया गया था। जिस पर कोर्ट ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

जुमे पर नमाज नहीं पढ़ी तो होगी 2 साल की जेल, भरना पड़ेगा जुर्माना: मलेशिया में तालिबानी फरमान का हो रहा विरोध, इसी मुल्क में है भारत का भगोड़ा जाकिर नाइक

                         जुमे की नमाज नहीं पढ़ी, तो होगी जेल ( प्रतिकात्मक फोटो साभार-chatgpt )
मलेशिया के टेरेंगानु राज्य में जुमे की नमाज पढ़ने में नहीं शामिल होने वाले मुस्लिमों पुरुषों को 2 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। शरिया कानून को सख्ती से लागू करते हुए सरकार ने ये फरमान सुनाया है।

इसमें कहा गया है कि अगर बिनी किसी उचित कारण बताए शुक्रवार की नमाज में अनुपस्थित रहे, तो मुस्लिम पुरुषों को जेल जाना पड़ेगा। साथ ही 3000 रिंगिट यानी 61,000 रुपए जुर्माना भी भरना पड़ेगा।

पहले लगातार 3 जुमे की नमाज में शामिल होना अनिवार्य था

टेरेंगानू में पीएएस यानी पैन मलेशियाई इस्लामिक पार्टी की सरकार है। पहले लगातार तीन शुक्रवार को नमाज छोड़ने वाले मुस्लिम पुरुषों को ये सजा दी जाती थी। लेकिन अब हर जुमे की नमाज में शामिल होना अनिवार्य कर दिया गया है।

राज्य के कार्यकारी परिषद के सदस्य मुहम्मद खलील अब्दुल हादी ने बेरिटा हरियन अखबार को बताया, “नमाज केवल मजहबी प्रतीक नहीं है, बल्कि मुस्लिमों की खुदा के आज्ञा मानने से भी जुड़ा हुआ है।”

तालिबान बन जाएँगे हम- अजीज

इस पर मलेशियाई वकील अजीरा अजीज ने तर्क दिया है कि कुरान में कहा गया है कि ‘मजहब में कोई जबरदस्ती नहीं’ होती। सरकार का फरमान इसके खिलाफ है। उन्होंने कहा, “जुमे की नमाज अनिवार्य होनी चाहिए, लेकिन इसे अपराध बनाना गलत है। हमें सभी मलेशियाई लोगों की चिंता है, वरना हम तालिबान बन जाएँगे।”

रिपोर्ट के मुताबिक, मलेशिया के इस राज्य में कोई विपक्षी पार्टी नहीं है। 12 लाख की आबादी है, जिसमें अधिकतर स्थानीय मुस्लिम हैं। सत्ताधारी पीएएस पार्टी ने 2022 में सभी 32 सीटों पर जीत हासिल की थी। ये हथकंडा पीएएस को अपनी सत्ता बचाने के लिए जरूरी लग रहा है, क्योंकि दो साल के अंदर चुनाव होने वाले हैं।

इस्लाम मलेशिया का आधिकारिक मजहब है। मलेशिया का संविधान राज्यों को इस्लामी मामलों पर कानून बनाने का अधिकार देता है। लेकिन उसका क्षेत्र परिवार या व्यक्तिगत स्तर पर होना चाहिए।

दूसरे राज्य ने भी कानून बनाना चाहा था

2019 में, मलेशियाई राज्य केलंतन ने अपने शरिया कानून को विस्तार देना चाहा था। लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। यहाँ मलेशियाई संघ का कानून सबसे अहम है। इस फैसले को पीएएस नेताओं ने इस्लामी सत्ता पर हमले के रूप में प्रचारित किया और जमकर बवाल काटा।

तेरेंगानु के नए फरमान के खिलाफ भी लोग सड़कों पर आ गए हैं। कई लोगों ने कानूनी दबाव के जरिए मजहबी रिवाजों को मनवाने की ‘समझदारी’ पर सवाल उठाए हैं। इनका कहना है कहा, “धर्मनिष्ठा दिल से आनी चाहिए, न कि लोगों के डर से”। कुछ लोगों ने चेताया है कि ऐसे कानून दूसरे राज्य भी अपना सकते हैं।

मलेशिया में ही है भगोड़ा जाकिर नाइक

भारत का भगोड़ा इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाइक मलेशिया में ही है। जुलाई 2016 में बांग्लादेश के ढाका में बम धमाके के बाद जाकिर नाइक भारत से भाग गया था। इस धमाके में 29 लोगों की मौत हुई थी। हमले में शामिल आतंकियों ने कहा था कि वो नाइक के भाषणों से प्रभावित थे।

भारत में भगोड़ा घोषित होने के बाद से उसने मलेशिया में शरण ली हुई है। भारत सरकार मलेशिया की सरकार से उसके प्रत्यर्पण के लिए लगातार बातचीत कर रही है, लेकिन अभी तक उसका कोई परिणाम नहीं आया है।

मुगल काल में हिंदुओं से उठवाए जाते थे गोवंश के अवशेष, अब बकरीद पर नहीं करेंगे ‘बड़े’ पशुओं की ‘कुर्बानी’ की सफाई : शाहजहाँपुर में हिंदू कर्मचारियों की माँग, पत्र लेकर DM के पास पहुँचे

                                  शाहजहाँपुर नगर निगम (फोटो साभार - अमृत विचार)
उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले में हिंदू सफाई कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि वो बकरीद के दौरान ‘बड़े पशुओं’ की कुर्बानी के अवशेषों को नहीं उठाएँगे। सफाई कर्मचारियों ने इसे लेकर जिलाधिकारी को पत्र भी लिखा है। पत्र में नगर निगम और नगर पंचायतों में कार्यरत हिंदू सफाई कर्मचारियों ने इस बार कुर्बानी के पशुओं के अवशेषों की सफाई कार्य में भाग नहीं लेने की बात कही है। उनका कहना है कि मुगलिया दौर से चल रहा ये काम उनकी धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं के खिलाफ है और अब वह इस परंपरा को आगे नहीं बढ़ाना चाहते।

मुगलिया दौर बीता तो उस दौर की व्यवस्था भी हो खत्म

सफाई कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री प्रदीप कुमार बाल्मीकि ने कहा कि जिस समुदाय द्वारा कुर्बानी की जाती है, उसी समुदाय के लोगों को उस कचरे और बचे हुए अवशेषों की सफाई करनी चाहिए। उनके अनुसार यह एक मजहबी उत्सव है, जिसमें वों हिस्सा नहीं लेना चाहते, क्योंकि यह उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाता है।

उनके अनुसार मुगल काल से यह कार्य हिंदू समुदाय के लोग करते आए हैं, लेकिन अब वे इसे अपनी धार्मिक आस्था के खिलाफ मानते है और इसी कारण से वो अब यह कार्य नहीं करना चाहते है। उनका कहना है कि 80% कर्मचारी हिंदू ऐसे कामों को नहीं करना चाहते है।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उन पर ये काम करने का दबाव डाला गया, तो वे सामूहिक रूप से हड़ताल पर चले जाएँगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। बाल्मीकि समाज ने यह भी कहा है कि मुगल काल से लेकर अब तक यह काम हमेशा से ही हिंदू सफाई कर्मचारियों द्वारा किया जाता रहा है, लेकिन अब देश आजाद हो चुका है उन्हें भी अपने धर्म और आस्था के साथ जीने का संवैधानिक अधिकार है।

कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें कुर्बानी के अवशेषों की सफाई के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गंदगी और बदबू की वजह से उन्हें अक्सर उल्टियाँ, सिर दर्द और मानसिक तनाव जैसी समस्याएँ होती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्य सफाई कर्मचारियों के लिए एक प्रकार की मानसिक प्रताड़ना बन जाता है। जो न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि उनके आत्म-सम्मान को भी ठेस पहुँचाता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी और नगर निगम अधिकारी कर्मचारियों से बातचीत कर रहे हैं। प्रशासन स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

गुजरात : इस्लामी कट्टरपंथियों की धमकी : ‘ये हमारा इलाका है, गरबा करोगे तो पत्थर मारेंगे’: नवरात्रि की तैयारी कर रहे थे जनजातीय समाज के लोग

             भरूच जिले में जनजातीय समाज को गरबा का आयोजन नहीं करने की धमकी ( साभार: कनेक्ट गुजरात )
गुजरात के भरूच जिले के एक गाँव में जनजातीय समाज के लोगों को नवरात्रि में गरबा करने को लेकर धमकी देने का मामला सामने आया है। कथित तौर पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने इसे अपना इलाका बताते हुए गरबा आयोजन करने पर पत्थरबाजी की बात कही है।

मामला आमोद तालुका के इखर गाँव का है। भरूच जिले का यह इलाका मुस्लिम आबादी की अधिकता वाला है। रिपोर्टों के मुताबिक, इखार गाँव के जनजातीय समाज के लोगों ने इस संबंध में कलेक्टर को एक आवेदन दिया है। इसमें कहा गया है कि गाँव के मुस्लिम नेता ने नवरात्रि नहीं मनाने की धमकी दी है।

जनजातीय समाज के नेताओं और सामाजिक संगठनों ने इसे लेकर प्रशासन से न्याय की माँग की है। साथ ही बताया है कि उनके समुदाय के युवकों को गाली देते हुए जातिसूचक शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया।

गरबा आयोजन पर मंडप उखाड़ने और पथराव की धमकी

जमीनी हकीकत पता करने के लिए ऑपइंडिया ने इखार गाँव में हर साल नवरात्रि का आयोजन करने वाले शैलेश वसावा से बात की। शैलेश ने बताया, “हर साल की तरह इस साल भी हम नवरात्रि आयोजन के लिए अपने गाँव की खुली जगह की सफाई कर रहे थे। मेरे साथ गाँव के कुछ अन्य युवक भी थे। जब हम सफाई कर रहे थे, तभी पास में रहने वाले मोहसिन अली खान पठान और अली हसन पठान आकर हमें माँ-बहन की गालियाँ देने लगे।”
वासवा ने बताया कि उनके गाँव में ज्यादातर आबादी मुसलमानों की है। मुस्लिम बहुल इस गाँव में जनजातीय समाज के हिंदू भी रहते हैं। उन्होंने कहा, “वे आए और हमारे साथ दुर्व्यवहार करने लगे। हमने उनसे कहा हम एक साथ गाँव में रहते हैं तो आप ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं? यह सुनकर मुस्लिम नेता और भड़क गए और बोले- जिसे बुलाना है बुलाओ। यह हमारा इलाका है। हम तुम लोगों को यहाँ नवरात्रि नहीं मनाने देंगे।”
शैलेश वासवा के मुताबिक मुस्लिमों ने उन्हें बुरी तरह धमकाया। धमकी देते हुए कहा, “अगर तुमने गरबा किया तो हम मंडप उखाड़ देंगे और पथराव करेंगे।” वासवा के मुताबिक, गाँव में हिंदुओं की आबादी बहुत कम है और उनके पास कार्यक्रम आयोजित करने के लिए कोई अन्य जगह भी नहीं है।

हिंदू महिलाओं से अभद्र व्यवहार का भी आरोप

ऑपइंडिया को नवरात्रि के आयोजक शैलेश वसावा ने ये बताया, “यह पहली बार नहीं है कि गाँव के मुस्लिमों ने हिंदूओं के साथ तरह का व्यवहार किया है। इससे पहले भी ये लोग ऐसे कई काम कर चुके हैं।” उन्होंने बताया, “एक बार उन्होंने उस जगह को तोड़ दिया जहाँ माता रानी का गरबा और पवित्र दीपक रखा गया था, लेकिन हमने शिकायत नहीं की क्योंकि हमें उनके बीच रहना था। हम अपने त्योहारों या पवित्र अवसरों पर उत्सव मनाने के लिए उसी जगह का इस्तेमाल करते रहे हैं और हर बार वो मुश्किलें खड़ी करते हैं। इस बार भी उन्होंने नवरात्रि मंडप न बनाने और गरबा का आयोजन न करने की धमकी दी है।”
शैलेश वासवा का यह भी कहना है कि हिंदू महिलाओं के साथ स्थानीय मुस्लिम कई बार अभद्र व्यवहार कर चुके हैं। उनकी संख्या अधिक होने के कारण कोई कुछ नहीं कह पाता है। उन्होंने बताया, “उनकी धमकियों से हम चिंतित हैं। वे भविष्य में हमें नुकसान पहुँचा सकते हैं। प्रशासन से हमारी माँग है कि हमें सुरक्षा और न्याय दी जाए।”
इस घटना के सामने आने के बाद भरूच की वीर बिरसा ब्रिगेड और जनजातीय समाज के कई संगठन एकजुट हो गए हैं। इन संगठनों ने जिला कलेक्टर कार्यालय में आवेदन देकर धमकी देने वाले मुस्लिम नेताओं पर कार्रवाई की माँग की है।

 

दिल्ली वक्फ बोर्ड की 123 संपत्तियों को जब्त करेगी केंद्र सरकार

मुस्लिम वोट बैंक को खुश रखने के लिए बनाया वक़्फ़ बोर्ड हिन्दुओं के कितना घातक होगा, कांग्रेस में नेता बन रहे किसी हिन्दू ने हिन्दू हित के बारे में क्यों नहीं सोंचा? क्या कांग्रेस में हिन्दू जयचन्द की भूमिका निभा रहे थे? अगर 1400 वर्ष आये इस्लाम की इतनी भूमि हो सकती है, इस्लाम से शताब्दियों पूर्व से भारत में जो हिन्दू सम्राट शासन के युग वाली भूमि कहाँ है? ये तो वही बात हो रही है कि अपनी ही भूमि से हिन्दुओं को बेदखल कर वक़्फ़ बोर्ड द्वारा अधिकार करने से रोकना होगा। मुस्लिम तुष्टिकरण की इस कड़ी को तोडना होगा। हिन्दुओं को उन सभी कांग्रेसी हिन्दू नेताओं को जवाबदेही बनाना होगा। आखिर हिन्दुओं के साथ इतना खतरनाक खिलवाड़ क्यों किया?   

केंद्र सरकार ने दिल्ली वक्फ बोर्ड (Delhi Waqf Board) से जुड़ी 123 संपत्तियों को अपने अधिकार में लेने का ऐलान किया है। दिल्ली वक्फ बोर्ड की इन संपत्तियों में मस्जिद, कब्रिस्तान और दरगाह शामिल हैं। केंद्र के इस फैसले पर वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान ने कहा है कि वह सरकार को इन संपत्तियों पर कब्जा नहीं करने देंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वक्फ बोर्ड की यह संपत्तियाँ केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के कब्जे में रहेंगी। इस मामले में, उप भूमि और विकास अधिकारी ने 8 फरवरी, 2023 को वक्फ बोर्ड को एक पत्र भेजा था। इस पत्र में वक्फ बोर्ड की 123 संपत्तियों को सभी मामलों से ‘मुक्त’ करने के बारे में कहा गया है।

दिल्ली वक्फ बोर्ड की संपत्ति में इस कब्जे को लेकर आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय ने कहा है कि रिटायर्ड जस्टिस एसपी गर्ग की अध्यक्षता में दो सदस्यीय समिति बनाई गई थी। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में गैर-अधिसूचित वक्फ संपत्तियों के मुद्दे पर कहा गया है कि उसे दिल्ली वक्फ बोर्ड से कोई प्रतिनिधित्व या आपत्ति प्राप्त नहीं हुई है। भूमि एवं विकास कार्यालय के पत्र के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार ने इस समिति का गठन किया था।

दिल्ली वक्फ बोर्ड की 123 संपत्तियों को जब्त करने को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक और बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान (Amanatullah Khan) ने कहा है कि वह संपत्तियों पर कब्जा नहीं होने देंगे। अमानतुल्लाह ने ट्वीट कर कहा है, “अदालत में हमने 123 वक्फ संपत्ति पर पहले ही आवाज उठाई है। उच्च न्यायालय में हमारी रिट याचिका संख्या 1961/2022 लंबित है। कुछ लोगों द्वारा इस बारे में झूठ फैलाया जा रहा है। इसका सबूत आप सबके सामने है। हम वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर किसी भी तरह का कब्जा नहीं होने देंगे।”

अमानतुल्लाह खान ने 18 फरवरी 2023 को केंद्रीय मंत्रालय के उप भूमि और विकास अधिकारी को दिए जवाब में कहा है कि दो सदस्यीय समिति के गठन के खिलाफ दिल्ली वक्फ बोर्ड ने जनवरी 2022 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मुस्लिम इन 123 संपत्तियों का उपयोग कर रहे हैं। वक्फ बोर्ड की तरफ से नियुक्त प्रबंध समिति या मुतवल्ली इन सभी संपत्तियों की देखरेख करते हैं।

ये सभी संपत्तियाँ कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान दिल्ली वक्फ बोर्ड को दे दी गईं थीं। इन संपत्तियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड को देने को लेकर ‘विश्व हिंदू परिषद’ ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। अगस्त 2014 में हाई कोर्ट ने आदेश का पालन करते हुए मंत्रालय ने हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस एसपी गर्ग की अध्यक्षता में दो सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने ही दिल्ली वक्फ बोर्ड के सभी हित धारकों और प्रभावितों के पक्ष को सुनते हुए रिपोर्ट जारी की है।

मुस्लिमों डरो मत, मूर्ति पूजा बंद करने को करो जिहाद ; राम मंदिर को तबाह कर वहीं बनाएँगे मस्जिद: अल-कायदा का ‘गजवा-ए-हिंद’ में ऐलान

                             अल-कायदा के जिहादी पत्रिका में दी राम मंदिर को तबाह करने की धमकी
इस्लामी आतंकी संगठन अल-कायदा (Al-Qaeda) ने फिर से भारत और हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला है। अयोध्या में बन रहे राम मंदिर को तबाह करने की बात कही है। कहा है कि मंदिर को तबाह कर उसी जगह मस्जिद बनाएगा। मूर्ति पूजा खत्म करने और भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने के लिए मुस्लिमों से जिहाद को कहा है।

अल-कायदा की ​जिहादी पत्रिका ‘गजवा-ए-हिंद’ के ताजा अंक में राम मंदिर को लेकर यह नफरत दिखाई गई है। रिपोर्टों के अनुसार 110 पन्नों के संपादकीय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भी आतंकी संगठन ने भड़काऊ बातें की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पत्रिका के ताजा अंक में कहा गया है कि जिस तरह बाबरी मस्जिद के ढाँचे पर राम मंदिर बनाया जा रहा है, उसी तरह अल-कायदा राम मंदिर को तोड़कर उसकी जगह मस्जिद बनाएगा। इसी हफ्ते जारी इस ऑनलाइन मैगजीन में लिखा गया है कि मूर्तियों की जगह अल्लाह के नाम पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया जाएगा। लेकिन इन सब के लिए कुर्बानी देनी होगी।

इस लेख में अल-कायदा ने भारतीय मुस्लिमों से कहा है, “तुम्हें किसी तरह के नुकसान से डरने की जरूरत नहीं है। पहले ही बहुत नुकसान हो चुका है। यदि तुमने पहले ही जिहाद किया होता तो आज इतना नुकसान नही होता। तुम्हारे लिए धर्मनिरपेक्षता जहन्नुम की तरह है। हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की बात एक धोखा है।”

मैगजीन में कहा गया है, “यह सब सिर्फ कहने की बात नहीं है। बाबरी मस्जिद को 30 साल पहले नष्ट कर दिया गया था। गुजरात के अहमदाबाद में 20 साल पहले गर्भवती महिलाओं को उनके बच्चों के साथ जलाया गया और आज हर जगह बुलडोजर चलाए जा रहे हैं। जामिया मिलिया से लेकर अलीगढ़ तक और जामिया उस्मानिया (हैदराबाद) से देवबंद तक हिंदू लोग चाकू, भाले और तलवारें तेज कर रहे हैं।”

अल-कायदा ने कहा है, “सभी हिंदुओं को लाठी चलाने की शिक्षा दी जा रही है। हिंदू महिलाएँ सब्जी काटने वाले चाकुओं से मुसलमानों के चेहरे और सिर काटने की बात कर रही हैं। अल-कायदा एक ऐसा जिहाद चाहता है कि पूरा हिंदुस्तान इस्लामी दुनिया का हिस्सा बन जाए और मूर्ति पूजा बंद हो जाए। हमारा भारत के मुस्लिमों से ला इलाहा इल्लल्लाह का रिश्ता है जो खून और देश के रिश्ते से बढ़कर होता है। यही रिश्ता हमें आपके मोहब्बत में बार-बार आपकी ओर खींचता है।”

लेख में धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक शासन को नकारने की बात की गई है। कहा गया है कि अमेरिका की सरकार मोदी का समर्थन करती है। लेख में जोर देकर कहा गया है कि जब तक पूरा भारत इस्लामिक शासन के अधीन नहीं हो जाता तब तक अन्य सभी उपाय व्यर्थ हैं। मुसलमानों के लिए मूर्ति पूजा करने वालों के शासन में रहना शर्मनाक है। जिहाद की लड़ाई में भारतीय मुसलमानों से समर्थन माँगा गया है। मैगजीन के आखिरी पन्ने पर टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन ने जिहाद को ही सारी समस्याओं का हल बताया है।

‘तुम सब चले जाओ, ये जगह पाकिस्तान बनेगी’ : गुजरात के वकील सोहिल हुसैन ने हिंदू पड़ोसियों को चाकू लेकर धमकाया

                                                      सोहिल हुसैन मोर (साभार: न्यूज 18 गुजराती)
गुजरात के राजकोट में सोहिल हुसैन मोर (Sohil Hussain Mor) नामक वकील के ख़िलाफ़ दो अलग एफआईआर हुई हैं। सोहिल पर आरोप है कि उसने न केवल अपने सोसायटी में रहने वाले हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किया बल्कि मारपीट भी की और साथ में पुलिस वाले को उसका काम करने से भी रोका। घटना रविवार (20 फरवरी 2022) की है जब श्यामा प्रसाद मुखर्जी नगर आवास के पास शाम के समय हंगामा हुआ।

सोहिल हुसैन ने कथिततौर पर वॉट्सऐप ग्रुप में छत्रपति शिवाजी महाराज के ऊपर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। ग्रुप की सदस्य ज्योति सोढा ने जब इस मुद्दे पर आवाज उठाई और मोर को कॉल करके अपनी नाराजगी व्यक्त करने की कोशिश की तो मोर ने उन्हें कहा, “ये देश पाकिस्तान बन गया है और तुम लोगों को देश छोड़कर चला जाना चाहिए।”

न्यूज 18 गुजराती द्वारा साझा की गई ऑडियो रिकॉर्डिंग में मोर ने महिला से गु्स्से में कहा कि ऐसे पोस्ट आते ही रहेंगे। वह बोला, “ये नया पाकिस्तान बन गया है। यहाँ सब मुस्लिम हैं। हिंदुओं को यहाँ से चले जाना चाहिए।” जब महिला ने हैरानी से पूछा कि आखिर वो ऐसी बातें क्यों कर रहा है तो मोर ने फिर कहा, “जो है वो है। यहाँ से अब जाओ।”

सोसायटी के एक शख्स ने मीडिया से बातचीत में बताया कि इस प्रकार की बयानबाजी उस शख्स की ओर से आई है जो कि कोई जाहिल नहीं बल्कि पढ़ा-लिखा वकील है। चश्मदीदों ने कहा, “वो हमेशा हमारे साथ नॉर्मल रहता था। लेकिन कुछ समय से उसने कट्टरपंथियों वाले शब्द प्रयोग करने शुरू कर दिए और अपनी वेषभूषा भी बदल दी। उसने भगवान के फोटो फ्रेम और भगवान गणेश की प्रतिमा को तोड़ने का काम भी किया था।”

चश्मदीद ने बताया कि भगवान गणेश की हर मूर्ति को तोरण से सोहिल ने तोड़ने का काम किया है। सोसायटी के हिंदुओं को शक है कि हुसैन के ऐसे कट्टर विचारों के पीछे कोई बड़ा रैकेट हो सकता है। चश्मदीद बताते हैं, “जैसे किशन भरवड के मामले में पाकिस्तान का नाम सामने आया है…। ये कह रहा है कि ये पूरी सोसायटी को पाकिस्तान में बदल देगा और हिंदुओं को यहाँ से जाना चाहिए। तुम मुझे कब तक रोक पाओगे। मुझे सपोर्ट करने वाली बड़ी फौज है।”

रिपोर्ट के अनुसार, मोर ने अपनी वॉट्सऐप डीपी पर भी I Support hijab लगा रखा है। सोढा रविवार को जब मोर से बात करने गईं तो मोर नाराज हो गया और उन्हें चाकू से मारने की धमकी। इसके बाद हंगामा मचाया गया और भगवान गणेश की मूर्ति भी तोड़ दी। जल्द से जल्द इस संबंध में पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस कॉन्सटेबल ने इस बीच मामला सुलझाने का प्रयास किया मगर मोर बीच में आया और उन्हें भी पीटा। फरवरी 20 को विभिन्न धाराओं मे कॉन्सटेबल डंगार पर मामला दर्ज हुआ और सोमवार को उसकी गिरफ्तारी हुई।

‘नहीं करने देंगे PM मोदी सुरक्षा चूक की जाँच’: जस्टिस इंदु मल्होत्रा को SFJ की धमकी, वकीलों से कहा – तुम सब खतरे में हो, लिस्ट बन रही है

जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में जाँच में Sikh for Justice यानि खालिस्तान द्वारा धमकी दी जा रही है, ऐसे में समस्त किसान समुदाय का नैतिक कर्तव्य बनता है कि वह राकेश टिकैत सहित आंदोलन को समर्थन दे रही राजनीतिक पार्टियों से पूछे कि "आंदोलन में खालिस्तान क्यों आया? किस आधार पर खालिस्तान को खुला मंच दिया गया?" यदि आंदोलन में खालिस्तान को खुला मंच नहीं दिया होता, प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा में चूक का प्रश्न ही नहीं होता। क्या दो प्रधानमंत्रियों को आतंक की भेंट चढ़ने के बाद भी इन लोगों की ऑंखें नहीं खुली? क्या ये जनसेवा और किसान हित की आड़ में नौटंकी करने वाली पार्टियां देश 1984 दोहरा कर देश में अराजकता फैलाना चाहती हैं? दूसरे, सिख समुदाय को भी इन आन्दोलनजीवियों और इनकी समर्थक पार्टियों से देश में पल रहे खालिस्तानियों को कानून के हवाले करवाने की मांग करनी चाहिए कि देश के प्रधानमंत्री को खतरा प्रत्यक्षरूप से देश को खतरा है, सिख समुदाय को खतरा है, वोट लेने से पहले इन तत्वों को कानून के हवाले करवाने के लिए आगे आएं। 
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के बठिंडा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक की जाँच के लिए जस्टिस (रिटायर्ड) इंदु मल्होत्रा के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया था। अब खालिस्तानी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस (SFJ)’ ने उन्हें भी फोन कॉल कर के धमकी दी है। कट्टरवादी संगठन ने कहा है कि वो जस्टिस इंदु मल्होत्रा को इस मामले की जाँच नहीं करने देगा। प्रदर्शनकारियों के कारण बठिंडा के हुसैनीवाला फ्लाईओवर पर 20 मिनट तक पीएम मोदी का काफिला रुका रहा था, जिसके बाद उन्हें वापस दिल्ली लौटना पड़ा था और फिरोजपुर की रैली रद्द हो गई थी।

कई वकीलों को SFJ ने एक वॉइस नोट भेजा है। इसमें कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज के नेतृत्व वाली समिति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक मामले की जाँच नहीं करने दी जाएगी। संगठन ने कहा कि प्रधानमंत्री और सिखों में से किसी एक को ही चुनना होगा। साथ ही उसने ये भी बताया कि वो सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की एक सूची भी तैयार कर रहा है। ये पहली बार नहीं है जब वकीलों को इस तरह की धमकी खालिस्तानी संगठन द्वारा दी गई हो।

हाल ही में ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन’ ने भी जस्टिस इंदु मल्होत्रा को पत्र लिख कर वकीलों को धमकी दिए जाने वाले मामले की जाँच के लिए निवेदन किया था। इस पात्र में बताया गया था कि कई बार वकीलों को धमकी मिली है। SFJ ने वकीलों को धमकी देते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के दिन लाल किला पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराने दिया जाएगा। साथ ही एक वीडियो जारी कर के सिखों को भी भड़काया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के एक वकील को तो 5 बार धमकी दी गई। महाराष्ट्र के पूर्व स्टैंडिंग काउंसिल निशांत कतनेश्वरकर ने बताया, “मुझे यूके के नंबर से फोन कॉल्स किए जा रहे हैं। SFJ का गुरपतवंत सिंह पन्नू मुझे धमकी दे रहा है। SFJ कह रहा है कि वो वकीलों की पहचान कर लेगा। शिकायत दायर कर के वकीलों ने खुद को खतरे में डाल लिया है। उसने जस्टिस इंदु मल्होत्रा को जाँच से रोकने के साथ-साथ गणतंत्र दिवस पर लाल किला पर खालिस्तानी झंडा फहराने की धमकी भी दी है।”

इससे पहले भी खालिस्तान समर्थक ग्रुप (Khalistani Supporters) सिख फॉर जस्टिस (SFJ) की ओर से धमकी दी गई थी कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर तिरंगे की जगह खालिस्तानी झंडा फहराया जाएगा। यह ऐलान SFJ प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा किया गया था। फेसबुक पर गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा साझा किए गए एक नए प्रोपेगेंडा वीडियो में, प्रतिबंधित संगठन ने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में भारतीय तिरंगे के बजाए खालिस्तानी झंडा फहराने वाले शख्स को ‘इनाम’ के रूप में $1 मिलियन डॉलर (7.39 करोड़ रुपए) देने की घोषणा की थी।

पेगगास पर लेख को लेकर 'The Wire' को इजरायली कंपनी ने दी मानहानि के मुकदमे की धमकी

इजरायली जासूसी सॉफ्टवेयर ‘Pegasus’ को बनाने वाली कंपनी NSO ग्रुप ने भारतीय वामपंथी मीडिया संस्थान ‘The Wire’ को मानहानि का मुकदमा दायर करने की धमकी दी है। ‘द वायर’ ने अपनी एक खबर में दावा किया था कि भारत सरकार तेल-अवीव में स्थित इस कंपनी के सॉफ्टवेयर के जरिए कई पत्रकारों, सुप्रीम कोर्ट के जजों व विपक्षी नेताओं की जासूसी करवा रही है। सरकार ने इन आरोपों को तथ्यों से परे बताया है।

इजरायली कंपनी ने अपने डिफेमेशन काउंसल क्लेयर लोके के जरिए ‘The Wire’ को एक पत्र भी भेजा है, जिसमें कहा गया है कि बिना किसी तथ्य व आधार के उसके द्वारा प्रकाशित की गई खबर पर उसके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। कंपनी ने जिक्र किया है कि उस खबर में उसके जासूसी सॉफ्टवेयर के जरिए भारत के कुछ लोगों की जासूसी की बात कही गई है, जो गलत है।

‘The Wire’ इस सम्बन्ध में और भी लेख प्रकाशित करने के दावे कर रहा है। NSO ग्रुप ने कहा है कि ये लेख एकदम झूठे हैं और कंपनी की छवि को नुकसान पहुँचाने वाले हैं। अपने बयान में कंपनी ने कहा है कि अगर वो लेख प्रकाशित किए जाते हैं तो ‘The Wire’ के लिए समस्या हो सकती है। कंपनी ने कहा कि इसके कंटेंट्स को लेकर उसकी कुछ ठोस चिंताएँ हैं। कंपनी ने इन्वेस्टीगेशन के नाम पर इन खबरों को आगे बढ़ाने वाले पत्रकारों के नेटवर्क ‘फॉरबिडेन स्टोरीज’ से भी नाराज़गी जताई।

कंपनी ने कहा कि ये लेख गलत धारणाओं पर आधारित हैं और बिना किसी सबूत के अपुष्ट बातें लिखी गई हैं। कंपनी ने कहा कि इन मीडिया संस्थानों के ‘सूत्रों’ की विश्वसनीयता और हितों पर भी इससे बड़े सवाल खड़े होते हैं। कंपनी के अनुसार, ऐसा लगता है कि ‘अनभिज्ञ सूत्रों’ ने उन्हें कुछ ऐसी जानकारियाँ उपलब्ध कराई हैं, जो वास्तविकता से दूर हैं और उनका कोई तथ्यात्मक आधार ही नहीं है।

इन लेखों को उपद्रवी की श्रेणी में डालते हुए कंपनी ने स्पष्ट किया कि वो अब मानहानि का मुकदमा दायर करने पर विचार कर रहा है। कंपनी ने कहा कि ‘द वायर’ ने जरा भी मेहनत नहीं की और इन सूचनाओं की पुष्टि के लिए कोई प्रयास नहीं किए। कंपनी ने कहा कि इस तरह के गंभीर व अपमानजनक आरोपों के पीछे मीडिया संस्थान के पास कई ऑन-रिकॉर्ड सूत्र होने चाहिए, गहन अध्ययन किया जाना चाहिए और सम्बंधित डेटा का पारदर्शी विश्लेषण होना चाहिए।

‘Pegasus’ की संचालक कंपनी NSO ग्रुप के अनुसार, ऐसे आरोप लगा तो दिए गए लेकिन इसके पीछे सबूत के रूप में कोई दस्तावेज या विश्वसनीय स्रोत नहीं है। साथ ही इन मीडिया संस्थानों पर डेटा के गलत विश्लेषण का भी आरोप लगाया गया है। अक्टूबर 2018 में पत्रकार जमाल खशोगी की इस्ताम्बुल स्थित सऊदी दूतावास में हत्या पर भी कंपनी ने कहा कि उनकी जासूसी के लिए उसके सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल नहीं हुआ था।

इजरायल की कंपनी ने कहा कि वो सिर्फ दुनिया की कानूनी संस्थाओं और ख़ुफ़िया एजेंसियों को अपनी सुविधाएँ उपलब्ध कराती है, वो भी इनके पीछे जो सरकारें हैं उनका विश्लेषण करने के बाद। NSO ग्रुप ने कहा कि वो अपराध रोकने, आतंकी घटनाओं को रोकने और ज़िंदगियाँ बचाने के लिए अपने सॉफ्टवेयर व सर्विसेज को उपलब्ध कराता है। साथ ही बताया कि NSO न तो सिस्टम को चलाता है और न ही इसके अंदर का डेटा देखता है।

इस मामले पर भारत सरकार ने कहा था, “जो कहानी बनाई जा रही है, वो न सिर्फ तथ्यों से दूर है बल्कि एक पूर्व-कल्पित निष्कर्षों पर भी आधारित है। ऐसा लगता है कि जैसे ये जाँचकर्ता, अभियोजक और जूरी – इन तीनों का किरदार अदा करना चाहते हैं। सरकार के पास जो सवाल भेजे गए हैं, उन्हें देख कर लगता है कि इसके लिए काफी घटिया रिसर्च किया गया है और साथ ही ये भी बताता है कि सम्बंधित मीडिया संस्थानों द्वारा मेहनत नहीं की गई है।”