‘नहीं करने देंगे PM मोदी सुरक्षा चूक की जाँच’: जस्टिस इंदु मल्होत्रा को SFJ की धमकी, वकीलों से कहा – तुम सब खतरे में हो, लिस्ट बन रही है

जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में जाँच में Sikh for Justice यानि खालिस्तान द्वारा धमकी दी जा रही है, ऐसे में समस्त किसान समुदाय का नैतिक कर्तव्य बनता है कि वह राकेश टिकैत सहित आंदोलन को समर्थन दे रही राजनीतिक पार्टियों से पूछे कि "आंदोलन में खालिस्तान क्यों आया? किस आधार पर खालिस्तान को खुला मंच दिया गया?" यदि आंदोलन में खालिस्तान को खुला मंच नहीं दिया होता, प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा में चूक का प्रश्न ही नहीं होता। क्या दो प्रधानमंत्रियों को आतंक की भेंट चढ़ने के बाद भी इन लोगों की ऑंखें नहीं खुली? क्या ये जनसेवा और किसान हित की आड़ में नौटंकी करने वाली पार्टियां देश 1984 दोहरा कर देश में अराजकता फैलाना चाहती हैं? दूसरे, सिख समुदाय को भी इन आन्दोलनजीवियों और इनकी समर्थक पार्टियों से देश में पल रहे खालिस्तानियों को कानून के हवाले करवाने की मांग करनी चाहिए कि देश के प्रधानमंत्री को खतरा प्रत्यक्षरूप से देश को खतरा है, सिख समुदाय को खतरा है, वोट लेने से पहले इन तत्वों को कानून के हवाले करवाने के लिए आगे आएं। 
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के बठिंडा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक की जाँच के लिए जस्टिस (रिटायर्ड) इंदु मल्होत्रा के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया था। अब खालिस्तानी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस (SFJ)’ ने उन्हें भी फोन कॉल कर के धमकी दी है। कट्टरवादी संगठन ने कहा है कि वो जस्टिस इंदु मल्होत्रा को इस मामले की जाँच नहीं करने देगा। प्रदर्शनकारियों के कारण बठिंडा के हुसैनीवाला फ्लाईओवर पर 20 मिनट तक पीएम मोदी का काफिला रुका रहा था, जिसके बाद उन्हें वापस दिल्ली लौटना पड़ा था और फिरोजपुर की रैली रद्द हो गई थी।

कई वकीलों को SFJ ने एक वॉइस नोट भेजा है। इसमें कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज के नेतृत्व वाली समिति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक मामले की जाँच नहीं करने दी जाएगी। संगठन ने कहा कि प्रधानमंत्री और सिखों में से किसी एक को ही चुनना होगा। साथ ही उसने ये भी बताया कि वो सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की एक सूची भी तैयार कर रहा है। ये पहली बार नहीं है जब वकीलों को इस तरह की धमकी खालिस्तानी संगठन द्वारा दी गई हो।

हाल ही में ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन’ ने भी जस्टिस इंदु मल्होत्रा को पत्र लिख कर वकीलों को धमकी दिए जाने वाले मामले की जाँच के लिए निवेदन किया था। इस पात्र में बताया गया था कि कई बार वकीलों को धमकी मिली है। SFJ ने वकीलों को धमकी देते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के दिन लाल किला पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराने दिया जाएगा। साथ ही एक वीडियो जारी कर के सिखों को भी भड़काया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के एक वकील को तो 5 बार धमकी दी गई। महाराष्ट्र के पूर्व स्टैंडिंग काउंसिल निशांत कतनेश्वरकर ने बताया, “मुझे यूके के नंबर से फोन कॉल्स किए जा रहे हैं। SFJ का गुरपतवंत सिंह पन्नू मुझे धमकी दे रहा है। SFJ कह रहा है कि वो वकीलों की पहचान कर लेगा। शिकायत दायर कर के वकीलों ने खुद को खतरे में डाल लिया है। उसने जस्टिस इंदु मल्होत्रा को जाँच से रोकने के साथ-साथ गणतंत्र दिवस पर लाल किला पर खालिस्तानी झंडा फहराने की धमकी भी दी है।”

इससे पहले भी खालिस्तान समर्थक ग्रुप (Khalistani Supporters) सिख फॉर जस्टिस (SFJ) की ओर से धमकी दी गई थी कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर तिरंगे की जगह खालिस्तानी झंडा फहराया जाएगा। यह ऐलान SFJ प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा किया गया था। फेसबुक पर गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा साझा किए गए एक नए प्रोपेगेंडा वीडियो में, प्रतिबंधित संगठन ने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में भारतीय तिरंगे के बजाए खालिस्तानी झंडा फहराने वाले शख्स को ‘इनाम’ के रूप में $1 मिलियन डॉलर (7.39 करोड़ रुपए) देने की घोषणा की थी।

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