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‘नहीं करने देंगे PM मोदी सुरक्षा चूक की जाँच’: जस्टिस इंदु मल्होत्रा को SFJ की धमकी, वकीलों से कहा – तुम सब खतरे में हो, लिस्ट बन रही है

जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में जाँच में Sikh for Justice यानि खालिस्तान द्वारा धमकी दी जा रही है, ऐसे में समस्त किसान समुदाय का नैतिक कर्तव्य बनता है कि वह राकेश टिकैत सहित आंदोलन को समर्थन दे रही राजनीतिक पार्टियों से पूछे कि "आंदोलन में खालिस्तान क्यों आया? किस आधार पर खालिस्तान को खुला मंच दिया गया?" यदि आंदोलन में खालिस्तान को खुला मंच नहीं दिया होता, प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा में चूक का प्रश्न ही नहीं होता। क्या दो प्रधानमंत्रियों को आतंक की भेंट चढ़ने के बाद भी इन लोगों की ऑंखें नहीं खुली? क्या ये जनसेवा और किसान हित की आड़ में नौटंकी करने वाली पार्टियां देश 1984 दोहरा कर देश में अराजकता फैलाना चाहती हैं? दूसरे, सिख समुदाय को भी इन आन्दोलनजीवियों और इनकी समर्थक पार्टियों से देश में पल रहे खालिस्तानियों को कानून के हवाले करवाने की मांग करनी चाहिए कि देश के प्रधानमंत्री को खतरा प्रत्यक्षरूप से देश को खतरा है, सिख समुदाय को खतरा है, वोट लेने से पहले इन तत्वों को कानून के हवाले करवाने के लिए आगे आएं। 
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के बठिंडा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक की जाँच के लिए जस्टिस (रिटायर्ड) इंदु मल्होत्रा के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया था। अब खालिस्तानी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस (SFJ)’ ने उन्हें भी फोन कॉल कर के धमकी दी है। कट्टरवादी संगठन ने कहा है कि वो जस्टिस इंदु मल्होत्रा को इस मामले की जाँच नहीं करने देगा। प्रदर्शनकारियों के कारण बठिंडा के हुसैनीवाला फ्लाईओवर पर 20 मिनट तक पीएम मोदी का काफिला रुका रहा था, जिसके बाद उन्हें वापस दिल्ली लौटना पड़ा था और फिरोजपुर की रैली रद्द हो गई थी।

कई वकीलों को SFJ ने एक वॉइस नोट भेजा है। इसमें कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज के नेतृत्व वाली समिति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक मामले की जाँच नहीं करने दी जाएगी। संगठन ने कहा कि प्रधानमंत्री और सिखों में से किसी एक को ही चुनना होगा। साथ ही उसने ये भी बताया कि वो सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की एक सूची भी तैयार कर रहा है। ये पहली बार नहीं है जब वकीलों को इस तरह की धमकी खालिस्तानी संगठन द्वारा दी गई हो।

हाल ही में ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन’ ने भी जस्टिस इंदु मल्होत्रा को पत्र लिख कर वकीलों को धमकी दिए जाने वाले मामले की जाँच के लिए निवेदन किया था। इस पात्र में बताया गया था कि कई बार वकीलों को धमकी मिली है। SFJ ने वकीलों को धमकी देते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के दिन लाल किला पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराने दिया जाएगा। साथ ही एक वीडियो जारी कर के सिखों को भी भड़काया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के एक वकील को तो 5 बार धमकी दी गई। महाराष्ट्र के पूर्व स्टैंडिंग काउंसिल निशांत कतनेश्वरकर ने बताया, “मुझे यूके के नंबर से फोन कॉल्स किए जा रहे हैं। SFJ का गुरपतवंत सिंह पन्नू मुझे धमकी दे रहा है। SFJ कह रहा है कि वो वकीलों की पहचान कर लेगा। शिकायत दायर कर के वकीलों ने खुद को खतरे में डाल लिया है। उसने जस्टिस इंदु मल्होत्रा को जाँच से रोकने के साथ-साथ गणतंत्र दिवस पर लाल किला पर खालिस्तानी झंडा फहराने की धमकी भी दी है।”

इससे पहले भी खालिस्तान समर्थक ग्रुप (Khalistani Supporters) सिख फॉर जस्टिस (SFJ) की ओर से धमकी दी गई थी कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर तिरंगे की जगह खालिस्तानी झंडा फहराया जाएगा। यह ऐलान SFJ प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा किया गया था। फेसबुक पर गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा साझा किए गए एक नए प्रोपेगेंडा वीडियो में, प्रतिबंधित संगठन ने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में भारतीय तिरंगे के बजाए खालिस्तानी झंडा फहराने वाले शख्स को ‘इनाम’ के रूप में $1 मिलियन डॉलर (7.39 करोड़ रुपए) देने की घोषणा की थी।

पंजाब : बार-बार बयान बदल रहे मुख्यमंत्री चन्नी, भारतीय किसान संघ (क्रांतिकारी) ने ली जिम्मेदारी, उपद्रवियों के साथ चाय पी रही थी पंजाब पुलिस

पंजाब के बठिंडा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में बड़ी चूक के कारण प्रदर्शनकारियों को उनके रूट का पता चल गया और फ्लाईओवर पर भीड़ जुट गई। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी फिरोजपुर रैली को रद्द कर के वापस लौटना पड़ा। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी लगातार बयान बदल रहे हैं। पहले उन्होंने बयान दिया कि रैली में 70,000 कुर्सी लगी थी, लेकिन 700 लोग ही आए। फिर उन्होंने इस घटना को ‘कुदरती’ करार दिया। कांग्रेस नेता इस घटना पर जश्न मना रहे।

कांग्रेस पार्टी द्वारा कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे अनुभवी प्रशासक को हटा कर मुख्यमंत्री बनाए गए चरणजीत सिंह चन्नी ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा में किसी प्रकार की सेंध या चूक की बात नकारते हुए कह दिया कि अंतिम समय में योजना बदल दी गई थी। इसके बाद अपने बयान में उन्होंने कहा कि देर रात तक वो खुद पीएम मोदी के दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखे हुए थे। वहीं उप-मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सीएम चन्नी के बयान के विरोधाभास में माना कि सचमुच सुरक्षा में चूक हुई है।

कांग्रेस नेता दोपहर से ही खाली कुर्सियों की तस्वीरें शेयर कर-कर के दावा कर रहे हैं कि इसी वजह से पीएम मोदी की रैली रद्द हुई है। जबकि भाजपा नेताओं ने तस्वीरें और वीडियोज शेयर कर के दिखा दिया कि सुबह से ही लोग प्रधानमंत्री को सुनने के लिए जुटे हुए थे और कार्यक्रम स्थल पर भारी भीड़ थी। भाजपा के आईटी सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित मालवीय ने कहा कि CS और DGP को प्रधानमंत्री के काफिले के साथ होना चाहिए, लेकिन इस बार ये दोनों ही गायब थे।

मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का भी कहना है कि कुछ कोरोना संक्रमितों के संपर्क में आने के कारण उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया है और इसीलिए वो पीएम मोदी को रिसीव करने नहीं जा सके। उन्होंने पंजाब सरकार पर लगातार झूठ बोलने के आरोप लगाए। इसी तरह मीडिया में पहले खबर आई कि फिरोजपुर के SSP को निलंबित किया गया है, लेकिन सीएम चन्नी ने फिर इसका खंडन कर दिया। अब वो स्वीकार कर रहे हैं कि पीएम मोदी के रूट में प्रदर्शनकारियों के होने का उन्हें पता था।

प्रधानमंत्री को कहीं जाना हो तो पहले उस रूट के रिहर्सल किया जाता है, जो इस बार भी हुआ था। इससे ये दावा गलत साबित हो जाता है कि अंतिम समय में योजना बदलने से दिक्कत हुई। वीडियो में ये भी सामने आया है कि पंजाब पुलिस उन प्रदर्शनकारियों के साथ चाय की चुस्की ले रही थी, जिन्होंने प्रधानमंत्री के काफिले को 20 मिनट तक रोके रखा। जिस जगह ये घटना हुई, वो पाकिस्तान की सीमा से 30 किलोमीटर की दूरी पर ही है। वहाँ से अक्सर बम बरामद होते रहते हैं।

मीडिया के सामने ही प्रदर्शनकारी ये स्वीकार करते हुए दिख रहे हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री के रूट का पूरा पता था। सवाल ये है कि जब ये जानकारी सिर्फ पंजाब पुलिस को ही थी, फिर कहाँ से प्रदर्शनकारियों को सारी बातें लीक हुई? प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने कई बसों को तबाह कर दिया और भाजपा कार्यकर्ताओं पर भी हमले किए। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा वहाँ कमजोर हो गई थी और कुछ भी हो सकता था। इन सबका दोषी कौन?

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मोदी की सुरक्षा में चूक पर कांग्रेसी ने पूछा- 'हाउ इज द जोश'; ‘700 जान ले ज्ञान देने आया था, पंजाब ने प
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मोदी की सुरक्षा में चूक पर कांग्रेसी ने पूछा- 'हाउ इज द जोश'; ‘700 जान ले ज्ञान देने आया था, पंजाब ने प
इमरान प्रतापगढ़ी, परगट सिंह, पुण्य प्रसून बाजपेयी और सं

वहीं ‘भारतीय किसान संघ (क्रांतिकारी)’ नामक संगठन ने पीएम मोदी के काफिले को रोकने रखने की जिम्मेदारी ली है। पियारेना गाँव के पास ये घटना हुई थी। BKU (क्रांतिकारी) के महासचिव बलदेव जीरा का कहना है कि उन्होंने ‘अभिमानी’ मोदी को सबक सिखाया है। ये संगठन वामपंथी है और ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ का हिस्सा भी। 2009 में यूनियन के अध्यक्ष सुरजीत फूल माओवादियों से सम्बन्ध रखने के कारण UAPA के तहत गिरफ्तार भी हुए थे। 31 दिसंबर, 2021 को ही किसान संगठनों ने बरनाला में बैठक कर के इस दौरे को बाधित करने की साजिश रच ली थी।

मोदी की सुरक्षा में चूक पर कांग्रेसी ने पूछा- 'हाउ इज द जोश'; ‘700 जान ले ज्ञान देने आया था, पंजाब ने पॉवर दिखा दिया’

                             इमरान प्रतापगढ़ी, परगट सिंह, पुण्य प्रसून बाजपेयी और संजुक्ता बासु (बाएँ से दाएँ)
पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुरक्षा में चूक सामने आने के बाद उन्हें बठिंडा से वापस लौटना पड़ा। लिबरल गिरोह के कुछ पत्रकारों के साथ-साथ कांग्रेस के कई नेता भी इसका जश्न मना रहे हैं। जहाँ भाजपा ने इस घटना को ‘कांग्रेस का खूनी इरादा’ बताया है, वहीं फिरोजपुर के एसएसपी को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर जिस तरह से इस घटना को लेकर कुछ गिरोह विशेष के लोग जश्न मना रहे, लगता नहीं कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जीवित देखना चाहते हैं।

लिबरल पत्रकारों के साथ-साथ कांग्रेस के जश्न मनाने पर हैरान होने की कोई बात नहीं, क्योकि कहावत है कि बुझता दीया टिम-टिमाता है। दूसरे, भागवत गीता में भी स्पष्ट लिखा है, "विनाश काले विपरीत बुद्धि"; तीसरे, अभी कुछ ही समय पूर्व पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने एक वार्ता में टीवी पर कहा था "कांग्रेस को कांग्रेस ही हराएगी", इन सब बातों को देखते हुए यही निष्कर्ष निकलता है कि कांग्रेस ने खुद ही अपने पांव में कुल्हाड़ी दे मारी है। इस घटना का प्रभाव केवल पंजाब ही नहीं पुरे भारत में दिखेगा। अब जनता भी बता रही है कि जो पार्टी प्रधानमंत्री की नहीं देश की क्या होगी? 

सबसे पहले कांग्रेस नेता गौरव पांधी के बयान को ले लीजिए। कांग्रेस के ‘डिजिटल कम्युनिकेशन एंड सोशल मीडिया’ सेल के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर गौरव पांधी ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “पंजाब का पॉवर! कल से ही पंजाब की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली की तरफ जाने वाले सभी रास्तों को रोक कर रखा हुआ था। मोदी को अपनी रैली रद्द कर के दिल्ली लौटना पड़ा। पंजाब विरोधी मोदी, वापस जाओ।” उनका बयान भड़काऊ होने के साथ-साथ आपत्तिजनक भी है।

उन्होंने ये भी लिखा कि पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत नहीं है। वहीं कांग्रेस के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कुख्यात ‘Rofl Gandhi 2.0’ नामक ट्विटर हैंडल ने लिखा, “700 जान लेकर ज्ञान देने आया था। पंजाब, आपने बहुत अच्छा किया।” उसने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “कभी-कभी जनता का सामना भी करना चाहिए। वैसे भी अपने सुरक्षा कवच वाले SUV में बैठे 15-20 मिनट। सुरक्षा चूक तो तब होता है जब कोई गाड़ियों से कुचल दे और फिर भी छाती तान कर मंत्री बना रहे।”

वहीं यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास BV ने इसे ‘खाली कुर्सियों के कारण रद्द हुई रैली’ बताते हुए लिखा, “मोदी जी, हाउ इज द जोश?” वहीं कांग्रेस समर्थक पत्रकार संजुक्ता बासु ने दावा किया कि पीएम मोदी के साथ इसी तरह का व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने लिखा कि पीएम मोदी को पता होना चाहिए कि नकार दिया जाना, कचरे में फेंक दिया जाना और पूजित न होना क्या होता है। उन्होंने ‘प्रेरणा देने के लिए’ पंजाब का धन्यवाद देते हुए लिखा कि पंजाब ने दिखा दिया है।

वहीं कांग्रेस पार्टी के अल्पसंख्यक सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी ने लिखा, “अपनी पर आया किसान – उलटे पैर लौटे प्रधान”। इसी तरह पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने लिखा, “प्रिय नड्डा जी, रैली रद्द होने का कारण ख़ाली कुर्सियाँ रहीं। यक़ीन न हो तो, देख लीजिए। और हाँ, बेतुकी बयानबाज़ी नहीं, किसान विरोधी मानसिकता का सच स्वीकार कीजिए और आत्म मंथन कीजिए। पंजाब के लोगों ने रैली से दूरी बनाकर अहंकारी सत्ता को आईना दिखा दिया है।”

इसी तरह जश्न में शामिल होते हुए पूर्व पत्रकार और अब YouTube से प्रोपेगंडा फैलाने वाले पुण्य प्रसून बाजपेयी ने लिखा, “पीएम की फ़िरोज़पुर रैली रद्द। वजह – 1. प्रदर्शनकारी 2. मौसम 3. ख़ाली कुर्सी”।

इसी तरह पंजाब के खेल मंत्री परगट सिंह ने लिखा, “आज पंजाब कांग्रेस ‘पंजाब विरोधी मोदी’ अभियान चला कर अपना विरोध दिखाएगा। ये पंजाब के मूड का प्रतिनिधित्व करेगा। ये दिखाएगा कि पंजाब के लोग उनसे नफरत करते हैं।” परगट सिंह भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे हैं और जालंधर केंट से विधायक हैं।

वहीं स्मृति ईरानी ने कई प्रश्नों का पंजाब सरकार से जवाब माँगते हुए कहा कि इस तरह की चूक इतिहास में पहले कभी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि वो लोग जानते हैं कि कांग्रेस को मोदी से नफरत हैं, लेकिन आज उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री को नुकसान पहुँचाना चाहा है। पंजाब के डीजीपी ने क्या जानबूझकर पीएम के सुरक्षा दस्ते से कहा कि जिस रास्ते से उन्हें जाना है वहाँ कोई गतिरोध नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं ये सब जानबूझकर तो नहीं किया गया था।

पंजाब के उप-मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने माना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक हुई है। जबकि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक की बात से इनकार किया था। इस तरह पंजाब सरकार के दो सबसे बड़े नेताओं के बयानों में ही विरोधाभास नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बठिंडा से दिल्ली वापस लौट आए हैं और फिरोजपुर रैली रद्द कर दी गई है। कॉन्ग्रेस वाले इस सुरक्षा में सेंध का सोशल मीडिया पर जश्न मना रहे।

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‘ये सुरक्षा चूक है’: पंजाब के उप-मुख्यमंत्री ने ही काटी मुख्यमंत्री चन्नी की बात
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‘ये सुरक्षा चूक है’: पंजाब के उप-मुख्यमंत्री ने ही काटी मुख्यमंत्री चन्नी की बात

‘रिपब्लिक भारत’ से बात करते हुए डिप्टी सीएम रंधावा ने कहा कि पंजाब पुलिस और प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लगी ‘विशेष सुरक्षा बल (SPG)’ की बैठकें हुई थीं, जिनमें ‘आसूचना ब्यूरो (IB)’ के लोग भी शामिल रहे थे। उन्होंने कहा कि उन बैठकों में कहीं भी राज्य के गृह मंत्री को नहीं प्रतिभागी बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि पंजाब के किसानों के साथ भी बैठक होती रही। उन्होंने कहा कि रूट के साथ एक वैकल्पिक रूट भी लगना चाहिए था, जो नहीं हो पाया।

पंजाब : मोदी की सुरक्षा में बड़ी सेंध, प्रदर्शनकारियों के कारण वापस लौटे: चन्नी ने फोन तक नहीं उठाया

                                              पंजाब में कई मिनट तक अटका रहा पीएम मोदी का काफिला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे के दौरान सुरक्षा में सेंध का मामला सामने आया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने जारी किया बयान। MHA ने अपने बयान में कहा है कि बुधवार (5 जनवरी, 2022) को पीएम मोदी का विमान भठिंडा में लैंड हुआ, जहाँ से उन्हें हैलीकॉप्टर से हुसैनीवाला स्थित ‘नेशनल मार्टियर्स मेमोरियल’ जाना था। बारिश और विजिबिलिटी कम होने के कारण उन्हें मौसम के ठीक होने के लिए 20 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। वहाँ उन्हें ‘राष्ट्रीय शहीदी स्मारक’ में बलिदानी क्रांतिकारियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करनी थी।

जब मौसम ठीक नहीं हुआ तो निर्णय लिया गया कि सड़क मार्ग से ही प्रधानमंत्री हुसैनीवाला तक का सफर तय करेंगे। जब प्रधानमंत्री का काफिला एक फ्लाईओवर पर पहुँचा तो वहाँ पता चला कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने रास्ता जाम कर के रखा हुआ था। लगभग 15-20 मिनट तक पीएम मोदी वहाँ फँसे रहे। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में एक बड़ी सेंध बताया जा रहा है। बता दें कि सड़क मार्ग से ये यात्रा दो घंटे में तय होनी थी, जिसके लिए पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक (DGP) को ज़रूरी प्रबंधन करने के निर्देश दे दिए गए थे।

हुसैनीवाला से 30 किलोमीटर दूर पीएम मोदी का काफिला फँसा रहा। पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार को पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे और उनके कार्यक्रमों के विवरण से अवगत करा दिया गया था। MHA ने भी इसकी पुष्टि की है। MHA के अनुसार, ये पंजाब के पुलिस-प्रशासन का काम था कि वो प्रबंधन के लिए ज़रूरी संसाधन की माँग करें और किसी आकस्मिक स्थिति के विषय में योजना तैयार करें। MHA ने बताया है कि सड़क मार्ग पर सुरक्षा के लिए पंजाब सरकार ने ज़रूरी प्रबंध नहीं किए, अतिरिक्त बल तैनात नहीं किया।

                                                       भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का बयान

MHA ने कहा, “सुरक्षा में इस चूक के बाद निर्णय लिया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला वापस भठिंडा एयरपोर्ट पर जाएगा। सुरक्षा में इस गंभीर चूक के बाद पंजाब की राज्य सरकार से भी डिटेल में रिपोर्ट तलब की गई है। साथ ही राज्य सरकार को कहा गया है कि वो इस मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई करे।” भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि हजारों करोड़ रुपयों की विकास परियोजनाओं की सौगात देने पंजाब पहुँचे पीएम मोदी के कार्यक्रम में बाधा पैदा किया जाना व्यथित करने वाला है।

जेपी नड्डा ने कहा कि इस तरह की ओछी मानसिकता को पंजाब के विकास के आड़े नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी पंजाब के विकास के लिए लगातार प्रयास करती रहेगी। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार को पहले ही निर्देश दे दिया गया था कि वो लोगों को रैली में हिस्सा लेने से रोके। पुलिस के कारण बड़ी संख्या में बसें अटकी रहीं और प्रदर्शनकारियों के साथ वो मौन सहमति में थे। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने फोन उठाने या फिर मामले का समाधान करने से इनकार कर दिया। पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार के इन हथकंडों से लोकतांत्रिक सिद्धांतों में विश्वास रखने वालों को ठेस पहुँचेगी।”