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पंजाब : बार-बार बयान बदल रहे मुख्यमंत्री चन्नी, भारतीय किसान संघ (क्रांतिकारी) ने ली जिम्मेदारी, उपद्रवियों के साथ चाय पी रही थी पंजाब पुलिस

पंजाब के बठिंडा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में बड़ी चूक के कारण प्रदर्शनकारियों को उनके रूट का पता चल गया और फ्लाईओवर पर भीड़ जुट गई। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी फिरोजपुर रैली को रद्द कर के वापस लौटना पड़ा। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी लगातार बयान बदल रहे हैं। पहले उन्होंने बयान दिया कि रैली में 70,000 कुर्सी लगी थी, लेकिन 700 लोग ही आए। फिर उन्होंने इस घटना को ‘कुदरती’ करार दिया। कांग्रेस नेता इस घटना पर जश्न मना रहे।

कांग्रेस पार्टी द्वारा कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे अनुभवी प्रशासक को हटा कर मुख्यमंत्री बनाए गए चरणजीत सिंह चन्नी ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा में किसी प्रकार की सेंध या चूक की बात नकारते हुए कह दिया कि अंतिम समय में योजना बदल दी गई थी। इसके बाद अपने बयान में उन्होंने कहा कि देर रात तक वो खुद पीएम मोदी के दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखे हुए थे। वहीं उप-मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सीएम चन्नी के बयान के विरोधाभास में माना कि सचमुच सुरक्षा में चूक हुई है।

कांग्रेस नेता दोपहर से ही खाली कुर्सियों की तस्वीरें शेयर कर-कर के दावा कर रहे हैं कि इसी वजह से पीएम मोदी की रैली रद्द हुई है। जबकि भाजपा नेताओं ने तस्वीरें और वीडियोज शेयर कर के दिखा दिया कि सुबह से ही लोग प्रधानमंत्री को सुनने के लिए जुटे हुए थे और कार्यक्रम स्थल पर भारी भीड़ थी। भाजपा के आईटी सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित मालवीय ने कहा कि CS और DGP को प्रधानमंत्री के काफिले के साथ होना चाहिए, लेकिन इस बार ये दोनों ही गायब थे।

मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का भी कहना है कि कुछ कोरोना संक्रमितों के संपर्क में आने के कारण उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया है और इसीलिए वो पीएम मोदी को रिसीव करने नहीं जा सके। उन्होंने पंजाब सरकार पर लगातार झूठ बोलने के आरोप लगाए। इसी तरह मीडिया में पहले खबर आई कि फिरोजपुर के SSP को निलंबित किया गया है, लेकिन सीएम चन्नी ने फिर इसका खंडन कर दिया। अब वो स्वीकार कर रहे हैं कि पीएम मोदी के रूट में प्रदर्शनकारियों के होने का उन्हें पता था।

प्रधानमंत्री को कहीं जाना हो तो पहले उस रूट के रिहर्सल किया जाता है, जो इस बार भी हुआ था। इससे ये दावा गलत साबित हो जाता है कि अंतिम समय में योजना बदलने से दिक्कत हुई। वीडियो में ये भी सामने आया है कि पंजाब पुलिस उन प्रदर्शनकारियों के साथ चाय की चुस्की ले रही थी, जिन्होंने प्रधानमंत्री के काफिले को 20 मिनट तक रोके रखा। जिस जगह ये घटना हुई, वो पाकिस्तान की सीमा से 30 किलोमीटर की दूरी पर ही है। वहाँ से अक्सर बम बरामद होते रहते हैं।

मीडिया के सामने ही प्रदर्शनकारी ये स्वीकार करते हुए दिख रहे हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री के रूट का पूरा पता था। सवाल ये है कि जब ये जानकारी सिर्फ पंजाब पुलिस को ही थी, फिर कहाँ से प्रदर्शनकारियों को सारी बातें लीक हुई? प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने कई बसों को तबाह कर दिया और भाजपा कार्यकर्ताओं पर भी हमले किए। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा वहाँ कमजोर हो गई थी और कुछ भी हो सकता था। इन सबका दोषी कौन?

अवलोकन करें:-

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वहीं ‘भारतीय किसान संघ (क्रांतिकारी)’ नामक संगठन ने पीएम मोदी के काफिले को रोकने रखने की जिम्मेदारी ली है। पियारेना गाँव के पास ये घटना हुई थी। BKU (क्रांतिकारी) के महासचिव बलदेव जीरा का कहना है कि उन्होंने ‘अभिमानी’ मोदी को सबक सिखाया है। ये संगठन वामपंथी है और ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ का हिस्सा भी। 2009 में यूनियन के अध्यक्ष सुरजीत फूल माओवादियों से सम्बन्ध रखने के कारण UAPA के तहत गिरफ्तार भी हुए थे। 31 दिसंबर, 2021 को ही किसान संगठनों ने बरनाला में बैठक कर के इस दौरे को बाधित करने की साजिश रच ली थी।

पंजाब के CM Channi के ‘दिवाली गिफ्ट’ का सिद्धू ने निकाल दिया दिवाला; गरजे-यह सब झूठ और फरेब

अब राजनीति मिशन नहीं, धंधा बन चुकी है : सिद्धू

सलामी बल्लेबाज रहे नवजोत सिंह सिद्धू के चलते पंजाब में पॉलिटिक्स बेहद दिलचस्प हो रही है। सिद्धू जैसे धुरंधर के कारण पंजाब के मुख्यमंत्री को विपक्ष की जरूरत नहीं है। कैप्टन अमरिंदर सिंह को हिट विकेट कर चुके सिद्धू के निशाने पर अब मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी आ गए हैं। पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिद्धू ने फिर अपनी ही पंजाब सरकार पर बड़ा हमला किया है।
पंजाब में बिजली 3 रुपए सस्ती कर मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी ने इसे दिवाली गिफ्ट बताया था। उसे ही सिद्धू बुलंद आवाज में झूठ और फरेब बता रहे हैं। सिद्धू ने करारी चोट करते हुए कहा कि पौने 5 साल मौज कर आखिरी 2 महीने में लॉलीपॉप बांटे जा रहे हैं। सत्ता में आना है और उसके लिए झूठ बोलना है। 500 झूठे वादे कर सत्ता हासिल करने की कोशिश की जा रही है। सिद्धू ने कहा कि पंजाब में अब राजनीति मिशन नहीं, धंधा बन चुकी है। सिद्धू के करारे शॉट पर चन्नी सरकार बगलें झांकने को मजबूर हो गई है। चरणजीत चन्नी के दिवाली गिफ्ट का सिद्धू ने दिवाला निकाल दिया है।
पंजाब में चुनाव नजदीक आते ही सीएम चरणजीत चन्नी ने कैबिनेट की मीटिंग के बाद कहा कि पंजाब में घरेलू बिजली की दरें 3 रुपए सस्ती कर दी गई हैं। 100 यूनिट तक बिजली का रेट 4.19 पैसे से घटकर 1.19 रुपए रह जाएगा। वहीं 100 से 300 यूनिट तक 7 रुपए से घटकर 4.01 रुपए और इसके ऊपर के लिए 5.76 रुपए प्रति यूनिट रेट रह गया है। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं और करीब डेढ़ या दो महीने में इसकी घोषणा भी हो जाएगी। ऐसे में पंजाब के सीएम ने बिजली की कम दरों को दिवाली का गिफ्ट बताकर सियासी दांव खेलने की कोशिश की है।
पौने 5 साल मौज, अब आखिरी 2 महीने में लॉलीपॉप

सीएम के इस दिवाली गिफ्ट की हवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सिद्धू ने निकाल दी है। सिद्धू ने करारी चोट करते हुए कहा कि पौने 5 साल मौज कर आखिरी 2 महीने में लॉलीपॉप बांटे जा रहे हैं। उन्होंने बगैर नाम लिए मुख्यमंत्री से पूछा कि जो सब्सिडी दोगे, वह पैसा कहां से आएगा ? सिद्धू ने कहा कि पंजाब के विकास का रोड मैप क्या है? यह नेताओं को बताना चाहिए। सिद्धू ने सीएम चन्नी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से कुछ देर पहले ही यह निशाना साधा। हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम चन्नी ने कहा कि कुछ लोग जरूर सोचेंगे कि यह सब चुनाव की वजह से किया जा रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है।
शिरोमणि अकाली दल ने भी बिजली सस्ती करने के ऐलान को लोगों से धोखाधड़ी बताया है। अकाली दल के प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सिर्फ एक बार के बिजली बिल के लिए यह ऐलान किया है। मुख्यमंत्री चन्नी और उनकी सरकार भी जानती है कि जनवरी से चुनाव आचार संहिता लग जानी है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के नेता चाहते हैं कि आचार संहिता लग जाने से पहले लोगों को एक बिजली बिल मिल जाएं और उन्हें लगने लगे कि बिजली सस्ती कर दी गई है।
‘अब राजनीति मिशन नहीं, धंधा बन चुकी है’
उधर चंडीगढ़ में संयुक्त हिंदू महासभा के कार्यक्रम में सिद्धू ने सरकार से पूछा कि पंजाब का कल्याण कैसे होगा? कोई नहीं बताता। पौने 5 साल सब एक-दूसरे को नीचे गिराने में लगे रहे। जुल्म करते रहे। आखिरी 2 महीने में आसमान जमीन पर ला रहे। तारे तोड़कर दे रहे। कोई बताएगा कि यह सब कहां से देंगे? सिद्धू ने कहा कि क्या पंजाब में मकसद सिर्फ सरकार बनाना है। सत्ता में आना है और उसके लिए झूठ बोलना है। 500 झूठे वादे कर सत्ता हासिल करने की कोशिश की जा रही है। सिद्धू ने कहा कि पंजाब में अब राजनीति मिशन नहीं, धंधा बन चुकी है।
सिद्धू ने पूछा कि अगर पंजाब के पास खजाना है तो इंडस्ट्री को सब्सिडी दो। उन्होंने कहा कि पंजाब में 5.40 लाख करोड़ टैक्स आता है। इनमें 75% सिर्फ इंडस्ट्री से मिलता है। फिर पंजाब में इंडस्ट्री क्यों नहीं आ रही। हिमाचल प्रदेश में क्यों जा रही है? पंजाब 17-18वें नंबर पर क्यों है? सिद्धू ने कहा कि अगर कोई आपको कहता है कि पंजाब का खजाना भरा है तो यह झूठ है। अगर ऐसा है तो ईटीटी टीचरों को 50-50 हजार वेतन दे दो। 2004 से जिन्हें पेंशन नहीं मिली, उन्हें पेंशन दे दो। क्या पंजाब के पास 50 हजार करोड़ रुपए सरप्लस है। दिल्ली और तमिलनाडु के पास है। सिद्धू ने कहा कि एजेंडों पर वोट डालो, किसी के लॉलीपॉप पर नहीं। सिद्धू ने कहा कि हम कर्जा लेकर कर्जा भर रहे हैं।
सिद्धू ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी नहीं बख्शा। सिद्धू ने कहा कि जो कहते थे, मेरी सरकार और मेरा पंजाब है, उन्हें उठाकर फेंक दिया। उन्होंने कहा कि सीएम और मंत्री एक्स हो जाते हैं, लेकिन कार्यकर्ता हमेशा ताकतवर रहता है। सिद्धू ने इशारों में यह भी स्पष्ट किया कि अगले चुनाव में वह पंजाब के सीएम पद के दावेदार होंगे। सिद्धू ने कहा कि लोगों को फैसला करना है कि किसी चोर को बिठाना है या फिर ईमानदार को। उन्होंने कहा कि इस बार पंजाब को पार्टियों से ऊपर उठकर वारिस को चुनना होगा।
अकाली दल ने कहा-सिद्धू के मुद्दों पर जवाब दें चन्नी
अकाली दल प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू के सोमवार को दिए गए एक भाषण की क्लिप सुनाते हुए कहा कि कांग्रेस का प्रधान तो खुद बोल रहा है कि साढ़े चार साल कोई काम नहीं किया। एक-दूसरे की टांग खिंचाई में लगे रहे और अब चुनाव से पहले दो महीने में लोगों को खैरात देकर क्या सरकार बनाना चाहते हैं? चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री और कांग्रेस को सिद्धू की ओर से उठाए गए मुददों का जवाब देना चाहिए और बताना चाहिए कि वह सही बोल रहे हैं या नहीं?

लोहे की सीढ़ी पर चढ़ पंजाब CM जोड़ रहे बिजली की तार; नेताओं को कानून तोड़ने का अधिकार क्यों?

जिस प्रकार नेता वोट के चक्कर में कटे हुए बिजली कनेक्शन को जोड़ देते हैं, यदि स्थिति एकदम विपरीत होती क्या बिजली विभाग चुप रहता? आम नागरिक द्वारा यही काम करने पर ये ही कानून की दुहाई देने लगते, पता नहीं कितनी दफाएं लगा दी जातीं। कुछ वर्ष पूर्व यही गैर-कानूनी काम दिल्ली के वर्तमान मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी किया था, लेकिन कानून खामोश। नेताओं को कानून तोड़ने का अधिकार क्यों? अंग्रेजी में एक कहावत है You show me the man, I will show you the rules शत-प्रतिशत चरितार्थ हो रही है।  
पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की सोशल मीडिया पर एक तस्वीर सामने आई है। इसमें वह बिजली के खंबे पर खड़े दिख रहे हैं। वहीं नीचे कई महिलाएँ हैं जो कैमरे की ओर चेहरा करके अपनी फोटो खिंचा रही हैं।

इस तस्वीर को शेयर करते हुए पंजाब प्रदेश कांग्रेस सेवादल ने कहा, “बिजली बिल बकाया होने पर विभाग ने एक किसान परिवार का कनेक्शन काट दिया था, पंजाब सीएम चन्नी साहब ने खुद अपने हाथों से पुनः कनेक्शन जोड़ा। पंजाब कांग्रेस जिंदाबाद ,चन्नी साहब जिंदाबाद।”

सोशल मीडिया पर पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की यह तस्वीर खूब शेयर हो रही है। हालाँकि यह हालिया तस्वीर है या नहीं, इसकी पुष्टि ऑपइंडिया नहीं करता। लेकिन दावा है कि कुराली में बिजली का बिल न भरने के कारण गरीबों का कनेक्शन काट दिया गया था। ऐसे में चरणजीत सिंह खुद कुराली गए और खंभे पर चढ़कर कनेक्शन को जोड़ा।

इस बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस फोटो को देख चन्नी पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। कोई कह रहा है कि यह कोई साधारण व्यक्ति नहीं है, यह पंजाब के मौजूदा मुख्यमंत्री चन्नी साहब हैं जो लोकल जनता का परेशानी नहीं देख सकते।

वहीं कुछ का कहना है, “मुख्यमंत्री के इशारे पर तो एक नहीं सौ पम्पघरों के बिजली कनेक्शन दो मिनट में लग जाएँ। तो चन्नी मुख्यमंत्री बनो ड्रामेबाज तो पहले ही बहुत हैं।”

राहुल मेहरा कहते हैं, “पंजाब में जल्द ही इलेक्शन होने वाले हैं इसलिए चरणजीत सिंह चन्नी फोटो सेशन में व्यस्त हो रखे हैं। फोटो सेशन इसलिए क्योंकि उनके कहने भर से बिजली विभाग हर काम कर देगा! अमृतसर में डेंगू का प्रकोप इतना है के हर घर से कोई ना कोई हॉस्पिटल में है, लेकिन चन्नी जी को तो सिर्फ…।”

हिंगलाग दान कहते हैं, “चरणजीत चन्नी की पहल तो अच्छी है लेकिन पोज अच्छा नहीं है। ऊपर चढ़ना, फिर सबको बिजली पोल के पास बुलाना, एक कतार में खड़ा करना, फिर फोटो खिंचवाना। मतलब उद्देश्य फोटो खिंचवाने का ही था।”

मयंक लिखते हैं, “लोहे की सीढ़ी से बिजली कनेक्शन जोड़ते पंजाब के यशस्वी मुख्यमंत्री चन्नी साहब। ये लोहे की सीढ़ी जरूर सिद्धू ने भेजी होगी।”

दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के अकॉउंट से जिस मुद्दे (बिजली काटने और उसे पुन: जोड़ने) पर सीएम चन्नी के लिए वाह-वाही बटोरने का काम किया जा रहा है। वो मुद्दा और उसका समाधान उनके ही अधीन है। कांग्रेस शासित प्रदेश में अगर मुख्यमंत्री नहीं चाहते कि किसी के यहाँ से बिजली जाए तो ये सोचने का विषय है कि कैसे बिजली विभाग अपने आप आम जनता के घरों में ये एक्शन ले सकता है।

पंजाब चुनाव : कहीं पंजाब को कंगाल न कर दे मुफ्त बिजली-पानी का दांव

पंजाब में वोट बटोरने के लिए मुफ्त बिजली, पानी और सीवरेज का शिगुफा। जिस पंजाब को विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ाने की बात होनी चाहिए थी। जहां रोगजार के मुद्दे पर योजनाएं तैयार की जानी चाहिए थी। किसानों की आय कैसे बढ़े, उन्हें फसलों की बेहतर कीमत कैसे मिले इस बात पर मंथन होना चाहिए था। वहां चुनावी मौसम में वोट बटोरने के लिए मुफ्तखोरी को मुद्दा बनाया जा रहा है। पहले मुफ्त बिजली का एलान हुआ, अब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुफ्त सीवरेज और पानी बिल के बकाया माफ करने के एलान कर दिया गया है। 

मुफ्तखोरी के चक्कर में महंगाई और भ्रष्टाचार कितना बढ़ रहा है, जनता उससे बिल्कुल अनजान है। दूसरे, जनता को नहीं मालूम कि मुफ्त बिजली और पानी का प्रलोभन देकर सत्ता पर काबिज होने वाले ये ही नेता जनता से कहीं अधिक फ्री की सुविधाओं का आनंद लेकर शहंशाहों की ज़िंदगी जी रहे हैं। जनता को नहीं मालूम कि निर्वाचित होने पर शपथ लेते ही नेता पेंशन के हक़दार हो जाते हैं। जो सरकारी खजाने पर हर महीने करोड़ों का भार पड़ रहा है, अन्य सुख-सुविधाएं अलग। इन लोगों ने राजनीति को सफेदपोश व्यापार बना दिया है। जिस दिन जनता मुफ्त के प्रलोभनों को ठुकराकर इन्हीं नेताओं और उनकी पार्टियों से मुफ्त की सुविधाओं को त्याग एक जनसेवक के रूप में काम करने की आवाज़ उठाएंगे, सरकारी खजाने में हर माह करोड़ों की बचत होने से महंगाई उम्मीद से कहीं अधिक कम हो जाएगी। केवल पेंशन का ही सरकारी खजाने पर हर महीने करोड़ों का भार पड़ रहा है। फिर जनता रोती है महंगाई को।  

मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी ने इस एलान से पंजाब के ग्रामीण मतदाताओं के साथ शहरी वोटरों को भी साधने की कोशिश की है। पंजाब सरकार बिजली बिल पर माफी का बड़ा फैसला पहले ही ले चुकी है। ऐसे में सवाल है कि नए सीएम के इन फैसलों से, पंजाब कहीं कंगाली के रास्ते पर तो नहीं बढ़ रहा।

पंजाब में लोगों को मुफ्त की रेवड़ियां बांटने की जिस राजनीति को हवा दी जा रही है, इसे लेकर ट्वीटर पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है, बिजली बिल माफ करने के सीएम चन्नी के फैसले पर पहे ही सवाल उठाए जा चुके हैं। 

कांग्रेस की वोट बैंक पॉलिटिक्स से कंगाल होंगे पंजाब के नगर निगम

पंजाब में मुफ्त की सियासत कर कांग्रेस एक बार फिर से वोटरों को साधने का अपना पुराना दांव आजमाना चाहती है, लेकिन इस सियासत की हकीकत का रास्ता कितना मुश्किल है और इन लोकलुभावन फैसलों से पंजाब को कितना नुकसान पहुंचेगा इसे नजरअंदाज किया जा रहा है। 

सीवरेज और पानी को लेकर मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी के आदेश के मुताबिक पंजाब में 125 वर्ग गज तक पानी और सीवरेज का बिल पूरी तरह माफ रहेगा। इसके ऊपर के सभी लोगों के लिए पानी का बिल 50 रुपए फिक्स किया गया है। मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी ने ये भी एलान किया है कि शहरी क्षेत्रों में वाटर सप्लाई के बकाया बिजली बिल पंजाब सरकार सीधे पावरकाम (PSPCL) को देगी। यह आदेश 21 अक्टूबर से पहले के बकाया बिलों पर लागू होगा।

वोट के लिए पंजाब सरकार ने मुफ्त पानी और बिजली का फैसला तो कर लिया, लेकिन इससे पंजाब के नगर निगमों की माली हालत डंवाडोल होने वाली है । लोगों की सहूलियत के लिए पहले से जारी कई प्रोजोकेट्स पर भी इस फैसला का खराब असर पड़ सकता है। लेकिन इसकी फिक्र किसी को नहीं की। सवाल ये है कि जब नगर निगम के हाथ खाली होंगे तो सीवर की सफाई के साथ आम लोगों के घरों तक पीने का साफ पानी पहुंचाने के काम कैसे होगा। क्या पंजाब सरकार के फैसले से नगर निगमों की कमाई को जो चूना लगेगा, उसकी भरपाई पंजाब सरकार करेगी। 

सीएम चन्नी पहले ही दे चुके हैं बिजली बिल माफी की सौगात

सीएम बनते ही चरणजीत चन्नी ने पंजाब में बिजली बिल माफी की सौगात का एलान कर दिया था। 

  • 2 किलोवॉट तक के कनेक्शन वालों को यह राहत दी गई
  • इस दायरे में करीब 53 लाख परिवार आते हैं
  • पंजाब सरकार ने 1,200 करोड़ का बिजली बिल माफ किया है
  • एक लाख उन उपभोक्ताओं को बिजली का फ्री कनेक्शन मिलेगा
  • इन कनेक्शन को काया बिल की वजह से काटा गया था

पंजाब में बिजली माफी पर सियासत नई नहीं है, कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने पॉवर कट के मुद्दे पर अमरिंदर सिंह सरकार को कई बार घेरा था। लेकिन सवाल है कि जब पंजाब में मुफ्त बिजली की रेवड़ियां बांटी जाएंगी तो बिजली संकट से कैसे निपटा जा सकेगा। 

पंजाब में मुफ्त-बिजली पानी के वादों में केजरीवाल भी पीछे नहीं 

पंजाब में वोटरों को मुफ्त सुविधाओं के वादे करने में केरीवाल सरकार भी पीछे नहीं है। इसी तरह के वादों के दम पर वे दिल्ली के लोगों को झांसा देने में कामयाब रहे। इसलिए वो झूठ और मुफ्त के वादे को जीत का मूल मंत्र मान चुके हैं। अब वो इसी मंत्र के माध्यम से दूसरे राज्यों में भी पार्टी का विस्तार करना चाहते हैं।

पंजाब चुनाव से पहले उन्होंने अपने मुफ्त का पिटारा खोल दिया है। लेकिन लगता है कि उन्होंने पंजाब के बारे में पूरा होमवर्क किए बिना ही अपना दांव चल दिया है। इसलिए चुनाव से पहले ही अपने मुफ्त के वादों से पलटना और नियम व शर्ते लागू करना शुरू कर दिया है।  

केजरीवाल ने 29 जून, 2021 को 300 यूनिट फ्री बिजली देने की घोषणा की थी, उसी दिन शाम होते-होते वादों के साथ ‘नियम एवं शर्तें’ भी जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि एसी-एसटी, ओबीसी और बीपीएल परिवारों को 300 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी। यानि, सामान्य वर्ग को इस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा। शायद केजरीवाल को ये पता ही नहीं है कि पंजाब में पहले से ही एससी, बीसी और बीपीएल परिवारों को 200 यूनिट फ्री है। वहीं किसानों को पहले ही पंजाब में मुफ्त बिजली मिल रही है और उद्योगों के लिए वहां बिजली का अलग रेट है। इस पर केजरीवाल को सफाई देते नहीं बन रहा।

केजरीवाल ने पंजाब के लोगों को 24 घंटे बिजली सप्लाई का भी वादा किया। अपनी सरकार बनने पर उन्होंने पुराने सारे बकाए बिजली बिल माफ़ करने की भी घोषणा की। लेकिन यहां भी शर्तें लागू कर दीं और कहा कि इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को नए सिरे से आधुनिक बनाना होगा, इसीलिए इसमें समय लगेगा। अब केजरीवाल कहने को 2027 के विधानसभा चुनाव में (अगर उन्होंने 2022 जीता तो) ये भी कह सकते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में ही 5 साल लग गए, इसीलिए अब मुफ्त बिजली अगली बार मिलेगी। केजरीवाल को पता होना चाहिए कि पंजाब पहले से ही पॉवर सरप्लस राज्य है।

पंजाब में मुफ्त सुविधाओं के वादे के बदले रोजगार और विकास के मुद्दों पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की चुप्पी लोगों को खटक रही है, वोटर सवाल पूछ रहे हैं कि पंजाब में आम आदमी से जुड़े असली मुद्दों पर ये राजनीतिक दल चुप क्यों है।

मोदी सरकार ने BSF को दी ‘ताकत’, कैप्टन ने कहा- केंद्र के फैसले से होंगे ज्यादा सुरक्षित और मजबूत; पंजाब और बंगाल बेचैन

देश की सीमाओं की सुरक्षा और सीमा पार से होने वाले आतंकवाद पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। इसके तहत केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) का अधिकार क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 से बढ़ाकर 50 किलोमीटर तक कर दिया है। कांग्रेस शासित पंजाब और तृणमूल कांग्रेस शासित बंगाल ने संघीय ढाँचे पर हमला बताते हुए इस फैसले पर आपत्ति जताई है।

केंद्र के इस फैसले से BSF के कार्यक्षेत्र का दायरा काफी बढ़ गया है। अब BSF 50 किलोमीटर के दायर में गश्ती, सर्च ऑपरेशन, गिरफ्तारी और जब्ती जैसी कार्रवाई कर सकेगा। केंद्र के आदेश के मुताबिक, बल 10 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा करने वाली अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकेगा। इससे पहले BSF को पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में 15 किलोमीटर तक ही कार्रवाई करने का अधिकार था, लेकिन नए आदेश के साथ अब इसे केंद्र या राज्य सरकारों से किसी और अनुमति के बिना 50 किलोमीटर तक कार्रवाई को अधिकृत किया गया है।

हालाँकि, नए आदेश के तहत पूर्वोत्तर भारत के पाँच राज्यों- मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में BSF के अधिकार क्षेत्र में कटौती की गई है। यहाँ पहले इसका अधिकार क्षेत्र 80 किलोमीटर तक था। गुजरात में भी इसके अधिकार क्षेत्र को 80 किलोमीटर से घटाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है। राजस्थान में BSF का अधिकार क्षेत्र 50 किलोमीटर ही रहेगा।

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 11 अक्टूबर 2021 को जारी अधिसूचना के मुताबिक, “मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय राज्यों और जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल पूरे क्षेत्र तथा गुजरात, राजस्थान में पचास किलोमीटर के भीतर का क्षेत्र और पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम की 50 किमी का दायरा बीएसएफ के अधीन होगा।” केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीमा सुरक्षा बल अधिनियम 1968 (1968 का 47) की धारा 139 की उप-धारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर यह कदम उठाया है।

पंजाब मुख्यमंत्री ने किया विरोध 

पंजाब मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस फैसले को पंजाब के साथ धोखा करार दिया है। उनका कहना है कि इससे आधे से अधिक पंजाब केंद्र सरकार के कंट्रोल में चला गया है। उन्होंने ट्विटर पर कहा है कि मैं भारत सरकार के इस एकतरफा फैसले की कड़ी निंदा करता हूँ। इसमें अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के साथ लगे 50 किलोमीटर के दायरे को बीएसएफ के कंट्रोल में दे दिया गया है। यह संघवाद पर हमला है। वहीं सुनील जाखड़ ने कहा है कि केंद्र के फैसले से 50,000 वर्ग किमी में फैले पंजाब का 25,000 वर्ग किमी का दायरा सीधे तौर पर केंद्र के कंट्रोल में चला जाएगा। अब पंजाब पुलिस केवल खड़ी रह जाएगी।

पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने किया स्वागत 

पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गृह मंत्रालय के बीएसएफ का दायरा बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया और केंद्र के इस फैसले का सम्मान करने की अपील की है। उन्होने कहा कि जिस तरह से पंजाब में ड्रग्स की तस्करी और आतंकी खतरा बढ़ा है, अब केंद्र के फैसले से पंजाब सुरक्षित होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि बीएसएफ की बढ़ी हुई उपस्थिति और शक्तियाँ ही हमें मजबूत बनाएँगी। केंद्रीय सशस्त्र बलों को राजनीति में न घसीटें।

वहीं पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र के इस फैसले को तर्कहीन निर्णय और संघवाद पर हमला करार दिया है। बंगाल के मुताबिक, इसके जरिए केंद्र अब राज्यों के अंदरूनी मामलों में केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से हस्तक्षेप करने की कोशिश करेगा। पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री और टीएमसी नेता फिरहाद हकीम ने कहा, “केंद्र सरकार देश के संघीय ढाँचे का उल्लंघन कर रही है। कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है, लेकिन केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रही है।”

सोनिया गाँधी से चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम पद से हटाने की माँग : राष्ट्रीय महिला आयोग अध्यक्षा रेखा शर्मा

संविधान का जितना अधिक मजाक हमारे राजनीतिक दल बना रहे हैं, उसे देख लगता है, संविधान केवल शांतिप्रिय लोगों के लिए है, इन सियासतखोरों के लिए नहीं। जब संविधान सबको बराबरी का अधिकार देता हैं फिर आधार पर जात-पात की गन्दी सियासत खेल खेलकर चुनाव में जनता के धन का दुरूपयोग किया जा रहा है। जातों पर आधारित इतनी पार्टियां हैं, फिर भी उनका उत्थान नहीं हुआ, विपरीत इसके नेताओं का जरूर उत्थान हो गया। आरक्षण भी और चुनाव में भी आरक्षण, क्या है ये सब तमाशा? 
कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद जब कांग्रेस ने पंजाब में मुख्यमंत्री के तौर पर चरणजीत सिंह चन्नी को चुना तो इसे चुनावों से पहले शिअद-बसपा के दलित कार्ड की हवा निकालने के तौर पर देखा गया। लेकिन, दलित संगठनों ने इस फैसले को कांग्रेस का ‘चुनावी स्टंट’ बता नकार दिया है। दूसरी तरफ ‘मीटू’ (#MeToo) के आरोप भी चन्नी और कांग्रेस दोनों की मुसीबत बढ़ाते दिख रहे हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने इसे उठाते हुए सोनिया गाँधी से उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने की माँग की है।

कांग्रेस का ‘चुनावी स्टंट’ बता दलित संगठनों ने दुत्कारा

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चरणजीत सिंह चन्नी को चुनने के कांग्रेस के फैसले की आलोचना करते हुए दलित यूनियनों ने कहा कि पार्टी एक तीर से दो निशाना साधने कर रही है, क्योंकि चन्नी दलित और सिख दोनों हैं। दलित यूनियनों का मानना है कि अगले साल राज्य में चुनाव होने से पहले बँटे हुए दलित वोट को एक ब्लॉक में मजबूत करने के लिए कांग्रेस ने यह रणनीति चली है।

पंजाब खेत मजदूर यूनियन के अध्यक्ष जोरा सिंह नसराली ने इस पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, “यह महज एक चुनावी स्टंट है। चन्नी दलित होने के साथ-साथ सिख भी हैं। पंजाब में अगले चार से पाँच महीने में चुनाव होंगे और चुनाव से 40 दिन पहले आचार संहिता लागू कर दी जाएगी। तो नया चेहरा क्या कर सकता है? वह कहेंगे कि मैं अभी नया हूँ और चीजों को समझने की कोशिश कर रहा हूँ।”

मंडी बोर्ड के महासचिव तरसेम सिंह सेवेवाला ने कहा, “जब तक नीतियाँ नहीं बदली जातीं, तब तक एक दलित सीएम या जाट सिख सीएम को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अब हम नए चुने गए सीएम को अपने सांझा मोर्चा के साथ 23 सितंबर की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए कहेंगे। यह उनके लिए लिटमस टेस्ट होगा और बताएगा कि वह दलितों का कितना ध्यान रखते हैं। हालाँकि, पंजाब में पहले से ही 34 निर्वाचित दलित विधायक हैं। इससे हमारी हालत पर क्या फर्क पड़ा है? दलित को मुख्यमंत्री बनाना हमारे वोट बैंक को निशाना बनाना है। हर राजनीतिक दल हमें निशाना बना रहा है, कांग्रेस भी।”

चुनावी हथकण्डा : मायावती 

दलित नेता और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी चुनाव से ठीक पहले चन्नी को पंजाब के नए मुख्यमंत्री के रूप में शामिल करने के लिए कांग्रेस की आलोचना की है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने इसे आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस का चुनावी हथकंडा बताया।

मायावती ने कहा, “मुझे मीडिया के माध्यम से भी पता चला है कि पंजाब का अगला विधानसभा चुनाव एक गैर-दलित के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। इसका मतलब यह हुआ कि कांग्रेस को अभी भी दलितों पर पूरा भरोसा नहीं है। पंजाब में शिरोमणि अकाली दल-बसपा गठबंधन से भी कांग्रेस  डरी हुई है।”

दलित वोट-बैंक राजनीति खेलने के लिए कांग्रेस पार्टी की आलोचना करते हुए, पंजाब के मजदूर मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष भगवंत समो ने कहा, “शिरोमणि अकाली दल ने दलित वोट बैंक को देखते हुए बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन किया था। उन्होंने यह भी घोषणा की थी कि वे दलित को डिप्टी सीएम बनाएँगे। AAP ने भी इसी तरह की घोषणा की थी। भाजपा ने भी घोषणा की कि वे दलित को मुख्यमंत्री बनाएँगे। इसलिए, कांग्रेस ने अपने आंतरिक कलह को निपटाने के लिए कुछ महीनों के लिए दलित सीएम बनाया है। वे यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि जहाँ अन्य दल घोषणा कर रहे हैं वे पहले ही दलित सीएम बना चुके हैं। यह दलित वोट बैंक की राजनीति है। अगर चन्नी इतने चिंतित थे, तो क्या वे कभी किसी ऐसे धरने पर गए जहाँ दलित विरोध कर रहे हैं? यह हमारे लिए शायद ही मायने रखता है कि सीएम कौन है।”

वहीं जमीं प्रपति संघर्ष समिति के एक सक्रिय सदस्य गुरमुख सिंह ने कहा, “2015 में, चन्नी ने संगरूर जिले के हमारे गाँव घ्राचोन का दौरा किया था, जहाँ दलित वार्षिक पट्टे पर खेती के लिए पंचायती भूमि का अपना हिस्सा पाने के लिए विरोध कर रहे थे। उन्होंने हमें आश्वासन दिया था कि अगर कांग्रेस की सरकार बनती है तो वह हमें 5,000 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन देंगे। लेकिन जब कांग्रेस सत्ता में आई तो उन्होंने इस मुद्दे पर कभी बात नहीं की। अब हम उनके चमकौर साहिब आवास पर जाकर उनसे पूछेंगे कि वह अब सीएम के रूप में क्या कर सकते हैं। सच्चाई जल्द ही सामने आ जाएगी।”

#Metoo का आरोप 

चन्नी पर ‘मीटू’ को लेकर आरोप लग चुका है जिसे लेकर वह कह चुके हैं कि यह तत्कालीन मुख्यमंत्री की शह पर किया गया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा था क्योंकि उन्होंने राज्य में दलित मुद्दों को उठाया था। हालाँकि शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने दलित कार्ड खेलने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की माँग की थी।

इस मामले पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने ANI से बात करते हुए कहा है, “2018 में मीटू आंदोलन के दौरान उनके (चरणजीत सिंह चन्नी) के खिलाफ आरोप लगाए गए थे। राज्य महिला आयोग ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया था और अध्यक्ष उन्हें हटाने की माँग को लेकर धरने पर बैठ गई थीं, लेकिन कुछ नहीं हुआ।”

उन्होंने कहा, “आज उन्हें एक महिला के नेतृत्व वाली पार्टी ने पंजाब का मुख्यमंत्री बनाया है। यह विश्वासघात है। यह महिला सुरक्षा के लिए खतरा है। उनके खिलाफ जाँच होनी चाहिए। वह सीएम बनने लायक नहीं है। मैं सोनिया गाँधी से उन्हें सीएम पद से हटाने का आग्रह करती हूँ।”

मामला 2018 का है और चन्नी पर आरोप लगा था कि उन्होंने एक महिला आईएएस अधिकारी को आपत्तिजनक मैसेज भेजा था। तब इस मामले ने खासा तूल पकड़ा था। हालाँकि महिला अधिकारी ने उस समय शिकायत दर्ज नहीं की थी और अमरिंदर सिंह ने भी कहा था कि मामला सुलझा लिया गया है। 18 मई 2021 को पंजाब महिला आयोग की चीफ मनीषा गुलाटी ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार को नोटिस भेजा था। अब एक बार फिर से ट्विटर पर अरेस्ट चन्नी ट्रेंड कर रहा है।

पंजाब कांग्रेस में शुरू हुआ घमासान, सुनील जाखड़ ने बोला हरीश रावत पर हमला

कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद से पंजाब कांग्रेस में घमासान शुरू हो गया है। हालाँकि अगले मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने आज (सितंबर 20, 2021) आधिकारिक तौर पर शपथ ग्रहण ले ली है। वहीं इस कार्यक्रम से पहले सियासी बयानबाजी शुरू रही।

कहते है न बोया पेड़ बबूल का आम कहां से होए, जो पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा खुद मुख्यमंत्री बनने के चक्कर में प्रदेश के कद्दावर नेता कैप्टेन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में शान से कांग्रेस की सरकार चला रहे थे, के विरुद्ध बिगुल बजाकर अमरिंदर की सरकार नहीं गिराई, बल्कि कांग्रेस को हो हाशिए पर ला दिया है। जिसे देख लगता है कि कांग्रेस में बुद्धिजीवियों का अभाव हो गया है या फिर वह केवल नाममात्र के लिए पार्टी में हैं। 

पार्टी ने केंद्र में रिमोट प्रधानमंत्री बनाकर भी कुछ नहीं सीखा। ठीक वही स्थिति पंजाब में भी हो गयी है, जब अगला चुनाव सिद्धू के नाम पर लड़ा जाएगा, फिर चरणजीत सिंह मुख्यमंत्री जरूर बन गए हैं, लेकिन रिमोट नवजोत के हाथ रहेगा, यानि चरणजीत की अभी से बेइज्जती। अगला चुनाव जीत गए सिद्धू की बल्ले-बल्ले, हार गए तो चरणजीत के सर बदनामी।   

पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत ने साफ किया है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में नवजोत सिंह सिद्धू के चेहरे को आगे रखते हुए चुनाव लड़ा जाएगा। इधर, कांग्रेस नेता सुनील जाखड़ ने हरीश रावत के बयान पर आपत्ति जताई है।

कांग्रेस नेता सुनील जाखड़ ने पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत पर हमला बोला है, उल्लेखनीय है कि हरीश रावत ने कहा था चेहरा तो सिद्धू होंगे, जाखड़ ने इसे गलत करार देते हुए कहा कि ‘यह मुख्यमंत्री के अधिकार को कमजोर करने वाला है.

कांग्रेस आलाकमान द्वारा चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाये जानें के बाद ऐसा लग रहा था कि अब घमासान खत्म हो जाएगा। सीएम तय हो गया है, एक घंटे बाद शपथ ग्रहण समारोह होना है, लेकिन असली घमासान अब शुरू हुआ है..

पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने अपने ट्वीट में लिखा, मुख्यमंत्री के रूप में चरणजीत चन्नी के शपथ ग्रहण के दिन, हरीश रावत का यह कथन कि “चुनाव सिद्धू के नेतृत्व में लड़े जाएंगे”, चौंकाने वाला है। यह मुख्यमंत्री के अधिकार को कमजोर करने वाला है..

पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत ने रविवार को कहा कि ‘राज्य में अगले साल होने वाला विधानसभा चुनाव पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू के नेतृत्व में लड़ा जाएगा, जो राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए बहुत लोकप्रिय हैं.

अगर हरीश रावत के बयान को देखा जाय तो चरणजीत सिंह चन्नी नाम के मुख्यमंत्री होंगे, क्योंकि जब चुनाव सिद्धू के नेतृत्व में लड़ा जाएगा तो सारे फैसले भी वही लेंगे। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि चरणजीत सिंह चन्नी इस अपमान को बर्दाश्त करते हैं या इस्तीफ़ा दे देंगे?

महिला IAS को अश्लील मैसेज: #MeToo आरोपित रहे हैं पंजाब के नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी

कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद पंजाब का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? इसका फैसला हो गया है। कई घंटों की माथापच्ची के बाद चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाए जाने का एलान किया गया है। इससे पहले खबर आई थी कि सुखजिंदर सिंह रंधावा को सीएम बनाया जा सकता है, लेकिन वह आखिरी में बनते-बनते रह गए और हरीश रावत ने चरणजीत सिंह चन्नी के नाम का ऐलान कर दिया।

पंजाब के नए मुख्यमंत्री के रूप में चुने गए चरणजीत सिंह चन्नी के लिए पंजाब की मुख्यमंत्री की कुर्सी काँटों का ताज साबित होने जा रही है। दरअसल उन पर ‘मी-टू’ (Me Too) को लेकर आरोप लग चुका है जिसे लेकर वह कह चुके हैं कि यह तत्कालीन मुख्यमंत्री की शह पर किया गया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा था क्योंकि उन्होंने राज्य में दलित मुद्दों को उठाया था। हालाँकि शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने दलित कार्ड खेलने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की माँग की थी।

मामला 2018 का है और चन्नी पर आरोप लगा था कि उन्होंने एक महिला आईएएस अधिकारी को 2018 में एक आपत्तिजनक मैसेज भेजा था। तब यह मामला खासा तूल पकड़ा था। हालाँकि उस महिला ने उस समय शिकायत दर्ज नहीं की थी और अमरिंदर सिंह ने भी कहा था कि मामला सुलझा लिया गया है। तब चन्नी ने कहा था कि मैसेज गलती से महिला अधिकारी को भेजा गया था।

चन्नी के खिलाफ महिलाओं ने धरने भी दिए और प्रदर्शन भी किए। जिसके बाद चन्नी ने महिला अधिकारी से माफी माँग ली थी। उस समय मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंद सिंह ने कहा था कि मंत्री ने माफी माँग ली है इसलिए यह मामला खत्म हो गया है। यह मामला 2020 में एक बार फिर सामने आया जब कैबिनेट सब कमेटी की एक बैठक के दौरान कैबिनेट मंत्री मनप्रीत बादल और चरणजीत सिंह चन्नी एक्साइज पालिसी को लेकर तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी करण अवतार सिंह से भिड़ गए थे। जिसके बाद दोनों ही मंत्रियों ने बैठक छोड़ दी थी।

इसके बाद कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, चन्नी को मनाने के लिए उनके घर पर गए थे, लेकिन चन्नी ने आरोप लगाया कि बाजवा ने उन्हें धमकी दी कि मुख्यमंत्री उनके खिलाफ मी-टू की फाइल फिर खोल सकते हैं। इसके बाद यह मामला करीब 10 महीनों तक ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। अब एक बार फिर यह मामला तूल पकड़ने लग गया है।

उस समय चन्नी ने कहा था कि मैसेज अश्लील नहीं और रूटीन में ही उन्होंने कई लोगों को भेजा था, जिसमें महिला अधिकारी को भी यह मैसेज चला गया था। चन्नी ने कहा कि उन्होंने दूसरे ही दिन महिला अधिकारी से इस संबंध में गलती मान ली थी और मुख्यमंत्री की हाजिरी में यह मामला हल हो गया था। लेकिन 18 मई 2021 को पंजाब महिला आयोग की चीफ मनीषा गुलाटी ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार को नोटिस भेजा था।

मनीषा गुलाटी ने कहा कि आयोग ने 2018 में इस मामले का स्वत: संंज्ञान लिया था। जिसे लेकर तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखकर जवाब भी माँगा गया। चूँकि तब मुख्यमंत्री ने कहा था कि मामला खत्म हो गया है। इसलिए उन्होंने भी इस मामले को फॉलो नहीं किया, लेकिन अब उन्हें आइएएस अधिकारियों के फोन आ रहे हैं कि वह मंत्री से मिल गई हैं, इसलिए ‘मी-टू’ मामले में कोई कार्रवाई नहीं की।

चेयरपर्सन ने कहा था कि एक सप्ताह में अगर पंजाब सरकार ने उनके पत्र का जवाब नहीं दिया तो वह भूख हड़ताल पर बैठ जाएँगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात से कोई सरोकार नहीं है कि चन्नी और मुख्यमंत्री के बीच क्या चल रहा है।

मनीषा गुलाटी ने यह भी कहा था कि जब स्टेट चीफ सेक्रेटरी महिला है नेशनल पार्टी प्रेसिडेंट महिला है तो महिला आईएएस अधिकारी को कैसे इंसाफ नहीं मिलेगा। सरकार इस मामले में जवाब नहीं देगी तो वो धरने पर बैठेंगी। तब चन्नी ने कहा था कि अमरिंदर सिंह उन्हें परेशान करने के लिए इस तरह की कार्रवाई करवा रहे हैं। अब जब चन्नी मुख्यमंत्री की शपथ लेने जा रहे हैं तो फिर इस बात की पूरी संभावना है कि मामला गरमाएगा क्योंकि अकाली दल ने चन्नी का नाम सामने आते ही ‘मी-टू’ का मामला खड़ा कर दिया है।