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‘प्रतीक सिन्हा सेक्स के लिए पागल, महिलाओं के स्तनों को घूरना उसकी आदत’: AltNews के को-फाउंडर पर MeToo का लगाया आरोप

 

                              प्रतीक सिन्हा पर यौन शोषण का आरोप लगाया (साभार: सोशल मीडिया)
प्रोपगेंडा वेबसाइट AltNews के को-फाउंडर प्रतीक सिन्हा पर एक महिला ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। गुमनाम इंस्टाग्राम हैंडल ‘फाइटफॉरजस्टवर्ल्ड’ से 14 जनवरी 2023 को अपनी आपबीती साझा करते हुए महिला ने कहा कि सिन्हा न केवल जोड़-तोड़ करने वाला और ‘यौन उन्मादी’ हैं, बल्कि वह अन्य महिलाओं के साथ उनके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए भी वही तौर-तरीकों का इस्तेमाल किया, जो उसके साथ किया था।

महिला ने कहा कि उसे ‘आरएसएस की कठपुतली, एक भाजपा नेता’ आदि का तमगा देकर उसके आरोपों को खारिज किया जा सकता है, क्योंकि वह ऑल्ट न्यूज को निशाना बना रही है। महिला ने यह भी कहा कि वह दक्षिणपंथियों से लड़ती आ रही है और इसके लिए उसके अपने तौर-तरीके हैं।

पीड़िता का कहा कि वह प्रतीक सिन्हा को कुछ सालों से जानती है और उनके काम से प्रभावित थी। जब सिन्हा ने उसे फेसबुक मैसेनजर में मैसेज किया तो वह उनसे बात करने लगी। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पहले ही दिन प्रतीक सिन्हा ने उसका मोबाइल नंबर माँग लिया और विश्वास के कारण उसने दे भी दिया। उसके बाद पहले मैसेज, फिर कॉल और अंत में वीडियो कॉल पर बात होने लगी।

महिला ने आरोप लगाया कि प्रतीक सिन्हा ने दो महीने से भी कम समय में ‘दोस्ती से आगे वाली फीलिंग’ को जाहिर किया। इस पर महिला ने अपनी शिक्षा को वजह बताते हुए कहा कि रिलेशनशिप दो साल बाद ही संभव है। महिला का आरोप है कि इसके बाद सिन्हा ने कहा कि ठीक है और वह अन्य किसी की खोज जारी नहीं रखेंगे।

महिला ने आगे बताया कि बीच-बीच में प्रतीक सिन्हा ने कहा कि वह इस रिश्ते को जारी रखना नहीं चाहते और फिर वे अपनी बात से पलट जाते और रिश्ते को जारी रखने पर जोर देते। मई 2021 में उन्होंने रिश्ते को जारी रखने और इसमें समय लगाने की इच्छा जताई थी। महिला ने कहा कि सिन्हा उसके साथ ‘मोनोगैमस’ और ‘एक्सक्लूसिव’ रिश्ता रखना चाहते थे।

महिला ने कहा कि जब वह पूछती कि क्या उनका किसी और साथ भावनात्मक या शारीरिक रिश्ता है तो सिन्हा ने कहा कि मार्च 2019 के बाद से किसी के साथ उनका शारीरिक रिश्ता नहीं रहा है। जुलाई 2021 में सिन्हा ने सितंबर में कोलकाता जाने से पहले पीड़िता को मिलने के लिए बुलाया और इस दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने।

महिला ने आरोप लगाया कि पढ़ाई खत्म होने के बाद उसने सिन्हा से शादी करने की बात कही, लेकिन सिन्हा ने बाद कहा कि इस रिश्ते को लेकर वह जो भी कह रहे थे, वह एक नाटक भर था। महिला ने कहा कि इस दौरान प्रतीक सिन्हा के अन्य महिलाओं के साथ भी रिश्ते बन रहे थे। जब शादी से इनकार की बात उसने सुनी तो वह बहुत परेशान हो गई और सिन्हा को चेतावनी दी कि वह इस रिश्ते को सार्वजनिक करेगी।

महिला का आरोप है कि इस बीच दोनों के मध्य रिश्ते को सुलझाने के लिए सिन्हा की एक ‘दोस्त’ आई और उसने बताया कि सिन्हा के कई महिलाओं के साथ शारीरिक संबंध थे। महिला ने कहा कि उस दोस्त से उसे पता चला कि एक गंभीर रिश्ते के बारे में नाटक करना और बिस्तर पर एक महिला को पाने के लिए झूठ बोलना प्रतीक सिन्हा की कार्यप्रणाली है। 

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उस दोस्त ने बताया कि प्रतीक सिन्हा सेक्स मैनियाक है, जो ‘सेक्स के लिए बेताब रहता है और महिलाओं को अपने बिस्तर पर लाने के लिए किसी भी हद तक झूठ बोल सकता है’। वह महिलाओं को रात में वीडियो कॉल करने का दबाव डालता है। महिला ने प्रतीक सिन्हा को ‘महिलाओं के स्तनों को घूरने वाला’ बताया, जो सिर्फ महिला अधिकारों का दिखावा करता है।

इस दौरान महिला ने यह भी कहा कि उसकी शिकायत AltNews या उसके किसी और एंप्लॉई से नहीं है। उसने इस दौरान दक्षिणपंथियों पर भी निशाना साधा और कहा कि वे सब फेक न्यूज फैलाते हैं।

‘नंगी तस्वीरें माँगता, ओरल सेक्स के लिए जबरदस्ती’: हिंदूफोबिक कॉमेडियन संजय राजौरा की करतूत को महिला ने किया उजागर

मोदी के राजनीति में आने के बाद से देश में हिन्दू फोबिया इतना अधिक हो गया, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। और इनको प्रभावशाली बनाने का काम कर रहे इनके प्रशंसक। हिन्दू होते हुए हिन्दुत्व को अपमानित कर रहे हैं। कोई इनसे यह नहीं पूछता कि मोदी का विरोध क्या हिन्दू और हिन्दुत्व को अपमानित करने से होगा? इन्हीं लोगों के आज देशवासी अपने वास्तविक इतिहास से अज्ञान हैं। वास्तविक इतिहास की बात करने वाले को ये और इनके प्रशंसक उसे संघी, बजरंगी, भाजपाई और फिरकापरस्त आदि नामों से बदनाम करते हैं। यमुना को जमुना बना दिया और मूर्ख हिन्दू शिक्षित होते हुए भी यमुना को जमुना बोलता है। अरे भाई, यमुना जमुना कब से हो गयी? 
लगभग 20 साल के उम्र वाली एक लड़की ने कॉमेडियन संजय राजौरा पर यौन उत्पीड़न का आरोप मढ़ा है। महिला ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए राजौरा पर इल्जाम लगाए। कॉमेडियन इस समय कॉमेडी कलेक्टिव ‘ऐसी तैसी डेमोक्रेसी’ का सदस्य है।’

23 सितंबर को लड़की ने अपनी पहचान तारा बताते हुए राजौरा के विरुद्ध पोस्ट लिखा। उसने बताया कि कैसे राजौरा ने मना करने के बाद भी उसे ओरल सेक्स के लिए जबरदस्ती की, वो भी सार्वजनिक स्थल पर। लड़की ने बताया कि राजौरा उसे नग्न तस्वीरें माँगता था। 

                                                                                                                          पोस्ट के स्क्रीनशॉट

पीड़िता ने बताया कि वो इन सब चीजों को नजरअंदाज कर रही थी क्योंकि वह कॉमेडियन को उसके काम के लिए सराहती थी। लड़की मानती है कि कॉमेडियन की पब्लिक छवि ने उसके फैसले को प्रभावित किया था। उसको लगता था कि राजौरा तो कई प्रभावशाली लोगों को जानता है।

पोस्ट में पीड़िता इस बात को बताती है कि वह अपने साथ होते शोषण को नजरअंदाज करती रही क्योंकि वह राजौरा को एक नारीवादी पुरुष के तौर पर देखती थी। लड़की ने बताया कि राजौरा उसे “असुरक्षित (Unsafe)” और नग्न तस्वीरें भेजने के लिए कहता था। उसके मुताबिक, “मैंने उन्हें कहा भी कि ये बहुत जल्दी है और बहाने बनाकर अपनी हिचक दर्शायी, लेकिन वह लगातार ऐसा कर रहे थे और मेरे बहाने में खामियाँ ढूँढ देते थे।”

पीड़िता ने खुलासा किया कि कैसे कॉमेडियन ने उसे सार्वजनिक स्थान पर ओरल सेक्स करने के लिए मजबूर किया। तारा ने लिखा, “उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा और मुझे घुटनों पर बैठा कर मुझे एक्ट (ओरल सेक्स) करने के लिए गाइड किया।”

तारा ने आगे बताया कि इस घटना के अगले दिन राजौरा अपनी कार को पार्किंग से बाहर निकालते समय अपने भवन के गेट पर किसी ऐसे व्यक्ति से मिला, जिससे वह पेशेवर रूप से जुड़ा था। लड़की के मुताबिक राजौरा ने बेहद अजीब ढंग से हाथ मिलाया और चेहरे पर शरारती मुस्कान थी। उसका मिलना और बात कहना (You’re man has been having fun with this young lady) ऐसा था जैसे कह रहा हो, “आज मैं करके आया हूँ।”

पीड़िता कहती है कि घटना के बाद भी उसने राजौरा से मिलना और बात करना नहीं छोड़ा था। उसे बहुत महीने लगे ये दर्दनाक एहसास होने में कि जो कुछ भी दोनों के बीच हुआ वो घातक, प्रबल और समस्याग्रस्त था। उसने बताया कि वह राजौरा के प्रभाव और ताकत को देख इतना डरती थी कि वह इन सबसे बाहर नहीं निकल पा रही थी।

लड़की लिखती हैं, “मैं अब ये सब क्यों लिख रही हूँ? ये मैं अपने लिए कर रही हूँ ताकि जो भार मैंने लंबे समय से झेला है उसे कम किया जा सके। ये जिम्मा मेरे ऊपर है कि दुनिया को अपना अनुभव से मना पाऊँ, इसलिए मैं कोई प्रूफ नहीं लगा रही। मैं ये सब समाप्त करने के लिए कर रही हूँ।”

अपने पोस्ट के आखिर में उसने लिखा, “मैंने जिन उदाहरणों का उल्लेख किया है, वे मेरे दर्दनाक अनुभव के चट्टान के सिरे मात्र हैं। कई बार ब्रेकडाउन और एंग्जाइटी अटैक आने के बाद से मैंने अपने सभी दोस्तों को खो दिया है। जिन चीज़ों से मैं गुज़री, उसने मेरी माँ को लगभग पागलपन की हद तक पहुँचा दिया। इस समय औपचारिक शिकायत शुरू करने के लिए मेरे पास भावनात्मक मजबूती नहीं है। मैं एक बेहतर जीवन की ओर बढ़ना चाहता हूँ, यह यहीं समाप्त होता है।”

राजौरा ने अभी इन आरोपों की बाबत कोई बयान नहीं दिया है। मगर, इससे पहले वो हिंदू देवी देवताओं का मखौल उड़ाने के कारण चर्चा में आया था। राजौरा ने भगवान गणेश और भगवान शिव पर टिप्पणी की थी। इसके बाद रमेश सोलंकी की शिकायत पर उसके विरुद्ध शिकायत दर्ज हुई थी।

सोनिया गाँधी से चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम पद से हटाने की माँग : राष्ट्रीय महिला आयोग अध्यक्षा रेखा शर्मा

संविधान का जितना अधिक मजाक हमारे राजनीतिक दल बना रहे हैं, उसे देख लगता है, संविधान केवल शांतिप्रिय लोगों के लिए है, इन सियासतखोरों के लिए नहीं। जब संविधान सबको बराबरी का अधिकार देता हैं फिर आधार पर जात-पात की गन्दी सियासत खेल खेलकर चुनाव में जनता के धन का दुरूपयोग किया जा रहा है। जातों पर आधारित इतनी पार्टियां हैं, फिर भी उनका उत्थान नहीं हुआ, विपरीत इसके नेताओं का जरूर उत्थान हो गया। आरक्षण भी और चुनाव में भी आरक्षण, क्या है ये सब तमाशा? 
कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद जब कांग्रेस ने पंजाब में मुख्यमंत्री के तौर पर चरणजीत सिंह चन्नी को चुना तो इसे चुनावों से पहले शिअद-बसपा के दलित कार्ड की हवा निकालने के तौर पर देखा गया। लेकिन, दलित संगठनों ने इस फैसले को कांग्रेस का ‘चुनावी स्टंट’ बता नकार दिया है। दूसरी तरफ ‘मीटू’ (#MeToo) के आरोप भी चन्नी और कांग्रेस दोनों की मुसीबत बढ़ाते दिख रहे हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने इसे उठाते हुए सोनिया गाँधी से उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने की माँग की है।

कांग्रेस का ‘चुनावी स्टंट’ बता दलित संगठनों ने दुत्कारा

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चरणजीत सिंह चन्नी को चुनने के कांग्रेस के फैसले की आलोचना करते हुए दलित यूनियनों ने कहा कि पार्टी एक तीर से दो निशाना साधने कर रही है, क्योंकि चन्नी दलित और सिख दोनों हैं। दलित यूनियनों का मानना है कि अगले साल राज्य में चुनाव होने से पहले बँटे हुए दलित वोट को एक ब्लॉक में मजबूत करने के लिए कांग्रेस ने यह रणनीति चली है।

पंजाब खेत मजदूर यूनियन के अध्यक्ष जोरा सिंह नसराली ने इस पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, “यह महज एक चुनावी स्टंट है। चन्नी दलित होने के साथ-साथ सिख भी हैं। पंजाब में अगले चार से पाँच महीने में चुनाव होंगे और चुनाव से 40 दिन पहले आचार संहिता लागू कर दी जाएगी। तो नया चेहरा क्या कर सकता है? वह कहेंगे कि मैं अभी नया हूँ और चीजों को समझने की कोशिश कर रहा हूँ।”

मंडी बोर्ड के महासचिव तरसेम सिंह सेवेवाला ने कहा, “जब तक नीतियाँ नहीं बदली जातीं, तब तक एक दलित सीएम या जाट सिख सीएम को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अब हम नए चुने गए सीएम को अपने सांझा मोर्चा के साथ 23 सितंबर की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए कहेंगे। यह उनके लिए लिटमस टेस्ट होगा और बताएगा कि वह दलितों का कितना ध्यान रखते हैं। हालाँकि, पंजाब में पहले से ही 34 निर्वाचित दलित विधायक हैं। इससे हमारी हालत पर क्या फर्क पड़ा है? दलित को मुख्यमंत्री बनाना हमारे वोट बैंक को निशाना बनाना है। हर राजनीतिक दल हमें निशाना बना रहा है, कांग्रेस भी।”

चुनावी हथकण्डा : मायावती 

दलित नेता और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी चुनाव से ठीक पहले चन्नी को पंजाब के नए मुख्यमंत्री के रूप में शामिल करने के लिए कांग्रेस की आलोचना की है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने इसे आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस का चुनावी हथकंडा बताया।

मायावती ने कहा, “मुझे मीडिया के माध्यम से भी पता चला है कि पंजाब का अगला विधानसभा चुनाव एक गैर-दलित के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। इसका मतलब यह हुआ कि कांग्रेस को अभी भी दलितों पर पूरा भरोसा नहीं है। पंजाब में शिरोमणि अकाली दल-बसपा गठबंधन से भी कांग्रेस  डरी हुई है।”

दलित वोट-बैंक राजनीति खेलने के लिए कांग्रेस पार्टी की आलोचना करते हुए, पंजाब के मजदूर मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष भगवंत समो ने कहा, “शिरोमणि अकाली दल ने दलित वोट बैंक को देखते हुए बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन किया था। उन्होंने यह भी घोषणा की थी कि वे दलित को डिप्टी सीएम बनाएँगे। AAP ने भी इसी तरह की घोषणा की थी। भाजपा ने भी घोषणा की कि वे दलित को मुख्यमंत्री बनाएँगे। इसलिए, कांग्रेस ने अपने आंतरिक कलह को निपटाने के लिए कुछ महीनों के लिए दलित सीएम बनाया है। वे यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि जहाँ अन्य दल घोषणा कर रहे हैं वे पहले ही दलित सीएम बना चुके हैं। यह दलित वोट बैंक की राजनीति है। अगर चन्नी इतने चिंतित थे, तो क्या वे कभी किसी ऐसे धरने पर गए जहाँ दलित विरोध कर रहे हैं? यह हमारे लिए शायद ही मायने रखता है कि सीएम कौन है।”

वहीं जमीं प्रपति संघर्ष समिति के एक सक्रिय सदस्य गुरमुख सिंह ने कहा, “2015 में, चन्नी ने संगरूर जिले के हमारे गाँव घ्राचोन का दौरा किया था, जहाँ दलित वार्षिक पट्टे पर खेती के लिए पंचायती भूमि का अपना हिस्सा पाने के लिए विरोध कर रहे थे। उन्होंने हमें आश्वासन दिया था कि अगर कांग्रेस की सरकार बनती है तो वह हमें 5,000 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन देंगे। लेकिन जब कांग्रेस सत्ता में आई तो उन्होंने इस मुद्दे पर कभी बात नहीं की। अब हम उनके चमकौर साहिब आवास पर जाकर उनसे पूछेंगे कि वह अब सीएम के रूप में क्या कर सकते हैं। सच्चाई जल्द ही सामने आ जाएगी।”

#Metoo का आरोप 

चन्नी पर ‘मीटू’ को लेकर आरोप लग चुका है जिसे लेकर वह कह चुके हैं कि यह तत्कालीन मुख्यमंत्री की शह पर किया गया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा था क्योंकि उन्होंने राज्य में दलित मुद्दों को उठाया था। हालाँकि शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने दलित कार्ड खेलने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की माँग की थी।

इस मामले पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने ANI से बात करते हुए कहा है, “2018 में मीटू आंदोलन के दौरान उनके (चरणजीत सिंह चन्नी) के खिलाफ आरोप लगाए गए थे। राज्य महिला आयोग ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया था और अध्यक्ष उन्हें हटाने की माँग को लेकर धरने पर बैठ गई थीं, लेकिन कुछ नहीं हुआ।”

उन्होंने कहा, “आज उन्हें एक महिला के नेतृत्व वाली पार्टी ने पंजाब का मुख्यमंत्री बनाया है। यह विश्वासघात है। यह महिला सुरक्षा के लिए खतरा है। उनके खिलाफ जाँच होनी चाहिए। वह सीएम बनने लायक नहीं है। मैं सोनिया गाँधी से उन्हें सीएम पद से हटाने का आग्रह करती हूँ।”

मामला 2018 का है और चन्नी पर आरोप लगा था कि उन्होंने एक महिला आईएएस अधिकारी को आपत्तिजनक मैसेज भेजा था। तब इस मामले ने खासा तूल पकड़ा था। हालाँकि महिला अधिकारी ने उस समय शिकायत दर्ज नहीं की थी और अमरिंदर सिंह ने भी कहा था कि मामला सुलझा लिया गया है। 18 मई 2021 को पंजाब महिला आयोग की चीफ मनीषा गुलाटी ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार को नोटिस भेजा था। अब एक बार फिर से ट्विटर पर अरेस्ट चन्नी ट्रेंड कर रहा है।

Bra देख कर अपना होठ चाटने का आरोपित बना मुंबई प्रेस क्लब का अध्यक्ष

सिद्धार्थ भाटिया (फोटो साभार: DNA)
वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ के सह संस्थापक और महिलाकर्मियों के साथ यौन शोषण के आरोपित सिद्धार्थ भाटिया को मुंबई प्रेस क्लब का अध्यक्ष चुना गया है। शनिवार (6 फरवरी 2021) को मुंबई प्रेस क्लब के चुनाव हुए थे, जिसमें सिद्धार्थ भाटिया ने सुधाकर कश्यप के खिलाफ जीत दर्ज की। 

पत्रकार स्मिता देशमुख ने ट्वीट करते हुए इस बात की जानकारी दी कि घनघोर वामंथी पत्रकारों ने ‘प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक अलायन्स’ (Progressive Democratic Alliance) नाम का समूह बना कर मुंबई प्रेस क्लब का चुनाव लड़ा। इसमें सिद्धार्थ भाटिया ने अध्यक्ष पद के लिए, इंडियन एक्सप्रेस के वामपंथी पत्रकार गुरबीर सिंह ने चेयरमैन और महाराष्ट्र टाइम्स के समर खलदस ने वाइस चेयरमैन पद के लिए चुनाव लड़ा था।

एक अन्य पत्रकार श्रीकांत भोंसले के मुताबिक़ प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक अलायन्स ने क्लब के पदाधिकारियों के लिए 6 उम्मीदवार उतारे थे और 10 अन्य को समिति के सदस्यों के लिए उतारा था। इन सभी 16 उम्मीदवारों की अगुवाई घनघोर वामपंथी ‘पत्रकार’ सिद्धार्थ भाटिया ने की थी और सभी ने मुंबई प्रेस क्लब के चुनावों में जीत हासिल की है।

2018 के दौरान #Metoo अभियान काफी चर्चा में था। इसमें तमाम दिग्गजों पर कई गंभीर आरोप सामने आए थे। उसी दौरान एक महिला ने सिद्धार्थ भाटिया पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। 

सहकर्मियों ने लगाया था यौन शोषण का आरोप 

#Metoo अभियान के दौरान दो अलग-अलग घटनाओं में, दो अलग-अलग महिलाओं ने सिद्धार्थ भाटिया पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपनी पावर और पोजिशन का इस्तेमाल करके उनका शोषण किया था। एक महिला के मुताबिक़ भाटिया DNA में रहते हुए नई इंटर्न्स को लिखने से जुड़ी बारीकियाँ समझाने के बहाने अपने झाँसे में लेता था। वहीं एक ट्विटर यूजर ने आरोप लगाया था भाटिया दफ्तर में महिलाकर्मियों की ब्रा की स्ट्रिप देख कर होठों का निचला हिस्सा चाटना शुरू कर देता था। 

हालाँकि DNA के कार्यकाल से जुड़े महिला के आरोपों को भाटिया ने खारिज कर दिया था। भाटिया के मुताबिक़ जब वो DNA में काम करते थे, तब वहाँ इस नाम की कोई महिला काम नहीं करती थी। इसके अलावा भाटिया ने द वायर की कर्मचारी रह चुकी महिला के आरोपों पर कहा कि वो सच नहीं है क्योंकि द वायर हिन्दी में कोई महिला कर्मचारी नहीं थी। 

इस तरह के तमाम आरोपों के सामने आने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी कि उन पर आरोप लगाने वाले ट्विटर हैंडल्स की जाँच हो। भाटिया ने यहाँ तक दावा किया था कि उन्होंने महिलाओं से कहा था कि वह मामले से जुड़ी अधिक जानकारी के साथ आगे आएँ लेकिन ऐसा किसी ने नहीं किया। 

ख़बरों से ज़्यादा विवादों के चलते सुर्ख़ियों में रहने वाले वामपंथी मीडिया समूह ‘द वायर’ हिन्दू विरोधी विचारधारा और देश विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देने के लिए मशहूर है। स्वघोषित ‘समाचार वेबसाइट’ की शुरुआत अमेरिकी नागरिक सिद्धार्थ वरदराजन, एमके वेणु और सिद्धार्थ भाटिया ने की थी। ये वेबसाइट फर्जी ख़बरें फैलाने और प्रोपेगेंडा प्रचार करने के लिए मशहूर है। 

ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब द वायर झूठ परोसते हुए नज़र आया है लेकिन इन्होंने अपने झूठ के लिए कभी माफ़ी नहीं माँगी। उन तमाम झूठों में ये कुछ झूठ हैं, जो द वायर ने पत्रकारिता के नाम पर परोसे हैं।

द वायर के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर फेक न्यूज़ फैलाने पर एफ़आईआर दर्ज की गई थी। इसके अलावा पूर्व न्यूज एंकर विनोद दुआ पर भी दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों के दौरान गलत रिपोर्टिंग करने और जनता के बीच भ्रम पैदा करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। विनोद दुआ पर भी यौन शोषण के आरोप लगाए गए थे।

सांप्रदायिकता की आग लगाकर केजरीवाल ने जीती दिल्ली


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
अक्सर अपने इस ब्लॉग पर लिखता रहा हूँ, भारत में जब भी कहीं कोई चुनाव होता है, भाजपा विरोधी कभी #metoo, #not in my name, #mob lynching, #award vapsi तो कभी #intolerance गैंगों के सक्रीय होने पर लिखा था कि देखना है अगले चुनाव में कौन-सा गैंग सक्रीय होता है और आ गया #shaheen bagh। भाजपा विरोधी भाजपा को इन पर अपनी प्रक्रिया देने के उकसाते और भाजपा इनके बिछाए जाल में फंसती रही और विरोधी अपना खेल खेलने में व्यस्त रहते। परिणाम स्वरुप चुनाव संपन्न होते ही सारे गैंग अगले चुनाव तक विश्राम करने चले जाते।     
आम आदमी पार्टी हमेशा विपक्षियों पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाती रहती है, जबकि सच्चाई यह है कि केजरीवाल और उनकी पार्टी नेताओं ने दिल्ली चुनाव को हर तरह से सांप्रदायिकता के रंग में रंग दिया। 
केजरीवाल विकासपुरी में इनके वोटबैंक द्वारा डॉ नारंग की हत्या पर मौन रहते हैं. लेकिन अख़लाक़ की मौत पर चीखते हैं, क्या यह साम्प्रदायिकता नहीं?
हिन्दुओं को लुभाने केजरीवाल पहुंचे हनुमान की शरण में
जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ये शंका होने लगी कि हिन्दू उनके खिलाफ होने वाले हैं तभी उन्होंने भावनात्मक कार्ड खेला। अरविंद केजरीवाल ने एक टीवी चैनल से साठगांठ कर एक कार्यक्रम आयोजित किया। उनका कार्यक्रम पूरी तरह सुनियोजित था। अपने इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने खुद को कट्टर हनुमान भक्त बताया। ये बात और है कि उस सुनियोजित कार्यक्रम में भी उन्होंने हनुमान चालीसा गलत ही पढ़ा।

एक निजी चैनल के कार्यक्रम में भाग लेने के दौरान अरविंद केजरीवाल से जब पूछा गया कि आपने खुद को हनुमान भक्त बोला है तो क्या हनुमान चालीसा आती है? इस पर केजरीवाल ने कहा, ‘हां, बिल्कुल आती है। मैं गाने की कोशिश करूंगा। इससे शांति बहुत मिलती है।’ दिल्ली के मुख्यमंत्री ने इसके बाद हनुमान चालीसा सुनाई।
मनीष सिसोदिया शाहीन बाग के साथ डटे रहे
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ शाहीन बाग में हो रहे प्रदर्शन पर मनीष सिसोदिया ने कहा कि ‘मैं शाहीन बाग के लोगों के साथ खड़ा हूं। मनीष सिसोदिया ने एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में कहा कि मैं जेएनयू वालों के साथ भी खड़ा हूं।

यही कारण है कि केजरीवाल सरकार ने देशद्रोह का मुकदमा चलाने के लिए जेएनयू की फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए। देखना है कि अब भी कब तक हस्ताक्षर नहीं करते हैं। 
साजिश के तहत केजरीवाल ने शाहीन बाग से बनाई दूरी
पूरे चुनाव के दौरान शाहीन बाग का मुद्दा जोर-शोर से उठता रहा। और मीडिया केजरीवाल सरकार की नाकामियों को उजागर करने की बजाए शाहीन बाग़ पर केंद्रित रहा, जो केजरीवाल कूटनीति की सबसे बड़ी जीत थी। वहां उठे हिन्दू विरोधी स्वरों ने भी भाजपा को उकसाने का काम किया। दिल्ली विधानसभा चुनाव में अगर कोई एक मुद्दा सबसे ज्यादा असरदार कहा जा सकता है तो वो शाहीन बाग था, इस विधानसभा में करीब 43% मुस्लिम मतदाता हैं।

वहीं आप के प्रचार की कमान खुद अरविंद केजरीवाल ने संभाल रखी थी, लेकिन उन्होंने इस विधानसभा में न तो कोई चुनावी सभा की ना ही कोई रोड शो किया। इसके बाद भी आप को मुसलमानों का पूरा वोट मिलना यह बताता है कि शाहीन बाग से केजरीवाल का दूरी बना के रखना उनकी साजिश का एक हिस्सा था।

गंदी राजनीति से बाज नहीं आई AAP
लोगों का असली रंग सामने आ ही जाता है, तभी तो चुनाव परिणाम सामने आते ही आम आदमी पार्टी का सांप्रदायिक रंग सामने आ गया, यह रंग आप के नेता सौरभ भारद्वाज ने सामने लाया है। उन्होंने अपने एक ट्वीट में लिखा है कि आज के बाद भाजपा मंगलवार को कभी वोट की गिनती नहीं कराएगी। आज से मेरी ग्रेटर कैलाश विधानसभा में हर मंगलवार को भाजपा भक्तों को हनुमान जी की याद दिलाई जाएगी।


"आज़ादी तो तेरा बाप भी देगा, आज़ादी तेरी माँ भी देगी"

शाहीनबाग़
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जामिया, JNU से चले आजादी के नारे शाहीनबाग़ तक आते-आते इस्लामिक नारों, हिन्दू विरोधी नारों और गृह युद्ध की धमकियों में तब्दील हो गए और तुरंत इस पूरे अभियान की पोल खुल गई। यही वजह है कि NRC और CAA के विरोध में बताए जा रहे इस पूरे विरोध और हंगामे को अब किसी ने भी गंभीरता से लेना छोड़ दिया है। लेकिन इस विरोध प्रदर्शन का तरीका और इसकी रणनीतियाँ बिलकुल भी नजरअंदाज कर देने लायक नहीं लगती हैं।
ये वामपंथी, कांग्रेस और इनके समर्थक पार्टियां विरोध को इस्लामिक उन्माद का रंग देने पर समझ बैठे थे, कि इस्लामिक रंग देखकर सरकार और हिन्दू डर जाएंगे। इन उन्मादियों और इनके समर्थक नेताओं को नहीं मालूम कि दूसरे लोगों ने चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं। आ रहे हैं वो भी इन्हे जिन्ना वाली आज़ादी देने सड़क पर आने प्रारम्भ हो चुके हैं। और जिस दिन नागरिकता कानून के विरोधियों की भांति बदजुबान होगी, देखना "गंगा-यमुना की तहजीब", #metoo, #moblynching, #award vapsi, #intolerance, #not in my name आदि जितने भी गैंगस्टर हैं, सब अपने बिलों से निकल इधर-उधर भागते नज़र आएंगे। इनको जवाब में अभी केवल दो ही वीडियो नीचे प्रस्तुत हैं। लाल कुआँ दिल्ली में किए उन्माद से शायद किसी ने सबक नहीं लिया? 
जहाँ तक शाहीन बाग़ में जमा उन्मादियों की बात है, इस बिकाऊ जमाओरों की सच्चाई मोदी विरोधी मीडिया ने भी उजागर करना शुरू कर दिया। आखिरकार, सच्चाई को लम्बे समय तक छुपाकर नहीं रखा जा सकता। दूसरे, यह उन्माद केवल मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में ही है।     
लिबरल होने का अभिनय करते आ रही यह भीड़ अब बच्चों के जरिए अपने वामपंथ के जहर और अपने प्रोपेगेंडा को हवा दे रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो शेयर किए जा रहे हैं जो शाहीन बाग़ में चल रहे कथित CAA-NRC विरोध प्रदर्शन के दौरान बनाए गए हैं। कथित इसलिए क्योंकि CAA-NRC का विरोध तो बस बहाना है।
इन वीडियो में ‘लिबरल्स’ की भीड़ बच्चों को कन्धों पर बिठाकर और उनके पास माइक देकर जो नारे लगवा रही है, वो स्पष्ट करता है कि इस सारे हंगामे का कारण कोई कानून नहीं बल्कि कुछ ऐसे लोगों का सत्ता में होना है जिनके हाथ में देश की कमान देखकर बुर्जुआ कॉमरेड को आपत्ति है। वीडियो में बच्चा नारे लगाते हुए कहता है- ‘हम ले के रहेंगे आज़ादी, तेरा बाप भी देगा आज़ादी, तेरी माँ भी देगी आज़ादी।’ जो विचारधारा इस देश में कॉन्ग्रेस का नमक खाकर तंदुरुस्त हुई है वो उसकी भक्तिधारा में चंद नारे तो लगा ही सकती है।
वहीं, एक दूसरे वीडियो में हरे लिबास में एक मौलवी किसी सार्वजानिक सभा को भाषण देते हुए गृह मंत्री अमित शाह को आटे का थैला बताते हुए धमकी दे रहा है। इस वीडियो में मौलवी ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ ही उनके समर्थकों को डंडे से पीटने की बात कही है जिस पर एक उन्मादी भीड़ भी खूब तालियाँ बजा रही है और वाह-वाही दे रही है।



मौलवी का कहना है कि अगर मुसलमान को भगाने की बात कही तो तिरंगे के डंडे से वो यहाँ मौजूद लोगों को पीटेंगे। वीडियो में हरे लिबास पहने मौलवी ने यह भी स्पष्ट किया है कि हिन्दुओं से वो मुसलमान भी नहीं डरता है जिसका कि अभी तक ख़तना भी नहीं हुआ है।
CAA-NRC के विरोध के नाम पर हिन्दुओं की महिलाओं को बुर्का पहनाए जाने से लेकर स्वस्तिक के चिन्हों को कुचलने और फ़क़ हिंदुत्व जैसे सन्देश सार्वजानिक रूप से दिए जा रहे हैं। मोदी सरकार के 2014 में सत्ता में आने के बाद से ही अक्सर मीडिया और कुछ उदारवादी विचारकों ने स्टूडियो में बैठकर ‘डर का माहौल’ जैसे नारे दिए। इन्हीं का एक बड़ा समर्थक वर्ग है जो इस नारे पर यकीन करता हुआ इसे आगे बढ़ाता रहा।  
अब इनको जवाब देने वाली वीडियो का भी आनंद लें:-

क्या उस वर्ग को ये वीडियो और सार्वजानिक सभाएँ शांति का संदेश नजर आती होंगी? या सिर्फ वो इसलिए इस पर चुप रह जाते हैं क्योंकि वो जानते हैं कि वास्तव में डर किन लोगों से होना चाहिए?
अपने विरोध प्रदर्शन में बच्चों का इस्तेमाल मजहबी और अश्लील नारे लगाने तक के लिए यह शाहीन बाग़ की भीड़ तैयार हो चुकी है। नैतिकता के मामले में तो वामपंथ से कभी कोई उम्मीद थी भी नहीं लेकिन अब वो अपने ही उस आवरण से बाहर आ चुके हैं जिस ‘उदारवादी’ नक़ाब के पीछे वो खुद को वर्षों तक छुपाते आए थे। इस विरोध प्रदर्शन के पूरे किस्से ने बता दिया है कि वामपंथ और कट्टरपंथियों की इस मिलीभगत का वास्तविक मर्म जनता नहीं बल्कि इस विचारधारा की लाश कंधे पर ढो रहे कुछ चुनिंदा लोग ही हैं।
लेकिन अब हम देख सकते हैं कि कि एक भीड़ ऐसी भी है, जिसका मकसद सिर्फ और सिर्फ हंगामा खड़ा करना ही हो सकता है। क्योंकि यही तो उनके अस्तित्व का कारण भी है।
‘मस्जिदों से ऐलान हुआ, पहले से पता था कि क्या करना है’ – दिल्ली में उपद्रव और दंगों के पीछे मुल्ला-मौलवी?
भाजपा के आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने एक वीडियो शेयर कर बताया है कि किस तरह संशोधित नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के नाम पर मजहबी उन्माद फैलाने की साज़िश रची जा रही है। यहाँ तक कि मस्जिदों से घोषणा की गई ताकि उपद्रवी सड़क पर उतर कर हिंसा करें। मालवीय ने दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर मस्जिदों से हुई भड़काऊ घोषणाओं को जिम्मेदार ठहराया है।
अमित मालवीय ने कहा कि इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान में वहाँ के अल्पसंख्यकों का क्या होता होगा। बता दें कि सीएए भी उन्हीं अल्पसंख्यकों के लिए है, जिन्हें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान में प्रताड़ित किया गया और उस प्रताड़ना से तंग आकर वो पिछले 5 वर्षों या इससे अधिक समय से भारत में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं। मालवीय ने मस्जिदों से भड़काऊ घोषणाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये सारी घटनाएँ बताती हैं कि सीएए ज़रूरी है।
अवलोकन करें:-
इसी तरह जब जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में देश-विरोधी नारे लगते हैं, विपक्ष उनके साथ खड़ा हो जाता है, क्यों? ऐसे नेता एवं उनकी पार्टी क्या कभी देशहित कर सकती हैं? आखिर कौन-सी आज़ादी की मंशा है? क्या इस तरह के नारे लगाने वाले और उनको समर्थन देने वाली पार्टियां किसी गुलाम देश में रह रहे हैं? जब प्रदर्शनकारियों द्वारा "हिन्दू से चाहिए आज़ादी", "हिन्दुत्व की कब्र खुदेगी", "मोदी-योगी की कब्र खुदेगी" आदि आदि उत्तेजक नारे लग रहे हैं, 'गंगा-यमुना तहजीब' की बात करने वाले किस बिल में घुसकर बैठे हैं? क्यों नहीं इन हिन्दू भावनाओं को भड़काने वाले नारों का विरोध करते? ये सब तभी बाहर निकलेंगे, जब दूसरी तरफ से पलटवार होगा। अभी सब कुम्भकरण की नींद में सोये हुए हैं।

अमित मालवीय ने ‘इंडिया टुडे’ के एक वीडियो को शेयर किया, जिसमें लोग बता रहे हैं कि वो क्यों सड़कों पर उतरे। नीचे संलग्न किए गए ट्वीट में आप मालवीय का बयान और उनके द्वारा शेयर किए गए वीडियो को देख सकते हैं:

दिल्ली में हिंसा के दौरान दंगाइयों ने पुलिस पर पत्थरबाजी भी की, जैसा जम्मू कश्मीर में वर्षों से होता आ रहा है। जम्मू कश्मीर में भी कश्मीरी पंडितों को निकाले जाने के बाद से लेकर अब तक, कई बार विभिन्न मस्जिदों से भड़काऊ ऐलान होने की ख़बरें आती रहती हैं। ‘इंडिया टुडे’ से बातचीत में दिल्ली एक एक उपद्रवी ने कहा:
“हमारे क्षेत्र में कई दिनों से अनाउंसमेंट हो रही थी कि कि मंगलवार को इतने बजे एनआरसी और सीएए के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन होगा। कई लोगों को पहले से ही पता था और जिन्हें नहीं पता था, उन्होंने मस्जिदों से अनाउंस कर के कहा गया कि आप सड़क पर उतरो।”
उक्त उपद्रवी की बातों से साफ़ हो जाता है कि मस्जिदों से ऐलान कर लोगों को सड़क पर उतरने को कहा गया। इसके बाद हिंसा भड़की और पुलिस व दंगाइयों के बीच झड़प हुई। पत्थरबाजी में कई पुलिसकर्मी घायल भी हुए।

क्या नागरिक संशोधन कानून का विरोध करने वाले राजनीतिक दल सत्ता में आने पर वापस लेने का साहस कर पाएंगे?

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज देश में जिस प्रकार #CAA को लेकर शांति के नाम पर उग्र एवं हिंसात्मक प्रदर्शन हो रहे हैं, देखिए कोई #metoo, #intolerance, #award vapsi, #moblynching और #not in my name आदि गैंग बाहर नहीं आया। क्यों? क्या उनके घर कोई शोक है? ऐसा नहीं है, उपद्रव करने वाले यही सब गैंग है। इनको CAA या NRC से कोई शिकायत नहीं, क्योकि अगर शिकायत होती तो CAA बिल राज्यसभा में पारित नहीं हुआ होता। लोक सभा में माना भाजपा का बहुमत है, लेकिन राज्य सभा में नहीं और जब राज्य सभा में भाजपा के बहुमत न होते हुए, बिल पारित होने का स्पष्ट मतलब है कि विरोध करने वाली पार्टियां सदन में कुछ और सदन से बाहर कुछ चेहरा लिए घूमते हैं। 
दूसरे, CAA के विरोध में हिन्दू विरोधी नारे क्यों लग रहे हैं? जामिया में हिन्दू विरोधी नारे लगने के बाद बंगलुरु में हिन्दू विरोधी आवाज़, क्यों? कौन है ऐसे नारे लगवाने वाला? आखिर किसके इशारे पर हिन्दू विरोधी नारे लग रहे हैं? चैनल भी अपनी TRP बढ़ाने प्रदर्शन का उग्र एवं हिंसात्मक चेहरा दिखाते हैं, लेकिन उपरोक्त प्रदर्शन नहीं, क्यों? लगभग सभी चैनल ने जामिया में लगे हिन्दू विरोधी नारों को छुपा लिया, जिस कारण आम नागरिक के सामने विरोध का असली चेहरा छुप गया। 2014 में मोदी सरकार से पूर्व "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम पर खूब हिन्दू धर्म को अपमानित किया गया, किसी आतंकवादी घटना पर आतंकवादियों को बचाने के हिन्दू साधु-संत और साध्वियों को गिरफ्तार करने पर उस समय हर चैनल चौपाल बैठा लेते थे, परन्तु आज फिर CNN की आड़ में हिन्दू धर्म को निशाने बनाने पर सब खामोश हैं, क्यों?  
इस नागरिक संशोधक कानून का विरोध करने वाले समस्त राजनीतिक दल क्या राष्ट्र को बताएंगे की 2024 में सत्ता में आने पर निरस्त करेंगे? क्या ये विरोधी भारत में भारतवासियों की बजाए घुसपैठियों और आतंकवादियों को पनाह देंगी?   
#CAA के खिलाफ बंगलुरु में प्रदर्शन के दौरान जिस बैनर का प्रयोग किया जा रहा था उसे देखकर भी क्या आप समझ नहीं सकते कि दर्द CAA का नहीं है किसी और बात का है। एक हिन्दू राष्ट्र में ये कैसे स्वीकार्य हो सकता है?
जिनके ज्यादा दर्द उठ रहा है उन्हें अच्छे से समझा दिया जाए कि उनको 1947 विभाजन में उनके हिस्से का टुकड़ा खैरात में मिल चुका है।

देश को हिंसा में झोंकना कांग्रेस पार्टी की पुरानी चाल
कांग्रेस पार्टी ने हमेशा देशहित से ऊपर गांधी परिवार के हित को रखा है। कांग्रेस पार्टी ने हमेशा अपना जनाधार बढ़ाने के लिए समाज को बांटा है। कांग्रेस पार्टी ने हमेशा अपनी राजानित जमकाने के लिए हिंसा का सहारा लिया है। आजादी के बाद से हमेशा कांग्रेस पार्टी ने इन्हीं हथकंडों से देश पर शासन किया है। नेहरू-गांधी खानदान का रुतबा बरकरार रखने के लिए कांग्रेस पार्टी और उसके नेता किसी भी हद तक जा सकते हैं। आज देश में कांग्रेस का क्या है, यह किसी से छिपा नहीं है। दिल्ली, पूर्वोत्तर आदि इलाकों में नागरिकता संशोधन कानून के नाम पर कांग्रेस पार्टी यह खेल खेलने में जुटी है।
शनिवार यानि 14 दिसंबर को कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में भारत बचाओ रैली का आयोजन किया था। इसी रैली में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सरकार के खिलाफ जमकर उगला। इन लोगों ने अपने जहरीले भाषण से रैली में आए लोगों को भड़काने का भी काम किया। इनके नेताओं को उकसावे का ही नतीजा था कि रविवार को दिल्ली के जामिया नगर इलाके में हिंसा भड़क गई और उग्र भीड़ ने कई वाहनों में आग लगा दी और पुलिस पर पथराव किया।
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कांग्रेसियों ने जामिया के छात्रों को भड़का कर हिंसा फैलाई
दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के बहाने कांंग्रेसी नेताओं शनिवार और रविवार को जामिया मिलिया विवि के छात्रों को भड़काने का काम किया। शनिवार की रैली में ही शायद इसकी रूपरेखा तैयार कर ली गई थी। ऐसा इसलिए, जामिया इलाके में आगजनी और हिंसा की वारदातों के बाद एक बार भी कांग्रेस की तरफ से शांति की अपील नहीं की गई, बल्कि भड़काऊ बयानों सो हिंसा को उकसाया गया। रविवार देर रात को जब जामिया समेत दूसरे विश्वविद्यालयों के छात्र आईटीओ के पुलिस मुख्यालय पर मौजूद थे, तो उनकी अगुवाई में कई कांग्रेसी नेता वहां थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद भी रात को हंगामा कर रहे छात्रों से मिलने पहुंचे। इतना ही नहीं रविवार की आधी रात को ही कांग्रेस प्रवक्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार और दिल्ली पुलिस के खिलाफ जमकर जहर उगला। यानि कांग्रेस को कतई इसकी चिंता नहीं थी हंगामा कर रहे छात्रों को शांत किया जाए, बल्कि वो उन्हें भड़काने में लगी थी।

पूर्वोत्तर के राज्यों में कांग्रेस ने आग लगाई
कांग्रेस पार्टी ने नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी की आड़ में पूर्वोत्तर के राज्यों में भी अपने मंसूबों को फैलाने का काम किया है। पिछले कई दिनों से पूर्वोत्तर के कई राज्यों में हिंसा का माहौल है और इसके पीछे भी कांग्रेस का हाथ बताया जा रहा है। यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने भाषणों में पूर्वोत्तर की हिंसा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। 
हिंसा और खौफ का खेल : कांग्रेस ने कराया लाखों करोड़ का नुकसान
पिछले वर्ष कांग्रेस पार्टी ने सितंबर के महीने में भारत बंद के दौरान हिंसा और लूट का खेल खेला था। इस दौरान जहानाबाद में एक बच्ची की जान चली गई तो कई जगहों पर ट्रेनों पर पथराव किए गए। लोगों की गाड़ियां तोड़ी गईं, किसानों को मारा गया और स्कूल बसों पर हमला किया गया। सरकारी संपत्ति के साथ निजी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया गया। FICCI के एक अनुमान के अनुसार एक दिन के भारत बंद से 20 हजार करोड़ का नुकसान होता है। वर्ष 2018 में कांग्रेस और विरोधी दलों ने सितंबर महीने तक पांच बार भारत बंद बुलाया है। एक बंद में 20 हजार करोड़ के नुकसान के हिसाब से अब तक एक लाख करोड़ का नुकसान हुआ जाहिर है यह किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि देश का नुकसान हुआ है।

मूर्ति तोड़ने वालों के कांग्रेस कनेक्शन का हुआ पर्दाफाश
त्रिपुरा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद देश में कई जगहों पर महापुरुषों की मूर्ति तोड़ने की घटनाएं सामने आईं। इसका एक पहलू ये है कि जितनी भी घटनाएं हो रही हैं वह भाजपा शासित राज्यों में हो रही हैं। इन घटनाओं को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस ट्वीट से भी समझा जा सकता है। 

जिस कांग्रेस ने बाबा साहेब को भारत रत्न नहीं दिया वह आज डॉ. आंबेडकर को अपना बता रही है। हकीकत तो ये है कि मूर्ति तोड़ने वाले जितने भी पकड़ा रहे हैं उनके कांग्रेस या विपक्ष से कनेक्शन सामने आ रहा है। आजमगढ़ में बाबा साहेब की जो मूर्ति तोड़ने वाला बसपा का एक दलित है, जो मूर्ति वाली जमीन पर कब्जा करना चाहता था। राजस्थान के अकरोला में गांधी जी की मूर्ति तोड़ने वाले तीनों आरोपी कांग्रेस के सदस्य हैं।
कांग्रेस का कुर्सी फेंको अभियान
कांग्रेस पार्टी लगातार हिंसा के लिए लोगों को प्रेरित कर रही है इसकी एक बानगी गुजरात विधानसभा में कांग्रेस समर्थित विधायक जिग्नेश मेवाणी के ‘कुर्सी फेंको’ आह्वान से भी समझा जा सकता है। मेवाणी ने 15 अप्रैल को कर्नाटक में होने वाली प्रधानमंत्री मोदी की रैली में लोगों को कुर्सी फेंकने के लिए उकसाया है। जिग्नेश मेवाणी ने गुजरात में भी कई बार हिंसा फैलाने की कोशिश की है और महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में भी उन्होंने ही दलित और मराठा के बीच संघर्ष की पृष्ठभूमि तैयार की थी।

कांग्रेस समर्थित हार्दिक पटेल ने फैलाई थी गुजरात में हिंसा
गुजरात में पटेल आरक्षण को लेकर जिस तरह से आंदोलन किया गया था वह किसी राजनीतिक दल के समर्थन के बगैर नहीं हो सकता था। बाद में हार्दिक पटेल और कांग्रेस के संबंधों और सौदेबाजी का खुलासा भी हुआ था। कांग्रेस से करोड़ों रुपये की डील कर गुजरात को हिंसा की आग में धकेल दिया गया और 14 लोगों की जान गंवानी पड़ी।

हिंदू देवी-देवताओं का सरेआम अपमान कर रहे कांग्रेसी
02 अप्रैल को दलित आंदोलन के दौरान जिस तरीके से हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया गया वह देश में आग लगाने की मंशा से ही किया गया। मध्य प्रदेश में हनुमान जी का जो अपमान किया गया था वह ईसाई मिशनरियों से ताल्लुक रखते थे और तमिलनाडु में जिन 2 लोगों को शिवलिंग पर पैर रखने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया है जिसका नाम सद्दाम और सईद है। जाहिर है कि इसके पीछे भी कांग्रेस का ही हाथ है।

मंदसौर में किसानों को भड़काने में कांग्रेस का हाथ
मध्य प्रदेश के मंदसौर में जून, 2017 को जब मंदसौर में किसानों का आंदोलन चल रहा था। इसकी आगुआई कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी खुद कर रहे थे। कांग्रेस विधायकों और कार्यकर्ताओं ने किसानों को इतना भड़काया कि छह लोगों की जान चली गई। एक सच्चाई ये है कि राहुल गांधी आंदोलन को बीच में ही छोड़कर विदेश भाग गए।

सहारनपुर में जातीय तनाव फैलाने की कांग्रेसी साजिश
फरवरी, 2017 के विधानसभा चुनाव में सामाजिक समरसता की मिसाल बने यूपी में अप्रैल 2017 में आग लगाने की कोशिश की गई। सहारनपुर में दलितों और ठाकुरों को आमने-सामने लाने की कोशिश की गई। मामले की जांच हुई तो पता लगा कि हिंसा फैलाने वाली ‘भीम आर्मी’ कांग्रेस के नेताओं के सहयोग से खड़ा हुआ संगठन है। इसमें कांग्रेस के कई स्थानीय नेताओं के हाथ भी सामने आए। 

सर्वसमाज की समरसता पसंद नहीं करती कांग्रेस
दरअसल आजादी के 70 वर्षो बाद पहली बार ऐसा लग रहा है कि पूरे देश का बहुसंख्यक समाज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जातीय बेड़ियां तोड़कर एकता के गठबंधन में बंधकर एकता के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहता है। समाज एकता के सूत्र में बंधकर विकास के रास्ते चलना चाहता है। लेकिन कांग्रेस को शायद ये एकता पसंद नहीं आ रही।

कांग्रेस ने लगातार 60 साल से हिन्दू विरोधी ही काम किये है … और हिन्दूओ के साथ अन्याय पर अन्याय किये है*
फिर भी कुछ हिन्दू, सिक्ख कैसे कांग्रेसी चोरो का साथ दे रहे है ये समझ नहीं आता के कोई हिन्दू कैसे कांग्रेस का समर्थन कर सकता है जबकि कांग्रेस नंबर 1 हिन्दू विरोधी पार्टी है।
ये रहा कॉंग्रेस का शर्मनाक पराक्रम
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दू मुक्त पाकिस्तान और बंगलादेश बनवाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दू मुक्त सिया चीन बनवाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दू मुक्त कश्मीर बनवाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दू मुक्त पाकिस्तान कब्जे वाला कश्मीर बनाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दू मुक्त केरल और असम बनवा रहा है।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दू मुक्त नार्थ ईस्ट बनवाया।
कांग्रेस ने ही बलूचिस्तान को हिंदुस्तान से नहीं जुड़ने दिया।
कांग्रेस ने ही चीन युद्ध हरवाया और अक्साई चीन खो दिया।
कांग्रेस के नेहरू ने कहा था सियाचिन बंजर है चीन पाकिस्तान ले जाये कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
कांग्रेस ने ही १९७१ की लड़ाई में फ़ौज के बलिदान से जो आधा पाकिस्तान कब्ज़े कर लिया था वो वापस कर दिया
पर कब्ज़े हुआ कश्मीर भी वापिस नहीं लिया।
कांग्रेस की वजह से ही हिंदुस्तान फ़ौज के लाखो सैनिक शहीद हो गए और फिर भी हिंदुस्तान जमीन खोता रहा।
कांग्रेस ने ही पंजाब - कश्मीर - बंगाल के 2 टुकड़े कर दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में कश्मीरी हिन्दुओ का नरसंहार होने दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में कश्मीरी हिन्दू औरतो के बलात्कार होने दिए।
*कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में सीखो का नरसंहार करवाया अपने कार्यकर्ता और नेताओ से।
*कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में सिख औरतो के बलात्कार किये अपने कार्यकर्ता और नेताओ से।
कांग्रेस ने सभी कश्मीरी हिन्दुओ के हत्यारों और बलात्कारीओ की सजा माफ़ की।
*कांग्रेस ने ही एक भी सिख औरतो के कांग्रेसी हत्यारे और बलात्कारी को सजा नहीं दी।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में असम, केरल, बंगाल में हिन्दुओ का नरसंहार होने दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में हिन्दू मुस्लिम दंगो में सेकड़ो हिन्दुओ का कत्लेआम होने दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में लव जिहाद को मदद की और मुसलमानो को चार बिविया रखने दी।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में मुसलमानो को जितने चाहे उतने बच्चे पैदा करने दिए।
कांग्रेस ने ही मुस्लिम कट्टरपंथी और हिन्दू विरोधी जिहादी ओवैसी के साथ गठबंधन किया।
कांग्रेस ने ही मुस्लिम कट्टरपंथी और हिन्दू विरोधी जिहादी अब्दुल्लाह और मुफ़्ती सईद का साथ दिया।
कांग्रेस ने ही हैदराबाद का जिहादी कासिम रिज़वी को पाकिस्तान भगाया।
कांग्रेस ने ही जूनागढ़ का गद्दार नवाब को पाकिस्तान भगाया।
कांग्रेस ने ही दाउद को बनाया बड़ा किया और पाकिस्तान भगाया।
कांग्रेस ने ही कश्मीरी जिहादियो का साथ दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में मुसलमानो को कायदे से विरुद्ध जा कर सहूलियत दी।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में मुसलमानो को हिन्दुओ से लूट कर मस्जिद बनाने के लिए रुपए दिए।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में हिन्दुओ के मंदिरो पर टैक्स लगाये और एक भी रूपया नहीं दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में सैकड़ो मस्जिदे बनाने में मदद की लेकिन राम मंदिर का विरोध किया।
कांग्रेस ने ही मुसलमानो को हज के लिए पैसे दिए लेकिन अमरनाथ पर टैक्स लगाये।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में हिन्दू विरोधी शरीया कानून लाया जिसे मुस्लिम पर्सनल लॉ कहते है।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दूओ का कानून हिन्दू कोड बिल नाबूद किया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में २ कानून लाये धारा ३७० कश्मीर में जो सरासर हिन्दू विरोधी है।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में गौहत्या का धंधा शुरू करवाया।
कांग्रेस ने ही पाकिस्तान को 400 करोड़ दिए
उसने उसी पैसे से कश्मीर पर हमला किया और आधा कश्मीर खा गया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में ईसाई मिशनरिओ की मदद की और पैसे दिए।
कांग्रेस ने हिन्दुओ की जमीन को ईसाईओ को मुफ्त में दे दी और बड़े बड़े चर्च बनवाने में मदद की।
कांग्रेस ने ही आज़ादी के 14 साल तक गोवा को ईसाई पुर्तगाल का गुलाम रहने दिया और धर्म परिवर्तन होने दिए।
कांग्रेस ने ही हिन्दू समाज को तोड़ ने का काम किया जाती आरक्षण ला कर।
कांग्रेस ने ही मुस्लिम आरक्षण की शुरुआत की लेकिन हिन्दुओ को कुछ नहीं दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में झूठा आपातकाल लगवाया और निर्दोष हिन्दूओ की हत्या करवाई।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में जबरजस्ती हिन्दूओ की नसबंदी करवाई।
कांग्रेस ने ही हिन्दू पंडितो को घर से बेघर किया और रिफ्यूजी बना दिया कोई मदद नहीं की।
कांग्रेस ने ही खालिस्तान की आग लगायी और सेकड़ो बेगुनाह मारे गए।
कांग्रेस ने ही हिद्नुस्तान में कोने कोने पर मुस्लिम डॉन बनाये और मदद की।
कांग्रेस ने ही हमेशा से देश के गद्दारो और हिन्दू विरोधिओं का साथ दिया।
कांग्रेस ने ही आज तक एक भी मस्जिद को नहीं गिराया लेकिन सैकड़ो मंदिर तोड़े।
कांग्रेस ने ही हरमंदिर साहेब में गोलाबारी की उसको नुकसान किया और सैकड़ो सिख मारे गए।
कांग्रेस ने ही राम मंदिर आंदोलन में गोलीबारी की और सेकड़ो हिन्दू मारे गए।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में मुस्लिम तुस्टीकरण की नीव रखी और उसे बड़ा बनाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में लव जिहाद को बढ़ावा दिया और पूरी मदद की जिहादियो की।
कांग्रेस ने ही हिन्दू विरोधी ओवैसी के खिलाफ हिन्दुओ का कत्लेआम करने की बात पर कोई कार्यवाही नहीं की उल्टा उससे गठबंधन किया।
कांग्रेस ने ही देश विरोधी AIMIM को बढ़ावा दिया और ओवैसी को सांसद बनाया।
कांग्रेस ने ही हिन्दूओ के जिहादी हत्यारों को हीरो बनाया अकबर, औरंगज़ेब, बाबर।
कांग्रेस ने ही हिन्दुओ के जिहादी हत्यारों के नाम पर सड़के, बगीचे बनाये अकबर, औरंगज़ेब, बाबर।
कांग्रेस ने ही हिन्दुओ के रक्षक को इतिहास से ही मिटा दिया शिवाजी, राणा प्रताप, गोबिंद सिंह।
कांग्रेस ने ही असली हिंदुस्तान का इतिहास मिटा कर एक झूठा इतिहास पढ़ाया और बताया।
कांग्रेस ने ही दुनिया का सबसे बड़ा नरसंहार हिन्दू नरसंहार जो मुसलमानो ने किया था उसे इतिहास से ही मिटा दिया।
कांग्रेस ने हिंदुस्तान की स्कूलों और यूनिवर्सिटियो में गलत और झूठा इतिहास का पाठ्यक्रम पढ़ाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान को लगातार लूटा और खुद का पेट भरती रही।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में गरीबी बढ़ाई।
कांग्रेस ने ही कुछ मुसलमानो का हिन्दू धर्म में वापस आने पर बबाल किया।
कांग्रेस ने ही लगातार लाखो हिन्दुओ का धर्म परिवर्तन होने में मदद की।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान को हिन्दू राष्ट्र में से एक झूठा सेक्युलर मुस्लिम तुस्टीकरण देश बनाया।
कांग्रेस ने ही हिन्दू विरोधी बड़े बड़े नेताओ को जन्म दिया।
कांग्रेस ने ही असली हिंदुत्व नेताओ की हत्या करवाई मुख़र्जी उपाध्याय को मरवाया।
कांग्रेस ने ही देशभक्त हिन्दुओ को अंग्रेज़ो से मरवा दिया भगत सिंह, आज़ाद, बोस।
कांग्रेस ने ही सरदार पटेल को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया।
कांग्रेस ने ही गरीब आदिवासिओ को मजबूर किया डकैत, नक्सली, माओवादी बनने के लिए।
कांग्रेस ने ही गरीब आदिवासिओ पर अत्याचार किये उन्हें गरीब और पिछड़ा रखा।
कांग्रेस ने ही दलित प्रथा को देश में चालू रखा और उनके साथ अत्याचार किये।
कांग्रेस ने ही देश के किशानो को गरीब रखा और आत्महत्या के लिए मजबूर किया।
इंदिरा ने असली कांग्रेसी सेनानिओ को कांग्रेस से निकाला।
कांग्रेस ने ही भोपाल का हत्यारा एंडरसन को देश से भगाया।
कांग्रेस ने ही इटली का दलाल क्वॉटरोची को देश से भगाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान का गद्दार काज़िम रिज़वी को देश से भगाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान का गद्दार जूनागढ़ का नवाब को देश से भगाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान का गद्दार दाउद को देश से भगाया।
कांग्रेस ने ही गैरकानूनी बांग्लादेशिओ को हिंदुस्तान में रहने दिया।
कांग्रेस ने ही गैरकानूनी बांग्लादेशिओ को हिंदुस्तानी नागरिक बनाया।
कांग्रेस ने ही बांग्लादेश से आ रहे हिन्दुओ को हिंदुस्तान में नहीं रहने दिया।
कांग्रेस ने ही लगातार बांग्लादेशी हिन्दुओ का कत्लेआम होने दिया।
कांग्रेस ने ही लगातार बांग्लादेश से हिंदुस्तान की जमीं खोती रही है और देखती रही।
कांग्रेस ने ही क़ानूनी पाकिस्तानी हिन्दुओ को शरण नहीं दी लेकिन तिबत्तिओं को दी।
कांग्रेस और गांधी ने हिन्दुओ को अहिंसा के नाम पर चुना लगाया और कायर रहने पर मजबूर किया।
कांग्रेस और गांधी ने हिन्दुओ के हत्याओ पर खुद हिन्दुओ को ही जिम्मेदार ठहराया
और मुसलमानो को निर्दोष बताया।
कांग्रेस और नेहरू ने ही हिंदुस्तान को आज़ादी मिलने के बाद तोड़ ने का ही काम किया था।
कांग्रेस ने आज़ादी के बाद भी अंग्रेज़ो की गुलामी नहीं छोड़ी थी और जैसा वे कहते वो करते।
कांग्रेस ने सिवाय कोंग्रेसी स्वंतंत्र सेनानिओ के सब को भुला दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में राजकीय घराना शाही शुरू की और देश को भरपूर लूटा।
कांग्रेस ने ही जान बुझकर अमरीका से रिश्ते ख़राब रखे।
कोंग्रेसी संजय गांधी कोई पद पर ना होने के बावजूद वो ही देश चलाता था।
कांग्रेस ने ही नेहरू गांधी परिवार को देश का मालिक बना दिया नेहरू इंदिरा राजीव संजय सोनिआ राहुल प्रियंका वाड्रा।