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इस्लामिक चोला पहन अपना मजहबी अजेंडा चलाती राणा अयूब

Image result for rana ayyubपत्रकारिता की आड़ में इस्लामिक चोला पहन अपना मजहबी अजेंडा चलाने वाली राणा अयूब जनवरी 2 को एक बार फिर ऑनस्क्रीन झूठ फैलाती नजर आईं। राणा अयूब ने मीडिया से बात करते हुए सीएए के ख़िलाफ़ विरोध पर उतरे समुदाय विशेष से जुड़े हिंसक प्रदर्शनकारियों को ‘शांतिपूर्ण’ बताया। साथ ही दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुस्लिमों को दोयम दर्जे का नागरिक मानते हैं, जो डर फैलाकर भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं। इसके अलावा तथाकथित पत्रकार ने मोदी सरकार पर कई और झूठे दावे कर निशाना साधा। कश्मीर, अयोध्या जैसे मुद्दों पर अपनी दबी कुंठा व्यक्त करते हुए राणा अयूब ने कहा कि पिछले 6 साल से मुसलमान अप्रत्यक्ष रूप से मोदी सरकार की मुखालफत कर रहा है। लेकिन आर्टिकल 370 और नागरिकता कानून पर लिए फैसलों ने अब मुसलमान को सीधे सड़कों पर आने पर मजबूर कर दिया है। 
कांग्रेस और इसके समर्थक दल एवं पत्रकार अपनी रोटिओं की खातिर मुसलमानों में जहर ही घोलते दिख रहे हैं, लेकिन इस कानून से भविष्य में भारत को कितना बड़ा लाभ होने वाला है, उस सच्चाई को बताने का लेशमात्र भी प्रयास नहीं किया। जिस तरह अयोध्या और अनुच्छेद 370 को लेकर समस्त भारत को मुर्ख बनाये रख, विश्व में भारत को अपमानित करते रहे। मुसलमानों के दिमाग में जहर घोलने वालों को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि जिस दिन इसी मुसलमान को सच्चाई मालूम होगी, कोई इन्हे टके के भाव भी नहीं पूछेगा। दूसरे, विश्व में अब तक भारत ही एक ऐसा देश था, जहाँ नागरिकता कानून नहीं था। इस कानून का विरोध करने वाले क्या अवैध रूप से किसी भी मुस्लिम देश में रह सकते हैं? 
टॉक शो में बात करते हुए राणा अयूब ने अयोध्या का मुद्दा भी उठाया और मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि राम मंदिर के पक्ष में आए फैसले के पीछे भी मोदी सरकार ही जिम्मेदार है। दिलचस्प बात ये रही कि उन्होंने इस टॉक शो के दौरान बातों ही बातों में स्वीकार लिया कि हाल ही में सड़कों पर उतरी भीड़, सीएए के ख़िलाफ़ होते प्रदर्शन सब स्वाभाविक रूप से मजहबी थे। वे कहती हैं कि मुस्लिम आज सड़कों पर हैं, ताकि मोदी सरकार के फैसले के ख़िलाफ़ खुलकर अपनी मजहबी पहचान बता सकें।

चूँकि ऐसी स्थिति में जब सीएए के विरोध के नाम पर प्रदर्शनकारियों को देश ने अपनी आँखों के आगे, मीडिया के जरिए, सोशल मीडिया के हवाले से करोड़ों की सार्वजनिक संपत्ति फूँकते देखा है, तब अगर राणा अयूब कह रही हैं कि मुस्लिमों ने प्रदर्शन ‘शांतिपूर्ण’ किया, तो एक बार बीते दिनों राज्य में हुई घटनाओं पर एक नजर दोबारा डालने की जरूरत है। जिससे पता चल सके कि आखिर इस विरोध में उतरे समुदाय विशेष के लोग कितने शांतिपूर्ण थे…
पश्चिम बंगाल 
जुमे की नमाज के बाद और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का समर्थन पाकर यहाँ मुस्लिम भीड़ ने अपना उत्पात शुक्रवार के दिन शुरू किया। पूरे राज्य में हिंसा भड़काई गई। रेलवे स्टेशन, बस, टोल प्लॉजा जैसी अनेकों सार्वजिनक संपत्तियों को देखते ही देखते नष्ट कर दिया गया।
राणा अयूब द्वारा उल्लेखित इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाली मुस्लिम भीड़ ने एंबुलेंस पर पत्थर फेंका और बेलडांगा रेलवे स्टेशन पर भी तोड़फोड़ मचाई। साथ ही कई वीडियो में भी भीड़ रेलवे पटरियों को उखाड़ती दिखी।
इसके बाद भीड़ ने पश्चिम बंगाल में हावड़ा जिले में उत्पात मचाया। रेलवे स्टेशनों के रास्ते ब्लॉक कर दिए गए। यहाँ भी ट्रेन पर पत्थरबाजी हुई। ट्रेन का ड्राइवर घायल हो गया। साथ ही पूर्वी रेलवे के पश्चिमी विभाग को इसके कारण परेशानी झेलनी पड़ी।
फिर, इसी राज्य में मुस्लिमों की भीड़ ने मुर्शिदाबाद में आतंक मचाया। टोल प्लाजा को आग लगाया। सुजनीपारा रेलवे स्टेशन पर हमला किया। संकरेल रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर को निशाना बनाया और फिर उसे भी आग लगा के छोड़ दिया।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली 
बंगाल में हुई हिंसा धीरे-धीरे देश के कई कोनों में भड़क गई। दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों ने प्रदर्शन शुरू किया। यह देखते ही देखते कुछ समय में हिंसक हो गया। उपद्रवियों ने पहले खुद बसें जलाई, फिर बाद में इल्जाम पुलिस पर डाल दिया। हालाँकि, हाल में आई वीडियो से स्पष्ट हो गया कि आगजनी के पीछे कौन था।
इस दौरान विश्वविद्यालय परिसर में सांप्रदायिक नारे लगे। जिससे दिल्ली के अन्य इलाकों में भी मुस्लिमों ने प्रदर्शन के नाम पर हिंसा शुरू कर दी। सीलमपुर में इस बीच राणा अयूब के शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों द्वारा स्कूल बस पर पत्थर फेंके गए और पुलिस पर पत्थरबाजी के साथ बम फेंकने तक का प्रयास हुआ। इसके बाद दरियागंज में भी इस तरह का विरोध देखने को मिला।
उत्तर प्रदेश 
प्रदेश में भाजपा सरकार होने के कारण शांतिदूत यहाँ और भी उग्र नजर आए। पुलिस पर पत्थरबाजी हुई। जुमे की नमाज के बाद कई जगह सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया गया। अमरोहा से लेकर बहराइच और संभल से लेकर अलीगढ़ तक हर जगह इस भीड़ द्वारा तोड़फोड़, आगजनी तो आम रही। मेरठ में तो दो युवकों ने खुलेआम पुलिस पर गोली चलाई। स्थिति इतनी ज्यादा हाथ से निकल गई कि पुलिस को हिंसा रोकने के लिए आँसू गोले का इस्तेमाल करना पड़ा और लाठी चार्ज करके उपद्रवियों को तितर-बितर करना पड़ा।
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पुलिस को ज़िंदा जलाने की कोशिश, जारी हुए दो वीडियो (साभार: ट्विटर) नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर देशभर में विरोध-प...
गुजरात 
19 दिसंबर को गुजरात के अहमदाबाद में भी प्रदर्शन हुआ। जहाँ इसी मुस्लिम भीड़ ने उत्पात मचाया। पत्थरबाजी की, पुलिस पर हमला किया और कई अधिकारियों को पीटा भी।
कर्नाटक 
मंगलुरु से एक वीडियो आई। जिसमें दिखा कि उपद्रवी किस तरह पहले सीसीटीवी को नीचे की ओर अडजस्ट कर रहे हैं, ताकि उनकी करतूत वीडियो में न आ सके और फिर बड़ी तैयारी से इलाकों में हिंसा को अंजाम दे रहे हैं।
इन राज्यों में हुई घटनाओं से और प्रदर्शनकारियों के नाम पर काला पट्टी बाँधकर हिंसा कर रहे दंगाइयों की वीडियो राणा अयूब ने भी देखी होगी। लेकिन, उनका एजेंडा इन वीडियो के ईर्द-गिर्द नहीं है। शायद इसलिए वे इसपर बात नहीं करना चाहतीं। मगर, अगर समुदाय विशेष के लोगों के जुर्मों पर सरेआम बोल नहीं सकतीं, तो कम से कम मोदी सरकार को घेरने के लिए इस उपद्रवियों को शांतिदूत को न ही बताएँ। इस समय सोशल मीडिया पर कई सौ या शायद हजारों की तादाद में ऐसे सबूत वायरल हो रहे हैं जो राणा अयूब की फर्जी दावों को झूठा साबित करते हैं और बताते हैं कि सड़कों पर उतरी मुस्लिमों की भीड़ न शांतिपूर्ण हैं और न ही उनके उद्देश्य।
ये पहला, दूसरा, या तीसरा मामला नहीं है जब मोदी सरकार को घेरने के लिए राणा अयूब और उनके मीडिया कॉमरेडों का पर्दाफाश हुआ। इससे पहले कई ऐसे मौक़े आए हैं जिनके बाद इन लोगों की प्रतिक्रिया देखकर मालूम हुआ है कि ये मोदी सरकार की छवि को जनता के सामने धूमिल करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। चाहे फिर उसके लिए उन्हें खुलेआम झूठ बोलना पड़े। चाहे फिर उसके लिए सोशल मीडिया यूजर उन्हें ट्रोल ही क्यों न कर दें। चाहे फिर उनकी कही बातों पर फैक्ट चेक ही क्यों न हो जाए।
गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले ही अमेरिका की हिन्दू-विरोधी राजनीतिक विशेषज्ञ क्रिस्टीन फेयर ने ट्विटर पर भारतीय प्रोपेगंडाबज पत्रकार राणा अयूब को जम कर लताड़ा था। लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि अयूब भी उन्हीं की तरह हिन्दू-विरोधी है, क्रिस्टीन ने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया।
उन्होंने लिखा था, “तुम बलूचिस्तान के नागरिकों, पश्तून और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के नागरिकों के लिए ख़ास दुआ क्यों नहीं कर रही हो? पाकिस्तानियों द्वारा इन सब पर अत्याचार किया जा रहा है। तुम्हारी फौज (पाकिस्तानी) और आईएसआई द्वारा तालिबान के आतंकियों का इस्तेमाल कर अफ़ग़ानों का नरसंहार कराया जा रहा है।"

मेरठ में दंगाइयों ने की थी 30 पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने की कोशिश

पुलिस, ज़िंदा जलाने की कोशिश
पुलिस को ज़िंदा जलाने की कोशिश, जारी हुए दो वीडियो (साभार: ट्विटर)
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर देशभर में विरोध-प्रदर्शन के नाम पर गुंडई हो रही है। जान लेने पर उतारू उन्मादी भीड़ को देखकर यह किसी भी तरह से नहीं लगता कि यह कोई विरोध-प्रदर्शन है। विरोध में शामिल इन लोगों को दंगाई न कहा जाए तो भला और क्या कहा जाए। इस उग्र भीड़ के इरादे इतने ख़ौफ़नाक हैं कि इसका अंदाज़ा लगाना लगभग असंभव ही है। 
दरअसल, मेरठ पुलिस ने दंगाइयो के सिर पर ख़ून सवार होने से जुड़े दो ऐसे वीडियो जारी किए हैं, जिसमें यह साफ़तौर पर देखा जा सकता है कि वो किस तरह से दंगे के दौरान 30 पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने की कोशिश में थे। इन वीडियो को देखकर आप ख़ुद इस बात का अंदाज़ा लगा सकते हैं कि नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन के नाम पर दंगाई किस तरह से अपने ख़ौफ़नाक इरादों को अंजाम देने की फ़िराक में था, लेकिन वक़्त रहते उन्हें अपने इरादों में क़ामयाब होने से रोक लिया गया और सभी पुलिसकर्मियों को सुरक्षित बचा लिया गया।

ख़बर के अनुसार, एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि घटना थाना लिसाड़ी की है, जब 20 दिसंबर (शुक्रवार) को जुमे की नमाज के लिए पुलिस और आरएएफ की ड्यूटी लगी हुई थी। उन्होंने बताया कि क़रीब 30 पुलिसकर्मी एक दुकान में बैठे हुए थे, तभी एक षणयंत्र के तहत उपद्रवियों ने उन्हें इस दुकान के अंदर बंद कर दिया और फिर उन्हें ज़िंदा जलाने के मक़सद से दुकान को आग लगा दी।
दरअसल, 20 दिसंबर के दंगे की इस घटना की सूचना जब एसएसपी को लगी थी तो वो बिना देरी किए अपनी फ़ोर्स के साथ घटना-स्थल पर पहुँचे। वहाँ उपद्रवियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी, इसी गोलीबारी में आरएएफ के दो जवान उपद्रवियों की गोली का निशाना बन गए। कड़ी मशक्कत के बाद दुकान के अंदर बंद पुलिस की टीम को आग से बचाया जा सका। इस गंभीर मामले पर मुक़दमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है। बता दें कि इस मामले में पुलिस ने 13 मुकदमें दर्ज कर क़रीब 148 उपद्रवियों को नामजद किया और 500 से अधिक लोग अज्ञात हैं। पुलिस ने दंगे में शामिल उपद्रवियों की फोटो और वीडियो के आधार पर उनकी पहचान की है। साथ ही दंगाइयों के पोस्टर्स भी शहर भर में लगाए गए हैं।

उत्तर प्रदेश : मवाना में जुमे की नमाज के बाद मुस्लिम उपद्रवियों ने फिर लगाए ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे

देश-विरोधी नारे, CAA
नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ हिंसक हुए विरोध-प्रदर्शनों को शांत कराने और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस तंत्र मुस्तैदी के साथ जुटा हुआ है। इस तरह की ख़बरें भी सामने आईं जिसमें जगह-जगह होने वाले विरोध-प्रदर्शनों के नाम पर उपद्रवी पुलिसकर्मियों की जान लेने तक पर उतारू रहे।  
इस बीच, मेरठ के मवाना में पुलिस ने थोड़ी सी ढील क्या छोड़ी कि कुछ दंगाई मोहल्ला तिहाई स्थित मस्जिद के बाहर नमाज के बाद सड़क पर उतर आए। इसके बाद उन्होंने विरोध के नाम पर ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। इससे पहले कि माहौल बिगड़ता घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम ऋषिराज, सीओ यूएम मिश्रा पुलिस दल-बल के साथ घटना-स्थल पर पहुँचे। पुलिस के आते ही सभी उपद्रवियों ने अपने घरों और गलियों में घुसना शुरू कर दिया और ग़ायब हो गए। 
वहीं, एडीजी प्रशांत कुमार (मेरठ) ने ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे लगाने की ख़बरों पर कहा, “एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है और बाक़ी लोगों को भी गिरफ़्तार किया जाएगा। किसी को भी राष्ट्र-विरोधी कार्य करने की छूट नहीं दी जाएगी।”

इससे पहले, उत्तर प्रदेश में मेरठ के एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह का एक वीडियो वायरल होने के बाद राजनीति तेज़ हो गई थी। जहाँ, एक तरफ प्रियंका गाँधी ने उस वीडियो को ट्वीट करते हुए सवाल खड़ा किया, तो वहीं दूसरी तरफ़ एसपी सिटी डॉ. अखिलेश नारायण सिंह ने कहा था कि उन्होंने पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाने वाले उपद्रवियों को वहाँ से भगाया था।
इस मामले पर एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया था कि पुलिसकर्मियों की तरफ़ से कोई गोलीबारी नहीं हुई थी। उन्होंने एसपी का बचाव करते हुए कहा था कि वायरल हुआ वीडियो बीते 20 दिसंबर को मेरठ शहर में हुए उपद्रव के बाद का है। उन्होंने बताया कि इसमें तथ्य यह है कि वहाँ भारत-विरोधी और पड़ोसी देश पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए जा रहे थे और कुछ लोग पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) के आपत्त्तिजनक पर्चे बाँट रहे थे।
इसके बाद, इसी मामले पर यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था, “उन्‍होंने (एसपी ने) सभी मुस्लिमों के बारे में यह नहीं कहा था। जो लोग पत्‍थरबाजी के दौरान पाकिस्‍तान के समर्थन में नारे लगा रहे थे, उन्‍हें कहा था। जो लोग इस तरह की गतिविधि में शामिल हैं, उनके लिए एसपी सिटी का बयान ग़लत नहीं है।”
सोशल मीडिया पर 20 दिसंबर का एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें एडीएम सिटी अजय तिवारी और एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह हिंसा के दौरान गली के अंदर भाग रहे कुछ उपद्रवियों से कहा था कि जहाँ जाओगे, चले जाओ। हम ठीक कर देंगे। काली पट्टी बाँधकर विरोध जता रहे हो, खाओगे यहाँ और गाओगे वहाँ का। एसपी का ये बयान वायरल होने के बाद मेरठ पुलिस ने दावा किया था कि कुछ उपद्रवियों ने काली पट्टी बाँधकर पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए थे।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार आज मोदी विरोधी जिस तरह जनता को गुमराह कर पत्थरबाज़ी और आगजनी के लिए उकसा रहे हैं, पुलिस ....
इसमें कोई दो राय नहीं, भारत में पाकिस्तान समर्थकों(sleeper cells) की कोई कमी नहीं। सरकार को पाकिस्तान ज़िंदाबाद कहने वालों के विरुद्ध सख्त और कठोर से कठोर कार्यवाही करनी चाहिए। नागरिक संशोधक कानून के विरुद्ध प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगने का मुख्य कारण है, भारत द्वारा विश्व पटल पर आतंकवाद के मुद्दे पर बेनकाब करने का दर्द उजागर हो रहा है।      

दरियागंज हिंसा: कोर्ट ने खारिज की 15 आरोपितों की बेल याचिका, भेजा 14 दिन की न्यायिक हिरासत में

दरियागंज हिंसानागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ दिल्ली के दरियागंज में प्रदर्शन के नाम पर हुई हिंसा और आगजनी करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए 15 आरोपितों को दिल्ली पुलिस ने आज (दिसंबर 23, 2019) तीस हजारी कोर्ट में पेश किया। जहाँ इनकी बेल याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही अदालत ने सभी 15 आरोपितों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि आरोपितों के वकील बेल को लेकर सेशंस कोर्ट में भी अपील कर सकते हैं।
मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कपिल कुमार ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपितों को राहत देने के लिए उनके पास पर्याप्त आधार नहीं है। जिसके कारण उन्हें बेल नहीं दी जा सकती है।
वहीं, कोर्ट में आरोपितों की गिरफ्तारी का कारण पूछने पर पुलिस ने बताया कि आरोपितों ने उस दिन पथराव किया। जिससे पुलिस उपायुक्त सहित कई लोग घायल हो गए। साथ ही कहा गया कि अगर वे इन लोगों को गिरफ्तार नहीं करते तो ये सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचा सकते थे। पुलिस के अनुसार अभी इनके अलावा अन्य कुछ और लोगों को भी वीडियो के जरिए पहचाना जा रहा है।

शुक्रवार(दिसम्बर 20) को नागरिकता संशोधन एक्ट के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन में हिंसा भड़कने के बाद प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों में आग लगा दी थी, साथ ही पुलिस पर पत्थरबाजी भी की थी। पुलिस ने इन्हीं आरोपों में 15 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। साथ ही कुछ नाबालिगों को पुलिस द्वारा हिरासत में भी लिया गया था। लेकिन बाद में पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया।
दिल्ली के कई इलाकों में नागरिकता संशोधन एक्ट के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुआ है, लेकिन जामिया नगर, सीलमपुर, दरियागंज कुछ ऐसे इलाके हैं जहाँ इन्हें लेकर पत्थरबाजी और हिंसा दोनों की खबरें आईं।

राणा अयूब का झूठ बेनकाब : मुस्लिमों को घर में घुस कर मार रहे हैं RSS कार्यकर्ता और UP पुलिस

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प्रोपेगेंडा पत्रकार राणा अयूब ने उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी प्रोटेस्ट की आड़ में झूठ फैलाया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में लेख लिख भारत की नकारात्मक छवि बनाने का प्रयास करने वाली राणा अयूब वेस्टर्न मीडिया के लिए नई अरुंधति राय बन बनती जा रही हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से वो झूठ और अफवाहों का ऐसा जाल बिछाती हैं कि लोगों को उनकी बातें सच लगने लगती हैं। अबकी उन्होंने यूपी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राणा अयूब ने लिखा कि मुज़फ्फरनगर और कानपुर से कुछ हृदय विदारक ख़बरें आ रही हैं।
बकौल राणा अयूब, इन दोनों जिलों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और और पुलिस साथ मिल कर मुस्लिम बहुल इलाक़ों में हमला कर रही है। घरों में घुस कर मुसलमानों को मारा जा रहा है। राणा अयूब ने दावा किया कि ऐसा ख़ुद स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मुस्लिमों के घर और गाड़ियों को आग के हवाले किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस व संघ कार्यकर्ताओं की क्रूरता के कारण मुस्लिम पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। राणा अयूब ने इस घटना की तुलना 2002 के गुजरात दंगों से की।
राणा अयूब ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रामलीला मैदान में हुई विशाल रैली पर भी तंज कसा। उन्होंने पूछा कि क्या धारा-144 सिर्फ़ प्रदर्शनकारियों के लिए है? बाद में लोगो ने उन्हें याद दिलाया कि न तो दिल्ली के सभी क्षेत्रों में धारा-144 लागू है और न ही रामलीला मैदान या उसके आसपास वाले इलाक़ों में।

इसके बाद राणा अयूब को यूपी पुलिस ने फटकार लगाई। उत्तर प्रदेश पुलिस ने साफ़ कहा कि वो ऐसे किसी को आरोप का खंडन करती है। साथ ही पुलिस ने अयूब को एक ‘जिम्मेदार रिपोर्टर’ की परिभाषा भी समझाई और कहा कि वो अपने बयान की पुष्टि के लिए सबूत पेश करें। इसके बाद राणा अयूब ने दावा किया कि खंडन करने से कुछ नहीं होगा। उन्होंने पुलिस को कोई सबूत नहीं दिया और कहा कि उनकी टाइमलाइन पर सबूत पड़े हुए हैं। अयूब ने कहा कि और नए एविडेंस भी आएँगे।
हालाँकि, यूपी पुलिस ने जब राणा अयूब की टाइमलाइन को खँगाला तो उसमें ऐसा कुछ भी नहीं मिला, जिससे पता चल सके कि उन्होंने पुलिस व आरएसएस पर जो आरोप लगाए हैं, वो सही हैं। यूपी पुलिस ने कहा कि राणा अयूब की टाइमलाइन पर जो भी है, वो दिखाता है कि पुलिस क़ानून-व्यवस्था कायम करने के लिए कार्रवाई कर रही है और इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है। यूपी पुलिस ने कहा:
“आपकी टाइमलाइन को देख कर ये पता चलता है कि उपद्रवियों की भीड़ ने एक पुलिस चौकी और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया है। अगर आप कोई स्पष्ट सबूत दे पाती हैं तो आपका स्वागत है।”

जैसा कि अपेक्षित था, राणा अयूब के पास अपने झूठे बयान की पुष्टि के लिए कोई सबूत नहीं था। फिर भी, हारून रियाज सहित कई बुद्धिजीवियों ने उनकी बातों का समर्थन किया और इस अफवाह को आगे बढ़ाया। हारून ने तो यहाँ तक दावा किया कि यूपी में भाजपा सांसद संजीव बालियान ने ही मुस्लिमों के ख़िलाफ़ हिंसा की शुरुआत की है।

जामिया में दंगाइयों ने ही लगाई थी बसों में आग: CCTV फुटेज जारी होने के बाद माफ़ी माँगेंगे सिसोदिया?

मनीष सिसोदिया, सीएए उपद्रवजामिया नगर में कुछ दिनों पहले 4 सार्वजनिक बसों को आग के हवाले कर दिया गया था। इसके अलावा 100 से भी अधिक प्राइवेट वाहनों को भी फूँक दिया गया था। जिस जगह पर ये वारदात हुई, वहाँ जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। वहाँ पर आम आदमी पार्टी के विधायक अमनतुल्लाह ख़ान को भी भीड़ का नेतृत्व करते देखा गया था। हिंसा होने के बाद पुलिस को जामिया कैम्पस में घुस कर स्थिति को नियंत्रित करना पड़ा था। इसके बाद जामिया व जेएनयू के छात्रों ने पुलिस पर बर्बरता का आरोप मढ़ा था।
अब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जारी कर दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है। दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कुछ फोटो शेयर कर आरोप लगाया था कि पुलिस ने ही बसों में आग लगाई और छात्रों को फँसा दिया। हालाँकि सिसोदिया ने जो फोटो शेयर किए थे, उनमें पुलिस आग बुझाती हुई दिख रही है। अब दिल्ली पुलिस द्वारा सीसीटीवी फुटेज जारी करने के बाद लोग आप नेता सिसोदिया माफ़ी की माँग कर रहे हैं।

ऊपर संलग्न किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि दंगाई बाइकों पर पेट्रोल डाल कर उन्हें आग के हवाले कर रहे हैं। ये वीडियो फुटेज 15 दिसंबर के हैं। दंगाइयों को वीडियो में पत्थरबाजी करते हुए भी देखा जा सकता है। उन्होंने मास्क पहन कर अपनी पहचान छिपाने का प्रयास किया और कई वाहनों को आग के हवाले किया।

वीडियो में आप देख सकते हैं कि मोटरसाइकिलों में से पेट्रोल भी निकाल लिया गया। पीछे हिंसक भीड़ को पत्थरबाजी करते हुए देखा जा सकता है। इस घटना के बाद भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने आशंका जताई थी कि ये दिल्ली में गोधरा दोहराने की साज़िश है। वहीं मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा था कि विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने चाहिए और इस तरह की हिंसा स्वीकार्य नहीं है। इससे भी अधिक हिंसक वारदातें सीलमपुर में हुईं, जहाँ दंगाइयों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की और आमजनों को भी घायल कर दिया।

नागरिकता संशोधन कानून के बारे में जानते ही नहीं मुसलमान, वोट बैंक समझते हैं सियासी दल: शाही इमाम

सैयद अहमद बुखारी, जामा मस्जिद
जामा मस्जिद के इमाम सैयद अहमद बुखारी ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर मुस्लिमों को ही फिर से आईना दिखाया है। बुख़ारी ने कहा कि मुस्लिम ये समझ ही नहीं रहे हैं कि इस क़ानून का किसी भी भारतीय नागरिक से कुछ लेना-देना ही नहीं है, चाहे वो हिन्दू हो या मुस्लिम। बुखारी ने चीजें स्पष्ट करते हुए समझाया है कि नागरिकता संशोधन क़ानून तो उनलोगों के लिए है, जो पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश से भारत में आकर शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं। साथ ही बुखारी ने सभी राजनीतिक दलों पर समान रूप से निशाना साधा। उन्होंने मुस्लिमों के बीच फ़ैल रहे अफवाह से बचने की सलाह दी।
सैयद अहमद बुखारी ने ‘दैनिक जागरण’ में प्रकाशित एक लेख में कहा है कि मुस्लिमों को मुल्क़ में अपनी आवाज़ बुलंद करते हुए 70 साल हो गए, लेकिन सभी राजनीतिक दलों ने उनका सिर्फ़ सत्ता के लिए इस्तेमाल किया। बुखारी ने कहा है कि राजनेताओं ने वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल कर, मुस्लिमों से झूठे वादे कर सत्ता तो पा ली लेकिन बाद में वादाखिलाफी पर उतर आए। शाही इमाम मानते हैं कि जो नेता आज तक मुस्लिमों के वोट लेते रहे, उन्होंने सत्ता मिलते ही मुस्लिमों से मुँह फेर लिया।
शाही इमाम ने बताया कि उन्होंने सीएए को लेकर काफ़ी लोगों से बात की और उनका अनुभव ये रहा कि अधिकतर लोगों को इसके बारे में कुछ पता ही नहीं है। सैयद अहमद बुखारी ने मुस्लिमों को समझाते हुए अपने लेख में कहा है;
कई लोग ऐसी अफवाहें फैला रहे हैं कि मुसलमानों को हिंदुस्ताान से बाहर भेजा जा रहा है। हमें यह समझने की ज़रूरत है कि इस कानून में नागरिकता देने की बात हो रही है, लेने की नहीं। लेकिन, युवाओं को यह डर है कि उन्हें हिंदुस्तान से बाहर भेज दिया जाएगा। हकीकत में नागरिकता कानून एनआरसी से अलग है और भारत के मुसलमानों से संबंधित नहीं है। लोगों को सीएए और एनआरसी के बीच का अंतर समझना चाहिए।

सैयद अहमद बुखारी ने लोगों को ये भी याद दिलाया कि पूरे देश में एनआरसी लागू करने जैसी कोई चीज अभी आई ही नहीं है। उन्होंने बताया कि सीएए तो एक्ट अर्थात क़ानून बन चुका है लेकिन एनआरसी के नियम-कायदे अभी तय ही नहीं हुए हैं तो विरोध क्यों? उन्होंने कहा कि पहले बैठकें होती थी, जिसमें इलाके के मौलाना, पार्षद, विधायक समेत आम लोग शामिल होते थे। सब कुछ तय किया जाता था कि उपद्रवी प्रदर्शन में शामिल न हों। लेकिन, अभी जब नमाज हो रही थी तो मैंने देखा कि एक तरफ नमाज हो रही थी दूसरी तरफ पीछे से नारे लग रहे थे। 
यदि नमाज के चलते गैर-मुस्लिमों ने नारेबाज़ी की होती, उस स्थिति में इन्ही मुसलमानों ने क्या कदम उठाया होता, समझा जा सकता है, परन्तु नमाज़ के चलते मुसलमानों द्वारा ही नारेबाजी करने वालों को क्या कहा सकता है?  
उन्होंने कहा है कि कोई भी तहरीर तब तक सफल नहीं होती जब तक कि जिम्मेदारों को ना जोड़ा जाए।उन्होंने सलाह दी कि विरोध संयमित तरीके से होना चाहिए। उन्होंने उन लोगों से भी आपत्ति जताई, जो जबरन दुकानें बंद करा रहे हैं।

क्या नागरिक संशोधन कानून का विरोध करने वाले राजनीतिक दल सत्ता में आने पर वापस लेने का साहस कर पाएंगे?

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज देश में जिस प्रकार #CAA को लेकर शांति के नाम पर उग्र एवं हिंसात्मक प्रदर्शन हो रहे हैं, देखिए कोई #metoo, #intolerance, #award vapsi, #moblynching और #not in my name आदि गैंग बाहर नहीं आया। क्यों? क्या उनके घर कोई शोक है? ऐसा नहीं है, उपद्रव करने वाले यही सब गैंग है। इनको CAA या NRC से कोई शिकायत नहीं, क्योकि अगर शिकायत होती तो CAA बिल राज्यसभा में पारित नहीं हुआ होता। लोक सभा में माना भाजपा का बहुमत है, लेकिन राज्य सभा में नहीं और जब राज्य सभा में भाजपा के बहुमत न होते हुए, बिल पारित होने का स्पष्ट मतलब है कि विरोध करने वाली पार्टियां सदन में कुछ और सदन से बाहर कुछ चेहरा लिए घूमते हैं। 
दूसरे, CAA के विरोध में हिन्दू विरोधी नारे क्यों लग रहे हैं? जामिया में हिन्दू विरोधी नारे लगने के बाद बंगलुरु में हिन्दू विरोधी आवाज़, क्यों? कौन है ऐसे नारे लगवाने वाला? आखिर किसके इशारे पर हिन्दू विरोधी नारे लग रहे हैं? चैनल भी अपनी TRP बढ़ाने प्रदर्शन का उग्र एवं हिंसात्मक चेहरा दिखाते हैं, लेकिन उपरोक्त प्रदर्शन नहीं, क्यों? लगभग सभी चैनल ने जामिया में लगे हिन्दू विरोधी नारों को छुपा लिया, जिस कारण आम नागरिक के सामने विरोध का असली चेहरा छुप गया। 2014 में मोदी सरकार से पूर्व "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम पर खूब हिन्दू धर्म को अपमानित किया गया, किसी आतंकवादी घटना पर आतंकवादियों को बचाने के हिन्दू साधु-संत और साध्वियों को गिरफ्तार करने पर उस समय हर चैनल चौपाल बैठा लेते थे, परन्तु आज फिर CNN की आड़ में हिन्दू धर्म को निशाने बनाने पर सब खामोश हैं, क्यों?  
इस नागरिक संशोधक कानून का विरोध करने वाले समस्त राजनीतिक दल क्या राष्ट्र को बताएंगे की 2024 में सत्ता में आने पर निरस्त करेंगे? क्या ये विरोधी भारत में भारतवासियों की बजाए घुसपैठियों और आतंकवादियों को पनाह देंगी?   
#CAA के खिलाफ बंगलुरु में प्रदर्शन के दौरान जिस बैनर का प्रयोग किया जा रहा था उसे देखकर भी क्या आप समझ नहीं सकते कि दर्द CAA का नहीं है किसी और बात का है। एक हिन्दू राष्ट्र में ये कैसे स्वीकार्य हो सकता है?
जिनके ज्यादा दर्द उठ रहा है उन्हें अच्छे से समझा दिया जाए कि उनको 1947 विभाजन में उनके हिस्से का टुकड़ा खैरात में मिल चुका है।

देश को हिंसा में झोंकना कांग्रेस पार्टी की पुरानी चाल
कांग्रेस पार्टी ने हमेशा देशहित से ऊपर गांधी परिवार के हित को रखा है। कांग्रेस पार्टी ने हमेशा अपना जनाधार बढ़ाने के लिए समाज को बांटा है। कांग्रेस पार्टी ने हमेशा अपनी राजानित जमकाने के लिए हिंसा का सहारा लिया है। आजादी के बाद से हमेशा कांग्रेस पार्टी ने इन्हीं हथकंडों से देश पर शासन किया है। नेहरू-गांधी खानदान का रुतबा बरकरार रखने के लिए कांग्रेस पार्टी और उसके नेता किसी भी हद तक जा सकते हैं। आज देश में कांग्रेस का क्या है, यह किसी से छिपा नहीं है। दिल्ली, पूर्वोत्तर आदि इलाकों में नागरिकता संशोधन कानून के नाम पर कांग्रेस पार्टी यह खेल खेलने में जुटी है।
शनिवार यानि 14 दिसंबर को कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में भारत बचाओ रैली का आयोजन किया था। इसी रैली में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सरकार के खिलाफ जमकर उगला। इन लोगों ने अपने जहरीले भाषण से रैली में आए लोगों को भड़काने का भी काम किया। इनके नेताओं को उकसावे का ही नतीजा था कि रविवार को दिल्ली के जामिया नगर इलाके में हिंसा भड़क गई और उग्र भीड़ ने कई वाहनों में आग लगा दी और पुलिस पर पथराव किया।
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कांग्रेसियों ने जामिया के छात्रों को भड़का कर हिंसा फैलाई
दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के बहाने कांंग्रेसी नेताओं शनिवार और रविवार को जामिया मिलिया विवि के छात्रों को भड़काने का काम किया। शनिवार की रैली में ही शायद इसकी रूपरेखा तैयार कर ली गई थी। ऐसा इसलिए, जामिया इलाके में आगजनी और हिंसा की वारदातों के बाद एक बार भी कांग्रेस की तरफ से शांति की अपील नहीं की गई, बल्कि भड़काऊ बयानों सो हिंसा को उकसाया गया। रविवार देर रात को जब जामिया समेत दूसरे विश्वविद्यालयों के छात्र आईटीओ के पुलिस मुख्यालय पर मौजूद थे, तो उनकी अगुवाई में कई कांग्रेसी नेता वहां थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद भी रात को हंगामा कर रहे छात्रों से मिलने पहुंचे। इतना ही नहीं रविवार की आधी रात को ही कांग्रेस प्रवक्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार और दिल्ली पुलिस के खिलाफ जमकर जहर उगला। यानि कांग्रेस को कतई इसकी चिंता नहीं थी हंगामा कर रहे छात्रों को शांत किया जाए, बल्कि वो उन्हें भड़काने में लगी थी।

पूर्वोत्तर के राज्यों में कांग्रेस ने आग लगाई
कांग्रेस पार्टी ने नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी की आड़ में पूर्वोत्तर के राज्यों में भी अपने मंसूबों को फैलाने का काम किया है। पिछले कई दिनों से पूर्वोत्तर के कई राज्यों में हिंसा का माहौल है और इसके पीछे भी कांग्रेस का हाथ बताया जा रहा है। यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने भाषणों में पूर्वोत्तर की हिंसा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। 
हिंसा और खौफ का खेल : कांग्रेस ने कराया लाखों करोड़ का नुकसान
पिछले वर्ष कांग्रेस पार्टी ने सितंबर के महीने में भारत बंद के दौरान हिंसा और लूट का खेल खेला था। इस दौरान जहानाबाद में एक बच्ची की जान चली गई तो कई जगहों पर ट्रेनों पर पथराव किए गए। लोगों की गाड़ियां तोड़ी गईं, किसानों को मारा गया और स्कूल बसों पर हमला किया गया। सरकारी संपत्ति के साथ निजी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया गया। FICCI के एक अनुमान के अनुसार एक दिन के भारत बंद से 20 हजार करोड़ का नुकसान होता है। वर्ष 2018 में कांग्रेस और विरोधी दलों ने सितंबर महीने तक पांच बार भारत बंद बुलाया है। एक बंद में 20 हजार करोड़ के नुकसान के हिसाब से अब तक एक लाख करोड़ का नुकसान हुआ जाहिर है यह किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि देश का नुकसान हुआ है।

मूर्ति तोड़ने वालों के कांग्रेस कनेक्शन का हुआ पर्दाफाश
त्रिपुरा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद देश में कई जगहों पर महापुरुषों की मूर्ति तोड़ने की घटनाएं सामने आईं। इसका एक पहलू ये है कि जितनी भी घटनाएं हो रही हैं वह भाजपा शासित राज्यों में हो रही हैं। इन घटनाओं को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस ट्वीट से भी समझा जा सकता है। 

जिस कांग्रेस ने बाबा साहेब को भारत रत्न नहीं दिया वह आज डॉ. आंबेडकर को अपना बता रही है। हकीकत तो ये है कि मूर्ति तोड़ने वाले जितने भी पकड़ा रहे हैं उनके कांग्रेस या विपक्ष से कनेक्शन सामने आ रहा है। आजमगढ़ में बाबा साहेब की जो मूर्ति तोड़ने वाला बसपा का एक दलित है, जो मूर्ति वाली जमीन पर कब्जा करना चाहता था। राजस्थान के अकरोला में गांधी जी की मूर्ति तोड़ने वाले तीनों आरोपी कांग्रेस के सदस्य हैं।
कांग्रेस का कुर्सी फेंको अभियान
कांग्रेस पार्टी लगातार हिंसा के लिए लोगों को प्रेरित कर रही है इसकी एक बानगी गुजरात विधानसभा में कांग्रेस समर्थित विधायक जिग्नेश मेवाणी के ‘कुर्सी फेंको’ आह्वान से भी समझा जा सकता है। मेवाणी ने 15 अप्रैल को कर्नाटक में होने वाली प्रधानमंत्री मोदी की रैली में लोगों को कुर्सी फेंकने के लिए उकसाया है। जिग्नेश मेवाणी ने गुजरात में भी कई बार हिंसा फैलाने की कोशिश की है और महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में भी उन्होंने ही दलित और मराठा के बीच संघर्ष की पृष्ठभूमि तैयार की थी।

कांग्रेस समर्थित हार्दिक पटेल ने फैलाई थी गुजरात में हिंसा
गुजरात में पटेल आरक्षण को लेकर जिस तरह से आंदोलन किया गया था वह किसी राजनीतिक दल के समर्थन के बगैर नहीं हो सकता था। बाद में हार्दिक पटेल और कांग्रेस के संबंधों और सौदेबाजी का खुलासा भी हुआ था। कांग्रेस से करोड़ों रुपये की डील कर गुजरात को हिंसा की आग में धकेल दिया गया और 14 लोगों की जान गंवानी पड़ी।

हिंदू देवी-देवताओं का सरेआम अपमान कर रहे कांग्रेसी
02 अप्रैल को दलित आंदोलन के दौरान जिस तरीके से हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया गया वह देश में आग लगाने की मंशा से ही किया गया। मध्य प्रदेश में हनुमान जी का जो अपमान किया गया था वह ईसाई मिशनरियों से ताल्लुक रखते थे और तमिलनाडु में जिन 2 लोगों को शिवलिंग पर पैर रखने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया है जिसका नाम सद्दाम और सईद है। जाहिर है कि इसके पीछे भी कांग्रेस का ही हाथ है।

मंदसौर में किसानों को भड़काने में कांग्रेस का हाथ
मध्य प्रदेश के मंदसौर में जून, 2017 को जब मंदसौर में किसानों का आंदोलन चल रहा था। इसकी आगुआई कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी खुद कर रहे थे। कांग्रेस विधायकों और कार्यकर्ताओं ने किसानों को इतना भड़काया कि छह लोगों की जान चली गई। एक सच्चाई ये है कि राहुल गांधी आंदोलन को बीच में ही छोड़कर विदेश भाग गए।

सहारनपुर में जातीय तनाव फैलाने की कांग्रेसी साजिश
फरवरी, 2017 के विधानसभा चुनाव में सामाजिक समरसता की मिसाल बने यूपी में अप्रैल 2017 में आग लगाने की कोशिश की गई। सहारनपुर में दलितों और ठाकुरों को आमने-सामने लाने की कोशिश की गई। मामले की जांच हुई तो पता लगा कि हिंसा फैलाने वाली ‘भीम आर्मी’ कांग्रेस के नेताओं के सहयोग से खड़ा हुआ संगठन है। इसमें कांग्रेस के कई स्थानीय नेताओं के हाथ भी सामने आए। 

सर्वसमाज की समरसता पसंद नहीं करती कांग्रेस
दरअसल आजादी के 70 वर्षो बाद पहली बार ऐसा लग रहा है कि पूरे देश का बहुसंख्यक समाज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जातीय बेड़ियां तोड़कर एकता के गठबंधन में बंधकर एकता के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहता है। समाज एकता के सूत्र में बंधकर विकास के रास्ते चलना चाहता है। लेकिन कांग्रेस को शायद ये एकता पसंद नहीं आ रही।

कांग्रेस ने लगातार 60 साल से हिन्दू विरोधी ही काम किये है … और हिन्दूओ के साथ अन्याय पर अन्याय किये है*
फिर भी कुछ हिन्दू, सिक्ख कैसे कांग्रेसी चोरो का साथ दे रहे है ये समझ नहीं आता के कोई हिन्दू कैसे कांग्रेस का समर्थन कर सकता है जबकि कांग्रेस नंबर 1 हिन्दू विरोधी पार्टी है।
ये रहा कॉंग्रेस का शर्मनाक पराक्रम
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दू मुक्त पाकिस्तान और बंगलादेश बनवाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दू मुक्त सिया चीन बनवाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दू मुक्त कश्मीर बनवाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दू मुक्त पाकिस्तान कब्जे वाला कश्मीर बनाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दू मुक्त केरल और असम बनवा रहा है।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दू मुक्त नार्थ ईस्ट बनवाया।
कांग्रेस ने ही बलूचिस्तान को हिंदुस्तान से नहीं जुड़ने दिया।
कांग्रेस ने ही चीन युद्ध हरवाया और अक्साई चीन खो दिया।
कांग्रेस के नेहरू ने कहा था सियाचिन बंजर है चीन पाकिस्तान ले जाये कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
कांग्रेस ने ही १९७१ की लड़ाई में फ़ौज के बलिदान से जो आधा पाकिस्तान कब्ज़े कर लिया था वो वापस कर दिया
पर कब्ज़े हुआ कश्मीर भी वापिस नहीं लिया।
कांग्रेस की वजह से ही हिंदुस्तान फ़ौज के लाखो सैनिक शहीद हो गए और फिर भी हिंदुस्तान जमीन खोता रहा।
कांग्रेस ने ही पंजाब - कश्मीर - बंगाल के 2 टुकड़े कर दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में कश्मीरी हिन्दुओ का नरसंहार होने दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में कश्मीरी हिन्दू औरतो के बलात्कार होने दिए।
*कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में सीखो का नरसंहार करवाया अपने कार्यकर्ता और नेताओ से।
*कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में सिख औरतो के बलात्कार किये अपने कार्यकर्ता और नेताओ से।
कांग्रेस ने सभी कश्मीरी हिन्दुओ के हत्यारों और बलात्कारीओ की सजा माफ़ की।
*कांग्रेस ने ही एक भी सिख औरतो के कांग्रेसी हत्यारे और बलात्कारी को सजा नहीं दी।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में असम, केरल, बंगाल में हिन्दुओ का नरसंहार होने दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में हिन्दू मुस्लिम दंगो में सेकड़ो हिन्दुओ का कत्लेआम होने दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में लव जिहाद को मदद की और मुसलमानो को चार बिविया रखने दी।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में मुसलमानो को जितने चाहे उतने बच्चे पैदा करने दिए।
कांग्रेस ने ही मुस्लिम कट्टरपंथी और हिन्दू विरोधी जिहादी ओवैसी के साथ गठबंधन किया।
कांग्रेस ने ही मुस्लिम कट्टरपंथी और हिन्दू विरोधी जिहादी अब्दुल्लाह और मुफ़्ती सईद का साथ दिया।
कांग्रेस ने ही हैदराबाद का जिहादी कासिम रिज़वी को पाकिस्तान भगाया।
कांग्रेस ने ही जूनागढ़ का गद्दार नवाब को पाकिस्तान भगाया।
कांग्रेस ने ही दाउद को बनाया बड़ा किया और पाकिस्तान भगाया।
कांग्रेस ने ही कश्मीरी जिहादियो का साथ दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में मुसलमानो को कायदे से विरुद्ध जा कर सहूलियत दी।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में मुसलमानो को हिन्दुओ से लूट कर मस्जिद बनाने के लिए रुपए दिए।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में हिन्दुओ के मंदिरो पर टैक्स लगाये और एक भी रूपया नहीं दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में सैकड़ो मस्जिदे बनाने में मदद की लेकिन राम मंदिर का विरोध किया।
कांग्रेस ने ही मुसलमानो को हज के लिए पैसे दिए लेकिन अमरनाथ पर टैक्स लगाये।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में हिन्दू विरोधी शरीया कानून लाया जिसे मुस्लिम पर्सनल लॉ कहते है।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दूओ का कानून हिन्दू कोड बिल नाबूद किया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में २ कानून लाये धारा ३७० कश्मीर में जो सरासर हिन्दू विरोधी है।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में गौहत्या का धंधा शुरू करवाया।
कांग्रेस ने ही पाकिस्तान को 400 करोड़ दिए
उसने उसी पैसे से कश्मीर पर हमला किया और आधा कश्मीर खा गया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में ईसाई मिशनरिओ की मदद की और पैसे दिए।
कांग्रेस ने हिन्दुओ की जमीन को ईसाईओ को मुफ्त में दे दी और बड़े बड़े चर्च बनवाने में मदद की।
कांग्रेस ने ही आज़ादी के 14 साल तक गोवा को ईसाई पुर्तगाल का गुलाम रहने दिया और धर्म परिवर्तन होने दिए।
कांग्रेस ने ही हिन्दू समाज को तोड़ ने का काम किया जाती आरक्षण ला कर।
कांग्रेस ने ही मुस्लिम आरक्षण की शुरुआत की लेकिन हिन्दुओ को कुछ नहीं दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में झूठा आपातकाल लगवाया और निर्दोष हिन्दूओ की हत्या करवाई।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में जबरजस्ती हिन्दूओ की नसबंदी करवाई।
कांग्रेस ने ही हिन्दू पंडितो को घर से बेघर किया और रिफ्यूजी बना दिया कोई मदद नहीं की।
कांग्रेस ने ही खालिस्तान की आग लगायी और सेकड़ो बेगुनाह मारे गए।
कांग्रेस ने ही हिद्नुस्तान में कोने कोने पर मुस्लिम डॉन बनाये और मदद की।
कांग्रेस ने ही हमेशा से देश के गद्दारो और हिन्दू विरोधिओं का साथ दिया।
कांग्रेस ने ही आज तक एक भी मस्जिद को नहीं गिराया लेकिन सैकड़ो मंदिर तोड़े।
कांग्रेस ने ही हरमंदिर साहेब में गोलाबारी की उसको नुकसान किया और सैकड़ो सिख मारे गए।
कांग्रेस ने ही राम मंदिर आंदोलन में गोलीबारी की और सेकड़ो हिन्दू मारे गए।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में मुस्लिम तुस्टीकरण की नीव रखी और उसे बड़ा बनाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में लव जिहाद को बढ़ावा दिया और पूरी मदद की जिहादियो की।
कांग्रेस ने ही हिन्दू विरोधी ओवैसी के खिलाफ हिन्दुओ का कत्लेआम करने की बात पर कोई कार्यवाही नहीं की उल्टा उससे गठबंधन किया।
कांग्रेस ने ही देश विरोधी AIMIM को बढ़ावा दिया और ओवैसी को सांसद बनाया।
कांग्रेस ने ही हिन्दूओ के जिहादी हत्यारों को हीरो बनाया अकबर, औरंगज़ेब, बाबर।
कांग्रेस ने ही हिन्दुओ के जिहादी हत्यारों के नाम पर सड़के, बगीचे बनाये अकबर, औरंगज़ेब, बाबर।
कांग्रेस ने ही हिन्दुओ के रक्षक को इतिहास से ही मिटा दिया शिवाजी, राणा प्रताप, गोबिंद सिंह।
कांग्रेस ने ही असली हिंदुस्तान का इतिहास मिटा कर एक झूठा इतिहास पढ़ाया और बताया।
कांग्रेस ने ही दुनिया का सबसे बड़ा नरसंहार हिन्दू नरसंहार जो मुसलमानो ने किया था उसे इतिहास से ही मिटा दिया।
कांग्रेस ने हिंदुस्तान की स्कूलों और यूनिवर्सिटियो में गलत और झूठा इतिहास का पाठ्यक्रम पढ़ाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान को लगातार लूटा और खुद का पेट भरती रही।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में गरीबी बढ़ाई।
कांग्रेस ने ही कुछ मुसलमानो का हिन्दू धर्म में वापस आने पर बबाल किया।
कांग्रेस ने ही लगातार लाखो हिन्दुओ का धर्म परिवर्तन होने में मदद की।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान को हिन्दू राष्ट्र में से एक झूठा सेक्युलर मुस्लिम तुस्टीकरण देश बनाया।
कांग्रेस ने ही हिन्दू विरोधी बड़े बड़े नेताओ को जन्म दिया।
कांग्रेस ने ही असली हिंदुत्व नेताओ की हत्या करवाई मुख़र्जी उपाध्याय को मरवाया।
कांग्रेस ने ही देशभक्त हिन्दुओ को अंग्रेज़ो से मरवा दिया भगत सिंह, आज़ाद, बोस।
कांग्रेस ने ही सरदार पटेल को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया।
कांग्रेस ने ही गरीब आदिवासिओ को मजबूर किया डकैत, नक्सली, माओवादी बनने के लिए।
कांग्रेस ने ही गरीब आदिवासिओ पर अत्याचार किये उन्हें गरीब और पिछड़ा रखा।
कांग्रेस ने ही दलित प्रथा को देश में चालू रखा और उनके साथ अत्याचार किये।
कांग्रेस ने ही देश के किशानो को गरीब रखा और आत्महत्या के लिए मजबूर किया।
इंदिरा ने असली कांग्रेसी सेनानिओ को कांग्रेस से निकाला।
कांग्रेस ने ही भोपाल का हत्यारा एंडरसन को देश से भगाया।
कांग्रेस ने ही इटली का दलाल क्वॉटरोची को देश से भगाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान का गद्दार काज़िम रिज़वी को देश से भगाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान का गद्दार जूनागढ़ का नवाब को देश से भगाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान का गद्दार दाउद को देश से भगाया।
कांग्रेस ने ही गैरकानूनी बांग्लादेशिओ को हिंदुस्तान में रहने दिया।
कांग्रेस ने ही गैरकानूनी बांग्लादेशिओ को हिंदुस्तानी नागरिक बनाया।
कांग्रेस ने ही बांग्लादेश से आ रहे हिन्दुओ को हिंदुस्तान में नहीं रहने दिया।
कांग्रेस ने ही लगातार बांग्लादेशी हिन्दुओ का कत्लेआम होने दिया।
कांग्रेस ने ही लगातार बांग्लादेश से हिंदुस्तान की जमीं खोती रही है और देखती रही।
कांग्रेस ने ही क़ानूनी पाकिस्तानी हिन्दुओ को शरण नहीं दी लेकिन तिबत्तिओं को दी।
कांग्रेस और गांधी ने हिन्दुओ को अहिंसा के नाम पर चुना लगाया और कायर रहने पर मजबूर किया।
कांग्रेस और गांधी ने हिन्दुओ के हत्याओ पर खुद हिन्दुओ को ही जिम्मेदार ठहराया
और मुसलमानो को निर्दोष बताया।
कांग्रेस और नेहरू ने ही हिंदुस्तान को आज़ादी मिलने के बाद तोड़ ने का ही काम किया था।
कांग्रेस ने आज़ादी के बाद भी अंग्रेज़ो की गुलामी नहीं छोड़ी थी और जैसा वे कहते वो करते।
कांग्रेस ने सिवाय कोंग्रेसी स्वंतंत्र सेनानिओ के सब को भुला दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में राजकीय घराना शाही शुरू की और देश को भरपूर लूटा।
कांग्रेस ने ही जान बुझकर अमरीका से रिश्ते ख़राब रखे।
कोंग्रेसी संजय गांधी कोई पद पर ना होने के बावजूद वो ही देश चलाता था।
कांग्रेस ने ही नेहरू गांधी परिवार को देश का मालिक बना दिया नेहरू इंदिरा राजीव संजय सोनिआ राहुल प्रियंका वाड्रा।