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नूपुर शर्मा का डीपी लगाने पर डरे हुए मुस्लिम समुदाय के कट्टरपंथियों ने युवक पर किया तलवार से हमला, चेहरे पर थूका


कुछ भी कहो नूपुर विवाद ने यूट्यूब पर एक्स मुसलमानों द्वारा कुरान, हदीस और पैगम्बर की जीवनी को जगजाहिर कर दिया है, और इसके जिम्मेदार कोई और नहीं मुस्लिम कट्टरवाद है जो नूपुर विवाद को जिन्दा रख रहा है। वैसे NewsNation चैनल ने भी "इस्लाम क्या कहता है" शो शुरू किया हुआ है। CAA विरोध से लेकर आज नूपुर विवाद तक टीवी पर होती चर्चाओं में आने वाले मुस्लिम कट्टरपंथी कहते हैं कि 'मुसलमान डरा हुआ है', उनके इस बात का समर्थन करने वाले जवाब दें, 'यदि डरा हुआ मुस्लिम समाज कत्लेआम कर सकता है, अगर यह डरा हुआ नहीं होता, तब तो पता नहीं ये मुग़ल युग की याद ताज़ा करवा देते।' अब कहाँ है #mob lynching, #intolerance, #award vapsi, #not in my name, धर्म-निरपेक्ष की बात करने वाला  और 
गंगा-जमुनी तहजीब का ढोंगी नारा लगाने वाला गैंग? मुस्लिम विद्वान डॉ रिज़वान अहमद अपने #Face To Face शो में ठीक कहते हैं कि "जिस दिन 50% हिन्दू जाग गया, तुम्हारा क्या हाल होगा?" फिर कोई किसी कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर या नितेश राणा को दोष न दे।     

हम सभी अपने मोबाइल से सोशल मीडिया पर अपने अपने विचार शेयर करते हैं लेकिन यह विचारों की अभिव्यक्ति अब लोगों के लिए घाटक होते जा रही हैं। पिछलें कुछ दिनों में हिंसा करने वाले उपद्रवी इस कदर बेखौफ हो गये हैं कि धर्म के नाम पर खून बहाने की सनक में लोगों की हत्या करने पर अमादा हो गये हैं। कुछ ही समय पहले मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने उदयपुर में दर्जी की नुपुर शर्मा का समर्थन करने पर बेरहमी से हत्या कर दी थी। उन्होंने बड़ी ही शान से सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो भी शेयर करते हिंदू समुदाय के लोगों का डराया था। उसके बाद भी कई घटनाएं सामने आयी जिसमें हिंदू समुदाय के लोगों की केवल इस लिए हत्या की गयी क्योंकि उन्होंने सोशल मीडिया पर नुपुर शर्मा का समर्थन किया था। अब एक नया मामला भी सामने आया हैं। जहां एक बार फिर नुपुर शर्मा के समर्थन में स्टेटस लगाने पर युवक पर धारदार हिथयार से मुस्लिम समुदाय के कुछ कट्टरपंथी लोगों ने हमला कर दिया। 

अहमदनगर जिला मुख्यालय से 222 किलोमीटर दूर कर्जत शहर के अक्काबाई चौक पर एक मेडिकल दुकान के सामने बृहस्पतिवार शाम को मुस्लिम समुदाय के कम से कम 14 लोगों ने तलवार, दरांती, लाठी और हॉकी स्टिक से पवार पर हमला किया। अधिकारी ने बताया कि यह घटना उस समय हुई जब मामले में शिकायतकर्ता पवार और अमित माने अपने दोपहिया वाहन पर एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे और मेडिकल दुकान के पास एक मित्रकी प्रतीक्षा कर रहे थे। उसी समय मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग दोपहिया वाहनों से उनके पास पहुंचे। प्राथमिकी के अनुसार, वे तलवार, दरांती और हॉकी स्टिक लिए हुए थे। माने ने शुक्रवार को दर्ज कराई गई अपनी शिकायत में कहा कि उनमें से एक ने पवार पर चिल्लाते हुए कहा कि उसने नुपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा था और कन्हैया लाल के बाद इंस्टाग्राम पर स्टेटस भी डाला था और फिर उन लोगों ने हमला कर दिया।

नूपुर शर्मा का समर्थन करने के कारण महाराष्ट्र में एक युवक पर जानलेवा हमले की खबर सामने आई है। पीड़ित युवक का नाम प्रतीक पवार उर्फ सनी है। रिपोर्टों के अनुसार कुछ मुस्लिम युवकों ने प्रतीक को घेरकर उस पर जानलेवा हमला किया। उसके चेहरे पर थूका। हमलावर उसे मरा समझ छोड़कर चले गए। फिलहाल प्रतीक का इलाज चल रहा है।

घटना 4 अगस्त 2022 की है। महाराष्ट्र के अहमदनगर के कर्जत में इस घटना को अंजाम दिया गया। यह मामला तब सामने आया, जब 6 अगस्त 2008 को महाराष्ट्र के बीजेपी विधायक नीतेश राणे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस हमले के बारे में बताया। राणे के अनुसार प्रतीक को 35 टाँके लगे हैं और जिंदगी की जंग लड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि नूपुर शर्मा का डीपी लगाने के कारण प्रतीक पर हमला हुआ।

मामले में 14 लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 143 (गैरकानूनी जमावड़ा का सदस्य होना), दंगा, 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाने के लिए सजा) और 504 (शांति भड़काने के इरादे से किया गया कृत्य) तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई एवं चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। घटना की निंदा करते हुए, भाजपा विधायक नितेश राणे ने कहा कि पवार को मुस्लिम समुदाय के 10 से 15 लोगों ने घेर लिया और उनसे सवाल किया कि वह नुपुर शर्मा की तस्वीर को अपने डीपी के रूप में क्यों रख रहे हैं और दूसरों को ऐसा करने के लिए कह रहे हैं। नितेश ने मुंबई में संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं चेतावनी देना चाहता हूं कि यदि हिंदुओं को इस तरह से निशाना बनाया जाता है, तो हमारे हाथ बंधे नहीं हैं।

जब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती हम चुप नहीं बैठेंगे। उनमें से कुछ अभी भी फरार हैं।’’ नितेश ने कहा, ‘‘उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मामले की निगरानी कर रहे हैं। महा विकास आघाड़ी (एमवीए) और नवाब मलिक अब सत्ता में नहीं हैं। हिंदुओं पर हमला करने वालों को वैसा जवाब दिया जाएगा। हम भीम राव आंबेडकर के संविधान का पालन करते हैं। इस देश में कोई शरिया कानून नहीं है।

एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार 23 साल के प्रतीक और उनके दोस्त अमित माने 4 अगस्त को कर्जत जा रहे थे। अक्कबाई चौक के नजदीक वे अपने दोस्तों का इंतजार कर रहे थे, तभी एक सफेद रंग की स्विफ्ट कार, काले रंग की बुलेट, लाल रंग की पल्सर और एक सफेद रंग की स्कूटी पर सवार होकर 12 से 14 मुस्लिम युवक वहाँ आ गए। इन युवकों ने उन्हें घेर लिया। माने के अनुसार, “मुस्लिम युवकों ने प्रतीक पवार से कहा- तुम्हें हिंदुत्व का बड़ा कीड़ा है। तुम लगातार नूपुर शर्मा और कन्हैयालाल के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट और स्टेटस लगा रहे हो। इसके कारण कई और लोग इनका समर्थन करने लगे हैं। तेरा भी उमेश कोल्हे करना पड़ेगा।”

नूपुर शर्मा का समर्थन करने के कारण उमेश कोल्हे की महाराष्ट्र के अमरावती में ही 21 जून 2022 को हत्या कर दी गई थी। यह मामला कई दिनों तक मीडिया की सुर्खियों से दूर रहा। लेकिन जब उदयपुर में 28 जून 2022 को कन्हैयालाल का मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने गला काट दिया उसके बाद इस मामले की भी परतें खुलने लगी।

काफिर को जिंदा नहीं छोड़ना है

एबीपी की रिपोर्ट बताती है कि प्रतीक प्रवार पर हमले को लेकर दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि तीखी बहस के बाद शाहरुख खान पठान ने प्रतीक पर जानलेवा हमला किया। प्रतीक ने बचाव की कोशिश की तो तलवार उसके हाथ पर लग गई। इसके बाद पीछे से निहाल खान पठान और सोहेल खान पठान ने प्रतीक के सिर पर वार किया। इससे वह नीचे गिर गया और उसके सिर से खून बहने लगा। इस हालत में भी वे प्रतीक पर तब तक हमला करते रहे जब तक वह बेहोश नहीं हो गया। इसके बाद वे मौके से फरार हो गए। इस दौरान हमलावर कह रहे थे कि इस काफिर को जिंदा नहीं छोड़ना है।
इस मामले में अब तक 4 आरोपितों की गिरफ्तारी की खबर है। विधायक नितेश ने इस घटना को लेकर बताया, “हमलावरों ने प्रतीक से कहा कि तू बहुत हिन्दू-हिन्दू करता रहता है। तू सबको नूपुर की DP रखने के लिए कहता है। हमले के दौरान उसका गला काटने की भी धमकी दी गई।”

महाराष्ट्र : दो संतों की मॉब लिंचिंग पर क्यों मौन हैं ढोंगी लिबरल और सेक्युलर गैंग?

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
महाराष्ट्र में आज हिंदुत्व की बात करने वाली शिवसेना की सरकार है। लेकिन इस सरकार में हिन्दू सुरक्षित नहीं है। हिन्दुओं पर लगातार हमले हो रहे हैं। पालघर में जिस तरह पुलिस की मौजूदगी में दो संतों और उनके ड्राइवर की मॉब लिंचिंग की गई है, उससे पूरा देश हैरान है। इस घटना को गुरुवार को अंजाम दिया गया, लेकिन इस मॉब लिंचिंग पर न तो उद्धव ठाकरे का बयान आया है और न ही लिबरल और सेक्युलर गिरोह का। 
हैरानी की बात यह है कि गौ-तस्करों के मामले में लिंचिंग-लिंचिंग की रट लगाने वाले बुद्धिजीवी संतों की हत्या पर मौन है। न तो टीवी चैनलों पर डिबेट हो रही और न ही कोई मार्च निकाला जा रहा है। इस घटना ने फिर साबित कर दिया है कि तथाकथित बुद्धिजीवियों को सिर्फ गौ-तस्करों की चिंता है।अब कोई #mob lynching, #intolerance, #award vapsi, #not in my name आदि किसी गैंगस्टर की आवाज़ नहीं निकल रही, किस बिल में छिपे बैठे हैं या उनके घर कोई महाशोक है? इतना ही नहीं एक्टर आमिर खान और उसकी पत्नी की भी आवाज़ नहीं निकल रही, जबकि यह मॉब लिंचिंग महाराष्ट्र से बाहर नहीं, महाराष्ट्र में ही हुई है। राहुल गाँधी, अरविन्द केजरीवाल, किसी वामपंथी तक की बोलती बंद है, मुंह में दही जमाए बैठे हैं, क्यों नहीं बोलते अब?     
मॉब लिंचिंग की यह घटना उस समय घटी जब पालघर जिले के गडचिनचले गांव के लोगों ने चोर होने के शक में तीन लोगों को उनकी कार से बाहर निकालकर उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक सुशील गिरि महाराज, जयेश और नरेश येलगडे एक वैन में बैठ कर सूरत में किसी शख्स के अंतिम संस्कार के लिए जा रहे थे। इन तीनों में से ही एक शख्स कार चला रहा था। इसी बीच 200 से अधिक ग्रामीणों ने तीनों को चोर समझकर रोक लिया। उन्होंने शुरुआत में तो उन पर पथराव किया और एक बार जब गाड़ी रुकी, तो तीनों को बाहर निकाला गया और लाठी-डंडों से जमकर पीटा गया। इसी दौरान ड्राइवर ने पुलिस को कॉल भी किया कि उनके वाहन पर हमला किया जा रहा है और ग्रामीण उन्हें रोकने की कोशिश कर रहे थे। जल्द ही पुलिस टीम भी मौके पर पहुंच गई।
पुलिस टीम के पहुंचने पर भी ग्रामीण नहीं रूके, यहां तक कि उन्होंने पुलिस के वाहनों पर भी हमला कर दिया। खबरों के मुताबिक इस हमले में कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हो गए हैं। पालघर के कलेक्टर कैलाश शिंदे ने बताया, ‘जिन तीन लोगों की भीड़ ने पिटाई की उन्हें अस्पताल लाया गया था जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मामले में लगभग 110 गांवों वालों को पूछताछ के लिए पुलिस थाने में लाया गया है और आगे की जांच जारी है।’
महाराष्ट्र के पालघर में दो साधु और एक ड्राइवर की मॉब लिंचिंग के मामले में FIR दर्ज कर 110 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से 101 लोगों को 30 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है, जबकि 9 नाबालिगों को जुवेनाइल सेंटर होम में भेज दिया गया है।
साधुओं की निर्मम हत्या को लेकर साधु-संतों सहित नेताओं ने रोष जताया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने रविवार(अप्रैल 19) को इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की और चेतावनी दी कि अगर हत्यारों की शीघ्र गिरफ्तारी नहीं की गई तो महाराष्ट्र सरकार के विरुद्ध आंदोलन किया जाएगा।



पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ी कार्यवाही की मांग 
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “पालघर में जिस क्रूरता के साथ मॉब लिंचिंग हुई, वह मानवता को शर्मसार करने वाली है। पालघर में भीड़ हिंसा की घटना का वीडियो हैरान करने वाला और अमानवीय है। ऐसे संकट के समय इस तरह की घटना और भी ज्यादा परेशान करने वाली है। मैं राज्य सरकार से गुजारिश करता हूँ कि वह इस मामले की उच्च स्तरीय जाँच करवाएँ और जो दोषी हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।”


भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रवक्ता बैजयंत पांडा ने भी घटना को लेकर रोष जताया है। उन्होंने इस घटना को शर्मनाक बताया और उद्धव सरकार को निशाने पर लिया। पांडा ने ट्वीट किया, “पालघर में पुलिस के सामने भीड़ हिंसा की घटना का वीडियो दहला देने वाला है। वह भी तब, जब कुछ ही दिन पहले उद्धव सरकार के शासन में एक पुलिसकर्मी और डॉक्टर पर हमला हुआ था। मीडिया के एक वर्ग ने इसे ‘संतों के भेष में चोरों’ का मामला बताकर घटना को कमतर दिखाया।”
स्टेट स्पॉन्सर्ड? या पुलिस स्पॉन्सर्ड?- रोहित सरदाना, आजतक पत्रकार 
आज तक के पत्रकार रोहित सरदाना ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कई सवाल खड़े किए। उन्होंने घटना का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “महाराष्ट्र के पालघर में हुई इस हत्या को क्या कहें? स्टेट स्पॉन्सर्ड? या पुलिस स्पॉन्सर्ड? महाराष्ट्र सरकार की शान में आए दिन कसीदे पढ़ने वाले फिल्मी सितारों में से कितनों ने इस बारे में ट्वीट किया?”
वहीं आज तक की पत्रकार श्वेता सिंह ने भी इसे प्रायोजित हत्या बताते हुए कहा, “एक वृद्ध साधु वर्दी से उम्मीद लगाए पीछे छिपे। तो उसने खुद उन्हें भीड़ को सौंप दिया! ‘चोर समझकर’ मारने वाली पूरी रिपोर्ट मनगढ़ंत दिख रही है। ये वीडियो तो प्रायोजित हत्या का है।” बता दें कि मीडिया गिरोह साधुओं की मॉब लिंचिंग कर हत्या की खबर की रिपोर्टिंग ‘चोर समझकर’ पीट-पीट कर हत्या के रूप में की है।

“आज भगवा के साथ हुए नरसंहार पर मुझे भारत का मौन खल रहा?-- एक्टर मुकेश खन्ना

एक्टर मुकेश खन्ना ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “आज भगवा के साथ हुए नरसंहार पर मुझे भारत का मौन खल रहा? क्या संन्यासी साधु संत का कोई मानवाधिकार नहीं होता? हिंदुत्व का राग अलापने वाली भगवा ध्वज लेकर चलने वाली सरकार क्या मर चुकी है? क्या सनातन के संहार के बाद देश खड़ा रह सकेगा? कोई अन्य संप्रदाय का धर्मगुरू होता फिर?”
सोशल मीडिया पर भी घटना को लेकर लोगों में काफी आक्रोश देखने को मिला। लोगों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रियाएँ दीं। एक ने लिखा, “अगर पालघर ग़लती से यूपी में होता और मरने वाला तबरेज या अखलाक होता तो चूड़ियाँ टूटने की इतनी आवाज़ आती कि कोरोना मर जाता।”
आहत इंदौरी नाम के एक यूजर ने लिखा, “हिन्दुओं ने बेवजह किसी मौलवी की पुलिस के सामने पीट पीट कर हत्या कर दी होती तो ये अब तक अंतराष्ट्रीय खबर बन गई होती और कॉन्ग्रेस, सपा, बसपा आदि दलों का रो-रो कर बुरा हाल होता।”




एक अन्य यूजर ने लिखा, “बालासाहेब होते तो आज संतों को मारने वालों के हाथों को काट देते, लेकिन दुर्भाग्य से आज उनके बेटे की सरकार है जो कॉन्ग्रेस की गोदी में खेल रहा है।”
एक ने लिखा, “अखलाक ओर पहलू खान पर आँसू बहाने वाले लिबरल्स महाराष्ट्र के पालघर में 2 संत और उनके ड्राइवर को बड़े ही बेरहमी से लिंचिंग कर मौत के घाट उतार दिया गया तब चुप क्यों हैं?? कहाँ हैं लोकतंत्र के ठेकेदार?? क्यों… ये तो संतों की मृत्यु हुई है, कौन पूछता है संतों को?”
घटना की जानकारी मिलने पर शुरुआत में पहुंचे पुलिसकर्मी पीड़ितों को बचा नहीं सके क्योंकि हमलावरों की संख्या बहुत अधिक थी और भीड़ ने पुलिस वाहन में भी पीड़ितों की पिटाई की। कासा पुलिस स्टेशन के निरीक्षक आनंदराव काले ने बताया कि यह वीभत्स घटना गुरुवार को रात में 9.30 से 10 बजे के बीच हुई।
एक सीनियर पुलिस अधिकारी का कहना है कि फिलहाल मामले की सभी एंगल से जांच की जा रही है। इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या इलाके में सोशल मीडिया के जरिए अफवाह फैलाई जा रही है? आखिर इतने सारे ग्रामीण एक साथ कैसे जमा हो गए? ग्रामीणों से भी इसको लेकर पूछताछ की जा रही है।
जिस बेरहमी से संतों और उनके ड्राइवर को पीट-पीटकर मौत के घाट उतारा गया है और पुलिस पर पथराव किया गया। उससे पता चलता है कि महाराष्ट्र में सरकार बदलते ही देश और हिन्दू विरोधियों के हौसले बुलंद है। उन्हें न तो पुलिस का डर है और न कानून का। अब उनके निशाने पर बेकसूर साधु-संत हैं।
महाराष्ट्र में अपराधियों के हौसले इसलिए बुलंद है,क्योंकि उद्धव सरकार को कांग्रेस और एनसीपी का समर्थन हासिल है। इसलिए उद्धव सरकार कांग्रेस और एनसीपी नेताओं के संरक्षण में चलने वाले अपराधी गिरोहों पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रही है। आज प्रदेश में अपराधी गिरोहों का बोलबाला है। बैशाखी पर चल रही उद्धव सरकार की कमजोरी और नाकामी का खामियाजा प्रदेश की बेकसूर जनता को भुगतना पड़ रहा है। 
क्या है पालघर मामला 
जूना अखाड़ा के 2 महंत कल्पवृक्ष गिरी महाराज (70 वर्ष), महंत सुशील गिरी महाराज (35 वर्ष) अपने ड्राइवर निलेश तेलगडे (30 वर्ष) के साथ मुंबई से गुजरात अपने गुरु भाई को समाधि देने के लिए जा रहे थे। दरअसल, श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा 13 मंडी मिर्जापुर परिवार के एक महंत राम गिरी जी गुजरात के वेरावल सोमनाथ के पास ब्रह्मलीन हो गए थे। दोनों संत महाराष्ट्र के कांदिवली ईस्ट के रहने वाले थे और मुंबई से गुजरात अपने गुरु की अंत्‍येष्टि में शामिल होने जा रहे थे।
इसी दौरान रास्ते में उन्हें महाराष्ट के पालघर जिले में स्थित दहाणु तहसील के गडचिनचले गाँव में पालघर थाने के पुलिसकर्मियों ने पुलिस चौकी के पास रोका। इसके बाद ड्राइवर के साथ दोनों संतों को भी गाड़ी से बाहर निकलने के लिए कहा गया और उन लोगों को पुलिस वालों ने, सड़क के बीच में ही बैठा दिया, कहा जा रहा है वहाँ गाँव के करीब 200 के आस पास लोग अचानक ही इकट्ठे हो गए।
फिर भीड़ ने, पुलिस वालों के सामने ही डंडे और पत्थरों से मार-मार कर दोनों सन्तों और ड्राइवर की बेरहमी से हत्या कर दी। बता दें कि यह गाँव और इलाका आदिवासी बहुल है और ग्रामीणों में ज़्यादातर ईसाई और कुछ के मुस्लिम समुदाय का होने का दावा भी संत समाज के कुछ लोगों द्वारा किया गया है।

जामिया के विद्यार्थियों’ का ऐलान : "हम अल्लाह को मानते हैं, लोकतंत्र को नहीं"

Students of Jamia द्वारा शेयर किया गया फेसबुक पोस्ट
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
देशद्रोह के आरोपित शरजील इमाम के समर्थन में जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों द्वारा रैली निकालने के बाद अब इन छात्रों ने ऐलान किया है कि वो लोकतंत्र को नहीं, अल्लाह को मानते हैं। 
Students of Jamia द्वारा इस तरह की पोस्ट पर हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई भाई-भाई, गंगा-यमुना तहजीब की राग रागने वाले, संविधान और लोकतन्त्र की दुहाई देने वाले, #not in my name, #award vapsi और #intolerance गैंग क्यों चुप हैं? क्या जब दूसरी तरफ से प्रतिक्रिया होने पर होश में आएंगे?  
फेसबुक पर Students of Jamia नाम के पेज ने ये पोस्ट किया है। इसमें लिखा गया है कि ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मद रसुल्लाह, लोकतंत्र के खिलाफ है।
इस पेज ने Al Haya Min Allah नाम के एक पेज को शेयर किया है। जिस पर लिखा गया है कि लोकतंत्र के सिद्धांत के विपरीत, इस्लाम जोर देकर कहता है कि हक को मेजॉरिटी के साथ परिभाषित नहीं किया गया है।
इसमें मसनद अहमद के हवाले से कहा गया है कि पैगंबर मोहम्मद ने कहा था कि कई दुष्ट लोगों के बीच धार्मिक लोग भी होते हैं। जो उनकी अवहेलना करते हैं, उनकी संख्या उनके मानने वालों की तुलना में अधिक होती है। अल्लाह सार्वजनिक रूप से स्वीकृत मेजरिटेरिज्म के खिलाफ बात करते हैं। और यदि आप उन लोगों की बातें मानते हैं तो वो आपको अल्लाह के रास्ते से गुमराह करेंगे।


एक तरफ जहाँ सीएए का विरोध करते हुए ये कहा जा रहा है कि वो लोकतंत्र और संविधान का पालन कर रहे हैं, उसकी रक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जामिया के छात्रों का इस तरह से खुले तौर पर कहना कि उनके अल्लाह लोकतंत्र के खिलाफ हैं, कई सवाल खड़े करता है। जब जामिया के दंगाईयों पर पुलिस ने कार्रवाई की थी तो वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल समेत कई नेताओं ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या बताया था। उनका कहना था कि लोकतंत्र कमजोर हो रहा है, मगर अब जो जामिया के छात्र कर रहे हैं, वो क्या है?
इसी जामिया के छात्रों ने असम को हिंदुस्तान से काटने की बात करने वाले शरजील इमाम के समर्थन में मार्च निकाला था। इस दौरान नारे लगाए गए थे, “शरजील तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं। शरजील तुम आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं। शरजील को रिहा करो।”
शरजील ही शाहीन बाग विरोध प्रदर्शन का मुख्य चेहरा था, जो घूम-घूम कर भड़काऊ भाषण दे रहा था। उसने मस्जिदों में आपत्तिजनक पोस्टर्स बाँटे थे। ऐसे में शरजील के समर्थन में जामिया के छात्रों का खड़ा होना संदेह पैदा करता है। मार्च के दौरान इन छात्रों ने हज़ारों शरजील इमाम पैदा करने की बात कही। इससे पहले लखनऊ में भी शरजील इमाम के समर्थन में मार्च निकालने की कोशिश की गई थी। हालाँकि योगी आदित्यनाथ की सरकार के प्रयासों के कारण ये संभव नहीं हो सका।

सांप्रदायिकता की आग लगाकर केजरीवाल ने जीती दिल्ली


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
अक्सर अपने इस ब्लॉग पर लिखता रहा हूँ, भारत में जब भी कहीं कोई चुनाव होता है, भाजपा विरोधी कभी #metoo, #not in my name, #mob lynching, #award vapsi तो कभी #intolerance गैंगों के सक्रीय होने पर लिखा था कि देखना है अगले चुनाव में कौन-सा गैंग सक्रीय होता है और आ गया #shaheen bagh। भाजपा विरोधी भाजपा को इन पर अपनी प्रक्रिया देने के उकसाते और भाजपा इनके बिछाए जाल में फंसती रही और विरोधी अपना खेल खेलने में व्यस्त रहते। परिणाम स्वरुप चुनाव संपन्न होते ही सारे गैंग अगले चुनाव तक विश्राम करने चले जाते।     
आम आदमी पार्टी हमेशा विपक्षियों पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाती रहती है, जबकि सच्चाई यह है कि केजरीवाल और उनकी पार्टी नेताओं ने दिल्ली चुनाव को हर तरह से सांप्रदायिकता के रंग में रंग दिया। 
केजरीवाल विकासपुरी में इनके वोटबैंक द्वारा डॉ नारंग की हत्या पर मौन रहते हैं. लेकिन अख़लाक़ की मौत पर चीखते हैं, क्या यह साम्प्रदायिकता नहीं?
हिन्दुओं को लुभाने केजरीवाल पहुंचे हनुमान की शरण में
जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ये शंका होने लगी कि हिन्दू उनके खिलाफ होने वाले हैं तभी उन्होंने भावनात्मक कार्ड खेला। अरविंद केजरीवाल ने एक टीवी चैनल से साठगांठ कर एक कार्यक्रम आयोजित किया। उनका कार्यक्रम पूरी तरह सुनियोजित था। अपने इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने खुद को कट्टर हनुमान भक्त बताया। ये बात और है कि उस सुनियोजित कार्यक्रम में भी उन्होंने हनुमान चालीसा गलत ही पढ़ा।

एक निजी चैनल के कार्यक्रम में भाग लेने के दौरान अरविंद केजरीवाल से जब पूछा गया कि आपने खुद को हनुमान भक्त बोला है तो क्या हनुमान चालीसा आती है? इस पर केजरीवाल ने कहा, ‘हां, बिल्कुल आती है। मैं गाने की कोशिश करूंगा। इससे शांति बहुत मिलती है।’ दिल्ली के मुख्यमंत्री ने इसके बाद हनुमान चालीसा सुनाई।
मनीष सिसोदिया शाहीन बाग के साथ डटे रहे
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ शाहीन बाग में हो रहे प्रदर्शन पर मनीष सिसोदिया ने कहा कि ‘मैं शाहीन बाग के लोगों के साथ खड़ा हूं। मनीष सिसोदिया ने एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में कहा कि मैं जेएनयू वालों के साथ भी खड़ा हूं।

यही कारण है कि केजरीवाल सरकार ने देशद्रोह का मुकदमा चलाने के लिए जेएनयू की फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए। देखना है कि अब भी कब तक हस्ताक्षर नहीं करते हैं। 
साजिश के तहत केजरीवाल ने शाहीन बाग से बनाई दूरी
पूरे चुनाव के दौरान शाहीन बाग का मुद्दा जोर-शोर से उठता रहा। और मीडिया केजरीवाल सरकार की नाकामियों को उजागर करने की बजाए शाहीन बाग़ पर केंद्रित रहा, जो केजरीवाल कूटनीति की सबसे बड़ी जीत थी। वहां उठे हिन्दू विरोधी स्वरों ने भी भाजपा को उकसाने का काम किया। दिल्ली विधानसभा चुनाव में अगर कोई एक मुद्दा सबसे ज्यादा असरदार कहा जा सकता है तो वो शाहीन बाग था, इस विधानसभा में करीब 43% मुस्लिम मतदाता हैं।

वहीं आप के प्रचार की कमान खुद अरविंद केजरीवाल ने संभाल रखी थी, लेकिन उन्होंने इस विधानसभा में न तो कोई चुनावी सभा की ना ही कोई रोड शो किया। इसके बाद भी आप को मुसलमानों का पूरा वोट मिलना यह बताता है कि शाहीन बाग से केजरीवाल का दूरी बना के रखना उनकी साजिश का एक हिस्सा था।

गंदी राजनीति से बाज नहीं आई AAP
लोगों का असली रंग सामने आ ही जाता है, तभी तो चुनाव परिणाम सामने आते ही आम आदमी पार्टी का सांप्रदायिक रंग सामने आ गया, यह रंग आप के नेता सौरभ भारद्वाज ने सामने लाया है। उन्होंने अपने एक ट्वीट में लिखा है कि आज के बाद भाजपा मंगलवार को कभी वोट की गिनती नहीं कराएगी। आज से मेरी ग्रेटर कैलाश विधानसभा में हर मंगलवार को भाजपा भक्तों को हनुमान जी की याद दिलाई जाएगी।


हिन्दू प्रतिमाएं खण्डित : क्या आंध्र प्रदेश में बाबर और तैमूर मुगलों की वापसी ?

आंध्र प्रदेश मंदिर
हनुमान, माँ दुर्गा, गणेश व साईं बाबा की मूर्तियों को तोड़ डाला गया
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जबसे मोदी सरकार द्वारा पाकिस्तान में पल रहे आतंकियों पर सर्जिकल और एयर स्ट्राइक कर पाकिस्तान को विश्व में बेनकाब किया, कश्मीर में पत्थरबाजों और छुपे हुए आतंकियों को ढूंढ-ढूंढ कर 72 हूरों के पास पहुँचाना, तीन तलाक और हलाला, अनुच्छेद 370 और सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या में राममन्दिर बनने इजाजत दी है, तभी से तुष्टिकरण पुजारियों की रातों की नींद और रोटी-पानी हराम होने पर जो सीनों में आग धधक रही थी, वह आग नागरिकता संशोधक कानून पारित होते ही फूटनी शुरू हो गयी है। अब यह आग कब बुझेगी कहना मुश्किल है। 
हाँ, जिस दिन हिन्दुओं के सब्र का पैमाना टूटेगा, उस स्थिति में क्या होगा? आखिर मुग़ल वंशज और जयचंदी कब तक विनाशकारी खेल खेलेंगे? नागरिकता कानून की आड़ में शैतानी ताकतें मुसलमानों को भड़का कर सामने आ रही हैं, नागरिकता कानून को बेगुनाह मुसलमानों को बलि का बकरा बनाकर खुद अपने बिलों में छुपकर बैठ रहे हैं, आखिर भारत सरकार कब तक हिन्दुओं और उनके देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को खंडित होते देखती रहेगी?
आखिर भारत सरकार, मुग़ल वंशज, जयचंदी, संविधान की दुहाई देने वाले,गंगा-यमुना तहजीब का राग रोने वाले, #intolerance, #mob lynching, #award vapsi और #not in my name गैंग हिन्दुओं की भावनाओं से कब तक खिलवाड़ करते रहेंगे?  
ऐसे में स्मरण आती है कपिल मिश्रा की यह वीडियो:

देश भर के कई मंदिरों में हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को विखंडित किए जाने की ख़बरें आती रहती हैं। कभी सांप्रदायिक हिंसा में मंदिरों को निशाना बनाया जाता है तो कभी प्राचीन मूर्तियों को हड़पने के लिए चोरी की जाती है। अब ऐसी ही एक ख़बर आंध्र प्रदेश से आई है। ये घटना आंध्र प्रदेश के काकीनाडा शहर में स्थित अग्रहारम इलाक़े की है। यहाँ सुरवारापु में स्थित बजरंग मंदिर में हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियों के साथ तोड़फोड़ मचाई गई।
उक्त मंदिर सड़क किनारे खुली जगह में स्थित था। ये घटना मंगलवार (जनवरी 21, 2020) को हुई। जिस रास्ते में ये मंदिर स्थित है, वो रास्ता पीठापुरम शहर की ओर जाता है। जब बदमाशों ने पाया कि मंदिर में कोई नहीं है और आसपास का इलाक़ा सुनसान पड़ा है, तब उन्होंने मंदिर में घुस कर प्रतिमाओं के साथ छेड़छाड़ की। माँ दुर्गा और भगवान गणेश की प्रतिमाओं के साथ तोड़फोड़ की गई। इस घटना के बाद से क्षेत्र के लोगों में गुस्सा व्याप्त है।
जब स्थानीय लोगों ने सुबह में मंदिर व प्रतिमाओं को ऐसी स्थिति में देखा तो उन्होंने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद घटनास्थल का दौरा किया और बदमाशों की तलाश में लग गई। विखंडित की गई प्रतिमाएँ सीमेंट की बनी हुई थीं। उन्हें तोड़ने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल किया गया। पुलिस का कहना है कि ये घटना देर रात की गई। सुबह पूजा करने गए श्रद्धालुओं ने सबसे पहले मंदिर में हुई तोड़फोड़ के बारे में स्थानीय लोगों को बताया। हनुमान और साईं बाबा की मूर्तियों को भी विखंडित कर दिया गया।


काकीनाडा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की पूर्व विधायक पिल्ली अनंत लक्ष्मी सहित कई अन्य स्थानीय नेताओं ने इस घटना की निंदा की है। धारा-427 (संपत्ति को नुकसान पहुँचाना) के तहत केस दर्ज कर पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जब से नागरिकता कानून बना है, मोदी-विरोधी विरोध में इतने अंधे और पागल हो चुके हैं, लगता ह...
वाईएससीआरपी, टीडीपी और भाजपा- तीनों दलों के नेताओं ने मंदिर का दौरा किया और आरोपितों की त्वरित गिरफ़्तारी की माँग की। भाजपा विधायक राजा सिंह ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री जगन रेड्डी को निशाने पर लिया।

RTI ने खोली केजरीवाल की पोल

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने शासनकाल के दौरान जनता को ठगने का काम किया है। ऐसा हम नहीं बल्कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पूछे गए सवालों के वो जवाब कह रहे हैं, जिनके सामने आने पर उनके वादों की पोल खुल गई है।
इंडिया टीवी ने अपनी एक्सक्लूसिव ख़बर के माध्यम से उन सभी सवालों के जवाब को सिलसिलेवार तरीके से जनता के सामने रखा है। इन सवालों के जवाब देखने के बाद आपको पता चल जाएगा कि आम आदमी पार्टी (AAP), झुग्गी झोपड़ी (जेजे) क्लस्टर के निवासियों की शिक्षा, परिवहन, स्वास्थ्य सेवा और पुनर्वास के मोर्चों पर किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही है।
India Tv - The RTI replyRTI के जवाबों में, जेजे कॉलोनी में रहने वाले निवासियों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी होने का ख़ुलासा हुआ है। जेजे कॉलानी में विकास को लेकर किए गए सर्वेक्षण के लिए नोडल प्राधिकरण, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) ने केजरीवाल सरकार को एक प्रमाण-पत्र से सम्मानित किया था। जबकि इसकी सच्चाई यह है कि ऐसा कोई सर्वेक्षण हुआ ही नहीं था, जिसके लिए केजरीवाल सरकार को सम्मानित किया गया। दरअसल, अपने चुनावी घोषणा-पत्र में, AAP ने वादा किया था कि वो शहर के सर्वेक्षण में शामिल होने के बाद उसी स्थान पर जेजे निवासियों को घरों के निर्माण की मंज़ूरी देगी, जहाँ वो रह रहे थे।
नई दिल्ली स्थित RTI कार्यकर्ता तेजपाल सिंह ने 2019 में RTI के तहत कुछ सवाल पूछे थे। उन्हें आधिकारिक तौर पर जो जवाब दिए गए उनकी इमेज नीचे लगाई गई है।
फेक सर्वेक्षण प्रमाण-पत्र 
सूचना के अधिकार के माध्यम से यह पता चला कि सरकार ने 1 फरवरी, 2015 से 30 सितंबर, 2019 के बीच 3,00,000 जेजे क्लस्टर के निवासियों के पुनर्वास के लिए कोई निर्माण शुरू नहीं किया। जबकि दिल्ली सरकार को इसके लिए सर्वेक्षण पूरा करने संबंधी प्रमाण-पत्र दिया गया। RTI से पता चला है कि उक्त तारीखों के दौरान ऐसा कोई सर्वेक्षण हुआ ही नहीं था। सर्वेक्षण पूरा करने वाले प्रमाण-पत्रों में से एक इमेज जेजे निवासी द्वारा शेयर की गई।
इसके अलावा, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) की ओर से 21 नवंबर, 2019 को दिए गए RTI जवाब में बताया गया था, “1 फरवरी, 2015 से 30 सितंबर, 2019 के बीच किसी भी जेजे क्लस्टर में कोई सर्वेक्षण नहीं किया गया था।”
India Tv - The RTI replyहेल्थ केयर का पर्दाफाश 
RTI के जवाबों से पता चला है कि सरकार 900 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने और दिल्ली सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों में 30,000 बेड जोड़ने के अपने अभियान में पिछड़ गई।
इसके अलावा, एक अन्य RTI जवाब से पता चलता है कि 1 अप्रैल, 2015 और 31 मार्च, 2019 के बीच न कोई नया अस्पताल शुरू हुआ और न ही निर्माण हुआ।
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा निदेशालय से 3 जुलाई, 2019 को एक RTI जवाब में बताया, “अप्रैल 2015 और 31 मार्च, 2019 के बीच कोई नया अस्पताल नहीं बनाया गया।”
2015 के मुकाबले सड़क पर कम बसें 
India Tv - The RTI replyजहाँ तक ​​डीटीसी बसों की बात है, उनकी संख्या 2015 से 2019 के बीच कम हो गई है। एक RTI के जवाब के मुताबिक़, 1 अप्रैल, 2015 में दिल्ली की सड़कों पर 4,705 बसें चल रही थीं। वहीं, 31 अगस्त 2019 को यह संख्या घटकर 3,796 हो गई थी। इसका जवाब, दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के एक अधिकारी ने 3 दिसंबर, 2019 को दिया था।
अपने घोषणा पत्र में, आम आदमी पार्टी ने वादा किया था कि वो 5,000 नई बसें खरीदेंगे।
शिक्षक पद आज तक खाली 
आम आदमी पार्टी ने 500 नए स्कूलों के निर्माण का वादा किया था, जबकि सच्चाई यह है कि 1 अप्रैल, 2015 से 31 अगस्त, 2019 के बीच केवल एक ही स्कूल के निर्माण को मँजूरी दी गई।
RTI के एक अन्य जवाब में बताया गया कि 1 फरवरी 2015 को 9,598 शिक्षक पद रिक्त थे, 30 सितंबर 2019 तक यह संख्या बढ़कर 15,702 पहुँच गई। 
नगर निगम स्कूल में धर्म के नाम पर अलग कक्षाएं 
अब इस स्कूल की वीडियो देखिए, जो दिल्ली के स्कूलों में साम्प्रदायिकता का जहर घोले जाने को उजागर कर रही है। समझ में नहीं आता इस गंभीर मुद्दे पर #intolerance, #award vapsi, #not in my name गैंग के अलावा गंगा-यमुना की तहजीब और संविधान की दुहाई देने वाले छद्दम धर्म-निरपेक्ष क्यों खामोश हैं? इतना ही नहीं, हिन्दू की दुहाई देने वाली भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस भी चुप्पी साधे हुए हैं। इस साम्प्रदायिकता के कौन है जिम्मेदार, आम आदमी पार्टी या नगर निगम में सत्ताधारी भाजपा? किसके आदेश पर स्कूल में धर्म के आधार पर कक्षाओं का विभाजन हुआ? मोदी जी क्या इसी तरह "सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास" होगा? जब इस स्कूल का यह हाल है, अन्य स्कूलों का भगवान ही मालिक है।  
RTI कार्यकर्ता तेजपाल सिंह का कहना है कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव पर मतदान होने से पहले केजरीवाल की यह सच्चाई जनता के सामने आना बेहद ज़रूरी है। ताकि जनता को यह पता चल सके कि केजरीवाल ने दिल्ली के निवासियों से एक नहीं कई झूठ बोले हैं, जिन पर उनकी जवाबदेही बनती है।( सभी RTI चित्र साभार India TV )