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फिर से शाहीन बाग़ सजाने की तैयारी, दंगों की साजिश? CAA के बाद अब वक्फ के बहाने रामनवमी पर हो सकती है हिंसा, एजेंसियों के कान खड़े

अप्रैल 3 को News18 पर 'भईया जी कहिन' लाइव शो में यह भी चौकाने वाला मुद्दा सामने आया कि कुछ 5/3 स्टार होटल 1 रूपए महीना दे रहे हैं लेकिन लाखों रूपए महीना दूसरे रास्ते से दिए जा रहे हैं। हालाँकि इस बात की पुष्टि नहीं हो पायी है, अगर यह बात सत्य है तो मतलब खुलेआम हो रही लूट पर लगाम।     
वक्फ कानून की असीमित शक्तियों पर लगाम कसने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने वक्फ संशोधन बिल पेश किया, जिसे संसद के दोनों सदनों में पारित कर लिया गया है। अब इस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद यह कानून बन जाएगा। इस बीच मुस्लिमों के विरोध को लेकर सरकारें सतर्क हैं। खासकर पिछले कुछ समय से रामनवमी पर हिंदुओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को देखकर यह सतर्कता लाजिमी है।

हालात का अनुमान लगाकर उत्तर प्रदेश सरकार ने तो पुलिस कर्मियों की छुट्टियाँ रद्द कर दी हैं। उन्हें सेवा में वापस लौटने के लिए कह दिया गया है। दरअसल, वक्फ बिल को लेकर मुस्लिमों के मजहबी नेता से लेकर मुस्लिम संगठनों के प्रमुख तक वक्फ को लेकर अफवाह फैला रहे हैं और मुस्लिमों को एक तरह से उकसाने का काम कर रहे हैं। कुछ लोगों ने यहाँ तक धमकी दे दी है कि कृषि कानूनों की तरह इसे भी वापस लेना होगा।

वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान हैदराबाद से सांसद और तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन औवेसी पहले ही सदन में उसकी कॉपी फाड़ चुके हैं। वो ये भी कह चुके हैं कि इस बिल के माध्यम से सरकार मुस्लिमों की संपत्तियों को ही नहीं, बल्कि उनके मजहबी स्थलों- मस्जिद, दरगाह, कब्रिस्तान आदि पर कब्जा कर लेगी। उन्होंने इसका पुरजोर विरोध करने की बात कही थी।

हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आगे कहा, “ये बिल मुस्लिमों के साथ अन्याय है। यह एक जंग का ऐलान है। हमारे मदरसों और मस्जिदों को निशाना बनाया जा रहा है। इस बिल से मुस्लिमों के अधिकारों को छीना जा रहा है। इस बिल से मुस्लिमों के अधिकारों को छीना जा रहा है। इसके जरिए मुस्लिमों को दूसरे दर्जे का शहरी बनाने की कोशिश की जा रही है।”

इस्लामी नेता इसहाक गोरा ने कहा कि यह बिल मुस्लिमों के धार्मिक स्वतंत्रता और कानूनी हकों पर सीधा हमला है। इससे मुस्लिमों की वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण हो जाएगा। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा, “विधेयक पास हो जाता है तो हम इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। हम चुप नहीं बैठेंगे।”

वहीं, जमीयत उलेमा-ए-हिंद इस बिल को बहुसंख्यकवादी मानसिकता वाला बताया है। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि सरकार जबरन इस बिल को संसद में लाई है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद मुंबई के अध्यक्ष मौलाना सिराज खान ने तो धमकी तक दे डाली। उन्होंने कहा, “सरकार ध्यान से सुन ले, हम जेल जाने से डरते नहीं हैं।”

सिराज ने कहा, “हमारे किसी भी मामले में अगर सरकार दखलअंदाजी करेगी तो हम जेलों को आबाद करेंगे। हम अपनी आजादी के लिए सब कुछ करने को तैयार हैं। हमारे नबी ने जीने का जो तरीका बताया है, हम उसी के हिसाब से जीने की कोशिश करते हैं। दिल्ली के शाहीन बाग की तरह देश भर में धरना प्रदर्शन किया जाएगा। महाराष्ट्र में भी शाहीन बाग की तरह आंदोलन किया जाएगा।”

शाहीन बाग की तर्ज पर हिंसा भड़काने की कोशिश

जिस तरह मुस्लिम नेता और मौलाना बयान दे रहे हैं, वह भड़काने वाला है। इसी तरह बात नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर फैलाई गई थी कि CAA और NRC कानून के जरिए मुस्लिमों की नागरिकता छीन ली जाएगी। ठीक उसी तर्ज पर वक्फ बिल को लेकर भी अफवाह फैलाने की कोशिश। की जा रही है कि सरकार मुस्लिमों की संपत्तियों और मस्जिद-दरगाहों पर कब्जा कर लेगी।
अगर मुस्लिम नेताओं से लेकर धर्मगुरुओं के बयानों को देखें तो वक्फ संशोधन बिल को लेकर भी ये अफवाह फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि मुस्लिमों को भ्रमित करके अधिक से अधिक उनका समर्थन हासिल किया जा सके। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) को लेकर भी ऐसी ही अफवाह फैलाई गई थी।
उस समय तमाम नेता ने ऐसा ही किया था। जेल में बंद शरजील इमाम ने जामिया से लेकर तमाम देश के दूसरे हिस्सों तक में इसको लेकर अफवाह फैलाई थी। शरजील इमाम ने पैंफलेट छपवाकर कई मस्जिदों और यूनिवर्सिटी में बँटवाया और खुद बाँटा था। पैंफलेट में लिखा था कि मुस्लिमों को नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (CAA-NRC) का विरोध करना चाहिए।
पैंफलेंट सभी मुस्लिमों को एक साथ मिलकर विरोध करने की अपील की गई थी। मुस्लिमों को भड़काने के लिए इसमें कश्मीर से लेकर बाबरी ढाँचे तक का जिक्र गया था। उसमें लिखा गया था कि पहले कश्मीर, फिर बाबरी मस्जिद और अब CAA हुआ है। इस पैंफलेट में दिल्ली को डिस्टर्ब करने के लिए कहा गया था, ताकि दुनिया भर की मीडिया का ध्यान इस ओर जाए।
इस पैंफलेट बाँटने के एक दिन बाद 15 दिसंबर 2020 को कई जगहों पर हिंसा फैल गई थी। इसमें दिल्ली के जामिया मिलिया यूनिर्विसटी की हिंसा भी शामिल थी। आगे चलकर CAA-NRC के नाम पर की किए जा रहे विरोध प्रदर्शन को हिंसक बना दिया गया और आखिरकार फरवरी 2020 में पूर्वी दिल्ली के कई हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा फैल गई। इस हिंसा में कई लोगों की जान चली गई थी।

रामनवमी और हनुमान जयंती को लेकर सावधानी

शाहीन बाग की तर्ज पर ही वक्फ संशोधन बिल के विरोध के नाम पर एक बार फिर दिल्ली एवं अन्य जगहों को दहलाने की कोशिश की जा सकती है। रामनवमी पर वैसे भी पिछले कई सालों से सुनियोजित तरीके से हमले किए जा रहे हैं। ये हमले सिर्फ दिल्ली में ही नहीं, बल्कि यूपी-बिहार और झारखंड से लेकर कर्नाटक एवं महाराष्ट्र तक में दिया जाता रहा है।
कट्टरपंथियों द्वारा रामनवमी पर हिंसा की इस परिपाटी को वक्फ संशोधन विधेयक के विरोध के नाम पर दोहराने की कोशिश इस साल भी की जा सकती है। वैसे तो मूर्ति-पूजक हिंदुओं के खिलाफ मुस्लिम बहुल इलाकों में हमला करने की घटनाएँ अक्सर आती रहती हैं, लेकिन साल 2019 के बाद रामनवमी एवं हनुमान जयंती की शोभायात्रा पर हमले की घटनाएँ अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई हैं।
साल 2019 भारतीय राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा है। इसी साल 5 अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हमेशा के लिए खत्म कर दिया था। इसको लेकर कुछ कट्टरपंथियों के मन में एक कसक पैदा हो गई। इसी बीच 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने लगभग 140 से अटके अयोध्या विवाद पर हिंदुओं के पक्ष में फैसला दे दिया।
कट्टरपंथियों पर यह दोहरी मार थी। अभी एक महीना भी नहीं बीते होंगे कि 11 दिसंबर 2019 को भारत सरकार ने नागरिक संशोधन विधेयक (CAA) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) कानून पास कर दिया। यह वह ऐसा था, जिसमें पड़ोसी इस्लामी देशों में रहने वाले वहाँ के अल्पसंख्यकों को भारत में नागरिकता देने का प्रावधान किया गया था।
इसको लेकर भी कट्टरपंथी मुस्लिमों एवं भारत विरोधी शक्तियों ने मुस्लिमों को भड़काना शुरू कर दिया कि इससे मुस्लिमों की नागरिकता छीन ली जाएगी। इसके बाद बड़े पैमाने पर हिंसा शुरू हो गई थी। मन में बसी यह कसक रामनवमी जैसी धार्मिक यात्रा पर हमला करके कट्टरपंथी निकालते रहते हैं। इस बार भी वे कुछ ऐसा ही करने की सोच रहे हैं। इससे सतर्क रहने की जरूरत है।

चुनावी नतीजों से पहले देश को जलाने की प्लानिंग, मोदी जीते तो आन्दोलनजीवियों और पालतू पत्रकारों को तैयार रहने को कहा गया है

अजीत अंजुम के YouTube चैनल पर नीलू व्यास थॉमस ने बता दिया क्या है विपक्ष का प्लान
नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने से देश विरोधियों ताकतों में खलबली को उनके हाथों की कठपुतली बने भारत के विपक्ष में मच रही बेचैनी से समझा जा सकता है। भारतीय विपक्ष से कहीं अधिक नींद हराम जॉर्ज सोरोस, अमेरिका, जर्मनी, कनाडा और कुछ गल्फ देश अपना बजा बजने से पहले इस कोशिश में है कि इन बिकाऊ लोगों को नोटों के बंडल देकर भारत में ही उत्पात मचवा दो। ये समय है जनता को ऐसे उपद्रवियों से सतर्क रहने की जरुरत है। जनता को पहले से अधिक जागरूक रहने की जरुरत है। 
YouTuber अजीत अंजुम के चैनल पर खुद को पत्रकार बताने वाली नीलू थॉमस व्यास ने कुछ ऐसे दावे किए हैं, जो डराने वाले हैं। खुद को ‘मॉब लिंचिंग’ का विरोधी बता कर मॉब को गाली देने वाला गिरोह अब लोकतंत्र की बजाय भीड़तंत्र पर भरोसा दिखा रहा है, अराजकता के लिए समाज को सुलगा रहा है। ये कोई नई बात नहीं है, शाहीन बाग़ और किसान आंदोलन को देखें या राहुल गाँधी द्वारा विदेश में दिए गए बयानों को भी देखें तो स्पष्ट पता चलता है कि इसके पीछे एक पैटर्न है।

मंगलवार (4 जून, 2024) को लोकसभा चुनाव की मतगणना होनी है और इसकी पूरी संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार सत्ता में लौट कर आएँगे। सारा विपक्ष चुनाव घोषित होने के पहले से जानता है, लेकिन मतदान की रस्म तो करनी ही थी, परिणाम से पहले ही विपक्ष मातम में डूबकर अपने अआप्को नेता-जनहितैषी बताने वाले जनता को परेशान करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। 

विपक्ष ने INDI गठबंधन तो बनाया, लेकिन नीतीश कुमार की JDU, जयंत चौधरी की RLD और ओमप्रकाश राजभर की SBSP गठबंधन से बाहर निकल आई। ममता बनर्जी की TMC भी लगभग बाहर ही है। विपक्षी नेताओं में तेजस्वी यादव को छोड़ कर शायद ही किसी को जमीन की ख़ाक छानते हुए देखा गया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 200 से अधिक रैली-रोड शो किए और 80 से अधिक मीडिया संस्थानों को इंटरव्यू दिया।

नीलू व्यास थॉमस इस वीडियो में कह रही हैं कि विपक्ष के जितने भी मतगणना एजेंट्स होंगे उन सबको प्रशिक्षण दिया जा रहा है, एग्जिट पोल्स से कैसे निपटा जाए इसकी भी तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि इसके अलावा एक बड़े जन-आंदोलन की तैयारी की जा रही है, अगर वोटों की चोरी पकड़ी जाती है तो इसे लेकर कोर्ट भी जाया जा सकता है और चुनाव भी रद्द कराया जा सकता है। यानी, इसका सीधा मतलब है कि विपक्ष लोकतंत्र के इस महापर्व को ख़ारिज कर देगा।

पोलिंग एजेंट को क्या प्रशिक्षण दिया जा रहा है? हो सकता है कि जिस तरह बिहार के छपरा में मतदान के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की बेटी और वहाँ से RJD प्रत्याशी रोहिणी आचार्य ने पहुँच कर हिंसा भड़का दी और 2 लोग मारे गए, ठीक उसी तरह का माहौल काउंटिंग सेंटरों पर भी बना दिया जाए। अगर ऐसा है तो सुरक्षा बलों को बहुत सतर्क रहने की ज़रूरत है। पोलिंग एजेंट्स को हिंसा भड़काने की ट्रेनिंग दी जा रही हो सकती है, उन्हें ये सिखाया जा रहा होगा कि तनाव कैसे पैदा किया जाए।

इसके लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कैसे करना है, इसमें विपक्ष पारंगत है। सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो डाले जाएँगे, कहीं कुछ तकनीकी गड़बड़ी भी हुई तो उसे कुछ ऐसा बड़ा बना कर दिखाया जाएगा जैसे देश भर में EVM हैक कर लिए गए हों और मतगणना करने वाले कर्मचारियों को परेशान किया जाएगा। मतगणना वाले दिन सोशल मीडिया पर ऐसे प्रपंच को रोकने के लिए हमें तैयार रहना चाहिए। पोलिंग एजेंट्स कौन हैं, इसकी पहले से ही जाँच हो जानी चाहिए।

दूसरी बड़ी बात नीलू व्यास थॉमस कहती हैं कि Exit Polls से कैसे निपटा जाए, इसकी भी तैयारी चल रही है। बता दें कि शनिवार (1 जून, 2024) की शाम को अंतिम व 7वें चरण का मतदान समाप्त होने के साथ ही सभी टीवी चैनल और सर्वे करने वाले संस्थान अपना-अपना एग्जिट पोल जारी करेंगे और बताएँगे कि किस पार्टी को संभावित कितनी सीटें आ सकती हैं। स्पष्ट है, विपक्ष को नज़र आ रहा है कि इसमें भाजपा को पूर्ण बहुमत प्राप्त करते हुए दिखाया जाएगा क्योंकि जमीनी हालात भी यही है।

विपक्ष को इसका पूरा अंदाज़ा है कि उसकी हार हो रही है। TV चैनलों पर उनके प्रवक्ता एग्जिट पोल्स के दौरान ‘थेथरई’ करेंगे, मुद्दों को घुमाएँगे और भड़काऊ बातें करेंगे। सवाल कुछ और होगा, बौखलाहट में जवाब कुछ और दिया जाएगा। मीडिया संस्थानों के आँकड़ों को देख कर उन्हें ‘गोदी मीडिया’ बताया जाएगा। जिस तरह से प्रतिष्ठित पत्रकारों के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ‘चमचा’ और ‘चमची’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, महिलाओं तक को नीचा दिखा रहे हैं, उससे साफ़ है कि उनके प्रवक्ता एग्जिट पोल्स वाले दिन क्या करेंगे।

तीसरी बड़ी बात जो नीलू व्यास थॉमस ने कही है, वो ये है कि इस चुनाव को न्यायपालिका के दरवाजे तक भी ले जाया जा सकता है। ये भी कोई नई बात नहीं है। आप देखिए, अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने से लेकर राफेल लड़ाकू विमान सौदा तक, हर मामले को विपक्ष सुप्रीम कोर्ट तक लेकर गया। सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ फ्रांस के साथ हुए राफेल सौदे पर मोदी सरकार को क्लीन-चिट दी, बल्कि अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने वाले फैसले को भी बरकरार रखा।

AAP के अरविंद केजरीवाल और JMM के हेमंत सोरेन जैसे नेताओं को जेल हुई, इन सबको अदालत के आदेश के बाद ही न्यायिक हिरासत में भेजा गया। इसके बाद अब न्यायपालिका पर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए गए हैं। ध्यान दीजिए, ये आज से नहीं हो रहा। राम मंदिर का फैसला जब तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने नवंबर 2019 में सुनाया था, तभी से सुप्रीम कोर्ट का बॉयकॉट किया जा रहा है। ‘बाबरी ज़िंदा है’ वाले ट्रेंड इसी मुहिम का हिस्सा हैं।

चौथी और सबसे अधिक खतरनाक बात जो नीलू थॉमस ने कही है, वो है ‘जन-आंदोलन’ की। विपक्ष के लिए जन-आंदोलन क्या होता है? 3 महीने तक शाहीन बाग़ की खातूनों द्वारा दिल्ली को बंधक बना कर रखा। 1 साल तक ‘किसान आंदोलन’ के नाम पर  दिल्ली की सीमाओं पर कब्ज़ा कर के रखना। शाहीन बाग़ से कारोबारियों को 200 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, जबकि ‘किसान आंदोलन’ से उत्तर भारत के राज्यों को प्रतिदिन 500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ

शाहीन बाग़ उपद्रव के जरिए मुस्लिमों को भड़काया गया देश भर में CAA के खिलाफ झूठ फैला-फैला कर, ‘किसान आंदोलन’ का इस्तेमाल जाटों और सिखों को भड़काने के लिए किया गया। तभी ‘किसान आंदोलन’ को खालिस्तानियों ने हाईजैक कर लिया। गणतंत्र दिवस के दिन लाल किला पर चढ़ कर खालिस्तानी झंडा फहरा दिया गया, राष्ट्रध्वज तिरंगे का अपमान हुआ। वहीं शाहीन बाग़ के बाद दिल्ली में दंगे हुए, जिसने 50 से अधिक लोगों की जान ले ली। मंदिरों-स्कूलों को निशाना बनाया गया।

किसी भी देश के महाशक्ति बनने की पहली शर्त है – वहाँ के समाज का संपन्न होना। लोगों के पास पैसा ही नहीं होगा, तो देश महाशक्ति कैसे बनेगा। यही कारण है कि आन्दोलनों के नाम पर बार-बार राष्ट्रीय राजधानी को बंधक बनाया जाता है क्योंकि इससे एक तीर से 2 निशान साधते हैं – पहला, मीडिया की फुटेज खूब मिलती है, और दूसरा, कारोबारियों को अधिक घाटा होता है। कारोबार जितना घटेगा, सरकार को उतनी परेशानी होगी और विपक्ष को उतनी ही ख़ुशी मिलेगी।

‘जन-आंदोलन’ का अर्थ क्या है राहुल गाँधी के लिए? याद कीजिए, मई 2022 में लंदन में एक कन्क्लेव को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने कहा था कि भाजपा ने पूरे भारत में केरोसिन तेल छिड़क रखा है और एक चिंगारी से पूरे देश में आग लग जाएगी। उन्होंने भारत में ध्रुवीकरण और मीडिया पर भाजपा के प्रभाव का दावा करते हुए कहा था कि भारत फ़िलहाल सही स्थान पर नहीं है। सोचिए, विदेश जाकर अपने देश के संबंध में इस तरह की बातें करने के पीछे और क्या मकसद रहा होगा?

अब आगे क्या साजिश है? 120 संगठनों, जो खुद को नागरिक संगठन बताते हैं, उन्होंने चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करते हुए भविष्यवाणी कर दी है कि मतगणना वाले दिन गड़बड़ी होगी। चुनाव आयोग को बदनाम करने के लिए इनलोगों ने 6 घंटे बैठक की, आगे और भी बैठकों की योजना है। ‘सिविल सोसाइटी’ के नाम पर अब दंगों की साजिश है। मतदान के सारे आँकड़े जारी किए जा रहे हैं, फिर भी झूठ बोला जा रहा है कि चुनाव आयोग डेटा नहीं दे रहा।

इन संगठनों में विपक्ष के नेता शामिल हैं, पूर्व अधिकारियों को इसमें रखा गया है। ये वही वर्ग है जो खुद को ‘बुद्धिजीवी’ बता कर कुछ भी बक देता था और लोग इनका यकीन कर लेते थे। अब इन्हें कोई नहीं सुन रहा। ध्रुव राठी जैसे यूट्यूबरों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बार-बार ‘तानाशाह’ बताया जाना इसी क्रम का हिस्सा है। जन-कल्याणकारी योजनाओं, इंफ़्रास्ट्रक्चर के कार्यों और विदेश में भारत की चमकती छवि को दबाने के लिए कुछ तो नकारात्मकता फैलानी होगी, विपक्ष यही करने में लगा हुआ है।

दिल्ली : शाहीन बाग, जामिया से दबोचे जा रहे PFI के लोग : जेलों में बंद पाकिस्तानियों और ISIS का कनेक्शन

चित्र साभार- ANI
देश भर में पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के खिलाफ चल रही छापेमारी के बीच 27 सितम्बर 2022 तक कुल 170 सदस्यों को हिरासत में लिया गया है। ये गिरफ्तारियाँ 8 अलग-अलग राज्यों में हुई हैं। केरल वाली स्थिति को देखते हुए दिल्ली के शाहीन बाग में अर्ध सैनिक बलों को गश्त करवाया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये छापेमारी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, गुजरात, कर्नाटक, दिल्ली और महाराष्ट्र में हुई है। अकेले कर्नाटक से 45 गिरफ्तारियाँ होने की सूचना है। मध्य प्रदेश के शाजपुर के साथ दिल्ली के शाहीन बाग़, निजामुद्दीन और जामिया इलाकों में भी NIA ने छापेमारी की है।

मध्य प्रदेश के शाजपुर से 2 और दिल्ली के जामिया और शाहीन बाग़ इलाके से लगभग 1 दर्जन संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने की सूचना है। महाराष्ट्र के औरंगाबाद और नांदेड़ में भी ATS की छापेमारी के दौरान लगभग 14 संदिग्धों को हिरासत में लेने की खबर है। पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ और बुलंदशहर में भी छापेमारी की सूचना है।

मिल रही जानकारी के मुताबिक PFI का रिश्ता प्रतिबंधित SIMI, भगोड़े ज़ाकिर नाईक और आतंकी संगठन ISIS से पाया गया है। बताया ये भी जा रहा है कि PFI ने भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए न सिर्फ पाकिस्तान बल्कि मिडिल ईस्ट के लोगों का भी सहारा लिया है।

न्यूज़ 18 के मुताबिक PFI ने देश भर में हिंसा की बड़े स्तर प्लानिंग की थी। इसका राष्ट्रीय अध्यक्ष अब्दुल रहमान कभी SIMI का राष्ट्रीय सचिव हुआ करता था। इसके साथ इसी समूह का एक अन्य पदाधिकारी अब्दुल हमीद भी कभी सिमी से जुड़ा हुआ था।

आरोप है कि PFI को उसकी आतंकी हरकतों को संचालित करने के लिए मध्य-एशिया से पैसे आते थे। इसे भारत में पहुँचाने में पाकिस्तान मध्यस्तता किया करता था। इस नेटवर्क के संचालन में PFI की राष्ट्रीय टीम में शामिल मोहम्मद शाकिब का अहम रोल है।

रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि पाकिस्तान से पैसे उगाही करने के लिए PFI भारत की जेलों में बंद पाकिस्तानियों की पैरवी का हवाला दिया करता था। आपको याद दिला दें कि ISIS की हरकतों को भारत में एक्टिव रखने के लिए मोहिदीन ने 8 जनवरी 2021 में कन्याकुमारी में कालियाकविलाई चेकपॉइंट पर ऑन ड्यूटी सब इंस्पेक्टर विल्सन की हत्या की थी। PFI के मोहम्मद शाकिब ने बाद में अपने साथियों सहित सब इंस्पेक्टर विल्सन के कातिलों के लिए इस केस पर काम किया था। 

‘हमारा रोजा है, हमें छोड़ दो… हाय लगेगी’ – शाहीन बाग में बुर्के वाली महिला

शाहीन बाग प्रदर्शनकारीआज(मार्च 24) सुबह 7 बजे शाहीन बाग पूरा खाली करवा लिया गया। दिल्ली पुलिस ने भारी तादाद में निर्देशों का पालन करते हुए ये कार्रवाई की। धरना स्थल से टेंट कुर्सी हटवाई गए। शरारती तत्वों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने बताया कि पहले उन्होंने लोगों को समझाया। मगर जब प्रदर्शनकारी राजी नहीं हुए और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की तो बल का इस्तेमाल करके इस काम को अंजाम दिया गया।
मंगलवार(मार्च 24) को सुबह-सुबह पुलिस के इस एक्शन के बाद शाहीन बाग की कई विडियोज आईं। विडियो में भारी संख्या में पुलिस को शाहीन बाग पर देखा गया। इसी बीच एक नजारा और देखने को मिला, जिसमें एक महिला प्रदर्शनकारी पुलिस वालों को बद्दुआ देती नजर आई और कहती दिखी कि इन्हें उनकी हाय लगेगी।
विडियो में 1 मिनट 8 सेकेंड के आगे देख सकते हैं कि पुलिस इस बुर्काधारी महिला को डिटेन कर रही है। लेकिन वो कैमरे में देखकर कह रही है, “देख लीजिए, हमें पकड़कर ले जा रहे हैं। हमारा रोजा है। इन्हें हाय लगेगा।" अब कोई इसी महिला से पूछे कि "उस रोजे का क्या फायदा, जिसे रख धरने पर बैठ सैकड़ों लोगों को कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी के संकट में डाला जा रहा हो।" 

विडियो में देख सकते हैं कि महिला प्रदर्शनकारी बार-बार खुद को पुलिस की पकड़ से छुड़ाने की कोशिश कर रही है। लेकिन जब पत्रकार उससे बढ़ते संक्रमण पर सवाल करता है तो कहती है कि इन्हें हमारी हाय लगेगा। हमारे बच्चे दूध पीने वाले हैं, हमें छोड़ दो। वहीं एक दूसरे प्रदर्शनकारी (हिरासत में लिए जाने के बाद) विडियो की शुरुआत में महिला से पहले कहता है कि अब इनकी मर्जी है जो चाहें कर सकते हैं, इनका राज है।
अब हालाँकि, विडियो देखने के बाद दिल्ली पुलिस का विरोध करने वालों को इसमें भी पुलिस की ही गलती नजर आएगी। लेकिन, 100 दिन से कालिंदी कुंज का रास्ता खुलने का इंतजार कर रही जनता ने इस कदम का स्वागत किया है। साथ ही कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने की दिशा में अहम कदम बताया गया है।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार कोरोना वायरस के फैलते प्रभाव के बावजूद नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ अपना धरना प्...
सोशल मीडिया पर इस विडियो को देखने के बाद लोगों ने चुटकी ली है। कुछ ने इसे बिन सिर पैर का धरना बताया और पूछा कि क्या 100 दिनों से जो इन लोगों के कारण लोगों को नोएडा से साउथ दिल्ली और साउथ दिल्ली से नोएडा स्कूल, कॉलेज, नौकरी, अस्पताल जाने में दिक्कत हुई, उन्हें हाय नहीं लगेगी।

एक झटके में शाहीन बाग खाली

शाहीन बाग हुआ खाली
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कोरोना वायरस के फैलते प्रभाव के बावजूद नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ अपना धरना प्रदर्शन जारी रखने वाले शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने आज सुबह हटवा दिया। धरना स्थल पर लगे टेंट और कुर्सियों को भी वहाँ से उठा लिया गया। मंगलवार (मार्च 24, 2020) को शाहीन बाग में भारी पुलिस फोर्स की तैनाती के बीच ये कार्रवाई हुई। पुलिस ने धारा-144 की दलील देते हुए ये एक्शन लिया। बता दें कि शाहीन बाग में महिलाएँ पिछले 100 दिनों से धरने पर बैठी थीं।
जबसे भारत में कोरोना पर केंद्र और राज्य सरकारें सतर्क रहने की अपील कर रही हैं, तभी से भारत में बने शाहीन बाग़ों को खाली करवाने के प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं था। कहते थे "हमें कोरोना नहीं होगा, मोदी को होगा", "हम पांचों वक़्त की नमाज़ पढ़ने से पहले वजू करते हैं" आदि आदि। हंसी आती थी, जब एक चैनल पर प्रदर्शनकारियों को मास्क और सनेटिज़ेर प्रयोग करते देखा। यानि कोरोना का डर तो है, लेकिन जिद के आगे सुनने को तैयार नहीं। नागरिकता संशोधक कानून के विरुद्ध आयोजकों ने इनके दिलोदिमाग में इतना अधिक जहर भर दिया है, जिसे निकालना मुश्किल है।  
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जॉइट सीपी देवेश श्रीवास्तव ने कहा, “कोरोना वायरस के बढ़ने के कारण लोगों से अपील की जा रही थी। स्थानीय भी हमसे माँग कर रहे थे। आज सुबह हमने इस कार्रवाई की शुरुआत 7 बजे की। शुरुआत में कुछ शरारती तत्व माहौल को बिगाड़ना चाहते थे। वे नहीं माने, तो उन्हें हिरासत में लिया गया है।”
 
जॉइंट सीपी ने बताया कि करीब 10 से 12 लोगों को हिरासत में लिया गया है। विरोध करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। देवेश श्रीवास्तव ने आगे कहा कि हमारा मकसद इलाके में शांति बहाल करना है। कोरोना को लेकर सख्त आदेश थे कि भीड़ जमा न हो।
अब फिलहाल, पुलिस ने धरने वाली जगह से टेंट को पूरी तरह हटा दिया है। कोरोना वायरस के मद्देनजर दिल्ली में धारा 144 लागू है। इसके बावजूद वहाँ कुछ प्रदर्शनकारी जुटे हुए थे। एक पुलिसर्मी ने बताया कि सुबह भी वहाँ काफी महिलाएँ धरने पर बैठी हुईं थी। हमने उनसे कहा कि 144 लगाई गई है, इसलिए धरने को खत्म कर दें। लेकिन वह नहीं माने। इसके बाद पुलिस को बलपूर्वक उनको हटाना पड़ा।
एक ओर जहाँ पुलिस प्रदर्शनस्थल को बलपूर्वक खत्म करवाने के पीछे प्रदर्शनकारियों की जिद को कारण बता रही है। वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वह खुद पीछे हट गए थे, लेकिन पुलिस ने धरना स्थल में बना भारत माता का नक्शा और इंडिया गेट को क्यों हटाया। बताया जा रहा है यहाँ लोगों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी भी की है और हालातों को देखते हुए पूरे शाहीन बाग इलाके में भारी पुलिस फोर्स को तैनात किया गया है।

इस बीच भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी शाहीन बाग प्रदर्शन खाली होने की सूचना दी है। उन्होंने धरना स्थल से हटाए गए टेंट, कुर्सियों को ट्रक में भरते हुए ये विडियो अपने ट्विटर पर डाली है और लिखा है, “सब तख्त उछाल कर फेंक दिए, सब टेंट उखाड़ कर फेंक दिए, हमने देख लिया, सबने देख लिया, दिल्ली को मिल गई आज़ादी शाहीन बाग का फ्रॉड ख़त्म।”
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बिहार की राजधानी पटना में स्थित एक मस्जिद में विदेशियों को छिपाने का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, ये मा.....

बीते दिनों दिल्ली में कोरोना के बढ़ते केसों के बावजूद शनिवार को हमने शाहीन बाग पर बैठे प्रदर्शनकारियों की जिद देखी। इससे पहले भी कई बार विडियोज के जरिए ऐसी बातें सामने आई थीं, जिसमें वहाँ बैठी महिलाएँ किसी कीमत पर प्रदर्शन से उठने की बात नहीं सुन रहीं थी। बल्कि इसकी जगह वे ये कह रही थीं उन्हें कोरोना नहीं हो सकता। उनके साथ अल्लाह है। कोरोना तो मोदी को होगा।

शाहीन बाग : आपस में ही चले लात-घूसे, पत्थर: पब्लिसिटी न मिलने से बौखलाहट

शाहीन बाग़, लड़ाई
आपस में लड़ते प्रदर्शनकारी 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कहावत है 'बोया पेड़ बबुल का, आम कहाँ से होए', शाहीन बाग़ में शत-प्रतिशत चरितार्थ हो रही है। जहाँ नेतागिरी को लेकर झगड़ा शुरू हो गया है। दूसरे, जब नागरिकता संशोधक कानून समर्थक कहते थे कि प्रदर्शनकारी विरोध में नहीं, बल्कि 500 रूपए, बिरयानी और बढ़िया नाश्ता के लालच में दूध पीते नौनिहालों को लेकर पहुँचती महिलाओं पर लोग कहते थे कि 'ऐसे कौन जाएगा', समय बड़ा बलवान होता है। नौसिखिए नेता बने घूम रहे थे, लोगों को धन, बिरयानी, नाश्ता और टैंट आदि का प्रबंध करने वाले कहीं दूर तक नज़र नहीं आ रहे, कोई उनका अहसान तक नहीं मान रहे। कोरोना के चलते धन का आभाव होने से प्रदर्शनकारी सरकार का विरोध करने की बजाए आपस में ही भिड़ने लगे हैं।   
जहाँ एक तरफ पूरा देश कोरोना वायरस के खतरे से लड़ रहा है, शाहीन बाग़ के उपद्रवी आपस में ही लात-घूसा चला रहे हैं। एक तो शाहीन बाग़ वालों ने कोरोना वायरस के खतरों को नजरंदाज कर धरना-प्रदर्शन जारी रखा है और पूरी दिल्ली को ख़तरे में डाल दिया है, ऊपर से वो क़ानून-व्यवस्था के लिए भी संकट उत्पन्न कर रहे हैं। दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने शाहीन बाग़ का शनिवार (मार्च 21, 2020) का एक विडियो शेयर किया है। इसमें प्रदर्शनकारी आपस में ही मारपीट करते हुए दिख रहे हैं।
भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दावा किया है कि शाहीन बाग़ के इन प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ़ आपस में लात-घूसों से लड़ाई की बल्कि एक-दूसरे पर पत्थर भी चलाए। अब इससे ये शक उभरता है कि क्या आज वहाँ पर पेट्रोल बम का फेंका जाना आपस की गैंगवार का प्रतिफल है? दिल्ली के हालिया हिन्दू-विरोधी दंगों में भी मुस्लिम दंगाई भीड़ ने पेट्रोल बम का जम कर इस्तेमाल किया था। कपिल मिश्रा का कहना है कि कोरोना के चक्कर में इनका धंधा बंद हो रहा है, इसलिए बौखला कर आपस में ही सिर-फुटव्वल कर रहे हैं।

हो सकता है कि कोरोना पर सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों और संक्रमित होते लोगों के बीच शाहीन बाग़ को पब्लिसिटी न मिल पा रही हो और इसके लिए उन्होंने कोई कुचक्र रचा हो। वो लगातार सरकारी आदेशों की तौहीन कर रहे हैं। उनकी आपस की लड़ाई भी इसी बौखलाहट का नतीजा हो सकती है कि उन्हें मीडिया का अटेंशन नहीं मिल रहा और 100 दिन से ज्यादा समय से चल रहे इस उवद्रव से अब वो भी बोर हो चुके हैं। 
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शाहीन बाग़ प्रदर्शन स्थल के पास फेंके गए बम से लगी आग को बुझाते लोग शाहीन बाग़ के लोग रविवार (मार्च 22, 2020) को भी धरने पर बै...
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ये है दिल्ली का जामा मस्जिद क्षेत्र आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारतीय राजनीतिक दलों और मीडिया को चीन से सीखना चा....
कोरोना पर शेहला रशीद और योगेंद्र यादव सहित कई अन्य सीएए विरोधियों द्वारा मोदी की तारीफ करने से भी लिबरलों के कट्टरवादी समूह में बौखलाहट का माहौल है।

किसने फेंका शाहीन बाग़ में पेट्रोल बम?

शाहीन बाग़ प्रदर्शन, पेट्रोल बम
शाहीन बाग़ प्रदर्शन स्थल के पास फेंके गए बम से लगी आग को बुझाते लोग
शाहीन बाग़ के लोग रविवार (मार्च 22, 2020) को भी धरने पर बैठे हुए हैं, जब पूरा देश कोरोना वायरस से लड़ने के लिए जनता कर्फ्यू का पालन करने में लगा हुआ है। अब उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन स्थल पर किसी ने पेट्रोल बम फेंक कर मारा है। दिल्ली के हालिया हिन्दू-विरोधी दंगों में देखा गया था कि दंगाई मुस्लिम भीड़ ने पेट्रोल बम का खतरनाक रूप से इस्तेमाल किया था और कई हिन्दुओं को निशाना बनाया गया था। अभी तक साफ़ नहीं है कि शाहीन बाग़ में पेट्रोल बम किसने फेंका।
तस्वीरों में देखा जा सकता है कि शाहीन बाग़ एंटी-सीएए प्रदर्शन स्थल के नजदीक आग लगी हुई है और लोग उसे बुझाने में लगे हुए हैं। एएनआई की ट्वीट के अनुसार, ये घटना रविवार की सुबह हुई है। सोशल मीडिया पर लोगों ने आशंका जताई है कि हो सकता है कि शाहीन बाग़ के उपद्रवियों ने जनता कर्फ्यू से ध्यान खींचने के लिए ऐसा किया हो। हालाँकि, इस सम्बन्ध में अभी तक कुछ भी पुष्टि नहीं हुई है।

कोरोना वायरस को लेकर सरकार ने आगाह किया है कि कहीं भी भीड़ न जुटाएँ लेकिन शाहीन बाग़ के उपद्रवियों ने पूरी दिल्ली को ख़तरे में डाल रखा है। तबरेज नामक प्रदर्शनकारी कोरोना वायरस का शिकार भी हो गया। उसकी बहन को भी कोरोना हो गया था, जो सऊदी से इस्लामी तीर्थयात्रा कर के लौटी थी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शाहीन बाग़ में कोरोना के ख़तरों से जुड़े सवालों को टाल दिया। कोरोना को लेकर जिस तरह से सोशल मीडिया पर विज्ञान और डॉक्टरों की सलाह को धता बताते हुए मजहबी विडियो शेयर किए जा रहे हैं, इससे लगता नहीं है कि ये समाज इस समस्या के प्रति गंभीर है।

अमानतुल्लाह से दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड अध्यक्ष की कुर्सी छीनी

अमानतुल्लाह ख़ान, दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों और शाहीन बाग के प्रदर्शन से साख को लगे बट्टे की भरपाई की कोशिशों में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार लग गई है। दंगों और प्रदर्शन में पार्टी के कई नेताओं की भूमिका संदिग्ध बताई जाती है। पार्षद ताहिर हुसैन तो दंगों का मास्टरमाइंड बनकर उभरा है। हालॉंकि बाद में पार्टी ने उसे निलंबित कर दिया। बावजूद इसके अमानतुल्लाह ख़ान जैसे पार्टी विधायक उसका खुलकर बचाव करते रहे हैं। सीएए विरोध के नाम पर दिल्ली के जाकिर नगर में जब हिंसा भड़की थी तब भी अमानतुल्लाह मौके पर दिखा था। लेकिन, अब ऐसा लगता है कि डैमेज कंट्रोल के तहत केजरीवाल सरकार उससे पीछा छुड़ाने की कोशिश में है।
सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि आम आदमी पार्टी के गले की हड्डी बना शाहीन बाग़, जामिया इस्लामिया विवाद, उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में सम्मिलित ताहिर हुसैन को मुसलमान होने के कारण फंसाये जाने की आवाज़ बुलंद करने और शरजील आदि में अमानतुल्ला के नाम का संलिप्त होने के कारण पार्टी की छवि जरुरत से ज्यादा ख़राब होने के कारण ऐसा कदम उठाया गया है। दूसरे, अभी मनीष सिसोदिया पर कोई कार्यवाही पर केजरीवाल मन बना रहे हैं।   उसे दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। दिल्ली सरकार के रेवेन्यू विभाग ने इसकी जानकारी दी है। ओखला से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए अमानतुल्लाह को मुख्यमंत्री केजरीवाल का क़रीबी माना जाता है। उस पर कई आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।
रेवेन्यू विभाग के मुख्य सचिव कार्यालय ने कहा कि फ़रवरी 11, 2020 को छठी विधानसभा भंग होने के साथ ही ख़ान दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष व सदस्य नहीं रहे। इसके लिए ‘सेक्शन 14 (1) ऑफ वक़्फ़ बोर्ड 1995’ का हवाला दिया गया है। ख़ान को पिछली बार चुनाव जीतने के बाद 7 सदस्यीय वक़्फ़ बोर्ड में नॉमिनेट किया गया था। उन्हें सितम्बर 2018 में बोर्ड का अध्यक्ष चुना गया था। हालाँकि, दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने इस बात से इनकार किया कि ख़ान को उसके पद से हटा दिया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि केजरीवाल सरकार दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड का पुनर्गठन करेगी। हाल ही में दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के बाद अमानतुल्लाह बढ़-चढ़ कर कथित मुस्लिम पीड़ितों को मदद करने का दावा कर रहा था। उसने बोर्ड के माध्यम से कई ‘पीड़ित’ मुस्लिमों को वित्तीय मदद भी मुहैया कराई थी। सरकार के फ़ैसले पर टिप्पणी करते हुए विधायक ख़ान ने कहा कि सितंबर 2018 से 20 मार्च 2020 तक का दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड़ का सफ़र बहुत अच्छा रहा। मुझे खुशी है कि मैं ग़रीबों और ज़रूरतमंदों तक उनका हक़ पहुँचा पाया और उनकी मदद कर पाया।
इस बात पर अब तक संशय बना हुआ है कि अमानतुल्लाह ख़ान ने हाल ही में जम कर वित्तीय मदद के नाम पर जो चेक बाँटे हैं, उनका क्या होगा? उसने कई हिन्दुओं की भी मदद करने का दावा किया है। अमानतुल्लाह ख़ान पर अपनी ही साली का यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज है, ऐसे में उसे फिर से इस पद पर बहाल किया जाएगा या नहीं, इसे लेकर सरकार ने फ़िलहाल चुप्पी साध रखी है। कहा जा रहा है कि कुछ ही दिनों में निर्णय होगा।

‘सुन लो मोदी, हमारी माँ-बहनों ने टीपू सुल्तान को जन्म दिया है’

शाहीन बाग़
आर्थिक बहिष्कार की धमकी देता शाहीन बाग़ का प्रदर्शनकारी
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
देश भले युद्ध स्तर पर कोरोना वायरस संक्रमण से बचने में दिन-रात एक किए हुए हो, शाहीन बाग अभी भी पब्लिक सेफ्टी पर दी जा रही सारी सलाहों को धता बता झूठ, घृणा और डर की खेती में मशगूल है। ‘जामिया वर्ल्ड’ नामक फेसबुक पेज ने एक वीडियो अपलोड किया है। यह वीडियो इस बात की बानगी है कि कैसे कुछ लोग नियम, व्यवस्था, कानून और सरकारी एजेंसियों की हरेक सलाह की नाफ़रमानी के लिए कटिबद्ध हैं। कोरोना को देखते हुए पब्लिक गैदरिंग के खिलाफ सरकार ने स्पष्ट गाइडलाइन्स जारी कर रखी हैं, इसके बावजूद न सिर्फ शाहीन बाग़ में धरना बदस्तूर जारी है बल्कि नागरिकता रजिस्टर आदि पर झूठ और घृणा फैलाने से भी बाज नहीं आ रहे।
3 मिनट 30 सेकण्ड्स लम्बे इस वीडियो में वक्ता जिहादी इस्लामिस्ट टीपू सुल्तान का जिक्र करता हुआ कहता है – सुन लो मोदी, हमारी माँ-बहनों ने टीपू सुल्तान को जन्म दिया है और तुम आजादी के 70 बाद हमसे नागरिकता का सबूत माँगते हो, कहते हो कि हमें नागरिकता रजिस्टर की प्रक्रिया से गुजरना होगा। ये लालकिला जहाँ से झंडा फहराते हो, ये क्या तुम्हारे पूर्वजों ने बनवाया? जहाँ ट्रम्प को लेकर गए थे वो ताजमहल क्या तुम्हारे पूर्वजों ने बनवाया था?
ताजमहल, क़ुतुब मीनार और लालकिला पर अपना दावा ठोंकने के बाद बोलने वाला कहता है कि तुमने शौचालय बनवाए हैं, जाओ और वहाँ से झंडा फहराओ। 



हिंसा करने की खुलेआम अपील करते हुए यह फ़सादी वीडियो में शाहीन बाग़ में धरने पर बैठे लोगों और बाकी मुस्लिमों को कहता दिखता है कि अगर तुमने बाबरी मस्जिद की शहादत को चुपचाप स्वीकार न कर लिया होता तो ये नौबत न आती, हमारी माँ-बहनों को यूँ सड़कों पर न बैठना पड़ता, आज हमारे भाई-बहनों को बेइज्जत किया जा रहा है अगर अब भी तुम बाहर न निकले तो अगला नंबर तुम्हारा होगा।
एक दूसरे वीडियो में एक दूसरा वक्ता रिलायंस और अडानी के आर्थिक बहिष्कार की अपील करते हुए कहता है कि अगर रिलायंस और अडानी को नुकसान होगा तो वह सीधे मोदी-शाह को हिट करेगा। वह आगे कहता है कि कोरोना-वोरोना सिर्फ एक साजिश है इनकी, जिससे ये हमें हमारे घरों में बंद कर सकें, हमें इससे कुछ नहीं होगा। वो लक्ष्मी की पूजा करते हैं वो डरें कोरोना से, हम लक्ष्मी की पूजा नहीं करते हमें क्या डर है इससे?
दिल्ली सरकार के कोरोना के फैलाव को रोकने के लिए हर तरह के सामुदायिक जुटाव पर रोक लगा रखी है, इसके बावजूद भी वहाँ प्रदर्शन जारी है जो सरकारी नियम कानून की खुली अवहेलना है।