Showing posts with label petrol bomb. Show all posts
Showing posts with label petrol bomb. Show all posts

आखिर मस्जिदों के पास ही क्यों बरसते पत्थर : 7 राज्य, 12 शहर… रामनवमी शोभयात्रा में शामिल हिंदुओं को बनाया निशाना

साल 2023 की रामनवमी में देश के अलग-अलग इलाकों में हिंसा हुई। इस हिंसा से खास तौर पर बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश प्रभावित हुए हैं। इन घटनाओं में कुछ लोगों की मौत भी हुई हैं और कहीं-कहीं पर तो पुलिस को भी निशाना बनाया गया है। अलग-अलग हिस्सों में पुलिस केस दर्ज कर आरोपितों की धर-पकड़ कर रही है। कुछ स्थानों पर पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई के भी आरोप लगे हैं।

इसी विषय पर आज(4 अप्रैल,2023) Zee News पर एंकर दीपक चौरासिया ने अपने शो Taal Dhok Ke में जब ओवैसी की पार्टी के प्रवक्ता कलीमुद्दीन से प्रश्न पूछने पर कहा कि यात्रा में आतंकवादियों के शामिल होने के कारण ऐसा होता है। जिसका दीपक ने घोर विरोध भी किया, लेकिन मस्जिद में पत्थर और पेट्रोल बम कहां से आते हैं, उसका जवाब नहीं दे पाए। 

नालंदा (बिहार)

बिहार के नालंदा जिले का बिहार शरीफ। 31 मार्च को रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई। जब यात्रा बिहारशरीफ के दीवानगंज इलाके की एक मस्जिद के पास पहुँची, तब इस पर पथराव कर दिया गया। आसपास के घरों और दुकानों में आगजनी और जमकर फायरिंग भी की गई। इस फायरिंग में चार लोगों को गोली लगी है। हमले में शोभायात्रा में शामिल छह युवक घायल हुए, जिनमें दो की हालत गंभीर है। यहाँ 4 अप्रैल 2023 तक स्कूल और इंटरनेट सेवा बंद कर दिए गए हैं।

रोहतास (बिहार)

बिहार के रोहतास जिले का सासाराम। 31 मार्च 2023 को यहाँ रामनवमी शोभा यात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा खत्म होने के बाद सहजलाल, बस्ती मोर, चौखंडी, आदमखानी और सोना पट्टी जैसे इलाकों में हिंसा भड़क गई। यहाँ पथराव के साथ लाठी-डंडे भी चले। हालात काबू करने के लिए दूसरे जिलों से फ़ोर्स मँगाई गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए धारा 144 लागू कर दी गई। जिले के मदरसों को 4 अप्रैल 2023 तक बंद रखने के आदेश हुए हैं।

संभाजी नगर (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र का संभाजी नगर। यहाँ 29-30 मार्च 2023 को किराड़पुरा के एक मंदिर के आगे हिंसा भड़क गई थी। हिंसा की शुरुआत 2 लोगों के कहासुनी से हुई थी। दंगाइयों ने पथराव किया और बम फेंके थे। पुलिस के वाहनों में भी आग लगा दी गई थी।
इस मामले में दर्ज FIR में शौकत, अरबा, रिज़वान, शेख मुनीरुद्दीन, अल्ताफ और हाशमी इतरवाले को नामजद करते हुए 400 से 500 अज्ञात की भीड़ पर FIR दर्ज हुई है। FIR में भीड़ द्वारा नारा-ए-तकबीर और अल्लाह-हु-अकबर के नारे लगाने का जिक्र है। पुलिस ने हिंसा में लगभग चार दर्जन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बाकियों की तलाश की जा रही है।

जलगाँव (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र के जलगाँव में साम्प्रदायिक हिंसा की 2 अलग-अलग घटनाएँ हुईं हैं। पहली घटना मंगलवार (28 मार्च 2023) को पालधी गाँव की है। यहाँ रामनवमी का जुलूस लेकर एक मस्जिद के आगे जुटी भीड़ ने बज रहे DJ पर आपत्ति जताई तो विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि हिंसक भीड़ ने जुलूस में शामिल लोगों पर पत्थरबाजी की जिसमें लगभग 4 लोग घायल हो गए।
पुलिस ने इस मामले में हिन्दू और मुस्लिम पक्ष की तहरीरों पर 2 अलग-अलग FIR दर्ज की है। एक केस में हिन्दू पक्ष के 9 लोगों को आरोपित किया गया है। वहीं दूसरी FIR में मुस्लिम पक्ष के 63 लोग नामजद हुए हैं। अब तक कुल 45 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।
जलगाँव की ही एक अन्य घटना शनिवार (1 अप्रैल 2023) की है। यहाँ के अतरवाल गाँव में किसी अज्ञात व्यक्ति ने गाँव में लगी एक मूर्ति को तोड़ दिया। इस बात से गाँव के 2 पक्ष आमने-सामने आ गए। कुछ ही देर में हालात तनावपूर्व हो गए और दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर हमला कर दिया। मामले में कुल 12 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।

मलाड (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के मलाड में भी रामनवमी की शोभायात्रा पर कट्टरपंथियों द्वारा हमला किया गया था। यहाँ रामनवमी की शोभायात्रा निकाल रहे हिंदुओं पर जामा मस्जिद और अली हजरत मस्जिद इलाके में पत्थरों और चप्पलों से हमला किया गया। हमले के दौरान दंगाइयों ने अल्लाह-हु-अकबर के नारे लगाए। पुलिस ने कुल 400 आरोपितों पर केस दर्ज करते हुए 21 हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया है।

हावड़ा (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल का हावड़ा के शिबपुर में भी रामनवमी के दिन 31 मार्च 2023 साम्प्रदायिक हिंसा हुई। इस दौरान कट्टरपंथियों की भीड़ ने सड़कों पर उतर कर पत्थरबाजी की थी। हिंसा रामनवमी का जुलूस खत्म होने के बाद भी जारी रही।
ममता बनर्जी ने इसका ठीकरा भाजपा के सिर फोड़ा था और हिन्दू संगठनों पर ही जुलूस मुस्लिम बहुल इलाकों से ले जाने का आरोप लगाया था। भाजपा नेताओं ने मामले की जाँच NIA से करवाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है। इस हिंसा में अब तक पुलिस ने 36 लोगों को गिरफ्तार किया है।

डालखोला (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल में उत्तर दिनाजपुर के इस्लामपुर शहर के दालखोला इलाके में 31 मार्च को रामनवमी के जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच झड़प हो गई। मुस्लिम बहुल इलाके में हुई इस झड़प में एक शख्स की मौत हो गई, जबकि 5-6 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। हालाँकि, बंगाल पुलिस युवक के मौत की वजह हार्ट अटैक बता रही है। बंगाल भाजपा का आरोप है कि इस मामले में पुलिस बेकसूर लोगों को गिरफ्तार करके उन पर अत्याचार कर रही है।

हुगली (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल के हुगली में भी 31 मार्च को रामनवमी पर हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान यहाँ के रिसड़ा क्षेत्र में एक भीड़ पर रामनवमी की शोभायात्रा पर हमले का आरोप है। रविवार (2 अप्रैल) को एक बार फिर से यहाँ हिंसा भड़क उठी थी। इस घटना के बाद हुगली के कई हिस्सों में इंटरनेट बंद कर के धारा 144 लागू कर दी गई थी। पुलिस ने अब तक कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कई अन्य लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ चल रही है।

साहिबगंज (झारखंड)

झारखंड का जिला साहिबगंज में शनिवार (1 अप्रैल 2023) की शाम मूर्ति विसर्जन के जुलूस पर कृष्णानगर में कुलीपाड़ा रेलवे लाइन के पास पथराव हुआ। पत्थरबाजी छतों से की गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दौरान भड़की हिंसा में 1 बाइक को आग लगा दी गई थी।
जुलूस में शामिल 6 श्रद्धालुओं के साथ पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। पुलिस इस मामले में जाँच कर रही है। वहीं 3 अप्रैल 2023 को एक बार फिर से साहिबगंज में हनुमान प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने पर हिन्दू संगठन विरोध प्रदर्शन करने लगे जिसके बाद पुलिस ने हिन्दू संगठनों पर ही लाठीचार्ज कर दिया।

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में भी रामनवमी की शोभायात्रा पर हमला हुआ था। यहाँ के जानकीपुरम विस्तार इलाके में जब रामनवमी का जुलूस शाही मस्जिद के सामने से गुजरा, तब उस पर छतों से पत्थर फेंके जाने लगे थे। इस पथराव में कुछ श्रद्धालुओं को चोटें आईं और शोभायात्रा में शामिल वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे। पुलिस कार्रवाई से नाराज हिन्दू संगठनों ने घटना के विरोध में थाने पर धरना दिया था। फिलहाल इस मामले में पुलिस द्वारा किसी की गिरफ्तारी की जानकारी नहीं दी गई है।

वडोदरा (गुजरात)

गुजरात के वडोदरा जिले में गुरुवार (30 मार्च 2023) को रामनवमी की शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी की गई थी। जुलूस के फतेहपुरा गराना पुलिस चौकी क्षेत्र में एक मस्जिद के सामने से गुजरने के बाद उस पर पत्थर बरसाए गए थे। पुलिस ने हालत को को फ़ौरन संभाला और हमलावरों को तितर-बितर किया था।
पुलिस ने इस मामले में SIT गठित करते हुए 500 उपद्रवियों पर केस दर्ज किया था। इस मामले में कुल 23 लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें 6 महिलाएँ भी शामिल हैं। पुलिस को इन सभी आरोपितों की 5 दिनों की कस्टडी रिमांड मिली है।

हासन (कर्नाटक)

कर्नाटक के हासन में गुरुवार (30 मार्च 2023) को रामनवमी के जुलूस पर कट्टरपंथियों ने हमला किया था। जब यह जुलूस चन्नारायणपटना इलाके की एक मस्जिद के सामने से गुजरा, तब उसके विरोध में भीड़ ने हंगामा किया। पत्थरबाजी के साथ हमलावरों ने चाकूबाजी भी की। इस चाकूबाजी में मुरली और हर्ष नाम के 2 लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

शांतिप्रिय समुदाय के हिंसक प्रदर्शन के बाद अब नूपुर शर्मा के पक्ष में बन रहा माहौल

पैगंबर मोहम्मद पर नूपुर शर्मा की टिप्पणी के बाद ‘शांतिप्रिय समुदाय’ के लोगों के जिस तरीके से पूरे देश में अशान्ति फैलाई है, उसने दूसरे समुदाय के लोगों को सोचने के लिए विवश कर दिया है। नूपुर शर्मा ने वहीं कहा था जो मुस्लिम धर्मगुरू जाकिर नाइक इस शांतिप्रिय समुदाय के सामने कह चुका है और यह किताबों में भी लिखा है। इसको लेकर आम लोगों में यह संदेश जा रहा है कि अगर नूपुर शर्मा गलत तो फिर किताब या जाकिर नाइक सही कैसे?

नूपुर शर्मा के बयान के बाद कई दिनों बाद देश के कई हिस्सों में हिंसा की चिंगारी उठने लगी। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर नूपुर को मारने के लिए फतवा जारी कर दिए गए। पुतले जलाए गए और ‘सर तन से जुदा’ जैसे नारे लगाए गए। कई जगह हिंसक प्रदर्शन कर आगजनी-तोड़फोड़ की गई। शंका भी व्यक्त की जा रही है कि उपद्रवियों को शायद ही मालूम हो कि नूपुर ने बोला क्या है? जानमाल का काफी नुकसान हुआ। भारत तेरे टुकड़े होंगे वाली मानसिकता रखने वाले इसमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने शाहीन बाग में विरोध-प्रदर्शन के नाम पर महीनों सड़क जाम रखा था। ये लोग बोलने की आजादी के नाम पर देश विरोधी नारे लगने लगाते हैं। विरोध प्रदर्शन के नाम पर देश में हिंसा फैलाते हैं। 

इस्लामिक किताबों में लिखी बात को ही बोलने को लेकर नूपुर के बहाने साम्प्रदायिक दंगे करने का असली मकसद मथुरा और काशी आदि से ध्यान हटाना है। क्योकि ज्ञानवापी में हुए सर्वे में सच्चाई सामने के बाद ओवैसी और कट्टरपंथी कहते आ रहे हैं कि "एक मस्जिद खोने के बाद और मस्जिद नहीं खोएंगे।" फिर जो नूपुर ने जो बोला अगर वह गलत है, फिर ज़ाकिर नाइक ठीक क्यों? क्यों नहीं उसका सर तन से जुदा करने की मांग हुई? क्यों नहीं उसको जेल भेजने के लिए आंदोलन हुआ? अब ब्रिटेन में इसी विषय पर निर्मित फिल्म के विरोध में किसी की आवाज़ नहीं निकल रही, क्यों? टीवी पर वकील डॉ रिज़वान अहमद ऐसे वक्ता कट्टरपंथियों को मुंह तोड़ जवाब देते हैं। सुनिए:-  

इसके पहली भी यूजर्स नूपुर शर्मा के पक्ष में सोशल मीडिया पर उतर मुस्लिम मौलाना जाकिर नाइक का वो वीडियो भी शेयर किया, जिसमें वो हदीस के हवाले से मुसलमानों के बीच कहता दिख रहा है कि पैगंबर ने 6 साल की बच्ची से शादी की थी और 9 साल की उम्र में उससे शारीरिक संबंध बनाए थे। लेकिन यही बात कहने पर नूपुर शर्मा को धमकियां मिल रही हैं। यहां आप सुनिए कि जाकिर नाइक ने क्या कहा था।  

 हैरानी की बात तो यह है कि यह हिंसक प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है तो इन्हें भड़काने वाले कोर्ट पहुंच जाते हैं लेकिन किसी प्रदर्शनकारी को आगजनी और तोड़फोड़ करने या पत्थरबाजी करने से मना नहीं करते। मुस्लिम धर्मगुरु हो या औवेसी जैसे मुस्लिम नेता सभी सिर्फ भड़काने का काम करते हैं। कोई भी मुस्लिम कट्टरपंथियों को समझाने का काम नहीं करते। उन्हें नहीं समझाते कि जब तुम कहते हो कि ये देश किसी के बाप का नहीं है तो फिर अपने बाप की संपत्ति का नुकसान क्यों करते हो? कोई मौलाना या नेता मुस्लिम समुदाय के आम लोगों को ये बताने की कोशिश नहीं करता कि नूपुर शर्मा ने जो कहा है वो हमारे किताब में लिखा है और हमारे धर्मगुरु भी इस बारे में बात कर चुके हैं। ऐसे में इस शांतिप्रिय समुदाय के हिंसक प्रदर्शन ने दूसरे समुदाय के लोगों को यह विचार करने के लिए विवश कर दिया है कि आखिर ये कितने दिनों तक चलेगा?

अब देश भर में लोग नूपुर शर्मा के पक्ष में सामने आने लगे हैं। मंगलवार को बिहार में आरा के रमना मैदान में नूपुर के समर्थन में विशाल सभा की गई। 

इस सभा के बाद रैली भी निकाली गई और कहा गया कि हमारी चु्प्पी को कमजोरी ना समझिए। इस दौरान लोगों ने जय श्री राम के नारे भी लगाए। आरा में नूपुर के समर्थन में हुई इस रैली का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आप भी देखिए-

जामिया हिंसा : हर दंगाई के पास पहले से थे पत्थर, पेट्रोल बम: दिल्ली पुलिस

जामिया हिंसा, दिल्ली पुलिस
जामिया दंगे में जलती बस 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
1976 से लेकर 2020 तक दिल्ली में इतने दंगे हुए, लेकिन कभी इतनी गंभीरता से जाँच नहीं हुई, जितनी गंभीरता से आज हो रही है। वास्तव में केन्द्र में मोदी सरकार से पूर्व जितनी भी सरकारें रहीं, तुष्टिकरण के कारण किसी दंगे की सघन जाँच नहीं हुई, जिस कारण दंगाइयों के हौसले बुलंद रहे। समय ने ऐसी करवट ली, दंगाई दंगा करते वक़्त यह नहीं सोंच रहे कि "आखिर बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी?" 
लाल कुआँ दिल्ली में जब उग्र मुस्लिमों ने मन्दिर पर हमला करने के अलावा घरों में घुसकर हिन्दू महिलाओं को प्रताड़ित करते समय "ला इला इल्ललला", नारा ए तकबीर, अल्लाह हु अकबर" आदि नारों से लाल कुआँ क्षेत्र गूंज उठा था, हौज़ काज़ी थाने को घेर लिया गया था, परन्तु जैसे ही दिल्ली सरकार नहीं बल्कि केन्द्र सरकार हरकत में आयी, वही लाल कुआँ क्षेत्र "हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई" और "गंगा-जमुना तहजीब" के नारों से गूंजने लगा था। 
आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं, दंगाई कोई भी हो, किसी भी धर्म अथवा जाति से बक्शा नहीं जायेगा। बेगुनाहों के खून की होली खेलने वालों को उनके उचित स्थान पर पहुँचाया जाएगा। दंगे में साज़िशकर्ताओं के घर के पक्षी तक को कुछ नहीं होता, मरने वाला बेगुनाह होता है।   
जून 4, 2020 को जामिया हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट में हलफनामा दायर किया। दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट को बताया कि पिछले साल दिसंबर माह में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के ख़िलाफ हुई हिंसा कोई छोटी-मोटी घटना नहीं थी। यह ये एक सुनियोजित घटना थी। हर दंगाई के पास पहले से पत्थर, लाठी और पेट्रोल बम थे।
जामिया मिलिया इस्लामिया के कैंपस में बीते साल 13 और 15 दिसंबर को हिंसा हुई थी। दिल्ली पुलिस के वकील अमित महाजन और रजत नैयर ने जामिया हिंसा मामले में इस दौरान 6 याचिकाओं पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उस समय भीड़ का इरादा केवल कानून और व्यवस्था को बाधित करना था।
दिल्ली पुलिस की ओर से कोर्ट में कुछ वीडियोज और तस्वीरें भी सबूत के तौर पर पेश की गई। इनके जरिए बताया गया कि छात्रों के आंदोलन की आड़ में वास्विकता में कुछ लोगों ने स्थानीय लोगों की मदद से दंगा भड़काने की कोशिश की।
क्राइम ब्रांच ने कहा, “जामिया हिंसा कोई छोटी-मोटी घटना नहीं थी। बल्कि सुनियोजित घटना थी, जहाँ दंगाइयों के पास पत्थर, लाठियाँ , पेट्रोल बम, ट्यूबलाइट आदि पहले से थीं। इससे साफ होता है कि भीड़ का इरादा केवल कानून-व्यवस्था को बाधित करना था।”

जामिया हिंसा में छात्र नहीं बाहरी लोग 
जामिया हिंसा पर दायर 3 एफआईआर के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने कहा कि 20 लोगों के ख़िलाफ़ चार्जशीट साकेत कोर्ट में दाखिल हुई है। इनमें से कोई भी यूनिवर्सिटी का छात्र नहीं है।
जाँच में ये भी खुलासा हुआ कि स्थानीय नेताओं और राजनेताओं ने भड़काऊ नारे लगाकर प्रदर्शनकारियों को भड़काने का काम किया।
पुलिस ने बताया, “जामिया हिंसा में दंगाइयों ने गाड़ी के टायर जलाए और पुलिस की ओर फेंके। एक एंबुलेंस, जिससे एक मरीज को यूनिवर्सिटी के रास्ते ले जाया जा रहा था, उसे भी क्षतिग्रस्त किया गया। कानून को तोड़ते हुए इस भीड़ के कई समूहों ने कैंपस में एंटर किया और फोर्स के ऊपर पत्थरबाजी की।”
दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को कोर्ट से ये भी अपील की कि जामिया हिंसा मामले में अलग से जाँच करने की कोई जरूरत नहीं है। वह पहले से ही इस संबंध में व्यापक जाँच कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हलफनामे में पुलिस ने उन याचिकाओं को खारिज करने की भी माँग की, जिसमें छात्रों की गिरफ्तारी और चिकित्सा सहायता न दिए जाने का हवाला देकर फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी के गठन की माँग हुई थी।
पुलिस ने दिल्ली हाइकोर्ट में इन याचिकाओं को खारिज करने की माँग करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क है कि जामिया में हुआ प्रदर्शन सिर्फ़ एक छात्र विरोध था और शांतिपूर्ण प्रदर्शन था, जो कि पूर्ण रूप से झूठ है, इसलिए इन दलीलों को अस्वीकार किया जाए।
दंगाइयों के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई के संबंध में कुछ याचिका नबीला हसन, स्नेहन मुखर्जी और सिद्धार्थ द्वारा दाखिल की गई थी। इसके अलावा कुछ याचिकाएँ हिंसा के आरोपितों के ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने के लिए विभिन्न वकीलों, जामिया छात्रों, ओखला निवासियों और यहाँ तक की जामा मस्जिद के इमामों द्वारा दायर की गई थी।
दिल्ली पुलिस ने उच्च न्यायालय में यह भी कहा कि असहमति के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन किसी को भी अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में कानून हाथ में लेने, हिंसा भड़काने, आगजनी करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

किसने फेंका शाहीन बाग़ में पेट्रोल बम?

शाहीन बाग़ प्रदर्शन, पेट्रोल बम
शाहीन बाग़ प्रदर्शन स्थल के पास फेंके गए बम से लगी आग को बुझाते लोग
शाहीन बाग़ के लोग रविवार (मार्च 22, 2020) को भी धरने पर बैठे हुए हैं, जब पूरा देश कोरोना वायरस से लड़ने के लिए जनता कर्फ्यू का पालन करने में लगा हुआ है। अब उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन स्थल पर किसी ने पेट्रोल बम फेंक कर मारा है। दिल्ली के हालिया हिन्दू-विरोधी दंगों में देखा गया था कि दंगाई मुस्लिम भीड़ ने पेट्रोल बम का खतरनाक रूप से इस्तेमाल किया था और कई हिन्दुओं को निशाना बनाया गया था। अभी तक साफ़ नहीं है कि शाहीन बाग़ में पेट्रोल बम किसने फेंका।
तस्वीरों में देखा जा सकता है कि शाहीन बाग़ एंटी-सीएए प्रदर्शन स्थल के नजदीक आग लगी हुई है और लोग उसे बुझाने में लगे हुए हैं। एएनआई की ट्वीट के अनुसार, ये घटना रविवार की सुबह हुई है। सोशल मीडिया पर लोगों ने आशंका जताई है कि हो सकता है कि शाहीन बाग़ के उपद्रवियों ने जनता कर्फ्यू से ध्यान खींचने के लिए ऐसा किया हो। हालाँकि, इस सम्बन्ध में अभी तक कुछ भी पुष्टि नहीं हुई है।

कोरोना वायरस को लेकर सरकार ने आगाह किया है कि कहीं भी भीड़ न जुटाएँ लेकिन शाहीन बाग़ के उपद्रवियों ने पूरी दिल्ली को ख़तरे में डाल रखा है। तबरेज नामक प्रदर्शनकारी कोरोना वायरस का शिकार भी हो गया। उसकी बहन को भी कोरोना हो गया था, जो सऊदी से इस्लामी तीर्थयात्रा कर के लौटी थी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शाहीन बाग़ में कोरोना के ख़तरों से जुड़े सवालों को टाल दिया। कोरोना को लेकर जिस तरह से सोशल मीडिया पर विज्ञान और डॉक्टरों की सलाह को धता बताते हुए मजहबी विडियो शेयर किए जा रहे हैं, इससे लगता नहीं है कि ये समाज इस समस्या के प्रति गंभीर है।

हिन्दू विरोधी दंगा : ताहिर हुसैन के बचाव में उतरी ‘द वायर’

ताहिर हुसैन
                                                                                             साभार 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आईबी के अंकित शर्मा की बर्बर हत्या समेत दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों के प्रमुख आरोपित, फरार चल रहे आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को आज दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
जहाँ एक तरफ इस समाचार से अंकित शर्मा के परिवार सहित बहुत सारे दंगा पीड़ित हिन्दुओं को कुछ संतोष हासिल हुआ होगा वहीं इसने द वायर समेत कई सारे लेफ्टिस्ट मीडिया संगठनों के लिए काम का लोड बढ़ा दिया। अंकित शर्मा की बर्बर हत्या की विभीषका को दमभर झुठलाने की कोशिशों के बाद अब प्रोपोगंडा साइट द वायर अंकित शर्मा के हत्यारोपी ताहिर हुसैन को निर्दोष सिद्ध करने में जान लगा दी है।
द वायर को दिए अपने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में ताहिर हुसैन दावा करता है कि वह निर्दोष है और खुद ही साम्प्रदायिक हिंसा का शिकार है। द वायर द्वारा ट्वीट की गई वीडियो क्लिप में ताहिर हुसैन को यह कहते सुना जा सकता है कि उसे न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है और उसको यह भरोसा है कि उसके साथ मुस्लिम होने के कारण अन्याय नहीं होगा।
ऐसे में क्या द वायर ने ताहिर से यह पूछना चाहिए था कि "क्या घर में जमा दंगाई, ईंट, पत्थर, एसिड और पेट्रोल बम मुस्लिमों का नरसंहार करने के लिए थे?" लेकिन द वायर जैसे मीडिया तो दंगों के मास्टरमाइंड को बचाने में व्यस्त हैं। वरना गिरफ़्तारी से पूर्व साक्षात्कार का क्या अर्थ निकाला जाए? क्या गिरफ्तारी से पूर्व साक्षात्कार करने वाले मीडिया को ताहिर के छुपे होने की जानकारी थी?
आज ऐसा ही कुछ दावा इसने आजतक को दिए अपने “एक्सक्लूसिव इंटरव्यू” में भी किया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अंकित शर्मा को दो और लोगों के साथ ताहिर हुसैन की बिल्डिंग में एक मुस्लिम भीड़ खींच कर ले गई थी, जिसकी छत पर लाठी लिए ताहिर हुसैन के साथ पेट्रोल बमों और पत्थरों के ढ़ेर को विभिन्न तस्वीरों और फुटेज में देखा जा सकता है। ताहिर हुसैन की इसी बिल्डिंग की छत से सैंकड़ों इस्लामिक फसादियों ने बगल के हिन्दू घरों और मोहल्ले की गलियों पर पेट्रोल बम, तेज़ाब, और पत्थर से हमले करने के लिए इस्तेमाल की थी।
दिल्ली में जिस तरह से दंगाइयों ने सड़कों और घरों पर तांडव किया, उससे बार-बार सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी हिंसा बिना पूर्व तैयारी और साजिश के नहीं हो सकती। फिर सवाल उठता है कि इस साजिश में कौन-कौन लोग शामिल है। इन सवालों का जवाब अभी पूरी तरह से मिलना बाकी है, लेकिन  हिंसा वाली जगहों से मिले गुलेल, पत्थर और पेट्रोल बम स्पष्ट तौर पर साजिश का संकेत दे रहे हैं। आप के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के घर का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जो पहली नजर में चीख चीख कर हिंसा और उसकी साजिश की कहानी बयां कर रहा है।

ताहिर हुसैन ने अपने बचाव में सफाई दी और वीडियो भी जारी किया। लेकिन उसके द्वारा दी गई दलीलें उसके घर के वायरल वीडियो के सामने कहीं नहीं टिकते। अंकित शर्मा हत्या और दंगा मामले में केस दर्ज होने के बाद से ताहिर हुसैन फरार है। लेकिन जिस तरह ताहिर हुसैन ने दंगे को अंजाम दिया है, उससे पता चलता है कि उसके पीछे बड़ी ताकतें काम कर रही हैं। आम आदमी पार्टी का एक ऐसा पार्षद है, जो एक मजदूर से एक रसूखदार नेता बन गया। उसकी पहुंच सीधे आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं तक है।भाजपा संवाद ने एक ट्वीट किया है, जिसमें बताया है कि हिंसा के तीन दिन पहले तक ताहिर हुसैन ने अमानतुल्लाह खान को 56 बार, मनीष सिसोदिया को 18 बार और सीएम अरविंद केजरीवाल को 9 बार फोन किया था।

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दिल्ली हिंसा के मुद्दे पर आप प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तीखा प्रहार किया। मिश्रा ने दिल्ली हिंसा के लिए केजरीवाल के साथ ही आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह पर आरोप लगाया है। मिश्रा ने गुरुवार को एक ट्वीट में कहा-
”डंके की चोट पर कह रहा हूं। अगर दंगों के दिनों की ताहिर हुसैन के फोन के कॉल डिटेल्स खुल गई तो दंगों में और अंकित शर्मा की हत्या में संजय सिंह और केजरीवाल दोनों की भूमिका सामने आ जाएगी।”

इस बीच भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने केंद्र सरकार से एक गंभीर सवाल किया है। उन्होंने ट्वीट कर सरकार से पूछा है कि अंकित शर्मा की हत्या कहीं आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के इशारे पर इसलिए तो नहीं की गई क्योंकि वह बांग्लादेशी आतंकवादियों के साथ ताहिर हुसैन के संबंधों की जांच कर रहे थे?
दिल्ली पुलिस ने आम आदमी पार्टी के इस नेता के खिलाफ दफा 302 A के अंतर्गत दयालपुर पुलिस स्टेशन में हत्या का मामला दर्ज किया हुआ है। मजे की बात ये है कि जहाँ एकतरफ सभी न्यूज़ चैनल ताहिर हुसैन की गिरफ्तारी की खबर चला रहे हैं वहीं कुछ लेफ्टिस्ट पोर्टल उसे निर्दोष सबित करने में जुट गए हैं।
इससे पहले द वायर ने यह कहा- “ऐसा माना जा रहा है कि अंकित शर्मा की पीट-पीट कर हत्या की गई।”, न सिर्फ अंकित शर्मा के वीभत्स मर्डर को झुठलाने की कोशिश की गई थी बल्कि दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में इस्लामिक भीड़ द्वारा हिन्दुओं पर बरपाये गए कहर को भी नजरअंदाज करने का कुत्सित प्रयास किया था।
सुब्रमण्यम स्वामी के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि उन्होंने यह आरोप ऐसे ही नहीं लगाए होंगे। पिछले वर्ष जाफराबाद में NIA ने जब कई सर्च अभियान चलाया था तब NIA को आंतकी सुराग मिले थे जिसमें दिल्ली और UP में कई आतंकी हमले करने का प्लान शामिल था। इस छापे में NIA ने बम बनाने के लिए भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की थी। वहीं पिछले महीने 9 जनवरी को, दिल्ली पुलिस ने दिल्ली में एक इस्लामिक स्टेट (IS) के आतंकी मॉड्यूल का भी पता लगाया था, जिसमें दिल्ली के वज़ीराबाद इलाके में तीन आतंकी संदिग्धों की गिरफ़्तारी हुई थी। इसके साथ ही कई मामले देश में ऐसे भी हैं जिसमें बांग्लादेशी घुसपैठियों आतंकियों के साथ लिंक सामने आये हैं। ऐसे में अगर दिल्ली में बांग्लादेशी आतंकवादियों का साथ देने और अंकित शर्मा की हत्या में में कहीं से भी ताहिर हुसैन की भूमिका सामने आती है तो यह मामला आम आदमी पार्टी के लिए और बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है।
लेकिन ‘सीरियल ऑफेंडर’ द वायर की इस करतूत पर अचरज करने की कतई जरूरत इसलिए नहीं है क्योंकि वह किसी न किसी प्रकार शरजील इमाम या ताहिर हुसैन जैसे इस्लामिस्ट और दंगाइयों को एक प्लेटफॉर्म मुहैया करवाता आया है।
इसने अंकित शर्मा के बर्बर मर्डर पर भी तभी कुछ कहा था जब इस संबंध में एक एफआईआर दर्ज की गई थी, और वह भी ताहिर हुसैन को बचाने की कोशिश करते हुए। इस प्रोपोगंडा साइट ने दिल्ली के इन हिन्दू विरोधी दंगों को उलटे मुस्लिमों के खिलाफ हिन्दुओं का हमला कहा जबकि दंगों के गुनहगार, प्लानिंग, दंगों के दौरान हुई बर्बरता यह साबित करती है कि ये दंगे हिन्दुओं के नरसंहार के लिए पूरी तरह सुनियोजित थे।

दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगे : एक सप्ताह पहले आ गई थीं ईंटें, ताहिर हुसैन के घर के पास 7 ट्रक पत्थर

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगा
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगे कोई अकस्मात घटने वाली घटना नहीं थी, बल्कि एक पूर्व नियोजित और पूरी तैयारी के साथ रची गई साजिश थी। दंगे के बाद से ही सबके मन में यही सवाल उठ रहा था कि अचानक उपद्रवियों के हाथ में तेजाब की थैलियाँ, पेट्रोल बम, ड्रम, ईंट-पत्थर और गुलेल आदि कहाँ से आए। अब धीरे-धीरे इस पर से पर्दा उठता जा रहा है और कई खुलासे हो रहे हैं।
इन सब खुलासों से CAA विरोध में हो रहे प्रदर्शनों और धरनों में सम्मिलित समस्त गैर-मुस्लिमों को अपनी आंखें खोलनी चाहिए। इन दंगों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विरोध की आड़ में इनका उद्देश्य देश में साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ कर अशांति फैलाना है। ये शांति के दुश्मन इन्ही गैर-मुस्लिमों के कंधे पर बैठ इन्ही की जाति और धर्म पर जानलेवा हमले कर रहे हैं।  
ताजा खुलासे में पता चला है कि खौफ और खून से सने इन दंगों को अंजाम देने के लिए ये ईंट-पत्थर एक सप्ताह पहले से ही इकट्ठा करना शुरू कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि इस हिंसा के लिए ट्रैक्टरों की मदद से एक हफ्ते पहले ही भट्ठों से ईंटे मँगवा ली गई थीं। सात ट्रक पत्थर तो करावल नगर के AAP पार्षद ताहिर हुसैन के घर के पास ही उठाए गए। इस दंगे के पीछे ताहिर हुसैन का बड़ा हाथ बताया जा रहा है। ताहिर पर आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा की मौत का भी आरोप है।
ईंट और पत्थरों का अम्बार 
ताहिर के घर के आगे लगे पत्थरों के ढेर को देखकर साफ लग रहा था कि इस दंगे के लिए जबरदस्त तैयारी की गई थी। उसके घर के आगे पत्थरों के इतने ढेर को देखकर निगमकर्मी भी सन्न रह गए, क्योंकि वहाँ पर इतना ज्यादा पत्थर था कि उससे एक मंजिला मकान बन सकता था। बता दें कि हिंसाग्रस्त इलाके मुस्तफाबाद, करावल नगर, चमन पार्क, शिव विहार सहित अन्य इलाकों में हिंसा के एक सप्ताह पहले से ही ट्रैक्टरों में भरकर ईंट मँगवाए गए और फिर इसके टुकड़े-टुकड़े किए गए ताकि इसे बोरियों में भरकर छतों पर रखा जा सके।
जो लोग अपने घरों पर ईंटों को एकत्र कर रहे थे, उनका कहना था कि उन्होंने अपने मकान निर्माण कार्यों के उद्देश्य से बड़ी संख्या में ईंटों का ऑर्डर दिया था। जबकि जाँच से पता चला है कि इन्हीं ईंटों को टुकड़ों में तोड़ा गया था और हिंसा के दौरान इस्तेमाल किया गया।
इसके साथ ही बताया जा रहा है कि जहाँं ईंटे रखी गई थीं, उन घरों में कोई निर्माण कार्य नहीं हो रहा है और जिन बोरियों को निर्माण कार्य के तथाकथित उद्देश्य के लिए वितरित किया गया था वे कई घरों की छतों पर खाली पाए गए। अब यह सवाल उठता है कि अचानक से ये ईंट के ढेर आधे कैसे हो गए? जिसका जवाब जाँच के बाद ही मिल सकेगा। पुलिस यह पता लगाने में जुट गई है कि आखिर क्यों इन ईंटों के हफ्ते भर पहले एकत्र किया गया था। पुलिस गाजियाबाद में स्थित उन ईंट भट्टों के मालिकों के संपर्क में है, जिनके पास हिंसा से एक हफ्ते पहले इन ईंटों का ऑर्डर मिला था।
गोली से अधिक घातक होती है गुलेल 
वहीं ताहिर हुसैन के घर के पास की बात करें तो यहाँ पर पत्थरों की कई इंच मोटी परत बन चुकी थी। बताया जा रहा है कि नजारा कुछ ऐसा था, मानो नई सड़क के निर्माण से पहले पत्थरों को तोड़कर बिछाया गया हो। जिसकी वजह से सफाईकर्मियों को भी पत्थरों को हटाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। ताहिर के घर के पास से ही निगमकर्मियों ने कई ट्रक रेत भी उठाया है। अधिकारी ने कहा कि दिल्ली में इससे पहले कभी इस तरह एक ही स्थान पर इतने पत्थरों का जखीरा देखने को नहीं मिला। जिन पत्थरों को उठाया गया, वे बहुत छोटे-छोटे टुकड़ों में मिले हैं। पत्थरों को देखकर ऐसा लग रहा था कि मानो किसी ने इन्हें मशीन से काटा हो।
दिल्ली हिंदू विरोधी दंगा, गुलेल
मैक्सिमम तबाही के लिए हर 10-15 घरों के बाद एक छत पर लगी थी गुलेल 
जैसे-जैसे दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की दिल्ली दंगों की जाँच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे बेहद चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। हिंसाग्रस्त इलाकों की जो तस्वीरें सामने आई हैं, वो चकित करने वाली हैं। उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे में उपद्रवियों ने तरह-तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया था, जिनमें सबसे बड़ा हथियार गुलेल रहा। कई इलाकों में भड़की हिंसा के दौरान गोली-बम से ज्यादा घातक गुलेल साबित हुई है। ये गुलेल छत, रिक्शे और अन्य जगहों पर रखकर इस्तेमाल किए गए। कई इलाकों की छतों पर गुलेल मिल रही है। 
हिंसा की जाँच कर रही दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की एसआईटी को हर 10-15 घरों के बाद एक घर की ऊँची छत पर गुलेल मिली है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जाँच के दौरान सैकड़ों की संख्या में गुलेल बरामद किया गया। सबसे ज्यादा गुलेल ओल्ड मुस्तफाबाद के घरों की छतों से बरामद किया गया। पुलिस का कहना है कि इन्हीं गुलेल की मदद से सबसे ज्यादा तबाही मचाई गई।
अवलोकन करें:-
About this website

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले में हुए हिन्दुओं के नरसंहार के खिलाफ शनिवार (29 फरवरी 2020) को ....
हिंसा फैलाने के लिए बड़े पैमाने पर गुलेल का इस्तेमाल किया गया है। इससे लोहे, पत्थरों, पेट्रोल बमों का इस्तेमाल किया गया। दिल्ली के शिव विहार इलाके में मिली गुलेल एक रिक्शे पर लोहे के एंगल को वेल्डिंग कर के बनाई गई थी। जिस तरह छोटी गुलेल से मामूली गिट्टियाँ चलाई जाती हैं, ठीक वैसे ही इस बड़ी गुलेल से पेट्रोल बम की बोतलें, बड़े-बड़े पत्थर या और भी चीजें फेंकी जा सकती हैं। यानी किसी भारी चीज को दूर तक फेंकने के लिए ये गुलेल बनाई गई, वो भी रिक्शे के ऊपर। इसे मोबाइल गुलेल कहा जाता है, जिसे जहाँ चाहे, वहाँ ले जाया जा सके और घटना को अंजाम दिया जा सके। इस बड़ी गुलेल से पेट्रोल बम की बोतलें, बड़े-बड़े पत्थर फेंके गए थे।

सीलमपुर बवाल में बम फेंक भी नहीं पाया, हाथ भी गंवाने वाले रईस को पुलिस ने धर दबोचा

सीलमपुर हिंसासीलमपुर में मंगलवार (दिसंबर 17, 2019) को हुए दंगों के बीच पेट्रोल बम फेंकने की कोशिश करने वाले युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। युवक की पहचान रईस के रूप में हुई। जानकारी के मुताबिक रईस मंगलवार को भीड़ के बीच से पेट्रोल बम पुलिस पर फेंकने जा रहा था, लेकिन हमला करने से पहले ही बम उसके हाथ में फट गया। जिसके कारण उसके हाथ के चीथड़े उड़ गए।
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद से रईस ने अपनी पहचान छिपाई हुई थी और जीटीबी अस्पताल में अपना ईलाज करवा रहा था। लेकिन, तलाश में जुटी पुलिस को उसकी जानकारी मिल गई। जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रईस अब भी अस्पताल में ही है। लेकिन, पुलिस उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की तैयारी कर रही है। चूँकि बम फटने के कारण रईस के हाथ में काफी गंभीर चोट आई है, इसलिए पुलिस की ओर से उसे अभी कुछ नहीं कहा गया है। पुलिस का कहना है कि रईस को फिलहाल ईलाज मुहैया करवाया जा रहा है और ईलाज के बाद उस पर एक्शन लिया जाएगा।

सीलमपुर में हुए दंगों में पुलिस ने दंगाई समेत तोड़फोड़ करने वालों में 21 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि बाकी लोगों की भी पहचान कर ली गई है। कहा जा रहा है कि आज इलाके में तनाव दोबारा फैल सकता है, लेकिन पुलिस स्थानीय लोगों से बातचीत करके भरोसा कायम करने की कोशिश कर रही है।
सीलमपुर में हुई हिंसा से जुड़े कई वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। लेकिन इसी बीच बम फोड़ने का ऐसा वीडियो भी सामने आया। जिसने दिल्ली पुलिस समेत जाँच एजेंसियों के कान खड़े दिए। हालाँकि भले ही बम फेंकने की मंशा से भीड़ में पहुँचे युवक की गिरफ्तारी हो चुकी है। लेकिन ये सोचने का विषय है कि क्या नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर दिल्ली में कोई और साजिश रची जा रही है? जिसकी एक झलक हमें वीडियो में देखने को मिली।
पुलिस फिलहाल रईस से पूछताछ में जुटी है। साथ ही सीलमपुर, जाफराबाद और दयालपुर में हुई हिंसा पर भी अपनी नजर बनाए हुए है। इस बीच खूफिया एजेंसियों से कई इनपुट पुलिस को मिले हैं, जिस पर जाँच जारी है। इसके अलावा दिल्ली के कई इलाकों में धारा 144 लगी हुई है। लेकिन, पुलिस लगातार लोगों के बीच गश्त करके शांति व्यवस्था बनाने की तैयारी कर रही है।