Showing posts with label deepak chaurasia. Show all posts
Showing posts with label deepak chaurasia. Show all posts

आखिर मस्जिदों के पास ही क्यों बरसते पत्थर : 7 राज्य, 12 शहर… रामनवमी शोभयात्रा में शामिल हिंदुओं को बनाया निशाना

साल 2023 की रामनवमी में देश के अलग-अलग इलाकों में हिंसा हुई। इस हिंसा से खास तौर पर बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश प्रभावित हुए हैं। इन घटनाओं में कुछ लोगों की मौत भी हुई हैं और कहीं-कहीं पर तो पुलिस को भी निशाना बनाया गया है। अलग-अलग हिस्सों में पुलिस केस दर्ज कर आरोपितों की धर-पकड़ कर रही है। कुछ स्थानों पर पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई के भी आरोप लगे हैं।

इसी विषय पर आज(4 अप्रैल,2023) Zee News पर एंकर दीपक चौरासिया ने अपने शो Taal Dhok Ke में जब ओवैसी की पार्टी के प्रवक्ता कलीमुद्दीन से प्रश्न पूछने पर कहा कि यात्रा में आतंकवादियों के शामिल होने के कारण ऐसा होता है। जिसका दीपक ने घोर विरोध भी किया, लेकिन मस्जिद में पत्थर और पेट्रोल बम कहां से आते हैं, उसका जवाब नहीं दे पाए। 

नालंदा (बिहार)

बिहार के नालंदा जिले का बिहार शरीफ। 31 मार्च को रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई। जब यात्रा बिहारशरीफ के दीवानगंज इलाके की एक मस्जिद के पास पहुँची, तब इस पर पथराव कर दिया गया। आसपास के घरों और दुकानों में आगजनी और जमकर फायरिंग भी की गई। इस फायरिंग में चार लोगों को गोली लगी है। हमले में शोभायात्रा में शामिल छह युवक घायल हुए, जिनमें दो की हालत गंभीर है। यहाँ 4 अप्रैल 2023 तक स्कूल और इंटरनेट सेवा बंद कर दिए गए हैं।

रोहतास (बिहार)

बिहार के रोहतास जिले का सासाराम। 31 मार्च 2023 को यहाँ रामनवमी शोभा यात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा खत्म होने के बाद सहजलाल, बस्ती मोर, चौखंडी, आदमखानी और सोना पट्टी जैसे इलाकों में हिंसा भड़क गई। यहाँ पथराव के साथ लाठी-डंडे भी चले। हालात काबू करने के लिए दूसरे जिलों से फ़ोर्स मँगाई गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए धारा 144 लागू कर दी गई। जिले के मदरसों को 4 अप्रैल 2023 तक बंद रखने के आदेश हुए हैं।

संभाजी नगर (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र का संभाजी नगर। यहाँ 29-30 मार्च 2023 को किराड़पुरा के एक मंदिर के आगे हिंसा भड़क गई थी। हिंसा की शुरुआत 2 लोगों के कहासुनी से हुई थी। दंगाइयों ने पथराव किया और बम फेंके थे। पुलिस के वाहनों में भी आग लगा दी गई थी।
इस मामले में दर्ज FIR में शौकत, अरबा, रिज़वान, शेख मुनीरुद्दीन, अल्ताफ और हाशमी इतरवाले को नामजद करते हुए 400 से 500 अज्ञात की भीड़ पर FIR दर्ज हुई है। FIR में भीड़ द्वारा नारा-ए-तकबीर और अल्लाह-हु-अकबर के नारे लगाने का जिक्र है। पुलिस ने हिंसा में लगभग चार दर्जन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बाकियों की तलाश की जा रही है।

जलगाँव (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र के जलगाँव में साम्प्रदायिक हिंसा की 2 अलग-अलग घटनाएँ हुईं हैं। पहली घटना मंगलवार (28 मार्च 2023) को पालधी गाँव की है। यहाँ रामनवमी का जुलूस लेकर एक मस्जिद के आगे जुटी भीड़ ने बज रहे DJ पर आपत्ति जताई तो विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि हिंसक भीड़ ने जुलूस में शामिल लोगों पर पत्थरबाजी की जिसमें लगभग 4 लोग घायल हो गए।
पुलिस ने इस मामले में हिन्दू और मुस्लिम पक्ष की तहरीरों पर 2 अलग-अलग FIR दर्ज की है। एक केस में हिन्दू पक्ष के 9 लोगों को आरोपित किया गया है। वहीं दूसरी FIR में मुस्लिम पक्ष के 63 लोग नामजद हुए हैं। अब तक कुल 45 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।
जलगाँव की ही एक अन्य घटना शनिवार (1 अप्रैल 2023) की है। यहाँ के अतरवाल गाँव में किसी अज्ञात व्यक्ति ने गाँव में लगी एक मूर्ति को तोड़ दिया। इस बात से गाँव के 2 पक्ष आमने-सामने आ गए। कुछ ही देर में हालात तनावपूर्व हो गए और दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर हमला कर दिया। मामले में कुल 12 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।

मलाड (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के मलाड में भी रामनवमी की शोभायात्रा पर कट्टरपंथियों द्वारा हमला किया गया था। यहाँ रामनवमी की शोभायात्रा निकाल रहे हिंदुओं पर जामा मस्जिद और अली हजरत मस्जिद इलाके में पत्थरों और चप्पलों से हमला किया गया। हमले के दौरान दंगाइयों ने अल्लाह-हु-अकबर के नारे लगाए। पुलिस ने कुल 400 आरोपितों पर केस दर्ज करते हुए 21 हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया है।

हावड़ा (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल का हावड़ा के शिबपुर में भी रामनवमी के दिन 31 मार्च 2023 साम्प्रदायिक हिंसा हुई। इस दौरान कट्टरपंथियों की भीड़ ने सड़कों पर उतर कर पत्थरबाजी की थी। हिंसा रामनवमी का जुलूस खत्म होने के बाद भी जारी रही।
ममता बनर्जी ने इसका ठीकरा भाजपा के सिर फोड़ा था और हिन्दू संगठनों पर ही जुलूस मुस्लिम बहुल इलाकों से ले जाने का आरोप लगाया था। भाजपा नेताओं ने मामले की जाँच NIA से करवाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है। इस हिंसा में अब तक पुलिस ने 36 लोगों को गिरफ्तार किया है।

डालखोला (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल में उत्तर दिनाजपुर के इस्लामपुर शहर के दालखोला इलाके में 31 मार्च को रामनवमी के जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच झड़प हो गई। मुस्लिम बहुल इलाके में हुई इस झड़प में एक शख्स की मौत हो गई, जबकि 5-6 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। हालाँकि, बंगाल पुलिस युवक के मौत की वजह हार्ट अटैक बता रही है। बंगाल भाजपा का आरोप है कि इस मामले में पुलिस बेकसूर लोगों को गिरफ्तार करके उन पर अत्याचार कर रही है।

हुगली (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल के हुगली में भी 31 मार्च को रामनवमी पर हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान यहाँ के रिसड़ा क्षेत्र में एक भीड़ पर रामनवमी की शोभायात्रा पर हमले का आरोप है। रविवार (2 अप्रैल) को एक बार फिर से यहाँ हिंसा भड़क उठी थी। इस घटना के बाद हुगली के कई हिस्सों में इंटरनेट बंद कर के धारा 144 लागू कर दी गई थी। पुलिस ने अब तक कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कई अन्य लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ चल रही है।

साहिबगंज (झारखंड)

झारखंड का जिला साहिबगंज में शनिवार (1 अप्रैल 2023) की शाम मूर्ति विसर्जन के जुलूस पर कृष्णानगर में कुलीपाड़ा रेलवे लाइन के पास पथराव हुआ। पत्थरबाजी छतों से की गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दौरान भड़की हिंसा में 1 बाइक को आग लगा दी गई थी।
जुलूस में शामिल 6 श्रद्धालुओं के साथ पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। पुलिस इस मामले में जाँच कर रही है। वहीं 3 अप्रैल 2023 को एक बार फिर से साहिबगंज में हनुमान प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने पर हिन्दू संगठन विरोध प्रदर्शन करने लगे जिसके बाद पुलिस ने हिन्दू संगठनों पर ही लाठीचार्ज कर दिया।

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में भी रामनवमी की शोभायात्रा पर हमला हुआ था। यहाँ के जानकीपुरम विस्तार इलाके में जब रामनवमी का जुलूस शाही मस्जिद के सामने से गुजरा, तब उस पर छतों से पत्थर फेंके जाने लगे थे। इस पथराव में कुछ श्रद्धालुओं को चोटें आईं और शोभायात्रा में शामिल वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे। पुलिस कार्रवाई से नाराज हिन्दू संगठनों ने घटना के विरोध में थाने पर धरना दिया था। फिलहाल इस मामले में पुलिस द्वारा किसी की गिरफ्तारी की जानकारी नहीं दी गई है।

वडोदरा (गुजरात)

गुजरात के वडोदरा जिले में गुरुवार (30 मार्च 2023) को रामनवमी की शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी की गई थी। जुलूस के फतेहपुरा गराना पुलिस चौकी क्षेत्र में एक मस्जिद के सामने से गुजरने के बाद उस पर पत्थर बरसाए गए थे। पुलिस ने हालत को को फ़ौरन संभाला और हमलावरों को तितर-बितर किया था।
पुलिस ने इस मामले में SIT गठित करते हुए 500 उपद्रवियों पर केस दर्ज किया था। इस मामले में कुल 23 लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें 6 महिलाएँ भी शामिल हैं। पुलिस को इन सभी आरोपितों की 5 दिनों की कस्टडी रिमांड मिली है।

हासन (कर्नाटक)

कर्नाटक के हासन में गुरुवार (30 मार्च 2023) को रामनवमी के जुलूस पर कट्टरपंथियों ने हमला किया था। जब यह जुलूस चन्नारायणपटना इलाके की एक मस्जिद के सामने से गुजरा, तब उसके विरोध में भीड़ ने हंगामा किया। पत्थरबाजी के साथ हमलावरों ने चाकूबाजी भी की। इस चाकूबाजी में मुरली और हर्ष नाम के 2 लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

अफगानिस्तान से मुस्लिमों का पलायन जारी, चौरसिया बोले- भारत में डर की अफ़वाह फैलाने वाले कहाँ गड़ गए?


अफगानिस्तान में राजधानी काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद हताश लोग देश छोडकर जाने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए यहां के हवाई अड्डे पर दहशत का माहौल है। अफगानिस्तान में हो रहे पलायन को लेकर वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया ने कहा, भारत में डर की अफवाह फैलाने वाले ये दृश्य अवश्य देखें, आतंक, जिहाद का कैसा रूप है ये कि मुस्लिम बहुल देश से मुस्लिम भाग रहे हैं।

कुछ सूत्रों के अनुसार तालिबान से पुरुष वर्ग से अधिक डर का माहौल महिलाओं में है, क्योकि तालिबान के राज में उनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा, वह मात्र एक भोग की वस्तु बनकर रह जाएँगी। जरा सी भूल होने पर उन पर कब कोड़ों की बरसात हो जाए। 

समाचार चैनल न्यूज़ नेशन के कंसल्टिंग एडिटर और वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया ने अपने ट्वीट में लिखा, आतंक, जिहाद का कैसा रूप है ये कि मुस्लिम बहुल देश से मुस्लिम भाग रहे हैं। भारत में डर की अफ़वाह फैलाने वाले कहाँ गड़ गए? शर्म करो और देखो अपने बिल से क्या हो रहा है ! अब भी मौक़ा है गर्व से कहो ‘हम भारतीय हैं’।

एक अन्य ट्वीट में मानवाधिकार को आड़े हाथों लेते हुए पत्रकार दीपक चौरसिया ने कहा, मानवाधिकार के नाम पर छोटी-छोटी बातों पर छाती पीटने वाला यूएन, वामपंथी ये सब मिट्टी में गड़ गए क्या?? अफ़ग़ानिस्तान में तालिबानी आतंकियों द्वारा जो हो रहा है वो मानवता के मूल्यों का पुनर्स्थापन है क्या?? दोगलई की हद है मतलब।

काबुल हवाई अड्डे पर भारी भीड़ जमा होने और लोगों के जबरदस्‍ती विमान में चढ़ने की कोशिश के कारण अमेरिकी सेना ने लोगों को तितर-बितर करने के लिए हवा में गोलियां चलायी। इस भगदड में कुछ लोगों के मरने की खबर है। एक वीडियो में अन्‍य घटना में विमान के उड़ान भरते समय तीन लोगों को गिरते दिखाया गया है। अमरीका ने देश छोड़ने वाले लोगों की सहायता के लिए छह हजार सैनिक भेजे हैं। अमरीका और अन्‍य देश अपने कर्मियों और सहयोगियों को वहां से निकालने के तेजी से प्रयास कर रहे हैं।

अफगानिस्तान की वर्तमान स्थिति पर राष्ट्र निर्माण पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ आनंद कुमार का  मोदी जी से प्रश्न आपने ऐसा क्यों किया ?

मोदी जी! आपने ऐसा क्यों किया ?

अफगानिस्तान से जो समाचार मिल रहे हैं वे बड़े ही कष्टदायक एवं भयावह हैं। खूंखार भेडि़यों की तरह तालिबानी आतंकी खुलेआम छोटी बच्चियों एवं युवतियों का बलात् अपहरण कर अपनी हवस का शिकार बना रहे हैं। जहां भी कहीं वे कब्जा कर रहे हैं] सबसे पहले शरिया का नाम लेकर यही काम कर रहे हैं। आम जनता का कत्लेआम हो रहा है। लूटपाट हो रही है। न प्राण सुरक्षित हैं] न धन सुरक्षित है] और ना ही इज्जत सुरक्षित है। हमने इतिहास में पढ़ा था कि किस प्रकार मुस्लिम आक्रमणकारी भारत में हिंदू महिलाओं पर अत्याचार करते थे। जब कभी इस बात की चर्चा होती थी तो सारे वामपंथी व छदम् धर्मनिरपेक्षतावादी तथाकथित विद्वान] इतिहासकार टेढ़ा मुंह बनाकर मुस्लिम विरोधी या सांप्रदायिक होने का आरोप लगा देते थे तथा अनेक तरह की झूठी कहानियां गढ़कर उन आक्रमणकारियों को बहुत अच्छा दिखाने की कोशिश की जाती थी।

विडंबना देखिए] यह सब कुछ आधुनिक युग में हो रहा है और कोई कुछ बोल नहीं रहा। सारे मुस्लिम देश चुप हैं] सारे मुस्लिम नेता चुप हैं] सारी दुनियां के मौलाना-मौलवी चुप हैं। उनके विरूद्ध किसी ने कोई फतवा जारी नहीं किया। क्योंकि जो भी कुछ हो रहा है] शायद शरिया के अनुसार हो रहा है। भारत में ओवेसी चुप है] खान मार्केट चुप है] बालीवुड भी चुप है] रवीश और बरखा दत्त भी चुप है] ममता भी चुप है] राहुल भी चुप है। किसी को कहीं असहनशीलता] असुरक्षा या डर दिखाई नहीं दे रहा। यदि इस्लाम को ही मानने वाले लोग अफगानिस्तान में मारे जा रहे हैं] उन्हें लूटा जा रहा है] मार-काट की जा रही है तो इससे इस्लाम खतरे में नहीं आता। पर हां] हिंदुस्तान में तो एक नारे से सबकी खटिया खड़ी हो जाती है।

पर आश्चर्य मुझे अमेरिकी राष्ट्रªपति वाईडेन तथा उनके प्रशासन पर भी हो रहा है कि पिछले 20 वर्षों में अफगानी समाज में शांति] सद्भाव] शिक्षा तथा विकास का वातावरण बनाने के लिए तथा वहां की सुरक्षा सेनाओं को विकसित करने में अमेरिका ने जो योगदान दिया] उसे अपने मूर्खतापूर्ण निर्णय से बीस दिनों में ही तहस-नहस हो जाने दिया और उस नए उभरते समाज को तालिबानियों के हाथों बर्बाद होने के लिए छोड़ दिया गया।

सबसे अधिक आश्चर्य एवं दुःख की अनुभूति मुझे अपने देश के प्रधानमंत्री मोदी जी से हो रही है कि वे अपने आपको अफगानिस्तान के राष्ट्रªपति व वहां की सरकार को मित्र के रूप में मानते थे। साथ ही वहां विकास कार्य में कई बिलियन रूपए खर्च किए गए। पर जब उनकी मित्र सरकार संकट में आई तो वे केवल हालात पर नजर लगाए बैठे रहे और तालिबान को रोकने का उन्होंने कोई प्रयास नहीं किया। वे सौभाग्य से संयुक्त राष्ट्रª की सुरक्षा सभा के अध्यक्ष भी थे। यदि वे चाहते तो कम से कम अफगानिस्तान में शांति सेना भेजने की व्यवस्था कर सकते थे] पर वह भी उन्होंने नहीं किया। यदि भारत की ओर से एयरफोर्स का ही सहयोग अफगानिस्तान को मिल जाता तो वहां उनके मित्र अशरफ गनी की सरकार बच सकती थी। जिस प्रकार की विचारधारा को लेकर तालिबानी आतंकी काम कर रहे हैं] उसे रोकने के लिए वैसे तो सभी सभ्य सरकारों को कदम उठाने चाहिए थे किंतु मोदी जी के लिए तो यह एक ऐतिहासिक अवसर था] आतंकवादियों के विरूद्ध निर्णयात्मक लड़ाई लड़ने का तथा भारत के भविष्य को सुरक्षित रखने का। यदि पाकिस्तान-चीन और तालिबान के विरोध के बावजूद भारत अशरफ गनी की सरकार को बचा लेता तो आने वाले समय में अब जो षड्यंत्र या आतंकवादी खेल तालिबान द्वारा भारत में खेला जाएगा उससे देश बच सकता था।

अवलोकन करें:- 

पूर्व रॉ अधिकारी यादव ने हामिद अंसारी को किया बेनकाब

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
पूर्व रॉ अधिकारी यादव ने हामिद अंसारी को किया बेनकाब
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर रॉ के एक पूर्व अधि

अमेरिका के लिए हो सकता है अफगानिस्तान की समस्या कोई ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं हो] क्योंकि दूरी होने के कारण तालिबानियों से उसे कोई सीधा खतरा नहीं है। पर भारत के लिए तो यह जीवन-मरण का प्रश्न है? अफगानिस्तान में जो भी कुछ होगा उसका सीधा असर भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर होगा। तालिबानियों की सरकार बनने के बाद उस देश में दुनिया भर के आतंकवादियों को वहां आश्रय मिलेगा] पैसा मिलेगा] हथियार भी मिलेंगे और उनका उपयोग भारत के विरूद्ध करने के लिए चीन और पाकिस्तान अपनी चालें चलेंगे। बीजेपी के नेता पं. जवाहर लाल नेहरू को जब चीन ने तिब्बत पर आक्रमण किया था तो तिब्बत की सहायता न करने का दोषी मानते हैं पर यहां तो मोदी जी जवाहर लाल नेहरू से भी बड़ी गलती कर चुके हैं। एक तो अफगानिस्तान की सरकार भारत की मित्र सरकार थी उसे सुरक्षा देना आपका कर्तव्य था। दूसरा ऐतिहासिक रूप से अफगानिस्तान भारत का अविभाज्य अंग रहा है। उसकी सहायता करके अखंड भारत के निर्माण की दिशा में कुछ हम आगे बढ़ सकते थे। तीसरा तालिबान के विरूद्ध लड़ाई करके आतंकवाद के विरूद्ध भारत के दृढ़ निश्चय को दुनिया के सामने स्थापित किया जा सकता था। चौथा हिंदूकुश का बदला लेने के लिए भगवान ने आपको एक मौका तालिबान कुश करने के लिए दिया था] वह आपने गंवा दिया। पांचवा तालिबानियों को समाप्त करके अफगानिस्तान की जनता को वर्तमान कष्टों से और भारत की जनता को आगे होने वाले कष्टों से बचाया जा सकता था। छठा यदि आप कुछ करते तो निश्चित रूप से दुनिया को विश्वास होता कि भारत वास्तव में सुपर पावर है। पर मोदी जी आपने तो कुछ नहीं किया। मुझे समझ नहीं आता मोदी जी जैसे राष्ट्रªवादी नेता से ऐसी गलती कैसे हुई। स्वतः ही मन प्रश्न उठता है- मोदी जी आपने ऐसा क्यों किया?

शाहीन बाग़ प्रदर्शनकारियों का दोहरा मापदंड : रवीश कुमार के साथ क्यों नहीं हुई बदसलूकी?

दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर विरोध कर रहे ‘प्रदर्शनकारियों’ ने शुक्रवार (जनवरी 24, 2019) को न्यूज नेशन के वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया के साथ बदसलूकी की। उनके साथ धक्का-मुक्की की। इसी भीड़ को अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते भी सुना गया। 
ऐसा ही दुर्व्यवहार रिपब्लिक भारत के पत्रकारों के साथ हो चुका है, जो प्रमाणित करता है कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध मात्र एक बहाना है, असली उद्देश्य देश को साम्प्रदायिकता की आग में झोंक उस पर अपनी तिजोरियां भर एवं मालपुए खाने का है। तुष्टिकरण के पुजारी और वोटबैंक के भूखे नेताओं और पार्टियों ने आग तो लगा दी, लेकिन इसे बुझाना भी इन्हें ही भारी पड़ने वाला है।  
15 दिसंबर 2019 से शाहीन बाग में विरोध प्र्दर्शन चल रहा है और प्रदर्शन कर रहे गुंडों द्वारा इससे पहले भी कई पत्रकारों के साथ बदसलूकी की गई है।
मगर जब एनडीटीवी के जाने-माने और ‘निष्पक्ष’ पत्रकार रवीश कुमार वहाँ पर जाते हैं तो वहाँ की स्थिति कुछ और ही होती है। वो वहाँ पर जाते हैं और स्टेज पर जाकर आराम से भाषण देते हैं। वो भाषण देते हुए कहते हैं, “मैं भी देखना चाहता था कि कितनी देर तक और कितने दिनों तक शाहीन बाग की औरतें अपने प्रदर्शन में, अपने धरने में आती हैं। एक दिन नारा लगाने से शरीर थक जाता है। जब आप 22 वें दिन भी प्रदर्शन करने के लिए आती हैं तो इसका मतलब है कि इसका इरादा कुछ और है, जिसे लोग समझ नहीं पा रहे हैं।”

हैरानी की बात है कि जब वहाँ पर दीपक चौरसिया पहुँचे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों के दर्द को समझने की कोशिश की तो उनके साथ बहुत ही बुरा बर्ताव किया गया। वो प्रदर्शनकारियों से CAA और NRC के बारे में जानना चाहते थे और ये भी जानना चाहते थे कि उनका मुद्दा क्या है? वो विरोध प्रदर्शन क्यों कर रही हैं? मगर इसी बीच उनके साथ बदतमीजी की गई और साथ ही न्यूज नेशन के कैमरामैन का कैमरा तोड़ दिया।

दीपक चौरसिया ने वीडियो के जरिए बताया कि शाहीन बाग में प्रदर्शन के नाम पर कुछ असामाजिक तत्व हिंसा फैला रहे हैं। उन्होंने इस बाबत ट्वीट करते हुए लिखा,

NDTV की एक्जीक्यूटिव एडिटर निधि राजदान ने भी दीपक चौरसिया के साथ हुए वाकये को दुखद बताते हुए ‘सहानुभूति’ जताई थी लेकिन साथ में प्रदर्शकारियों को सच्चा बता कर अपने लिखे ‘सहानुभूति’ पर खुद ही प्रश्नचिह्न भी लगा दिया। अब रवीश कुमार के वहाँ पहुँचने वाले वीडियो पर निशाना साधते हुए एक यूजर ने निधि राजदान से पूछा है कि मैम शाहीन बाग के सच्चे प्रदर्शनकारियों ने रवीश कुमार के ऊपर हमला क्यों नहीं किया?