अफगानिस्तान में राजधानी काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद हताश लोग देश छोडकर जाने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए यहां के हवाई अड्डे पर दहशत का माहौल है। अफगानिस्तान में हो रहे पलायन को लेकर वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया ने कहा, भारत में डर की अफवाह फैलाने वाले ये दृश्य अवश्य देखें, आतंक, जिहाद का कैसा रूप है ये कि मुस्लिम बहुल देश से मुस्लिम भाग रहे हैं।
कुछ सूत्रों के अनुसार तालिबान से पुरुष वर्ग से अधिक डर का माहौल महिलाओं में है, क्योकि तालिबान के राज में उनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा, वह मात्र एक भोग की वस्तु बनकर रह जाएँगी। जरा सी भूल होने पर उन पर कब कोड़ों की बरसात हो जाए।
समाचार चैनल न्यूज़ नेशन के कंसल्टिंग एडिटर और वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया ने अपने ट्वीट में लिखा, आतंक, जिहाद का कैसा रूप है ये कि मुस्लिम बहुल देश से मुस्लिम भाग रहे हैं। भारत में डर की अफ़वाह फैलाने वाले कहाँ गड़ गए? शर्म करो और देखो अपने बिल से क्या हो रहा है ! अब भी मौक़ा है गर्व से कहो ‘हम भारतीय हैं’।
आतंक, जिहाद का कैसा रूप है ये कि मुस्लिम बहुल देश से मुस्लिम भाग रहे हैं। भारत में डर की अफ़वाह फैलाने वाले कहाँ गड़ गए? शर्म करो और देखो अपने बिल से क्या हो रहा है ! अब भी मौक़ा है गर्व से कहो ‘हम भारतीय हैं’। #afghanistanunderattack #Taliban
— Deepak Chaurasia (@DChaurasia2312) August 16, 2021
— Jig (@jiga2129) August 16, 2021
दीपक सर अब अफगान महिलाओं की इज़्ज़त लूट रही है अब इस्लाम खतरे में नहीं ,लेकिन भारत मे केवल बोलने से ही इस्लाम खतरे में आ जाता है #AfganistanBurning
— Rohtash रोहताश (@RohtashMandan25) August 16, 2021
Exactly pic.twitter.com/t0MI6jw8JW
— Dhruv Patel (@dhruvpatel1025) August 16, 2021
ये भाग नही रहे है ये दुसरे देश में अपनी जड़ जमा रहे है
— Mohit🇮🇳 (@mohitg55251) August 16, 2021
एक अन्य ट्वीट में मानवाधिकार को आड़े हाथों लेते हुए पत्रकार दीपक चौरसिया ने कहा, मानवाधिकार के नाम पर छोटी-छोटी बातों पर छाती पीटने वाला यूएन, वामपंथी ये सब मिट्टी में गड़ गए क्या?? अफ़ग़ानिस्तान में तालिबानी आतंकियों द्वारा जो हो रहा है वो मानवता के मूल्यों का पुनर्स्थापन है क्या?? दोगलई की हद है मतलब।
काबुल हवाई अड्डे पर भारी भीड़ जमा होने और लोगों के जबरदस्ती विमान में चढ़ने की कोशिश के कारण अमेरिकी सेना ने लोगों को तितर-बितर करने के लिए हवा में गोलियां चलायी। इस भगदड में कुछ लोगों के मरने की खबर है। एक वीडियो में अन्य घटना में विमान के उड़ान भरते समय तीन लोगों को गिरते दिखाया गया है। अमरीका ने देश छोड़ने वाले लोगों की सहायता के लिए छह हजार सैनिक भेजे हैं। अमरीका और अन्य देश अपने कर्मियों और सहयोगियों को वहां से निकालने के तेजी से प्रयास कर रहे हैं।
अफगानिस्तान की वर्तमान स्थिति पर राष्ट्र निर्माण पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ आनंद कुमार का मोदी जी से प्रश्न आपने ऐसा क्यों किया ?
मोदी जी! आपने ऐसा क्यों किया ?
अफगानिस्तान से जो समाचार मिल रहे हैं वे बड़े ही कष्टदायक एवं भयावह हैं। खूंखार भेडि़यों की तरह तालिबानी आतंकी खुलेआम छोटी बच्चियों एवं युवतियों का बलात् अपहरण कर अपनी हवस का शिकार बना रहे हैं। जहां भी कहीं वे कब्जा कर रहे हैं] सबसे पहले शरिया का नाम लेकर यही काम कर रहे हैं। आम जनता का कत्लेआम हो रहा है। लूटपाट हो रही है। न प्राण सुरक्षित हैं] न धन सुरक्षित है] और ना ही इज्जत सुरक्षित है। हमने इतिहास में पढ़ा था कि किस प्रकार मुस्लिम आक्रमणकारी भारत में हिंदू महिलाओं पर अत्याचार करते थे। जब कभी इस बात की चर्चा होती थी तो सारे वामपंथी व छदम् धर्मनिरपेक्षतावादी तथाकथित विद्वान] इतिहासकार टेढ़ा मुंह बनाकर मुस्लिम विरोधी या सांप्रदायिक होने का आरोप लगा देते थे तथा अनेक तरह की झूठी कहानियां गढ़कर उन आक्रमणकारियों को बहुत अच्छा दिखाने की कोशिश की जाती थी।
विडंबना देखिए] यह सब कुछ आधुनिक युग में हो रहा है और कोई कुछ बोल नहीं रहा। सारे मुस्लिम देश चुप हैं] सारे मुस्लिम नेता चुप हैं] सारी दुनियां के मौलाना-मौलवी चुप हैं। उनके विरूद्ध किसी ने कोई फतवा जारी नहीं किया। क्योंकि जो भी कुछ हो रहा है] शायद शरिया के अनुसार हो रहा है। भारत में ओवेसी चुप है] खान मार्केट चुप है] बालीवुड भी चुप है] रवीश और बरखा दत्त भी चुप है] ममता भी चुप है] राहुल भी चुप है। किसी को कहीं असहनशीलता] असुरक्षा या डर दिखाई नहीं दे रहा। यदि इस्लाम को ही मानने वाले लोग अफगानिस्तान में मारे जा रहे हैं] उन्हें लूटा जा रहा है] मार-काट की जा रही है तो इससे इस्लाम खतरे में नहीं आता। पर हां] हिंदुस्तान में तो एक नारे से सबकी खटिया खड़ी हो जाती है।
पर आश्चर्य मुझे अमेरिकी राष्ट्रªपति वाईडेन तथा उनके प्रशासन पर भी हो रहा है कि पिछले 20 वर्षों में अफगानी समाज में शांति] सद्भाव] शिक्षा तथा विकास का वातावरण बनाने के लिए तथा वहां की सुरक्षा सेनाओं को विकसित करने में अमेरिका ने जो योगदान दिया] उसे अपने मूर्खतापूर्ण निर्णय से बीस दिनों में ही तहस-नहस हो जाने दिया और उस नए उभरते समाज को तालिबानियों के हाथों बर्बाद होने के लिए छोड़ दिया गया।
सबसे अधिक आश्चर्य एवं दुःख की अनुभूति मुझे अपने देश के प्रधानमंत्री मोदी जी से हो रही है कि वे अपने आपको अफगानिस्तान के राष्ट्रªपति व वहां की सरकार को मित्र के रूप में मानते थे। साथ ही वहां विकास कार्य में कई बिलियन रूपए खर्च किए गए। पर जब उनकी मित्र सरकार संकट में आई तो वे केवल हालात पर नजर लगाए बैठे रहे और तालिबान को रोकने का उन्होंने कोई प्रयास नहीं किया। वे सौभाग्य से संयुक्त राष्ट्रª की सुरक्षा सभा के अध्यक्ष भी थे। यदि वे चाहते तो कम से कम अफगानिस्तान में शांति सेना भेजने की व्यवस्था कर सकते थे] पर वह भी उन्होंने नहीं किया। यदि भारत की ओर से एयरफोर्स का ही सहयोग अफगानिस्तान को मिल जाता तो वहां उनके मित्र अशरफ गनी की सरकार बच सकती थी। जिस प्रकार की विचारधारा को लेकर तालिबानी आतंकी काम कर रहे हैं] उसे रोकने के लिए वैसे तो सभी सभ्य सरकारों को कदम उठाने चाहिए थे किंतु मोदी जी के लिए तो यह एक ऐतिहासिक अवसर था] आतंकवादियों के विरूद्ध निर्णयात्मक लड़ाई लड़ने का तथा भारत के भविष्य को सुरक्षित रखने का। यदि पाकिस्तान-चीन और तालिबान के विरोध के बावजूद भारत अशरफ गनी की सरकार को बचा लेता तो आने वाले समय में अब जो षड्यंत्र या आतंकवादी खेल तालिबान द्वारा भारत में खेला जाएगा उससे देश बच सकता था।
अवलोकन करें:-
अमेरिका के लिए हो सकता है अफगानिस्तान की समस्या कोई ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं हो] क्योंकि दूरी होने के कारण तालिबानियों से उसे कोई सीधा खतरा नहीं है। पर भारत के लिए तो यह जीवन-मरण का प्रश्न है? अफगानिस्तान में जो भी कुछ होगा उसका सीधा असर भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर होगा। तालिबानियों की सरकार बनने के बाद उस देश में दुनिया भर के आतंकवादियों को वहां आश्रय मिलेगा] पैसा मिलेगा] हथियार भी मिलेंगे और उनका उपयोग भारत के विरूद्ध करने के लिए चीन और पाकिस्तान अपनी चालें चलेंगे। बीजेपी के नेता पं. जवाहर लाल नेहरू को जब चीन ने तिब्बत पर आक्रमण किया था तो तिब्बत की सहायता न करने का दोषी मानते हैं पर यहां तो मोदी जी जवाहर लाल नेहरू से भी बड़ी गलती कर चुके हैं। एक तो अफगानिस्तान की सरकार भारत की मित्र सरकार थी उसे सुरक्षा देना आपका कर्तव्य था। दूसरा ऐतिहासिक रूप से अफगानिस्तान भारत का अविभाज्य अंग रहा है। उसकी सहायता करके अखंड भारत के निर्माण की दिशा में कुछ हम आगे बढ़ सकते थे। तीसरा तालिबान के विरूद्ध लड़ाई करके आतंकवाद के विरूद्ध भारत के दृढ़ निश्चय को दुनिया के सामने स्थापित किया जा सकता था। चौथा हिंदूकुश का बदला लेने के लिए भगवान ने आपको एक मौका तालिबान कुश करने के लिए दिया था] वह आपने गंवा दिया। पांचवा तालिबानियों को समाप्त करके अफगानिस्तान की जनता को वर्तमान कष्टों से और भारत की जनता को आगे होने वाले कष्टों से बचाया जा सकता था। छठा यदि आप कुछ करते तो निश्चित रूप से दुनिया को विश्वास होता कि भारत वास्तव में सुपर पावर है। पर मोदी जी आपने तो कुछ नहीं किया। मुझे समझ नहीं आता मोदी जी जैसे राष्ट्रªवादी नेता से ऐसी गलती कैसे हुई। स्वतः ही मन प्रश्न उठता है- मोदी जी आपने ऐसा क्यों किया?
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