Showing posts with label stone pelting. Show all posts
Showing posts with label stone pelting. Show all posts

गुजरात : इस्लामी कट्टरपंथियों की धमकी : ‘ये हमारा इलाका है, गरबा करोगे तो पत्थर मारेंगे’: नवरात्रि की तैयारी कर रहे थे जनजातीय समाज के लोग

             भरूच जिले में जनजातीय समाज को गरबा का आयोजन नहीं करने की धमकी ( साभार: कनेक्ट गुजरात )
गुजरात के भरूच जिले के एक गाँव में जनजातीय समाज के लोगों को नवरात्रि में गरबा करने को लेकर धमकी देने का मामला सामने आया है। कथित तौर पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने इसे अपना इलाका बताते हुए गरबा आयोजन करने पर पत्थरबाजी की बात कही है।

मामला आमोद तालुका के इखर गाँव का है। भरूच जिले का यह इलाका मुस्लिम आबादी की अधिकता वाला है। रिपोर्टों के मुताबिक, इखार गाँव के जनजातीय समाज के लोगों ने इस संबंध में कलेक्टर को एक आवेदन दिया है। इसमें कहा गया है कि गाँव के मुस्लिम नेता ने नवरात्रि नहीं मनाने की धमकी दी है।

जनजातीय समाज के नेताओं और सामाजिक संगठनों ने इसे लेकर प्रशासन से न्याय की माँग की है। साथ ही बताया है कि उनके समुदाय के युवकों को गाली देते हुए जातिसूचक शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया।

गरबा आयोजन पर मंडप उखाड़ने और पथराव की धमकी

जमीनी हकीकत पता करने के लिए ऑपइंडिया ने इखार गाँव में हर साल नवरात्रि का आयोजन करने वाले शैलेश वसावा से बात की। शैलेश ने बताया, “हर साल की तरह इस साल भी हम नवरात्रि आयोजन के लिए अपने गाँव की खुली जगह की सफाई कर रहे थे। मेरे साथ गाँव के कुछ अन्य युवक भी थे। जब हम सफाई कर रहे थे, तभी पास में रहने वाले मोहसिन अली खान पठान और अली हसन पठान आकर हमें माँ-बहन की गालियाँ देने लगे।”
वासवा ने बताया कि उनके गाँव में ज्यादातर आबादी मुसलमानों की है। मुस्लिम बहुल इस गाँव में जनजातीय समाज के हिंदू भी रहते हैं। उन्होंने कहा, “वे आए और हमारे साथ दुर्व्यवहार करने लगे। हमने उनसे कहा हम एक साथ गाँव में रहते हैं तो आप ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं? यह सुनकर मुस्लिम नेता और भड़क गए और बोले- जिसे बुलाना है बुलाओ। यह हमारा इलाका है। हम तुम लोगों को यहाँ नवरात्रि नहीं मनाने देंगे।”
शैलेश वासवा के मुताबिक मुस्लिमों ने उन्हें बुरी तरह धमकाया। धमकी देते हुए कहा, “अगर तुमने गरबा किया तो हम मंडप उखाड़ देंगे और पथराव करेंगे।” वासवा के मुताबिक, गाँव में हिंदुओं की आबादी बहुत कम है और उनके पास कार्यक्रम आयोजित करने के लिए कोई अन्य जगह भी नहीं है।

हिंदू महिलाओं से अभद्र व्यवहार का भी आरोप

ऑपइंडिया को नवरात्रि के आयोजक शैलेश वसावा ने ये बताया, “यह पहली बार नहीं है कि गाँव के मुस्लिमों ने हिंदूओं के साथ तरह का व्यवहार किया है। इससे पहले भी ये लोग ऐसे कई काम कर चुके हैं।” उन्होंने बताया, “एक बार उन्होंने उस जगह को तोड़ दिया जहाँ माता रानी का गरबा और पवित्र दीपक रखा गया था, लेकिन हमने शिकायत नहीं की क्योंकि हमें उनके बीच रहना था। हम अपने त्योहारों या पवित्र अवसरों पर उत्सव मनाने के लिए उसी जगह का इस्तेमाल करते रहे हैं और हर बार वो मुश्किलें खड़ी करते हैं। इस बार भी उन्होंने नवरात्रि मंडप न बनाने और गरबा का आयोजन न करने की धमकी दी है।”
शैलेश वासवा का यह भी कहना है कि हिंदू महिलाओं के साथ स्थानीय मुस्लिम कई बार अभद्र व्यवहार कर चुके हैं। उनकी संख्या अधिक होने के कारण कोई कुछ नहीं कह पाता है। उन्होंने बताया, “उनकी धमकियों से हम चिंतित हैं। वे भविष्य में हमें नुकसान पहुँचा सकते हैं। प्रशासन से हमारी माँग है कि हमें सुरक्षा और न्याय दी जाए।”
इस घटना के सामने आने के बाद भरूच की वीर बिरसा ब्रिगेड और जनजातीय समाज के कई संगठन एकजुट हो गए हैं। इन संगठनों ने जिला कलेक्टर कार्यालय में आवेदन देकर धमकी देने वाले मुस्लिम नेताओं पर कार्रवाई की माँग की है।

 

दिल्ली के मुहर्रम जुलूस में पुलिस पर क्यों हुआ पथराव? 10 पुलिस वाले घायल… पश्चिम बंगाल में मुहर्रम पर दुर्गा मंदिर का रास्ता ही बंद

मुहर्रम से पहले बैरिकेड लगा ब्लॉक किया गया दुर्गा मंदिर, दिल्ली में तो पुलिस पर ही पथराव
पश्चिम बंगाल में मुहर्रम से एक दिन पहले शुक्रवार (28 जुलाई 2023) को बैरिकेड लगाकर एक दुर्गा मंदिर का रास्ता बंद करने का मामला सामने आया। यह मंदिर मालदा जिले के कालियाचक में स्थित है। बंगाल से दूर दिल्ली के नांगलोई में मुहर्रम पर ताजिया निकलने के दौरान कट्टरपंथी मुस्लिमों ने पथराव किया। इसके कारण पुलिस की गाड़ियों को भी नुकसान पहुँचा।

दिल्ली पुलिस ने शांति बनाए रखने के लिए लाठीचार्ज किया। दिल्ली पुलिस के अधिकारी हरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि नांगलोई में ताजिये के जुलूस में 8-10 हजार लोग मौजूद थे। इनमें से 1-2 आयोजनकर्ता ताजिये का जो रूट पहले से तय था, उससे अलग जाना चाह रहे थे। पुलिस ने जब मना किया तो जुलूस में शामिल लोगों ने पुलिस पर पथराव किया। इसमें 10 पुलिस वाले घायल हुए हैं।

नमाज में व्यवधान के नाम पर आतंक, शादी-ब्याह में DJ नहीं बजने देने के नाम पर बवाल काटने वाली कट्टरपंथी मुस्लिम सोच पर अब लोग सवाल उठा रहे। लोग पूछ रहे कि 29 जुलाई 2023 को मुहर्रम के दिन न तो कोई हिंदू त्योहार था, न ही काँवड़ियों की बात थी… फिर सड़कों पर आतंक किसने मचाया, क्यों मचाया?

दिल्ली पुलिस ने आतंक मचा रही कट्टर इस्लामी भीड़ पर जम कर लाठियाँ बरसाई हैं। सवाल यह उठता है कि पत्थरबाजी वाली मानसिकता से ग्रसित भीड़ को जुलूस का परमिशन दिया ही क्यों जाता है? अगर दिया जाता है तो देश के ही दूसरे राज्य बंगाल में हिंदू मंदिरों की बैरिकेडिंग क्यों कर दी जाती है?

हिंदू मंदिर की बैरिकेडिंग वाली घटना को लेकर भाजपा ममता बनर्जी सरकार पर हमलावर है। इसके बाद हालाँकि बैरिकेड हटा दिए गए। पश्चिम बंगाल बीजेपी के कार्यकर्ता अमित ठाकुर ने ट्वीट कर लिखा, “यह चौंकाने वाली तस्वीर पश्चिम बंगाल के मालदा के कालियाचक की है। जहाँ मुहर्रम के जुलूस के लिए दुर्गा मंदिर को ब्लॉक कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की यही हालत है। I.N.D.I.A. के सेक्युलर लोग इस बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं?”

इस ट्वीट के साथ उन्होंने ‘कालियाचक थाना शरबजनिन दुर्गा मंदिर’ नामक मंदिर की तस्वीर भी शेयर की। तस्वीर में देखा जा सकता है कि बाँस की बल्लियाँ लगाकर मंदिर को पूरी तरह से ब्लॉक करने की कोशिश की गई थी।

इस मामले पर भाजपा नेता अमित मालवीय ने ममता बनर्जी के इशारे पर पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा मंदिर में बेरिकेडिंग करने का आरोप लगाया। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ”पश्चिम बंगाल पुलिस ने मुहर्रम की पूर्व संध्या पर कालियाचक में दुर्गा मंदिर को ब्लॉक करते हुए बैरिकेड लगाए। यह ममता बनर्जी की सेक्युलरिज्म का ब्रांड है। यह हिंदुओं को नीचा दिखाने और बदनाम करने के लिए हो रहा है। ममता बनर्जी सरकार ने हिंदुओं को दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया है।”

मालवीय ने यह भी कहा, “यह कानून व्यवस्था सँभालने में ममता बनर्जी की असफलता को दिखाता है। सीएम का ऐसा पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण सामाजिक एकजुटता को खत्म करता है और खाइयों को बढ़ाता है। उनकी राजनीति इसके बल पर ही फलती-फूलती है।”

पश्चिम बंगाल बीजेपी के विधायक शुभेंदु अधिकारी ने TMC सरकार की आलोचना करते हुए लिखा, “मैं शर्त लगाता हूँ कि उस इलाके की कोई भी मुहर्रम आयोजन समिति इस तरह के कदम की माँग नहीं कर सकती थी, जिससे सनातनियों को ठेस पहुँचे। सीधे तौर पर यह पश्चिम बंगाल पुलिस की ‘अतिसक्रियता’ है। ममता बनर्जी के शब्दकोश में ‘सेक्युलरिज्म’ ‘वोट बैंक की राजनीति’ का दूसरा नाम है। यही कारण है कि सरकार धार्मिक त्योहारों के दौरान ‘अतिसक्रियता की समस्या’ से ग्रस्त है। ममता बनर्जी सरकार में आम तौर पर कुछ ऐसा होता रहा है, जिससे सनातनियों की भावनाएँ आहत होती हैं।”

राज्य के मुख्य सचिव के तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए, शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “ममता बनर्जी अपनी ओछी राजनीति के लिए जानबूझकर बैरिकेडिंग लगवा रही हैं और दोनों समुदायों के बीच दरार पैदा कर रही हैं। वह कलह पैदा करने और दोनों समुदायों के बीच सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश कर रही हैं।”

हालाँकि बाद में शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि दुर्गा मंदिर के बाहर से बैरिकेड्स हटा दिए गए हैं।

वहीं, कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का दावा है कि मुहर्रम के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए हिंदुओं ने ही मंदिर के बाहर बैरिकेड्स लगाए थे।

बहरहाल, यहाँ यह बताना जरूरी है कि ममता बनर्जी ने मुहर्रम जुलूस को रास्ता देने के लिए साल 2016 और 2017 में माँ दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन पर रोक लगा दी थी।


'10-15 मिनट में छत पर नहीं इकट्ठा किए जा सकते पत्थर, मामला गंभीर’: बंगाल में रामनवमी हिंसा पर हाईकोर्ट सख्त

   रामनवमी हिंसा की जाँच NIA से कराने को लेकर हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित (प्रतीकात्मक फोटो, साभार: TOI)
रामनवमी शोभायात्रा के दौरान पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा को लेकर कोलकाता हाईकोर्ट ने माना है कि 10-15 मिनट में पत्थरों को छत पर नहीं ले जाया जा सकता। इसलिए, हिंसा के लिए पहले से तैयारी की गई थी। इसके अलावा कोर्ट ने इस हिंसा की जाँच एनआईए से कराने को लेकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने कोलकाता हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इस याचिका में उन्होंने रामनवमी के दौरान बंगाल में हुई हिंसा की जाँच NIA से कराने की माँग की थी। इस मामले में, सोमवार (10 अप्रैल, 2023) को सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगनानम और न्यायाधीश हिरणमय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा है कि हिंसा के लिए पहले से प्लानिंग की गई थी। लेकिन इसे रोका नहीं जा सका। जाहिर है कि यह खुफिया तंत्र की विफलता के कारण हुआ।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात के संकेत दिए हैं कि बंगाल हिंसा की जाँच एनआईए को सौंपी जा सकती है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि कोर्ट ने कहा है कि यह मामला गंभीर लग रहा है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि हिंसा के लिए पहले से तैयारियाँ की गई थीं। इसलिए केंद्रीय जाँच एजेंसी इस मामले की बेहतर तरीके से जाँच कर सकती है।

कोर्ट ने यह भी कहा है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को पेलेट गन और आँसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। इसको देखकर ऐसा लगता है कि मामला गंभीर था। हिंसा में तलवारें, बोतलें, टूटे शीशे और तेजाब का इस्तेमाल किया गया और इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इससे पता चलता है कि हिंसा और बड़े पैमाने पर हुई।

कोर्ट ने यह भी कहा है, “रिपोर्टों से पता चलता है कि हिंसा के लिए पहले से तैयारी की गई थी। आरोप है कि छतों से पत्थर फेंके थे। जाहिर है कि पत्थर 10-15 मिनट में छत पर नहीं ले जाया जा सकता। यह खुफिया तंत्र की विफलता है। यहाँ समस्या दो समस्याएँ हैं। पहली यह है कि हिंसा दो समूहों के बीच हुई है। दूसरी समस्या यह है कि एक तीसरा समूह इस हिंसा का लाभ उठा सकता है। ऐसी स्थिति में इसकी जाँच केंद्रीय जाँच एजेंसी द्वारा की जानी चाहिए। यदि राज्य पुलिस इस मामले की जाँच करती है तो उसके लिए यह पता लगाना मुश्किल होगा कि इस हिंसा से किसको लाभ हो रहा।”

 जज ने यह भी कहा है, “बीते 4-5 महीनों ने हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 8 आदेश भेजे हैं। ये सभी मामले धार्मिक आयोजनों के दौरान हुई हिंसा से संबंधित हैं। क्या यह कुछ और नहीं दर्शाता है? मैं बीते 14 सालों से न्यायाधीश हूँ। लेकिन अपने पूरे करियर में ऐसा कभी नहीं देखा।”

आखिर मस्जिदों के पास ही क्यों बरसते पत्थर : 7 राज्य, 12 शहर… रामनवमी शोभयात्रा में शामिल हिंदुओं को बनाया निशाना

साल 2023 की रामनवमी में देश के अलग-अलग इलाकों में हिंसा हुई। इस हिंसा से खास तौर पर बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश प्रभावित हुए हैं। इन घटनाओं में कुछ लोगों की मौत भी हुई हैं और कहीं-कहीं पर तो पुलिस को भी निशाना बनाया गया है। अलग-अलग हिस्सों में पुलिस केस दर्ज कर आरोपितों की धर-पकड़ कर रही है। कुछ स्थानों पर पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई के भी आरोप लगे हैं।

इसी विषय पर आज(4 अप्रैल,2023) Zee News पर एंकर दीपक चौरासिया ने अपने शो Taal Dhok Ke में जब ओवैसी की पार्टी के प्रवक्ता कलीमुद्दीन से प्रश्न पूछने पर कहा कि यात्रा में आतंकवादियों के शामिल होने के कारण ऐसा होता है। जिसका दीपक ने घोर विरोध भी किया, लेकिन मस्जिद में पत्थर और पेट्रोल बम कहां से आते हैं, उसका जवाब नहीं दे पाए। 

नालंदा (बिहार)

बिहार के नालंदा जिले का बिहार शरीफ। 31 मार्च को रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई। जब यात्रा बिहारशरीफ के दीवानगंज इलाके की एक मस्जिद के पास पहुँची, तब इस पर पथराव कर दिया गया। आसपास के घरों और दुकानों में आगजनी और जमकर फायरिंग भी की गई। इस फायरिंग में चार लोगों को गोली लगी है। हमले में शोभायात्रा में शामिल छह युवक घायल हुए, जिनमें दो की हालत गंभीर है। यहाँ 4 अप्रैल 2023 तक स्कूल और इंटरनेट सेवा बंद कर दिए गए हैं।

रोहतास (बिहार)

बिहार के रोहतास जिले का सासाराम। 31 मार्च 2023 को यहाँ रामनवमी शोभा यात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा खत्म होने के बाद सहजलाल, बस्ती मोर, चौखंडी, आदमखानी और सोना पट्टी जैसे इलाकों में हिंसा भड़क गई। यहाँ पथराव के साथ लाठी-डंडे भी चले। हालात काबू करने के लिए दूसरे जिलों से फ़ोर्स मँगाई गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए धारा 144 लागू कर दी गई। जिले के मदरसों को 4 अप्रैल 2023 तक बंद रखने के आदेश हुए हैं।

संभाजी नगर (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र का संभाजी नगर। यहाँ 29-30 मार्च 2023 को किराड़पुरा के एक मंदिर के आगे हिंसा भड़क गई थी। हिंसा की शुरुआत 2 लोगों के कहासुनी से हुई थी। दंगाइयों ने पथराव किया और बम फेंके थे। पुलिस के वाहनों में भी आग लगा दी गई थी।
इस मामले में दर्ज FIR में शौकत, अरबा, रिज़वान, शेख मुनीरुद्दीन, अल्ताफ और हाशमी इतरवाले को नामजद करते हुए 400 से 500 अज्ञात की भीड़ पर FIR दर्ज हुई है। FIR में भीड़ द्वारा नारा-ए-तकबीर और अल्लाह-हु-अकबर के नारे लगाने का जिक्र है। पुलिस ने हिंसा में लगभग चार दर्जन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बाकियों की तलाश की जा रही है।

जलगाँव (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र के जलगाँव में साम्प्रदायिक हिंसा की 2 अलग-अलग घटनाएँ हुईं हैं। पहली घटना मंगलवार (28 मार्च 2023) को पालधी गाँव की है। यहाँ रामनवमी का जुलूस लेकर एक मस्जिद के आगे जुटी भीड़ ने बज रहे DJ पर आपत्ति जताई तो विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि हिंसक भीड़ ने जुलूस में शामिल लोगों पर पत्थरबाजी की जिसमें लगभग 4 लोग घायल हो गए।
पुलिस ने इस मामले में हिन्दू और मुस्लिम पक्ष की तहरीरों पर 2 अलग-अलग FIR दर्ज की है। एक केस में हिन्दू पक्ष के 9 लोगों को आरोपित किया गया है। वहीं दूसरी FIR में मुस्लिम पक्ष के 63 लोग नामजद हुए हैं। अब तक कुल 45 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।
जलगाँव की ही एक अन्य घटना शनिवार (1 अप्रैल 2023) की है। यहाँ के अतरवाल गाँव में किसी अज्ञात व्यक्ति ने गाँव में लगी एक मूर्ति को तोड़ दिया। इस बात से गाँव के 2 पक्ष आमने-सामने आ गए। कुछ ही देर में हालात तनावपूर्व हो गए और दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर हमला कर दिया। मामले में कुल 12 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।

मलाड (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के मलाड में भी रामनवमी की शोभायात्रा पर कट्टरपंथियों द्वारा हमला किया गया था। यहाँ रामनवमी की शोभायात्रा निकाल रहे हिंदुओं पर जामा मस्जिद और अली हजरत मस्जिद इलाके में पत्थरों और चप्पलों से हमला किया गया। हमले के दौरान दंगाइयों ने अल्लाह-हु-अकबर के नारे लगाए। पुलिस ने कुल 400 आरोपितों पर केस दर्ज करते हुए 21 हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया है।

हावड़ा (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल का हावड़ा के शिबपुर में भी रामनवमी के दिन 31 मार्च 2023 साम्प्रदायिक हिंसा हुई। इस दौरान कट्टरपंथियों की भीड़ ने सड़कों पर उतर कर पत्थरबाजी की थी। हिंसा रामनवमी का जुलूस खत्म होने के बाद भी जारी रही।
ममता बनर्जी ने इसका ठीकरा भाजपा के सिर फोड़ा था और हिन्दू संगठनों पर ही जुलूस मुस्लिम बहुल इलाकों से ले जाने का आरोप लगाया था। भाजपा नेताओं ने मामले की जाँच NIA से करवाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है। इस हिंसा में अब तक पुलिस ने 36 लोगों को गिरफ्तार किया है।

डालखोला (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल में उत्तर दिनाजपुर के इस्लामपुर शहर के दालखोला इलाके में 31 मार्च को रामनवमी के जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच झड़प हो गई। मुस्लिम बहुल इलाके में हुई इस झड़प में एक शख्स की मौत हो गई, जबकि 5-6 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। हालाँकि, बंगाल पुलिस युवक के मौत की वजह हार्ट अटैक बता रही है। बंगाल भाजपा का आरोप है कि इस मामले में पुलिस बेकसूर लोगों को गिरफ्तार करके उन पर अत्याचार कर रही है।

हुगली (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल के हुगली में भी 31 मार्च को रामनवमी पर हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान यहाँ के रिसड़ा क्षेत्र में एक भीड़ पर रामनवमी की शोभायात्रा पर हमले का आरोप है। रविवार (2 अप्रैल) को एक बार फिर से यहाँ हिंसा भड़क उठी थी। इस घटना के बाद हुगली के कई हिस्सों में इंटरनेट बंद कर के धारा 144 लागू कर दी गई थी। पुलिस ने अब तक कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कई अन्य लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ चल रही है।

साहिबगंज (झारखंड)

झारखंड का जिला साहिबगंज में शनिवार (1 अप्रैल 2023) की शाम मूर्ति विसर्जन के जुलूस पर कृष्णानगर में कुलीपाड़ा रेलवे लाइन के पास पथराव हुआ। पत्थरबाजी छतों से की गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दौरान भड़की हिंसा में 1 बाइक को आग लगा दी गई थी।
जुलूस में शामिल 6 श्रद्धालुओं के साथ पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। पुलिस इस मामले में जाँच कर रही है। वहीं 3 अप्रैल 2023 को एक बार फिर से साहिबगंज में हनुमान प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने पर हिन्दू संगठन विरोध प्रदर्शन करने लगे जिसके बाद पुलिस ने हिन्दू संगठनों पर ही लाठीचार्ज कर दिया।

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में भी रामनवमी की शोभायात्रा पर हमला हुआ था। यहाँ के जानकीपुरम विस्तार इलाके में जब रामनवमी का जुलूस शाही मस्जिद के सामने से गुजरा, तब उस पर छतों से पत्थर फेंके जाने लगे थे। इस पथराव में कुछ श्रद्धालुओं को चोटें आईं और शोभायात्रा में शामिल वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे। पुलिस कार्रवाई से नाराज हिन्दू संगठनों ने घटना के विरोध में थाने पर धरना दिया था। फिलहाल इस मामले में पुलिस द्वारा किसी की गिरफ्तारी की जानकारी नहीं दी गई है।

वडोदरा (गुजरात)

गुजरात के वडोदरा जिले में गुरुवार (30 मार्च 2023) को रामनवमी की शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी की गई थी। जुलूस के फतेहपुरा गराना पुलिस चौकी क्षेत्र में एक मस्जिद के सामने से गुजरने के बाद उस पर पत्थर बरसाए गए थे। पुलिस ने हालत को को फ़ौरन संभाला और हमलावरों को तितर-बितर किया था।
पुलिस ने इस मामले में SIT गठित करते हुए 500 उपद्रवियों पर केस दर्ज किया था। इस मामले में कुल 23 लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें 6 महिलाएँ भी शामिल हैं। पुलिस को इन सभी आरोपितों की 5 दिनों की कस्टडी रिमांड मिली है।

हासन (कर्नाटक)

कर्नाटक के हासन में गुरुवार (30 मार्च 2023) को रामनवमी के जुलूस पर कट्टरपंथियों ने हमला किया था। जब यह जुलूस चन्नारायणपटना इलाके की एक मस्जिद के सामने से गुजरा, तब उसके विरोध में भीड़ ने हंगामा किया। पत्थरबाजी के साथ हमलावरों ने चाकूबाजी भी की। इस चाकूबाजी में मुरली और हर्ष नाम के 2 लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

खरगोन : जिन घरों से पत्थर और पेट्रोल आए हैं, उन घरों को पत्थर का ढेर बनाएँगे : मध्य प्रदेश गृह मंत्री

रामनवमी पर हिंसा के बाद इलाके में पसरा सन्नाटा और तैनात पुलिसकर्मी (फोटो साभार: ANI)
रामनवमी के मौके पर निकली शोभायात्रा को देश में कई जगहों पर निशाना बनाया गया। गुजरात, झारखंड से लेकर पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश तक से हिंसा की घटनाएँ सामने आई। मध्य प्रदेश के खरगोन में रविवार (10 अप्रैल 2022) को रामनवमी जुलूस पर पथराव किया गया। 30 से ज्यादा दुकानों और मकानों में आग लगा दी गई और मंदिरों में भी तोड़फोड़ की 

मुस्लिम भीड़ को रामनवमी जुलूस में बज रहे डीजे से आपत्ति थी। हालाँकि दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक यह घटना अचानक नहीं घटी। यह पूर्व नियोजित हमला था। उपद्रवियों ने पहले से ही छतों पर पत्थर और पेट्रोल बम जमा कर रखे थे। एक बार नहीं, बल्कि दो-दो बार आगजनी की घटना को अंजाम दिया गया। शाम में हुए हमले के बाद शांति-व्यवस्था कायम रखने के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया। इसके बाद रात के लगभग 12 बजे एक बार फिर से हिंसा भड़की और कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया। कई घरों में लूटपाट की गई। इसके बाद इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

जानकारी के मुताबिक हिंसा में 10 पुलिसकर्मी और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। टीआई बनवारी मंडलोई, SP सिद्धार्थ चौधरी के अलावा 6 और पुलिसकर्मी के भी घायल होने की खबर है। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए अब तक 77 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है।

गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मामले पर ट्वीट करते हुए कहा, “खरगोन के गुनहगारों से सख्ती से निबटा जाएगा। वहाँ जिन घरों से पत्थर आए हैं, उन घरों को पत्थर का ढेर बनाएँगे। मध्य प्रदेश में कानून का राज है और सांप्रदायिक सौहार्द को किसी कीमत पर बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। वहाँ पर पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल मौजूद हैं। फिलहाल शांति है। दंगाइयों को लगातार चिन्हित किया जा रहा है। 77 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। कर्फ्यू अभी भी लगा हुआ है।”

वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “रामनवमी पूरे प्रदेश में अभूतपूर्व उत्साह के साथ मनाई गई। लेकिन खरगोन में दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई है। दंगाई छोड़े नहीं जाएँगे। कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। मध्यप्रदेश की धरती पर दंगाइयों के लिए कोई स्थान नहीं है। कार्रवाई का मतलब केवल जेल भेजना नहीं है। जिन्होंने पत्थर चलाए है, संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया है उनको दंडित तो किया ही जाएगा, साथ ही नुकसान का आकलन कर उसकी वसूली भी उनसे की जाएगी। हम किसी भी दंगाई को छोड़ेंगे नहीं।”

गौरतलब है कि खरगोन में हर साल रामनवमी के मौके पर तालाब क्षेत्र से शोभा यात्रा निकाले जाने की परंपरा रही है। इस साल भी बड़ी तैयारी के साथ दोपहर 3 बजे ये शुरू हुआ। मुख्य झाँकी को दांगी मोहल्ले में ही खड़ा कर रामनवमी की शोभा यात्रा रोकनी पड़ी। फायर फाइटर का कांच तोड़ दिया गया। बिजली ट्रांसफर्मरों को आग के हवाले किया गया। बताया जा रहा है कि 7 साल पहले खरगोन में हुए दंगे में भी इसी तरह से भारी संख्या में घरों की छतों पर पत्थर मिले थे।


करौली हिंसा : क्या जिन मस्जिद-घरों की छत पर मिले ईंट-पत्थर उन्हें सील किया जायेगा?

करौली हिंसा में छतों से फेंके गए पत्थर
(तस्वीर साभार: रिपब्लिक टीवी का वीडियो)
राजस्थान के करौली में हिंदू नव वर्ष के मौके पर निकलने वाली भगवा यात्रा पर जो पत्थरबाजी की गई उसे लेकर नई जानकारी सामने आई है। मालूम चला है कि जिस मुस्लिम बहुल इलाके में हिंदुओं पर पत्थर बरसाए गए वहाँ के मस्जिद पर, घरों पर पहले से भारी-भारी ईंट-पत्थर इकट्ठा किए गए थे। अब चर्चा यह हो रही है कि क्या जिन मस्जिद और घरों की छतों से जलूस पर पत्थराव हुआ, क्या उन्हें सील किया जायेगा? फिलहाल इस पूरी घटना के संबंध में 46 लोग पकड़े गए हैं। हालात देखते हुए 7 अप्रैल तक कर्फ्यू भी लगा दिया गया है।

रिपब्लिक भारत ने हिंसा के संबंध में खुलासा करते हुए उस मस्जिद उस जिम और उन घरों की छतों को दिखाया जहाँ से पत्थरबाजी को अंजाम दिया गया। विजुअल्स में साफ दिख रहा है कि कितनी भारी मात्रा में ईंट पत्थर इकट्ठा किए गए थे। भारी-भारी पट्टियाँ एक जगह इकट्ठा थीं जिन्हें बाद में भगवा रैली निकालने वाले हिंदुओं पर दो-दो लोगों ने मिल कर फेंका। पत्रकार अनुमान लगाते हैं कि ये पट्टी कम से 10 किलो की तो होंगी ही। रिपोर्ट में मस्जिद की छत भी जूम करके दिखाई गई है। इसके अलावा आस-पास घरों की जो छत हैं वहाँ भी पत्थर दिखाई पड़ रहे हैं।

रिपब्लिक भारत के पत्रकार ने बताया कि जिस जिम से पत्थरबाजी हुई उसे चलाने का काम कॉन्ग्रेस पार्षद मतलूब अहमद करते हैं। उनका नाम इस पूरी हिंसा की एफआईआर में भी हैं। लेकिन वह घटना के बाद से पुलिस की पकड़ में नहीं आए हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।

करौली में कर्फ्यू बढ़ाया गया

जिले के बिगड़े हालात देखते हुए जिला अधिकारी राजेंद्र सिंह शेखावत ने करौली में 7 अप्रैल तक कर्फ्यू लगा दिया है। पहले ये कर्फ्यू केवल 4 अप्रैल की मध्यरात्रि तक था, पर कल इसे बढ़ा दिया गया। मोबाइल इंटनेट सेवाएँ अब भी सुरक्षा लिहाज से बंद रखी गई हैं।
करौली में हिंदू नव वर्ष के जुलूस पर 2 अप्रैल 2022 (शनिवार) को हिंसा हुई थी। इसके बाद दुकानों में आगजनी की गई। इस पूरे घटनाक्रम में पुष्पेंद्र नाम का एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ। उनके शरीर पर चाकू से हमले के निशान हैं। उपद्रवियों को काबू करते हुए पुलिस के 4 जवान भी घायल हुए थे। कुल 43 लोगों के घायल होने की खबर मीडिया में आई थी। इसके बाद मामले में जाँच शुरू हुई और पीएफआई का एक पत्र सामने आया जिसने इस हिंसा के सुनियोजित होने की ओर इशारा किया। बाद में कॉन्ग्रेसी नेता मतबूल की भूमिका भी पूरी हिंसा में पाई गई। मीडिया  ने जब इस बाबत प्रदेश मुख्यमंत्री से सवाल किया तो उन्होंने इसका सारा ठीकरा पीएम मोदी पर फोड़ा और कहा कि वो सामने आएँ, जिम्मेदारी लें और घटना की निंदा करें।

जयपुर :जामा मस्जिद पर जमा भीड़ को समझाने गई पुलिस पर पथराव

जयपुर के सांगानेर में भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया है। पुलिस की गाड़ी पर भी पथराव किया गया है जिससे गाड़ी के शीशे टूट गए हैं। सांगानेर की जामा मस्जिद में कर्फ्यू के बाद भी इकट्ठी भीड़ ने पुलिस द्वारा समझाइश दिए जाने के बाद पुलिस कर्मियों पर पत्थरबाजी कर दी।

मीडिया खबर के अनुसार जयपुर के सांगानेर के जामा मस्जिद में लगातार भीड़ बनी हुई थी। कर्फ्यू के बाद भी मस्जिद में लोगों की आवाजाही रुक नहीं रही थी। इस पर सांगानेर पुलिस मस्जिद प्रशासन से बात करने पहुँची। इसी दौरान मस्जिद में उपस्थित भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। पुलिसकर्मियों पर हुए इस हमले में कई गाड़ियों को नुकसान पहुँचा है।

कुछ सिरफिरे कुम्भ में जमा हुए साधुओं पर प्रश्न कर रही है कि जमात में जमा जमातियों पर जो सख्ती की गयी, साधुओं पर क्यों नहीं की? जमात से कुम्भ नहान में जमा साधुओं की भीड़ से तुलना करना, वही बात है कि अपनी गलतियों को छुपाने के लिए दूसरों पर इल्जाम लगा दो। दूसरे, जब कुम्भ में कोरोना फैलने का समाचार आते ही, उस पर अंकुश लगा दिया गया, और अंतिम स्नान को को भी सांकेतिक कर दिया गया। तीसरे, जमातियों की तरह किसी साधु ने अपने-आपको कहीं छुपाया नहीं, आगे बढ़कर कोरोना टेस्ट करवाया, जबकि जमाती इधर-उधर मस्जिदों में छुप रहे थे, जिन्हे पुलिस ने छापेमारी कर बाहर निकाला। ये अंतर है समझदारी और कट्टरपंथी में। गलती स्वीकार करने की बजाए सामने वाले को ही कसूरवार बताना। कुम्भ स्थल को खाली करवाने किसी पुलिस के दम पर खाली नहीं करवाया गया था, जबकि मरकज को खाली करवाने NSA को आना पड़ा था। पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी हिन्दुओं ने अपने नव सम्वत को घर की चारदीवारी में ही मनाया, मंदिरों की तरफ नहीं भागे।  

राजस्थान में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच 22 अप्रैल से 21 मई तक राज्य में धारा 144 लागू की गई है। ऐसे में मस्जिद में भीड़ इकट्ठा करना गैर कानूनी था। इस पर कार्रवाई करने के लिए ही सांगानेर पुलिस जामा मस्जिद पहुँची थी। तोड़फोड़ करने वालों की पहचान की जा रही है। इसके साथ ही उन लोगों की भी तलाश की जा रही है जिन्होंने धारा 144 का उल्लंघन किया है।

राजस्थान में पिछले 24 घंटों में 14,000 से अधिक नए संक्रमित मरीज मिले। इनमें से राजधानी जयपुर में ही नए संक्रमितों की संख्या 3000 से अधिक है।

राजस्थान: छबड़ा में सांप्रदायिक हिंसा, दुकानों को फूँका; पुलिस-दमकल सब पर पत्थरबाजी

                                 राजस्थान के छबड़ा में सांप्रदायिक हिंसा (फोटो साभार, लोकल ट्विटर यूजर)
लगता है आज कोरोना और साम्प्रदायिकता में मुकाबला चल रहा है। अंतर केवल इतना ही है कि कोरोना समाचार तो खुलकर सामने आ रहे हैं, परन्तु दंगों की, 26 जनवरी को छोड़, किसी अन्य दंगे को हर कोई मीडिया अपनी TRP के चक्कर में दिखाने से डरते रहते हैं। 

राजस्थान के बारां जिले के छाबड़ा में सांप्रदायिक हिसा के बाद कर्फ्यू लगा दिया गया गया है। फसाद की शुरुआत छबड़ा उपखंड मुख्यालय के धरनावदा चैराहे पर शनिवार शाम 10 अप्रैल 2021 की शाम चाकूबाजी की घटना से हुई।

रविवार (11 अप्रैल) को हालात तब और बिगड़ गए जब उपद्रवियों ने पत्थरबाजी करते हुए आगजनी और लूटपाट की। कई दुकानों को फूँका गया। पुलिस और दमकल की गाड़ियों को भी निशाना बनाया गया।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। आगजनी की घटना के बाद क्षेत्र की बिजली काट दी गई है। धारा 144 लागू कर दी गई है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार शाम धरनावदा चौराहे पर कमल सिंह ठेले से फल खरीद रहे थे। इसी दौरान उनकी फरीद, आबिद और समीर से कहासुनी हो गई। युवकों ने उन पर चाकू से हमला कर दिया। उन्हें बचाने दौड़े दुकानदार राकेश नागर पर भी हमला किया गया। घायलों को अस्पताल भेजकर पुलिस ने आरोपित तीनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया।

पत्रिका डॉटकॉम की रिपोर्ट के अनुसार विवाद की शुरुआत गाड़ी खड़ी करने को लेकर हुई।चाकूबाजी के बाद 35 साल के कमल सिंह और उन्हें बचाने आने राकेश धाकड़ को गंभीर हालत में हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

रिपोर्टों के अनुसार रविवार की सुबह चौराहे पर फिर से दोनों तरफ के लोगों का जुटान हुआ। लोग आपस में बातचीत कर ही रहे थे कि पत्थरबाजी शुरू हो गई। बाजार में भगदड़ मच गई। उपद्रवियों ने कई दुकानों को आग के हवाले कर समान लूट लिए। आग पर काबू करने पहुँची दमकल की गाड़ी को भी निशाना बनाया गया। फिलहाल हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। आसपास के थानों से भी पुलिस को मौके पर भेजा गया है। कोटा के आईजी भी घटनास्थल के लिए निकल गए हैं।

पाकिस्तान : लॉकडाउन के बीच मस्जिद में जुटे नमाजियों का पुलिस टीम पर हमला

पाकिस्तान SHO
लॉकडाउन के बीच पाकिस्तान की मस्जिद में जुटे लोगों ने
पुलिस टीम पर बरसाए ईंट-पत्थर
पूरा विश्व लगातार फैलती कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए तरह-तरह के इंतजाम कर रहा है, लेकिन कुछ लोगों के कारण पुलिस-प्रशासन इस संकट के बीच अलग ही तरह की परेशानी से जूझ रही है। भारत में लगातार आ रही जमातियों से जुड़ी खबर के बाद कुछ इसी तरह की खबर अब पाकिस्तान से भी आई है। वहाँ लॉकडाउन के बीच पढ़ी जा रही नमाज को रोकने के लिए पहुँची पुलिस टीम पर लोगों ने हमला कर दिया।
पाकिस्तान के सिंध में लगी पाबंदी के बाद भी कराची शहर के लियाकताबाद इलाके में मौजूद एक मस्जिद में बड़ी संख्या में नमाजी एकत्र हो गए। इसकी सूचना जब क्षेत्रीय पुलिस को हुई तो तत्काल पुलिस मौके पर पहुँच गई। मस्जिद में हो रही नमाज को लेकर जब पुलिस ने विरोध किया तो लोगों ने अचानक से पुलिस टीम पर ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया। इस दौरान पुलिस को घरों में घुसकर अपनी जान बचानी पड़ी।
नमाजियों द्वारा पुलिस टीम पर किए हमले में पीराबाद थाने की एक महिला एसएचओ घायल हो गई, जिस पर आला अधिकारियों को सूचना दी गई। इसके बाद बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स मौके पर पहुँची। वहीं मामले में कार्रवाई करते हुए कराची पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया है। इस मामले का एक वीडियो पाकिस्तान के पत्रकार रविन्द्र सिंह रॉबिन ने अपने ट्विटर पर शेयर किया है।

खबर के मुताबिक पाकिस्तान में लगातार बढ़ती कोरोना के मरीजों की संख्या के बीच सिंध राज्य की सरकार ने शुक्रवार (10 अप्रैल 2020) को बीते सप्ताह की तरह ही जुमे की नमाज को ध्यान में रख लोगों को एकत्र होने से रोकने के लिए दोपहर बारह बजे से तीन बजे तक कर्फ्यू जैसे लॉकडाउन की घोषणा की थी। इस दौरान तीन घंटे तक घरों से निकलने पर पूरी तरह से पाबंदी थी।
इससे पहले पाकिस्तान उलेमा काउंसिल ने लोगों से महामारी के फैलाव को रोकने के लिए सरकार के आदेशों का पालन करने और घरों में ही नमाज पढ़ने की अपील की थी। इसके बाद भी कराची के औरंगी टाउन की एक मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए जुमे की नमाज अदा करने के लिए पहुँच गए।
अवलोकन करें:-
About this website

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
देश में जारी लॉकडाउन के बीच दिल्ली में चार लाख लोगों को हर रोज भोजन कराने का केजरीवाल सरकार का दावा खोखला साबित हो र...
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में अब तक कोरोना से 102,734 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 1,699,632 के पर पहुँच गई है, राहत की बात यह कि 376,330 लोग अस्पतालों से ठीक होकर अपने घरों को लौट चुके हैं। वहीं बात करें पाकिस्तान की, तो यहाँ मरने वालों की संख्या 66, जबकि इससे संक्रिमत लोगों की संख्या बढ़कर 4696 हो गई है।

मस्जिद में जमा थे 100 जमाती, समझाने गई पुलिस टीम पर हमला कर जमाती फरार

दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में कोरोना पॉजिटिव केस के बाद हड़कंप मचा हुआ है। निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात में कई लोगों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी कई मस्जिदों में इसी तरह के जमात की खबरें आ रही है। ऐसे में बिहार के मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी ब्लॉक के गीदड़गंज गांव की मस्जिद में सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ पढ़ाने गई पुलिस टीम पर स्थानीय मुसलमानों ने ना सिर्फ पथराव किया बल्कि फायरिंग भी कर दी। पुलिस के साथ हुए पथराव के बीच मस्जिद में ठहरे सभी जमाती फरार हो गए।
भास्कर की खबर के अनुसार लॉकडाउन के दौरान गीदड़गंज गांव की बड़ी मस्जिद में 100 से अधिक जमाती के रुकने की खबर मिलने पर मंगलवार की शाम जांच करने पहुंची पुलिस पर स्थानीय लोगों ने जमकर पत्थरबाजी और फायरिंग की। स्थानीय लोगों ने पुलिस को करीब एक किलोमीटर दूर मदरसा हनफीया तक खदेड़ दिया। लोगों ने पुलिस गाड़ी में तोड़फोड़ कर तालाब में गिरा दिया। गौरतलब है कि गीदड़गंज गांव के सभी लोग मुसलमान समुदाय के हैं।
दैनिक जागरण के अनुसार पुलिस जवानों ने वहां जाकर सामूहिक रूप से आयोजन करने से मना किया। इस पर वहां मौजूद लोगों की जवानों से बहस हो गई। देखते ही आसपास की सभी छतों से पुलिस पर पथराव शुरू हो गया। हिन्दुस्तान की खबर के अनुसार पथराव में अंचल अधिकारी सहित कई लोग जख्मी हो गए। बीडीओ और थानाध्यक्ष को किसी तरह जान बचाकर वहां से भागना पड़ा।  नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार पुलिस में मामले में कार्रवाई करते हुए 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। मधुबनी के एसपी ने बताया कि इस मस्जिद में आए लोग ज्यादातर नेपाल से आए हैं।
रांची, मेरठ और निजामुद्दीन के मस्जिदों में छिपे थे सैकड़ों विदेशी
इसी दौरान देश के कई इलाकों में मस्जिदों में विदेशी मौलवियों और जमातियों के छिपे होने से हड़कंप मच गया है। सोमवार, 30 मार्च को झारखंड की राजधानी रांची की एक मस्जिद से पुलिस ने 24 मौलवियों को हिरासत में लिया है।

ये लोग मलयेशिया, वेस्ट इंडीज और पोलैंड के रहने वाले हैं। ये सभी हिंदपीढ़ी में ग्वाल टोली के समीप स्थित बड़ी मस्जिद में किसी जमात में शामिल होने आये थे। पुलिस ने सभी को खेलगांव स्थित क्वारेंटाइन सेंटर पहुंचा दिया। प्रभात खबर के अनुसार पुलिस इनके यहां आने की वजह और इनकी गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटा रही है। बताया जा रहा है कि सभी लोग जनवरी से ही यहां हैं।


जागरण के अनुसार रांची के हिंदपीढ़ी बड़ी मस्जिद में विदेशियों के छुपे होने की सूचना पर पुलिस प्रशासन की टीम ने 18 विदेशियों सहित 24 को हिरासत में लेकर क्वारंटाइन किया है। पुलिस ने सोमवार की सुबह तड़के तीन बजे से चार बजे के बीच सभी को खेलगांव कैंपस में बने आइसोलेशन होम में शिफ्ट किया है।
निजामुद्दीन में जमा थे 1000 से ज्यादा जमाती
दिल्ली में 100 से ज्यादा लोगों के कोरोना वायरस के टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद निज़ामुद्दीन मरकज़ से सभी 2,100 लोगों को बाहर निकाला गया है। एनडीटीवी के अनुसार तब्लीगी जमात के मरकज से करीब 2100 लोगों को कोरोना वायरस की जांच के लि दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में ले जाया गया है। एनडीटीवी के अनुसार इस मरकज में विदेश से भी लोग आए हुए थे। यह सभी यहां पर आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे और निजामुद्दीन स्थित एक मस्जिद में रुके हुए थे।

मेरठ के मस्जिदों में छिपे थे 19 विदेशी मौलवी
इसके साथ ही मेरठ जिले की दो मस्जिदों में 19 विदेशी नागरिकों के मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। ये विदेशी जमात के संग 17 और 21 मार्च को मेरठ पहुंचे थे। ये विदेशी मौलवी इंडोनेशिया, केन्या, सूडान और जिबूती समेत अन्य देशों से हैं। दैनिक जागरण के अनुसार मवाना स्थित बिलाल मस्जिद में रविवार देर रात 10 और सरधना में आजाद नगर स्थित मस्जिद में नौ विदेशी मौलवी रह रहे थे। 

अवलोकन करें:-
About this website

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार देश की राजधानी दिल्ली में निजामुद्दीन कोरोना वायरस का एक खतरनाक हॉटस्पॉट बनकर सामने ...
लॉकडाउन के दौरान इन्हें शरण देने वालों ने भी पुलिस को जानकारी देना मुनासिब नहीं समझा। हिन्दुस्तान के अनुसार किसी को पता न चले, इसलिए मस्जिद के बाहर ताला लगा रखा था।

शाहीन बाग : आपस में ही चले लात-घूसे, पत्थर: पब्लिसिटी न मिलने से बौखलाहट

शाहीन बाग़, लड़ाई
आपस में लड़ते प्रदर्शनकारी 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कहावत है 'बोया पेड़ बबुल का, आम कहाँ से होए', शाहीन बाग़ में शत-प्रतिशत चरितार्थ हो रही है। जहाँ नेतागिरी को लेकर झगड़ा शुरू हो गया है। दूसरे, जब नागरिकता संशोधक कानून समर्थक कहते थे कि प्रदर्शनकारी विरोध में नहीं, बल्कि 500 रूपए, बिरयानी और बढ़िया नाश्ता के लालच में दूध पीते नौनिहालों को लेकर पहुँचती महिलाओं पर लोग कहते थे कि 'ऐसे कौन जाएगा', समय बड़ा बलवान होता है। नौसिखिए नेता बने घूम रहे थे, लोगों को धन, बिरयानी, नाश्ता और टैंट आदि का प्रबंध करने वाले कहीं दूर तक नज़र नहीं आ रहे, कोई उनका अहसान तक नहीं मान रहे। कोरोना के चलते धन का आभाव होने से प्रदर्शनकारी सरकार का विरोध करने की बजाए आपस में ही भिड़ने लगे हैं।   
जहाँ एक तरफ पूरा देश कोरोना वायरस के खतरे से लड़ रहा है, शाहीन बाग़ के उपद्रवी आपस में ही लात-घूसा चला रहे हैं। एक तो शाहीन बाग़ वालों ने कोरोना वायरस के खतरों को नजरंदाज कर धरना-प्रदर्शन जारी रखा है और पूरी दिल्ली को ख़तरे में डाल दिया है, ऊपर से वो क़ानून-व्यवस्था के लिए भी संकट उत्पन्न कर रहे हैं। दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने शाहीन बाग़ का शनिवार (मार्च 21, 2020) का एक विडियो शेयर किया है। इसमें प्रदर्शनकारी आपस में ही मारपीट करते हुए दिख रहे हैं।
भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दावा किया है कि शाहीन बाग़ के इन प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ़ आपस में लात-घूसों से लड़ाई की बल्कि एक-दूसरे पर पत्थर भी चलाए। अब इससे ये शक उभरता है कि क्या आज वहाँ पर पेट्रोल बम का फेंका जाना आपस की गैंगवार का प्रतिफल है? दिल्ली के हालिया हिन्दू-विरोधी दंगों में भी मुस्लिम दंगाई भीड़ ने पेट्रोल बम का जम कर इस्तेमाल किया था। कपिल मिश्रा का कहना है कि कोरोना के चक्कर में इनका धंधा बंद हो रहा है, इसलिए बौखला कर आपस में ही सिर-फुटव्वल कर रहे हैं।

हो सकता है कि कोरोना पर सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों और संक्रमित होते लोगों के बीच शाहीन बाग़ को पब्लिसिटी न मिल पा रही हो और इसके लिए उन्होंने कोई कुचक्र रचा हो। वो लगातार सरकारी आदेशों की तौहीन कर रहे हैं। उनकी आपस की लड़ाई भी इसी बौखलाहट का नतीजा हो सकती है कि उन्हें मीडिया का अटेंशन नहीं मिल रहा और 100 दिन से ज्यादा समय से चल रहे इस उवद्रव से अब वो भी बोर हो चुके हैं। 
अवलोकन करें:-
About this website
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
शाहीन बाग़ प्रदर्शन स्थल के पास फेंके गए बम से लगी आग को बुझाते लोग शाहीन बाग़ के लोग रविवार (मार्च 22, 2020) को भी धरने पर बै...
About this website
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
ये है दिल्ली का जामा मस्जिद क्षेत्र आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारतीय राजनीतिक दलों और मीडिया को चीन से सीखना चा....
कोरोना पर शेहला रशीद और योगेंद्र यादव सहित कई अन्य सीएए विरोधियों द्वारा मोदी की तारीफ करने से भी लिबरलों के कट्टरवादी समूह में बौखलाहट का माहौल है।