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नर्सों के सामने नंगा होने वाले जमात के 6 लोगों पर FIR

गाजियाबाद एमएमजी हॉस्पिटल, तबलीगी जमात
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
गाजियाबाद के एमएमजी अस्पताल में नर्सों के साथ बदतमीजी करने के मामले में तबलीगी जमात के 6 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। इन्हें एमएमजी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड से राजकुमार गोयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में शिफ्ट कर दिया गया है।
गुरुवार (अप्रैल 2, 2020) शाम सीएमओ ने जिले के डीएम से एमएमजी हॉस्पिटल में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर में भर्ती तबलीगी जमात के लोगों द्वारा नर्सों से बदतमीजी करने की शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुँच कर जाँच की थी। सीएमओ ने शिकायत में बताया कि क्वारंटाइन में रखे गए तबलीगी जमात के लोग बिना पैंट के घूम रहे हैं। नर्सों को देखकर भद्दे इशारे करते हैं। बीड़ी और सिगरेट की डिमांड करते हैं।
अब तब्लीग़ियों की इन हरकतों को देख यह संदेह होता है, "कहीं ये तबलीग का चोला ओढ़े गुंडे तो नहीं? क्योकि धर्म के काम में संलग्न लोग नर्सों के सामने नंगा नहीं होता।" दूसरे, यह कि "जमात में ऐसी ही अश्लील हरकतों की शिक्षा एवं दीक्षा दी जाती है?" पत्थरबाज़ी करना, जगह-जगह थूकने के अलावा डॉक्टरों पर थूकना क्या जमात में यही सिखाया जाता है? इन जमातियों की ये नीच हरकत केवल भारत तक ही सीमित नहीं, बल्कि पाकिस्तान में भी देखने और सुनने को मिल रही हैं। 
मामले की शिकायत मिलते ही डीएम ने जाँच के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इन 6 लोगों को एमएमजी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड से राजकुमार गोयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में शिफ्ट किया गया है। गाजियाबाद के एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि चीफ मेडिकल सुप्रीटेंडेंट द्वारा एक पत्र मिला, जिसमें आरोप लगाया गया कि अस्पताल (एमएमजी जिला अस्पताल) के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीज अस्पताल के कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे थे।


जिसके बाद उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 294, 509, 269, 272 और 271 के तहत FIR दर्ज की गई है। साथ ही मामले में निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
इससे पहले दिल्ली में कई जमाती बुधवार को बसों में बैठते वक्त पुलिस-सरकारी कर्मचारियों के ऊपर थूक रहे थे। निजामुद्दीन स्थित मरकज की इमारत से बुधवार सुबह तक दो हजार से ज्यादा जमातियों को बाहर निकाला गया था। एलएनजीपी हॉस्पिटल भी इनकी मनमानियों से परेशान है। जॉंच में सहयोग नहीं करने पर अस्पताल में पुलिस की तैनाती करनी पड़ी थी।
पाकः इस्लामी प्रचारक तबलीगी जमात के 27 सदस्य कोरोना पॉजिटिव, टेस्ट के दौरान एक ने पुलिस पर किया चाकू से हमला
पाकिस्तान में इस्लामिक प्रचारक तबलीगी जमात के 27 सदस्यों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। रायविंड के तबलीगी मरकज सेंटर में 35 लोगों की स्क्रीनिंग की गई थी। दरअसल, ऐसा संदेह था कि रायविंड रोड स्थित तबलीगी मरकज और विभिन्न मस्जिदों से कोरोना वायरस जगह-जगह फैला। इसके बाद ही स्थानीय प्रशासन ने तबलीगी के कई प्रचारकों को हिरासत में लेकर क्वारंटाइन किया था। 
पाकिस्तानी अखबार ‘द डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जब क्वारंटाइन सेंटर में सभी तबलीगी जमातियों का टेस्ट किया जा रहा था तो उनमें से एक प्रचारक ने क्वारंटाइन से बचने के लिए पुलिस ऑफिसर SHO अशरफ मलिक माखी पर चाकू से हमला कर दिया और भागने की कोशिश की। हालाँकि, हमलावर को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में स्वाबी जिले से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। वहीं पुलिस अधिकारी को लेय्या में डीएचक्यू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बताया जा रहा है कि फिलहाल पुलिस अधिकारी की हालत स्थिर बनी हुई है।
करीब 1200 तबलीगी जमात के प्रचारक 5 दिन के सम्मेलन में हिस्सा ले रहे थे जिनमें 500 विदेशी भी शामिल थे। इसके पहले फरवरी में प्रचार के लिए उन्होंने कई टीमें बनाई थीं। पंजाब सरकार ने आयोजकों से अपील की थी कि वह इस सम्मेलन को रद्द कर दें, लेकिन उन्होंने सरकार की नहीं सुनी। हालाँकि, बाद में उन्होंने मन बदल लिया और इसके बाद ही प्रांत में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया था। जिसकी वजह से अब उनके घर जाने के लिए किसी तरह की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इसके बाद मरकज को सील कर दिया गया और 25 लोगों के आवास को क्वारंटाइन सेंटर में बदल दिया गया।
इससे पहले मार्च में तबलीगी जमात ने लाहौर के बाहरी इलाके में 1.5 लाख लोगों की एक मजहबी सभा का आयोजन किया था। इस सामूहिक सभा के परिणामस्वरूप कोरोना वायरस महामारी का भयंकर प्रसार देखा गया, क्योंकि इस सभा में हिस्सा लेने वाले लोगों ने सोशल डिस्टेंशिंग का पूर्ण रुप से उल्लंघन किया था।
इस मजहबी बैठक में भाग लेने वाले दो फिलिस्तीनी नागरिक कोरोना वायरस टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए, और इन दोनों के संक्रमित होने की पुष्टि के साथ ही गाजा में कोरोना संक्रमण का पहला केस सामने आया। संक्रमित मरीजों को रफा शहर के एक अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। इससे पहले इजराइल और मिस्र से गाजा में प्रवेश करने वाले लगभग 1,270 लोगों को क्वारंटाइन कर दिया गया था। वेस्ट बैंक में 55 लोगों में कोरोना वायरस का पता चला है। 
एहतियात के तौर पर वेडिंग हॉल और बाजार बंद कर दिए गए हैं। अब यहाँ पर सीमित परीक्षण क्षमताओं के साथ इस क्षेत्र में पैनिक की स्थिति पैदा हो गई है। गाजा में लगभग 20 लाख लोगों की देखभाल के लिए मात्र 60 ICU बेड हैं। कर्मचारियों की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है।
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देशभर में जारी 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान इंदौर के डॉक्टर्स और पुलिसकर्मियों के साथ संवेदनशील इलाकों में बदसलूकी क.....
वहीं भारत में दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्थित मरकज में मलेशिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और किर्गिस्तान समेत कई देशों के करीब 2500 से अधिक लोगों ने 1 से 15 मार्च तक तब्लीग-ए-जमात में हिस्सा लिया था। अब इनका पता लगने के बाद पूरे इलाके की कड़ी निगरानी की जा रही है और हर संदिग्ध को अस्पताल में एहतियात के तौर पर भर्ती किया जा रहा है। इनमें से 24 लोगों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव निकल आई है।

अपने ही बुने जाल में फंसा The Wire; FIR दर्ज

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में पूरा देश कोरोना वायरस से लड़ने में व्यस्त है, वहीं संकट के समय में भी मोदी सरकार के खिलाफ प्रोपेगंडा फैलाने वाले पोर्टल्स की साजिशें थमने का नहीं ले रही हैं। ये पोर्टल्स आए दिन प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी सरकारों के खिलाफ अफवाहें फैला रहे हैं, लेकिन ये पोर्टल्स अपने ही बिछाये जाल में फंसते जा रहे हैं और उनके मंसूबों पर पानी फिरता जा रहा है। ताजा मामला ‘द वायर’ का है। भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक सिद्धार्थ वरदराजन द्वारा संचालित इस पोर्टल ने मंगलवार को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर एक झूठी खबर प्रकाशित की, जिसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
योगी सरकार की चेतवानी के बावजूद जब ‘द वायर’ ने फर्जी खबर नहीं हटायी, तो उसके खिलाफ FIR दर्ज की गई। इसके बारे में योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने ट्वीट कर जानकारी दी। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा- “हमारी चेतावनी के बावजूद इन्होंने अपने झूठ को ना डिलीट किया ना माफ़ी मांगी। कार्यवाही की बात कही थी, FIR दर्ज हो चुकी है आगे की कार्यवाही की जा रही है। अगर आप भी योगी सरकार के बारे में झूठ फैलाने के की सोच रहे है तो कृपया ऐसे ख़्याल दिमाग़ से निकाल दें।”

इससे पहले योगी सरकार ने ‘दी वायर’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन को चेतावनी देते हुए कहा था कि वह अपनी फर्जी खबर को डिलीट करें वरना इस पर कार्रवाई की जाएगी। यूपी सीएम के मीडिया सलाहकार ने कहा था कि झूठ फैलाने का प्रयास ना करे, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कभी ऐसी कोई बात नहीं कही है। इसे फ़ौरन डिलीट करे अन्यथा इस पर कार्यवाही की जाएगी तथा डिफ़ेमेशन का केस भी लगाया जाएगा। वेबसाईट के साथ-साथ केस लड़ने के लिए भी डोनेशन मांगना पड़ जाएगा।

तबलीगी जमात को बचाने के लिए ‘द वायर’ ने फेक न्यूज़ फैलाते हुए लिखा कि जिस दिन इस इस्लामी संगठन का मजहबी कार्यक्रम हुआ, उसी दिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि 25 मार्च से 2 अप्रैल तक अयोध्या में प्रस्तावित विशाल रामनवमी मेला का आयोजन नहीं रुकेगा क्योंकि भगवान राम अपने भक्तों को कोरोना वायरस से बचाएंगे।
दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में सैकड़ों मौलवियों की मौजूदगी और उनसे जुड़े कई लोगों की कोरोना से मौत और संक्रमण के मामले सामने आने के बाद पूरे देश में हड़कंप मच गया। इसी बीच मौलाना साद का एक ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें वे मुसलमानों से कहते सुने जा सकते हैं कि मुसलमान डॉक्टरों और सरकार की सलाह न मानें क्योंकि मिलने-जुलने और एक-दूसरे के साथ बैठ कर खाने से कोरोना नहीं होगा। ऐसे में कई मौलानाओं के बयानों को ढकने के लिए ‘द वायर’ ने एक लेख प्रकाशित किया और उसके संपादक वरदराजन ने इस लेख को शेयर भी किया। लेकिन, ‘द वायर’ की झूठी खबर पकड़ी गयी। ऐसा पहली बार नहीं है, जब ‘द वायर’ ने झूठी खबर फैलाने की कोशिश की हो।
ताहिर हुसैन को निर्दोष साबित करने की कोशिश

दिल्ली दंगे में आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा की बर्बर हत्या की विभीषका को झुठलाने की पूरी कोशिश की गई। प्रोपैगंडा साइट ‘द वायर’ अंकित शर्मा के हत्यारोपी ताहिर हुसैन को निर्दोष सिद्ध करने में पूरी जान लगा दी। ‘द वायर’ को दिए अपने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में ताहिर हुसैन क्लेम करता है कि वह निर्दोष है और खुद ही साम्प्रदायिक हिंसा का शिकार है। द वायर द्वारा ट्वीट की गई वीडियो क्लिप में ताहिर हुसैन को यह कहते सुना जा सकता है कि उसे न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है और उसको यह भरोसा है कि उसके साथ मुस्लिम होने के कारण अन्याय नहीं होगा। लेकिन इसके बाद जो तथ्य सामने आए वे किसी से छिपे नहीं है।

कश्मीर को लेकर फैलायी झूठी खबर
अगस्त 2019 में ‘द वायर’ ने कश्मीर पर झूठी खबर फैलाने की कोशिश की,जिसकी पोल श्रीनगर के डीसी शाहिद चौधरी ने खोली थी। ‘द वायर’ ने कश्मीर को लेकर ‘कश्मीर रनिंग शॉर्ट ऑफ लाइफ सेविंग ड्रग्स एज क्लैम्पडाउन कांटिन्यूज’ शीर्षक से एक लेख प्रकाशित किया, जिसमें कश्मीर में जीवन रक्षक दवाओं की कमी बताई गई थी। इसमें कहा गया था कि श्रीनगर के दवा की दुकानों में दवाइयों की आपूर्ति कम कर दी गई है,जिससे आम लोगों को परेशानी हो रही है।


श्रीनगर के मजिस्ट्रेट आईएएस अधिकारी शाहिद चौधरी ने इस झूठ का पर्दाफाश कर दिया। उन्होंने लेख के लिंक को शेयर करते हुए ट्वीट कर बताया कि सभी की चिंता का ख्याल रखा जा रहा है। एक दिन के लिए भी दवाइयों की कमी नहीं हुई है। आपूर्ति में कोई व्यावधान नहीं है। यदि कोई व्यक्तिगत मामलों में भी मदद चाहता है, उसके लिए भी प्रशासन तैयार है।
सिर्फ आईएएस चौधरी ही नहीं, बल्कि जम्मू के आईपीएस प्रणव महाजन ने भी इस पोर्टल को आड़े हाथ लिया। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि इस नाजुक समय में ऐसे पोर्टल्स को परिपक्वता दिखानी चाहिए। उन्होंने सबसे पहले जमीन पर मौजूद शाहिद चौधरी जैसे अधिकारियों से बात करनी चाहिए, फिर कोई रिपोर्ट करनी चाहिए।
कश्मीर विशेषज्ञ पत्रकारों के झूठ का पर्दाफाश
‘द वायर’ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर झूठी खबरें फैलाना अपना अधिकार समझता है। ‘द वायर’ ने You Tube पर एक वीडियो अपलोड किया। जिसमें कथित वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्ता, उर्मिलेश और प्रेम शंकर झा यह डिस्कशन करते दिख रहे हैं कि 5 अगस्त, 2019 के बाद एक भी कश्मीरी अखबार छप नहीं रहा है। यह ‘आपातकाल’ से भी बुरा दौर है, जिसमें अखबार तक नहीं छप रहे हैं। उनके इस प्रोपैगंडा को दूरदर्शन के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने अपने डिबेट शो ‘दो टूक’ में एक्सपोज करके रख दिया। उन्होंने इन तथाकथित कश्मीर विशेषज्ञ पत्रकारों के झूठ को बेनकाब करते हुए अपने डिबेट शो में इनके मुंह पर सबूत दे मारे।


लॉकडाउन के दौरान भी सक्रिय है अवॉर्ड वापसी गैंग


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
केंद्र की सत्ता पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के काबिज होने पर वर्षों से सत्ता की मलाई खा रहे लोगों को नागवार गुजरा। सत्ता से दूरी ने उन्हें परेशान कर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार को बदनाम करने के लिए हर हथकंडा अपनाना शुरू कर दिया। कभी मॉब लिंचिंग के नाम पर तो, कभी अवॉर्ड वापसी के रूप में अपनी साजिश को अंजाम देते रहे। आज जब पूरा देश कोरोना वायरस से लड़ रहा है, वहीं अवॉर्ड वापसी गैंग प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। लॉकडाउन के दौरान वह लोगों को गुमराह कर मोदी सरकार को नाकाम साबित करने में लगा है। इसके लिए मनगढ़ंत और झूठी खबरों का सहारा लेने से भी बाज नहीं आ रहा है। हालांकि पहले की तरह आज भी उसका नापाक चेहरा बेनकाब हो रहा है।
लॉकडाउन बढ़ाये जाने की झूठी खबर
प्रोपगेंडा पत्रकार शेखर गुप्ता ने सोमवार को वेबसाइट ‘द प्रिंट’ से एक बार फिर फेक न्यूज फैलाने की कोशिश की। द प्रिंट में दावा किया गया कि मोदी सरकार कोरोना वायरस लॉकडाउन को 14 अप्रैल के बाद भी कुछ हफ्तों के लिए बढ़ा सकती है।

 ‘Modi govt could extent coronavirus lockdown by a week a migrant exodus triggers alarm’ शीर्षक की ‘एक्सक्लूसिव’ रिपोर्ट में कहा गया कि दिल्ली एनसीआर से पलायन संकट के कारण लॉकडाउन को एक हफ्ते बढ़ाया जा सकता है।

सोशल मीडिया पर खबर फैलायी गयी कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए देश को लॉकडाउन के एक और चरण से गुजरना पड़ सकता है। खबर में बताया गया है कि स्वास्थ्य, प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स और फाइनेंस से जुड़े विशेषज्ञों की एक समिति ने मई में दूसरे लॉकडाउन की सिफारिश की है। इस रिपोर्ट में 17 अप्रैल से बंदिशें कम करने के बाद 18 अप्रैल से 31 मई तक दोबारा लॉकडाउन की सिफारिश की गयी है।
इस खबर पर प्रसार भारती न्यूज सर्विस (पीबीएनएस) ने यह कहते हुए ट्वीट किया कि कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने लॉकडाउन बढ़ाये जाने से साफ इंकार किया है। पीबीएनएस ने ट्वीट करते हुए कहा कि यह फेक न्यूज है। खबर एकदम झूठी है। पीबीएनएस ने कैबिनेट सचिव से इस खबर के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने हैरानी जताते हुए साफ कहा कि लॉकडाउन को बढ़ाये जाने की कोई योजना नहीं है।
सेना ने किया इमरजेंसी की अफवाहों का खंडन
भारतीय सेना को ट्वीट के जरिये सोशल मीडिया पर फैलायी जा रही उन अफवाहों का खंडन करना पड़ा, जिसमें कहा गया था कि अप्रैल के मध्य में इमरजेंसी की घोषणा कर दी जाएगी। सेना ने साफ किया है कि सोशल मीडिया में फैलाया जा रहा ये वायरल मैसेज पूरी तरह से गलत और दुर्भावनापूर्ण है।


‘द वायर’ ने फैलाया सीएम योगी का झूठा बयान
‘द वायर’ जैसे प्रोपेगेंडा पोर्टल्स इस आपदा काल में भी अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं। ताज़ा मामला ‘द वायर’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन का है, जिसने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में फेक न्यूज़ फैलाई है। तबलीगी जमात को बचाने के लिए तड़पते ‘द वायर’ ने फेक न्यूज़ चलाया कि जिस दिन इस इस्लामी संगठन का मजहबी कार्यक्रम हुआ, उसी दिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि 25 मार्च से 2 अप्रैल तक अयोध्या प्रस्तावित विशाल रामनवमी मेला का आयोजन नहीं रुकेगा क्योंकि भगवान राम अपने भक्तों को कोरोना वायरस से बचाएंगे।

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के एमडीए सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने सिद्धार्थ वरदराजन की ये चोरी पकड़ ली और उन्हें जम कर फटकार लगाई। उन्होंने ‘द वायर’ और उसके संस्थापक पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने कभी कोई ऐसी बात कही ही नहीं है, जैसा कि लेख में दावा किया गया है। उन्होंने सिद्धार्थ को चेताया कि अगर उन्होंने अपनी इस फेक न्यूज़ को तुरंत डिलीट नहीं किया तो कार्रवाई की जाएगी और उन पर मानहानि का मुकदमा भी चलाया जाएगा। साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए ये भी कहा कि कार्रवाई के बाद वेबसाइट के साथ-साथ केस लड़ने के लिए भी सिद्धार्थ वरदराजन को डोनेशन माँगना पड़ जाएगा।



वैष्णों देवी में श्रद्धालुओं के फंसे होने की झूठी खबर
इसी तरह सोशल मीडिया पर ऐसी फैलाई जा रही हैं कि वैष्णो देवी तीर्थ में करीब 400 श्रद्धालु फंसे हुए हैं। जब पीआईपी की फैक्टचेक टीम ने इस खबर की जांच की तो पाया कि यह पूरी तरह झूठी खबर है। पीआईबी ने ट्वीटकर बताया कि कोई भी श्रद्धालु कटरा या वैष्णो देवी तीर्थ में नहीं फंसा हुआ है। यात्रा को लॉकडाउन होने से बहुत पहले, 18 मार्च को ही रोक दिया गया था।

इतना ही नहीं, शाहीन बाग़ नागरिकता संशोधक कानून पर ठेकेदार बन समाचार चैनलों पर परिचर्चाओं में हिस्सा लेने वाले तथाकथित इस्लामिक स्कॉलर शुएब जमाई निजामुद्दीन में लॉक आउट होने के बावजूद जमा हुए हज़ारों जमातियों के बचाव में कहता है कि कोरोना वैष्णो मंदिर में जमा लोगों से भी फ़ैल सकता है, जबकि अपने आप को इस्लामिक स्कॉलर कहने वाले को नहीं मालूम की लॉक डाउन से पहले ही भारत के जितने भी बड़े मन्दिर हैं, उन्हें बंद कर दिया गया था। दूसरे, यह कि निजामुद्दीन मरकज़ से जगह-जगह फैले जमातियों ने समूचे भारत में कोरोना को बढ़ावा दिया। और अगर मरकज़ इस्लामिक था, फिर क्यों इसके आयोजक फरार हैं? सिद्ध करता है कि किसी सोंची-समझी सियासत के भारत में अराजकता फैलाना ही इनका उद्देश्य था। पहले नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में शांति के नाम पर प्रदर्शन और धरनों को आयोजन और अब इस्लाम की आड़ में कोरोना जैसी संक्रामक बीमारी को फैलाना। 
दूसरे, जिस तरह मुसलमानों में मस्जिद जाने, पांचों समय की नमाज और इस्लाम का प्रचार करने वाले जमाती हस्पतालों में डॉक्टरों पर थूक रहे हैं, उन्हें गालियां दे रहे हैं, यह कोई प्रचारक नहीं शैतान का काम है और कोई #award vapsi, #mob lynching, #not in my name आदि गैंग और वामपंथी इन जमातियों की इन शैतानी  हरकतों पर खामोश हैं, क्यों?
इन सब के बावजूद, आम मुसलमानों को इनसे होशियार रहने की जरुरत है, क्योकि ये लोग मुस्लिम समाज में कोरोना बीमारी को फैलाकर उन्ही के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं, जो चिंता का विषय है।   
सिर्फ आधिकारिक खबर साझा करने की झूठी खबर
गृहमंत्रालय के हवाले से सोशल मीडिया पर खबर फैलायी गई कि कोरोना वायरस के बारे में केवल सरकारी एजेंसियां खबर पोस्ट कर सकती हैं। जब इस खबर की पड़ताल की गई, तो पता चला कि गृह मंत्रालय की ओर से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया था।

‘ऑल्ट न्यूज़’ के संस्थापक ने फैलायी झूठी खबर
इसी तरह कथित फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज़’ के संस्थापक प्रतीक सिन्हा ने फेक अकाउंट को रीट्वीट कर झूठी खबर फैलाने की कोशिश की। एक ट्विटर अकाउंट जो कई दिनों से बंद पड़ा हुआ था। उस ट्विटर अकाउंट से अचानक से एक वीडियो ट्वीट किया जाता है, जिसमें एक महिला डॉक्टर बताती है कि किस तरह डॉक्टरों को सरकार द्वारा कुछ भी सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। वो बताती हैं कि उसने जो मास्क पहना हुआ है, वो काफ़ी पुराना है और उसे बार-बार धो कर उसे पहनना पड़ रहा है। वो डॉक्टर बताती हैं कि वो एक सप्ताह से यही मास्क पहन रही हैं। इस ट्वीट का सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस ट्विटर अकाउंट से ट्वीट किया गया था, वह अकाउंट किसी पुरुष के नाम पर था, जिसका हैंडल है- विक्रमादित्य। पहले नाम भी किसी पुरुष का था लेकिन इसको वायरल करने के लिए इसे किसी महिला के नाम पर बना दिया गया।



हैदराबाद में हुए सड़क हादसे को लॉकडाउन से जोड़ा गया
28 मार्च को हैदराबाद के बाहरी इलाके में हुए एक सड़क हादसे में 8 मजदूरों की मौत हो गई। लॉरी मजदूरों को कर्नाटक में उनके गांवों में ले जा रही थी। 31 मजदूर कर्नाटक के रायचूर जिले में अपने गांव लौट रहे थे। यह एक सामान्य सड़क हादसा था, लेकिन इस हादसे को भी लॉकडाउन से जोड़ दिया गया। यानि कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा। जो इनकी क्षीण मानसिकता को दर्शाता है। इस समाचार को पढ़ अथवा सुनने पर जनता कोरोना जैसी संक्रामक बीमारी से बचाव में सरकारी प्रयासों को नकारात्मक दृष्टि से देख सरकार की आलोचना करे। 

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दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में कोरोना पॉजिटिव केस के बाद हड़कंप मचा हुआ है। निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात में कई ल....
झूठ बोलते हुए पकड़ा गया टाइम्स ऑफ इंडिया का पत्रकार 
बरेली में टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार कंवरदीप सिंह ने ट्वीट के जरिए जिला प्रशासन से सवाल किया कि स्प्रे के जरिए कोरोना को मारने की कोशिश हो रही है या लोगों को ? कंवरदीप के बाद अवॉर्ड वापसी और लिबरल गैंग सक्रिय हो गया। इस मामले को मजदूर विरोधी बताकर मोदी और योगी सरकार को बदनाम करने की कोशिश की गई। हालांकि कई ट्विटर यूजर्स ने कंवरदीप पर खबर को सनसनीखेज बनाने का आरोप लगाया। साथ ही ट्वीट कर बताया कि इस तरह के स्प्रे का इस्तेमाल कुछ ही दिन पहले केरल में किया गया था। लेकिन किसी ने इस पर कोई सवाल नहीं उठाया था, क्योंकि वहां पर लेफ्ट की सरकार है।

मस्जिद में जमा थे 100 जमाती, समझाने गई पुलिस टीम पर हमला कर जमाती फरार

दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में कोरोना पॉजिटिव केस के बाद हड़कंप मचा हुआ है। निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात में कई लोगों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी कई मस्जिदों में इसी तरह के जमात की खबरें आ रही है। ऐसे में बिहार के मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी ब्लॉक के गीदड़गंज गांव की मस्जिद में सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ पढ़ाने गई पुलिस टीम पर स्थानीय मुसलमानों ने ना सिर्फ पथराव किया बल्कि फायरिंग भी कर दी। पुलिस के साथ हुए पथराव के बीच मस्जिद में ठहरे सभी जमाती फरार हो गए।
भास्कर की खबर के अनुसार लॉकडाउन के दौरान गीदड़गंज गांव की बड़ी मस्जिद में 100 से अधिक जमाती के रुकने की खबर मिलने पर मंगलवार की शाम जांच करने पहुंची पुलिस पर स्थानीय लोगों ने जमकर पत्थरबाजी और फायरिंग की। स्थानीय लोगों ने पुलिस को करीब एक किलोमीटर दूर मदरसा हनफीया तक खदेड़ दिया। लोगों ने पुलिस गाड़ी में तोड़फोड़ कर तालाब में गिरा दिया। गौरतलब है कि गीदड़गंज गांव के सभी लोग मुसलमान समुदाय के हैं।
दैनिक जागरण के अनुसार पुलिस जवानों ने वहां जाकर सामूहिक रूप से आयोजन करने से मना किया। इस पर वहां मौजूद लोगों की जवानों से बहस हो गई। देखते ही आसपास की सभी छतों से पुलिस पर पथराव शुरू हो गया। हिन्दुस्तान की खबर के अनुसार पथराव में अंचल अधिकारी सहित कई लोग जख्मी हो गए। बीडीओ और थानाध्यक्ष को किसी तरह जान बचाकर वहां से भागना पड़ा।  नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार पुलिस में मामले में कार्रवाई करते हुए 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। मधुबनी के एसपी ने बताया कि इस मस्जिद में आए लोग ज्यादातर नेपाल से आए हैं।
रांची, मेरठ और निजामुद्दीन के मस्जिदों में छिपे थे सैकड़ों विदेशी
इसी दौरान देश के कई इलाकों में मस्जिदों में विदेशी मौलवियों और जमातियों के छिपे होने से हड़कंप मच गया है। सोमवार, 30 मार्च को झारखंड की राजधानी रांची की एक मस्जिद से पुलिस ने 24 मौलवियों को हिरासत में लिया है।

ये लोग मलयेशिया, वेस्ट इंडीज और पोलैंड के रहने वाले हैं। ये सभी हिंदपीढ़ी में ग्वाल टोली के समीप स्थित बड़ी मस्जिद में किसी जमात में शामिल होने आये थे। पुलिस ने सभी को खेलगांव स्थित क्वारेंटाइन सेंटर पहुंचा दिया। प्रभात खबर के अनुसार पुलिस इनके यहां आने की वजह और इनकी गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटा रही है। बताया जा रहा है कि सभी लोग जनवरी से ही यहां हैं।


जागरण के अनुसार रांची के हिंदपीढ़ी बड़ी मस्जिद में विदेशियों के छुपे होने की सूचना पर पुलिस प्रशासन की टीम ने 18 विदेशियों सहित 24 को हिरासत में लेकर क्वारंटाइन किया है। पुलिस ने सोमवार की सुबह तड़के तीन बजे से चार बजे के बीच सभी को खेलगांव कैंपस में बने आइसोलेशन होम में शिफ्ट किया है।
निजामुद्दीन में जमा थे 1000 से ज्यादा जमाती
दिल्ली में 100 से ज्यादा लोगों के कोरोना वायरस के टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद निज़ामुद्दीन मरकज़ से सभी 2,100 लोगों को बाहर निकाला गया है। एनडीटीवी के अनुसार तब्लीगी जमात के मरकज से करीब 2100 लोगों को कोरोना वायरस की जांच के लि दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में ले जाया गया है। एनडीटीवी के अनुसार इस मरकज में विदेश से भी लोग आए हुए थे। यह सभी यहां पर आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे और निजामुद्दीन स्थित एक मस्जिद में रुके हुए थे।

मेरठ के मस्जिदों में छिपे थे 19 विदेशी मौलवी
इसके साथ ही मेरठ जिले की दो मस्जिदों में 19 विदेशी नागरिकों के मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। ये विदेशी जमात के संग 17 और 21 मार्च को मेरठ पहुंचे थे। ये विदेशी मौलवी इंडोनेशिया, केन्या, सूडान और जिबूती समेत अन्य देशों से हैं। दैनिक जागरण के अनुसार मवाना स्थित बिलाल मस्जिद में रविवार देर रात 10 और सरधना में आजाद नगर स्थित मस्जिद में नौ विदेशी मौलवी रह रहे थे। 

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार देश की राजधानी दिल्ली में निजामुद्दीन कोरोना वायरस का एक खतरनाक हॉटस्पॉट बनकर सामने ...
लॉकडाउन के दौरान इन्हें शरण देने वालों ने भी पुलिस को जानकारी देना मुनासिब नहीं समझा। हिन्दुस्तान के अनुसार किसी को पता न चले, इसलिए मस्जिद के बाहर ताला लगा रखा था।

सरकारी दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाने वाली तबलीगी जमात के बचाव में उतरा लिबरल गैंग

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  
देश की राजधानी दिल्ली में निजामुद्दीन कोरोना वायरस का एक खतरनाक हॉटस्पॉट बनकर सामने आया है। दिल्ली में धारा 144 लागू होने के बावजूद निजामुद्दीन इलाके में एक धार्मिक जलसा हुआ, जिसमें करीब 2000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। लेकिन इस जलसे में शामिल होने वाले 10 लोगों की मौत और 24 लोगों के कोरोना पॉजिटिव पाये जाने के बाद हड़कंप मच गया और फिर इन्हें अस्पतालों में भेजने का सिलसिला शुरू हुआ। इस जलसे के आयोजन से संबंधित जांच में हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं। सामने आए तथ्यों से स्पष्ट हुआ है कि तबलीगी जमात द्वारा सारे नियम-कायदों और सरकारी दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाकर मस्जिद में मजहबी कार्यक्रम आयोजित किए गए। वहीं इस घटना की निंदा करने की जगह इसके बचाव में लिबरल गैंग सक्रिय हो गया है। 
पुलिस ने मौलानाओं को थमाया था नोटिस

दिल्ली पुलिस ने 23 मार्च को ही तबलीगी जमात के मौलानाओं को थाने बुलाकर समझाया था, कि मरकज में हमेशा डेढ़-दो हजार लोग जुटते हैं, इसे रोकना चाहिए।सीसीटीवी के सामने पुलिस ने बता दिया था कि सारे धार्मिक स्थान बंद हैं और 5 लोगों से ज्यादा की जुटान पर रोक है। पुलिस ने ये भी बताया था कि हम लोग आपलोगों की सुरक्षा के लिए हैं। मौलानाओं को बताया गया था कि सोशल डिस्टेंसिंग का जितना पालन किया जाएगा, उतना अच्छा रहेगा क्योंकि ये कोरोना वायरस कोई धर्म या मजहब देख कर आक्रमण नहीं करता है। पुलिस ने मौलानाओं को नोटिस थमाते हुए कहा था कि सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए। उस समय भी मरकज के लोगों ने स्वीकार किया था कि उनकी इमारत में 1500 लोग मौजूद हैं और 1000 लोगों को वापस भेजा जा चुका है। पुलिस ने इन्हें सख्त शब्दों में चेतावनी दी थी, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। इन पत्रकारों ने यह नहीं बताया कि मंदिरों में हुए जुटान से कितने लोगों को अबतक कोरोना का संक्रमण हुआ है। कितने लोगों की मौत हुई है। जब तबलीगी जमात के कार्यक्रम में जुटे लोगों में कोरोना संक्रमण पाया गया है। कई लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। तबलीगी जमात के लोगों के दिल्ली के साथ ही कई राज्यों में फैलने से पूरे देश को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति उन लोगों का खुलेआम बचाव कैसे कर सकता है, जो सार्वजनिक रूप से सरकारी दिशा-निर्देशों और मेडिकल सलाहों को धता बताया हों?

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को किया था आगाह
केंद्रीय गृहमंत्रालय का कहना है कि लॉक़डाउन से पहले ही 21 मार्च को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को पत्र लिखकर आगाह किया गया था। इसमें दिल्ली पुलिस के आयुक्त भी शामिल थे। तेलंगाना में जमात के कुछ लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि होते ही गृहमंत्रालय ने इसका उल्लेख करते हुए सभी राज्यों का कहा था कि इसमें शामिल सभी देशी-विदेशी लोगों की पहचान करने और उसके बाद उनकी कोरोना की जांच सुनिश्चित करने को कहा था।

आइबी ने भी राज्यों को दी थी खतरे की चेतावनी
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार खुफिया ब्यूरो (आइबी) ने भी 28 और 29 मार्च को सभी राज्यों के डीजीपी को पत्र लिखकर जमात से जुड़े लोगों से कोरोना के फैलने के खतरे के प्रति आगाह किया था। खुफिया ब्यूरो ने बताया था कि निजामुद्दीन के मरकज में भाग लेकर लौटने वाले तबलीगी कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकते हैं, इसलिए राज्यों को उनके संपर्क में आने वाले सभी लोगों की पहचान कर उन्हें आइसोलेशन में रखने का प्रबंध करना चाहिए। आइबी ने राज्यों को इस दिशा में तत्काल कदम उठाने को कहा था।

13 मार्च को 200 से ज्यादा लोगों के जुटने पर लगी रोक
इससे पहले दिल्ली सरकार ने 13 मार्च को ही आदेश जारी कर 200 लोगों के जुटाने पर रोक लगा दी थी। उस समस्य इस आदेश की समयावधि 31 मार्च तक रखी गई थी। बावजूद इसके मरकज में कार्यक्रम आयोजित किए गए। 16 मार्च को ख़ुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया कि दिल्ली में कहीं भी 50 लोगों से ज्यादा की भीड़ नहीं जुटेगी। फिर 21 मार्च को 5 से ज्यादा लोगों के जुटान पर रोक लगा दी गई।

जान-बूझकर संक्रमण के ख़तरे को किया नजरअंदाज़
22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगाया गया। इसके एक दिन बाद भी वहां 2500 लोग मौजूद थे, जिनमें से 1500 के चले जाने का दावा मौलाना ने किया है। 25 मार्च को लॉकडाउन के दौरान भी 1000 मुसलमान वहां मौजूद थे। 28 मार्च को एसीपी ने दिल्ली मरकज को नोटिस भेजी लेकिन उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने अपील की थी कि जो जहाँ है वहीं रहे, इसीलिए वहां लोग रुके हुए हैं। साथ ही दावा किया गया कि इतने लोग काफ़ी पहले से यहां पर मौजूद हैं। उपर्युक्त सभी बातों से स्पष्ट पता चलता है कि तबलीगी जमात ने हर एक सरकारी आदेश की धज्जियां उड़ाई और जान-बूझकर इस संक्रमण के खतरे को नजरअंदाज़ कर पूरे देश को ख़तरे में डाल दिया।

मेडिकल सलाहों की उड़ाईं धज्जियां
अब हम आपको बताते हैं कि मरकज में कैसे जनता कर्फ्यू और उसके बाद हुए लॉकडाउन के दौरान भी धड़ल्ले से कार्यक्रम चल रहे थे और मौलाना-मौलवी कोरोना वायरस की बात करते हुए न सिर्फ़ तमाम मेडिकल सलाहों की धज्जियाँ उड़ा रहे थे, बल्कि अंधविश्वास भी फैला रहे थे। 24 मार्च को यूट्यूब पर ‘असबाब का इस्तेमाल ईमान के ख़िलाफ़ नहीं- हजरत अली मौलाना साद’ नाम से ‘दिल्ली मरकज’ यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड किया गया। इसमें मौलाना ने लोगों को एक-दूसरे के साथ एक थाली में खाने और डॉक्टरों की बात मानने की बजाए अल्लाह से दुआ करने की सलाह दी।

बचाव में उतरे एजेंडा पत्रकार और लिबरल गैंग
जब तबलीगी जमात पर प्रशासन और कानून का शिकंजा कसने लगा, तो एजेंडा पत्रकार और लिबरल गैंग उनके बचाव में सामने आ गए। राणा अयूब ने तबलीगी जमात को क्लीन-चिट देने की कोशिश करते हुए एक खबर की लिंक साझा की है। साथ ही दावा किया है कि जब 22 मार्च को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘जनता कर्फ्यू’ का ऐलान किया, तभी मरकज में सारे कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया गया। इसके बाद अयूब ने वहाँ इतनी संख्या में लोगों के छिपे होने के पीछे रेलवे का दोष गिना दिया है, क्योंकि देश भर में रेल सेवा बंद हो गई।




वहीं न्यूज-24 के एंकर संदीप चौधरी तबलीगी जमात के बचाव में स्वास्थ्य मंत्रालय और अन्य मंदिरों के बंद होने की क्रोनोलॉजी समझाने लगे। संदीप चौधरी का समर्थन करते हुए ओम थानवी के साथ ही कई अन्य पत्रकारों ने भी ट्वीट किया।
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कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देशभर में लगे लॉकडाउन के दौरान दिल्ली के निजामुद्दीन से आई एक खबर ने पूरे द....
इन पत्रकारों ने यह नहीं बताया कि मंदिरों में हुए जुटान से कितने लोगों को अबतक कोरोना का संक्रमण हुआ है। कितने लोगों की मौत हुई है। जब तबलीगी जमात के कार्यक्रम में जुटे लोगों में कोरोना संक्रमण पाया गया है। कई लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। तबलीगी जमात के लोगों के दिल्ली के साथ ही कई राज्यों में फैलने से पूरे देश को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति उन लोगों का खुलेआम बचाव कैसे कर सकता है, जो सार्वजनिक रूप से सरकारी दिशा-निर्देशों और मेडिकल सलाहों को धता बताया हों?