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दबोचा गया दलित बच्ची के अपहरण और रेप का आरोपित मोहम्मद मेजर, नेपाल भागने की फिराक में था

                                          नाबालिग दलित से रेप का आरोपित मोहम्मद मेजर गिरफ्तार
बिहार के अररिया में नाबालिग दलित बच्ची के अपहरण और रेप के आरोपित मोहम्मद मेजर गिरफ्तार कर लिया गया है। मोहम्मद मेजर नेपाल भागने की फिराक में था। यह गिरफ्तारी वारदात के लगभग 12 दिन बाद हुई है। इस बीच आरोपित दिल्ली NCR में जगह बदलता रहा। पुलिस को मोहम्मद मेजर दिल्ली के चाँदनी चौक में मिला। अररिया पुलिस ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि की है। यह गिरफ्तारी 13 दिसंबर (सोमवार) को की गई है।

मीडिया से बात करत्ते हुए अररिया के पुलिस अधीक्षक हृदयकांत ने बताया कि, “बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद मोहम्मद मेजर फरार चल रहा था। हमें उसके दिल्ली की तरफ होने की सूचना मिली। हमने उसी क्षेत्र में एक पुलिस टीम भेज दी। आरोपित की जानकारी हमें जहाँ भी मिलती रही हमने वहाँ छापेमारी की। आरोपित पहले नोएडा गया, फिर दिल्ली में छिपने का प्रयास किया, फिर गुरुग्राम, फिर मेरठ गया। इसने अपने जान-पहचान में छिपने की तमाम कोशिश की। लेकिन कोई भी इसको अपने यहाँ शरण देने के लिए राज़ी नहीं हुआ। सभी राज्यों की पुलिस ने हमें काफी सहयोग किया। इसके चलते ये वापस आने की फिराक में था। जानकारी ये भी मिली कि ये नेपाल भागने की भागना चाहता था था। पुलिस ने उस से पहले ही आरोपित को चाँदनी चौक से गिरफ्तार कर लिया।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस की विशेष टीम में केस की विवेचक महिला थानाध्यक्ष रीता कुमारी केस और भरगामा थाना प्रभारी उमेश कुमार प्रमुख थे। पीड़ित दलित परिवार के समर्थन में बजरंग दल ने आक्रोश जुलूस निकाला था। बजरंग दल ने मोहम्मद मेजर की गिरफ्तारी में देरी पर नाराजगी जताते हुए पूरे जिले का चक्का जाम करने का एलान किया था। इसी के साथ आरोपित को फाँसी भी देने की माँग की गई थी।

1 नवम्बर को अररिया के दलित टोले में मोहम्मद मेजर नशे में धुत हो कर पीड़ित दलित परिवार के घर की 6 साल की नाबालिग बच्ची से को जबरन उठा लिया और उसे खेत में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसी के साथ पीड़िता के परिजनों को आरोपित लगातार धमकाता भी रहा। आरोपित मोहम्मद मेजर आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है और उसका एक भाई मुखिया भी रह चुका है। पीड़िता की माँ ने पैक्स अध्यक्ष मोहम्मद सत्तार से भी गुहार लगाई थी और उस पर भी मामले को दबाने का आरोप लगा था।

योगी को गोली मारने की बात कहने वाला ASI तनवीर खान बिहार से गिरफ्तार

तनवीर खान गिरफ्तार
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोली मारने की बात कहने वाले ASI तनवीर खान को उत्तर प्रदेश पुलिस ने सोमवार (मई 4, 2020) को गिरफ्तार कर लिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में बिहार के इस पुलिसकर्मी को नालंदा जिले के दीपनगर थाना इलाके से उत्तर प्रदेश की गाजीपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुलिस ने सोशल मीडिया में अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में उस पर कई धाराएँ लगाई गईं और फिलहाल उसको जेल भेज दिया है।
उत्तर प्रदेश पुलिस को तनवीर से ऐसी अभद्र पोस्ट करने की साज़िश और किसके कहने से ऐसा किया पूछताछ करनी चाहिए। इतना ही नहीं, इसके साथ-साथ परिवार के सदस्यों के बैंक खातों की जाँच करनी चाहिए। क्योकि बिना किसी लेन-देन के कोई इस तरह की अभद्र टिप्पणी नहीं कर सकता। 
NBT
उत्तर प्रदेश पुलिस की FIR 
गाजीपुर एसपी डॉ ओमप्रकाश सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया है कि तनवीर खान गाजीपुर के दिलदारनगर क्षेत्र का रहने वाला है और बिहार के नालंदा में पुलिस विभाग में बतौर आरक्षी तैनात था। उस पर आरोप है कि उसने 24 अप्रैल को अपने फेसबुक पेज पर उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री के खिलाफ रमजान में अजान के मामले को लेकर अभद्र टिप्पणी की थी।
क्या लिखा था ASI ने 
24 अप्रैल को एक फेसबुक पोस्ट सामने आया। इस पोस्ट में अजान न होने पर योगी आदित्यनाथ को गोली मारने की बात थी। जिस पर दिलदारनगर निवासी धनन्जय और विशाल ने स्थानीय पोस्ट में अपनी शिकायत दर्ज कराई। मामला संज्ञान में आने के बाद पहले इस पोस्ट को देखकर अंदाजा लगाया गया कि ये किसी सिरफिरे का कारनामा है। मगर, बाद में जब इस मामले को गंभीरता से लिया गया तो मालूम चला कि मुख्यमंत्री योगी के लिए इतनी लापरवाही भरा पोस्ट लिखने वाले बिहार पुलिस का जवान है।

तनवीर खान ने अपने फेसबुक एकाउंट से पोस्ट किया था, “दिलदार नगर और पूरे कामसरोवर (कामसर) में अजान नहीं हो रही है। योगी को गोली मार दो **को।”  मगर, 30 अप्रैल तक पोस्ट वायरल होने के बाद तनवीर खान ने अपना एकाउंट डिएक्टिवेट कर लिया। लेकिन कुछ लोगों ने ट्विटर पर उसके पोस्ट के स्क्रीनशॉट लेते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस से इस पर संज्ञान लेने की अपील की।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए देशभर में जारी लॉकडाउन के बीच मुसलमानों का पवित्र र....
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नागरिकता संशोधक कानून से लेकर आज व्यापक रूप से फैली कोरोना बीमारी से भारत ही नहीं विश्व लड़ रहा है, लेकिन भारत में अर...
सोशल मीडिया पर विवेक भारद्वाज ने ऐसी मानसिकता के लोगों का पुलिस विभाग में होना दुर्भाग्य बताते हुए लिखा है, “इंदिरा गाँधी के साथ क्या हुआ था, यह जानने के बावजूद इस प्रकार की मानसिकता के लोगों का पुलिस और भारतीय सेना में होना आश्चर्यजनक है। ऐसे लोग सलाखों के भीतर होने चाहिए, ना कि वर्दी में।”

मस्जिद में जमा थे 100 जमाती, समझाने गई पुलिस टीम पर हमला कर जमाती फरार

दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में कोरोना पॉजिटिव केस के बाद हड़कंप मचा हुआ है। निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात में कई लोगों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी कई मस्जिदों में इसी तरह के जमात की खबरें आ रही है। ऐसे में बिहार के मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी ब्लॉक के गीदड़गंज गांव की मस्जिद में सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ पढ़ाने गई पुलिस टीम पर स्थानीय मुसलमानों ने ना सिर्फ पथराव किया बल्कि फायरिंग भी कर दी। पुलिस के साथ हुए पथराव के बीच मस्जिद में ठहरे सभी जमाती फरार हो गए।
भास्कर की खबर के अनुसार लॉकडाउन के दौरान गीदड़गंज गांव की बड़ी मस्जिद में 100 से अधिक जमाती के रुकने की खबर मिलने पर मंगलवार की शाम जांच करने पहुंची पुलिस पर स्थानीय लोगों ने जमकर पत्थरबाजी और फायरिंग की। स्थानीय लोगों ने पुलिस को करीब एक किलोमीटर दूर मदरसा हनफीया तक खदेड़ दिया। लोगों ने पुलिस गाड़ी में तोड़फोड़ कर तालाब में गिरा दिया। गौरतलब है कि गीदड़गंज गांव के सभी लोग मुसलमान समुदाय के हैं।
दैनिक जागरण के अनुसार पुलिस जवानों ने वहां जाकर सामूहिक रूप से आयोजन करने से मना किया। इस पर वहां मौजूद लोगों की जवानों से बहस हो गई। देखते ही आसपास की सभी छतों से पुलिस पर पथराव शुरू हो गया। हिन्दुस्तान की खबर के अनुसार पथराव में अंचल अधिकारी सहित कई लोग जख्मी हो गए। बीडीओ और थानाध्यक्ष को किसी तरह जान बचाकर वहां से भागना पड़ा।  नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार पुलिस में मामले में कार्रवाई करते हुए 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। मधुबनी के एसपी ने बताया कि इस मस्जिद में आए लोग ज्यादातर नेपाल से आए हैं।
रांची, मेरठ और निजामुद्दीन के मस्जिदों में छिपे थे सैकड़ों विदेशी
इसी दौरान देश के कई इलाकों में मस्जिदों में विदेशी मौलवियों और जमातियों के छिपे होने से हड़कंप मच गया है। सोमवार, 30 मार्च को झारखंड की राजधानी रांची की एक मस्जिद से पुलिस ने 24 मौलवियों को हिरासत में लिया है।

ये लोग मलयेशिया, वेस्ट इंडीज और पोलैंड के रहने वाले हैं। ये सभी हिंदपीढ़ी में ग्वाल टोली के समीप स्थित बड़ी मस्जिद में किसी जमात में शामिल होने आये थे। पुलिस ने सभी को खेलगांव स्थित क्वारेंटाइन सेंटर पहुंचा दिया। प्रभात खबर के अनुसार पुलिस इनके यहां आने की वजह और इनकी गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटा रही है। बताया जा रहा है कि सभी लोग जनवरी से ही यहां हैं।


जागरण के अनुसार रांची के हिंदपीढ़ी बड़ी मस्जिद में विदेशियों के छुपे होने की सूचना पर पुलिस प्रशासन की टीम ने 18 विदेशियों सहित 24 को हिरासत में लेकर क्वारंटाइन किया है। पुलिस ने सोमवार की सुबह तड़के तीन बजे से चार बजे के बीच सभी को खेलगांव कैंपस में बने आइसोलेशन होम में शिफ्ट किया है।
निजामुद्दीन में जमा थे 1000 से ज्यादा जमाती
दिल्ली में 100 से ज्यादा लोगों के कोरोना वायरस के टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद निज़ामुद्दीन मरकज़ से सभी 2,100 लोगों को बाहर निकाला गया है। एनडीटीवी के अनुसार तब्लीगी जमात के मरकज से करीब 2100 लोगों को कोरोना वायरस की जांच के लि दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में ले जाया गया है। एनडीटीवी के अनुसार इस मरकज में विदेश से भी लोग आए हुए थे। यह सभी यहां पर आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे और निजामुद्दीन स्थित एक मस्जिद में रुके हुए थे।

मेरठ के मस्जिदों में छिपे थे 19 विदेशी मौलवी
इसके साथ ही मेरठ जिले की दो मस्जिदों में 19 विदेशी नागरिकों के मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। ये विदेशी जमात के संग 17 और 21 मार्च को मेरठ पहुंचे थे। ये विदेशी मौलवी इंडोनेशिया, केन्या, सूडान और जिबूती समेत अन्य देशों से हैं। दैनिक जागरण के अनुसार मवाना स्थित बिलाल मस्जिद में रविवार देर रात 10 और सरधना में आजाद नगर स्थित मस्जिद में नौ विदेशी मौलवी रह रहे थे। 

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार देश की राजधानी दिल्ली में निजामुद्दीन कोरोना वायरस का एक खतरनाक हॉटस्पॉट बनकर सामने ...
लॉकडाउन के दौरान इन्हें शरण देने वालों ने भी पुलिस को जानकारी देना मुनासिब नहीं समझा। हिन्दुस्तान के अनुसार किसी को पता न चले, इसलिए मस्जिद के बाहर ताला लगा रखा था।

कोरोना की जाँच के बिना पटना की मस्जिद में छिपा रखे थे 12 विदेशी मुसलमान

पटना मस्जिद विदेशी मुसलमानबिहार की राजधानी पटना में स्थित एक मस्जिद में विदेशियों को छिपाने का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, ये मामला राजधानी के भीड़भाड़ वाले इलाके कुर्जी का है। यहाँ गेट नं 74 के पास स्थित एक मस्जिद में कुछ विदेशी लोगों को छिपाकर रखा गया था। छिपे हुए विदेशी लोगों की संख्या 12 बताई जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये सभी सोमवार (16 मार्च) को पटना पहुँचे थे। मगर, पहले इस बारे में किसी को सूचना नहीं थी। लेकिन, खुलासा होते ही आसपास के मोहल्ले में ये खबर फैल गई और लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस भी फौरन इलाके में पहुँची और 12 विदेशियों को अपनी कस्टडी में ले लिया। पुलिस फिलहाल पूरे इलाके में छापेमारी कर रही है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों की मानें तो कुछ इन्हें तुर्की का बता रहे हैं, कुछ तुर्कमेनिस्तान का। इनकी कद-काठी देखते हुए चाइनीज उइगर होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। फिलहाल पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है।

न्यूज 18 की खबर के अनुसार, स्थानीय लोगों का कहना था कि सरकार को इन विदेशियों के बारे में जानकारी होनी चाहिए थी लेकिन कुछ लोगों की मदद से इन लोगों को धार्मिक स्थल की आड़ लेकर छिपाया गया। साथ ही इन लोगों ने अपनी मेडिकल जाँच भी नहीं करवाई। इन पर आरोप है कि धार्मिक स्थल में छिपकर ये लोग बिहार में घूम-घूमकर धर्म विशेष का प्रचार करते हैं।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार दिल्ली में कोरोना वायरस के फैलते प्रभाव को देखकर हर कोई हैरान है। धीरे-धीरे राष्ट्री.....

खबर के अनुसार, पुलिस इस मामले में जाँच कर रही है और मालूम हुआ है कि ये सभी जनवरी में यहाँ आए थे और इनके पास से मिला वीजा, पासपोर्ट भी सही है। जिस कारण इन्हें केवल मेडिकल जाँच के लिए भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि मेडिकल जाँच के बाद इन्हें छोड़ दिया जाएगा।

शाहीन बाग़ में भारत के ‘टुकड़े-टुकड़े’ वाले पोस्टर: नक्शों में उत्तर-पूर्व को देश से कटा हुआ दिखाया

शाहीन बाग़, उत्तर-पूर्व भारतदिल्ली पुलिस ने बिहार पुलिस के सहयोग से जहानाबाद के काको से देशद्रोह के आरोपित शरजील इमाम को गिरफ़्तार किया। शाहीन बाग़ प्रदर्शन के मुख्य साज़िशकर्ता शरजील ने पूरे नॉर्थ-ईस्ट को शेष भारत से अलग करने के लोए लोगों को भड़काया था। उसके फेसबुक पोस्ट से ही पता चल गया था कि वो एक इस्लामिक कट्टरपंथी विचारधारा से प्रेरित व्यक्ति है। पुलिस की पूछताछ के दौरान भी ये बातें स्पष्ट हो गई है कि वो इस्लामी कट्टरपंथी जहरीले भाषण देने का उसका पुराना रिकॉर्ड रहा है।
शाहीन बाग़ प्रदर्शनस्थल पर यूँ तो हिंदुत्व विरोधी कई पोस्टर समय-समय पर लगाए जाते रहे हैं लेकिन अब वहाँ ऐसे पोस्टर भी लगाए गए हैं, जो भारत के ‘टुकड़े-टुकड़े’ वाली मानसिकता के परिचायक हैं। मसलन, वहाँ भारत का ऐसा नक्शा लगाया गया है, जहाँ उत्तर-पूर्व भारत को देश से अलग दिखाया गया है। ऐसा दिखाया गया है कि उत्तर पूर्वी भारत को शेष भारत से अलग काट दिया गया है। नीचे संलग्न किए गए ट्वीट में आप उस पोस्टर को देख सकते हैं:
सोमवार (फरवरी 3, 2020) को ऑपइंडिया के रिपोर्टरों ने शाहीन बाग़ के धरनास्थल पर जाकर पड़ताल की तो पाया कि देश के ‘टुकड़े-टुकड़े’ करने की मानसिकता का परिचय देने वाला वो पोस्टर वहाँ पर लगा हुआ था, जिसमें नार्थ-ईस्ट इंडिया को देश के बाकि हिस्सों से काट कर दिखाया गया है। हमारे रिपोर्टरों ने विभिन्न एंगलों से तवीरें क्लिक की, जिसमें वो पोस्टर स्पष्ट दिख रहा है। इससे साफ़ मालूम होता है कि शाहीन बाग़ प्रदर्शन के पीछे देशविरोधी मानसिकता काम कर रही है।
यही वो ऐसे पोस्टर्स हैं, जिन्हें लहराते हुए ‘जिन्ना वाली आज़ादी’ का नारा लगाया गया था। अब जब प्रदर्शन को आयोजित करने वाला ही सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकेन्स नेक) को काट डालने की बात करता है और वहाँ आवागमन को ठप्प करने के लिए लोगों को भड़काता है तो फिर उस प्रदर्शन में मौजूद लोगों की मानसिकता उससे अलग तो होगी नहीं।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर ही उत्तर-पूरी भारत के राज्यों को शेष भारत से जोड़ता है। संवेदनशील इलाक़ा होने के कारण यहाँ असम राइफल्स, सीआरपीएस, बीएसएफ और सेना के जवान लगातार गश्त करते रहते हैं।
ऐसा नहीं है कि देश के सभी राजनीतिक दलों ने इस पोस्टरों का विरोध किया हो। कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इन पोस्टरों का समर्थन किया है। सीएए के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के नाम पर जब हिंसा भड़की तो इसी तरह की एक उपद्रवी भीड़ का नेतृत्व करते हुए आप विधायक अमानतुल्लाह ख़ान को भी देखा गया था।
दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पहले ही कह चुके हैं कि वो शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े हैं। दिल्ली में कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार मुकेश शर्मा भी कह चुके हैं कि वो शाहीन बाग़ में हो रहे प्रदर्शन में मदद पहुँचाते रहते हैं और उन लोगों से उनकी बात होती रहती है।(साभार)
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार शाहीन बाग का मास्टरमाइंड शरजील इमाम भारत को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहता था। दिल्ली पु...
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार देश के जाने माने रक्षा विश्लेषक, पूर्व रॉ अधिकारी और रिटायर्ड कर्नल आरएसएन सिंह ने रा....
दिल्ली में केजरीवाल का हारना देशहित में
जिस तरह शरजील के बयान आ रहे हैं, वह देशहित में नहीं। जब हम देश की गुप्तचर एजेंसीज और RAW के वर्तमान एवं सेवानिर्वित अधिकारियों की बातों का मन्थन करने पर कई बातें निकलकर आती हैं। कई बातें सुनकर होश ही उड़ जाते हैं। अगर केजरीवाल ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में देश-विरोधी नारे लगाने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की इजाजत दे दी होती, कोई शाहीन बाग़ एवं प्रदर्शन नहीं होता। यदि दिल्ली की जनता मुफ्तखोरी की चाहत से बाहर निकल CAA विरोधियों को 
चुनावों में चारों खाने चित करते हैं, उसके बहुत दूरगामी परिणाम होंगे। इसका प्रभाव केवल दिल्ली ही नहीं, समस्त भारत पर पड़ेगा। जब तक केजरीवाल सत्ता में रहेगा, देश इन अलगाववादियों को झेलने के लिए मजबूर होता रहेगा। प्रमाण देखिए: अलीगढ में भड़काऊ भाषण देकर भागा मुंबई से गिरफ्तार हुआ डॉ कफील का यह कहना,"मुझे यूपी मत भेजना", स्पष्ट कर रहा है कि भाजपा दंगाइयों और अलगाववादियों पर पहाड़ बन टूट रही। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि पिछली सरकारों ने जितना इन एजेंसीज को कमजोर किया था, मोदी सरकार ने उससे कहीं अधिक इन्हे मजबूत किया है। जब तक दिल्ली में केजरीवाल सरकार रहेगी, पता नहीं कितने शरजील, खारिद और कन्हैया कुरकुरमुते की तरह अराजकता पैदा करते रहेंगे। अगर केजरीवाल ने जेएनयू में देश-विरोधी नारे लगाने वालों के विरुद्ध सख्ती दिखाई होती, दिल्ली ही देश में शांति रह रही होती।


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