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'Islam on the Move' पुस्तक में हस्तमैथुन, समलैंगिकता, सबके सामने शौच-पेशाब करने की तबलीगियों की पूरी ट्रेनिंग की कहानी

Coronavirus: 20 states at risk due to Tablighi Jamaat, search ...
OAPEN Library - Islam on the Move : The Tablighi Jama'at in ...आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
तबलीगी जमातियों के कोरोना संक्रमित होने के कारण के चर्चा में आने के बाद उनसे संबंधित नई-नई बातों का खुलासा हो रहा है। टीवी परिचर्चाओं में भाग लेने वाले अधिकतर मुस्लिम विद्धवान जमात का घोर विरोध करते देख हैरानी होती है, कि आखिर ये लोग भी इस्लाम का प्रचार एवं प्रसार कर रहे हैं। लेकिन खुलकर नहीं नहीं बताया जाता कि आखिर विरोध का मूल कारण क्या है? इतना तो जरूर कहते हैं कि "मरकज़ी जमाती कुरान को नहीं मानते।" ऐसे में गैर-मुस्लिमों को यह सोंचने के लिए विवश होना पड़ता है कि "जब ये लोग कुरान को नहीं मानते, फिर किस आधार पर इनको मुसलमान अनुसरण करते हैं?"
लेकिन मलेशिया के लेखक फारिश अ नूर ने अपनी किताब, ‘इस्लाम ऑन द मूव’ में इसी से संबधित चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने अपनी किताब में बताया है कि जो जमाती मरकज़ में रहते हैं, वे एक-दूसरे के सामने खुलेआम शौच करने व पेशाब करने में शर्म नहीं करते। क्योंकि उनके भीतर अपने शरीर को लेकर शर्म खत्म हो चुकी होती है। 
मलेशिया लेखक की किताब का अंश
Islam on the Move: The Tablighi Jama'at in Southeast Asia: Farish ...इतना ही नहीं, वहाँ टॉयलेट का डिजाइन इस तरह से बनाया जाता है कि तबलगियों को शौच करते हुए सब देख सकें। ताकि अन्य तबलीगी अपने भाइयों को आँकें और उनके पेशाब करने की मुद्रा को सुन्नत के अनुरूप सुधार सकें। किताब में इस बात का उल्लेख है कि मुस्लिमों को बैठकर पेशाब करना चाहिए, खड़े होकर नहीं।

इसके अलावा इन खुले शौचालयों का एक उद्देश्य ये भी होता है कि इस बात को सुनिश्चित किया जा सके कि तबलीगी जमात का कोई भी जमाती मरकज़ के भीतर समलैंगिक संबंध और हस्तमैथुन जैसी क्रियाएँ न करें। क्योंकि ये दोनों चीजें इस्लाम में हराम है। 
अब अगर, मलेशिया के लेखक का अवलोकन उचित है और ये सारी बातें सच हैं तो हमें इस समय जमातियों से संबंधित खबरों पर हैरान नहीं होना चाहिए। क्योंकि इनकी शर्म तो उस मरकज़ में ही खत्म कर दी जाती है, जहाँ दीन की बातें सिखाने का दावा होता है। लेकिन उसके बदले मजहब का हवाला देकर ये सब सिखाया जाता है।

PDF) Farish A. Noor, Islam on the move: the Tablighi Jama'at in ...
स्तंभकार और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विश्लेषक दिव्या कुमार सोती ने भी इस जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा किया है। उन्होंने अपने ट्विटर पर इसके संबंध में लिखा, “आज हर कोई आइसोलेशन में रखे गए तबलीगियों को देखकर हैरान है कि वे इतना क्यों थूक रहे हैं। तो बता दें कि उनका धर्मशास्त्र उन्हें ऐसा करने की शिक्षा देता है कि नमाज पढ़ते समय या मजहबी कार्य करते समय शैतान की दखलअंदाजी खत्म करने के लिए वो ये करें।”
इन सभी बातों के अलावा हमें मरकज़ के मुखिया मौलाना साद की वो वायरल ऑडियो भी ध्यान में रखने की आवश्यकता है, जिसमें वह सभी जमातियों को यह शिक्षा देने की कोशिश कर रहा था कि कोरोना वायरस एक साजिश है, जिसे मुस्लिमों को मारने के लिए रचा जा रहा है। साथ ही सरकार को एक शैतान के रूप में प्रदर्शित किया था क्योंकि उन्होंने कोरोना वायरस के मद्देनजर किसी भी धार्मिक स्थल पर भीड़ इकट्ठा करने को मना किया था।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार रेडियो मिर्ची की आरजे सायमा अपने विवादित बयानों के लिए पहले ही चर्चित हैं। जामिया मे.....
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तबलीगी जमात का सरगना मौलाना साद, जिसने दावा किया था कि वो कोरोना संक्रमण के चलते एहतियात बरतते हुए क्वारंटीन में ह.....
इसी शिक्षा का असर है कि अब स्वास्थ्यकर्मियों को जमातियों के बेहूदे रवैये का सामना करना पड़ा रहा है। और खबरें आ रही हैं कि वे सरकार व प्रशासन की बात नहीं मान रहे हैं, वॉर्डों में थूक रहे हैं, नर्सों से बदतमीजी कर रहे हैं, फब्तियाँ कस रहे हैं। आस-पास गंदगी मचा रहे हैं और खुलेआम कॉरिडोर में शौच कर रहे हैं।

लॉकडाउन के दौरान भी सक्रिय है अवॉर्ड वापसी गैंग


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
केंद्र की सत्ता पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के काबिज होने पर वर्षों से सत्ता की मलाई खा रहे लोगों को नागवार गुजरा। सत्ता से दूरी ने उन्हें परेशान कर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार को बदनाम करने के लिए हर हथकंडा अपनाना शुरू कर दिया। कभी मॉब लिंचिंग के नाम पर तो, कभी अवॉर्ड वापसी के रूप में अपनी साजिश को अंजाम देते रहे। आज जब पूरा देश कोरोना वायरस से लड़ रहा है, वहीं अवॉर्ड वापसी गैंग प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। लॉकडाउन के दौरान वह लोगों को गुमराह कर मोदी सरकार को नाकाम साबित करने में लगा है। इसके लिए मनगढ़ंत और झूठी खबरों का सहारा लेने से भी बाज नहीं आ रहा है। हालांकि पहले की तरह आज भी उसका नापाक चेहरा बेनकाब हो रहा है।
लॉकडाउन बढ़ाये जाने की झूठी खबर
प्रोपगेंडा पत्रकार शेखर गुप्ता ने सोमवार को वेबसाइट ‘द प्रिंट’ से एक बार फिर फेक न्यूज फैलाने की कोशिश की। द प्रिंट में दावा किया गया कि मोदी सरकार कोरोना वायरस लॉकडाउन को 14 अप्रैल के बाद भी कुछ हफ्तों के लिए बढ़ा सकती है।

 ‘Modi govt could extent coronavirus lockdown by a week a migrant exodus triggers alarm’ शीर्षक की ‘एक्सक्लूसिव’ रिपोर्ट में कहा गया कि दिल्ली एनसीआर से पलायन संकट के कारण लॉकडाउन को एक हफ्ते बढ़ाया जा सकता है।

सोशल मीडिया पर खबर फैलायी गयी कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए देश को लॉकडाउन के एक और चरण से गुजरना पड़ सकता है। खबर में बताया गया है कि स्वास्थ्य, प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स और फाइनेंस से जुड़े विशेषज्ञों की एक समिति ने मई में दूसरे लॉकडाउन की सिफारिश की है। इस रिपोर्ट में 17 अप्रैल से बंदिशें कम करने के बाद 18 अप्रैल से 31 मई तक दोबारा लॉकडाउन की सिफारिश की गयी है।
इस खबर पर प्रसार भारती न्यूज सर्विस (पीबीएनएस) ने यह कहते हुए ट्वीट किया कि कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने लॉकडाउन बढ़ाये जाने से साफ इंकार किया है। पीबीएनएस ने ट्वीट करते हुए कहा कि यह फेक न्यूज है। खबर एकदम झूठी है। पीबीएनएस ने कैबिनेट सचिव से इस खबर के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने हैरानी जताते हुए साफ कहा कि लॉकडाउन को बढ़ाये जाने की कोई योजना नहीं है।
सेना ने किया इमरजेंसी की अफवाहों का खंडन
भारतीय सेना को ट्वीट के जरिये सोशल मीडिया पर फैलायी जा रही उन अफवाहों का खंडन करना पड़ा, जिसमें कहा गया था कि अप्रैल के मध्य में इमरजेंसी की घोषणा कर दी जाएगी। सेना ने साफ किया है कि सोशल मीडिया में फैलाया जा रहा ये वायरल मैसेज पूरी तरह से गलत और दुर्भावनापूर्ण है।


‘द वायर’ ने फैलाया सीएम योगी का झूठा बयान
‘द वायर’ जैसे प्रोपेगेंडा पोर्टल्स इस आपदा काल में भी अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं। ताज़ा मामला ‘द वायर’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन का है, जिसने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में फेक न्यूज़ फैलाई है। तबलीगी जमात को बचाने के लिए तड़पते ‘द वायर’ ने फेक न्यूज़ चलाया कि जिस दिन इस इस्लामी संगठन का मजहबी कार्यक्रम हुआ, उसी दिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि 25 मार्च से 2 अप्रैल तक अयोध्या प्रस्तावित विशाल रामनवमी मेला का आयोजन नहीं रुकेगा क्योंकि भगवान राम अपने भक्तों को कोरोना वायरस से बचाएंगे।

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के एमडीए सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने सिद्धार्थ वरदराजन की ये चोरी पकड़ ली और उन्हें जम कर फटकार लगाई। उन्होंने ‘द वायर’ और उसके संस्थापक पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने कभी कोई ऐसी बात कही ही नहीं है, जैसा कि लेख में दावा किया गया है। उन्होंने सिद्धार्थ को चेताया कि अगर उन्होंने अपनी इस फेक न्यूज़ को तुरंत डिलीट नहीं किया तो कार्रवाई की जाएगी और उन पर मानहानि का मुकदमा भी चलाया जाएगा। साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए ये भी कहा कि कार्रवाई के बाद वेबसाइट के साथ-साथ केस लड़ने के लिए भी सिद्धार्थ वरदराजन को डोनेशन माँगना पड़ जाएगा।



वैष्णों देवी में श्रद्धालुओं के फंसे होने की झूठी खबर
इसी तरह सोशल मीडिया पर ऐसी फैलाई जा रही हैं कि वैष्णो देवी तीर्थ में करीब 400 श्रद्धालु फंसे हुए हैं। जब पीआईपी की फैक्टचेक टीम ने इस खबर की जांच की तो पाया कि यह पूरी तरह झूठी खबर है। पीआईबी ने ट्वीटकर बताया कि कोई भी श्रद्धालु कटरा या वैष्णो देवी तीर्थ में नहीं फंसा हुआ है। यात्रा को लॉकडाउन होने से बहुत पहले, 18 मार्च को ही रोक दिया गया था।

इतना ही नहीं, शाहीन बाग़ नागरिकता संशोधक कानून पर ठेकेदार बन समाचार चैनलों पर परिचर्चाओं में हिस्सा लेने वाले तथाकथित इस्लामिक स्कॉलर शुएब जमाई निजामुद्दीन में लॉक आउट होने के बावजूद जमा हुए हज़ारों जमातियों के बचाव में कहता है कि कोरोना वैष्णो मंदिर में जमा लोगों से भी फ़ैल सकता है, जबकि अपने आप को इस्लामिक स्कॉलर कहने वाले को नहीं मालूम की लॉक डाउन से पहले ही भारत के जितने भी बड़े मन्दिर हैं, उन्हें बंद कर दिया गया था। दूसरे, यह कि निजामुद्दीन मरकज़ से जगह-जगह फैले जमातियों ने समूचे भारत में कोरोना को बढ़ावा दिया। और अगर मरकज़ इस्लामिक था, फिर क्यों इसके आयोजक फरार हैं? सिद्ध करता है कि किसी सोंची-समझी सियासत के भारत में अराजकता फैलाना ही इनका उद्देश्य था। पहले नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में शांति के नाम पर प्रदर्शन और धरनों को आयोजन और अब इस्लाम की आड़ में कोरोना जैसी संक्रामक बीमारी को फैलाना। 
दूसरे, जिस तरह मुसलमानों में मस्जिद जाने, पांचों समय की नमाज और इस्लाम का प्रचार करने वाले जमाती हस्पतालों में डॉक्टरों पर थूक रहे हैं, उन्हें गालियां दे रहे हैं, यह कोई प्रचारक नहीं शैतान का काम है और कोई #award vapsi, #mob lynching, #not in my name आदि गैंग और वामपंथी इन जमातियों की इन शैतानी  हरकतों पर खामोश हैं, क्यों?
इन सब के बावजूद, आम मुसलमानों को इनसे होशियार रहने की जरुरत है, क्योकि ये लोग मुस्लिम समाज में कोरोना बीमारी को फैलाकर उन्ही के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं, जो चिंता का विषय है।   
सिर्फ आधिकारिक खबर साझा करने की झूठी खबर
गृहमंत्रालय के हवाले से सोशल मीडिया पर खबर फैलायी गई कि कोरोना वायरस के बारे में केवल सरकारी एजेंसियां खबर पोस्ट कर सकती हैं। जब इस खबर की पड़ताल की गई, तो पता चला कि गृह मंत्रालय की ओर से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया था।

‘ऑल्ट न्यूज़’ के संस्थापक ने फैलायी झूठी खबर
इसी तरह कथित फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज़’ के संस्थापक प्रतीक सिन्हा ने फेक अकाउंट को रीट्वीट कर झूठी खबर फैलाने की कोशिश की। एक ट्विटर अकाउंट जो कई दिनों से बंद पड़ा हुआ था। उस ट्विटर अकाउंट से अचानक से एक वीडियो ट्वीट किया जाता है, जिसमें एक महिला डॉक्टर बताती है कि किस तरह डॉक्टरों को सरकार द्वारा कुछ भी सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। वो बताती हैं कि उसने जो मास्क पहना हुआ है, वो काफ़ी पुराना है और उसे बार-बार धो कर उसे पहनना पड़ रहा है। वो डॉक्टर बताती हैं कि वो एक सप्ताह से यही मास्क पहन रही हैं। इस ट्वीट का सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस ट्विटर अकाउंट से ट्वीट किया गया था, वह अकाउंट किसी पुरुष के नाम पर था, जिसका हैंडल है- विक्रमादित्य। पहले नाम भी किसी पुरुष का था लेकिन इसको वायरल करने के लिए इसे किसी महिला के नाम पर बना दिया गया।



हैदराबाद में हुए सड़क हादसे को लॉकडाउन से जोड़ा गया
28 मार्च को हैदराबाद के बाहरी इलाके में हुए एक सड़क हादसे में 8 मजदूरों की मौत हो गई। लॉरी मजदूरों को कर्नाटक में उनके गांवों में ले जा रही थी। 31 मजदूर कर्नाटक के रायचूर जिले में अपने गांव लौट रहे थे। यह एक सामान्य सड़क हादसा था, लेकिन इस हादसे को भी लॉकडाउन से जोड़ दिया गया। यानि कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा। जो इनकी क्षीण मानसिकता को दर्शाता है। इस समाचार को पढ़ अथवा सुनने पर जनता कोरोना जैसी संक्रामक बीमारी से बचाव में सरकारी प्रयासों को नकारात्मक दृष्टि से देख सरकार की आलोचना करे। 

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दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में कोरोना पॉजिटिव केस के बाद हड़कंप मचा हुआ है। निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात में कई ल....
झूठ बोलते हुए पकड़ा गया टाइम्स ऑफ इंडिया का पत्रकार 
बरेली में टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार कंवरदीप सिंह ने ट्वीट के जरिए जिला प्रशासन से सवाल किया कि स्प्रे के जरिए कोरोना को मारने की कोशिश हो रही है या लोगों को ? कंवरदीप के बाद अवॉर्ड वापसी और लिबरल गैंग सक्रिय हो गया। इस मामले को मजदूर विरोधी बताकर मोदी और योगी सरकार को बदनाम करने की कोशिश की गई। हालांकि कई ट्विटर यूजर्स ने कंवरदीप पर खबर को सनसनीखेज बनाने का आरोप लगाया। साथ ही ट्वीट कर बताया कि इस तरह के स्प्रे का इस्तेमाल कुछ ही दिन पहले केरल में किया गया था। लेकिन किसी ने इस पर कोई सवाल नहीं उठाया था, क्योंकि वहां पर लेफ्ट की सरकार है।

मस्जिद में जमा थे 100 जमाती, समझाने गई पुलिस टीम पर हमला कर जमाती फरार

दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में कोरोना पॉजिटिव केस के बाद हड़कंप मचा हुआ है। निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात में कई लोगों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी कई मस्जिदों में इसी तरह के जमात की खबरें आ रही है। ऐसे में बिहार के मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी ब्लॉक के गीदड़गंज गांव की मस्जिद में सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ पढ़ाने गई पुलिस टीम पर स्थानीय मुसलमानों ने ना सिर्फ पथराव किया बल्कि फायरिंग भी कर दी। पुलिस के साथ हुए पथराव के बीच मस्जिद में ठहरे सभी जमाती फरार हो गए।
भास्कर की खबर के अनुसार लॉकडाउन के दौरान गीदड़गंज गांव की बड़ी मस्जिद में 100 से अधिक जमाती के रुकने की खबर मिलने पर मंगलवार की शाम जांच करने पहुंची पुलिस पर स्थानीय लोगों ने जमकर पत्थरबाजी और फायरिंग की। स्थानीय लोगों ने पुलिस को करीब एक किलोमीटर दूर मदरसा हनफीया तक खदेड़ दिया। लोगों ने पुलिस गाड़ी में तोड़फोड़ कर तालाब में गिरा दिया। गौरतलब है कि गीदड़गंज गांव के सभी लोग मुसलमान समुदाय के हैं।
दैनिक जागरण के अनुसार पुलिस जवानों ने वहां जाकर सामूहिक रूप से आयोजन करने से मना किया। इस पर वहां मौजूद लोगों की जवानों से बहस हो गई। देखते ही आसपास की सभी छतों से पुलिस पर पथराव शुरू हो गया। हिन्दुस्तान की खबर के अनुसार पथराव में अंचल अधिकारी सहित कई लोग जख्मी हो गए। बीडीओ और थानाध्यक्ष को किसी तरह जान बचाकर वहां से भागना पड़ा।  नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार पुलिस में मामले में कार्रवाई करते हुए 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। मधुबनी के एसपी ने बताया कि इस मस्जिद में आए लोग ज्यादातर नेपाल से आए हैं।
रांची, मेरठ और निजामुद्दीन के मस्जिदों में छिपे थे सैकड़ों विदेशी
इसी दौरान देश के कई इलाकों में मस्जिदों में विदेशी मौलवियों और जमातियों के छिपे होने से हड़कंप मच गया है। सोमवार, 30 मार्च को झारखंड की राजधानी रांची की एक मस्जिद से पुलिस ने 24 मौलवियों को हिरासत में लिया है।

ये लोग मलयेशिया, वेस्ट इंडीज और पोलैंड के रहने वाले हैं। ये सभी हिंदपीढ़ी में ग्वाल टोली के समीप स्थित बड़ी मस्जिद में किसी जमात में शामिल होने आये थे। पुलिस ने सभी को खेलगांव स्थित क्वारेंटाइन सेंटर पहुंचा दिया। प्रभात खबर के अनुसार पुलिस इनके यहां आने की वजह और इनकी गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटा रही है। बताया जा रहा है कि सभी लोग जनवरी से ही यहां हैं।


जागरण के अनुसार रांची के हिंदपीढ़ी बड़ी मस्जिद में विदेशियों के छुपे होने की सूचना पर पुलिस प्रशासन की टीम ने 18 विदेशियों सहित 24 को हिरासत में लेकर क्वारंटाइन किया है। पुलिस ने सोमवार की सुबह तड़के तीन बजे से चार बजे के बीच सभी को खेलगांव कैंपस में बने आइसोलेशन होम में शिफ्ट किया है।
निजामुद्दीन में जमा थे 1000 से ज्यादा जमाती
दिल्ली में 100 से ज्यादा लोगों के कोरोना वायरस के टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद निज़ामुद्दीन मरकज़ से सभी 2,100 लोगों को बाहर निकाला गया है। एनडीटीवी के अनुसार तब्लीगी जमात के मरकज से करीब 2100 लोगों को कोरोना वायरस की जांच के लि दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में ले जाया गया है। एनडीटीवी के अनुसार इस मरकज में विदेश से भी लोग आए हुए थे। यह सभी यहां पर आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे और निजामुद्दीन स्थित एक मस्जिद में रुके हुए थे।

मेरठ के मस्जिदों में छिपे थे 19 विदेशी मौलवी
इसके साथ ही मेरठ जिले की दो मस्जिदों में 19 विदेशी नागरिकों के मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। ये विदेशी जमात के संग 17 और 21 मार्च को मेरठ पहुंचे थे। ये विदेशी मौलवी इंडोनेशिया, केन्या, सूडान और जिबूती समेत अन्य देशों से हैं। दैनिक जागरण के अनुसार मवाना स्थित बिलाल मस्जिद में रविवार देर रात 10 और सरधना में आजाद नगर स्थित मस्जिद में नौ विदेशी मौलवी रह रहे थे। 

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार देश की राजधानी दिल्ली में निजामुद्दीन कोरोना वायरस का एक खतरनाक हॉटस्पॉट बनकर सामने ...
लॉकडाउन के दौरान इन्हें शरण देने वालों ने भी पुलिस को जानकारी देना मुनासिब नहीं समझा। हिन्दुस्तान के अनुसार किसी को पता न चले, इसलिए मस्जिद के बाहर ताला लगा रखा था।

सरकारी दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाने वाली तबलीगी जमात के बचाव में उतरा लिबरल गैंग

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  
देश की राजधानी दिल्ली में निजामुद्दीन कोरोना वायरस का एक खतरनाक हॉटस्पॉट बनकर सामने आया है। दिल्ली में धारा 144 लागू होने के बावजूद निजामुद्दीन इलाके में एक धार्मिक जलसा हुआ, जिसमें करीब 2000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। लेकिन इस जलसे में शामिल होने वाले 10 लोगों की मौत और 24 लोगों के कोरोना पॉजिटिव पाये जाने के बाद हड़कंप मच गया और फिर इन्हें अस्पतालों में भेजने का सिलसिला शुरू हुआ। इस जलसे के आयोजन से संबंधित जांच में हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं। सामने आए तथ्यों से स्पष्ट हुआ है कि तबलीगी जमात द्वारा सारे नियम-कायदों और सरकारी दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाकर मस्जिद में मजहबी कार्यक्रम आयोजित किए गए। वहीं इस घटना की निंदा करने की जगह इसके बचाव में लिबरल गैंग सक्रिय हो गया है। 
पुलिस ने मौलानाओं को थमाया था नोटिस

दिल्ली पुलिस ने 23 मार्च को ही तबलीगी जमात के मौलानाओं को थाने बुलाकर समझाया था, कि मरकज में हमेशा डेढ़-दो हजार लोग जुटते हैं, इसे रोकना चाहिए।सीसीटीवी के सामने पुलिस ने बता दिया था कि सारे धार्मिक स्थान बंद हैं और 5 लोगों से ज्यादा की जुटान पर रोक है। पुलिस ने ये भी बताया था कि हम लोग आपलोगों की सुरक्षा के लिए हैं। मौलानाओं को बताया गया था कि सोशल डिस्टेंसिंग का जितना पालन किया जाएगा, उतना अच्छा रहेगा क्योंकि ये कोरोना वायरस कोई धर्म या मजहब देख कर आक्रमण नहीं करता है। पुलिस ने मौलानाओं को नोटिस थमाते हुए कहा था कि सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए। उस समय भी मरकज के लोगों ने स्वीकार किया था कि उनकी इमारत में 1500 लोग मौजूद हैं और 1000 लोगों को वापस भेजा जा चुका है। पुलिस ने इन्हें सख्त शब्दों में चेतावनी दी थी, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। इन पत्रकारों ने यह नहीं बताया कि मंदिरों में हुए जुटान से कितने लोगों को अबतक कोरोना का संक्रमण हुआ है। कितने लोगों की मौत हुई है। जब तबलीगी जमात के कार्यक्रम में जुटे लोगों में कोरोना संक्रमण पाया गया है। कई लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। तबलीगी जमात के लोगों के दिल्ली के साथ ही कई राज्यों में फैलने से पूरे देश को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति उन लोगों का खुलेआम बचाव कैसे कर सकता है, जो सार्वजनिक रूप से सरकारी दिशा-निर्देशों और मेडिकल सलाहों को धता बताया हों?

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को किया था आगाह
केंद्रीय गृहमंत्रालय का कहना है कि लॉक़डाउन से पहले ही 21 मार्च को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को पत्र लिखकर आगाह किया गया था। इसमें दिल्ली पुलिस के आयुक्त भी शामिल थे। तेलंगाना में जमात के कुछ लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि होते ही गृहमंत्रालय ने इसका उल्लेख करते हुए सभी राज्यों का कहा था कि इसमें शामिल सभी देशी-विदेशी लोगों की पहचान करने और उसके बाद उनकी कोरोना की जांच सुनिश्चित करने को कहा था।

आइबी ने भी राज्यों को दी थी खतरे की चेतावनी
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार खुफिया ब्यूरो (आइबी) ने भी 28 और 29 मार्च को सभी राज्यों के डीजीपी को पत्र लिखकर जमात से जुड़े लोगों से कोरोना के फैलने के खतरे के प्रति आगाह किया था। खुफिया ब्यूरो ने बताया था कि निजामुद्दीन के मरकज में भाग लेकर लौटने वाले तबलीगी कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकते हैं, इसलिए राज्यों को उनके संपर्क में आने वाले सभी लोगों की पहचान कर उन्हें आइसोलेशन में रखने का प्रबंध करना चाहिए। आइबी ने राज्यों को इस दिशा में तत्काल कदम उठाने को कहा था।

13 मार्च को 200 से ज्यादा लोगों के जुटने पर लगी रोक
इससे पहले दिल्ली सरकार ने 13 मार्च को ही आदेश जारी कर 200 लोगों के जुटाने पर रोक लगा दी थी। उस समस्य इस आदेश की समयावधि 31 मार्च तक रखी गई थी। बावजूद इसके मरकज में कार्यक्रम आयोजित किए गए। 16 मार्च को ख़ुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया कि दिल्ली में कहीं भी 50 लोगों से ज्यादा की भीड़ नहीं जुटेगी। फिर 21 मार्च को 5 से ज्यादा लोगों के जुटान पर रोक लगा दी गई।

जान-बूझकर संक्रमण के ख़तरे को किया नजरअंदाज़
22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगाया गया। इसके एक दिन बाद भी वहां 2500 लोग मौजूद थे, जिनमें से 1500 के चले जाने का दावा मौलाना ने किया है। 25 मार्च को लॉकडाउन के दौरान भी 1000 मुसलमान वहां मौजूद थे। 28 मार्च को एसीपी ने दिल्ली मरकज को नोटिस भेजी लेकिन उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने अपील की थी कि जो जहाँ है वहीं रहे, इसीलिए वहां लोग रुके हुए हैं। साथ ही दावा किया गया कि इतने लोग काफ़ी पहले से यहां पर मौजूद हैं। उपर्युक्त सभी बातों से स्पष्ट पता चलता है कि तबलीगी जमात ने हर एक सरकारी आदेश की धज्जियां उड़ाई और जान-बूझकर इस संक्रमण के खतरे को नजरअंदाज़ कर पूरे देश को ख़तरे में डाल दिया।

मेडिकल सलाहों की उड़ाईं धज्जियां
अब हम आपको बताते हैं कि मरकज में कैसे जनता कर्फ्यू और उसके बाद हुए लॉकडाउन के दौरान भी धड़ल्ले से कार्यक्रम चल रहे थे और मौलाना-मौलवी कोरोना वायरस की बात करते हुए न सिर्फ़ तमाम मेडिकल सलाहों की धज्जियाँ उड़ा रहे थे, बल्कि अंधविश्वास भी फैला रहे थे। 24 मार्च को यूट्यूब पर ‘असबाब का इस्तेमाल ईमान के ख़िलाफ़ नहीं- हजरत अली मौलाना साद’ नाम से ‘दिल्ली मरकज’ यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड किया गया। इसमें मौलाना ने लोगों को एक-दूसरे के साथ एक थाली में खाने और डॉक्टरों की बात मानने की बजाए अल्लाह से दुआ करने की सलाह दी।

बचाव में उतरे एजेंडा पत्रकार और लिबरल गैंग
जब तबलीगी जमात पर प्रशासन और कानून का शिकंजा कसने लगा, तो एजेंडा पत्रकार और लिबरल गैंग उनके बचाव में सामने आ गए। राणा अयूब ने तबलीगी जमात को क्लीन-चिट देने की कोशिश करते हुए एक खबर की लिंक साझा की है। साथ ही दावा किया है कि जब 22 मार्च को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘जनता कर्फ्यू’ का ऐलान किया, तभी मरकज में सारे कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया गया। इसके बाद अयूब ने वहाँ इतनी संख्या में लोगों के छिपे होने के पीछे रेलवे का दोष गिना दिया है, क्योंकि देश भर में रेल सेवा बंद हो गई।




वहीं न्यूज-24 के एंकर संदीप चौधरी तबलीगी जमात के बचाव में स्वास्थ्य मंत्रालय और अन्य मंदिरों के बंद होने की क्रोनोलॉजी समझाने लगे। संदीप चौधरी का समर्थन करते हुए ओम थानवी के साथ ही कई अन्य पत्रकारों ने भी ट्वीट किया।
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कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देशभर में लगे लॉकडाउन के दौरान दिल्ली के निजामुद्दीन से आई एक खबर ने पूरे द....
इन पत्रकारों ने यह नहीं बताया कि मंदिरों में हुए जुटान से कितने लोगों को अबतक कोरोना का संक्रमण हुआ है। कितने लोगों की मौत हुई है। जब तबलीगी जमात के कार्यक्रम में जुटे लोगों में कोरोना संक्रमण पाया गया है। कई लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। तबलीगी जमात के लोगों के दिल्ली के साथ ही कई राज्यों में फैलने से पूरे देश को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति उन लोगों का खुलेआम बचाव कैसे कर सकता है, जो सार्वजनिक रूप से सरकारी दिशा-निर्देशों और मेडिकल सलाहों को धता बताया हों?