मदरसों के बाद अब ATS के रडार पर UP के सैकड़ों मकतब (चित्र साभार- alwahabfoundation.org) उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने राज्य में मदरसों की जाँच के बाद अब मकतबों पर भी नज़र डालना शुरू कर दिया है। मौजूदा जानकारी के अनुसार, UP ATS ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के 473 मकतबों की जाँच शुरू की है, जिनमें से कई बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। इस बाबत अल्पसंख्यक विभाग से संबंधित दस्तावेज़ और रिकॉर्ड मंगवाए गए हैं।
इन मकतबों में से अधिकांश मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर और शामली जिलों में स्थित हैं, और UP ATS इन संस्थानों की फंडिंग और उनके संचालन के स्रोतों की जाँच कर रही है। मकतब एक प्रकार का स्थान है, जहाँ इस्लामी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मुस्लिम बच्चों को दीनी शिक्षा प्रदान की जाती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ATS की जाँच में अब तक सबसे अधिक 190 मकतब शामली में पाए गए हैं। इसके बाद मुज़फ्फरनगर में 165 और सहारनपुर में 118 मकतब संचालित हो रहे हैं। जाँच में ATS ने कई बिंदु तय किए हैं, जिनमें मकतबों की मान्यता न होने के कारण, फंडिंग के स्रोत, संचालन का समय, बच्चों की संख्या, सुरक्षा प्रबंध, रजिस्ट्रेशन की स्थिति और संबद्धता के स्रोत प्रमुख हैं। मकतबों की जाँच के लिए ATS ने सहारनपुर मंडल के तीन जिलों के अल्पसंख्यक अधिकारियों से रिकॉर्ड मंगवाए हैं।
शुरुआती जाँच में कई मकतबों में खामियाँ पाई गई हैं, साथ ही उनके वित्तीय लेन-देन में भी संदेहजनक गतिविधियाँ देखी गई हैं। ATS ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी है। इससे पहले, उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में मदरसों का व्यापक सर्वेक्षण कराया था, जिसके तहत कई गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद कर दिया गया था।
सहारनपुर मंडल के अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश में आने वाले गोंडा जिले में भी कई मकतब चलते पाए गए हैं। यहाँ के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने अपने जिले में चल रहे 20 मकतबों को बंद करने की सिफारिश शासन को भेजी है। यहाँ कुल 286 मकतब चलते पाए गए हैं जिसमें 19 गैर मान्यता प्राप्त हैं। मिली जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश ATS मुख्यालय से प्रदेश के हर जिले में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों से मकतबों की जाँच में सहयोग करने के लिए कहा गया है।
शासनादेश
क्या होता है मकतब
ऑपइंडिया ने मकतब के बारे में गाजियाबाद के मौलवी अब्दुल सलाम से जानकारी ली। उनके अनुसार, मकतब एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है ‘पढ़ाई-लिखाई का स्थान’। उन्होंने बताया कि मकतब और मदरसे में अंतर है। मदरसे में पढ़ाई के बाद एक औपचारिक डिग्री प्राप्त होती है, जबकि मकतब में ऐसी कोई डिग्री नहीं दी जाती। अब्दुल सलाम ने मकतब को एक तरह का ‘कोचिंग सेंटर’ बताया, जहाँ आस-पास के मुस्लिम बच्चों को दीनी तालीम दी जाती है। उन्होंने कहा कि देश की लगभग 95% मस्जिदों में मकतब चलते हैं।
अब्दुल सलाम ने आगे बताया कि मकतब खासतौर से मुस्लिम बच्चों के लिए होते हैं, जहाँ कुरान और हदीस की तालीम दी जाती है। मकतब संचालित करने वाले मौलवी, मौलाना या हाफिज आमतौर पर कोई शुल्क नहीं लेते, लेकिन कहीं-कहीं मेहनताना के लिए धन इकट्ठा किया जाता है। मौलवी के अनुसार, मकतब में पढ़ने वालों की उम्र सीमा नहीं होती, लेकिन सामान्यतः नाबालिग बच्चे ही इनमें पढ़ते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई मकतब इस्लामी जानकारों के घरों में भी संचालित होते हैं।
भाजपा से जुड़े मुस्लिम व्यक्ति की मौत के बाद जनाजे की नमाज़ पढ़ने से इंकार करने वाले इमाम पर FIR (चित्र साभार- DD न्यूज़) उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एक मस्जिद के मौलवी ने एक मुस्लिम की मौत के बाद उसके जनाजे की नमाज़ पढ़वाने से इनकार कर दिया, क्योंकि मृतक भाजपा समर्थक था। मामले की शिकायत DM से की गई तो पुलिस ने शनिवार (3 अगस्त 2024) को 5 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर लिया। उधर, मौलवी ने खुद को बेकसूर बताते हुए इसे अपने खिलाफ एक साजिश बता दिया।
इस गंभीर मसले पर भाजपा को बहुत ही गंभीरता से सोंचना होगा। यानि मुसलमान ने खुद साबित कर रहा है कि जो देना है दो, लेकिन बीजेपी को वोट नहीं देंगे। सरकार को BPL में फ्री का राशन लेने वालों की आर्थिक स्थिति की जाँच करवानी चाहिए। प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान लेने वालों की जाँच बहुत जरुरी है। धर्म-निरपेक्षता एकतरफा क्यों?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मुरादाबाद जिले के कुंदरकी थाना क्षेत्र की है। यहाँ के कायस्थान मोहल्ले के रहने वाले दिलनवाज़ ने मुरादाबाद के जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी है। शिकायत में दिलनवाज़ ने बताया कि उनके अब्बा अलीदाद खाँ काफी समय से भाजपा समर्थक रहे हैं। 23 जुलाई को हार्ट अटैक से उनका इंतकाल हो गया।
प्रकरण के संबंध में थाना कुन्दरकी पर अभियोग पंजीकृत किया गया है, अन्य विधिक कार्यवाही प्रचलित है ।
दिलवाज ने कहा कि पास में ही स्थित नवाज़ खान मस्जिद में इमाम मोहम्मद राशिद को जनाजे की नमाज़ पढ़वाने के लिए बुलवाया गया तो उन्होंने साफ़ मना कर दिया। आरोप है कि इमाम राशिद ने मृतक के बेटे से कहा, “तुम्हारे अब्बू तो बीजेपी को वोट देते थे। बीजेपी हिंदू पार्टी है। हम और हमारे साथ का कोई भी इमाम या मौलवी नमाज़ पढ़ने नहीं जाएगा।”
पीड़ितों ने मौलवी के साथ इस करतूत में समाजवादी पार्टी के नेता असलम, शमीम खान, शराफत और मतीन को भी नामजद किया है। आखिरकार इमाम द्वारा इनकार के बाद गाँव के एक अन्य मौलवी को बुलवाया गया और उनसे जनाज़े की नमाज़ पढ़वाई गई। शनिवार को पुलिस ने इन सभी लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।
ये नाज़िम सैफी समाजवादी पार्टी का कुंदरकी नगरउपाध्यक्ष है जो कि 1 मृतक का अंतिम संस्कार न करने वाले आरोपियों पर होने वाली कानूनी कार्यवाही में अड़चन डालने के लिए लोगों को धर्म का हवाला देकर उनका माइंड वॉश कर रहा है जिससे कि आरोपियों की पकड़ न हो सके 1/2 @moradabadpolicepic.twitter.com/netMQIH1T3
मुरादाबाद के जिलाधिकारी IAS अनुज सिंह और पुलिस अधीक्षक ग्रामीण IPS संदीप मीणा ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। इन्होंने बताया कि जाँच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, खुद पर लगे आरोपों को मस्जिद के इमाम मोहम्मद राशिद ने निराधार बताया है।
मौलवी ने मस्जिद की CCTV फुटेज में अपनी बेगुनाही का सबूत होने का दावा करते हुए खुद को फँसाने की साजिश करार दिया है। समाजवादी पार्टी के नेता नाज़िम सैफी ने भी मृतक के बेटे के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने आरोपित इमाम को अपने सिर का ताज बताते हुए लगाए गए आरोपों को राजनीति से प्रेरित कहा है।
मुस्लिमों ने महाराष्ट्र में बीजेपी और उसके सहयोगियों के खिलाफ की एकमुश्त वोटिंग (फोटो साभार : जागरण) जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव परिणाम के दिन बीत रहे हैं, तपस्वी नरेंद्र मोदी को रोकने के हतकंडे सामने शुरू हो चुके हैं, लेकिन मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर जितने भी मोदी विरोधी है, भारत में या भारत से बाहर, सबके सीने पर सांप लोट रहे हैं, रोटी-पानी हराम हो गया, अरबों रूपए स्वाह हो गए, लेकिन तपस्वी को कोई प्रधानमंत्री बनने से नहीं रोक पाया और भविष्य में रोक भी नहीं पाएगा। विधि के विधान को रोकने की इन इंटरनेशनल भिखारियों की कोई औकात नहीं। अगर दुर्भाग्य से I.N.D.I. गठबंधन सत्ता आ गया होता, देश को गाज़ियों(मुग़ल) के राज से भयंकर दौर से गुजरना पड़ता। जनता की दुर्गति होती वो अलग ये गठबंधन के सुरमा भोपाली भी नहीं बच पाते। क्योकि जो देश का नहीं हो सकता, किसी का नहीं हो सकता।
CAA विरोध से लेकर लोकसभा चुनावों तक जितने भी मोदी विरोधी है भारत विरोधी विदेशियों के हाथ कठपुतली बने हुए हैं, यहाँ बने फिर रहे हैं बहुत बड़े जनहितैषी और देशप्रेमी। जब भी देश में कोई विदेशी मेहमान आता है आंदोलनजीवी सड़क पर आकर उपद्रव करने लगते हैं, क्या इसी का नाम देशभक्ति है?
महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे बेहद चौंकाने वाले रहे। यहाँ मुस्लिमों ने बीजेपी के विरोध में इंडी गठबंधन को एकमुश्त वोटिंग की। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान समेत कुछ राज्यों में भारी नुकसान की वजह से बीजेपी अपने दम पर पूर्ण बहुमत नहीं प्राप्त कर सकी। महाराष्ट्र में आश्चर्यजनक नतीजे आए, जहाँ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुआई वाली शिवसेना ने 7 सीटें हासिल कीं और बीजेपी ने 9 सीटें जीतीं। वहीं, मुस्लिमों, कम्युनिष्टों का समर्थन पाने वाली एनसीपी (शरद पवार), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) जैसी पार्टियों ने क्रमशः 8, 13 और 9 सीटें हासिल कीं। इससे यह साफ जाहिर होता है कि महाराष्ट्र के मुस्लिमों ने बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के मुकाबले में खड़ी पार्टियों के पक्ष में एकजुटता के साथ वोटिंग की।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बीजेपी की भारी हार की जिम्मेदारी लेते हुए नतीजों के तुरंत बाद इस्तीफा देने की पेशकश की। फडणवीस ने कहा, “महाराष्ट्र में लोकसभा चुनावों में हमें जो भी नुकसान हुआ है, मैं उसकी पूरी जिम्मेदारी लेता हूँ। इसलिए मैं शीर्ष नेतृत्व से आग्रह करता हूँ कि मुझे मेरे मंत्री पद से मुक्त कर दिया जाए क्योंकि मुझे पार्टी के लिए काम करने और राज्य विधानसभा चुनावों की तैयारियों में अपना समय देने की जरूरत है।”
Massive conspiracy was hatched in Maharashtra to defeat Narendra Modi Govt at centre.
The details coming out are shocking and must awaken the central leadership. Alarm was raised by Dy CM Devendra Fadnavis pic.twitter.com/0V0mQMA51U
फडणवीस ने आगे कहा, “कुछ सीटों पर किसानों के मुद्दों ने अहम भूमिका निभाई, तो संविधान में बदलाव किए जाने के झूठे प्रचार ने भी कुछ वोटरों को प्रभावित किया, जिसका मुस्लिमों और मराठा समुदाय के वोटरों पर भी असर पड़ा।” देवेंद्र फडणवीस ने संकेत दिया कि मुस्लिमों ने कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार) को समर्थन दिया, जिससे बीजेपी के लिए प्रतिकूल परिणाम आए।
‘फतवों ने शिवसेना (यूबीटी) को मुंबई में सीटें जीतने में मदद की’: दीपक केसरकर
शिवसेना नेता और महाराष्ट्र के मंत्री दीपक केसरकर जो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खास माने जाते हैं। उन्होंने 6 जून 2024 को कहा कि मुस्लिमों द्वारा बीजेपी के खिलाफ जारी किए गए ‘फतवों’ की वजह से ही शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार) मुंबई, सांगली, बारामती, शिरुर और डिंडोरी से अधिकाँश सीटें मिली। दीपक केसरकर ने कहा कि मुस्लिम वोटर इस बात को लेकर बिल्कुल आश्वस्त थे कि उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व की विचारधारा को छोड़ दिया है। केसरकर ने कहा, “फतवों ने शिवसेना (यूबीटी) को मुंबई में सीटें जीतने में मदद की। अगर आप इसे घटा दें, तो शिवसेना के हर उम्मीदवार को 1-1.5 लाख से ज़्यादा वोटों से हार का सामना करना पड़ता।”
दीपक ने कहा कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना को मुंबईकरों और मराठी मतदाताओं के वोट मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने के लिए पाकिस्तान में एक साजिश रची गई थी। उन्होंने दावा किया, “पाकिस्तान में दो मंत्रियों ने मोदी की हार की वकालत की और अफसोस की बात है कि यहाँ कुछ लोगों ने उनकी बातों पर ध्यान दिया।” केसरकर ने आगे कहा कि विपक्ष ने दलित समुदायों को गुमराह करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के दोबारा सत्ता में आने पर संविधान बदल दिया जाएगा। इसे देखते हुए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मुस्लिमों ने हकीकत में लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी के उम्मीदवारों के खिलाफ एकजुट होकर वोटिंग की।
पुणे में बीजेपी, शिवसेना (शिंदे) और एनसीपी (अजित पवार) के खिलाफ फतवा हुआ था जारी
मीडिया रिपोर्ट्स में 7 मई को दावा किया गया कि पुणे के इलाके में इस्लामी धर्मगुरुओं ने बीजेपी के खिलाफ फतवा जारी किया और मुस्लिम मतदाताओं से पुणे, शिरुर, बारामती और मावल निर्वाचन क्षेत्रों से क्रमशः कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) का प्रतिनिधित्व करने वाले उम्मीदवारों को ही वोट देने को कहा। इस्लामी नेताओं ने 2 मई को कोंडवा क्षेत्र में जमाती तंजीम पुणे द्वारा आयोजित ‘हज़रत मौलाना सज्जाद नोमानी की तकरीर’ कार्यक्रम में ये फतवा जारी किया।
Jamiyat-Ulema-E-Hind (Pune) has issued a fatwa to vote for Congress+Pawar+UT Indi alliance candidates in Maharashtra.
— Mr Sinha (Modi's family) (@MrSinha_) May 7, 2024
इस कार्यक्रम का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया था। कार्यक्रम के आयोजकों में से एक व्यक्ति वीडियो में कांग्रेस और एनसीपी-शरद पवार गुट को सपोर्ट करता दिख रहा है। वो व्यक्ति वीडियो में बोलता है, “कुल जमाती तंजीम ने पुणे से कॉन्ग्रेस के कैंडिडेट रवींद्र धांगेकर, बारामती और शिरुर से एनसीपी-शरद पवार की कैंडिडेट सुप्रिया सुले और अमोल कोल्हे और मावल से शिवसेना (यूबीटी) के कैंडिडेट संजय वाघेरे को समर्थन देने का फैसला किया है। हम इन चार कैंडिडेट्स का समर्थन करते हैं और आप सभी मुस्लिमों से अपील है कि उन्हें जिताएँ, साथ ही परिवार के सदस्यों और दोस्तों से भी उनके लिए वोटिंग की अपील की।
ये घोषणा मौलाना सज्जाद नोमानी के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में की गई, जिसमें ‘मौजूदा हालात और हमारी ज़िम्मेदारी’ सब्जेक्ट पर चर्चा की गई। अपने भाषण में नोमानी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के सभी लोगों को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने मुस्लिमों के मन में ये डर भी पैदा किया अगर मोदी सत्ता में आए, तो सभी मजार और मदरसे तोड़ दिए जाएँगे।
नोमानी ने सरकार के खिलाफ मुस्लिमों को भड़काते हुए कहा, “अगर आप अपने अधिकारों (वोट) का सही दिशा में इस्तेमाल नहीं करेंगे तो आपका देश ऐसा है कि रोहिंग्याओं को भूल जाएगा। इस देश के नेता के पास इस देश में वक्फ व्यवस्था को खत्म करने की योजना है। आप ही हमारे मदरसों, मस्जिदों और मजारों को बचाएँगे। मोदी की यह एक योजना पूरे मुस्लिम समुदाय के लिए खतरा पैदा करने वाली है।”
शिवसेना-यूबीटी की मुंबई रैली में फहराए गए इस्लामिक झंडे
शिवसेना (यूबीटी) के उद्धव ठाकरे ने कुछ साल पहले अपने पिता और शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित हिंदुत्व विचारधारा को छोड़ दिया था, जिसकी वजह से एकनाथ शिंदे और उनके साथियों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ दिया था। तब से उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी मुस्लिम समुदाय से अपने समर्थन की उम्मीद करता है। शिवसेना-यूबीटी के नेता मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भड़के मुद्दों पर चुप रहे, या उन्हें अच्छे से ‘संभाल’ लिया।
एक उदाहरण साल 2020 के पालघर में साधुओं की लिंचिंग के बाद राज ठाकरे की धमकी से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर लाउडस्पीकर पर अजान बंद नहीं की गई, तो वो हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। माना जाता है कि ऐसी घटनाओं ने उद्धव ठाकरे के पक्ष में काम किया और शिवसेना के झंडे-निशान के बिना भी महाराष्ट्र में 9 सीटें जीत ली। आपको याद दिला दें कि 14 मई 2024 की रिपोर्ट में ऑपइंडिया ने बताया था कि कैसे शिवसेना-यूबीटी की मुंबई रैली में इस्लामिक झंडे फहराए गए थे। इस्लामिक झंडे लहराने का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था, जिसमें इस्लामिक झंडे सबसे ऊपर फहराए दिख रहे थे और मुस्लिम समर्थकों के साथ शिवसेना-यूबीटी के कार्यकर्ता पटाखे फोड़ रहे थे।
इस बीच, बीजेपी के नितेश राणे ने शिवसेना (यूबीटी) पार्टी की आलोचना की और कहा कि महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव बालासाहेब ठाकरे को खुद को हिंदू नेता बालासाहेब ठाकरे का बेटा कहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि रैली में पाकिस्तानी झंडा फहराया गया था। हालाँकि बाद में ये साफ हो गया था कि उद्धव ठाकरे की रैली में पाकिस्तानी झंडा नहीं, बल्कि इस्लामिक झंडा फहराया गया था।
UBT च्या मिरवणुकित पाकिस्तान चा झेंडा !
आता काय PFI , SIMI, AL QAEDA चे लोक मातोश्रीत बिर्याणी घेऊन जातील…
— nitesh rane ( Modi ka Parivar ) (@NiteshNRane) May 14, 2024
शिवसेना-यूबीटी की रैली में फहराए गए कम्युनिस्टों के लाल झंडे
शिवसेना-यूबीटी का समर्थन कम्युनिष्टों ने भी किया, जिन्होंने अप्रैल 2024 में उद्धव ठाकरे गुट की रैली में कम्युनिष्टों के लाल झंडे लहराए। इस बात से जुड़ी तस्वीरें भी इंटरनेट पर वायरल हो गई थी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उद्धव ठाकरे पर हिंदुत्व विचारधारा के अपमान का आरोप लगाया।
Red flags of communism has replaced saffron flags in Uddhav Thackeray’s rally pic.twitter.com/vmw4eLFyiA
इस बीच, उद्धव ठाकरे ने घोषणा की कि वो मोदी का साथ कभी नहीं देंगे और न ही अपनी पार्टी का कभी बीजेपी में विलय करेंगे। ठाकरे ने पीएम मोदी को विश्वासघाती कहते हुए कहा कि वो लोकसभा का चुनाव हार जाएँगे। ठाकरे का ये बयान अजित पवार और एकनाथ शिंदे गुट के बीजेपी के साथ आने के बाद सामने आया था।
मुंबई में मुस्लिम उद्धव ठाकरे की शिवसेना के लिए उस जोश के साथ काम कर रहे हैं जो 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद से नहीं देखा गया है जब आम आदमी पार्टी (आप) के अरविंद केजरीवाल ने उन्हें किनारे कर दिया था। उस समय मुस्लिमों के असंतोष से घबराई कांग्रेस ने उन्हें गुजरात 2002 का डर दिखाया और कोशिश की कि उसके वोट न बँटे। हालाँकि मुस्लिमों ने कांग्रेस की जगह आम आदमी पार्टी का साथ दिया और महाराष्ट्र में आम आदमी पार्टी के 48 उम्मीदवारों के पक्ष में लामबंद हो गए थे।
साल 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को महाराष्ट्र के मुस्लिम वोट डिफ़ॉल्ट रूप से मिले। उनके पास कोई विकल्प नहीं था, कि वो बीजेपी के खिलाफ किसे वोट करें। लेकिन इस बार इंडी अलायंस सिर्फ़ मुस्लिमों के लिए ही नहीं बल्कि बीजेपी के विरोधियों के लिए भी एक स्पष्ट विकल्प बन गया। मानो मुस्लिमों और बीजेपी विरोधियों के पास कोई खास थीम हो, ‘कैंडिडेट तो मजबूरी है, इंडी अलायंस जरूरी है।’
मुस्लिम मतदाताओं ने कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार) और शिवसेना (यूबीटी) जैसी पार्टियों का भरपूर समर्थन किया, जबकि इंडी गठबंधन ने एक भी मुस्लिम कैंडिडेट नहीं उतारा था। इंडी गठबंधन न केवल महाराष्ट्र में बल्कि पूरे देश में संयुक्त रूप से अभियान शुरू करने में विफल रहा, फिर भी ‘धर्मनिरपेक्षता’ में विश्वास रखने वाले मतदाताओं ने बीजेपी और पीएम मोदी के विरोध की वजह से इंडी गठबंधन का समर्थन किया। आने वाले सालों में विशेष रूप से गैर-मुस्लिम, जो मुस्लिम वोट पाने वाले एनसीपी (शरद पवार), शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस का समर्थन करते हैं, वे समझेंगे कि बीजेपी के खिलाफ उन्हें समर्थन कर उन्होंने कितनी बड़ी गलती की।
लड़की से रेप की कोशिश और तौबा न करने पर कत्ल की धमकी देते हुए रामपुर की मस्जिद के इमाम का वीडियो वायरल उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में साल भर पहले हिन्दू धर्म में घर वापसी करने वाली मुस्लिम लड़की ने अपने रिश्तेदारों पर गैंगरेप की FIR दर्ज करवाई है। इसी के साथ पीड़िता ने रामपुर शहर के बेगम बाग़ इलाके में पड़ने वाली एक मस्जिद की भी शिकायत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से की है। इस मस्जिद में न सिर्फ छोटी बच्चियों के गैंगरेप बल्कि हथियारों की तस्करी होने का भी आरोप लगाया गया है। मस्जिद का इमाम रईस बताया जा रहा है जिसके कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
इन वीडियो में इमाम रईस कथित तौर पर न सिर्फ हथियारों और अश्लील किताबों के आगे बैठा नजर आ रहा है बल्कि वो ‘घर वापसी’ करने वाली लड़की को अल्लाह का डर भी दिखा रहा है।
आरोप – अफसरों में औरतें सप्लाई करके कमाई
सोशल मीडिया के माध्यम से ऑपइंडिया को मिले कई वीडियो में से एक में कथित तौर पर रईस इमाम नग्न हालत में किसी लड़की से बात करता दिखाई दे रहा है। उसके आगे कुछ अवैध हथियार और कारतूस बिखरे दिखाई दे रहे हैं। सामने कंडोम और अश्लील किताबें भी दिखाई दे रहीं हैं जिसमें मॉडल्स की अधनंगी तस्वीरें छपी हुई हैं। इस वीडियो में मौलाना बोल रहा, “ये सप्लाई करते हैं औरतें। ले कर जाते हैं अफसरों में। इसी तरीके से ये पैसा कमा रहे हैं। बाकी इन्होंने ही मर्डर करा था ये तो सबको पता है। सारी दुनिया जानती है। मेरे कहने का काम है, मैं कह दूँगा। जिस जगह जरूरत पड़े वहाँ मुझ से कहलवा लियो।”
इसी दौरान स्पीकर पर चल रहे फोन में कोई पूछता है कि क्या इमाम रईस कोर्ट में बोलेगा? जवाब में रईस ने 2 बार कहा कि वह ये तमाम बातें कोर्ट में भी बोलने को तैयार है। एक अन्य वीडियो में मौलाना के आगे बैठी लड़की ने मस्जिद में बच्चियों के रेप की बात कही तो इमाम रईस ने कहा कि वो सब कुछ बताने को तैयार है। वह किसी चमरौआ गाँव में हुई हत्या और फिर जमीन कब्ज़े की बात भी उसके द्वारा कही जा रही है। रोते हुए वीडियो बना रही लड़की ने अपनी माँ के साथ 14 साल तक रेप की वजह पूछी तो इमाम रईस बोला, “पहले कह देती तो मैं सब बता देता। किस जगह मैंने साथ नहीं दिया तुम्हारा।”
ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने बताया कि मर्डर उसके सगे मामा का हुआ था। यह हत्या 350 बीघे जमीन को कब्ज़ा करने के लिए हुई थी। पीड़िता ने हत्या का आरोपित अपने मृतक मामा के चचेरे भाइयों पर लगा था जिसमें मुख्य आरोपित इम्तियाज है। आरोप है कि लड़की के मामा को मार कर फिर उसकी माँ को 14 वर्षों तक बंधक बनाए रखा गया। इस दौरान इमाम रईस वाली मस्जिद में ही लड़की की माँ का 5 साल तक बलात्कार किए जाने का आरोप है। पीड़िता के पिता की साल 2012 में ही मौत हो चुकी थी।
धमकी – ‘तौबा करो वरना मुसलमान मार देंगे तुम्हें’
ऑपइंडिया को मिले एक अन्य वीडियो में पीड़िता और इमाम रईस आमने-सामने बैठे हैं। पीड़िता ने पूछा कि क्या मुस्लिम उसे मार देंगे? इमाम ने कहा, “हाँ, बिलकुल मार देंगे। मकसद यही है कि अल्लाह से तौबा करो। ये करो कि अल्लाह मुझ से जो गलती हो गई उसे माफ़ कर देना। धोखे से या किसी डर की वजह से मैं बनी इसलिए अल्लाह मुझे माफ़ कर दे। कबर का अजीब बहुत सख्त है। अल्लाह बन्दों पर रहम करने वाला है।”
मुस्लिमों से छिप रहा वसीम रिज़वी
वीडियो बना रही लड़की ने आगे पूछा कि जो हिन्दू पैदा हुए हैं क्या अल्लाह उन्हें भी माफ़ नहीं करेगा? इस पर इमाम रईस ने जवाब दिया, “उन्हें क्यों करेगा माफ़? जो कलमे का शरीक नहीं है उसे कोई भी हो। ऐसे-ऐसे लोगों का क़त्ल कर दिया गया है जिनके डंके बजते थे।” इमाम रईस ने नाम लिए बिना वसीम रिज़वी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ का वो शिया मुस्लिमों के डर से छिपा फिर रहा है जो कहता था कि मैं तो हिन्दू हो गया। इमाम रईस इसी वीडियो में आगे बोला, “जो कलमा पढ़ा होगा वो दोजख (नरक) में ज़रूर जाएगा लेकिन अल्लाह निकाल देगा उसमें से उन्हें।”
लड़की ने सामने बैठे इमाम रईस से पूछा कि अगर वो पूजा कर ले तो क्या होगा? इस सवाल पर इमाम बोला, “जब अल्लाह ने मुसलमान बनाया है तो उसमें हर जगह फतवा दिया है कि कत्ल गैर-मुस्लिमों का क़त्ल कर दो। ये फतवा निकला हुआ है। ये हदीस है।”
दूर-दूर की बच्चियाँ हैं मदरसे में
इमाम रईस का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो में इमाम किसी मदरसे का जिक्र कर रहा है। रईस बोला कि उसमें दूर-दूर से आईं 800-900 बच्चियाँ हैं। जब वीडियो बना रही लड़की पूछती है कि उन बच्चियों को बाहर क्यों नहीं निकलने दिया जाता तो रईस बोला कि अगर ये छूट मिली तो कई भाग जाएँगी। इमाम रईस ने यह भी दावा किया कि पहले एकाध केस भागने के हो गए तब से अंदर से बहुत सख्ती कर दी गई है। बकौल इमाम, लड़कियों को आपस में साथ बैठने और बोलने भर की छूट है लेकिन बाहर निकलने पर मनाही है।
इमाम रईस इसी वीडियो में आगे कह रहा है कि भारत में अलीगढ़ के बाद ऐसा दूसरा मदरसा यही है। उसने बताया कि यहाँ से फ़ाज़िला हो कर लड़कियों को अलीगढ़ भेजा जाता है। दावा किया गया कि रामपुर में बने इस मदरसे में कम से कम 200 कमरे हैं और सबमें लड़कियाँ भरी हैं। इमाम रईस ने विकल्प के तौर पर यह भी बताया कि अगर लड़की मदरसे न रहना चाहे और सिर्फ वहाँ पढ़ने के मकसद से आए तो वो किसी मकसूद भाई के यहाँ उसके रहने का इंतजाम करवा देगा। इमाम रईस ने अपनी फीस 6 हजार रुपए बताया।
ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने बताया कि यह मदरसा रामपुर जिले के सिविल लाइंस क्षेत्र में मौजूद है। पीड़िता ने यह भी कहा कि वह चाहती है कि वहाँ से बच्चियों को मुक्त करवाया जाए क्योंकि वो इमाम रईस जैसे कई लोगों के चंगुल में फँसी हुई हैं।
रेप की कोशिश करता दिखा इमाम
ऑपइंडिया को 2 अन्य वीडियो भी मिले हैं। इन दोनों वीडियो में इमाम रईस किसी लड़की से रेप का प्रयास करता दिख रहा है। वह नींद में लग रही किसी लड़की के कपड़े उतार कर पहले उसे नंगा करता है और बाद में उस से रेप की कोशिश करता है। थोड़ी देर बाद एक अन्य वीडियो में इमाम रईस पाजामा बाँधने की कोशिश करता दिख रहा है। वह पॉलीथिन में कुछ छिपाने की भी कोशिश करता दिख रहा है। एक अन्य वीडियो में इमाम रईस को तमाम साम्प्रदायिक बातों वाली वीडियो भी स्क्रॉल कर के सुनते देखा जा सकता है।
ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने बताया कि उसकी माँ को इमाम रईस ने अपनी मस्जिद में लगभग 5 साल तक रखा था। आरोप है कि इस दौरान उसने कई लोगों के साथ मिल कर पीड़िता की माँ का गैंगरेप किया था। पीड़िता का दावा है कि ये तमाम वीडियो फरवरी 2024 महीने के हैं। बकौल पीड़िता वह रिश्तेदारों और इमाम की वजह से 14 साल तक बंधक बन कर गैंगरेप झेली अपनी माँ को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रही है। (साभार: राहुल पाण्डेय, http://www.opindia.com)
पूर्व मुस्लिम लड़की ने मस्जिद से लड़कियाँ सप्लाई और अवैध हथियारों की तस्करी का आरोप लगाया उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में 21 मार्च 2024 को एक मौलाना और एक हाजी सहित कुल 8 लोगों पर गैंगरेप की FIR दर्ज हुई है। एक साल पहले घर वापसी करके हिन्दू बनी पीड़िता ने आरोप लगाया है कि बलात्कारियों में से 4 लोग रिश्ते में उसके मामा हैं। इस पीड़िता का एक और पत्र सामने आया है। इसमें वह एक मस्जिद के अंदर होने वाली गैरकानूनी हरकतों की शिकायत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की है।
यह पत्र 12 मार्च 2024 को लिखा गया है, जिसमें मस्जिद के अंदर जुमे की नमाज़ के बाद लड़कियों से रेप उनकी सप्लाई जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह मामला यूपी के रामपुर जिले के थानाक्षेत्र शहजाद नगर का है। यहाँ की रहने वाली पीड़िता ने रामपुर शहर के बेगम बाग़ इलाके में आने वाली एक मस्जिद के खिलाफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी है।
ऑपइंडिया के पास मौजूद शिकायत की कॉपी के अनुसार, उस मस्जिद में पीड़िता की माँ का साल 1992 के बाद 5 वर्षों तक गैंगरेप हुआ है। पीड़िता का कहना है कि मस्जिद में लगातार रेप होने की वजह से उसकी अम्मी को अब पैड पहनना पड़ता है। पीड़िता ने माँ को 24 घंटों में महज एक बार खाना दिए जाने का भी आरोप लगाया। इस मस्जिद का इमाम रईस नाम का शख्स है।
पीड़िता ने इम्तियाज हुसैन, बरेलवी जमात के मौलाना लतीफ़, वाहिद रज़ा, लईक, ताहिरा, अरमाना, इरफ़ान हाजी, असरार हुसैन, रईस मौलाना और इरफ़ान मौलाना पर उसकी माँ को बंधक बनाकर रेप करने का आरोप लगाया। पीड़िता ने आगे कहा कि इनका एक गैंग है, जो लड़कियों की सप्लाई भी करता है। उसका आरोप है कि जुमे की नमाज़ के बाद मस्जिद में बहुत बड़ी पार्टी की जाती है।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि इस पार्टी में छोटी-छोटी बच्चियों को नशा देकर उनके साथ रेप किया जाता है। इम्तियाज, मौलाना रईस और उसका पूरा गैंग जामिया मदरसा रामपुर, बरेली और अलीगढ़ में लड़कियों को जेहादी भी बनाता है। कुछ लड़कियों को बेचे जाने का भी जिक्र शिकायती पत्र में है। इस गैंग पर चरस, अफीम और अवैध हथियार भी सप्लाई करने के आरोप लगाए गए हैं।
बकौल शिकायतकर्ता, मस्जिद में न सिर्फ उसकी माँ के साथ लगातार रेप हुआ, बल्कि उसकी एक बहन को के साथ भी आरोपितों ने रेप किया और बाद में उसे लापता कर दिया। उसकी बहन का आजतक पता नहीं चला है। शिकायत के अंत में पीड़िता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मस्जिद और मदरसों की उच्चस्तरीय जाँच की माँग की है और कहा है कि वहाँ बक्सों में हथियार रखे रहते हैं।
मुँह काला करने के लिए खुले मरदसे
पीड़िता का एक वीडियो बयान भी ऑपइंडिया के पास है। इसमें पीड़िता ने सवाल किया है कि अगर मस्जिद में महिलाओं का जाना मना है तो वहाँ इतनी लड़कियाँ कैसे पहुँच गईं। पीड़िता का दावा है कि इस मस्जिद में कुरान का अपमान भी किया जाता है। इसका वीडियो भी उसके पास है। वीडियो में यह भी सवाल किया गया है कि क्या मस्जिद के अंदर किसी लड़की से सेक्स जायज है?
बकौल पीड़िता, आरोपितों का आपराधिक इतिहास है और उन्होंने पहले कई हिन्दुओं की हत्याएँ भी की हैं। खुद को भी रेप पीड़िता बताते हुए लड़की ने कहा कि आरोपितों का संगठन नैनीताल तक एक्टिव है। आरोप है कि मस्जिद में रात की अंतिम नमाज़ के बाद लड़कियों का आना-जाना शुरू हो जाता है जिन्हें सुबह की नमाज़ से पहले ही निकाल दिया जाता है।
पीड़िता ने अपने वीडियो बयान में आरोप लगाया है कि मौलानाओं ने अपना मुँह काला करने के लिए ही मदरसों को खोल रखा है। साथ ही लड़की ने यह भी कहा कि ये तमाम खुलासे करने की वजह से उसकी जान खतरे में है। लड़की ने कभी भी अपनी हत्या हो जाने की आशंका जताई है। पीड़िता ने सीएम योगी और पीएम मोदी से न्याय की उम्मीद जताई है।
कमरे में कंडोम और सेक्सवर्धक दवाएँ
पीड़िता के वकील की तरफ से ऑपइंडिया को कई वीडियो उपलब्ध कराए गए हैं। इन वीडियो में लड़की अपने और उसकी अम्मी के साथ घटी वारदात के बारे में जानकारी देती है। वहीं, इनमें से कुछ वीडियो मस्जिद के अंदर के भी हैं। इन वीडियो में कई हथियार और कारतूस इमाम के बिस्तर पर पड़े नजर आ रहे हैं। कुछ अश्लील किताबें भी बिस्तर पर बिखरी हुई हैं।
एक अन्य वीडियो में एक लड़की मस्जिद के इमाम रईस से पॉलीथिन खोलने के लिए कहती थी। तब पॉलीथिन से कंडोम बाहर निकल कर गिरे। पीछे से आ रही आवाज में बताया जा रहा है कि इमाम की पॉलीथिन में सेक्सवर्धक दवाएँ भी हैं। लड़की द्वारा बनाए गए विजुअल में कुछ ऐसे कमरों का भी दावा किया जा रहा है, जहाँ लड़कियों का यौन शोषण किया जाता है।(साभार)
प्रतीकात्मक फोटो/साभार: आज तक केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार (26 अगस्त 2022) को केरल के एक इलाके में नई मस्जिद बनाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले में कहा कि राज्य में पहले से ही कई मजहबी स्थल हैं जो कि राज्य की जनसंख्या के अनुपात से बहुत अधिक हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केरल हाईकोर्ट में नुरुल इस्लाम संस्कारिका संगम द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई हो रही थी। इस याचिका में एक व्यावसायिक बिल्डिंग को मस्जिद में बदलने की माँग की गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि यहाँ मस्जिद बनने के बाद इसके आसपास के मुसलमान दिन में पाँच बार नमाज अदा करने के लिए मस्जिद पहुँच सकेंगे।
इससे पहले कलेक्टर ने इस मामले की जाँच करते हुए इस माँग को निरस्त कर दिया था। क्योंकि, जाँच में यह पाया गया था कि जिस बिल्डिंग की जगह मस्जिद बनाने की बात कही जा रही थी उसके आसपास के 5 किलोमीटर क्षेत्र में 36 मस्जिदें थीं।
"Because of the peculiar geographical situation of #Kerala, it is known as ‘God’s own country’. But we are exhausted with religious places and prayer halls and we are not in a position to allow any new religious places and prayer halls except in the rarest of rare cases":HC
न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णन ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यहाँ की भौगोलिक स्थिति के कारण केरल राज्य को ‘भगवान का अपना देश’ कहा जाता है और यह धार्मिक स्थलों से भरा हुआ है।
हाईकोर्ट की ओर से कहा गया, “केरल में धार्मिक संस्थानों और प्रार्थना कक्षों की संख्या पर्याप्त है। यदि हिंदू, ईसाई, मुस्लिम, यहूदी, पारसी आदि का प्रत्येक भक्त अपने निवास के पास धार्मिक स्थान और प्रार्थना कक्ष बनाना शुरू कर देता है, तो राज्य को सांप्रदायिक विद्वेष सहित गंभीर परिणाम का सामना करना पड़ेगा।”
न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णन की बेंच ने यह भी कहा, “इस मामले में खुफिया रिपोर्ट और पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि व्यावसायिक बिल्डिंग को धार्मिक प्रार्थना कक्ष में बदलने की अनुमति दी जाती है, तो सांप्रदायिक विद्वेष की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना है। यह एक संवेदनशील मुद्दा है।”
कुरान में नहीं लिखा हर नुक्कड़ पर मस्जिद हो: केरल हाईकोर्ट
यही नहीं, जस्टिस ने कुरान का भी जिक्र किया और कहा कि कुरान में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि इलाके के हर नुक्कड़ पर मुस्लिम समुदाय के लिए एक मस्जिद होनी चाहिए।
केरल हाईकोर्ट ने कहा, “कुरान की आयतें मुस्लिम समुदाय के लिए मस्जिद के महत्व को स्पष्ट रूप से उजागर करती हैं। लेकिन कुरान की आयतों में यह नहीं कहा गया है कि मस्जिद हर नुक्कड़ पर जरूरी है। हदीस या कुरान में यह नहीं कहा गया है कि मस्जिद हर मुस्लिम के घर के बगल में होनी चाहिए। दूरी कोई मापदंड नहीं है।”
सुनवाई में यह भी कहा गया, “यह सच है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 26 (अ) में कहा गया है कि सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन, प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी भी वर्ग को धार्मिक और धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए धार्मिक स्थान बनाने का अधिकार होगा। इसका मतलब यह नहीं है कि वे देश के कोने-कोने में धार्मिक स्थलों का निर्माण कर सकते हैं। केरल एक बहुत छोटा राज्य है।”
न्यायमूर्ति कुन्हीकृष्णन ने दिवंगत प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय वायलार रामवर्मा के एक फिल्मी गाने का भी हवाला दिया। इस गाने में यह बताया गया है कि कैसे मनुष्य ने धर्मों का निर्माण किया, धर्मों ने ईश्वर का निर्माण किया फिर धर्मों और ईश्वर ने दुनिया और मानवता को विभाजित किया।
सुनवाई के दौरान फैसला देते हुए जस्टिस ने कहा “नागरिकों को एक-दूसरे से प्यार करने दें और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपने धार्मिक प्रथाओं का पालन करें। हर कोई धर्म का पालन अपने घर से कर सकता है और यदि उनके धर्म में यह कहा गया है कि प्रार्थना एक साथ की जानी चाहिए। ऐसे में वे अपने पड़ोस में एक और मस्जिद या प्रार्थना कक्ष बनाने की जगह पास की किसी मस्जिद में जा सकते हैं।”
जकात फाउंडेशन समुदाय विशेष के युवाओं को सिविल सेवा में भर्ती होने के लिए ट्रेनिंग ही नहीं देता है। यह बात सामने आई है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले रोहिंग्या घुसपैठियों की भी वह मदद कर रहा है। इनके लिए जकात ने दिल्ली में दारुल हिजरात (Darul Hijrat) नामक ‘मेकशिफ्ट कैंप’ स्थापित किया है। लॉक डाउन के चलते दिल्ली से हज़ारों की संख्या में प्रवासी मजदूरों को दिल्ली छोड़ने को मजबूर कर दिया, और दिल्ली का मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल उन्हें रोकने में पूर्णरूप से असफल रहा, लेकिन रोहिंग्या घुसपैठियों, जिन्हें केजरीवाल और इनकी पार्टी आधार, राशन कार्ड और मतदान परिचय पत्र आदि बनवाकर संरक्षण दे रही है, को रोकने में सफल रहा। रोज टीवी पर बखान किया जाता था कि रोज लाखों को भोजन वितरित किया जा रहा, परन्तु किनको मिला भोजन? जब किसी राज्य में चुनाव होते हैं, उन्हें भी मुफ्त की रेवड़ियां का प्रलोभन दिया जाता है। लेकिन उन्ही राज्यों के मजदूरों को दिल्ली छोड़ने को मजबूर कर दिया। यह दिल्ली में समस्त देशप्रेमियों के चिंता का विषय है, जिन्होंने मुफ्त की रेवड़ियों के लालच में आकर इस पार्टी को पुनः दिल्ली सौंप दी। एक नक्शा सामने आया है। इससे पता चलता है कि मस्जिद के साथ रोहिंग्या लोगों के लिए स्थायी कॉलोनी बनाई जाएगी। यहॉं फाउंडेशन का स्थायी कार्यालय भी होगा।
दिल्ली भाजपा जवाब दे ऐसे में भाजपा से प्रश्न : कहां गयी उनकी कार्यकुशलता? क्या कर रहे हैं भाजपा स्थानीय नेता? क्या केवल पद एवं जनसेवा के नाम पर छलावा कर रहे हैं?
1/n Zakat Foundation established a makeshift camp for Rohingya invaders named 'Darul Hijrat' right inside the national capital Delhi at a strategic location. (Details of all the Rohingya settlements in Delhi are given in the thread.) pic.twitter.com/b8GAEFTgad
2/n On 15 April 2018, out of nowhere, Zakat's makeshift camp for Rohingyas catches fire. Zakat officials were present at the scene. All (Rohingyas and Zakat officials) were calm and composed. pic.twitter.com/IFbDCXf4gC
ज़कात फाउंडेशन का दावा है कि पूरी परियोजना को गृह मंत्रालय की मँजूरी हासिल है। फाउंडेशन के उपाध्यक्ष एसएम शकील परियोजना के प्रभारी हैं।
4/n The construction was started very soon. Strangely, Zakat Foundation openly claims that the project is certified by the Home Ministry. (This is happening in 2018.) pic.twitter.com/i4lru2nGW0
6/n Zakat Foundation makes sure that Rohingyas properly study Islamic doctrines. It sends Islamic teachers (maulvis and mullahs) to teach Islamic doctrines to Rohingya kids. *God's Grace School in the attached pic is associated with Zakat' president. pic.twitter.com/S6EszgJxnI
ज़कात फाउंडेशन इस्लामिक सिद्धांतों पर रोहिंग्या लोगों को शिक्षित करता है। इस समय दिल्ली में कई रोहिंग्या बस्तियाँ हैं। इनमें से सबसे प्रमुख हैं शाहीन बाग, कालिंदी कुंज, विकास पुरी और खजूरी खास। इनमें से कुछ क्षेत्रों में फरवरी के महीने में राष्ट्रीय राजधानी में सांप्रदायिक दंगों के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा देखी गई थी। हमने पहले ज़कात फ़ाउंडेशन की खतरनाक विचारधारा और विदेशों में इस्लामिक संगठनों और रेडिकल इस्लामिक उपदेशक ज़ाकिर नाइक से इसके कनेक्शन पर रिपोर्ट की थी। वे नागरिकता संशोधन अधिनियम और यूनिफॉर्म सिविल कोड के भी विरोधी हैं। हाल ही में, ज़कात फाउंडेशन शरिया काउंसिल के सदस्य कलीम सिद्दीकी का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता था कि हिंदुओं को इस्लाम में परिवर्तित होने की आवश्यकता है, क्योंकि यदि वे इस्लाम नहीं कबूल करंगे तो नर्क में जलेंगे। अवलोकन करें:-
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गिरगिट से भी ज्यादा तेजी से रंग बदलते हैं। कोरोना महामारी के संकट के दौरान ....
वीडियो में कलीम हिंदू धर्म में होने वाले अंतिम संस्कार की क्रिया पर भी सवाल उठाते हैं और उदाहरण देकर समझाते हैं कि इसलिए हिंदू इस्लाम कबूल करना चाहते हैं, क्योंकि वे जहन्नुम की आग से खुद को बचाना चाहते हैं।
लॉकडाउन के बीच पाकिस्तान की मस्जिद में जुटे लोगों ने पुलिस टीम पर बरसाए ईंट-पत्थर
पूरा विश्व लगातार फैलती कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए तरह-तरह के इंतजाम कर रहा है, लेकिन कुछ लोगों के कारण पुलिस-प्रशासन इस संकट के बीच अलग ही तरह की परेशानी से जूझ रही है। भारत में लगातार आ रही जमातियों से जुड़ी खबर के बाद कुछ इसी तरह की खबर अब पाकिस्तान से भी आई है। वहाँ लॉकडाउन के बीच पढ़ी जा रही नमाज को रोकने के लिए पहुँची पुलिस टीम पर लोगों ने हमला कर दिया। पाकिस्तान के सिंध में लगी पाबंदी के बाद भी कराची शहर के लियाकताबाद इलाके में मौजूद एक मस्जिद में बड़ी संख्या में नमाजी एकत्र हो गए। इसकी सूचना जब क्षेत्रीय पुलिस को हुई तो तत्काल पुलिस मौके पर पहुँच गई। मस्जिद में हो रही नमाज को लेकर जब पुलिस ने विरोध किया तो लोगों ने अचानक से पुलिस टीम पर ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया। इस दौरान पुलिस को घरों में घुसकर अपनी जान बचानी पड़ी। नमाजियों द्वारा पुलिस टीम पर किए हमले में पीराबाद थाने की एक महिला एसएचओ घायल हो गई, जिस पर आला अधिकारियों को सूचना दी गई। इसके बाद बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स मौके पर पहुँची। वहीं मामले में कार्रवाई करते हुए कराची पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया है। इस मामले का एक वीडियो पाकिस्तान के पत्रकार रविन्द्र सिंह रॉबिन ने अपने ट्विटर पर शेयर किया है।
#BREAKING : A Lady SHO in Orangi Town, #Karachi attacked by mob as She tried to restrict people from conducting Friday preyer (Congregational Prayer) in a mosque. Will @ImranKhanPTI dare to take strict action against those who attacked the police officer ?#COVIDー19pic.twitter.com/ecmtNQaKSa
— Ravinder Singh Robin ਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ راویندرسنگھ روبن (@rsrobin1) April 10, 2020
खबर के मुताबिक पाकिस्तान में लगातार बढ़ती कोरोना के मरीजों की संख्या के बीच सिंध राज्य की सरकार ने शुक्रवार (10 अप्रैल 2020) को बीते सप्ताह की तरह ही जुमे की नमाज को ध्यान में रख लोगों को एकत्र होने से रोकने के लिए दोपहर बारह बजे से तीन बजे तक कर्फ्यू जैसे लॉकडाउन की घोषणा की थी। इस दौरान तीन घंटे तक घरों से निकलने पर पूरी तरह से पाबंदी थी। इससे पहले पाकिस्तान उलेमा काउंसिल ने लोगों से महामारी के फैलाव को रोकने के लिए सरकार के आदेशों का पालन करने और घरों में ही नमाज पढ़ने की अपील की थी। इसके बाद भी कराची के औरंगी टाउन की एक मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए जुमे की नमाज अदा करने के लिए पहुँच गए। अवलोकन करें:-
देश में जारी लॉकडाउन के बीच दिल्ली में चार लाख लोगों को हर रोज भोजन कराने का केजरीवाल सरकार का दावा खोखला साबित हो र...
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में अब तक कोरोना से 102,734 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 1,699,632 के पर पहुँच गई है, राहत की बात यह कि 376,330 लोग अस्पतालों से ठीक होकर अपने घरों को लौट चुके हैं। वहीं बात करें पाकिस्तान की, तो यहाँ मरने वालों की संख्या 66, जबकि इससे संक्रिमत लोगों की संख्या बढ़कर 4696 हो गई है।