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फैजल सिद्दीकी ने TikTok पर एसिड अटैक को किया प्रमोट, 1.34 करोड़ हैं फॉलोवर

फैज़ल सिद्दीकी एसिड अटैक TikTok
टिक-टॉक पर एसिड अटैक का महिमामंडन: फैज़ल सिद्दीकी पर कार्रवाई की माँग
सोशल मीडिया एप्लीकेशन टिक-टॉक (TikTok) पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एसिड अटैक का महिमामंडन किया गया है। ट्विटर पर लोगों ने फैज़ल सिद्दीकी के इस वीडियो को लेकर नाराज़गी जताई और कार्रवाई की माँग की। अतुल आहूजा ने इस वीडियो को लोगों के सामने रखते हुए कहा कि एसिड अटैक झेलने का अर्थ क्या है, ये शायद ही कोई समझ सकता हो। उन्होंने लिखा कि इससे डरावना शायद ही कुछ हो।
इस वीडियो को ट्वीट करते हुए अतुल ने कहा कि टिक-टॉक (TikTok) पर किसी को इस तरह से एसिड अटैक को मजाक बना देने का अर्थ है कि एसिड अटैक झेलने वाली महिलाओं को रोज होने वाली पीड़ा का मखौल उड़ाना। ये वीडियो टिक-टॉक (TikTok) पर फैज़ल सिद्दीकी ने डाला है। फैज़ल के फॉलोवरों की संख्या 1.34 करोड़ है। इस वीडियो में फैज़ल कहता है- “उसने तुम्हें छोड़ दिया, जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा था?” इसके बाद लड़की के चेहरे पर एक लिक्विड फेंका जाता है और उसका चेहरा पूरा जल जाता है।
I have filed complaint Faizal Siddiqui for the tiktok video promoting acid attack towards our women.
This type of act shouldn't be promoted and strict action should be taken@Rajput_Ramesh @MODIfiedVikas @indiantweeter @TajinderBagga https://t.co/NohTPDzhxi pic.twitter.com/1NkuxJaDQ7
— Ashish (@go4ashi) May 17, 2020</blockquote>
सामाजिक कार्यकर्त्ता आशीष ने तो इस वीडियो के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि इस तरह से टिक-टॉक (TikTok) पर एसिड अटैक को प्रोमोट किया जाना बर्दाश्त करने लायक नहीं है। उन्होंने अपनी शिकायत में लिखा कि टिक-टॉक (TikTok) के नवाब गैंग का हिस्सा फैज़ल सिद्दीकी ख़ुद को सोशल इन्फ्लुएंसर बताता है। उन्होंने लिखा कि इस तरह के वीडियो के द्वारा ये दिखाया जा रहा है कि अगर कोई महिला आपको रिजेक्ट करती है तो आप उस पर एसिड अटैक कर के इसका बदला लो, जो ग़लत है।

फैज़ल सिद्दीकी ने दीपिका पादुकोण की फ़िल्म ‘छपाक’ का समर्थन किया था, जिसमें एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं की व्यथा दिखाने का दावा किया गया था। दीपिका फिल्म के प्रमोशन के लिए जेएनयू गई थीं, इसीलिए फैज़ल ने ऐसा किया था। दीपिका ने भी एसिड अटैक को लेकर लोगों को वीडियो बनाने की सलाह दी थी, जिसके बाद उनकी आलोचना हुई थी। उनके टिक-टॉक चैलेन्ज को लोगों ने एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं के दर्द का मजाक बताया था।
कुछ लोगों ने इस वीडियो में एक्ट करने वाली युवती के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की माँग की और कहा कि एक महिला होने के नाते उसे तो कम से कम एसिड अटैक पीड़ितों की व्यथा के बारे में सोचना चाहिए था लेकिन फिर भी वो इस क्रूर अपराध के महिमामंडन में हाथ बँटा रही है। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर बग्गा ने राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा को टैग कर के कार्रवाई की माँग की। शर्मा ने कहा कि वो टिक-टॉक (TikTok) और पुलिस, दोनों के समक्ष इससे लेकर जाएँगी।

उत्तर प्रदेश : कानपुर : पुलिस पर तेजाब फेंका गया: 20 गिरफ्तार, 200 पर NSA के तहत मुकदमा

कानपुर, पुलिस और मेडिकल टीमकानपुर में मेडिकल और पुलिस टीम पर हमले के सिलसिले में अब तक 20 गिरफ्तारियॉं हुई है। 200 लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। हमला 29 अप्रैल को तब किया गया जब एक कोरोना पॉजिटिव के परिजनों को क्वारंटाइन कराने के लिए पुलिस और मेडिकल टीम उनके घर पहुॅंची थी।
डीएम ब्रह्मदेव तिवारी ने बताया कि हमले में शामिल 10 लोगों की तत्काल पहचान करते हुए गिरफ्तारी की गई। 10 और लोगों को आज(मई 1) गिरफ्तार किया गया है। सभी के खिलाफ में आपदा प्रबंधन एक्ट, महामारी अधिनियम, IPC की संगत धाराओं और NSA के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
न्यूज 18 हिंदी की खबर के मुताबिक हमलावरों ने पुलिस पर तेजाब से भरी काँच की बोतलें फेंकी थीं। हमले में कई पुलिसकर्मियों के कपड़े तेजाब से जल गए। उपद्रवियों ने मौके का फायदा उठाते हुए पुलिसकर्मियों पर बम और गोली भी चलाई थीं। इलाके में तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए फिलहाल पुलिस फोर्स तैनात है।

अमर उजाला की खबर के मुताबिक घटना के तुरंत बाद पुलिस ने मोहम्मद गुफरान, अशरफ अली, मोहम्मद आरिफ, साहिब, एहसान, इरशाद, मोहम्मद अकबर, अनीश बेग, शाहिद और ताहिर को गिरफ्तार कर नामजद किया था। एसपी पश्चिम डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि गुरुवार(अप्रैल 30) को आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद चौबेपुर में बनी अस्थायी जेल भेज दिया गया है। सभी का सैंपल भी लिया गया है। 14 दिन बाद दोबारा जाँच होगी। इसके बाद इन्हें जेल भेजा जाएगा।
बुधवार(अप्रैल 29) को कानपुर में कोरोना संक्रमण के हॉटस्पॉट चमनगंज में एक कोरोना संक्रमित मरीज के परिवार के सदस्यों को क्वारंटाइन कराने के लिए लेने पहुँची पुलिस और मेडिकल की टीम पर स्थानीय लोगों ने हमला कर दिया था। गुलाब घोषी मस्जिद के पास स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीम जैसे ही कोरोना पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आए लोगों को वहाँ से लेकर चली, ऐसे ही 50-60 लोग इसका विरोध करते हुए अपने घरों से बाहर निकल आए थे।
जब पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो पथराव शुरू कर दिया। पुलिस ने किसी तरह से स्वास्थ्य विभाग की टीम को मौके से निकाल दिया। इसके बाद कई थानों के फोर्स को बुलाकर पत्थरबाजों को खदेड़ गया था। इसके बाद घटना स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। इस हमले में दो पुलिसकर्मियों को चोटें भी आईं थी।
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इस घटना पर तुरंत सज्ञान लेते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि पुलिस और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करने वालों की जल्द पहचान की जाए। ऐसे लोगों के खिलाफ महामारी अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाए। इसके साथ ही सीएम योगी ने कहा था कि आरोपितों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) और गैंगस्टर एक्ट के तहत भी सख्त कार्रवाई की जाए। कोरोना योद्धाओं पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएँगे।

दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगे : एक सप्ताह पहले आ गई थीं ईंटें, ताहिर हुसैन के घर के पास 7 ट्रक पत्थर

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगा
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगे कोई अकस्मात घटने वाली घटना नहीं थी, बल्कि एक पूर्व नियोजित और पूरी तैयारी के साथ रची गई साजिश थी। दंगे के बाद से ही सबके मन में यही सवाल उठ रहा था कि अचानक उपद्रवियों के हाथ में तेजाब की थैलियाँ, पेट्रोल बम, ड्रम, ईंट-पत्थर और गुलेल आदि कहाँ से आए। अब धीरे-धीरे इस पर से पर्दा उठता जा रहा है और कई खुलासे हो रहे हैं।
इन सब खुलासों से CAA विरोध में हो रहे प्रदर्शनों और धरनों में सम्मिलित समस्त गैर-मुस्लिमों को अपनी आंखें खोलनी चाहिए। इन दंगों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विरोध की आड़ में इनका उद्देश्य देश में साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ कर अशांति फैलाना है। ये शांति के दुश्मन इन्ही गैर-मुस्लिमों के कंधे पर बैठ इन्ही की जाति और धर्म पर जानलेवा हमले कर रहे हैं।  
ताजा खुलासे में पता चला है कि खौफ और खून से सने इन दंगों को अंजाम देने के लिए ये ईंट-पत्थर एक सप्ताह पहले से ही इकट्ठा करना शुरू कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि इस हिंसा के लिए ट्रैक्टरों की मदद से एक हफ्ते पहले ही भट्ठों से ईंटे मँगवा ली गई थीं। सात ट्रक पत्थर तो करावल नगर के AAP पार्षद ताहिर हुसैन के घर के पास ही उठाए गए। इस दंगे के पीछे ताहिर हुसैन का बड़ा हाथ बताया जा रहा है। ताहिर पर आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा की मौत का भी आरोप है।
ईंट और पत्थरों का अम्बार 
ताहिर के घर के आगे लगे पत्थरों के ढेर को देखकर साफ लग रहा था कि इस दंगे के लिए जबरदस्त तैयारी की गई थी। उसके घर के आगे पत्थरों के इतने ढेर को देखकर निगमकर्मी भी सन्न रह गए, क्योंकि वहाँ पर इतना ज्यादा पत्थर था कि उससे एक मंजिला मकान बन सकता था। बता दें कि हिंसाग्रस्त इलाके मुस्तफाबाद, करावल नगर, चमन पार्क, शिव विहार सहित अन्य इलाकों में हिंसा के एक सप्ताह पहले से ही ट्रैक्टरों में भरकर ईंट मँगवाए गए और फिर इसके टुकड़े-टुकड़े किए गए ताकि इसे बोरियों में भरकर छतों पर रखा जा सके।
जो लोग अपने घरों पर ईंटों को एकत्र कर रहे थे, उनका कहना था कि उन्होंने अपने मकान निर्माण कार्यों के उद्देश्य से बड़ी संख्या में ईंटों का ऑर्डर दिया था। जबकि जाँच से पता चला है कि इन्हीं ईंटों को टुकड़ों में तोड़ा गया था और हिंसा के दौरान इस्तेमाल किया गया।
इसके साथ ही बताया जा रहा है कि जहाँं ईंटे रखी गई थीं, उन घरों में कोई निर्माण कार्य नहीं हो रहा है और जिन बोरियों को निर्माण कार्य के तथाकथित उद्देश्य के लिए वितरित किया गया था वे कई घरों की छतों पर खाली पाए गए। अब यह सवाल उठता है कि अचानक से ये ईंट के ढेर आधे कैसे हो गए? जिसका जवाब जाँच के बाद ही मिल सकेगा। पुलिस यह पता लगाने में जुट गई है कि आखिर क्यों इन ईंटों के हफ्ते भर पहले एकत्र किया गया था। पुलिस गाजियाबाद में स्थित उन ईंट भट्टों के मालिकों के संपर्क में है, जिनके पास हिंसा से एक हफ्ते पहले इन ईंटों का ऑर्डर मिला था।
गोली से अधिक घातक होती है गुलेल 
वहीं ताहिर हुसैन के घर के पास की बात करें तो यहाँ पर पत्थरों की कई इंच मोटी परत बन चुकी थी। बताया जा रहा है कि नजारा कुछ ऐसा था, मानो नई सड़क के निर्माण से पहले पत्थरों को तोड़कर बिछाया गया हो। जिसकी वजह से सफाईकर्मियों को भी पत्थरों को हटाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। ताहिर के घर के पास से ही निगमकर्मियों ने कई ट्रक रेत भी उठाया है। अधिकारी ने कहा कि दिल्ली में इससे पहले कभी इस तरह एक ही स्थान पर इतने पत्थरों का जखीरा देखने को नहीं मिला। जिन पत्थरों को उठाया गया, वे बहुत छोटे-छोटे टुकड़ों में मिले हैं। पत्थरों को देखकर ऐसा लग रहा था कि मानो किसी ने इन्हें मशीन से काटा हो।
दिल्ली हिंदू विरोधी दंगा, गुलेल
मैक्सिमम तबाही के लिए हर 10-15 घरों के बाद एक छत पर लगी थी गुलेल 
जैसे-जैसे दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की दिल्ली दंगों की जाँच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे बेहद चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। हिंसाग्रस्त इलाकों की जो तस्वीरें सामने आई हैं, वो चकित करने वाली हैं। उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे में उपद्रवियों ने तरह-तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया था, जिनमें सबसे बड़ा हथियार गुलेल रहा। कई इलाकों में भड़की हिंसा के दौरान गोली-बम से ज्यादा घातक गुलेल साबित हुई है। ये गुलेल छत, रिक्शे और अन्य जगहों पर रखकर इस्तेमाल किए गए। कई इलाकों की छतों पर गुलेल मिल रही है। 
हिंसा की जाँच कर रही दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की एसआईटी को हर 10-15 घरों के बाद एक घर की ऊँची छत पर गुलेल मिली है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जाँच के दौरान सैकड़ों की संख्या में गुलेल बरामद किया गया। सबसे ज्यादा गुलेल ओल्ड मुस्तफाबाद के घरों की छतों से बरामद किया गया। पुलिस का कहना है कि इन्हीं गुलेल की मदद से सबसे ज्यादा तबाही मचाई गई।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले में हुए हिन्दुओं के नरसंहार के खिलाफ शनिवार (29 फरवरी 2020) को ....
हिंसा फैलाने के लिए बड़े पैमाने पर गुलेल का इस्तेमाल किया गया है। इससे लोहे, पत्थरों, पेट्रोल बमों का इस्तेमाल किया गया। दिल्ली के शिव विहार इलाके में मिली गुलेल एक रिक्शे पर लोहे के एंगल को वेल्डिंग कर के बनाई गई थी। जिस तरह छोटी गुलेल से मामूली गिट्टियाँ चलाई जाती हैं, ठीक वैसे ही इस बड़ी गुलेल से पेट्रोल बम की बोतलें, बड़े-बड़े पत्थर या और भी चीजें फेंकी जा सकती हैं। यानी किसी भारी चीज को दूर तक फेंकने के लिए ये गुलेल बनाई गई, वो भी रिक्शे के ऊपर। इसे मोबाइल गुलेल कहा जाता है, जिसे जहाँ चाहे, वहाँ ले जाया जा सके और घटना को अंजाम दिया जा सके। इस बड़ी गुलेल से पेट्रोल बम की बोतलें, बड़े-बड़े पत्थर फेंके गए थे।

पुलिस पिकनिक नहीं मना रही, एसिड अटैक झेल रही है, एकतरफा हंगामा न हो: दिल्ली HC में तुषार मेहता

दिल्ली दंगा, हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार (फरवरी 26, 2020) को दिल्ली में हो रही हिंसा के संबंध में हर्ष मंदर द्वारा दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट में कपिल मिश्रा के बयान का विडियो भी चलाया गया। एसजी तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि अभी सभी विडियो की जाँच होनी बाकी है क्योंकि कई पक्षों की तरफ़ से कई सबूत मिले हैं। एसजी ने हाईकोर्ट में स्पष्ट किया कि उनके बयान का हिंसा की वारदातों से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। एसजी ने कहा कि सभी विडियो की जाँच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि ये मामला काफ़ी संवेदनशील है।
वहीं दिल्ली सरकार की तरफ से पेश राहुल मेहरा लगातार इस बात पर जोर देते रहे कि भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। उनका कहना था कि कार्रवाई होती रहेगी, जाँच के लिए एफआईआर तत्काल दर्ज हो। हर्ष मंदर की तरफ से जिरह करते हुए कॉलिन गोंस्लेव्स ने कहा कि राज्य का ये कहना कि एफआईआर बाद में दर्ज होगा, काफ़ी चिंता का विषय है, क्योंकि ये कोर्ट के सामने आने वाले सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक है।
कॉलिन ने हाईकोर्ट में दावा किया कि केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के बयान के बाद ही सब कुछ शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि ‘गोली मारो गद्दारों को’ वाला नारा काफ़ी लोकप्रिय बना दिया गया है और इसकी आड़ में हिंसा भड़क रही है। कॉलिन ने दावा किया कि अनुराग ठाकुर के एक बयान की वजह से 18 लोग मारे गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर जैसे नेताओं ने अपने समर्थकों को हथियार उठाने के लिए प्रेरित किया है। इसके बाद कॉलिन ने हाईकोर्ट में भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा का भी भाषण चलाया।


अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा और कपिल मिश्रा के बयानों से पूर्व जिन नेताओं और मौलानाओं ने नागरिकता संशोधक कानून के विरोध की आग में घी डालने का काम किया है, उसका भी संज्ञान जरुरी है। "fuck Hindutv", "हिन्दू तेरी कब्र खुदेगी", "मोदी तेरी कब्र खुदेगी" और "योगी तेरी कब्र खुदेगी" आदि उत्तेजक नारे किसके इशारे पर लगाए जा रहे थे? क्या ये अमन पसंद नारे हैं? जब इन नारों को लगाया जा रहा था, तब कोई 'गंगा-यमुना तहजीब' का स्वांग रच हिन्दुओं को भ्रमित करने वाला गैंग कहाँ था?   
कॉलिन यहीं नहीं रुके। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने केंद्र सरकार के सहयोग से लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा सरकार के ही गुंडे घूम-घूम कर हमले कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि सेना की तैनाती मुद्दा नहीं है, क्योंकि फिलहाल एफआईआर दर्ज होगा या नहीं, इस पर ही बहस होगा। जब एसजी तुषार मेहता ने दोनों पक्षों की तरफ़ से कई विडियो सर्कुलेट होने की बात कही तो कॉलिन भड़क गए। उन्होंने मेहता पर आरोप लगाया कि वो उन्हें धमका रहे हैं।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट में साफ़ कर दिया कि अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा और कपिल मिश्रा- तीनों के विडियो के आधार पर जानबूझ कर एकतरफा हंगामा किया जा रहा है। मेहता ने हाईकोर्ट से अपील करते हुए कहा कि पुलिस का मनोबल न गिराया जाए, उन्हें बदनाम करने की कोशिशों पर लगाम लगाई जाए।
एसजी ने कहा कि सही समय पर एफआईआर दर्ज किया जाएगा। इस पर जस्टिस मुरलीधर ने पूछा कि दिल्ली जल रही है, ऐसे में सही समय कब आएगा? एसजी मेहता ने जवाब दिया कि पुलिस कोई पिकनिक नहीं मना रही है, उन पर एसिड अटैक किए जा रहे हैं। तुषार मेहता ने कहा कि सभी पक्षों द्वारा घृणा भरे भाषण दिए जा रहे हैं और सब की जाँच की जाएगी। उन्होंने मुद्दों को बढ़ा-चढ़ा कर न पेश करने की अपील की।
छेनू और नासिर गैंग ने भड़काई दिल्ली में हिंसा
देश की राजधानी दिल्ली के उत्तरी-पूर्वी इलाकों में भड़के दंगों में एक नया खुलासा सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में 12 से अधिक लोगों की पहचान कर ली है। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुई हिंसा में दो गैंग इरफ़ान छेनू और नासिर गैंग के शामिल होने की बात भी की है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार शाम से दिल्ली में हुई हिंसा आगजनी, गोलीबारी और पथराव इन्हीं छेनू गैंग और नासिर गैंग का हाथ था। अब तक पुलिसकर्मियों द्वारा CCTV और वीडियो के आधार पर उस इलाके में सक्रीय गैंग के 12 से ज्यादा लोगों की पहचान की जा चुकी है। कैमरा में पहचाने गए लोग नासिर गैंग और इरफ़ान छेनू गैंग से बताए जा रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, बीते 3 दिनों में दिल्ली में 600 से ज्यादा राउंड फायरिंग हुई है। इसका मतलब हथियारों और गोलियों की कमी नहीं थी और ये गैंग ही इसकी सप्लाई कर रहे थे। पुलिस ने आशंका जताई है कि दिल्ली में हिंसा भड़काने और आगजनी करने के लिए छेनू गैंग को हायर किया गया था और इन गैंग्स की मदद से सुनियोजित साजिश के तहत हिंसा भड़काई गई।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दौरे की ठीक पहली शाम से ही उत्तर पूर्वी दिल्ली में नागरिकता कानून (CAA) को लेकर फैली हिंसा में अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। इस बीच एक हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल ने दंगाइयों की गोली लगने से अपनी जान गँवाई और आज सुबह IB के एक सहायक अधिकारी अंकित शर्मा की लाश दिल्ली के चाँदपुर में बरामद हुई। मृतक अंकित को दंगाइयों ने तब अपना निशाना बनाया, जब वो ड्यूटी से अपने घर लौट रहे थे।
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अरफा खानुम किस प्रकार प्लान बता रही है वो आपको गौर से सुनना चाहिए, इन दिनों कट्टरपंथी तत्व जो तिरंगा लहरा रहे है, राष्ट्रगान गा रहे है वो इनकी स्ट्रेटेजी का हिस्सा है, सुनिए क्या कहती है अरफा।
इस देश में काफी सारे सेक्युलर हिन्दू अरफा खानुम और इनके जैसे लोगों का मोदी विरोध में जमकर साथ दे रहे है, अरफा खानुम इन सेकुलरों के सामने तो भाईचारे, दलित, आदिवासी की बात करती है, पर मुस्लिम भीड़ के आगे वो पूरी प्लानिंग समझाती है।
अरफ़ा की इस बात से देश समस्त छद्दम धर्म-निरपेक्षों को अपनी आंखें खोलने चाहिए, जो सेकुलरिज्म का हर वक़्त राग अलापते रहते हैं। वास्तव में हिन्दुओं का छद्दम धर्म-निरपेक्षों द्वारा मूर्ख ही बनाया जा रहा, बल्कि ये लोग स्वयं गजवा हिन्द बनाने में इन कट्टरपंथी स्लीपर सैल्स की मदद कर, भारत को पुनः गुलाम बनाने की ओर धकेल रहे हैं, जो अरफ़ा के बयानों से स्पष्ट झलक रहा है।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर किये जा विवाद पर अक्सर अपने लेखों में स्पष्ट लिखा कि ....
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भारत में इस्लामी कट्टरवादी लगातार ‘गजवा-ए-हिन्द’ का सपना देखते हैं। वो चाहते हैं कि पूरी दुनिया में उनके मजहब का र.....

क्या फिल्म छपाक प्रदर्शित होगी?

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दीपिका पादुकोण की फ़िल्म छपाक अपनी रिलीज़ से पहले ही विवादों में घिरती जा रही है। इस फ़िल्म को लेकर सोशल मीडिया पर पहले से ही काफी हंगामा चल रहा है और अब एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की वकील अपर्णा भट्ट भी फ़िल्म निर्माताओं से नाराज़ दिख रही हैं। इसलिए उन्होंने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में फ़िल्म की रिलीज़ पर रोक लगाने की माँग की है।
अपनी इस याचिका में अपर्णा भट्ट ने कहा है कि उन्होंने एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल का केस वर्षों तक लड़ा, लेकिन इस फ़िल्म में मुझे क्रेडिट नहीं दिया गया है। अपर्णा का कहना है कि उन्होंने फ़िल्म छपाक की स्क्रिप्ट में भी काफी मदद की थी। उन्होंने कहा कि फ़िल्म के निर्माता ने उन्हें भरोसा दिया था कि उन्हें क्रेडिट दिया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। छपाक में अपर्णा को क्रेडिट नहीं दिया गया।
लेकिन फिल्म पर एक और विवाद होने की सम्भावना है। लक्ष्मी पर एसिड अटैक किया था नदीम खान ने, परन्तु चर्चा है फिल्म इस अपराध करने वाले को हिन्दू दिखाया गया है। यदि यह समाचार सत्य हुआ, हिन्दू-हितैषी वकील बेकसूर हिन्दुओं को अपमानित करने वाली इस फिल्म को प्रतिबंधित करने कोर्ट जा सकते हैं। ऐसे में वकील अपर्णा भट्ट पर भी प्रश्नचिन्ह लग सकता है, यदि अपराधी को मुसलमान की बजाए हिन्दू दिखाया गया है। इस विवाद की पुष्टि तो फिल्म प्रदर्शन के बाद ही हो पाएगी। 


फेसबुक पर लक्ष्मी की वकील अपर्णा भट्ट ने लिखा था कि कैसे वे इस बात से नाराज़ हैं कि फ़िल्म छपाक के मेकर्स ने उन्हें अपनी फ़िल्म में कोई क्रेडिट नहीं दिया है। उन्होंने ये भी कहा कि वे इस मामले में क़ानून की मदद लेंगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वे दीपिका पादुकोण और बाकी लोगों के बराबरी की नहीं हैं लेकिन इस मामले में वे चुप नहीं बैठेंगी।
लक्ष्मी अग्रवाल की वकील अपर्णा भट्ट ने फ़ेसबुक पर लिखा, “छपाक देखने के बाद की घटनाओं से काफ़ी परेशान हूँ। मुझे अपनी पहचान को बचाने और अपनी ईमानदारी को बनाए रखने के लिए क़ानूनी कार्रवाई करने को मजबूर किया गया। एक समय मैंने पटियाला हाउस कोर्ट में लक्ष्मी का प्रतिनिधित्व किया था… कल कोई मेरा प्रतिनिधित्व करेगा… जीवन की अजीब विडंबना है।” उन्होंने आगे दीपिका और फ़िल्म के निर्माताओं के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करने के बारे में लिखा है।
महिला वकील ने एक पोस्ट में लिखा, “मैं अपने सभी दोस्तों को धन्यवाद देती हूँ जिन्होंने मेरे योगदान को सराहा और टीम छपाक द्वारा ‘थैंक यू’ न कह पाने को चुनौती दी! मेरी शक्ति बॉलिवुड के इन ताकतवर निर्माताओं के बराबर नहीं है, लेकिन चुप रहने से अन्याय को और बढ़ावा मिलेगा। मैंने इस मामले को अगले स्तर पर ले जाने का फ़ैसला किया है। परिणाम का सामना करने के लिए तैयार हूँ।”
इससे पहले, 11 दिसंबर को अपर्णा भट ने फ़िल्म ‘छपाक’ के निर्माण के लिए ख़ुशी ज़ाहिर की थी। इसके लिए भी उन्होंने फेसबुक का सहारा लिया था। उन्होंने लिखा था कि इस केस के ज़रिए बीते 8 वर्षों के दौरान क़ानून में कई तरह के सकारात्मक बदलाव किए गए। इस दौरान, न्यूनतम मुआवज़ा (एसिड अटैक की पीड़िता के लिए) बढ़ा गया, निजी अस्पतालों में मुफ़्त इलाज सुनिश्चित हो गया और अंतत:, एसिड की बिक्री को भी नियंत्रित कर दिया गया। उन्होंने तब इस बात को लेकर ख़ुशी ज़ाहिर की थी कि बॉलीवुड में इस विषय पर फ़िल्म बनेगी। हालाँकि, फ़िल्म देखने के बाद, उन्होंने अपनी राय बदल दी है।
फ़िल्म छपाक के चर्चे हर तरफ़ हो रहे हैं। इसकी वजह है दीपिका पादुकोण का दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) जाकर विरोध प्रदर्शन में भाग लेना। सोशल मीडिया पर जहाँ कुछ लोग दीपिका की तारीफ़ कर रहे हैं तो वहीं कुछ छपाक को बॉयकॉट करने की बात भी कर रहे हैं।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार पाकिस्तान की सेना ने दीपिका पादुकोण का समर्थन किया है। बता दें कि दीपिका पादुकोण मंग.....
फ़िल्म छपाक की बात करें तो ये दिल्ली की एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की जिंदगी से प्रेरित है। फ़िल्म में दीपिका पादुकोण संग विक्रांत मैसी, अंकित बिष्ट संग अन्य एक्टर्स हैं। मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी फ़िल्म छपाक, 10 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज़ होनी है। दीपिका की यह फ़िल्म एसिड अटैक की शिकार लक्ष्मी अग्रवाल के जीवन और उनके संघर्ष की कहानी पर आधारित है।